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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 2 मार्च 2021

 

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. औपनिवेशिक संघर्ष, नए बुद्धिजीवियों का जन्म, पश्चिम के साथ वार्तालाप अथवा ‘प्रबोधन’ का दर्शन एवं आंतरिक मंथन की कठोर प्रक्रिया को आम तौर पर “बंगाल पुनर्जागरण’ कहा जाता है। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

‘बंगाल पुनर्जागरण’ को समझाते हुए एवं पुनर्जागरण की प्रक्रिया से सम्बद्ध महान व्यक्तियों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

विषय वस्तु:

उन्नीसवीं शताब्दी में पुनर्जागरण के प्रारम्भ होने के कारणों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन के प्रभाव के साथ-साथ राष्ट्रवाद के उद्भव में इसके योगदान को संक्षेप में बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

 2. दल-बदल विरोधी कानून ने राजनीतिक दलों के प्रति विधायकों की जवाबदेही को मुख्य रूप से कम किया है एवं यह सरकारों की स्थिरता को बनाए रखने में विफल रहा है। आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

देश में दलबदल विरोधी कानून का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

विषय वस्तु:

दलबदल विरोधी कानून का संक्षेप में वर्णन कीजिए। इसके महत्व पर प्रकाश डालिए एवं समझाइए कि इसका दुरुपयोग कैसे किया गया है।

दलबदल विरोधी कानून की कार्यप्रणाली पर चर्चा कीजिए। इससे संबंधित मुद्दों का भी वर्णन कीजिए।

राजनीतिक दल के अंदर विचार विमर्श एवं असंतोष के महत्व पर प्रकाश डालिए तथा स्वस्थ लोकतंत्र पर दलबदल विरोधी कानून के प्रभावों का उल्लेख कीजिए।

जहां भी आवश्यक हो, अपने पक्ष को स्पष्ट करने के लिए न्यायालय के प्रासंगिक निर्णयों को प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि प्रक्रिया को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया के प्रत्येक चरण के लिए एक निश्चित और उचित समय सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता है।

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

3. कानून निर्माण, सरकार के विधायी प्रस्तावों पर यांत्रिक मुहर नहीं होनी चाहिए, बल्कि संसद द्वारा उनकी सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए। संसदीय समितियों द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका के आलोक में इस कथन पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

संसद के अधिनियम या प्रक्रिया और आचरण के नियमों के प्रावधानों के अनुसार एक स्थायी और नियमित समिति का समय-समय पर गठन किया जाता है। संसदीय समितियां अनुच्छेद 105 (संसद सदस्यों के विशेषाधिकार) एवं अनुच्छेद 118 (अपनी प्रक्रिया एवं व्यवसाय के संचालन के लिए नियम बनाने का संसद का अधिकार) से अपना अधिकार प्राप्त करती हैं।

विषय वस्तु:

उत्तर के मुख्य भाग में बताइए कि ये समितियाँ विधायिका और कार्यकारी दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि संसदीय समितियाँ संसद की कार्यकुशलता, विशेषज्ञता को बढ़ाती हैं और नियंत्रण एवं संतुलन का कार्य करती हैं।

 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

 4. विकेन्द्रीकृत प्रणाली सादगी के सर्वोत्कृष्ट संरक्षक हैं। 15 वें वित्त आयोग ने असंतुलन को ठीक करने का अवसर गंवा दिया है एवं संघवाद पर राजनीतिक असंतोष को और अधिक गहरा किया है। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

15 वें वित्त आयोग की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

15 वें वित्त आयोग से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

वित्त आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।

रिपोर्ट की कुछ कमियों से सम्बंधित प्रमुख चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

 निष्कर्ष:

15 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के संबंध में एक संतुलित निर्णय प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

 5. ऋण माफी एक दीर्घकालिक समाधान के स्थान पर एक लोकलुभावन अल्पकालिक सुधार है। परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

ऐसे राज्य, जहाँ निर्वाचन होने वाले हों, उनमें ऋण माफी की घोषणा की लोकलुभावन प्रथाओं के बारे में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

समझाइए कि इस प्रकार के बिना शर्त वाली ऋण छूट एक बड़ी समस्या है क्योंकि वे एक नैतिक खतरा उत्पन्न करते हैं।

विश्लेषण कीजिए कि ऐसी कौन सी परिस्थितियाँ हैं, जहाँ ऋण माफी लाभदायक सिद्ध हो सकती है।

निष्कर्ष:

बिना शर्त ऋण छूट पर अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत कीजिए एवं समझाइए कि क्या प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, किसानों की समस्याओं को कम करने में सहायक है एवं निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

6. निम्नलिखित उद्धरण से आप क्या समझते हैं?  

“सोचने का मतलब है की आपकी आत्मा खुद से बातचीत कर रही है।” -प्लेटो   (150 शब्द)

 व्याख्या कीजिए- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

उद्धरण को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

सम्बंधित उद्धरण पर अरस्तु के विचारों को अपने शब्दों में प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

आज की भागदौड़ भरी एवं विचलित जीवन शैली में स्वयं से बात करने की प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

         

विषय: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

7. निम्नलिखित उद्धरण से आप क्या समझते हैं?

 “अज्ञानी व्यक्ति निर्णय सुनाता है, बुद्धिमान व्यक्ति प्रश्न पूछता है एवं चिंतन करता है”- अरस्तु   (150 शब्द)

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

उद्धरण को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

सम्बंधित उद्धरण पर अरस्तु के विचारों को अपने शब्दों प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

वर्तमान में विशेष रूप से बढ़ते सोशल मीडिया प्रेरित उपद्रव के सन्दर्भ में इसकी प्रासंगिकता का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

इसके समाधान की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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