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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 1 मार्च 2021

 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. 19-20 वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधारकों का लक्ष्य पश्चिमीकरण के स्थान पर आधुनिकीकरण करना था। क्या आप सहमत हैं? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: आधुनिक भारतीय इतिहास: स्पेक्ट्रम प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

19-20 वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधारों के बारे में संक्षेप में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

आधुनिकीकरण और पश्चिमीकरण के मध्य अंतर स्पष्ट कीजिए।

इस प्रकार के सामाजिक-धार्मिक सुधारों का उद्देश्य पश्चिमीकरण के स्थान पर आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना क्यों था? चर्चा कीजिए।

भारतीय समाज पर इन सुधारों के सकारात्मक प्रभावों का वर्णन कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि आधुनिक भारत के विकास में 19-20 वीं शताब्दी के सुधार आंदोलनों ने बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने समाज के लोकतांत्रीकरण, अंधविश्वास एवं घृणात्मक रिवाजों को हटाने, आत्मज्ञान के प्रसार एवं एक तर्कसंगत और आधुनिक दृष्टिकोण के विकास में विशेष भूमिका निभाई।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: प्रधानमंत्री।

 2. “सरकार, देश की स्वामी है एवं प्रधानमंत्री, सरकार का स्वामी है।” इस संदर्भ में, सरकार के प्रमुख के रूप में प्रधानमंत्री के कार्यों एवं शक्तियों पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

प्रधानमंत्री के कार्यों एवं शक्तियों पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि सरकार के संसदीय स्वरुप में प्रधानमंत्री की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण है कि पर्यवेक्षक इसे “प्रधानमंत्री की सरकार” कहना पसंद करते हैं।

 

विषय: कैबिनेट समितियां।

3. कैबिनेट समिति के प्रकार एवं उनकी संरचना की व्याख्या करते हुए उनके उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए। महत्वपूर्ण मुद्दों एवं सरकार की समग्र रणनीति से निपटने में कैबिनेट समितियां कैसे महत्वपूर्ण हैं? समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

कैबिनेट समितियाँ क्या हैं? संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए:

  1. कैबिनेट समितियों के प्रकार एवं उनकी संरचना।
  2. इन समितियों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

इन समितियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

 4. विश्व की परमाणु जवाबदेहिता में वृद्धि करने में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की भूमिका पर एक लेख लिखिए। साथ ही, इससे सम्बंधित चिंताओं पर भी प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।

 प्रकाश डालिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) को लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसमें से डोनाल्ड ट्रम्प ने 2018 में यू.एस. को बाहर निकाल लिया।

विश्व की परमाणु जवाबदेहिता में वृद्धि करने में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) कैसे सहायक है? स्पष्ट कीजिए।

इससे संबंधित चिंताओं पर प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

 5. अंतरिक्ष क्षेत्र के व्यावसायीकरण की पृष्ठभूमि में, भारत में अंतरिक्ष अन्वेषण में निजी क्षेत्र द्वारा सामना की जा रही सीमाओं की व्याख्या कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 व्याख्या कीजिए- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

कुछ प्रासंगिक तथ्यों को प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। जैसे – वर्तमान वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 360 बिलियन अमरीकी डॉलर आंकी गई है। भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का मूल्य 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का लगभग 2% है। भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र को अगले पाँच वर्षों में 50 बिलियन अमरीकी डॉलर के अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए लगभग 48% सीएजीआर की दर से वृद्धि करने की आवश्यकता है।

 विषय वस्तु:  

समझाइए कि भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में वाणिज्यिक गतिविधियों को बढ़ाने पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया है और इसके परिणामस्वरूप, अंतरिक्ष गतिविधियों में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में निजी क्षेत्र की भागीदारी न्यूनतम रही है। हालांकि, ग्राउंड ऑपरेशंस जैसे मिशन सपोर्ट, सैटेलाइट ब्रॉडबैंड गेटवे और 5G बैकहॉलिंग के व्यावसायीकरण की बहुत गुंजाइश है।

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में उपस्थित चुनौतियों को सूचीबद्ध कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: वस्तुनिष्ठता।

6. व्यक्तिगत विश्वास और मूल्य एक व्यक्तिपरक जिम्मेदारी को निर्धारित करते हैं, जबकि वस्तुनिष्ठ जिम्मेदारी को परिचालन वातावरण द्वारा निर्धारित किया जाता है एवं उसे आकर दिया जाता है। प्रशासनिक निर्णयों में वस्तुनिष्ठता के लक्ष्य को साकार करने के लिए दोनों के मध्य सामंजस्य अनिवार्य है। विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजिएऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

वस्तुनिष्ठता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

प्रशासनिक निर्णय निर्धारण में वस्तुनिष्ठता की आवश्यकता क्यों होती है? समझाइए। 

इसके घटकों पर विस्तृत चर्चा कीजिए।

इससे सम्बंधित प्रासंगिक उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

वस्तुनिष्ठता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय भी सुझाइए।

निष्कर्ष:

इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

         

विषय: केस स्टडी।

7. मानव नैदानिक ​​परीक्षणों के विनियमन एवं प्रक्रिया भिन्न-भिन्न राष्ट्रों में भिन्न-भिन्न होती है। एक उभरते हुए जैव चिकित्सा क्षेत्र के रूप में स्टेम सेल अनुसंधान के क्षेत्र में मानव परीक्षणों के लिए अनुमोदन की आवश्यकता है एवं यह अनेक चुनौतियों का सामना करता है। आप वैज्ञानिकों की एक टीम के प्रमुख हैं, जिन्होंने एक नवीन उत्तक अभियांत्रिकी प्रणाली विकसित की है, जो हृदय के ऊतकों को पुनर्जीवित करने का एक आशाजनक साधन प्रतीत होता है। इस प्रणाली का परीक्षण जानवरों पर पहले ही किया जा चुका है एवं इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। यदि यह दवा तुरंत उपलब्ध करा दी जाती है, तो महत्वपूर्ण श्रवण रोगों से पीड़ित लाखों लोगों को अत्यधिक लाभ प्राप्त होगा। हालाँकि, इसे व्यवसायिक करने से पहले आपको मानव नैदानिक ​​परीक्षणों का संचालन करने की आवश्यकता है। यह भी ज्ञात है कि देश में उपस्थित कठोर विनियामक वातावरण का अर्थ यह होगा कि मानव परीक्षणों और अंतिम अनुमोदन को व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होने में अनेक वर्ष लग जाएंगे। वहीँ दूसरी ओर, अनेक गरीब देशों में नैदानिक ​​परीक्षणों का विनियमन कमजोर है एवं वहां त्वरित अनुमोदन संभव है। आपके कई प्रतियोगी भी इन देशों में मानव परीक्षणों का सहारा लेते हैं, अक्सर त्वरित अनुमोदन प्राप्त करने के लिए  अधिकारियों को रिश्वत देते हैं। इस स्थिति को देखते हुए, निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (250 शब्द)

 (a) नैदानिक ​​परीक्षणों के दौरान उत्पन्न होने वाले नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।

 (b) उपरोक्त स्थिति को देखते हुए, क्या आप मानव परीक्षणों को किसी ऐसे तीसरे देश में स्थानांतरित करना पसंद करेंगे, जहाँ विनियमन शिथिल हैं? समझाइए एवं अपने उत्तर के समर्थन में कारण भी स्पष्ट कीजिए।

सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

उत्तरकीसंरचना:

परिचय:

इस मामले में शामिल प्रमुख मुद्दों की पहचान करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषयवस्तु:

उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं पर चर्चा कीजिए:

  1. मानव नैदानिक परीक्षणों के बारे में संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए एवं नैदानिक परीक्षणों में शामिल नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।
  2. प्रयोगशाला के स्थान को स्थानांतरित करने से सम्बंधित गुण एवं दोष दोनों पर चर्चा कीजिए एवं अपने देश से प्रयोगशाला को स्थानांतरित करने पर अपना पक्ष प्रस्तुत कीजिए।
  3. नैतिक संघर्षों को कम करने एवं नवीन दवाओं की अनुमोदन प्रक्रिया को गति देने के लिए आवश्यक मानक प्रक्रिया का ढांचा प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

इसके समाधान की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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