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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 02 March 2021

 

विषयसूची 

सामान्य अध्ययन-I

1. ‘अवसर सूचकांक’ 2021 रिपोर्ट

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अमेरिकी राष्ट्रपति का वर्ष 2021 व्यापार एजेंडा और वार्षिक रिपोर्ट 2020

 

सामान्य अध्ययन-III

1. स्पेक्ट्रम नीलामी

2. चीनी साइबर हमला नाकाम: विद्युत् मंत्रालय

3. व्हाट्सएप की नई नीति परीक्षणाधीन है: सरकार

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी से पीड़िता लडकी से विवाह करने के लिए पूछा

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

अवसर सूचकांक’ 2021 रिपोर्ट


(‘The Opportunity Index 2021’ report)

संदर्भ:

यह एक ऑनलाइन प्रोफेशनल नेटवर्क लिंक्डइन (LinkedIn) द्वारा की गयी एक नई रिपोर्ट है।

जनवरी में किए गए इस सर्वेक्षण में, एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र में 10,000 से अधिक उत्तरदाताओं ने भाग लिया था। सर्वेक्षण में भारत के 2,285 उत्तरदाताओं को शामिल किया गया।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. प्रति 10 महिलाओं में से 9 महिलाएं अथवा 89 प्रतिशत महिलाएं कोरोनोवायरस महामारी से नकारात्मक रूप से प्रभावित हुईं।
  2. भारत में लगभग 85%, या प्रति पांच में से चार कामकाजी महिलाओं का मानना ​​है कि उन्हें अपने लिंग के कारण वेतन-वृद्धि, पदोन्नति, या काम के अवसरों से वंचित होना पड़ा है। एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र में इस प्रकार की महिलाओं का औसत 60% है।
  3. एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र की तुलना में, भारत में अधिक महिलाओं को आजीविका विकास पर लैंगिक पक्षपात का सामना करना पड़ा है।

महिलाओं के समक्ष चुनौतियां:

  1. समय का अभाव तथा पारिवारिक देखभाल में पक्षपात।
  2. अवसर हासिल करने में लैंगिक बाधाएं।
  3. नेटवर्क के माध्यम से मार्गदर्शन का अभाव।
  4. घरेलू जिम्मेदारियों के कारण कार्यस्थल भेदभाव।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘अवसर सूचकांक’ 2021 की रिपोर्ट किसके द्वारा जारी की जाती है?
  2. लैंगिक अनुपात- भारत।
  3. कार्यबल में महिलाएं- संक्षिप्त अवलोकन।

मेंस लिंक:

एशिया प्रशांत (APAC) क्षेत्र की तुलना में भारत में अधिक महिलाओं ने आजीविका विकास पर लैंगिक प्रभाव का अनुभव किया है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिकी राष्ट्रपति का वर्ष 2021 व्यापार एजेंडा और वार्षिक रिपोर्ट 2020


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (U.S. Trade Representative- USTR) द्वारा अमेरिकी कांग्रेस को एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा की गई महत्वपूर्ण टिप्पणियां:

  1. भारत का बड़ा बाजार, आर्थिक वृद्धि और विकास की ओर अग्रसर उसकी अर्थव्यवस्था जहां उसे अमेरिकी निर्यातकों के लिए आवश्यक बाजार बनाती है, वहीं दूसरी तरफ, भारत में सामान्य तौर पर व्यापार पर प्रतिबंध लगाने वाली नीतियों के चलते द्विपक्षीय व्यापार की संभावनाओं को कम किया है।
  2. भारत में हाल में शुरू किया गया ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों के समक्ष आने वाली चुनौतियों का प्रतीक बन गया है
  3. रिपोर्ट में ट्रम्प प्रशासन द्वारा जून 2019 में सामान्यीकृत वरीयता प्रणाली (Generalised System of Preferences GSP) कार्यक्रम के तहत भारत के अधिमान्य व्यापार की स्थिति तथा वर्ष 2020 के दौरान एक संक्षिप्त व्यापार समझौता (“पैकेज”) के लिए चर्चा की शुरुआत करने के संबंध में विवरण दिया गया है।

‘मेक इन इंडिया’ अभियान के बारे में:

  • प्रधान मंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में, इस अभियान का आरंभ भारत में उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू किया था।
  • मेक इन इंडिया’ मुख्यत: निर्माण क्षेत्र पर केंद्रित है लेकिन इसका उद्देश्य देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना भी है।
  • इसका दृष्टिकोण निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाना, आधुनिक और कुशल बुनियादी संरचना, विदेशी निवेश के लिए नये क्षेत्रों को खोलना और सरकार एवं उद्योग के बीच एक साझेदारी का निर्माण करना है।

निर्माण को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित लक्ष्य:

  1. मध्यम अवधि में निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर में प्रति वर्ष 12-14% वृद्धि करने का उद्देश्य
  2. 2022 (संशोधित 2025) तक देश के सकल घरेलू उत्पाद में विनिर्माण की हिस्सेदारी में 15-16% की वृद्धि।
  3. विनिर्माण क्षेत्र में वर्ष 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना।
  4. समावेशी विकास के लिए ग्रामीण प्रवासियों और शहरी गरीबों के बीच उचित कौशल का निर्माण।
  5. घरेलू मूल्य संवर्धन और निर्माण में तकनीकी गहराई में वृद्धि।
  6. भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
  7. विशेष रूप से पर्यावरण के संबंध में विकास की स्थिरता सुनिश्चित करना।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विज्ञान और प्रौद्योगिकी- रोजमर्रा के जीवन में विकास और उनके अनुप्रयोग और प्रभाव विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक विकसित करना।

स्पेक्ट्रम नीलामी’


(What are the spectrum auctions?)

संदर्भ:

सरकार के लिए, स्पेक्ट्रम नीलामी के पहले दिन 77,146 करोड़ रुपये की बोली प्राप्त हुई है, जोकि अपेक्षित अनुमान से बेहतर थी। सरकार ने 45,000 करोड़ रुपये की बोली का अनुमान लगाया था।

पृष्ठभूमि:

कुल 3.92 लाख करोड़ रुपये मूल्य के स्पेक्ट्रम को नीलामी के लिए रखा गया है, जिसमे 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज के 7 फ्रीक्वेंसी बैंड में स्पेक्ट्रम की नीलामी जारी है।

‘स्पेक्ट्रम नीलामी’ क्या हैं?

  • सेलफोन और तार की लाइन वाले टेलीफोन जैसे उपकरणों को परस्पर एक दूसरे से जुड़ने के लिए संकेतों (Signals) की आवश्यकता होती है। ये सिग्नल वायु-तरंगो (Airwaves) पर कार्य करते हैं तथा बाधा-रहित संचरण के लिए इन संकेतों को निर्दिष्ट आवृत्तियों पर भेजा जाता है।
  • देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी परिसंपत्तियों पर केंद्र सरकार का स्वामित्व होता है, इसमें वायुतरंगे एयरवेव भी शामिल होती हैं।
  • सेलफोन, वायरलाइन टेलीफोन और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ ही समय-समय पर इन संकेतों को अधिक स्थान दिए जाने की आवश्यकता होती है।
  • इन संकेतो के प्रसारण हेतु अवसंरचना निर्माण करने की इच्छुक कंपनियों के लिए इन परिसंपत्तियों को बेचने हेतु केंद्र सरकार दूरसंचार विभाग (DoT) के माध्यम से समय-समय पर वायुतरंगों की नीलामी करती है।
  • इन वायुतरंगों को स्पेक्ट्रम कहा जाता है। ये स्पेक्ट्रम अलग-अलग आवृत्तियों वाले बैंड्स में उप-विभाजित होते हैं।इन सभी वायुतरंगों को एक निश्चित अवधि के लिए बेचा जाता है। आम तौर पर यह अवधि 20 वर्ष निर्धारित की जाती है, तथा अवधि पूरी होने के बाद इनकी वैधता समाप्त हो जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्पेक्ट्रम नीलामी क्या हैं?
  2. बिक्री के उद्देश्य
  3. नई स्पेक्ट्रम नीलामी की आवश्यकता
  4. नीलामी में कौन भाग ले सकता है?

मेंस लिंक:

भारत में स्पेक्ट्रम नीलामी एक खरीदार की बाजार में परिवर्तित हो गई है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

चीनी साइबर हमला नाकाम: विद्युत् मंत्रालय


संदर्भ:

हाल ही में, कुछ ‘राज्य द्वारा प्रायोजित’ चीनी हैकर समूहों ने विभिन्न भारतीय विद्युत् केंद्रों को निशाना बनाया था।

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि:

  • साइबर हमले से पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (POSOCO) के कामकाज में कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
  • इन घटनाओं से किसी प्रकार की डेटा सेंधमारी / डेटा क्षति का पता नहीं चला है।
  • विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त किसी भी घटना / सलाह पर POSOCO द्वारा संचालित सभी नियंत्रण केंद्रों पर मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना पर अमेरिकी रिपोर्ट:

अमेरिकी साइबर सुरक्षा और खुफिया फर्म के अनुसार:

  • पिछली मई में भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव में हुई बढ़ोत्तरी के परिणामस्वरूप जून के मध्य में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ एक घातक झड़प हुई, इसी दौरान चीन द्वारा प्रायोजित हैकरों ने संभवतः भारतीय पावर ग्रिड तथा समुद्री बंदरगाहों पर ‘मैलवेयर’ तैनात कर दिए गए।
  • मुंबई में 12 अक्टूबर की ग्रिड विफलता का कारण यही चीनी मैलवेयर हो सकते हैं।
  • हाल ही में, काफी मात्रा में इन मैलवेयर को नष्ट किये जाने के बाद भी, अभी भी जारी घुसपैठ के कुछ सबूत प्राप्त हुए हैं।

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साइबर अपराधों के बारे में जागरूकता हेतु सरकार द्वारा उठाए गए अन्य कदम:

  1. देश में साइबर अपराध से संबंधित मुद्दों को व्यापक और समन्वित तरीके से हल करने हेतु भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (Indian Cyber Crime Coordination Centre I4C) का गठन करने की योजना बनायी गई है।
  2. देश में महत्वपूर्ण सूचना ढाँचे की सुरक्षा हेतु ‘राष्ट्रीय अति-संवेदनशील सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र’ (National Critical Information Infrastructure Protection CentreNCIIPC) की स्थापना।
  3. डिजिटल सेवा प्रदान करने वाले सभी संगठनों के लिए साइबर सुरक्षा की घटनाओं को CERT-In में शीघ्रता से रिपोर्ट करने के लिए अनिवार्य किया गया है।
  4. दुर्भावनापूर्ण प्रोग्राम और फ्री टूल्स का पता लगाने और हटाने के लिए साइबर स्वच्छता केंद्र (Cyber Swachhta Kendra) शुरू किया गया है।
  5. साइबर हमलों और साइबर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संकट प्रबंधन योजना (Crisis Management Plan) का निरूपण।

अन्य उपाय

  • नियमित रूप से अलर्ट / सलाह जारी करना
  • कानून प्रवर्तन कर्मियों / अभियोजकों / न्यायिक अधिकारियों हेतु क्षमता निर्माण / प्रशिक्षण
  • साइबर फोरेंसिक सुविधाओं में सुधार करना।
  • जांच में तेजी।

अंत में, पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ भारत के संविधान के अनुसार राज्य के विषय हैं। राज्य / संघ शासित प्रदेश अपनी कानून प्रवर्तन मशीनरी के माध्यम से अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के बारे में
  2. राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना सुरक्षा केंद्र (NCIIPC) के बारे में
  3. CERT- In
  4. साइबर स्वच्छ केंद्र

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

व्हाट्सएप की नई नीति परीक्षणाधीन है: सरकार


संदर्भ:

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को को सूचित किया है, कि 15 मई से प्रभावी होने जा रही ‘व्हाट्सऐप’ की नयी निजता नीति की उच्चतम स्तर पर पड़ताल की जा रही है।

संबंधित प्रकरण:

अदालत में व्हाट्सएप द्वारा घोषित याचिका के खिलाफ दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई जारी है। याचिका में दावा किया गया है, कि व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति संविधान के द्वारा प्रद्द्त्त ‘निजता के अधिकार’ का उल्लंघन करती है।

  • याचिका में कहा गया है कि, नई नीति “वस्तुतः सरकार की निगरानी के बगैर, किसी व्यक्ति की ऑनलाइन गतिविधियों के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी प्रदान करती है”।
  • याचिका में, व्हाट्सएप द्वारा जारी निजता नीति में इस तरह के बदलाव को सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गयी है।

नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. तीसरे पक्ष की सेवाओं के साथ जानकारी साझा करना: जब उपयोगकर्ता, तीसरे-पक्ष की सेवाओं या व्हाट्सएप सेवाओं के साथ एकीकृत फेसबुक कंपनी के अन्य उत्पादों पर यकीन करते हैं, तो उपयोगकर्ता तथा साझा करने वाले अन्य लोगों के बारे में उन तीसरे-पक्ष की सेवाओं को जानकारी हासिल हो सकती है।
  2. हार्डवेयर की जानकारी: व्हाट्सएप, उपयोगकर्ता के उपकरणों के बैटरी स्तर, सिग्नल शक्ति, ऐप संस्करण, ब्राउज़र जानकारी, मोबाइल नेटवर्क, कनेक्शन जानकारी (फोन नंबर, मोबाइल ऑपरेटर या आईएसपी सहित) आदि एकत्र करता है।
  3. अकाउंट डिलीट करना: यदि कोई उपयोगकर्ता, ऐप में दी गयी प्रक्रिया का उपयोग किए बिना अपने डिवाइस से व्हाट्सएप ऐप को हटा देता है, तो उस उपयोगकर्ता की जानकारी प्लेटफ़ॉर्म में संग्रहीत रहेगी।
  4. डेटा स्टोरेज: व्हाट्सएप कहता है कि वह फेसबुक की वैश्विक अवसंरचनाओं और डेटा केंद्रों का उपयोग करता है। यह भी कहा गया है कि कुछ मामलों में, उपयोगकर्ताओं के डेटा को संयुक्त राज्य अमेरिका अथवा जिन स्थानों पर फेसबुक की सहयोगी कंपनियां है, वहां स्थानांतरित किया जा सकता है।
  5. अवस्थिति: भले ही कोई उपयोगकर्ता अपनी अवस्थिति संबंधी सुविधाओं का उपयोग नहीं करता है, तो भी व्हाट्सएप उसकी सामान्य अवस्थिति (शहर, देश) का अनुमान लगाने के लिए आईपी पते और फोन नंबर क्षेत्र कोड जैसी अन्य जानकारी एकत्र करता है।
  6. भुगतान सेवा: व्हाट्सएप का कहना है कि अगर कोई भी उपयोगकर्ता अपनी भुगतान सेवाओं का उपयोग करता है तो वे आपके बारे में अतिरिक्त जानकारी संसाधित करेंगे, जिसमें भुगतान खाता और लेनदेन की जानकारी शामिल है।

संबंधित चिंताएँ:

  • व्हाट्सएप की नई नीति, डेटा संरक्षण विधेयक, 2019’ को आधार प्रदान करने वाली ‘श्रीकृष्ण समिति’ की रिपोर्ट की सिफारिशों की अवहेलना करती है।
  • डेटा स्थानीयकरण के सिद्धांत का उद्देश्य निजी डेटा का देश के बाहर हस्तांतरण पर रोक लगाना है, इससे व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति के साथ विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • नई गोपनीयता नीति के लागू होने पर व्हाट्सएप किसी उपयोगकर्ता का मेटाडेटा भी साझा कर सकता है, अर्थात, वार्तालाप के मूल संदेशों के आलावा सबकुछ साझा किया जा सकता है।
  • यदि उपयोगकर्त्ता व्हाट्सएप की अद्यतन गोपनीयता नीति से असहमत हैं, तो इस नई नीति लागू होने के बाद उनके पास व्हाट्सएप छोड़ना होगा।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- IV


 उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी से पीड़िता लडकी से विवाह करने के लिए पूछा:


हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने बालिग लड़की से बार-बार दुष्कर्म के आरोपी राज्य सरकार के अधीन कार्यरत एक सरकारी कर्मचारी से पूछा कि ‘क्या वह लड़की से शादी करने को तैयार है?’

उस आदमी ने यह कहते हुए मना कर दिया कि वह शादीशुदा है। इसके बाद, पीठ ने उसे नियमित जमानत के लिए संबंधित अदालत का रुख करने को कहा है।

संबंधित प्रकरण:

शीर्ष अदालत, महाराष्ट्र राज्य बिजली उत्पादन कंपनी में कार्यरत एक टेक्नीशियन द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी को इसी मामले में पिछले साल जनवरी में ट्रायल कोर्ट ने अग्रिम जमानत दी थी, जिसे बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा 5 फरवरी को रद्द कर दिया गया था। आरोपी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया था।

  • इस व्यक्ति को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण संबंधी अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences – POCSO Act) के तहत अपराधों के लिए भी आरोपित किया गया है।
  • आरोपी पहले लड़की से शादी करना चाहता था लेकिन उसने (लड़की ने) मना कर दिया, तो उसने किसी दूसरी लड़की से शादी कर ली।

कोर्ट ने क्या कहा है?

‘आरोपी को लड़की को फुसलाने और दुष्कर्म करने से पहले यह सब विचार करना चाहिए था। आपको पता है कि आप एक सरकारी सेवक हैं।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


क्रय प्रबंधक सूचकांक (PMI)

पीएमआई या क्रय प्रबंधक सूचकांक (Purchasing Managers’ Index- PMI), विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों, दोनों में व्यावसायिक गतिविधियों का एक संकेतक है।

  • यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है। इसमें उत्तरदाताओं से कुछ प्रमुख व्यावसायिक कारकों के प्रति पिछले महीने से उसकी धारणा में बदलाव के संबंध में सवाल पूछे जाते हैं।
  • यह विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के लिए अलग-अलग गणना की जाती है और फिर एक समग्र सूचकांक का निर्माण किया जाता है।
  • 50 से ऊपर का आँकड़ा व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार को दर्शाता है, जबकि 50 से नीचे का आँकड़ा संकुचन (गिरावट) को प्रदर्शित करता है।
  • मध्य-बिंदु से अधिक अंतर, अधिक विस्तार या संकुचन का सकेतक होता है।

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