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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. इस बार अनिवासी भारतीयों के लिए कोई डाक मतपत्र नहीं: निर्वाचन आयोग

2. तमिलनाडु की परियोजना के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील

3. भारत और पाकिस्तान ‘2003 के युद्धविराम समझौते’ का पालन करने पर सहमत

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत ‘आर्थिक मंदी’ से बाहर

2. मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण

3. ‘विवाद से विश्वास’ योजना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. एशिया आर्थिक वार्ता (AED)

2. आईएनएस उत्कर्ष

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

इस बार अनिवासी भारतीयों के लिए कोई डाक मतपत्र नहीं: निर्वाचन आयोग


संदर्भ:

हाल ही में, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि, असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल विधानसभाओं में होने वाले आगामी चुनावों के लिए अनिवासी भारतीयों को डाक मतपत्र (Postal Ballots) सुविधा नहीं प्रदान की जाएगी।

पृष्ठभूमि:

पिछले वर्ष 27 नवंबर को, भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission- EC) द्वारा अप्रवासी भारतीयों (NRIs) तक डाक मतपत्र (Postal Ballot)  सुविधा का विस्तार करने संबंध में ‘कानून मंत्रालय’ के लिए एक प्रस्ताव दिया गया था।

निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव को आगे विदेश मंत्रालय के पास भेज दिया गया। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस विषय पर सभी हितधारकों की एक विस्तृत बैठक आयोजित किये जाने की राय दी है।

इलेक्ट्रानिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल पोस्टल बैलट सिस्टम (ETPBS) किस प्रकार कार्य करता है?

  1. ETPBS के तहत, सेवा मतदाता अथवा विदेशी मतदाता के लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से डाक मतपत्र भेजा जाता है।
  2. मतदाता, डाक मतपत्र को डाउनलोड करके, एक विशिष्ट लिफाफे में अपने निर्वाचन क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर को वापस भेज देता है।
  3. डाक मतपत्र, मतगणना के दिन सुबह 8 बजे तक रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंच जाना चाहिए। वोटों की गणना, सुबह 8 बजे से डाक मतपत्रों की गिनती के साथ शुरू होती है।

संशोधन:

विदेशी मतदाताओं को मतदान सुविधा का विस्तार करने के लिए, सरकार को केवल चुनाव नियम 1961 में संशोधन करने की आवश्यकता है, और इसके लिए संसद की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

अप्रवासी भारतीय नागरिकों के लिए मतदान की वर्तमान प्रक्रिया:

  • प्रवासी भारतीयों के लिए मतदान अधिकार, वर्ष 2011 में, जन प्रतिनिधित्व कानून 1950 में संशोधन के माध्यम से लागू किये गए थे।
  • प्रवासी भारतीय (NRI) अपने पासपोर्ट में उल्लिखित निवास स्थान संबंधी निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कर सकता है।
  • वे केवल व्यक्तिगत रूप से मतदान कर सकते हैं, और उन्हें अपनी पहचान साबित करने हेतु अपना पासपोर्ट की मूल प्रति पेश करनी होगी।

अप्रवासी मतदाताओं की वर्तमान संख्या:

संयुक्त राष्ट्र की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की प्रवासी जनसंख्या 16 मिलियन है और यह विश्व में सर्वाधिक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘डाक मतपत्र’ के बारे में
  2. ‘डाक मतपत्र’ के माध्यम मतदान करने के पात्र
  3. अप्रवासी भारतीयों द्वारा किस प्रकार मतदान किया जाता है?

मेंस लिंक:

क्या प्रवासी भारतीयों को डाक मतपत्रों के माध्यम से विदेशों से मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

तमिलनाडु की परियोजना के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील


संदर्भ:

तमिलनाडु की एक महत्वाकांक्षी ‘कावेरी-वेल्लारु-वैगई-गुंडर नदी-जोड़ो परियोजना’ के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ने हेतु कर्नाटक द्वारा तैयारी की जा रही है।

262 किलोमीटर लंबी इस नदी-जोड़ो परियोजना द्वारा बाढ़ के दौरान 6,300 क्यूबिक फीट अधिशेष जल का उपयोग अन्य कार्यों में किया जाएगा, तथा यह राज्य के दक्षिणी जिलों में पीने के पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए भूजल स्तर बढ़ाएगा।

विवाद का विषय:

तमिलनाडु द्वारा 45 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (Tmcft) अधिशेष जल का उपयोग करने की कोशिश कर रहा है।

  • कर्नाटक सरकार का कहना है, “यह परियोजना अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम के अनुरूप नहीं है।
  • अधिनियम के अनुसार, अधिशेष जल का भी बंटवारा होना चाहिए और इसका निर्णय, न्यायाधिकरण द्वारा किया जाएगा।

अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956:

(Inter-State River Water Disputes Act, 1956)

इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी राज्य सरकार द्वारा किसी जल विवाद के संबंध में अनुरोध किया जाता है, और केंद्र सरकार को ऐसा लगता है कि वार्ता से विवाद का निवारण नहीं हो सकता है, तो जल विवाद समाधान के लिए एक जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया जाता है।

  • इस अधिनियम में ‘सरकारिया आयोग’ की प्रमुख सिफारिशों को शामिल करने हेतु वर्ष 2002 में संशोधन किया गया था।
  • संशोधित अधिनयम में, जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन करने हेतु एक वर्ष का समय तथा संबंधित विवाद पर निर्णय देने हेतु तीन वर्ष की समय सीमा निर्धारित की गयी थी।

अंतरराज्यीय नदी जल विवाद से संबंधित प्रावधान:

राज्य सूची की प्रविष्टि 17, पानी से संबंधित विषयों अर्थात, जल-आपूर्ति, सिंचाई, नहर, जल निकासी, तटबंधों, जल भंडारण और जल शक्ति से संबंधित है।

संघ सूची की प्रविष्टि 56, केंद्र सरकार को, लोकहित में इष्टानुकूल संसद द्वारा निर्धारित सीमा तक, अंतर-राज्यीय नदियों के विनियमन और विकास का अधिकार प्रदान करती हैं।

अनुच्छेद 262: जल-संबंधी विवादों के मामले में इसमें निम्नलिखित प्रावधान किये गए हैं:

  1. धारा 1: संसद, विधि द्वारा, किसी अंतरराज्यिक नदी या नदी-दून के या उसमें जल के प्रयोग, वितरण या नियंत्रण के संबंध में किसी विवाद या परिवाद के न्यायनिर्णयन के लिए उपबंध कर सकेगी।
  2. धारा 2: संसद, कानून द्वारा यह प्रावधान कर सकती है कि उच्चतम न्यायालय या कोई अन्य न्यायालय उपरोक्त उल्लिखित किसी विवाद या परिवाद के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग नहीं करेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कावेरी नदी- उद्गम, बेसिन, सहायक नदियाँ और महत्वपूर्ण परियोजनाएँ।
  2. अनुच्छेद 262
  3. अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के प्रमुख प्रावधान
  4. कावेरी-वेल्लारु-वैगई-गुंडर नदी-जोड़ो परियोजना’ का अवलोकन

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

भारत और पाकिस्तान ‘2003 के युद्धविराम समझौते’ का पालन करने पर सहमत


संदर्भ:

हाल ही में, भारत और पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 2003 के युद्धविराम समझौते का कड़ाई से पालन करने के संबंध में एक संयुक्त बयान जारी किया गया है।

2003 के युद्धविराम समझौते के बारे में:

(2003 ceasefire agreement)

कारगिल युद्ध के चार साल बाद, दोनों देशों के बीच नवंबर 2003 युद्धविराम समझौता हुआ था।

  • 26 नवंबर, 2003 को यह युद्धविराम समझौता, भारत-पाकिस्तान के मध्य पूरी सीमा पर लागू किया गया था।
  • इस समझौते के तहत, श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद और पुंछ-रावलकोट मार्गो पर आवागमन शुरू किया गया था, जिससे पिछले छह दशकों में पहली बार कश्मीर के दोनों भागों को जोड़ने वाले वाली बस और ट्रक सेवाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ और सीमा-पार परस्पर संपर्को, आदान-प्रदान, यात्रा और व्यापार को भी प्रोत्साहन दिया गया।
  • इस युद्धविराम से, पाकिस्तान से कश्मीर में आतंकवादियों की होने वाली घुसपैठ को रोकने हेतु, भारत को नियंत्रण रेखा (LoC) के नजदीक एक बाड़ का निर्माण पूरा करने का अवसर मिला। यह परियोजना, कुछ दशक पहले शुरू की गयी थी, लेकिन पाकिस्तान की ओर से होने वाली गोलाबारी की वजह से लंबित पड़ी हुई थी।

इस युद्धविराम के जारी रहने संबंधी संभावनाएं:

भारत और पाकिस्तान द्वारा युद्धविराम पर सहमत होने तथा नियंत्रण रेखा पर रहने वाले नागरिकों के जीवन को आसान बनाने हेतु ‘शांति’ के लिए एक मौका देने के लिए यह पहला अवसर नहीं है।

  • चूँकि, 2003 के युद्धविराम समझौते से नियंत्रण रेखा पर शांति स्थापित की गयी थी, इसलिए इसे एक ‘मील के पत्थर’ के रूप में देखा जाता है। हालांकि यह शांति वर्ष 2006 तक ही कायम रही। 2003 और 2006 के बीच, भारत और पाकिस्तान के जवानों द्वारा एक भी गोली नहीं चलाई गई।
  • लेकिन 2006 के बाद से, संघर्ष विराम उल्लंघन एक आम बात बन गया। वर्ष 2018 में एक बार फिर से 2003 के युद्धविराम समझौते का पालन करने पर सहमति हुई थी, फिर भी, हाल के वर्षों में युद्धविराम उल्लंघन की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है।

संबंधित चिंताएं:

एक महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि, दोनों देश, नियंत्रण रेखा पर युद्धविराम हेतु की गयी हालिया प्रतिबद्धताओं पर कितनी देर तक कायम रहेंगे, विशेषकर जब गर्मियों का मौसम आ रहा है। जैसा कि हमेशा होता रहा है, कि कश्मीर घाटी में गर्मियों के शुरू होने के साथ ही पाकिस्तान की ओर से होने वाली आतंकी घुसपैठ के मामले बढ़ जाते है। गर्मियों में ऊंचे पहाड़ों पर बर्फ पिघलने से पाकिस्तान को घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने का मौका मिल जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LoC क्या है और इसका निर्धारण, भौगोलिक सीमा और महत्व?
  2. LAC क्या है?
  3. ‘नाथू ला’ कहाँ है?
  4. ’पैंगोंग त्सो’ कहाँ है?
  5. ‘अक्साई चिन’ का प्रशासन कौन करता है?
  6. ‘नाकु ला’ कहाँ अवस्थिति है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में किसका नियंत्रण है?

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

भारत आर्थिक मंदी से बाहर


संदर्भ:

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical office- NSO) के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था मंदी से बाहर निकल चुकी है, किंतु अभी भी महामारी से पहले जारी विकास दर की वापसी के लिए एक लंबा रास्ता तय करना शेष है।

एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत में, वर्ष 2020 की अंतिम तिमाही में, पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 0.4% की वृद्धि दर्ज की गई है।

वर्ष 2019 में, लगभग पिछले पच्चीस वर्षो के दौरान, देश ने पहली बार मंदी के दौर में प्रवेश किया था, इसके लिए अर्थशास्त्रियों द्वारा चेतावनी भी दी गई थी, कि देश को मंदी से उबरने के लिए संघर्ष करना पद सकता है।

पिछली तिमाही के जीडीपी आंकड़ों के प्रमुख बिंदु:

  1. विनिर्माण में पुनरुत्थान
  2. कृषि विकास की गति में वृद्धि
  3. वित्तीय, स्थावर संपदा क्षेत्र (रियल एस्टेट सेक्टर) में उछाल
  4. उपभोक्ताओं का विश्वास अभी भी कम है।
  5. सरकारी व्यय में सुधारात्मक तेजी
  6. निवेश मांग में वृद्धि

मंदी’ (Recession) क्या है?

यह एक व्यापक अर्थशास्त्रीय शब्द है, तथा यह दीर्घ काल के लिए आर्थिक गतिविधियों में गिरावट अथवा बड़े पैमाने पर कमी को व्यक्त करता है। अथवा यह कहा जा सकता है कि जब मंदी वाहक या कारकों का दौर लंबी अवधि तक जारी रहता है, तो इसे मंदी कहा जाता है। आमतौर पर, मंदी कुछ तिमाहियों तक ही रहती है।

महामंदी / अवसाद अथवा डिप्रेशन:

यह नकारात्मक आर्थिक विकास का गहरा और दीर्घ काल तक जारी रहने वाला समय होता है। इस दौर में कम से कम बारह महीनों तक उत्पादन में कमी होती है तथा जीडीपी में दस फीसदी से अधिक की गिरावट होती है। दूसरे शब्दों में, जब ‘मंदी’ (Recession) की अवधि एक वर्ष या उससे अधिक हो जाती है तो इसे अवसाद अथवा महामंदी (Depression) कहा जाता है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण


(Inflation Targeting)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए मुद्रा और वित्त संबंधी रिपोर्ट जारी की गई है। जिसमे रिज़र्व बैंक ने कहा है कि, +/-2 प्रतिशत के गुंजाइश स्तर (tolerance band) के साथ 4 प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य, अगले पांच वर्षों के लिए उपयुक्त है।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु:

  • लचीले-मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (flexible-inflation targeting FIT) के दौरान, मुद्रास्फीति प्रवृत्ति में 8-4.3 % तक गिरावट हुई है, जबकि FIT से पहले यह 9% से अधिक थी। यह इस बात का संकेत है कि, मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करने के लिए 4% एक उपयुक्त स्तर है।
  • 6% दर का मुद्रास्फीति लक्ष्य, गुंजाइश के लिए उपयुक्त ऊपरी सीमा है।
  • 2% से अधिक मुद्रास्फीति की निचली सीमा निर्धारित करने के कारण वास्तविक मुद्रास्फीति, गुंजाइश स्तर से नीचे तक पहुँच सकती है, जबकि 2% से कम मुद्रास्फीति की निचली सीमा निर्धारित करने पर अर्थव्यवस्था की वृद्धि में बाधा उत्पन्न हो सकती है। यह इस बात का संकेत है, कि, 2% मुद्रास्फीति, गुंजाइश स्तर के लिए उपयुक्त निचली सीमा है।

लचीले-मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (FIT)  के परिणाम:

  • FIT अवधि के दौरान, मुद्रा बाजार में मौद्रिक संचरण पूर्ण और यथोचित रूप से तीव्र रहा था, हालांकि बांड बाजार में मौद्रिक संचरण, पूर्ण स्तर से कम रहा।
  • बैंकों के ऋण और जमा दरों के संचरण में सुधार हुआ है, तथा ऋण और जमा की सभी श्रेणियों में बाहरी बेंचमार्क मौद्रिक संचरण में और सुधार किया जा सकता था।

लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण फ्रेमवर्क:

वर्ष 2016 में, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अधिनियम, 1934 में संशोधन के बाद से भारत में एक ‘लचीला मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण फ्रेमवर्क’ (Flexible Inflation Targeting Framework) कार्यरत है।

भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?

संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, भारत सरकार, प्रत्येक पाँच वर्ष में एक बार, रिजर्व बैंक के परामर्श से मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करती है।

वर्तमान मुद्रास्फीति लक्ष्य:

केंद्र सरकार द्वारा, 5 अगस्त, 2016 से 31 मार्च, 2021 की अवधि के लिए 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति को अधिसूचित किया गया है। इसके साथ ही, 6 प्रतिशत की ऊपरी गुंजाइश सीमा तथा 2 प्रतिशत की निचली गुंजाइश सीमा निर्धारित ककी गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वर्तमान मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?
  2. मुद्रास्फीति लक्ष्य कौन निर्धारित करता है?
  3. मौद्रिक नीति समिति (MPC) क्या है?
  4. कार्य
  5. रचना

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

‘विवाद से विश्वास’ योजना


(Vivad Se Vishwas scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, आयकर विभाग द्वारा, प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान योजना ‘विवाद से विश्वास’ के तहत कर जमा करने की घोषणा करने और भुगतान करने की समय सीमा क्रमशः 31 मार्च और 30 अप्रैल तक बढ़ा दी गयी है।

योजना के बारे में:

  • प्रत्यक्ष कर ‘विवाद से विश्वास’ अधिनियम, 2020 , 17 मार्च, 2020 को अधिनियमित किया गया था। इसका उद्देश्य आयकर से संबंधित मुकदमेबाजी के मामलों को कम करना, सरकार के लिए उचित समय पर राजस्व उत्पन्न करना तथा करदाताओं को लाभ पहुंचाना था।
  • ‘विवाद से विश्वास’ योजना का लक्ष्य लंबित कर विवादों का समाधान करना है। तमाम अदालतों में प्रत्यक्ष कर से जुड़े 32 लाख करोड़ रुपये के करीब 4.83 लाख मामले लंबित हैं।
  • इस योजना को अपनाने वाली इकाईयों के लिए अपेक्षित करों का भुगतान करना पड़ता है, जिसके बाद, उनके खिलाफ कर विभाग द्वारा दायर किये गए सभी मुकदमे समाप्त कर दिए जाते हैं, और दंडात्मक कार्यवाही बंद कर दी जाती है।

योजना का महत्व:

  • इस योजना का महत्व इस तथ्य में निहित है, कि इससे पूर्व लागू की गयी ‘कर लाभ योजनाएं’ जैसे कि कर विवाद समाधान योजना, 1998 (KVSS) और प्रत्यक्ष कर विवाद समाधान, 2016 (DTDRS) का अपेक्षित परिणाम नहीं मिला है, जबकि प्रत्यक्ष कर ‘विवाद से विश्वास’ योजना की काफी अच्छे परिणाम मिले हैं।
  • इस योजना के तहत फरवरी तक 97,000 करोड़ रुपये से अधिक राशि का निपटान होना चुका है।
  • अब तक, योजना के तहत काफी समय से लंबित 5,10,491 मामलों में से 1,25,144 से अधिक मामलों का निपटारा किया जा चुका है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रमुख विशेषताएं
  2. लाभ
  3. पात्रता

मेंस लिंक:

‘विवाद से विश्वास’ योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


एशिया आर्थिक वार्ता (AED)

(Asia Economic Dialogue)

यह भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) का प्रमुख भू-अर्थनीति सम्मेलन है।

  • एशिया आर्थिक वार्ता (AED) 2021 का आयोजन को MEA और पुणे इंटरनेशनल सेंटर (PIC) द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।
  • यह एशिया आर्थिक वार्ता का पांचवा संस्करण है, तथा पुणे इंटरनेशनल सेंटर द्वारा दूसरी बार इसका आयोजन किया जा रहा है।
  • इस वर्ष के सम्मेलन का विषय: ‘कोविद -19 के बाद वैश्विक व्यापार एवं वित्त गतिकी’ (ग्लोबल ट्रेड एंड फाइनेंस डायनेमिक्स) है।
  • यह एक अंतरराष्ट्रीय जियोइकोनॉमिक्स / भू-अर्थनीति सम्मेलन है, इसमें एशिया और इसके विस्तारित पड़ोस में व्यापार और वित्त गतिशीलता पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

आईएनएस उत्कर्ष

  • यह भारतीय सशस्त्र बलों की संयुक्त-सेवा अंडमान और निकोबार कमान के अधीन एक भारतीय नौसेना हवाई स्टेशन है।
  • यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पोर्ट ब्लेयर पर नौसेना के बेस INS जारवा के पास स्थित है।
  • यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का पहला नौसेना हवाई स्टेशन है।

 


मुख्य परीक्षा हेतु मूल्यवर्धन


सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 1 और 4:

समलैंगिक विवाह, बरबादी का कारण हो सकती है: उच्चतम न्यायालय में केंद्र सरकार का तर्क

केंद्र सरकार ने, समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के लिए विवाह संबंधी मौजूदा कानूनों में किसी भी बदलाव का विरोध किया है।

कृपया ध्यान दें, 2018 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक ऐतिहासिक फैसले में, भारत में मर्जी से समलैंगिक यौन संबंध को गैर-अपराधिक घोषित कर दिया गया था।

केंद्र सरकार के तर्क:

  • पार्टनर के रूप में एक साथ रहना और समान-लिंग के लोगों के साथ यौन संबंध बनाने की तुलना पति, पत्नी और बच्चों वाले भारतीय परिवार से नहीं की जा सकती। भारत में शादी केवल दो व्यक्तियों के मिलन का विषय नहीं है, बल्कि एक बायोलॉजिकल पुरुष और एक बायोलॉजिकल महिला के बीच एक अहम बंधन है।
  • पति को बायोलॉजिकल पुरुष के रूप में और पत्नी को एक बायोलॉजिकल महिला के रूप में मानने के अलावा कोई पति-पत्नी की अन्य व्याख्या सभी वैधानिक प्रावधानों को अव्यवहारिक बना देगी।
  • इस तरह के हस्तक्षेप से देश में व्यक्तिगत कानूनों के नाजुक संतुलन पूरी तरह से नष्ट हो जाएंगे।
  • समलैंगिक व्यक्तियों के विवाह का पंजीकरण करना, व्यक्तियों पर लागू होने वाले मौजूदा निजी और संहिताबद्ध कानून प्रावधानों, जैसे कि ‘निषिद्ध संबंधो की सीमा’, ‘विवाह की शर्तें’, ‘औपचारिक और अनुष्ठान संबंधी आवश्यकताएं’ आदि का भी उल्लंघन होगा।

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