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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. श्री कृष्णदेवराय

2. स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थल

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘महामारी के दौरान जन्म लेने वाली पीढ़ी’ के समक्ष मुश्किलें

2. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के अप्रवासी वीजा प्रतिबंध संबंधी आदेश रद्द

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बैड बैंक

2. ओवर द टॉप (OTT) प्लेटफार्मों की सामग्री पर सरकार द्वारा निगरानी

3. भगोड़ा आर्थिक अपराधी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चीन में ‘क्रय शक्ति समता’

2. हरियाणा में धर्मांतरण-रोधी विधेयक

3. चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष अदालतों की योजना

4. भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS)

5. ब्यास नदी

6. मन्नथु पद्मनाभन

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

श्री कृष्णदेवराय


संदर्भ:

हाल ही में, विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय की मृत्यु की तारीख के संदर्भ में जानकारी देने वाले पहला शिलालेख, कर्नाटक राज्य में तुमकुरु जिले के होन्नानेहल्ली में खोजा गया है।

यह शिलालेख कन्नड़ भाषा में उत्कीर्ण है।

शिलालेख के अनुसार:

  • दक्षिण से शासन करने वाले भारत के सबसे महान सम्राटों में से एक, कृष्णदेवराय की 17 अक्टूबर, 1529, रविवार को मृत्यु हो गई और संयोग से इस दिन चंद्र ग्रहण हुआ था।
  • तुमकुरु के देवता वीरप्रसन्ना हनुमंथा की पूजा करने के लिए, तुमकुरु के होन्नानहल्ली नामक गाँव को उपहार में दिया गया था।

विजयनगर शासक कृष्णदेवराय के बारे में:

  • कृष्णदेवराय, विजयनगर साम्राज्य के एक सम्राट थे, इन्होने वर्ष 1509-1529 के दौरान शासन किया था।
  • वे तुलुव राजवंश से संबंधित थे।
  • कृष्णदेव राय ने कन्नड़ रामा रमन्ना, आंध्र भोज और मोरू रायारा गैंडा की उपाधियाँ धारण कीं।
  • वह, बीजापुर, गोलकोंडा, बहमनी सल्तनत के सुल्तानों और ओडिशा के राजा को हराकर भारतीय प्रायद्वीप के प्रमुख शासक बन गए।
  • महान दक्षिण भारतीय गणितज्ञ नीलकंठ सोमयाजी, कृष्णदेवराय के साम्राज्य में निवास करते थे।
  • कृष्णदेव राय के शासनकाल में पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस (Domingo Paes) और फर्नाओ नुनिज़ (Fernao Nuniz) ने विजयनगर साम्राज्य का भ्रमण किया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कृष्णदेवराय के बारे में
  2. उसकी उपाधियाँ
  3. उनकी उपलब्धियाँ- सांस्कृतिक और स्थापत्य
  4. उनके दरबार में आने वाले विदेशी यात्री
  1. नीलकंठ सोमयाजी के बारे में

मेंस लिंक:

श्री कृष्णदेवराय पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थल


(Swachh Iconic Places)

संदर्भ:

जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा आइकॉनिक (अनुप्रतीकात्मक) धरोहरों, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को ‘स्वच्छ पर्यटन स्थलों’ में बदलने हेतु स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थल उपक्रम के चौथे चरण में निम्नलिखित  12 अनुप्रतीकात्मक स्थलों के चयन की घोषणा की है –

  1. अजंता गुफाएं,महाराष्ट्र
  2. सांची स्तूप,मध्य प्रदेश
  3. कुंभलगढ़ किला,राजस्थान
  4. जैसलमेर किला,राजस्थान
  5. रामदेवरा,जैसलमेर, राजस्थान
  6. गोलकुंडा फोर्ट,हैदराबाद, तेलंगाना
  7. सूर्य मंदिर,कोणार्क,ओडिशा
  8. रॉक गार्डन,चंडीगढ़
  9. डल झील,श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर
  10. बांके बिहारी मंदिर,मथुरा, उत्तर प्रदेश
  11. आगरा का किला,आगरा, उत्तर प्रदेश
  12. कालीघाट मंदिर,पश्चिम बंगाल

‘स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थलों’ के बारे में:

(Swachh Iconic Places SIP)

यह स्वच्छ भारत मिशन के तहत पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय की एक पहल है।

उद्देश्य: अनुप्रतीकात्मक स्थलों तथा इनके आस-पास स्वछता संबंधी उच्च मानकों की स्थापना करना, ताकि इससे सभी आगंतुक लाभान्वित हो सकें और अपने घरों में स्वच्छता का संदेश भी ले जा सकें।

परियोजना का कार्यान्वयन: जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय और संबंधित राज्य/केंद्र शासित क्षेत्र की सरकारों के सहयोग से इस परियोजना का संचालन किया जा रहा है, और सबसे महत्वपूर्ण तौर पर, सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियां इसमें भागीदारी के रूप में शामिल हैं।

‘स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थल’ के अंर्तगत शुरू की गई पहलें:

बेहतर सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की स्थापना, निकासी की सुविधा, बेहतर सफाई सुविधाएं, वाटर वेंडिंग मशीन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM), ढाँचा पुनर्निर्माण, प्रकाश व्यवस्था, पार्कों का सौन्दर्यीकरण, सड़कों का रखरखाव, बेहतर परिवहन सुविधाएं आदि।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. योजना के बारे में
  2. कार्यान्वयन
  3. चयनित स्थल

मेंस लिंक:

‘स्वच्छ अनुप्रतीकात्मक स्थल’ योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘महामारी के दौरान जन्म लेने वाली पीढ़ी’ के समक्ष मुश्किलें


संदर्भ:

हाल ही में, ‘सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट’ (CSE) द्वारा ‘पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट’, 2021 (State of Environment Report, 2021) जारी ही गयी है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

कोविड-19 का प्रभाव:

  1. सबसे बड़ी चिंता: भारत एक ‘महामारी के दौरान जन्म लेने वाली पीढ़ी’ के दौर में गुजरने के लिए तैयार है। मुताबिक कोविड-19 महामारी के कारण 375 मिलियन भारतीय बच्चों (नवजात शिशु से लेकर 14 साल के बच्चे) की सेहत पर लंबे समय तक बुरा असर रहेगा। भविष्य में इन बच्चे को कुपोषण, अशिक्षा और कई अनदेखी दुश्वारियों का सामना करना पड़ सकता है।
  2. इस पीढी के लिए, वजन कम होने, ठिगना-पन, बाल मृत्यु दर में वृद्धि से लेकर शिक्षा और कार्य- उत्पादकता में नुकसान जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
  3. विश्व भर में 500 मिलियन से अधिक बच्चे स्कूल से बाहर हो चुके है और इनमें आधे से अधिक बच्चे भारत के हैं।
  4. कोविड-19 के प्रभाव के कारण दुनिया भर में  11.5  करोड़ अतिरिक्त लोग अत्यंत गरीबी में जीने के लिए विवश होंगे। इनमें से अधिकांश दक्षिण एशिया के होंगे।
  5. सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में भारत 192 देशों में 117 वें स्थान पर है। इस मामले में भारत पाकिस्तान को छोड़कर सभी दक्षिण एशियाई देशों से पीछे है।

पर्यावरण की स्थिति:

  1. वर्ष 2009 और 2018 के बीच, भारत की वायु, जल और भूमि अत्यधिक प्रदूषित हुई है।
  2. देश के 88 प्रमुख औद्योगिक समूहों में से, 35 औद्योगिक समूहों में समग्र रूप से पर्यावरणीय गिरावट दर्ज की गयी है, 33 औद्योगिक समूहों में वायु गुणवत्ता में कमी का संकेत मिला है, 45 औद्योगिक समूहों में अधिक प्रदूषित जल 17 औद्योगिक समूहों में भूमि प्रदूषण बदतर हो गया है।
  3. महाराष्ट्र में तारापुर, सबसे प्रदूषित क्लस्टर के रूप में उभरा है।
  4. ये आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत करते हैं कि, इन क्षेत्रों में, विशेष रूप से गंभीर प्रदूषित क्षेत्र के रूप में पहले से ही चिह्नित किये जा चुके क्षेत्रों में, सालों से प्रदूषण नियंत्रित करने और कम करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गयी है।

विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन:

सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के आधार पर रैंकिंग करने के क्रम में:

  1. केरल, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना, सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य थे।
  2. बिहार, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और उत्तर प्रदेश द्वारा सबसे खराब प्रदर्शन किया गया।

इंस्टा लिंक:

‘पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट’, 2021 के प्रमुख निष्कर्षों का संक्षिप्त अवलोकन कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के अप्रवासी वीजा प्रतिबंध संबंधी आदेश रद्द


संदर्भ:

हाल ही में, बिडेन प्रशासन द्वारा डोनाल्ड ट्रम्प के नए आप्रवासी वीजा निलंबन आदेश को रद्द कर दिया गया है। यह आदेश पिछले साल अप्रैल के अंत से प्रभावी था।

इस निरस्त आदेश द्वारा, कोविड -19 के मद्देनजर, अमेरिकी श्रम बाजार की सुरक्षा के आधार पर कुछ अप्रवासियों और गैर-आप्रवासियों के अमेरिका में प्रवेश को निलंबित कर दिया गया था।

वर्तमान प्रकरण:

  • परन्तु, राष्ट्रपति बिडेन ने, H1-B (कुशल श्रमिक), L -वीजा(अंतर-कंपनी स्थानातरणर) और कई अन्य कार्य और अदला-बदली (विनिमय) पर आने-जाने वाले वीज़ा श्रेणियों पर ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाई गई रोक को नहीं हटाया है। इन वीज़ा श्रेणियों पर पिछले साल 24 जून से रोक लगी हुई है।
  • H1-B वीजा मुख्य रूप से आईटी क्षेत्र के श्रमिकों को दिया जाता है, और इस श्रेणी के तहत दिए जाने अधिकांश वीजा – 70% से अधिक – हाल के वर्षों में भारतीय नागरिकों को मिले हैं।

H-1B, H-2B, J और L एवं अन्य कार्य वीजा:

आईटी तथा अन्य संबंधित क्षेत्रों में कुशल तथा सस्ते कर्मचारियों की आपूर्ति हेतु, अमेरिकी प्रशासन प्रत्येक वर्ष एक निश्चित संख्या में वीजा जारी करता है। इस माध्यम से अमेरिका से बाहर स्थित कंपनियां, ग्राहकों की मांग पर अपने कर्मचारियों को अमेरिका में काम करने हेतु भेजती हैं।

  1. H-1B वीजा: ये एक गैर-प्रवासी वीजा होता है, जो किसी विदेशी नागरिक या कामगार को अमेरिका में काम करने के लिए 6 साल के लिए जारी किया जाता है। इस वीजा के लिए कर्मचारी को स्नातक होने के साथ-साथ किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञ भी होना आवश्यक है।
  2. L1 वीजा: उन कुशल विदेशी कर्मचारियों और मैनेजर की रैंक के लोगों के लिए होता है, जिनका अमेरिका में किसी कंपनी के अंदर ट्रांसफर हो रहा है।
  3. H-2B वीजा: खाद्य और कृषि श्रमिकों को अमेरिका में रोजगार की अनुमति देता है।
  4. J-1 वीजा: यह कार्य-अध्ययन के ग्रीष्मकालीन कार्यक्रमों में छात्रों के लिए होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. H1B, F1 तथा M1 वीजा में अंतर।
  2. एक NRI और एक OCI कार्डधारक के मध्य अंतर।
  3. OCI और PIO का विलय कब किया गया था?
  4. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत किसे नागरिकता प्रदान की जाती है?
  5. भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेंस लिंक:

अमेरिकी वीजा नियमों में हाल के बदलावों से भारतीय छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

बैड बैंक


(Bad bank)

संदर्भ:

इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) द्वारा ख़राब ऋणों को चिह्नित करना शुरू कर दिया गया है। इन ख़राब ऋणों को केंद्र द्वारा प्रस्तावित बैड बैंक में स्थानांतरित किया जा सकता है।

इंडियन बैंक एसोसिएशन ने, 500 करोड़ रुपये तथा उससे अधिक राशि के सभी ख़राब ऋणों की सूची बनाने तथा ‘समस्या की भयावहता की पहचान करने’ और ‘संस्था के लिए आवश्यक प्रारंभिक पूंजी के संबंध स्पष्टता जाहिर करने’ के लिए सभी बैंकों को पत्र लिखा है।

पृष्ठभूमि:

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को अपने केंद्रीय बजट 2021 के भाषण के दौरान एक बैड बैंक की स्थापना का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा, कि प्रस्तावित इकाई, बैंकों से तनावग्रस्त ऋणों को, एक वैकल्पिक निवेश कोष (alternative investment funds- AIF) के लिए बेचने के लिए अपने अधिकार में लेगी।

बैड बैंक अवधारणा:

  • बैड बैंक, दूसरे वित्तीय संस्थानों के खराब ऋण और अन्य अवैध परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए स्थापित किया जाने वाला बैंक होता है।
  • बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां रखने वाली संस्थाओं द्वारा इन परिसंपत्तियों को बाजार मूल्य पर बैड बैंक को बेंचा जाएगा।
  • इस तरह की परिसंपत्तियों को बैड बैंक में स्थानांतरित करने से, मूल संस्थाओं द्वारा अपनी बैलेंस शीट को सही किया जा सकता है – हालांकि इन्हें परिसंपत्तियों के अनुमानित मूल्य में कटौती करना होगा।

ख़राब ऋणों के बारे में चिंता का विषय:

  1. भारतीय बैंकों के ख़राब ऋणों का ढेर अर्थव्यवस्था पर एक बहुत बड़ा दबाव है।
  2. यह बैंकों के मुनाफे को हानि पहुंचाता है। क्योंकि मुनाफा खत्म हो जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB), जिनमे ख़राब ऋणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, विकास दर में वृद्धि हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा पाते हैं।
  3. क्रेडिट वृद्धि का अभाव में, अर्थव्यवस्था के 8% विकास दर प्राप्त करने के मार्ग में बाधक बनता है। अतः, ख़राब ऋणों की समस्या का प्रभावी समाधान शीघ्र किए जाने की आवश्यकता है।

बैड बैंक से लाभ:

  1. इससे बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को बैड लोन ट्रांसफर करके अपनी बैलेंस शीट सही करने में मदद मिलती है और ये मूल व्यवसायिक ऋण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  2. बड़े देनदारों के पास कई लेनदार होते हैं। चूंकि, इस उपाय से ऋण एक ही संस्था में केंद्रीकृत हो जाएंगे जिससे बैड बैंक समन्वय की समस्या को हल कर सकते हैं।
  3. विभिन्न बैंकों को अलग करके, बैड बैंक कर्जदारों के साथ तेजी से समझौता कर सकता है।
  4. यह ऋणकर्ताओं के साथ बेहतर सौदेबाजी कर सकता है और उनके खिलाफ अधिक कठोर प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।
  5. केवल सरकार ओर देखने के बजाय बैड बैंक खुद ही संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटा सकते हैं।

बैड बैंक से संबधित चिंताएं:

उदाहरण के लिए मान लीजिए, कोई बैंक अपने ख़राब ऋणों की बिक्री करता है। तब इसे कुछ केश कर्तन करना पड़ता है, क्योंकि जब 100 रुपये खराब होते हैं, तब वास्तविक राशि में 100 रुपये से कम होने का अनुमान होता है। ऐसी स्थिति में बैंक की लाभ और हानि (P&L) प्रभावित होती है।

इसलिए, जब तक कि इस विशेष पहलू का समाधान नहीं किया जाता है, तब तक एक नई संरचना का निर्माण, समस्या को हल करने में पूर्णतयः सक्षम नहीं होगा।

आगे की राह:

के वी कामथ समिति के अनुसार, खुदरा व्यापार, थोक व्यापार, सड़क और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

कोविड महामारी से पहले तनाव का सामना कर रहे क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs), विद्युत्, इस्पात, रियल एस्टेट और विनिर्माण सम्मिलित हैं। इस पृष्ठभूमि में बैड बैंक की स्थापना काफी महत्वपूर्ण है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ’परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी’ क्या है?
  2. ‘बैड बैंक’ क्या है?
  3. भारत में एक बैड बैंक की स्थापना कौन कर सकता है?
  4. ‘तनावग्रस्त परिसंपत्तियां’ कौन सी होती हैं?
  5. गैर निष्पादित परिसंपत्तियां क्या होती हैं?

मेंस लिंक:

बैड बैंकों की स्थापना के लाभ और हानियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

ओवर टॉप (OTT) प्लेटफार्मों की सामग्री पर सरकार द्वारा निगरानी


संदर्भ:

हाल ही में, पहली बार, सरकार द्वारा. डिजिटल मीडिया और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफार्मों पर  डिजिटल सामग्री को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती संस्‍थानों के लिए दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 (Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules 2021) के दायरे में लाने हेतु विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

यद्यपि, सभी नियमों को मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत तैयार और अधिसूचित किया गया है, किंतु OTT और डिजिटल समाचार साझा करने वाले प्लेटफार्मों के विनियमन हेतु प्रशासनिक शक्तियां ‘सूचना और प्रसारण मंत्रालय’ (I&B) के अधीन रहेंगी।

नियमों का अवलोकन:

त्रिस्तरीय शिकायत निवारण तंत्र:

पहला स्तर- ओटीटी सेवा प्रदाता: प्रत्येक ओटीटी प्रदाता स्तर पर एक ‘शिकायत निवारण प्रणाली’ होगी। प्रत्येक शिकायत का 15 दिनों के भीतर समाधान करना होगा।

दूसरा स्तर- एक स्व-नियामक निकाय (self-regulatory body): यदि शिकायत का संतोषजनक ढंग से समाधान नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता, ओटीटी सेवा प्रदाताओं द्वारा सामूहिक रूप से स्थापित एक स्व-नियामक निकाय तक मामले को ले जा सकता है।

  • स्व-नियामक निकाय की संरचना: इस निकाय के नेतृत्व, सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, अथवा मीडिया, प्रसारण, मनोरंजन, बाल अधिकार, मानव अधिकार या अन्य प्रासंगिक क्षेत्रों के एक स्वतंत्र प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा किया जाएगा।
  • शक्तियाँ: इस स्व-नियामक निकाय के लिए, किसी भी अपराध-संकेतक सामग्री संबंधी मामले में उसे ‘सेंसर’ करने की शक्ति प्राप्त होगी।

तीसरा स्तर: तीसरे स्तर पर, सरकार के लिए ‘निगरानी तंत्र’ (oversight mechanism) के रूप में अध्यारोही शक्तियां प्रदान की गई है। एक अंतर-मंत्रालयी समिति इस कार्य को अंजाम देगी तथा  इसके काफी हद तक ओटीटी के सामूहिक स्व नियामक निकाय के समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी।

प्रयोज्यता:

नए दिशानिर्देश, किसी विषयवस्तु अथवा सामग्री को प्रदर्शित करने वाले, साझा करने, देखने अथवा संशोधित करने के लिए एक मंच प्रदान करने वाली लगभग सभी कंपनियों पर लागू होते हैं। इसके साथ ही इन दिशा-निर्देशों में, पहली बार, किसी ऑनलाइन मध्यस्थ की सीमा के तहत समाचार तैयार करने या वितरित करने संबंधी व्यवसाय में संलग्न संस्थाओं को भी शामिल किया गया है।

सेफ हार्बर का प्रावधान (Safe harbour provisions)

  • नियमों में सुझाई गई जांच-परख का सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों सहित मध्यवर्तियों (बिचौलियों) द्वारा पालन किया जाना चाहिए। अगर मध्यवर्ती इकाइयों द्वारा जांच-परख का पालन नहीं किया जाता है तो सेफ हार्बर का प्रावधान उन पर लागू नहीं होगा।
  • इन सेफ हार्बर प्रावधानों को आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत परिभाषित किया गया है, और इनके तहत, सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों को अपने प्लेटफार्मों पर पोस्ट की गई किसी भी सामग्री के लिए कानूनी अभियोजन से प्रतिरक्षा प्रदान की जायेगी।

शिकायत निवारण एवं अनुपालन तंत्र:

(Grievances redressal and compliance mechanism)

सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों सहित मध्यस्थों को उपयोगकर्ताओं या पीड़ितों से मिली शिकायतों के समाधान के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है। मध्यस्थों को ऐसी शिकायतों के निस्तारण के लिए एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और इस अधिकारी का नाम व संपर्क विवरण साझा करना होगा।

स्थायी शिकायत अधिकारी का कार्यालय भारत में होना चाहिए तथा वह भारतीय पासपोर्ट-धारक नागरिक होना चाहिए।

एक मुख्य अनुपालन अधिकारी (chief compliance officer) भी नियुक्त किया जाना अनिवार्य होगा।  मुख्य अनुपालन अधिकारी के लिए भारत में उपस्थित रहना आवश्यक होगा तथा वह प्लेटफ़ॉर्म को आईटी अधिनियम और हाल ही में अधिसूचित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी होगा।

नोडल संपर्क व्यक्ति (nodal contact person): सोशल मीडिया मध्यस्थों के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ 24×7 समन्वयन के लिए एक नोडल संपर्क व्यक्ति की नियुक्ति की जानी अनिवार्य होगी।

पहली बार सूचना जारी करने वाले की पहचान:

(Identification of the first originator of the information)

  • प्राथमिक रूप से संदेश के रूप में सेवाएं दे रहे प्रमुख सोशल मीडिया मध्यस्थों को, अदालत द्वारा या सरकारी प्राधिकारी द्वारा पूछे जाने पर, पहली बार सूचना जारी करने वाले की पहचान का खुलासा करना होगा।
  • हालांकि, प्लेटफ़ॉर्म केवल, भारत की सम्प्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ मित्रतापूर्ण संबंधों, या सार्वजनिक आदेश से संबंधित अपराध से संबंधित अपराध की रोकथाम, पता लगाने, जांच, अभियोजन या दंड के प्रयोजनों के लिए खुलासा करने के लिए पहली बार सूचना जारी करने वाले की पहचान जाहिर करने के लिए उत्तरदायी होंगे।

उचित अवसर:

सोशल मीडिया कंपनियों के लिए, उपयोगकर्ताओं को स्पष्टीकरण के लिए एक मौका देने तथा उनके खातों को निष्क्रय करने से पहले अपनी बात कहने हेतु एक उचित अवसर देने के लिए कहा गया है।

नैतिकता और नियमों का अनुपालन:

सुप्रीम कोर्ट या उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी स्वतंत्र प्रतिष्ठित व्यक्ति की अध्यक्षता में एक स्व-नियामक निकाय का गठन किया जाएगा, जो ऑनलाइन डिजिटल समाचार प्लेटफार्मों द्वारा नैतिकता और नियमों का पालन सुनिश्चित करेगा।

पृष्ठभूमि:

सरकार ने यह कदम, पिछले 12 महीनों से देश-विदेश में हो रही गतिविधियों के चलते, बड़ी प्रोद्योगिक कंपनियों पर निगरानी एव नियंत्रण रखने के उद्देश्य से इन नए नियमों को लागू किया गया है। ये नियम, विश्व की सर्वाधिक अहम कंपनियों में से कुछ के लिए, अपने व्यापार मॉडल को मूल रूप से पुनर्गठित करने के लिए विवश कर सकते हैं।

इन नियमों के निहितार्थ और महत्व:

सोशल मीडिया और अन्य कंपनियों को “दुरुपयोग और दुर्व्यवहार” के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने की आवश्यकता थी। इसलिए सूचना प्रौद्योगिकी सबंधित नए नियम जारी किये गए हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’


(Fugitive Economic Offender)

संदर्भ;

हाल ही में, लंदन के वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा व्यवसायी नीरव मोदी को भारत के लिए प्रत्यर्पित करने संबंधी अनुरोध की अनुमति प्रदान कर दी गयी है। नीरव मोदी, पंजाब नेशनल बैंक के 13,758 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के संबंध में वांछित है।

आगे की कार्रवाई:

अदालत के इस आदेश को, आगे की कार्रवाई के लिए यूनाइटेड किंगडम के ‘सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट’ के पास भेजा जाएगा। ‘सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट’ द्वारा इस मामले पर दो महीने के भीतर निर्णय लिया जाएगा अथवा उच्च न्यायालय से इस अवधि में विस्तार के लिए मंजूरी लेनी होगी।

  • यदि कोई अपील नहीं की जाती है, तो ‘सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट’ द्वारा प्रत्यर्पण के आदेश दिए जाने के 28 दिनों के भीतर अनुरोध किये जाने वाले व्यक्ति को प्रत्यर्पित कर दिया जाता है।
  • ‘सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट’ के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील केवल अदालत की अनुमति से ही संभव होती है।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी:

दिसंबर 2019, एक विशेष अदालत द्वारा प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर हीरा कारोबारी नीरव मोदी को पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के $ 2 बिलियन की धोखाधड़ी मामले में एक भगोड़ा आर्थिक अपराधी (fugitive economic offender) घोषित किया गया था।

भगोड़ा आर्थिक अपराधी- परिभाषा:

कोई व्यक्ति, जिसके खिलाफ कम से कम 100 करोड़ रुपये अथवा उससे अधिक के आर्थिक अपराध में शामिल होने के कारण गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है और जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए भारत से भाग गया है, ऐसे व्यक्ति को अपराधी माना जायेगा।

प्रक्रिया:

  1. जांच एजेंसियों द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम,( Money-Laundering Act) के तहत एक विशेष अदालत में एक आवेदन दायर किया जाता है। आवेदन में जब्त की जाने वाली संपत्तियों और व्यक्ति के ठिकाने से संबधित अन्य जानकारी का विवरण होता है।
  2. इसके बाद, विशेष न्यायालय द्वारा, उस व्यक्ति को एक निर्दिष्ट स्थान पर उपस्थित होने के लिए एक नोटिस जारी किया जाता है। उपस्थिति होने के लिए, नोटिस के जारी होने से कम से कम छह सप्ताह के बाद की तारीख निर्धारित की जाती है।
  3. यदि वह व्यक्ति निर्धारित स्थान और तिथि पर हाजिर हो जाता है, तो आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी जाती है। यदि वह व्यक्ति हाजिर नहीं होता है, तो जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया जाता है।
  4. जिस व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है, वह भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के अनुसार, इस प्रकार की घोषणा के 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दे सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ कौन होता है?
  2. ‘प्रवर्तन निदेशालय’ की संरचना एवं शक्तियां
  3. सीबीआई की स्थापना और शक्तियां
  4. PMLA क्या है?
  5. ‘भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम’ का अवलोकन

मेंस लिंक:

‘भगोड़ा आर्थिक अपराध अधिनियम’ के महत्व और प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चीन में ‘क्रय शक्ति समता’

(China’s purchasing power parity– PPP)

चीन में सकल निर्धनता उन्मूलन, सरकार द्वारा निर्धारित गरीबी रेखा के अनुसार परिभाषित किया गया है। चीन में गरीबी रेखा, प्रति दिन प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति समता (PPP) के पदों में 2.30 डॉलर निर्धारित की गयी है, और यह अंतर्राष्ट्रीय गरीबी रेखा $ 1.90 की क्रय शक्ति समता (PPP) से अधिक है।

विश्व बैंक द्वारा निम्न मध्यम आय वाले देशों के लिए $ 3.20 की क्रय शक्ति समता (PPP) पर और ऊपरी मध्यम आय वाले देशों, जैसे कि चीन, के लिए $ 5.50 की क्रय शक्ति समता (PPP) पर गरीबी रेखा को परिभाषित किया है।

हरियाणा में धर्मांतरण-रोधी विधेयक

हरियाणा सरकार, विधानसभा के आगामी बजट सत्र में “बलपूर्वक या धोखाधड़ी के माध्यम से धर्मांतरण” के खिलाफ तथा ‘दंगाइयों और प्रदर्शनकारियों द्वारा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को होने वाले नुकसान की वसूली हेतु एक विधेयक लाने की योजना बना रही है।

चेक बाउंस मामलों के लिए विशेष अदालतों की योजना

  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा, विशेष रूप से, चेक बाउंस मामलों की सुनवाई करने और निर्णय के लिए अतिरिक्त अदालतों के निर्माण पर विचार किया जा रहा है।
  • अदालत के अनुसार, देश भर की विभिन्न अदालतों में चेक बाउंस के 35 लाख से अधिक मामले लंबित हैं।

पृष्ठभूमि: अस्वीकृत चेक के संबंध में लंबे समय तक मुकदमेबाजी का मामला, अदालत के संज्ञान में 2005 के एक मामले की सुनवाई के दौरान आया था।

भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (INCOIS)

(Indian National Centre for Ocean Information Services)

  • यह पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत भारत सरकार का एक स्वायत्त संगठन है।
  • INCOIS का कार्य समाज, उद्योग, सरकारी एजेंसियों और वैज्ञानिक समुदाय को सर्वोत्तम संभव महासागर-संबंधी जानकारी और सलाहकार सेवाएं प्रदान करना है।

चर्चा का कारण:

INCOIS द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप के हवाई मानचित्रण हेतु राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) की मदद लेने की योजना बनाई जा रही है। इसके सागरीय नितल का बेहतर चित्रण किया जा सकेगा, इस प्रकार के अध्ययन को ‘अनुगभीरीय अध्ययन’ (Bathymetric study) भी कहा जाता है।

ब्यास नदी

  • केंद्र सरकार, ब्यास नदी से दिल्ली को आने वाले 232 मिलियन गैलन प्रति दिन (MGD) पानी को एक महीने के लिए रोकने जा रही है।
  • केंद्र सरकार द्वारा एक मरम्मत कार्य शुरू किया जा रहा है जिसकी बजह से नांगल हाइडल चैनल पूरी तरह से बंद हो जाएगा। इससे दिल्ली के लिए 25% पानी की आपूर्ति बंद हो जाएगी।

ब्यास नदी के बारे में:

  • ब्यास नदी का उद्गम स्थल, रोहतांग दर्रे के पास, समुद्र तल से 4,062 मीटर की ऊंचाई पर, पीर पंजाल श्रेणी के दक्षिणी छोर पर, रावी के स्रोत के नजदीक स्थित है।
  • यह धौलाधार श्रेणी को पार करते हुए दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुडती है और पंजाब में हरिके में सतलुज नदी से मिल जाती है।
  • यह तुलनात्मक रूप से छोटी नदी है और इसकी लंबाई मात्र 460 किमी है, लेकिन पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली नदी है।

मन्नथु पद्मनाभन

  • मन्नथु पद्मनाभन (1878 – 1970) केरल के एक भारतीय समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे।
  • उन्होंने अस्पृश्यता विरोधी आंदोलन में भाग लिया और सभी जातियों के लिए मंदिर खोलने की वकालत की।
  • उन्होंने वायकॉम सत्याग्रह में भी भाग लिया।
  • उन्हें नायर सर्विस सोसायटी (NSS) की स्थापना के लिए भी जाना जाता है।


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