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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययनII

1. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)

2. उत्तर प्रदेश विधानसभा में धर्मांतरण संबंधी विधेयक पारित

3. चीनी तटरक्षक जहाजों के पूर्वी चीन सागर स्थित द्वीपों में प्रवेश करने पर जापान का विरोध

4. फ्रांस द्वारा चीन के ‘उइघुर दमन’ की आलोचना

5. संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार परिषद निर्वाचन

 

सामान्य अध्ययनIII

1. मुद्रीकरण या आधुनिकीकरण’ सरकारी परिसंपत्तियों के लिए मोदी मंत्र

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. ‘मौन रहने का अधिकार’ को नैतिकता के रूप में मान्यता

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. प्रत्यायित / ‘मान्यता प्राप्त’ निवेशक

2. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा श्री लंका के लिए $ 50 मिलियन रक्षा ऋण दिए जाने की घोषणा

3. घाना: कोवैक्स टीका हासिल करने वाला पहला देश

4. राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM)

5. बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICOLD)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)


(National Commission for SCs)

संदर्भ:

श्री विजय सांपला को ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (National Commission for SCs- NCSC) का नए अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ के बारे में:

  • भारतीय समाज में अनुसूचित जातियों को शोषण के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान करने और उनके सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने हेतु, भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ की स्थापना की गई।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 में संशोधन करके तथा 89 वें संविधान संशोधन अर्थात संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के माध्यम से संविधान में एक नया अनुच्छेद 338A सम्मिलित करके राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की स्थापना की गई।
  • इस संशोधन के माध्यम से, पूर्ववर्ती ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग’ को, फरवरी, 2004 से दो भिन्न आयोगों में परिवर्तित कर दिया गया- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)।
  • NCSC में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष तथा तीन अन्य सदस्य होते हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मुहर सहित आदेश से की जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCSC के बारे में।
  2. संबंधित संवैधानिक प्रावधान
  3. अनुच्छेद 338 और 338A के बारे में।
  4. कार्य

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में धर्मांतरण संबंधी विधेयक पारित


संदर्भ:

हाल ही में, उत्तर प्रदेश विधान सभा में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021 (Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Bill, 2021) पारित कर दिया गया है।

इस विधेयक के द्वारा पिछले वर्ष नवंबर में, धोखाधड़ी या किसी अन्य अनुचित तरीकों किए जाने वाले धर्मांतरण को रोकने हेतु लागू किये गए अध्यादेश को प्रतिस्थापित किया गया है।

अधिनियम के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान:

  1. इसके तहत, विवाह के उद्देश्य से किए जाने वाले धर्म-परिवर्तन को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है।
  2. ‘धर्म-परिवर्तन का उद्देश्य विवाह के लिए नहीं था’, यह साबित करने का दायित्व ‘अभियुक्त’ (Defendant) का होगा।
  3. धर्म परिवर्तन के लिए जिलाधिकारी से अनुमति लेनी होगी और इसके लिए दो महीने का नोटिस देना होगा।
  4. यदि किसी महिला द्वारा, मात्र विवाह के उद्देश्य से धर्म-परिवर्तन किया जाता है, तो उस विवाह को अमान्य घोषित किया जाएगा।

दंड विधान:

  1. कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर 15,000 के जुर्माने और न्यूनतम एक साल की कारावास, जिसे पांच साल तक बढाया जा सकता है, का दंड दिया जाएगा।
  2. यदि किसी नाबालिग महिला अथवा अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला का उक्त गैरकानूनी तरीकों से धर्म परिवर्तन कराया गया तो तीन से दस साल तक की सजा के साथ कम से कम 25,000 ₹ का जुर्माना देना होगा।
  3. इसके अतिरिक्त अध्यादेश में सामूहिक धर्म परिवर्तन कराने वाले संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने सहित कड़ी कार्रवाई करने संबंधी प्रावधान किए गए हैं।

इस क़ानून से संबंधित विवाद

हाल ही में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक मामले (सलामत अंसारी-प्रियंका खरवार मामले) में निर्णय सुनाते हुए कहा कि, किसी साथी को चुनने का अधिकार अथवा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार, नागरिकों के ‘जीवन और स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकार’ का भाग है। अदालत के इस निर्णय के अगले दिन ही उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा यह अध्यादेश लागू किया गया है।

अदालत ने फैसले में यह भी कहा कि, अदालत द्वारा इससे पहले ‘विवाह हेतु धर्मपरिवर्तन अस्वीकरणीय है’ बताया गया था, जो कि क़ानून के रूप में उचित नहीं था।

अध्यादेश की आलोचना

  • इस अध्यादेश की कई कानूनी विद्वानों द्वारा तीखी आलोचना की गयी है, इनका कहना है कि, लव जिहादकी अवधारणा का कोई भी संवैधानिक या कानूनी आधार नहीं है।
  • ये संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहते हैं कि, संविधान में नागरिकों को अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार दिया गया है।
  • इसके अलावा, अनुच्छेद 25 के तहत, अंतःकरण की स्वतंत्रता, अपनी पसंद के धर्म का पालन तथा इच्छानुसार धर्म परिवर्तन करने और साथ ही किसी भी धर्म को नहीं मानने के अधिकार की गारंटी प्रदान की गयी है।

संबंधित चिंताएं और चुनौतियाँ

इस तथाकथित नए ‘लव जिहाद’ कानून से संबंधित वास्तविक खतरा इस क़ानून की अस्पष्टता में है।

  • इस कानून में “अनुचित प्रभाव” (Undue Influence), “प्रलोभन” (Allurement) और “बल-पूर्वक” (Coercion) जैसे खुली बनावट वाले वाक्यांशों का उपयोग किया गया है।
  • वास्तव में, ‘क्या धर्म परिवर्तन सच में मात्र विवाह के उद्देश्य के लिए किया गया है?’ यह प्रश्न ही मूल रूप से अस्पष्ट है।
  • असली संकट, व्यक्तिपरक मूल्यांकन और इन सूक्ष्म वाक्यांशों के अभिमूल्यन में निहित है – इसमें मामले को पूरी तरह से न्यायाधीश के विवेक पर छोड़ दिया गया है।

उच्चतम न्यायालय के विचार:

लिली थॉमस और सरला मुद्गल दोनों मामलों में भारत के उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि की है कि वास्तविक आस्था के बिना और कुछ कानूनी लाभ उठाने के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन का कोई आधार नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 21 के बारे में
  2. अनुच्छेद 25
  3. सलामत अंसारी-प्रियंका खरवार मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय

मेंस लिंक:

किसी साथी को चुनने का अधिकार अथवा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार, नागरिकों के ‘जीवन और स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकार’ का भाग है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

चीनी तटरक्षक जहाजों के पूर्वी चीन सागर स्थित द्वीपों में प्रवेश करने पर जापान का विरोध


संदर्भ:

हाल ही में, चीनी तटरक्षक दो जहाज, सेनकाकू द्वीप समूह के जल में घुस गए, इस पर जापान ने पूर्वी चीन सागर में अवस्थित इस निर्जन द्वीप समूह में चीन की घुसपैठ के खिलाफ विरोध प्रकट किया है।

कुछ समय पूर्व, बीजिंग ने अपने तटरक्षक बलों को, गैर-कानूनी तरीके से अपने जल-क्षेत्र में प्रवेश करने वाले विदेशी जहाजों के खिलाफ हथियारों का उपयोग करने की अनुमति देने संबंधी एक कानून लागू किया था, इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव में काफी वृद्धि हुई है।

विवाद का विषय:

जापान और चीन के मध्य, ‘पूर्वी चीन सागर’ में अवस्थित कुछ द्वीपों को लेकर काफी लंबे समय से विवाद चल रहा है। इन द्वीपों को टोक्यो द्वारा ‘सेनकाकू’ (Senkakus) तथा बीजिंग द्वारा ड‍ियाओयू (Diaoyus) कहा जाता है। हालांकि, यह द्वीप जापान के अधिकार में हैं, फिर भी बीजिंग इन द्वीपों पर अपना दावा करता है।

चीन का पक्ष:

  • चीन और (ताइवान) का कहना है कि ड‍ियाओयू द्वीप, लगभग वर्ष 1534 से ही, चीन का हिस्सा हैं।
  • चीन का तर्क है कि, चीन-जापान युद्ध के पश्चात, वर्ष 1895 में हुई पक्षपातपूर्ण शिमोनोसेकी की संधि (Treaty of Shimonoseki) के तहत जापान ने बलपूर्वक इन द्वीपों पर कब्ज़ा कर लिया था।
  • चीन का दावा है, कि द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त करने हेतु की गयी सैन फ्रांसिस्को की संधि के तहत पॉट्सडैम घोषणा को जापान ने स्वीकार किया था, जिसमें जापान द्वारा ताइवान को मुक्त करने की शर्त तय की गयी थी। चीन का कहना है, ताइवान के वापस किये जाने के साथ इन द्वीपों को भी वापस कर दिया जाना चाहिए था।

लेकिन अमेरिका ने इन द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया और 1971 में ओकिनावा प्रत्यावर्तन समझौते के तहत इन द्वीपों का प्रशासन को जापान के लिए सौंप दिया।

यथास्थिति:

  • चीन ने कमोबेश यथास्थिति स्वीकार कर ली थी – बशर्ते, जापान द्वारा 12-नॉटिकल-मील क्षेत्रीय समुद्र के बाहर चीनी मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ हस्तक्षेप नहीं किया जाए।
  • फिर, 2012 में, जापान ने यथास्थिति को पलटते हुए, इन द्वीपों को जापानी निजी मालिकों से खरीदकर, इनका राष्ट्रीयकरण कर दिया।
  • हालांकि, जापान सरकार ने इस कदम के लिए, द्वीप को कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों के हाथों में पड़ने से बचाने के लिए आवश्यक बताया था। लेकिन चीन ने इसे जापान की अवसरवादिता के रूप में देखा जो इस बहाने से इस क्षेत्र पर अपने कब्जे को मजबूत कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता का कारण:

इस विवाद से क्षेत्रीय और विश्व शांति को खतरा हो सकता है, क्योंकि अंततः इस विवाद में अमेरिका  और उसके सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं। जापान द्वारा डाले जा रहे दबाव के प्रत्युत्तर में, अमेरिका ने बार-बार इस बात को दोहराया है, कि ये द्वीप ‘अमेरिका-जापान परस्पर सहयोग एवं सुरक्षा समझौते’ के दायरे में आते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दक्षिण चीन सागर विवाद- इसमें शामिल क्षेत्र, देशों के दावे।
  2. सेनकाकू द्वीप कहाँ हैं?
  3. 1951 की सैन फ्रांसिस्को शांति संधि क्या है?
  4. चीन- ताइवान संबंध।

मेंस लिंक:

चीन की आक्रामक विस्तारवादी नीति को विश्व के देशों द्वारा किस रूप में देखा जा रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

फ्रांस द्वारा चीन के ‘उइघुर दमन’ की आलोचना


संदर्भ:

हाल ही में, फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-यवेस ले द्रियां (Jean-Yves Le Drian) ने चीनी उइघुर अल्पसंख्यक समुदाय के “संस्थागत दमन” की निंदा की है।

विवाद का विषय:

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिनजियांग प्रांत में अवैध नजरबन्दी शिविरों का बड़ा नेटवर्क है, जिसमे कम से कम दस लाख उइगर और अन्य तुर्क-भाषी मुस्लिम अल्पसंख्यक कैद हैं। चीन द्वारा इन शिविरों को उग्रवाद से निपटने हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र बताया जाता है।

श्री ले द्रियां ने शिनजियांग को, वर्ष 2020 के दौरान हुए ‘मानवाधिकारों के महत्वपूर्ण दमन’ के कई उदाहरणों में से एक बताया।

उइगर कौन हैं?

उइगर, चीन के उत्तर-पश्चिमी शिनजियांग प्रांत में निवास करने वाले अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय हैं। शिनजियांग प्रांत में इनकी जनसंख्या तकरीबन 40 प्रतिशत है।

उइगर, चीन की तुलना में तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से करीबी नृजातीय संबंधों का दावा करते हैं।

चीन उइगरों को क्यों निशाना बना रहा है?

शिनजियांग तकनीकी रूप से चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र है। शिनजियांग, चीन का सबसे बड़ा क्षेत्र है तथा खनिजों से समृद्ध है इसके साथ ही इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।

  1. पिछले कुछ दशकों में, शिनजियांग प्रांत आर्थिक रूप से समृद्ध हुआ है, इसके साथ ही बड़ी संख्या में बहुसंख्यक हान चीनी (Han Chinese) इस क्षेत्र में आकर बस गए तथा बेहतर नौकरियों पर कब्जा कर लिया है। हान चीनीयों ने उइगरों के लिए आजीविका तथा पहचान के लिए संकट उत्पन्न कर दिया है।
  2. इन्ही कारणों से, छिटपुट हिंसा की शुरुआत हुई तथा वर्ष 2009 में शिनजियांग प्रांत की राजधानी उरुमकी में 200 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हान चीनी थे। तब से कई अन्य हिंसक घटनाएं हुई हैं।
  3. बीजिंग का कहना है कि उइगर समुदाय एक स्वतंत्र राज्य स्थापित करना चाहता है और, उइगरों के तुर्की तथा अन्य मध्य एशियाई देशों से सांस्कृतिक संबंधों के कारण, चीनी नेताओं को डर है कि पाकिस्तान जैसी जगहों से संचालित होने वाले उग्रवादी तत्व शिनजियांग में अलगाववादी आंदोलन को प्रोत्साहन व सहयोग दे सकते हैं।
  4. इसलिए, चीन की नीति पूरे समुदाय को संदिग्ध मानने तथा उइगरों की अलग पहचान को समाप्त करने हेतु एक व्यवस्थित परियोजना के आरम्भ करने की प्रतीत होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. उइगर कौन हैं?
  2. शिनजियांग कहाँ है?
  3. हान चीनी कौन हैं?
  4. शिनजियांग प्रांत की सीमा से लगे भारतीय राज्य।

मेंस लिंक:

उइगर कौन है तथा ये समुदाय किन कारणों से चर्चा में है?

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्तराष्ट्र मानवाधिकार परिषद् निर्वाचन


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में फिर से चुने जाने हेतु समर्थन करने को कहा है।

पृष्ठभूमि:

ट्रम्प प्रशासन द्वारा वर्ष 2018 में अमेरिका को ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) से अलग कर लिया गया था। ट्रम्प प्रशासन ने तर्क दिया था, कि ‘मानवाधिकार परिषद’ इजरायल के खिलाफ पक्षपातपूर्ण है तथा मानवाधिकारों का हनन करने वाले इसके सदस्य हैं।

UNHRC निर्वाचन के बारे में:

‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ में प्रतिवर्ष कुछ सदस्यों का चुनाव किया जाता है। इसके सदस्य देशों को क्रमिक रूप से तीन साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है, तथा प्रतिवर्ष 31 दिसंबर कुछ स्थान रिक्त हो जाते हैं।

  • लगातार दो कार्यकालों के पश्चात कोई सदस्य देश तत्काल फिर से से चुने जाने हेतु पात्र नहीं होता है।
  • ‘मानवाधिकार परिषद’ में 47 सीटें है, जिनका पांच क्षेत्रीय प्रभागों (अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, पूर्वी यूरोप, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन और पश्चिमी यूरोप और अन्य देशों) में वित्तरण किया जाता है।
  • किसी देश को ‘परिषद’ में निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम 97 मतों की आवश्यकता होती है, और इसमें गुप्त मतदान द्वारा सदस्यों को चुना जाता है।

जनवरी 2020 तक, 193 सदस्यीय संयुक्तराष्ट्र संघ के 117 सदस्य देश, ‘मानवाधिकार परिषद’ सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं। ‘मानवाधिकार परिषद’ के सदस्यों का यह विस्तार न केवल संयुक्त राष्ट्र की विविधता को दर्शाता है, बल्कि सभी देशों में मानव-अधिकारों के उल्लंघन पर बोलते समय परिषद को वैधता भी प्रदान करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHRC के बारे में
  2. स्थापना का वर्ष
  3. कार्य
  4. UNHRC की प्रमुख रिपोर्ट
  5. UNHRC के चुनाव
  6. सदस्य, कार्यकाल और पात्रता
  7. संयुक्त राष्ट्र के कितने सदस्य देश, कम से कम एक बार, UNHRC सदस्य के रूप में कार्य कर चुके है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

मुद्रीकरण या आधुनिकीकरण’ सरकारी परिसंपत्तियों के लिए मोदी मंत्र


(‘Monetise or modernise’ is Modi’s mantra for govt. Assets)

संदर्भ:

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी निवेशकों से आग्रह किया है, कि सार्वजनिक क्षेत्र की अधिकाँश संस्थाओं का निजीकरण करने वाले सरकार के निर्णय से निवेश के लिए अवसर पैदा हुए हैं और वे इनका लाभ उठाएं तथा 2.5 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित निवेश क्षमता वाले हवाई अड्डों जैसी ‘अप्रयुक्त (unutilised) तथा अल्प-प्रयुक्त (underutilised) परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण करें।

आवश्यकता:

सार्वजनिक परिसंपत्तियों, जैसे सड़क, रेलवे, हवाई अड्डे, बिजली पारेषण लाइनें, शिपिंग टर्मिनल, पाइपलाइन, मोबाइल टावर तथा अन्य भूमि और भवन तथा वित्तीय परिसंपत्तियां, जैसे, शेयर, प्रतिभूतियां और इनसे जुड़े लाभांश भुगतान पूरे देश में विखरे हुए हैं। इन पर केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों या संबंधित राज्य सरकार के विभागों का नियंत्रण है।

इन सार्वजनिक परिसंपत्तियों में से कई का उनकी क्षमता से कम उपयोग किया जाता है अथवा अन-प्रयुक्त रहती हैं; जिसका सीधा सा मतलब है कि इनकी अधिकतम क्षमता का उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिसे बाजार कीमतों पर व्यावसायिक उपयोग करके हासिल किया जा सकता है।

इसलिए, अर्थशास्त्र की भाषा में कहें तो,  यदि किसी सरकारी संपत्ति से 50 करोड़ रुपये का शुद्ध आय की व्युत्पत्ति हो रही है, लेकिन इसमें 500 करोड़ रुपये की कमाई करने की क्षमता है, तो  इसे इष्टतम क्षमता से कम उपयोग कहा जाएगा। यदि हम केवल खाली भूखण्डों के बारे में बात करें तो यह भी बहुत ही विशाल होगा।

इसके क्या लाभ होंगे?

  • इस प्रक्रिया से जुटाए गए धन का उपयोग निर्धनों के लिए घर-निर्माण कर नागरिको को समर्थ करने तथा सभी के लिए स्वच्छ पानी की उपलब्धिता सुनिश्चित करने में किया जा सकता है
  • इस नीति का विस्तार, वार्षिक विनिवेश लक्ष्यों से कही आगे, एक मध्यम-अवधि के रणनीतिक दृष्टिकोण तक होता है। इससे हर क्षेत्र के उद्योगो में निवेश के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
  • निजी क्षेत्र न केवल पूंजी उत्पादित कर सकते है, बल्कि वैश्विक रूप से सर्वोत्तम तरीकों की शुरुआत करेंगे और इससे गुणवत्ता युक्त जनशक्ति का निर्माण तथा उद्यमों का आधुनिकीकरण भी हो सकता है।

चुनौतियां:

  • यह एक संवेदनशील निर्णय-प्रक्रिया है, जिसमें प्रश्नगत परिसंपत्ति का उचित मूल्यांकन, देश में भविष्य की बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों और लक्षित उद्देश्य को पूरा करने हेतु निजी क्षेत्र की क्षमता आदि को ध्यान में रखने की आवश्यकता है।
  • इसके अलावा, सार्वजनिक अवसरंचना प्रबंधन को निजी हाथो में स्वीकार करने के संबंध में नागरिकों की सम्मति भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
  • यदि जनता को कोई शिकायत होती है, तो निजी क्षेत्र द्वारा तत्काल उसका समाधान किये जाने की आवश्यकता है। अन्यथा, ‘सार्वजनिक-निजी-भागीदारी’ उपक्रम का एक गलत अनुभव, जनता की धारणा को लंबे समय तक के लिए नुकसान पहुंचा सकता है।

कुछ निहित स्वार्थों द्वारा तैयार किए गए भ्रामक संदेहों को मिटाने के लिए तथा मजबूत सार्वजनिक समर्थन का निर्माण करने हेतु ‘संवाद’ एक प्रभावी तरीका है।

सफल ‘मुद्रीकरण’ के लिए चार चरणों की प्रक्रिया आवश्यक होती है:

  1. सबसे पहले, नीति-निर्माणक सरकार का उद्देश्य समझ में आना चाहिए।
  2. दूसरा, परिसंपत्तियों (परिचालन और वित्तीय दोनों) का विस्तृत विश्लेषण आवश्यक होता है।
  3. तीसरा, परिसंपत्तियों की वर्तमान और भविष्य की क्षमता का विश्लेषण करना आवश्यक है।
  4. चौथा, सभी हितधारकों का सावधानी से प्रबंधन करना और प्रकल्पित उद्देश्य को पूरा करने के लिए परियोजना को क्रियान्वित करना।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ;

‘मौन रहने का अधिकार’ को नैतिकता के रूप में मान्यता


फेसबुक के एक अधिकारी अजीत मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस ‘शोर-शराबे’ वाले दौर में ‘मौन रहने के अधिकार’ को नैतिकता के रूप में मान्यता प्रदान की जाए।

उन्होंने कहा है, कि ‘मौन रहने का अधिकार’ भी ‘वाक् एवं अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य के अधिकार’ के समान महत्वपूर्ण है।

संबंधित प्रकरण:

अजीत मोहन ने दिल्ली विधानसभा की ‘शांति एवं सद्भाव समिति’ द्वारा जारी समन के खिलाफ याचिका दायर की है।

अजीत मोहन द्वारा, पिछले साल फरवरी में दिल्ली दंगों के संबंध में, ‘द्वेषपूर्ण भाषण’ (हेट स्पीच) पर अंकुश लगाने में विफल रहने पर फेसबुक की भूमिका की जांच कर रही समिति के समक्ष उपस्थित होने के लिए, समिति द्वारा जारी किये गए सम्मन तथा विशेषाधिकार हनन की आशंका को अदालत में चुनौती दी गयी है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


प्रत्यायित / मान्यता प्राप्त’ निवेशक

(Accredited investor)

  • इन्हें अर्हताप्राप्त निवेशक अथवा पेशेवर निवेशक भी कहा जाता है।
  • यह विभिन्न वित्तीय उत्पादों और उनसे जुड़े जोखिमों और प्रतिफल के संबंध में अच्छी समझ रखते है।
  • ये अपने निवेश के सबंध में सुविचारित निर्णय ले सकते हैं और विश्व स्तर पर कई प्रतिभूतियों और वित्तीय बाजार नियामकों द्वारा मान्यता प्राप्त होते हैं।

चर्चा का कारण:

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा प्रत्यायित / ‘मान्यता प्राप्त’ निवेशक (Accredited investor)  की अवधारणा पर विचार किया जा रहा है।

  • सेबी ने कहा है, कि एक बार प्रत्यायन / ‘प्रमाणन’ (accreditation) दिए जाने के पश्चात, यह एक वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा।
  • प्रत्यायन अथवा प्रमाणन, ‘प्रत्यायन एजेंसियों’ के माध्यम से हासिल किया जा सकता है। ये एजेंसियां,  बाजार के अवसंरचना संस्थान या उनकी सहायक कंपनियां हो सकती हैं।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री द्वारा श्री लंका के लिए $ 50 मिलियन रक्षा ऋण दिए जाने की घोषणा

  • पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान खान ने श्रीलंका के लिए $ 50 मिलियन की रक्षा ऋण सुविधा प्रदान करने की घोषणा की है।
  • विश्व में महामारी फैलने के बाद इमरान खान की श्रीलंका यात्रा, किसी सरकार के प्रमुख की पहली यात्रा है।
  • दोनों देशों में नई सरकारों के गठन के बाद से पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा थी।

(नोट: विवरण आवश्यक नहीं हैं)।

घाना: कोवैक्स टीका हासिल करने वाला पहला देश

कोवैक्स (COVAX)- उच्च और निम्न-आय वाले देशों के बीच वैक्सीन असमानता को कम करने की एक पहल के अंर्तगत, एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफ़ोर्ड वैक्सीन की 600,000 खुराक के साथ राजधानी अकरा में पहुँचने के साथ ही, घाना, कोवैक्स टीका हासिल करने वाला पहला देश बन गया है।

COVAX क्या है?

  • COVAX, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और दो अंतर्राष्ट्रीय समूहों – GAVI वैक्सीन गठबंधन और महामारी की तैयारी में नवाचारों हेतु गठबंधन’ (Coalition for Epidemic Preparedness Innovations- CEPI) के बीच एक साझेदारी है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों को टीकों की आपूर्ति करना है।
  • इसके लिए, उच्च आय वाले देशों तथा बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों द्वारा वित्त पोषण किया जाता है।

राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन (NUDM)

(National Urban Digital Mission)

  • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
  • शहरों और नगरों को समग्र सहायता प्रदान करने के लिए पीपुल्स, प्रोसेस और प्लेटफॉर्म जैसे तीन स्तंभों पर काम करते हुए शहरी भारत के लिए साझा डिजिटल बुनियादी ढांचा विकसित करेगा।
  • यह मिशन वर्ष 2022 तक 2022 शहरों और 2024 तक भारत के सभी शहरों और नगरों में शहरी शासन और सेवा वितरण के लिए नागरिक केन्द्रित और इकोसिस्टम द्वारा संचालित दृष्टिकोण को साकार करने का काम करेगा।
  • इस मिशन के तहत, फरवरी 2019 में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए नेशनल अर्बन इनोवेशन स्टैक (एनयूआईएस) की रणनीति और दृष्टिकोण आधारित प्रौद्योगिकी डिजाइन सिद्धांतों का अनुसरण किया है।

बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICOLD)

(International Commission on Large Dams)

संदर्भ:

हाल ही में, बांधों और नदियों के सतत विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICOLD) की विशाल बांध संगोष्ठी का उद्घाटन किया गया है।

  • बड़े बांधों पर अंतर्राष्ट्रीय आयोग / ‘इंटरनेशनल कमीशन ऑन लार्ज डैम’ (ICOLD) एक गैर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो बांध इंजीनियरिंग में जानकारी और अनुभव के आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करता है।
  • ICOLD की स्थापना 1928 में हुई थी और इसमें लगभग 10000 निजी सदस्यों के साथ 100 से अधिक देशों की राष्ट्रीय समितियाँ शामिल है।
  • इसके सदस्यों में ज्यादातर इंजीनियर, भूविज्ञानी और वैज्ञानिक सरकारी या निजी संगठनों, परामर्श फर्मों, विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं और निर्माण कंपनियां आदि होते हैं।
  • ICOLD, मानकों और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने में पेशेवरों का नेतृत्व करता है तथा यह सुनिश्चित करता है, कि निर्मित किये जाने वाले बांध पर्यावरण की दृष्टि से स्थायी और सामाजिक रूप से न्यायसंगत हों तथा इनका सञ्चालन सुरक्षित और कुशलतापूर्वक किया जाए।
  • इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में है।

 

पहले कवर किए जा चुके आर्टिकल:


1. मंत्रिमंडल द्वारा पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए मंजूरी प्रदान कर दी गयी है:

जैसा कि अपेक्षित था, पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया गया है। मुद्दे पर कोई नया घटनाक्रम नहीं है। हमने पहले से ही राष्ट्रपति शासन को पहले से ही कवर कर चुके है:

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 23 February 2021 – INSIGHTSIAS (insightsonindia.com)

 

2. मंत्रिमंडल ने औषधियों (फार्मास्‍यूटिकल्‍स) के लिए उत्‍पादन आधारित प्रोत्‍साहन योजना को मंजूरी दी

नवीनतम घटनाक्रम: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने फार्मास्यूटिकल्स और आईटी हार्डवेयर क्षेत्रों के लिए उत्पादन संबंधी प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत क्रमशः  15,000 करोड़ रुपए और 7,350 करोड़ रुपए के परिव्यय को मंजूरी दे दी है।

योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें:

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 February 2021 – INSIGHTSIAS (insightsonindia.com)

कृपया ध्यान दें, नवंबर 2020 में, सरकार ने 10 प्रमुख क्षेत्रों के लिए पीएलआई योजना को मंजूरी दी जिसमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  1. एडवांस केमिस्ट्री।
  2. इलेक्ट्रॉनिक / प्रौद्योगिकी उत्पाद।
  3. ऑटोमोबाइल और घटक।
  4. फार्मास्यूटिकल ड्रग्स।
  5. दूरसंचार और नेटवर्किंग उत्पाद।
  6. कपड़ा उत्पाद: MMF खंड और तकनीकी वस्त्र।
  7. खाद्य उत्पाद।
  8. उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल।
  9. व्हाइट गुड्स (एसी और एलईडी)।
  10. विशिष्ट इस्पात।

योजना के बारे में, कृपया निम्नलिखित पर ध्यान दें:

  1. अर्हक क्षेत्र।
  2. न्यूनतम और अधिकतम निवेश सीमा
  3. वृद्धिशील निवेश क्या है?
  4. प्रोत्साहन
  5. क्या विदेशी व्यवसायी इसके लिए पात्र हैं?
  6. योजना का समग्र लाभ।

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