How to Follow Secure Initiative?
How to Self-evaluate your answer?
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सामान्य अध्ययन – 1
विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।
1. नमक कानून विरोध का प्रमुख केंद्र क्यों बन गया था? स्वतंत्रता के लिए भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में दांडी मार्च के महत्व पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Hindustan Times
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
नमक कानून एवं इसकी पृष्ठभूमि पर संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
नमक कानून विरोध का प्रमुख केंद्र क्यों बन गया था? विस्तार से समझाइए।
दांडी मार्च के महत्व पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष:
भारत के आधुनिक इतिहास में इसके प्रभाव एवं महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 2
विषय: राज्य नीति के निदेशक तत्व।
2. क्या राज्य नीति के निदेशक तत्वों की गैर-प्रवर्तनीयता उन्हें मौलिक अधिकारों के प्रति निष्क्रिय बनाती है? आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत
निर्देशक शब्द:
आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
इस बहस के उत्पन्न होने के कारणों पर चर्चा कीजिए।
विषय वस्तु:
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल कीजिए:
इस तथ्य को दर्शाने वाले बिंदुओं पर प्रकाश डालिए कि अपनी रक्षणीय प्रकृति एवं अनुच्छेद 32 के कारण मौलिक अधिकार, राज्य नीति के निदेशक तत्वों से बेहतर हैं।
समझाइए कि उपरोक्त कथन सेब एवं संतरे की तुलना करने के समान क्यों है? क्योंकि मौलिक अधिकार नागरिक एवं सामुदायिक अधिकार प्रदान करने का प्रयास करते हैं जबकि राज्य नीति के निदेशक तत्व सामाजिक-आर्थिक अधिकार प्रदान करते हैं, जो एक कल्याणकारी राज्य के निर्माण का प्रयास करते हैं।
अपने पक्ष के पुष्टिकरण के लिए संवैधानिक विशेषज्ञों जैसे डॉक्टर अंबेडकर आदि के दृष्टिकोण पर अपना पक्ष प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिए कि उच्चतम न्यायालय ने भी भाग III और भाग IV के मध्य संतुलन बनाए रखने के लिए सामंजस्यपूर्ण निर्माण का सिद्धांत दिया था।
विषय: राज्य नीति के निदेशक तत्व।
3. राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत क्या हैं? उनके वर्गीकरण पर एक लेख लिखते हुए उनकी आलोचना पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत
निर्देशक शब्द:
लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
राज्य नीति के निदेशक तत्व क्या हैं? समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल कीजिए:
राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत, भारतीय संविधान में इसका महत्व एवं मौलिक अधिकारों के साथ इसके संघर्ष के इतिहास पर चर्चा कीजिए।
उन्हें विस्तार से वर्गीकृत कीजिए: समाजवादी सिद्धांत, गांधीवादी सिद्धांत एवं उदार-बौद्धिक सिद्धांत।
इनके विरुद्ध आलोचनाएं प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 3
विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।
4. भारतीय कार्यबल में प्रचलित लैंगिक अंतराल पर एक लेख लिखिए। आर्थिक भागीदारी एवं अवसरों के मामले में यह और भी अधिक गहरा क्यों है? स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Economic Times
निर्देशक शब्द:
लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।
स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
लैंगिक अंतराल से आप क्या समझते हैं? समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
कुछ आंकड़ों एवं तथ्यों की सहायता से लैंगिक अंतराल की व्याख्या कीजिए।
इसके अंतर्निहित कारकों को प्रस्तुत कीजिए। आर्थिक भागीदारी एवं अवसर की प्रासंगिकता के सन्दर्भ में उपर्युक्त को समझाइए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
5. महामारी ने भारत को अपनी घरेलू एवं विदेशी नीतियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को मुख्यधारा में लाने के लिए एक विशेष स्थान प्रदान किया है। क्या आप सहमत हैं? टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
कोविड-19 के द्वारा विश्व के समक्ष उजागर की गयी सीमाओं को संक्षेप में बताते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
वर्तमान महामारी जैसी परिस्थितियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा निभाई जा सकने वाली महत्वपूर्ण भूमिकाओं पर चर्चा कीजिए।
उन्हें घरेलू एवं विदेशी नीतियों का भाग कैसे बनाया जा सकता है? समझाइए।
भारत में चल रहे “वैक्सीन मैत्री” अभियान का उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
समझाइए कि सीमाओं के बावजूद, भारत अभी भी एशिया एवं अफ्रीका में स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपने सहयोगियों की सहायता करने में कामयाब रहा है।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 4
विषय: सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।
6. सत्यनिष्ठा की अवधारणा पर चर्चा कीजिए। समझाइए कि कैसे यह न तो एक एकल चरित्र विशेषता है और न ही किसी विशेष भूमिका तक सीमित है। (250 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
सत्यनिष्ठा को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सत्यनिष्ठा की अवधारणा की व्याख्या कीजिए।
समझाइए कि कैसे यह न तो एक एकल चरित्र विशेषता है और न ही किसी विशेष भूमिका तक सीमित है।
निष्कर्ष:
विशेष रूप से प्रशासन के लिए इसके महत्व एवं प्रासंगिकता को समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।
7. भावनाएँ, जिन्हे पहले निर्णय निर्धारण के तर्कहीन कारक के रूप में माना जाता था, अब निर्णय निर्धारण के एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में जानी जाती हैं। इस संबंध में, पुलिस अधिकारियों एवं सशस्त्र बलों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में तीव्र दबाव तथा व्यावसायिक तनाव का सामना करने में भावनात्मक बुद्धिमत्ता कैसे सहायता कर सकती है? विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन प्रकाशन, www.ncbi.nlm.nih.gov
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
भावनात्मक बुद्धिमत्ता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल कीजिए:
भावनात्मक बुद्धिमत्ता का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
समझाइए कि यह व्यावसायिक तनाव एवं दबाव से निपटने में पुलिस एवं सशस्त्र बलों की सहायता कैसे कर सकती है।
सार्वजनिक सेवाओं में भावनात्मक बुद्धिमत्ता कौशल को शामिल करने एवं उनका आकलन करने सम्बन्धी कुछ चिंताओं को सूचीबद्ध कीजिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिए कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता अभी तक भारत में सार्वजनिक सेवाओं का एक महत्वपूर्ण घटक नहीं है। हालांकि, इसे लोक सेवकों के लिए उचित माना जाना चाहिए क्योंकि उन्हें लोगों की आवश्यकताओं के प्रति विशेष रूप से, निरंतर परिवर्तन के माहौल में संवेदनशील एवं प्रतक्रियाशील होना चाहिए।








