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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. इन्फ्लु0एंजा A (H5N8) वायरस

2. अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. तेलंगाना के स्कूलों में शत-प्रतिशत नल जल कनेक्शन की उपलब्धिता

2. आरटी-पीसीआर परीक्षण

3. कार्बन वॉच – कार्बन पदचिह्नों का आकलन करने हेतु भारत का पहला ऐप

4. ‘एक राष्ट्र एक मानक’ अभियान

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (LOC)

2. काले पैर वाला गंधबिलाव

3. संत रविदास जी

4. ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

इन्फ्लुएंजा A (H5N8) वायरस


संदर्भ:

हाल में, रूस ने कहा है, कि देश में, मनुष्यों में H5N8 एवियन फ्लू के पहले मामले का पता चला है। इससे विश्व स्वास्थ्य संगठन को सावधान हो गया है।

एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस के विभिन्न उपप्रकार होते हैं। हालांकि, H5N8, एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस का अत्यधिक संक्रामक उपप्रकार है, जोकि पक्षियों के लिए घातक होता है, तथा मनुष्यों में अभी तक इसके फैलने की सूचना नहीं पायी गई थी।

एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) के बारे में:

  • एवियन इन्फ्लूएंजा (Avian influenza-AI) पक्षियों, मनुष्यों और अन्य जानवरों को संक्रमित करने में सक्षम एक एक वायरल संक्रमण है। हालांकि इस वायरस के अधिकांश प्रकार केवल पक्षियों को संक्रमित करने तक सीमित हैं।
  • यह एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है जो खाद्य पदार्थो के रूप में उपयोग होने वाले पक्षियों (मुर्गियों, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, आदि) सहित पालतू पक्षियों और जंगली पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करती है।
  • कभी-कभी यह वायरस मानव सहित अन्य स्तनधारियों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • ‘इन्फ्लूएंजा ए’ वायरस को दो प्रकार के प्रोटीन हेमाग्लगुटिनिन (Hemagglutinin- HA) और न्यूरोमिनिडेस (Neuraminidase- NA) के आधार पर उप-प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है।

इन्फ्लुएंजा ए (H5N8) विषाणु:

पेरिस स्थित वर्ल्ड आर्गेनाईजेशन फॉर एनिमल हेल्थ के अनुसार, H5N8 एवियन इन्फ्लूएंजा पक्षियों का एक रोग है।

  • यह टाइप “ए” इन्फ्लूएंजा वायरस (Type “A” influenza viruses) के कारण फैलता है।
  • इस वायरस से पालतू पक्षी, जंगली प्रवासी पक्षी, जल-मुर्गाबी, घरेलू मुर्गियों की कई प्रजातियां जैसे मुर्गियां, टर्की, बटेर, गिनी फाउल, बतख आदि प्रभावित हो सकते हैं।

इस वायरस का प्रसरण:

अब तक मनुष्यों में H5N8 विषाणु संक्रमण के मामले नहीं पाए गए है। आम जनता के लिए इसके संक्रमण का जोखिम काफी कम है।

  • अभी तक, मुर्गी के मांस या अंडे के सेवन से मनुष्यों में वायरस पहुचने संबंधी कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।
  • किंतु नियंत्रण और निवारण कार्यों के दौरान बीमार / मृत पक्षियों और दूषित पदार्थो के प्रबंधन करते समय आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
  • उचित ढंग से पके हुए पोल्ट्री उत्पादों को खाने के लिए सुरक्षित माना जाता है।

नियंत्रण उपाय:

जानवरों में वायरस संक्रमण का पता चलने पर, सामान्यतः संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए इनको मारना (Culling) शुरू किया जाता है।

  • जानवरों की हत्या करने के अलावा, मारे गए सभी जानवरों तथा अन्य संबंधित उत्पादों का सुरक्षित निपटान भी महत्वपूर्ण होता है।
  • अधिकारियों द्वारा संक्रमित परिसरों को सख्ती से परिशोधन कराया जाना और दूषित वाहनों और कर्मियों को संगरोध (Quarantine) किया जाना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किसी देश के ’एवियन इन्फ्लुएंजा से मुक्त’ होने की घोषणा किसके द्वारा की जाती है?
  2. H5N1 बनाम H5N6 बनाम H9N2 बनाम H5N8।

मेंस लिंक:

बर्ड फ्लू पर एक टिप्पणी लिखिए। इसे किस प्रकार रोका जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA)


(International Atomic Energy Agency)

संदर्भ:

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के चीफ ने बताया है, कि ईरान में, एजेंसी को निगरानी जारी रखने की अनुमति देने के संबंध में तीन महीने का एक “अस्थायी समाधान” खोजा गया है, हालांकि इसके तहत एजेंसी की पहुंच का स्तर सीमित होगा।

संबंधित प्रकरण:

ईरान की रूढ़िवादी-प्रभुत्व वाली संसद द्वारा पिछले वर्ष दिसंबर में एक कानून पारित किया गया था, जिसमे, यदि अमेरिका, ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त नहीं करता है, तो देश में किए जा रहे कुछ निरीक्षणों को स्थगित करने का प्रावधान किया गया था। यह कानून मंगलवार से लागू होने वाला है।

इस कदम का महत्व:

यह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के प्रशासन, यूरोपीय शक्तियों और ईरान द्वारा वर्ष 2015 के परमाणु समझौते को बचाने की एक कोशिश है। यह समझौता, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा, एकपक्षीय रूप से अमेरिका को अलग करने के बाद से टूटने के कगार पर है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की स्थापना, वर्ष 1957 में संयुक्त राष्ट्र संघ भीतर ‘वैश्विक शांति के लिए परमाणु संगठन’ के रूप की गयी थी। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्वायत संगठन है।

  • इसका उद्देश्य विश्व में परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। यह परमाणु ऊर्जा के सैन्य उपयोग को किसी भी प्रकार रोकने में प्रयासरत रहती है।
  • IAEA, संयुक्त राष्ट्र महासभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों को रिपोर्ट करती है।
  • इसका मुख्यालय वियना, ऑस्ट्रिया में स्थित है।

प्रमुख कार्य:

  1. IAEA, अपने सदस्य देशों तथा विभिन्न भागीदारों के साथ मिलकर परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित, सुदृढ़ और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कार्य करता है।
  2. इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना तथा परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स:

  • 22 सदस्य राज्यों (प्रत्येक द्वारा निर्धारित भौगोलिक विविधता का प्रतिनिधित्व) – सामान्य सम्मेलन द्वारा निर्वाचन (प्रत्येक वर्ष 11 सदस्य) – 2 वर्ष का कार्यकाल
  • कम से कम 10 सदस्य देश – निवर्तमान बोर्ड द्वारा नामित

IAEA की भूमिकाएँ:

  • IAEA गतिविधियों और बजट पर जनरल कॉन्फ्रेंस के लिए सिफारिशें करना
  • IAEA मानकों को प्रकाशित करना
  • IAEA की अधिकांश नीतियों का निर्माण करना
  • जनरल कॉन्फ्रेंस के अनुमोदन से महानिदेशक की नियुक्त करना

IAEA द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम:

  1. कैंसर थेरेपी हेतु कार्रवाई कार्यक्रम (Program of Action for Cancer Therapy- PACT)
  2. मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम
  3. जल उपलब्धता संवर्धन परियोजना
  4. अभिनव परमाणु रिएक्टरों और ईंधन चक्र पर अंतर्राष्ट्रीय परियोजना, 2000

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  2. IAEA के सदस्य
  3. IAEA के कार्यक्रम।
  4. बोर्ड ऑफ गवर्नर- रचना, मतदान और कार्य
  5. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

तेलंगाना के स्कूलों में शत-प्रतिशत नल जल कनेक्शन की उपलब्धिता  


संदर्भ:

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल जीवन अभियान’ के अंतर्गत, स्कूलों, आंगनवाड़ियों और आश्रमशालाओं के लिए, 100 दिन के विशेष अभियान के तहत, नल-कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

  • हाल ही में, तेलंगाना, सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों (AWCs) को पानी के नल का कनेक्शन सुनिश्चित करने वाले राज्यों के समूह में शामिल हो गया है।
  • इससे पहले, तेलंगाना, राज्य के सभी परिवारों को पानी के नल का कनेक्शन प्रदान करने वाला पहला राज्य था।

‘जल जीवन मिशन’ के बारे में:

‘जल जीवन अभियान’ अगस्त 2019 में घोषित किया गया था।

  • इस मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों के लिए पाइप से जलापूर्ति (हर घर जल) प्रदान करना है।
  • इसके तहत, दीर्घकालिक और नियमित आधार पर निर्धारित गुणवत्ता युक्त सभी परिवारों में प्रति दिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर तक पानी की आपूर्ति की जाएगी।
  • इसका लक्ष्य, कृषि-कार्यों हेतु जल के पुन: उपयोग के लिए वर्षा-जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और घरेलू अपशिष्ट जल-प्रबंधन के लिए स्थानीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है।

कार्यान्वयन:

गांधीजी के ग्राम स्वराज के सिद्धांतों का पालन करते हुए, जल जीवन मिशन के तहत, पेयजल सुरक्षा हासिल करने तथा दीर्घकालिक संवहनीयता सुनिश्चित करने हेतु जल-आपूर्ति प्रणालियों के संबंध में योजना, कार्यान्वयन, प्रबंधन, संचालन और रखरखाव के लिए, स्थानीय ग्रामीण समुदायों / ग्राम पंचायतों अथवा उप-समितियों अर्थात, ग्राम-जल और स्वच्छता समिति / पानी समिति / 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं वाले 10-15 सदस्यीय उपभोक्ता समूहों को शामिल किया जाएगा।

वित्तीयन प्रतिरूप:

  1. मिशन के अंतर्गत, केंद्र एवं राज्यों के मध्य, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों हेतु 90:10, अन्य राज्यों के लिए 50:50 के अनुपात में वितीय सहायता प्रदान की जाएगी, और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए, केंद्र द्वारा 100% वित्त-पोषण किया जाएगा।
  2. केंद्र द्वारा, 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए 50% सहायता राशि, 1 लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों के लिए एक-तिहाई और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए 25% सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

मिशन की आवश्यकता एवं महत्व:

भारत में विश्व की 16% आबादी है, लेकिन विश्व के कुल मीठे पानी के संसाधनों का मात्र 4% है। पीने के पानी को उपलब्ध कराने में, भूजल स्तर में गिरावट होना, अत्याधिक दोहन तथा पानी की गुणवत्ता में कमी, जलवायु परिवर्तन आदि प्रमुख चुनौतियोँ का सामना करना पड़ता हैं। भूजल-स्तर में होने वाली गिरावट के कारण, देश में जल संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। इसलिए जल जीवन मिशन, के तहत स्थानीय स्तर पर पानी की एकीकृत मांग और आपूर्ति प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आरटी-पीसीआर परीक्षण


(RT-PCR tests)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने राज्यों से कोरोना वायरस महामारी पर नियंत्रण हेतु परीक्षणों को बढ़ावा देने के लिए ‘आरटी-पीसीआर परीक्षणों’ (RT-PCR tests) में वृद्धि करने के लिए कहा है।

कोविड-19 का पता लगाने हेतु RT-PCR का किस प्रकार उपयोग किया जाता है?

COVID-19 बीमारी SARS-COV-2 नामक विषाणु के संक्रमण से होती है। यह एक आरएनए वायरस (RNA virus) होता है, अर्थात, यह अपनी वृद्धि करने हेतु एक स्वस्थ कोशिका में घुसपैठ करता है।

इस लिए, SARS-CoV-2 RNA पता लागने हेतु RT-PCR परीक्षण किया जाता है। इसमें, वायरस की पहचान करने हेतु,  RNA को ‘रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन’ नामक एक प्रक्रिया के माध्यम से DNA में परिवर्तित किया जाता है।

परीक्षण क्रियाविधि (नोट: इसे सिर्फ समझने के लिए पढ़ें):

  1. आमतौर पर, SARS-CoV-2 RNA वायरस का संक्रमण के तीव्र चरण के दौरान ‘श्वसन नमूनों’ (respiratory specimens) में पता लगाया जा सकता है।
  2. इसके लिए ऊपरी और निचले श्वसन नमूने (जैसे कि नाक तथा नासाग्रसनी संबंधी- Nasopharyngeal) एकत्र किए जाते हैं।
  3. इन नमूनों को कई रासायनिक विलयनों में संशोधित करके, इनमे से प्रोटीन तथा वसा जैसे पदार्थों को हटा दिया जाता है, और इसके बाद नमूने में उपस्थित RNA को अलग किया जाता है।
  4. रियल-टाइम RT-PCR सेटअप, आमतौर पर 35 चक्रों से होकर गुजरता है, अर्थात, प्रक्रिया के अंत तक, नमूने में मौजूद वायरस के प्रत्येक कतरे से लगभग विषाणुजनित DNA खंडो की लगभग 35 बिलियन नई प्रतियां बनाई जाती हैं।
  5. विषाणुजनित DNA खंडो की नई प्रतियां बनते ही प्रत्येक को चिन्हित करके फ्लोरोसेंट रंग छोड़ा जाता है, जिसे रियल टाइम में मशीन से जुड़े कंप्यूटर से मापा जाता है। प्रत्येक चक्र के बाद, कंप्यूटर, नमूने में फ्लोरोसेंट की मात्रा को ट्रैक करता है। जब फ्लोरोसेंट की मात्रा, एक निश्चित स्तर से अधिक हो जाती है, तब नमूने में वायरस की मौजूदगी की पुष्टि हो जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आरएनए और डीएनए के बीच अंतर।
  2. आरटी पीसीआर और एंटीबॉडी परीक्षणों के बीच अंतर।
  3. आरएनए वायरस क्या है? यह कैसे बचता है?
  4. ‘एंटीबॉडी’ क्या होती हैं?

मेंस लिंक:

RT- PCR टेस्ट के महत्व पर चर्चा करें।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

कार्बन वॉच – कार्बन पदचिह्नों का आकलन करने हेतु भारत का पहला ऐप


(What is Carbon Watch— India’s 1st app to assess one’s carbon footprint?)

संदर्भ:

चंडीगढ़, कार्बन-निगरानी (Carbon Watch) की शुरुआत करने वाला भारत का पहला राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बन गया है।

कार्बन-निगरानी (Carbon Watch) क्या है?

यह किसी व्यक्ति के कार्बन पदचिह्नों (carbon footprint) का आकलन करने के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन है।

‘कार्बन पदचिह्न’ क्या होते है?

कार्बन पदचिह्न (carbon footprint), किसी विशेष मानव-गतिविधि के परिणाम-स्वरूप द्वारा वातावरण में उत्सर्जित होने वाली ग्रीनहाउस गैसों-विशेष रूप से ‘कार्बन डाइऑक्साइड’ की मात्रा होते है।

‘कार्बन वॉच’ ऐप किस प्रकार काम करता है?

  1. जैसे ही कोई व्यक्ति यह एप्लिकेशन डाउनलोड करता है, उसे चार भागों में, जल, ऊर्जा, अपशिष्ट उत्पादन और परिवहन (वाहन चालन) संबंधी, विवरण भरना होगा। प्रत्येक श्रेणी में, उसे अपने द्वारा किये जाने वाले उपभोग और अपशिष्ट-उत्पादन बारे में सूचित करना होगा।
  2. जानकारी दर्ज करने के साथ ही, मोबाइल एप्लिकेशन निजी रूप से व्यक्ति के कार्बन पदचिह्नों की गणना करेगी।
  3. यह एप्लिकेशन में राष्ट्रीय और विश्व स्तर पर उत्सर्जन, तथा व्यक्ति के द्वारा निजी स्तर पर किये जाने वाले उत्सर्जन जैसी जानकारी भी प्रदान की जाएगी।

समाधान:

ये मोबाइल एप्लिकेशन, कार्बन पदचिह्नों को कम करने संबंधी तरीकों के बारे में भी सुझाव देगी, और व्यक्तियों द्वारा दर्ज की गयी जानकारी के आधार पर तरीके सुझाएगी।

इस एप्लिकेशन को डिजाइन करने के पीछे उद्देश्य:

इस एप्लिकेशन का उद्देश्य, लोगों को अपने कार्बन फुटप्रिंट का आकलन करने में सक्षम बनाने के साथ-साथ, कार्बन फुटप्रिंट कम करने के तरीकों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराके क्लाइमेट-स्मार्ट नागरिक बनाना है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

‘एक राष्ट्र एक मानक’ अभियान


(‘One Nation One Standard’ Mission)

संदर्भ:

हाल ही में, खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल द्वारा र्सश्त्रीय स्तर पर मानकों में एकरूपता लाने हेतु ‘एक राष्ट्र एक मानक’ अभियान / ‘वन नेशन वन स्टैंडर्ड’ मिशन (‘One Nation One Standard’ Mission) की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, और उन्होंने कहा है, कि भारत में प्रयोगशाला परीक्षण (labs testing) विश्व मानक स्तर के होने चाहिए।

भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian StandardsBIS) के कार्यो  की समीक्षा करते हुए, मंत्री ने यह बातें कही।

‘एक राष्ट्र एक मानक’ अभियान के बारे में:

  • ‘वन नेशन वन स्टैंडर्ड’ मिशन पर पहली बार सितंबर, 2019 में विचार किया गया था।
  • देश में उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु, एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ योजना की तर्ज पर, इस मिशन की परिकल्पना की गई थी।
  • इसका उद्देश्य, देश में प्रचलित विभिन्न मानकों को ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ ( BIS) के साथ संबंद्ध करना है। ‘भारतीय मानक ब्यूरो’, भारत में मानकीकरण के लिए एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय निकाय है।

आवश्यकता:

  • उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के लिए बनाए गए मानक, अक्सर राष्ट्र की शक्ति और चरित्र का उदाहरण पेश करते हैं।
  • सभी प्रकार की सार्वजनिक खरीद का मानकीकरण और राष्ट्रीय एकरूपता लाने के लिए तत्काल निविदा जारी की जा सकती है।
  • समान राष्ट्रीय मानक अधिक उत्पादों के लिए मानकीकरण को अनिवार्य बनाने में मदद करेंगे।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के बारे में:

  • मानकों का निर्धारण करने हेतु ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ (BIS) एकमात्र राष्ट्रीय निकाय है।
  • यह उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में कार्य करता है।
  • बीआईएस, वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन / चिह्नांकन और गुणवत्ता प्रमाणन संबंधी गतिविधियों का सामंजस्यपूर्ण विकास करने तथा इनसे संबंधित मामलों का समाधान करने के लिए जिम्मेदार है।

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) अधिनियम 2016, के तहत ‘भारतीय मानक ब्यूरो’ को भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में स्थापित किया गया है।

  • यह अधिनियम केंद्र सरकार को, उत्पादों और सेवाओं के लिए स्थापित मानकों के अनुरूप होने को सत्यापित करने तथा अनुरूपता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए, भारतीय मानक ब्यूरो के अलावा, किसी प्राधिकरण / एजेंसी को नियुक्त करने का अधिकार देता है।
  • इस अधिनियम में, संबंधित भारतीय मानकों के अनुरूप नहीं होने वाले उत्पादों (स्टैंडर्ड मार्किंग वाले) में सुधार करने अथवा वापस लिए जाने का प्रावधान किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के बारे में
  2. कार्य
  3. बीआईएस अधिनियम 2016 का अवलोकन

मेंस लिंक:

‘वन नेशन वन स्टैंडर्ड’ मिशन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ (LOC)

  • लाइन ऑफ क्रेडिट (LOC) विकासशील देशों को रियायती ब्याज दरों पर दिया जाने वाला एक ‘सॉफ्ट लोन’ होता है, जिसे ऋणकर्ता सरकार को चुकाना होता है। लाइन ऑफ क्रेडिट ‘अनुदान’ नहीं होता है।
  • उधारकर्ता, किसी भी समय ‘लाइन ऑफ क्रेडिट’ से धन-राशि हासिल कर सकते हैं, बशर्ते, उनका ऋण समझौते के तहत निर्धारित अधिकतम राशि (या क्रेडिट सीमा) से अधिक न हुआ हो और समय पर न्यूनतम भुगतान करने, जैसी अन्य अनिवार्यताओं को पूरा करते हों।

संदर्भ:

हाल ही में, भारत और मालदीव के मध्य ने 50 मिलियन डॉलर मूल्य के डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट  समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

काले पैर वाला गंधबिलाव

(Black-footed ferret)

हाल ही में, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने काफी लंबे समय से मृत जंगली जानवर की कोशिकाओं का उपयोग करके, एक लुप्तप्राय काले पैर वाले नेवले की प्रजाति के जीव, गंधबिलाव (ferret) का सफलतापूर्वक ‘क्लोन’ तैयार किया है।

  • संयुक्त राज्य अमेरिका में, यह पहली बार किसी भी मूल-निवासी लुप्तप्राय प्रजाति का ‘क्लोन’ है।
  • यह, उत्तरी अमेरिका में पाई जाने वाली एकमात्र स्थानीय ‘फेरेट’ प्रजाति है।
  • वर्ष 1981 में इस प्रजाति के सात जीव देखे गए थे, इससे पहले इसे विलुप्त माना जाता था।

संत रविदास जी

  • ये उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के संत-कवि थे।
  • ये रविदासिया संप्रदाय के संस्थापक थे।
  • इन्होने जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ उपदेश एवं शिक्षा दी।
  • उनके द्वारा रचित कुछ भक्ति छंदों को गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया है।

‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’

(International Mother Language Day)

  • प्रतिवर्ष 21 फरवरी को ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ मनाया जाता है।
  • ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ का आयोजन, भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बारे में जागरूकता बढ़ाने और बहुभाषिता को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
  • ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ की घोषणा वर्ष 1999 में पहली बार यूनेस्को द्वारा की गयी थी, हालांकि, औपचारिक रूप से, इसे संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 2002 में मान्यता प्रदान की गई।
  • अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाने का विचार ‘बांग्लादेश’ द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

IMLD 2021 का विषय: “शिक्षा और समाज में समावेशन हेतु बहुभाषिता को बढ़ावा देना” (Fostering multilingualism for inclusion in education and society)।


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