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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 20 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना

2. मध्यप्रदेश अध्यादेश के खिलाफ याचिका खारिज

3. श्रीलंकाई तमिलों का मुद्दा

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पी-नोट्स (P-Notes)

2. केयर्न मध्यस्थता निर्णय के खिलाफ सरकार द्वारा अपील दायर करने की संभावना

3. नई ‘सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘विश्वभारती’

2. चर्चित स्थान: नाथू ला

3. पुगलुर-त्रिशूर (HVDC) परियोजना

4. ‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो’ क्या है?

5. हेलिना और ध्रुवास्त्र

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वन रैंक वन पेंशन योजना (OROP)


संदर्भ:

पिछले जून से, ‘वन रैंक वन पेंशन’ (One Rank One Pension- OROP) की समीक्षा लंबित है। हाल ही में, संसदीय समिति की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा हुई।

पृष्ठभूमि:

इस योजना में कुछ ‘कमियां’ (loopholes) हैं, जिनमें सुधार किए जाने की आवश्यकता है। रक्षा मंत्रालय द्वारा इस मुद्दे की जाँच करने तथा योजना का पुनरीक्षण करने संबंधी तौर-तरीकों हेतु सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया गया था, किंतु पुनरीक्षण शुरु करने के बारे में कोई घोषणा नहीं की गई थी।

‘OROPक्या है?

  • ‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) का तात्पर्य, सेवानिवृत्ति की तारीख पर विचार किये बगैर, कार्मिक को रैंक और सेवाकाल के आधार पर समान पेंशन दिए जाने से है।
  • सेवानिवृत्त सैनिकों की काफी लंबे समय से लंबित इस मांग को सरकार ने नवंबर 2015 में लागू किया था और अधिसूचना के अनुसार, ‘वन रैंक वन पेंशन’ का प्रति पांच वर्ष में पुनरीक्षण किया जाएगा।
  • 30 जून 2014 तक सेवानिवृत्त होने वाले सशस्त्र बलों के कार्मिकों को, इस योजना के तहत कवर किया गया है ।
  • इस योजना का कार्यान्वयन ‘कोश्यारी समिति’ की सिफारिशों के आधार पर किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OROP क्या है?
  2. लाभ
  3. पात्रता

मेंस लिंक:

‘वन रैंक वन पेंशन’ (OROP) योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

मध्यप्रदेश अध्यादेश के खिलाफ याचिका खारिज


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायलय ने विवादास्पद मध्यप्रदेश अध्यादेश की वैधता को चुनौती देते देने वाली एक रिट याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसके स्थान पर, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से उच्च न्यायालय में याचिका स्थानांतरित करने को कहा है।

याचिकाकर्ता की मांग:

याचिका में कहा गया है, उत्तर प्रदेश में लागू इसी प्रकार के अध्यादेश की तर्ज पर बनाया गया यह क़ानून, व्यक्ति की निजता और पसंद की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है, जिससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a)  और 21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। इसी तरह का कानून उत्तराखंड में भी लागू है।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक 2020  के प्रमुख प्रावधान:

[(Madhya Pradesh Dharmik Swatantrata (Freedom of Religion) Bill 2020]
  1. प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य राज्य में अंतरधार्मिक विवाहों (inter-faith marriages) को विनियमित करना है।
  2. मूल धर्म में पुन:परिवर्तन को इस क़ानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
  3. इसके तहत ‘विवाह अथवा अन्य बलात माध्यमों से धर्मांतरण’ कराने पर 10 साल तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  4. इस विधेयक में, गलत-बयानी/ बहकाने, प्रलोभन, धमकी, अनुचित दबाव, बल-पूर्वक, विवाह और किसी अन्य धोखाधड़ी के माध्यम से धर्मांतरण का प्रयास करने अथवा धर्म-परिवर्तन करने पर रोक लगाने हेतु प्रावधान किये गए हैं।
  5. धर्मांतरण के लिए किसी व्यक्ति को प्रेरित करने अथवा साजिश करने को भी प्रतिबंधित किया गया है।
  6. इसके तहत,  बलपूर्वक धर्मांतरण और विवाह एक संज्ञेय अपराध होगा और गैर-जमानती होगा।

‘विवाह और धर्मांतरण’ पर उच्चतम न्यायालय की राय:

  • भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई निर्णयों में माना है कि जीवन साथी का चयन करने हेतु किसी वयस्क के पूर्ण अधिकार पर राज्य और अदालत अथवा धर्म का कोई क्षेत्राधिकार नहीं है।
  • लिली थॉमस और सरला मुद्गल दोनों मामलों में भारत के उच्चतम न्यायालय ने पुष्टि की है कि वास्तविक आस्था के बिना और कुछ कानूनी लाभ उठाने के उद्देश्य से किए गए धर्म परिवर्तन का कोई आधार नहीं है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 21 के बारे में
  2. अनुच्छेद 25
  3. सलामत अंसारी-प्रियंका खरवार मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय

मेंस लिंक:

किसी साथी को चुनने का अधिकार अथवा अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ रहने का अधिकार, नागरिकों के ‘जीवन और स्वतंत्रता संबंधी मूल अधिकार’ का भाग है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

श्रीलंकाई तमिलों संबंधी मुद्दा


संदर्भ:

हालाँकि, श्रीलंका में सशस्त्र संघर्ष की समाप्ति वर्ष 2009 में हो गयी थी, लेकिन हजारों तमिल नागरिकों की मौतों, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘खूनी-स्नान’ / ‘ब्लडबाथ’ (bloodbath) कहा गया था, के लिए प्राप्त ‘दण्ड मुक्ति’ पर, उस समय से, मानवाधिकार परिषद एजेंडे का संघर्ष जारी है।

तत्कालीन घटनाएं:

श्रीलंका में तत्कालीन राष्ट्रवादी सिंहली सरकार के शासन में, अल्पसंख्यक तमिलों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा था। देश में पहले से बनी हुई इस दरार में, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम के नेतृत्व में चरमपंथ ने ईंधन का काम किया, जिससे देश वर्षों तक गृहयुद्ध की आग में उलझा रहा।

पृष्ठभूमि:

श्रीलंका फ्रीडम पार्टी में नेतृत्व वाली पिछली श्रीलंकाई सरकार द्वारा वर्ष 2013 में सम्मिलित रूप से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, जिसमे, तीन दशक लंबे गृहयुद्ध के अंतिम चरण, मई 2009 में, सरकारी बलों और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम द्वारा किये गए तथाकथित युद्ध-अपराधों के लिए उत्तरदायी ठहराने की मांग की गयी थी।

हाल ही में, श्रीलंका पोडुजना पेरमुना (SLPP) के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

पी-नोट्स (P-Notes)


संदर्भ:

ओवरसीज डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के पार्टिसिपेटरी नोट्स (Participatory notes / P-Notes) में नियामकों के ‘बाल खड़े कर देने’ (hackles) की प्रवृत्ति होती है।

नवंबर महीने में, 31 महीनों के दौरान, बकाया पी-नोट्स का स्तर अधिक ऊंचा होने से काफी अड़चने पैदा होने की संभावना है।

संबंधित चिंताएं:

  • वर्ष 2008 से पहले, इन उपकरणों का व्यापक दुरुपयोग होने से, ये काफी बदनाम हो चुके हैं।
  • पी-नोट्स द्वारा प्रदान की जाने वाली अनामिकता (anonymity) की वजह से ईकाईयों द्वारा इस मार्ग का उपयोग ‘राउंड-ट्रिप फंड्स’ के लिए किया जाता है। ज्ञात हो कि, पी-नोट्स में अंतिम धारकों की पहचान नियामकों से छुपाई जा सकती है।

सेबी (SEBI) की टिप्पणी:

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कहा है, कि इससे डरने का कोई वास्तविक कारण नहीं है; वर्तमान में ये उपकरण ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक’ (FPIs) संपत्ति का केवल 2 प्रतिशत हैं।

बकाया पी-नोट्स की कीमतों में वृद्धि का कारण:

  1. स्टॉक कीमतों में उछाल के परिणामस्वरूप मौजूदा पी-नोट होल्डिंग्स की कीमतों में वृद्धि हुई है।
  2. इस वित्तीय वर्ष में ‘विदेशी पोर्टफोलियो निवेश’ (FPI) में भारी उछाल आया है, जिसमें अब तक का 2,42,000 करोड़ रूपये से अधिक का निवेश हो चुका है।

‘पार्टिसिपेटरी नोट्स’ क्या होते हैं?

पार्टिसिपेटरी नोट्स अथवा पी-नोट्स (PNs) पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा, सेबी में पंजीकृत हुए बगैर भारतीय प्रतिभूतियों में निवेश करने के इच्छुक – विदेशी निवेशकों, हेज फंड और विदेशी संस्थानों- को जारी किए जाने वाले वित्तीय उपकरण होते हैं।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. पी-नोट्स, इक्विटी शेयर सहित ऑफशोर डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स (ODIs) अथवा अंतर्निहित परिसंपत्तियों के रूप में ऋण प्रतिभूतियां होते हैं।
  2. ये निवेशकों को तरलता (liquidity) प्रदान करते हैं तथा इनके स्वामित्व को पृष्ठांकन (Endorsement) और डिलिवरी के माध्यम से स्थान्तरित किया जा सकता है।
  3. हालांकि, सभी विदेशी संस्थागत निवेशक ( Foreign Institutional Investors- FIIs) को प्रत्येक तिमाही में सेबी के लिए इस प्रकार के सभी निवेशों की रिपोर्ट करनी होती है, परन्तु उनके लिए वास्तविक निवेशकों की पहचान का खुलासा करने की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पी- नोट्स’ क्या होते हैं?
  2. FPI तथा FII के बीच अंतर
  3. पी-नोट्स की विशेषताएं

मेंस लिंक:

पी- नोट्स से संबंधित कौन सी प्रमुख चिंताएं हैं? इनका किस प्रकार समाधान किया जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

केयर्न मध्यस्थता निर्णय के खिलाफ सरकार द्वारा अपील दायर करने की संभावना


संदर्भ:

हाल ही में, केयर्न एनर्जी को ‘कर विवाद’ में भारत सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत में जीत हासिल हुई है, मध्यस्थता अदालत ने भारत सरकार को 1.4 अरब डॉलर चुकाने को कहा है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत के इस निर्णय के खिलाफ केंद्र सरकार द्वारा अपील दायर करने की संभावना है।

सरकार का इरादा कराधान मामले में अपने संप्रभु अधिकार का बचाव करना है, और ब्रिटिश फर्म के लिए 1.4 अरब डॉलर वापस करने संबंधी अधिकरण के आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी।

संबंधित चिंताएं:

केयर्न ने संकेत दिया है कि यदि दिल्ली, मध्यस्थता निर्णय का अनुपालन करने तथा बिक्री किये गए शेयरों की कीमत, जब्त किया गया लाभांश और पूर्वव्यापी कर-कानून का प्रयोग करके कर-मांग की वसूली के लिए आयकर विभाग द्वारा रोके गए टैक्स रिफंड को वापस करने में विफल रहती है, तो वह भारत सरकार की विदेशों में स्थित विमानों और जहाजों जैसी परिसंपत्तियों को जब्त करने पर विवश हो सकती है।

संबंधित्त प्रकरण:

भारत सरकार द्वारा ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश समझौते का हवाला देते हुए वर्ष 2012 में लागू पूर्वव्यापी कर कानून (retrospective tax law) के तहत आंतरिक व्यापार पुनर्गठन पर करों (taxes) की मांग की गयी थी, जिसे केयर्न एनर्जी ने चुनौती दी थी।

  • वर्ष 2011 में, केयर्न एनर्जी ने केयर्न इंडिया में अपनी अधिकांश हिस्सेदारी वेदांता लिमिटेड को बेच दी थी, इसके बाद भारतीय कंपनी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत की बची है।
  • वर्ष 2014 में, भारतीय कर विभाग द्वारा कर के रूप में 10,247 करोड़ रुपए ($ 1.4 बिलियन) की मांग की गयी थी।

न्यायाधिकरण का फैसला:

  1. 2006-07 में केयर्न द्वारा अपने भारत के व्यापार के आंतरिक पुनर्गठन करने पर भारत सरकार का 10,247 करोड़ रुपये का कर दावा वैध नहीं है।
  2. भारत सरकार के लिए स्कॉटिश तेल अन्वेषणकर्ता कंपनी को लाभांश तथा कर वापसी पर रोक, और आंशिक रूप से बकाया वसूली के लिए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि को ब्याज सहित भुगतान करना चाहिए।
  3. भारत ने ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत केयर्न के प्रति अपने दायित्वों का उल्लंघन किया है

मध्यस्थता न्यायाधिकरण तक मामला कैसे पहुंचा?

केयर्न ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण में अपना दावा ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत दायर किया था। न्यायाधिकरण की वैधानिक पीठ नीदरलैंड में हैं और मामले की सुनवाई स्थायी मध्यस्थता न्यायालय की रजिस्ट्री के तहत की गयी थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘मध्यस्थता’ क्या है?
  2. हालिया संशोधन।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के बारे में।
  4. भारतीय मध्यस्थता परिषद के बारे में।
  5. 1996 अधिनियम के तहत मध्यस्थों की नियुक्ति।
  6. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) – संरचना, कार्य और सदस्य।

मेंस लिंक:

मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

नई सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति


(New ‘Public Sector Enterprise Policy’)

संदर्भ:

सरकार ने हाल ही में एक नई ‘सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति’ जारी की है।

नई उद्यम नीति के अनुसार, सार्वजनिक उपक्रमों को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

नई नीति के तहत:

  1. रणनीतिक: परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, संचार एवं दूरसंचार, विद्युत्, पेट्रो क्षेत्र, कोयला, अन्य खनिज, बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं को रणनीतिक क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।
  2. निजीकरण: रणनीतिक क्षेत्रों की बची हुई कंपनियों के निजीकरण या विलय अथवा बंद करने पर विचार किया जाएगा तथा गैर-रणनीतिक क्षेत्रों की कंपनियों के निजीकरण करने पर, जहाँ भी संभव होगा, अथवा बंद करने पर विचार किया जाएगा।
  3. रणनीतिक क्षेत्रों में, शेयर पूंजी के स्तर पर मौजूदा कंपनियों की न्यूनतम मौजूदगी सरकारी नियंत्रण में रहेगी।
  4. रणनीतिक क्षेत्रों में, पूंजी के स्तर पर कुल सार्वजनिक उपक्रमों की संख्या अधिकतम चार होगी।

ऐसे समय में, जब सरकार को राजकोषीय अंतर को पाटने तथा कोविड-19 महामारी प्रभावित अर्थव्यवस्था को सुधारने हेतु नीतिगत पहलों पर व्यय करने हेतु संसाधनों की अत्यंत आवश्यकता है, उसके लिए एक सशक्त विनिवेश नीति काफी महत्वपूर्ण होगी।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘विश्वभारती’

  • ‘विश्वभारती’, भारत के पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में स्थित, एक सार्वजनिक शोध हेतु केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय महत्व का एक संस्थान है।
  • ‘विश्वभारती’ की स्थापना रवींद्रनाथ टैगोर ने की थी, इन्होने इसे ‘विश्व-भारती’ नाम दिया था, जिसका अर्थ है, ‘विश्व का भारत के साथ समागम’।
  • वर्ष 1951 में संसद के एक अधिनियम द्वारा विश्व-भारती को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।

चर्चित स्थान: नाथू ला

  • ‘नाथू ला’ हिमालय में अवस्थित एक पहाड़ी दर्रा है।
  • यह भारतीय राज्य सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है।
  • यह भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मध्य, नियमित परामर्श और वार्ता हेतु आधिकारिक रूप से सहमत ‘बॉर्डर पर्सनेल मीटिंग’ (BPM) बिंदुओं में से एक है। BPM, सीमा पर होने वाली मुठभेड़ों को शांत करने में मदद करती है।

पुगलुर-त्रिशूर (HVDC) परियोजना

  • हाल ही में, केरल राज्य में, पुगलुर-त्रिशूर हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) पॉवर ट्रांसमिशन कॉरिडोर की शरुआत की गयी है
  • अत्याधुनिक HVDC प्रणाली, राष्ट्रीय ग्रिड के साथ केरल के लिए पहला एचवीडीसी इंटर-कनेक्शन है और यह राज्य में बिजली की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ बड़ी मात्रा में बिजली ट्रांसमिशन की सुविधा भी प्रदान करेगा।

‘सॉफ्टवेयर-डिफाइंड रेडियो’ क्या है?

  • सॉफ्टवेयर- डिफाइंड रेडियो (Software-defined radio- SDR) एक रेडियो संचार प्रणाली है, जिसमे पारंपरिक रूप से घटकों को हार्डवेयर (जैसे मिक्सर, फिल्टर, एम्पलीफायरों, मॉड्यूलेटर / डेमोडुलेटर, डिटेक्टर, आदि) से जोड़ने के स्थान पर, एक निजी कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर के माध्यम से अथवा एम्बेडेड सिस्टम से जुड़े होते हैं।
  • एक बुनियादी SDR प्रणाली में SDR सॉफ्टवेयर सहित एक निजी कंप्यूटर होता है, जो यूएसबी या ईथरनेट के माध्यम से एनालॉग-से-डिजिटल कनवर्टर तथा जो RF एम्पलीफायरों, फिल्टर और एटेन्यूएटर्स के साथ RF फ्रंट एंड के साथ संबद्ध होता है।

चर्चा का कारण:

प्रौद्योगिकी द्वारा प्रदत्त फायदों से सैनिकों को लैस करने के लिए एवं नेट-केंद्रित युद्ध में लड़ने हेतु सुसज्जित करने के लिए, मौजूदा रेडियोज़ को स्वदेश में विकसित सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR) द्वारा जल्द ही प्रतिस्थापित किया जाएगा।

हेलिना और ध्रुवास्त्र

(Helina and Dhruvastra)

  • ‘हेलिना’ और ध्रुवास्त्र’ तीसरी पीढ़ी की एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलें हैं।
  • हाल ही में भारत द्वारा इनका सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
  • इन दोनों को स्वदेशी रूप से DRDO द्वारा विकसित किया गया है।

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