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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 February 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ

2. पुदुचेरी के उप-राज्यपाल द्वारा सदन में बहुमत परीक्षण का आदेश

3. जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग

4. तमिलनाडु सरकार के आरक्षण संबंधी फैसलों में केंद्र की कोई भूमिका नहीं

5. ‘क्वाड सम्मेलन’

 

सामान्य अध्ययन-III

1. राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन

2. विलुप्ति विद्रोह / एक्सटिंक्सन रेबेलियन

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. मानव चैलेंज परीक्षण (HCT)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. महाबाहु ब्रह्मपुत्र पहल

2. धुबरी फूलबाड़ी पुल

3. माजुली-जोरहाट पुल

4. फेसबुक द्वारा ऑस्ट्रेलिया में समाचारों के लिए अवरुद्ध किया गया

5. ‘नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज’

6. हैदराबाद को वैश्विक ‘ट्री सिटी’ का दर्जा

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ


(Pardoning powers of President)

संदर्भ:

उत्तर प्रदेश के अमरोहा की रहने वाली, मृत्युदंड की सजायाफ्ता शबनम के 12 साल के बेटे ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से अपनी मां को “माफ” करने की अपील की है।

शबनम, मृत्युदंड से बचने के लिए लगभग सभी कानूनी तरीकों को अपना चुकी है, और यदि उसे फांसी दी जाती है, तो वह स्वतंत्र भारत की पहली महिला होगी जिसे किसी अपराध के लिए फांसी दी जाएगी।

(कृपया ध्यान दें, भारत में केवल एक जेल, मथुरा में हैं जहाँ किसी महिला अपराधी को फांसी देने के प्रावधान हैं)।

अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 में कहा गया है कि, राष्ट्रपति को, किसी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा, उसका प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite) या परिहार (Remission) करने की अथवा दंडादेश के निलंबन, परिहार या लघुकरण (Commutation) करने की शक्ति होगी।

क्षमा (Pardon): क्षमादान के अंतर्गत, अपराधी को पूर्णतयः सभी सजाओं और दंडों तथा निरर्हताओं से मुक्त कर दिया जाता है, और उस व्यक्ति को इस तरह का दर्जा दिया जाता है, जैसे उसने कभी अपराध किया ही न हो।

  1. लघुकरण (Commutation) लघुकरण का तात्पर्य, किसी एक वस्तु अथवा विषय को दूसरे के साथ बदलना। सरल शब्दों में, सज़ा की प्रकृति में परिवर्तन करना। उदाहरण के लिए, कठोर कारावास को साधारण कारावास में बदलना।
  2. प्रविलंबन (Reprieve): प्रविलंबन का अर्थ है, मौत की सजा का अस्थायी निलंबन। उदाहरण के लिए- क्षमादान या लघुकरण की अपील के लिए मृत्युदंड की कार्यवाही को अस्थायी रूप से निलंबित करना।
  3. विराम (Respite): विराम का अर्थ है, कुछ विशेष परिस्थितियों की वजह से सज़ा को कम करना। उदाहरण के लिए- महिला अपराधी की गर्भावस्था के कारण सजा में कमी।
  4. परिहार (Remission): परिहार का तात्पर्य, सजा की प्रकृति को बदले बगैर सजा में कमी, जैसे कि, एक साल की सजा को घटाकर छह महीने की सजा में परिवर्तन।

राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ, राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों की तुलना में अधिक व्यापक होती है, और यह निम्नलिखित दो प्रकारों से भिन्न है:

  1. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियाँ, सेना न्यायालय द्वारा दिए गई सजा अथवा दंडों (कोर्ट मार्शल) से संबंधित मामलों तक विस्तारित होती हैं, जबकि, अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल को ऐसी कोई शक्ति प्राप्त नहीं है।
  2. राष्ट्रपति, मृत्युदंड से सबंधित सभी मामलों में क्षमा प्रदान कर सकता है, जबकि, राज्यपाल की क्षमादान शक्ति मृत्युदंड से सबंधित मामलों पर विस्तारित नहीं है।

क्षमादान शक्तियों का प्रयोग:

  1. राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान शक्ति का प्रयोग मंत्रिपरिषद की सलाह पर किया जाता है।
  2. संविधान में, राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल के ‘दया अधिकार क्षेत्र’ (mercy jurisdiction) से संबधित निर्णय की वैधता पर प्रश्न उठाने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
  3. हालांकि, ईपुरु सुधाकर (Epuru Sudhakar) मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा, किसी भी मनमानी को रोकने के उद्देश्य से राष्ट्रपति और राज्यपालों की क्षमादान शक्तियों की न्यायिक समीक्षा का विकल्प दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में राष्ट्रपति तथा राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों में अंतर
  2. न्यायिक समीक्षा की प्रयोज्यता
  3. अनुच्छेद 72 किससे संबंधित है?
  4. अमेरिकी राष्ट्रपति को क्षमा करने की शक्ति

मेंस लिंक:

भारत में राष्ट्रपति तथा राज्यपाल की क्षमादान शक्तियों की विस्तार से तुलना कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

पुदुचेरी के उप-राज्यपाल द्वारा सदन में बहुमत परीक्षण का आदेश


संदर्भ:

पुडुचेरी की नवनियुक्त उपराज्यपाल, तमिलिसाई सौंदर्यराजन ने, मुख्यमंत्री को सदन का विश्वास प्राप्त है अथवा नहीं, इसका निर्धारण करने हेतु विधानसभा सचिवालय के लिए 22 फरवरी को सदन आहूत करने का निर्देश दिया है।

सदन में बहुमत परीक्षण / फ्लोर टेस्ट:

‘फ्लोर टेस्ट’ शब्द का प्रयोग ‘सदन में बहुमत परीक्षण’ के लिए किया जाता है।

  • राज्य के मुख्यमंत्री के प्रति संदेह होने पर राज्यपाल उन्हें सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकता है।
  • गठबंधन सरकार के मामले में, मुख्यमंत्री को विश्वास प्रस्ताव पारित करने करने तथा बहुमत साबित करने के लिए कहा जा सकता है।

बहुमत साबित न कर पाने की स्थिति में:

  • स्पष्ट बहुमत नहीं होने की स्थिति में, जब एक से अधिक लोग, सरकार बनाने का दावा करते हैं, तो राज्यपाल बहुमत परीक्षण के लिए विशेष सत्र बुला सकते हैं।
  • यदि कुछ विधायक मतदान में भाग नहीं लेते है अथवा अनुपस्थित रहते है, तो सदन में उपस्थित तथा मतदान करने वाले विधायकों की संख्या के आधार पर बहुमत परीक्षण का निर्धारण होता है।

संवैधानिक प्रावधान:

संविधान के अनुच्छेद 75 (3) और अनुच्छेद 164 के अनुसार, मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोक सभा / निचले सदन के प्रति उत्तरदायी होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. फ्लोर टेस्ट बनाम कंपोजिट फ्लोर टेस्ट
  2. सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत
  3. फ्लोर टेस्ट के दौरान वोटिंग।
  4. स्पष्ट बहुमत बनाम त्रिशंकु विधानसभा होने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति।
  5. क्या स्पीकर अपना वोट डाल सकता है?

मेंस लिंक:

फ्लोर टेस्ट कराने संबंधी कानून में अस्पष्टता प्रायः दुर्व्यवहार और दुरुपयोग का कारण बनती है। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग


(J&K Delimitation Commission)

संदर्भ:

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग द्वारा की गयी पहली बैठक में, फारूक अब्दुल्ला और नेशनल कांफ्रेंस के अन्य नेताओं ने भाग नहीं लिया।

पृष्ठभूमि:

जम्मू और कश्मीर के लिए परिसीमन आयोग का गठन केंद्र द्वारा पिछले साल 6 मार्च को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अनुसार केंद्रशासित प्रदेश के लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों को फिर से निर्धारित करने के लिए किया गया था। ज्ञात हो कि, ‘जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम’, 2019 द्वारा राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया गया था।

परिसीमन’ क्या होता है?

‘परिसीमन’ (Delimitation) का शाब्दिक अर्थ, ‘विधायी निकाय वाले किसी राज्य में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा निर्धारण प्रक्रिया’ होता है।

परिसीमन प्रक्रिया’ किसके द्वारा निष्पादित की जाती है?

परिसीमन प्रक्रिया, एक उच्च अधिकार प्राप्त आयोग द्वारा पूरी की जाती है। इस आयोग को औपचारिक रूप से परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) या सीमा आयोग (Boundary Commission) कहा जाता है।

परिसीमन आयोग के आदेशों को क़ानून के समान शक्ति प्राप्त होती है, और इन्हें किसी भी अदालत के समक्ष चुनौती नहीं दी जा सकती है।

आयोग की संरचना:

‘परिसीमन आयोग अधिनियम’, 2002 के अनुसार, केंद्र द्वारा नियुक्त परिसीमन आयोग में तीन सदस्य होते हैं: जिनमे अध्यक्ष के रूप में उच्चतम न्यायालय के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायाधीश, तथा पदेन सदस्य के रूप में मुख्य निर्वाचन आयुक्त अथवा इनके द्वारा नामित निर्वाचन आयुक्त एवं राज्य निर्वाचन आयुक्त होते है।

संवैधानिक प्रावधान:

  1. संविधान के अनुच्छेद 82 के अंतर्गत, प्रत्येक जनगणना के पश्चात् भारत की संसद द्वारा एक ‘परिसीमन अधिनियम’ क़ानून बनाया जाता है।
  2. अनुच्छेद 170 के तहत, प्रत्येक जनगणना के बाद, परिसीमन अधिनियम के अनुसार राज्यों को भी क्षेत्रीय निर्वाचन-क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पूर्ववर्ती परिसीमन आयोग- शक्तियाँ और कार्य
  2. आयोग की संरचना
  3. आयोग का गठन किसके द्वारा किया जाता है?
  4. आयोग के अंतिम आदेशों में परिवर्तन की अनुमति?
  5. परिसीमन आयोग से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

मेंस लिंक:

निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किस प्रकार और क्यों किया जाता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

तमिलनाडु सरकार के आरक्षण संबंधी फैसलों में केंद्र की कोई भूमिका नहीं


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित करते हुए कहा है, कि राज्य सरकार के तहत नौकरियों और स्कूल / कॉलेजों में प्रवेश हेतु विशिष्ट जातियों या समुदायों के लिए आरक्षण प्रावधानों के संबंध में तमिलनाडु सरकार द्वारा किए गए निर्णयों में केंद्र की कोई भूमिका नहीं है।

संबंधित प्रकरण:

कुछ समय पूर्व, राज्य में 69% आरक्षण का प्रावधान करने वाले, ‘तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित्त जाति एवं अनुसूचित जनजाति (शैक्षणिक संस्थानों में सीटों तथा राज्य के अधीन सेवाओं में नियुक्ति या पदों का आरक्षण) अधिनियम’, 1993 [Tamil Nadu Backward Classes, SC & ST(Reservation of Seats in Educational Institutions and of Appointments or Posts in the Services under the State) Act of 1993] की वैधता को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गयी थी। केंद्र सरकार द्वारा इसी याचिका पर उपरोक्त प्रत्युत्तर दिया गया था।

  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है, कि तमिलनाडु विधायिका द्वारा “अपनी कार्य-क्षमताओं के बाहर” कार्य किया गया है।
  • तमिलनाडु सरकार द्वारा सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (socially and educationally backward classes-SEBCs) की पहचान और वर्गीकरण किया गया है। याचिका में कहा गया है, कि यह ‘इंदिरा साहनी मामले’ में अपने फैसले में उच्चतम न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ द्वारा आरक्षण हेतु निर्धारित को 50% की सीमा से अधिक है।

केंद्र सरकार का पक्ष:

  • सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (SEBCs) की राज्य सूची में किसी भी जाति / समुदाय को शामिल करने या बाहर निकालना, राज्य सरकार का विषय है, और भारत सरकार की इस मामले में कोई भूमिका नहीं है।
  • केंद्र ने ‘वर्ष 2018 के संविधान (102 वां संशोधन) अधिनियम’ का हवाला दिया है, जिसमें राज्यों तथा केंद्र की SEBC सूची में जातियों और समुदायों को शामिल करने या बाहर निकालने संबंधी प्रक्रिया में अंतर का विवरण दिया गया है।
  • संसद को केवल केंद्रीय सूची के संदर्भ में ‘सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों’ (SEBCs) की पहचान करने और निर्दिष्ट करने की शक्ति हासिल है।
  • 2018 के संविधान (102 वां संशोधन) अधिनियम के माध्यम से संविधान में एक नया अनुच्छेद-342A जोड़ा गया था, जिसके अंतर्गत राष्ट्रपति, राज्यपाल के परामर्श के पश्चात, किसी राज्य में ‘सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों’ (SEBCs) को अधिसूचित कर सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आरक्षण के संबंध में संवैधानिक प्रावधान
  2. अनुच्छेद 32, 226, 14, 15 और 16 का अवलोकन
  3. रिट (writ) क्या हैं?
  4. SC तथा HC की रिट जारी करने की शक्तियों में अंतर।
  5. इंद्र साहनी केस का निर्णय
  6. अनुच्छेद 32 को कब निलंबित किया जा सकता है?
  7. रिट (writ) को जारी करने के लिए किसी अन्य न्यायालय को कौन प्राधिकृत कर सकता है।

मेंस लिंक:

आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘क्वाड सम्मेलन’


(Quad meet)

संदर्भ:

हाल ही में, क्वाड समूह के सदस्यों का एक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया गया।

  • सदस्यों द्वारा, म्यांमार में लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता, और विस्तृत क्षेत्र में लोकतांत्रिक लचीलेपन को मजबूत करने की प्राथमिकता पर चर्चा की गयी।
  • इस सम्मलेन का प्रयोजन, चारो सदस्य देशों के मध्य समुद्रीय सहयोग में वृद्धि करना था।

क्वाड समूह’ क्या है?

यह, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया देशों का एक चतुष्पक्षीय संगठन है।

  • इस समूह के सभी सदस्य राष्ट्र लोकतांत्रिक राष्ट्र होने साथ-साथ गैर-बाधित समुद्री व्यापार तथा सुरक्षा संबंधी हित साझा करते हैं।

क्वाड समूह की उत्पत्ति:

क्वाड समूह की उत्पत्ति के सूत्र, वर्ष 2004 में आयी सुनामी के बाद राहत कार्यों के लिए चारो देशों द्वारा किए गए समन्वित प्रयासों में खोजे जा सकते हैं।

  • इसके बाद, इन चारो देशों के मध्य वर्ष 2007 में हुए आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान पहली बार बैठक हुई।
  • इसका उद्देश्य, जापान, भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया, चारो देशों के मध्य समुद्री सहयोग बढ़ाना था।

इस संगठन का महत्व:

  • क्वाड (Quad) समान विचारधारा वाले देशों के लिए परस्पर सूचनाएं साझा करने तथा पारस्परिक हितों संबंधी परियोजनाओं पर सहयोग करने हेतु एक अवसर है।
  • इसके सदस्य राष्ट्र एक खुले और मुक्त इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण को साझा करते हैं।
  • यह भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के मध्य वार्ता के कई मंचों में से एक है तथा इसे किसी एक विशेष संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए।

क्वाड समूह’ के प्रति चीन का दृष्टिकोण:

  1. यह एक सामान्य समझ है, कि क्वाड किसी भी देश के खिलाफ सैन्य रूप से मुकबला नहीं करेगा। फिर भी, चीन के रणनीतिक समुदाय द्वारा, इसे एक उभरता हुआ “एशियाई नाटो” ब्रांड बताया जाता है।
  2. विशेष रूप से, भारतीय संसद में जापानी पीएम शिंजो आबे द्वारा ‘दो सागरों का मिलन’ (Confluence of Two Seas) संबोधन ने क्वाड अवधारणा को एक नया बल दिया है। इसने भारत के आर्थिक उदय को मान्यता प्रदान की है।

क्वाड समूह’ के लिए औपचारिकता की आवश्यकता:

प्रयासों के नवीनीकरण के बावजूद, क्वाड (QUAD) समूह को किसी औपचारिक संरचना के न होने कारण आलोचना का सामना करना पड़ता है। इस समूह को संस्थागत (Institutionalisation) किये जाने, एक अपराजेय ‘चीन-विरोधी’ गुट में रूपांतरित होने के लिए एक औपचारिक समझौते की आवश्यकता है।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान वैश्विक राजनीतिक स्थितियों में बहुत कुछ परिवर्तित हुआ है। क्वाड समूह के प्रत्येक सदस्य देश ने चीन की बढ़ती आक्रामकता का सामना किया है।

  1. चीन की ताकत और प्रभाव में वृद्धि हुई है और वह किसी भी प्रकार के मुठभेड़ के लिए उत्सुक है।
  2. ऑस्ट्रेलिया की घरेलू नीतियों को प्रभावित करने के प्रयासों के पश्चात, चीन द्वारा देश पर दंडात्मक कर (Punitive Tariffs) आरोपित लगा दिये गए है।
  3. चीन, भारत के साथ अक्सर सीमा विवादों में उलझता रहता है।
  4. चीन के सेनकाकू द्वीपों के संबंध में जापान के साथ क्षेत्रीय विवाद भड़का हुआ है।
  5. संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ चीन व्यापार युद्ध में पूरी तरह से लिप्त है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. क्वाड – संरचना।
  2. यह पहली बार कब प्रस्तावित किया गया था?
  3. हिंद महासागर क्षेत्र में देश और महत्वपूर्ण द्वीप।
  4. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का भौगोलिक अवलोकन।
  5. इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण समुद्र और जलडमरूमध्य।

मेंस लिंक:

शांति और सुरक्षा बनाए रखने और संयुक्त राष्ट्र के समुद्रीय कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए क्वाड की औपचारिक बहाली और पुन: प्रवर्तन की आवश्यकता है। परीक्षण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन


(National Hydrogen Mission)

संदर्भ:

वर्तमान काल में, पूरे विश्व में ‘ऊर्जा संक्रमण’ (Energy transition), एक असाधारण स्तर पर चल रहा है और कई देश, स्वच्छ ईंधन के रूप में हाइड्रोजन को, इसकी उच्च ऊर्जा क्षमता और बहु-उपयोगिता के कारण, विकसित करने के लिए दांव लगा रहे हैं।

इसका लाभ उठाने के लिए, भारत सरकार (GOI) द्वारा राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन (National Hydrogen Energy MissionNHM) पहल शुरू की गई है।

इस संबंध में किये जा रहे प्रयास:

  • हाल ही में, केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए औपचारिक रूप से ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन’ (NHM) की घोषणा की गई, जिसका उद्देश्य हरित ऊर्जा संसाधनों से हाइड्रोजन का उत्पादन करना है।
  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने स्पष्ट किया है कि ‘राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा मिशन’ के लिए इस महीने के अंत तक मसौदा नियमों को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इसके बाद मसौदा नियमों को मंत्रिमंडल के अनुमोदन हेतु भेजा जाएगा।

भारत के लिए चुनौतियां:

  1. हरित अथवा नीले हाइड्रोजन के निष्कर्षण की आर्थिक संधारणीयता, हाइड्रोजन का व्यावसायिक रूप से दोहन करने के लिए उद्योगों के सामने भारी चुनौतियों में से एक है।
  2. हाइड्रोजन के उपयोग तथा उत्पादन में प्रयुक्त होने वाली प्रौद्योगिकी, जैसेकि ‘कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज (CCS), अभी प्रारम्भिक चरण में हैं और काफी महंगी है, जिससे हाइड्रोजन की उत्पादन-लागत काफी अधिक हो जाती है।
  3. किसी संयंत्र के पूरा होने के बाद ईंधन सेलों (fuel cells) की रखरखाव लागत काफी महंगी हो सकती है, जैसाकि दक्षिण कोरिया में है।
  4. ईंधन के रूप में और उद्योगों में हाइड्रोजन के व्यावसायिक उपयोग हेतु, हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और मांग निर्माण के लिए अनुसंधान और विकास में भारी निवेश की आवश्यकता है।

‘हाइड्रोजन ईंधन’ क्या है?

हाइड्रोजन, आवर्त सारणी में सबसे हल्का और पहला तत्व है। चूंकि, हाइड्रोजन का भार, हवा के भार से कम होता है, इसलिए यह वायुमंडल में ऊपर की ओर उठ कर फ़ैल जाता है और यही कारण है, कि इसे अपने शुद्ध रूप ‘H2 में मुश्किल से ही कभी पाया जाता है।

  • मानक ताप और दाब पर, हाइड्रोजन, एक गैर-विषाक्त, अधात्विक, गंधहीन, स्वादहीन, रंगहीन और अत्यधिक दहनशील द्विपरमाणुक गैस है।
  • हाइड्रोजन ईंधन, ऑक्सीजन के साथ दहन करने पर ‘शून्य-उत्सर्जन’ करने वाला ईंधन है। इसका उपयोग ईंधन सेलों अथवा आंतरिक दहन इंजनों में किया जा सकता है। अंतरिक्ष यान प्रणोदनों (spacecraft propulsion) के लिए ईंधन के रूप में भी हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है।

हाइड्रोजन की उत्पत्ति:

  • यह ब्रह्मांड में पाया जाने वाला सबसे प्रचुर तत्व है। सूर्य और अन्य तारे, व्यापक रूप से हाइड्रोजन से निर्मित होते हैं।
  • खगोलविदों का अनुमान है, कि ब्रह्मांड में पाए जाने वाले 90% परमाणु, हाइड्रोजन परमाणु हैं। किसी भी अन्य तत्व की तुलना में, हाइड्रोजन, सर्वाधिक योगिकों का एक घटक होता है।
  • पृथ्वी पर पाए जाने वाले हाइड्रोजन का सर्वाधिक प्रचुर यौगिक ‘जल’ है।
  • पृथ्वी पर प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जल-निकायों में आणविक हाइड्रोजन नहीं पाया जाता है।
  • पृथ्वी पर अधिकांशतः हाइड्रोजन, जल और ऑक्सीजन के साथ तथा जीवित या मृत अथवा या जीवाश्म जैवभार में, कार्बन के साथ युग्मित होती है। जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के रूप में विखंडित करके हाइड्रोजन का निर्माण किया जा सकता है।

भंडारण:

  • हाइड्रोजन को भौतिक रूप से अथवा गैस या तरल के रूप में संग्रहीत किया जा सकता है।
  • गैस के रूप में हाइड्रोजन का भंडारण करने हेतु आमतौर पर उच्च दाब वाले टैंक की आवश्यकता होती है।
  • तरल के रूप में हाइड्रोजन का भंडारण करने के लिए क्रायोजेनिक तापमान की जरूरत होती है, क्योंकि हाइड्रोजन का क्वथनांक एक वायुमंडलीय दाब पर −8 ° C होता है।
  • हाइड्रोजन के लिए ठोस पदार्थों की सतह पर (adsorption / अधिशोषण द्वारा) अथवा ठोस पदार्थों के भीतर (absorption / अवशोषण द्वारा) संग्रहीत किया जा सकता है।

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने में स्वच्छ हाइड्रोजन उद्योगों की क्षमता:

  • हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से उत्सर्जित होने वाला एकमात्र उप-उत्पाद ‘जल’ होता है – जिस कारण यह ईंधन 100 प्रतिशत स्वच्छ हो जाता है।
  • हाइड्रोजन को, शून्य-उत्सर्जन इलेक्ट्रिक वाहनों में ईंधन सेलों की शक्ति, घरेलू उत्पादन में इसकी क्षमता और ईंधन सेलों की उच्च दक्षता क्षमताओं के कारण, एक वैकल्पिक ईंधन माना जाता है।
  • वास्तव में, इलेक्ट्रिक मोटर के साथ फ्यूल सेल/ ईंधन सेल, गैस-चालित आंतरिक दहन इंजन की तुलना में दो से तीन गुना अधिक कुशल है।
  • इलेक्ट्रिक मोटर के साथ मिलकर एक ईंधन सेल दो से तीन गुना अधिक कार्यक्षम होते है।
  • हाइड्रोजन, आंतरिक दहन इंजनों के लिए ईंधन के रूप में भी काम कर सकता है।
  • 2 पाउंड (1 किलोग्राम) हाइड्रोजन गैस की ऊर्जा, 1 गैलन (6.2 पाउंड/ 2.8 किलोग्राम) गैसोलीन की ऊर्जा के बराबर होती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विलुप्ति विद्रोह / एक्सटिंक्सन रेबेलियन


(Extinction Rebellion)

संदर्भ:

दिल्ली पुलिस ने, पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि, निकिता जैकब और शांतनु मुलुक को नामजद किया है, ये सभी इस वैश्विक आंदोलन के स्वयंसेवी / वालंटियर्स हैं।

‘विलुप्ति विद्रोह’ (Extinction Rebellion) क्या है?

इसे ‘XR’ के नाम से जाना जाता है।

‘विलुप्ति विद्रोह’ की शुरुआत, जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change-IPCC) की एक रिपोर्ट की प्रतिक्रिया के रूप में, 31 अक्टूबर, 2018 को यूनाइटेड किंगडम में हुई थी।

  • अब, यह एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। यह आन्दोलन “विद्रोह” करने की मांग करता है, और समूहों को बिना किसी की अनुमति के ‘स्वयं-संगठित’ होने तथा समूह के मूल सिद्धांतों का पालन करते हुए ‘सामूहिक कार्य योजनाओं’ को शुरू करने के लिए कहता है।
  • यह एक विकेंद्रीकृत, अंतर्राष्ट्रीय और राजनीतिक रूप से गैर-पक्षपातपूर्ण आंदोलन है, जिसमें सरकारों को केवल जलवायु और पारिस्थितिक आपातकाल पर कार्य करने हेतु राजी करने के लिए अहिंसक प्रत्यक्ष कार्रवाई और नागरिक अवज्ञा का उपयोग किया जाता है।

इस समूह की समूचे विश्व की सरकारों से “तीन प्रमुख मांगें” हैं।

यह समूह, विश्व के समक्ष उपस्थित जलवायु और पारिस्थितिक आपातकाल का मुकाबला करने के क्रम में, सरकारों से, ‘सच बताने’ ‘तत्काल कार्रवाई करने’ और ‘राजनीति से परे जाने’ की मांग करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ;

मानव चैलेंज परीक्षण (HCT)


(Human Challenge Trials)

संदर्भ:

ब्रिटेन, एक महीने के भीतर, दुनिया का पहला कोविड-19 ‘मानव चैलेंज परीक्षण’ (Human Challenge Trials– HCT) करने जा रहा है।

यद्यपि, ‘मानव चैलेंज परीक्षण’ (HCT), कई बीमारियों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने में सहायक साबित हुए हैं, फिर भी, ये परीक्षण कुछ विवादों और नैतिकता संबंधी सवालों से घिरे हुए हैं।

उद्देश्य:

  • किसी व्यक्ति को संक्रमित करने हेतु आवश्यक वायरस की सबसे कम मात्रा को चिह्नित करना।
  • SARS-CoV-2 के प्रति प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया को समझने में डॉक्टरों की सहायता करना।
  • वायरस के संचरण को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान करना, तथा यह भी पता लगाना कि, किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा वायरस, पर्यावरण में किस प्रकार पहुंचाता है।

सबसे पहले, आइए हम समझते हैं कि टीकों का विकास और परीक्षण किस प्रकार किया जाता है?

अधिकांश नियामक प्रणालियों में, टीकों को विकसित करने में कई साल लगते हैं, और उनका विकास विशेषतौर पर नैदानिक ​​परीक्षणों के तीन चरणों के माध्यम से होता है।

  1. पहले चरण में, लोगों के एक छोटे समूह को परीक्षण किए जाने वाला टीका (ट्रायल वैक्सीन) लगाया जाता है।
  2. दूसरे चरण में, नैदानिक ​​अध्ययन का विस्तार किया जाता है और इस चरण में, जिस बीमारी के लिए टीका विकसित किया जा रहा है, उसके समान लक्षणों वाले लोगों को टीका लगाया जाता है।
  3. तीसरे चरण में, कई हजार लोगों को टीका लगाया जाता है और इसकी प्रभावकारिता और सुरक्षा का परीक्षण किया जाता है। इस चरण के दौरान, प्रतिभागियों को टीका अथवा एक प्रयोगिक औषध (placebo) दी जाती है।

‘मानव चैलेंज परीक्षण’ (HCT) और इनका महत्व:

  • ‘मानव चैलेंज परीक्षण’ (HCT) में, ‘टीका समूह’ और ‘प्रयोगिक औषध (प्लेसेबो) समूह’ को सहमति के आधार पर प्रतिभागियों को जानबूझकर संक्रमण से संपर्क में लाया जाता है- इस प्रकार रोगजनक जीव द्वारा प्रतिभागियों को “चुनौती” दी जाती है।
  • इस प्रकार के परीक्षणों से वैक्सीन विकसित करने में कीमती समय की बचत हो सकती है, क्योंकि शोधकर्ताओं के लिए वास्तविक परिस्थितियों में संक्रमण का सामना करने के लिए प्रतिभागियों का इंतजार नहीं करना होता है।
  • लाइसेंस प्रक्रिया में, परीक्षार्थी टीकों (कैंडिडेट वैक्सीन) के लिए पारंपरिक रूप से तीसरे चरण के परीक्षण की जगह, इस तरह के परीक्षण कई महीनों का समय कम कर सकते हैं, जिससे प्रभावकारी टीके अधिक तीव्रता के साथ उपलब्ध हो सकते हैं।

नैतिक चिंताएं (ethical concerns):

  • कोविड-19, जोकि कम जोखिम वाले लोगों के लिए भी काफी घातक बीमारी है और शोधकर्ता अभी भी इसके अध्ययन के विभिन्न चरणों में हैं, के लिए इस तरह के परीक्षणों को शुरू करने पर आलोचकों दवारा सवाल उठाए गए हैं।
  • वर्ष 2016 में, यहां तक ​​कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी कहा है, कि, इस प्रकार के शोध, ‘कोई हानि नहीं पहुचाने वाले चिकित्सा मार्गदर्शक सिद्धांत’ के विपरीत प्रतीत होते हैं।

समय की मांग:

  1. अच्छी तरह से प्रलेखित मानव संपर्क अध्ययनों के ऐतिहासिक उदाहरणों को वर्तमान मानकों द्वारा अनैतिक माना जाएगा।
  2. चैलेंज अध्ययनों को एक नैतिक फ्रेमवर्क के भीतर किया जाना आवश्यक है, जिसमे वास्तविक रूप से सच्चाई बताने के बाद सहमति दी गई हो।
  3. इन चैलेंजों को आयोजित करते समय, मानव चैलेंज अध्ययन, भरपूर मात्रा में पूर्वविचारित, सावधानी और निगरानी के साथ किया जाना चाहिए।
  4. प्राप्त होने वाली जानकारी की कीमत, स्पष्ट रूप से मानवीय परीक्षार्तियों के लिए जोखिमों को उचित साबित होनी चाहिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


महाबाहु ब्रह्मपुत्र पहल

(Mahabahu Brahmaputra initiative)

इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत के पूर्वी हिस्सों में निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करना है और इसमें ब्रह्मपुत्र और बराक नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए विभिन्न विकास गतिविधियां शामिल हैं।

महाबाहु-ब्रह्मपुत्र के शुभारंभ के साथ निम्नलिखित कार्यों की शुरुआत होगी:

  1. नीमाटी-मजुली द्वीप, उत्तरी गुवाहाटी-दक्षिण गुवाहाटी और धुबरी-हाटसिंगिमारी के बीच रो-पैक्स पोत संचालन का उद्घाटन किया जाएगा;
  2. जोगीघोपा में अंतर्देशीय जल परिवहन (IWT) टर्मिनल के शिलान्यास और
  3. ब्रह्मपुत्र नदी पर विभिन्न पर्यटक जैटियों और ईज ऑफ डूइंग-बिजनेस के लिए डिजिटल समाधान।

धुबरी फूलबाड़ी पुल

  • असम में धुबरी और मेघालय में फूलबाड़ी को जोड़ने वाला 19 किलोमीटर लंबा चार लेन का पुल, पूरा होने के पश्चात, भारत का सबसे लंबा पुल होगा।
  • इस पुल के लिए, फरवरी 2019 में लगभग 4997 करोड़ की लागत मंजूर की गयी तथा नवंबर 2020 में इसके लिए कार्य आवंटित किया गया है।
  • इस पुल के माध्यम से, असम और मेघालय, पश्चिम बंगाल से सीधे जुड़ सकेंगे।
  • प्रस्तावित पुल एनएच-127बी पर स्थित होगा, जो एनएच-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर श्रीरामपुर से निकलता है, और मेघालय राज्य में एनएच-106 पर नोंगस्टोइन पर समाप्त होता है।

माजुली-जोरहाट पुल

  • ब्रह्मपुत्र नदी पर यह पुल, नीमतिघाट (जोरहाट की तरफ) और कमलाबारी (मजुली की तरफ) को जोड़ेगा।
  • यह पुल माजुली द्वीप में दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और दिन के विकास की गतिविधियों को पूरा करने के लिए, शेष असम के साथ आसान और समय पर पहुंच प्रदान करेगा।

फेसबुक द्वारा ऑस्ट्रेलिया में समाचारों के लिए अवरुद्ध किया गया

  • फेसबुक ने ऑस्ट्रेलियाई जनता को समाचारों को साझा करने से रोक दिया है।
  • फेसबुक ने यह कदम, प्रभावशाली तकनीकी कंपनियों के लिए समाचार संगठनों को सामग्री के लिए भुगतान करने के मुद्दे पर सरकार के साथ जारी एक लड़ाई भड़कने की प्रतिक्रिया में उठाया है।

संबंधित प्रकरण:

  • ऑस्ट्रेलियाई की प्रतिनिधि सभा द्वारा एक कानून पारित किया गया, जिसके तहत, फेसबुक और गूगल को ऑस्ट्रेलियाई पत्रकारिता के लिए भुगतान करना होगा। फेसबुक ने उपरोक्त कदम इसी क़ानून की प्रतिक्रिया में उठाया है।
  • ऑस्ट्रेलियाई कानून के अनुसार, फेसबुक और गूगल के लिए समाचार आउटलेट्स, जिनके लिंक उनके प्लेटफॉर्म पर ट्रैफ़िक में वृद्धि करते हैं, के साथ वाणिज्यिक समझौता करना अनिवार्य किया गया है। ऐसा नहीं करने पर इनके लिए जबरदस्ती मध्यस्थता द्वारा एक कीमत चुकाने पर सहमत किया जाएगा।

‘नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज’

(Nurturing Neighborhoods Challenge)

  • आवास तथा शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
  • यह शहरों के लिए, छोटे बच्चों, देखभाल करने वालों और परिवारों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए पहलों को विकसित करने और कार्यान्वित करने के लिए एक ‘चैलेंज’ है।

संदर्भ:

स्मार्ट सिटी मिशन, आवास तथा शहरी कार्य मंत्रालय, ने ‘नर्चरिंग नेबरहुड चैलेंज’ कोहॉर्ट के लिए 25 शहरों के चयन की घोषणा की है।

हैदराबाद को वैश्विक ट्री सिटी’ का दर्जा

  • हैदराबाद ने भारत के शहरों में एक ‘हरित प्रतियोगिता’ जीती है, और विश्व के ‘ट्री सिटीज़’ में से एक बनकर उभरा है।
  • यह उपाधि, आर्बर डे फाउंडेशन और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा प्रदान की गयी है।
  • इस प्रतियोगिता के तहत, शहरों का मूल्यांकन पाँच मानदंडों पर किया गया था: ‘उत्तरदायित्व निर्धारण’, ‘नियम निर्धारण’, ‘अपने बारे में जानकारी’ ‘संसाधनों का आवंटन’, तथा ‘उपलब्धियों की सराहना’ ।
  • शहरी वानिकी में वृद्धि करने और इसे बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्धता के लिए हैदराबाद का चयन किया गया है।
  • इस दर्जे के साथ ही हैदराबाद, यू.एस., यू.के., कनाडा और ऑस्ट्रेलिया सहित 23 देशों के 120 अन्य शहरों में शामिल हो गया है।

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