[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 18 फरवरी 2021

 

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सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: संविधान का विकास एवं निर्माण।

1. प्रस्तावना को व्यापक रूप से भारतीय संविधान का प्रतीक अथवा आत्मा एवं भावना के रूप में स्वीकार किया जाता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रस्तावना की परिभाषा के साथ उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल कीजिए:

  1. प्रस्तावना क्या है? प्रस्तावना का महत्व क्या है?
  1. संविधान के महत्व का उल्लेख कीजिए, जैसे: यह भारतीय राज्य की प्रकृति, संविधान के उद्देश्य को कैसे बताता है, यह न्यायपालिका के लिए कैसे उपयोगी है।
  1. समझाइए कि यह भारतीय संविधान की आत्मा एवं भावना का प्रतिनिधित्व क्यों और कैसे करता है।

निष्कर्ष:

प्रस्तावना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार।

 2. धार्मिक स्वतंत्रता, उत्सवों में तटस्थता एवं सुधारवादी न्याय के ये तीन प्रकार भारतीय धर्मनिरपेक्षता के मूल तत्व हैं। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय राजव्यवस्था: लक्ष्मीकांत

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

 समझाइए कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने एक ऐसी सरकार बनाकर अपने नवीन राज्य को आधुनिकता एवं उदारवाद के विचारों से जोड़ने की मांग की, जो लोकतांत्रिक नागरिकता के लिए शर्तों का निर्माण करते हुए नागरिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करेगी।

समझाइए कि धर्म के संबंध में इन दोनों लक्ष्यों को संतुलित करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है।

भारतीय धर्मनिरपेक्षता का गठन करने वाले इन तीन प्रमुख तत्वों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

संविधान में निहित भारतीय प्रकार की धर्मनिरपेक्षता के महत्व का वर्णन करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली- कृषि उत्पाद का भंडारण, परिवहन तथा विपणन, संबंधित विषय और बाधाएँ; किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी।

3. भारत में डेयरी फार्मिंग उद्योग को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Live Mint

 निर्देशक शब्द:

परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

इस प्रकार के प्रश्नों को प्रारम्भ करने का सबसे अच्छा तरीका प्रश्न के सार को समझाने वाले कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

वर्तमान में 187.75 मिलियन टन (2018-19 के आंकड़ों के अनुसार) के वार्षिक उत्पादन के साथ भारत में विश्व के कुल दूध उत्पादन का लगभग 22% भाग उत्पादित किया जाता है। इस प्रकार पहले भारतीय डेयरी उद्योग की क्षमता की व्याख्या कीजिए।

दूध की कमी वाले देश से एक दुग्ध अधिशेष वाले देश तक की भारत की यात्रा पर प्रकाश डालिए।

समझाइए कि डेयरी क्षेत्र अत्यधिक महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।

इस क्षेत्र के उत्थान में प्रौद्योगिकी की क्या भूमिका हो सकती है? समझाइए। जहां भी संभव हो उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि प्रौद्योगिकी में नवीनतम नवाचारों के साथ ग्रामीण कृषि को सम्बद्ध करने से हमारे डेयरी उद्योग में अभूतपूर्व परिवर्तन की शुरूआत होगी।

  

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

 4. क्या भारत में सामाजिक-आर्थिक संकेतकों पर उनके प्रभाव के संदर्भ में आर्थिक विकास एवं असमानता अभिसरित होती है? विश्लेषण कीजिए एवं अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: indiabudget.gov.in

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजिएऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रश्न के संदर्भ में आर्थिक विकास एवं असमानता क्या है, समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

उत्तर के मुख्य भाग में निम्नलिखित पहलुओं पर प्रकाश डालिए:

भारत एवं उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि, असमानता और सामाजिक-आर्थिक परिणामों को प्रदर्शित कीजिए।

असमानता एवं प्रति व्यक्ति आय के सहसंबंध का परीक्षण करके, जो सामाजिक-आर्थिक संकेतकों की एक सीमा के साथ आर्थिक विकास के प्रभाव को दर्शाता है, सर्वेक्षण दर्शाता है कि आर्थिक विकास एवं असमानता दोनों के सामाजिक-आर्थिक संकेतकों के साथ समान संबंध हैं।

समझाइए कि आर्थिक विकास का असमानता की तुलना में गरीबी उन्मूलन पर अधिक प्रभाव है। इसलिए, भारत के विकास के चरण को देखते हुए, भारत को समग्र क्षेत्र का विस्तार करके गरीबों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

निष्कर्ष:

एक निष्पक्ष एवं संतुलित राय प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: सा.अ. 2: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

सा.अ. 3: आपदा और आपदा प्रबंधन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।

 5. विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाई गई “वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य रणनीति” द्वारा परिकल्पित डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भारत के लिए “सभी के लिए स्वास्थ्य” की वास्तविकता में छलांग लगाने का अवसर प्रदान करता है। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली की वर्तमान स्थिति को दर्शाने वाले कुछ आंकड़ों को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

समझाइए कि चाहे यह उपचार अथवा टीके की खोज में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग हो या स्वास्थ्य देखभाल और परामर्श को बढ़ाने के लिए पारंपरिक प्रौद्योगिकी सेवाओं का उपयोग हो, यह स्पष्ट है कि प्रौद्योगिकी अपने सबसे अंधकारमय क्षणों में भी मानवता की सेवा करेगी।

विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाई गई “वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य रणनीति” पर प्रकाश डालिए।

उपयुक्त उदाहरणों के साथ समझाइए कि यह भारत के लिए ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ की वास्तविकता में छलांग लगाने का एक अवसर कैसे है।

निष्कर्ष:

सभी के लिए स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी के उपयोग के महत्व के साथ निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

6. समानुभूति न केवल एक महत्वपूर्ण घटक है, बल्कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सूचक भी है। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Economic Times

निर्देशक शब्द:

समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर की संरचना:

परिचय:

समानुभूति एवं भावनात्मक बुद्धिमत्ता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समानुभूति की अवधारणा का संक्षेप में वर्णन कीजिए एवं उसके बाद विस्तार से समझाइए कि सहानुभूति भावनात्मक रूप से बुद्धिमान होने का सबसे महत्वपूर्ण घटक कैसे है।

उपर्युक्त के स्पष्टीकरण के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

7. मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज एवं शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

मूल्य क्या हैं? परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि परिवार एवं समाज बच्चे के नैतिक मूल्यों को विकसित करने में कैसे सहायक हैं। माता-पिता एवं बच्चों के बीच घनिष्ठ संपर्क होता है, जो बच्चे के व्यक्तित्व का निर्धारण करता है। परिवार वह नींव है जिस पर मूल्यों का निर्माण होता है।

नैतिक मूल्य जैसे कि सत्यवादन, प्रसन्नता, शांति, न्याय आदि को बच्चों के विचारों, भावनाओं और कार्यों में शामिल किया जाता है एवं वे आदर्श और मानकों के रूप में कार्य करते हैं, जो उनके जीवन में उनके कार्यों को नियंत्रित करते हैं।

यदि परिवार को नैतिक मूल्यों को व्यवस्थित रूप से पढ़ाया जाता है, तो परिवार में प्रचलित मूल्य प्रणाली युवा परिवार के सदस्यों के लिए स्वचालित हो जाती है। परिवार, लोगों और समाज के प्रति बच्चे के दृष्टिकोण को आकार देता है और बच्चे के मानसिक विकास में सहायता करता है और उसकी महत्वाकांक्षाओं और मूल्यों का समर्थन करता है।

परिवार में आनंदित और हंसमुख वातावरण से प्यार, स्नेह, सहनशीलता और उदारता का विकास होगा। एक बच्चा अपने आस-पास जो देखता है, उसका अनुसरण करके व्यवहार करना सीखता है।

निष्कर्ष:

इसके महत्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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