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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 February 2021

 

विषयसूची

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘धन विधेयक’

2. नागालैंड विधानसभा द्वारा नागा-राजनीतिक मुद्दों पर समिति का गठन

3. वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अधिक वित्तीय शक्तियां

4. ‘किशोर न्याय अधिनियम’ में संशोधन

5. संयुक्त राष्ट्र शांति-सैनिक

6. FATF की ‘ग्रे लिस्ट’ में पाकिस्तान ‘जून’ तक के लिए शामिल

7. ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ का वित्तपोषण

 

सामान्य अध्ययन-III

1. उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (PLI) योजना

2. नासा का परसिवरेंस रोवर

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. चारमीनार (Charminar)

2. ‘भारतीय सांकेतिक भाषा’ का शब्दकोष

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘धन विधेयक’


(MONEY Bills)

संदर्भ:

हाल ही में, कांग्रेस द्वारा, पहले से ही कदम उठाते हुए, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र लिखा है, जिसमे सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण सहित और सात प्रमुख विधेयकों को ‘धन विधेयक’ घोषित करके राज्यसभा को बाईपास नहीं करने का आग्रह किया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • धन विधेयक पर कानून बनाने के संबंध में राज्य सभा की शक्तियाँ सीमित होती हैं।
  • धन विधेयक पर राज्य सभा द्वारा किए गए संशोधनों को स्वीकार करने या अस्वीकार करने के लिए लोक सभा स्वतंत्र होती है।

‘धन विधेयक’ क्या होता है?

संविधान के अनुच्छेद 110 में ‘धन विधेयक’ को एक ‘मसौदा कानून’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमे, केवल इस अनुच्छेद के तहत सूचीबद्ध किसी अथवा सभी विषयों से संबंधित प्रावधान शामिल होते हैं।

  • इनमे सात विशेषताओं / लक्षणों का एक समूह का एक होता है, जिसमे मोटे तौर पर, करों को लागू करना अथवा इनका विनियमन करना; भारत सरकार द्वारा ऋण लेने संबंधी विनियमन; भारत की संचित निधि से धन का विनियोग; इत्यादि विषय शामिल होते हैं।
  • यदि, किसी प्रस्ताविक कानून में अन्य विशेषताएं शामिल होती हैं, जो विशेष रूप से उल्लिखित विशेषताओं / लक्षणों के प्रासंगिक या संलग्न नहीं होती हैं, तो इस प्रकार के मसौदा कानून को धन विधेयक के रूप में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है।

अनुच्छेद 110 में आगे स्पष्ट किया गया है कि, जब किसी विधेयक पर यह विवाद उठता है कि कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ है अथवा नहीं, तो इस मामले में  लोकसभा अध्यक्ष का विनिश्चय अंतिम माना जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. वित्त विधेयक के माध्यम से कौन से परिवर्तन किए जा सकते हैं?
  2. आयकर संबंधी परिवर्तन किस प्रकार किए जा सकते हैं?
  3. धन विधेयक बनाम वित्त विधेयक।
  4. धन विधेयक और वित्त विधेयक से संबंधित मामलों पर फैसला कौन करता है।

मेंस लिंक:

धन विधेयक, वित्त विधेयक से किस प्रकार भिन्न होता है? क्या, किसी विधेयक को ‘धन विधेयक’ के रूप में वर्गीकृत करने की प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता है? विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

नागालैंड विधानसभा द्वारा नागा-राजनीतिक मुद्दों पर समिति का गठन


संदर्भ:

हाल ही में, नगालैंड विधानसभा द्वारा दो दशकों से अधिक समय से ज्वलंत नागा-राजनीतिक मुद्दों पर एक ‘सात सदस्यीय प्रारूप समिति’ (Drafting Committee) का गठन किया गया है।

पृष्ठभूमि:

  • दशकों के सशस्त्र अतिवाद के पश्चात, वर्ष 1997 में इसाक-मुइवा गुट के ‘नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड’, अर्थात NSCN (IM) द्वारा युद्ध विराम घोषित करने के बाद से नगालैंड में शांति कायम हुई।
  • राजनीतिक समस्या का हल निकालने में, अगस्त 2015 में केंद्र और NSCN (IM) के बीच फ्रेमवर्क समझौते तथा नवंबर 2017 में केंद्र और नागा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (Naga National Political Groups- NNPGs) के मध्य एक सहमति पर पहुचने के अलावा, वार्ताओं के कई दौर विफल रहे।

नागा राजनीति का संक्षिप्त इतिहास:

स्वतंत्रता पूर्व:

  1. अंग्रेजों ने वर्ष 1826 में असम पर कब्जा कर लिया और वर्ष 1881 में नागा हिल्स भी ब्रिटिश भारत का हिस्सा बन गयीं। नागा विद्रोह का पहला संकेत वर्ष 1918 में ‘नागा क्लब’ के गठन में देखा जाता है। इसके सदस्यों ने वर्ष 1929 में साइमन कमीशन को नागा पहाडियों से निकल जाने को कहा था।
  2. वर्ष 1946 में नागा नेशनल काउंसिल (Naga National Council- NNC) का गठन हुआ, जिसने 14 अगस्त 1947 को नागालैंड को एक स्वतंत्र राज्य घोषित कर दिया।
  3. ‘नागा नेशनल काउंसिल’ ने “संप्रभु नागा राज्य” स्थापित करने का संकल्प लिया और वर्ष 1951 में एक “जनमत संग्रह” कराया, जिसमें “99 प्रतिशत” ने एक “स्वतंत्र” नागालैंड के पक्ष में मतदान किया।

स्वतंत्रता पश्चात:

22 मार्च, 1952 को एक भूमिगत नागा फ़ेडरल गवर्नमेंट (NFG) और नागा फ़ेडरल आर्मी (NFA) का गठन किया गया। भारत सरकार ने विद्रोह कुचलने के लिए सेना भेजी तथा वर्ष 1958 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार) अधिनियम बनाया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्रेटर नागालैंड’ के तहत शामिल राज्यों के हिस्से
  2. ‘नागा क्लब’ और ‘नागा नेशनल काउंसिल’
  3. नागा जनमत संग्रह कब आयोजित किया गया था?
  4. AFSPA का अवलोकन
  5. अनुच्छेद 371 का अवलोकन

मेंस लिंक:

नागा शांति समझौते से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

वरिष्ठ अधिकारियों के लिए अधिक वित्तीय शक्तियां


संदर्भ:

हाल ही में, मंत्रिमंडल द्वारा सशस्त्र बलों के उप-प्रमुख के पद से नीचे के वरिष्ठ अधिकारियों को ‘पूंजीगत खरीद’ हेतु अधिक वित्तीय शक्तियाँ सौंपे जाने संबंधी मंजूरी दी गयी है।

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 की अन्य पूंजीगत खरीद प्रक्रिया के तहत:

  1. सेना के कमांडरों, अन्य सेवाओं के समकक्ष क्षेत्रीय और भारतीय तटरक्षक कमांडरों को 100 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां सौंपी गई हैं।
  2. डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (CD &S), मास्टर जनरल सस्टेनेंस (MGS), चीफ ऑफ मैटेरियल (COM), एयर ऑफिसर मेंटेनेंस (AOM), डिप्टी चीफ ऑफ़ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (DCIDS), अतिरिक्त महानिदेशक तटरक्षक बल, के लिए 200 करोड़ रुपये तक की वित्तीय शक्तियां सौंपी गई हैं।

महत्व:

शक्तियों का हस्तांतरण, सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण में सहायक होगा।

DAP 2020 के बारे में:

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 (Defence Acquisition Procedure- DAP 2020) को इसी वर्ष सितंबर में जारी किया गया था।

  1. 1 अक्टूबर से, नई नीति के द्वारा ‘रक्षा खरीद प्रक्रिया’- 2016 को समाप्त कर दिया गया।
  2. ‘रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया’ में तटरक्षक बलों सहित सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण हेतु ‘रक्षा मंत्रालय’ के पूंजी बजट से खरीद और अधिग्रहण संबंधी नीतियां और प्रक्रियाएं शामिल की गयी हैं।

नई नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  1. 1. स्वदेशी फर्मों के लिए आरक्षण:

नीति में स्वदेशी फर्मों के लिए कई खरीद श्रेणियां आरक्षित की गयी हैं।

DAP 2020 में ‘भारतीय विक्रेता’ को ऐसी कंपनी के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका स्वामित्व और नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास है और जिसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 49 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

  1. नई खरीद (भारत में वैश्विक-विनिर्माण) श्रेणी:

इसमें प्रौद्योगिकी हस्तांतरण सहित भारत में विनिर्मित करने के आशय से की गयी विदेशी खरीद के समग्र अनुबंध मूल्य के कम से कम 50 प्रतिशत भाग का स्वदेशीकरण किए जाना अनिवार्य किया गया है।

  1. अधिकतम स्वदेशी सामग्री का उपयोग:

इसमें लाइसेंस के तहत भारत में निर्मित उपकरणों सहित हथियारों और सैन्य खरीद के उपकरणों में अथिकतम स्वदेशी सामग्री के उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। अधिकांश अधिग्रहण श्रेणियों में, रक्षा खरीद प्रक्रिया (DAP) 2016 की तुलना में DAP-2020 में 10 प्रतिशत अधिक स्वदेशीकरण के अनुबंध शामिल हैं।

  1. आयात प्रतिषेध सूची (Import embargo list):

विगत माह में सरकार द्वारा प्रवर्तित 101 वस्तुओं की ‘आयात प्रतिषेध सूची’ को रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 में भी विशेष रूप से शामिल किया गया है। (व्यापार प्रतिषेध एक सरकारी आदेश होता है, जिसमे किसी निर्दिष्ट देश से व्यापार अथवा विशिष्ट वस्तुओं के आदान-प्रदान को प्रतिबंधित किया जाता है।)

  1. ऑफसेट देयता:

सरकारी निर्णय के अनुसार- यदि अंतर–सरकारी समझौते (IGA), सरकार–से–सरकार अथवा प्रारंभिक एकल विक्रेता के माध्यम से सौदा किया जाता है, तो सरकार रक्षा उपकरणों की खरीद में ऑफसेट क्लॉज का प्रावधान नहीं रखेगी।

ऑफसेट क्लॉज़ के प्रावधान के तहत विदेशी विक्रेता के लिए ‘अनुबंध मूल्य’ के एक भाग का निवेश भारत में करना आवश्यक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ऑफसेट देयता क्या है?
  2. बेस कंट्रोल प्राइस क्या है?
  3. क्या DAP 2020 तटरक्षक बलों के लिए लागू है?
  1. धीरेन्द्र सिंह कमेटी किससे संबंधित है?

मेंस लिंक:

नीति के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

‘किशोर न्याय अधिनियम’ में संशोधन


(Amendments to Juvenile Justice Act)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’, 2015 (Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015) में संशोधनों के लिए स्वीकृति दे दी गई है।

नवीनतम संशोधनों के अंतर्गत:

  • जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के लिए ‘गोद लेने का आदेश’ जारी करने तथा कानून के क्रियान्यवन की निगरानी का अधिकार दिया गया है।
  • जिला मजिस्ट्रेट तथा अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को ‘किशोर न्याय अधिनियम’ (JJ Act) को लागू करने हेतु जिम्मेदार एजेंसियों के कामकाज की निगरानी करने का अधिकार दिया गया है।
  • जिला बाल संरक्षण इकाइयाँ, ‘जिला मजिस्ट्रेट’ के अधीन कार्य करेंगी।
  • किसी व्यक्ति द्वारा बच्चों के लिए एक आश्रय गृह स्थापित करने तथा ‘जेजे एक्ट’ के तहत पंजीकरण कराने हेतु राज्य के लिए प्रस्ताव भेजने से पूर्व, जिला मजिस्ट्रेट के लिए आश्रय गृह की क्षमता तथा पृष्ठभूमि की जांच करनी आवश्यक होगी।
  • जिला मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर सुरक्षा इकाइयों और पंजीकृत बाल-देखभाल संस्थाओं के कामकाज का स्वतंत्र रूप मूल्यांकन कर सकता है।

‘जेजे एक्ट’ के बारे में:

  1. ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’, अर्थात ‘जेजे एक्ट’ के द्वारा किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000 प्रतिस्थापित किया गया है।
  2. उद्देश्य: विधि का अभिकथित उल्लंघन करते पाए जाने वाले बालकों और देखरेख तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बालकों से संबंधित मामलों का व्यापक रूप से समाधान करना।
  3. अधिनियम के तहत, प्रत्येक जिले में ‘किशोर न्याय बोर्ड’ और ‘बाल कल्याण समितियां’ स्थापित करने का आदेश दिया गया है। इन संस्थाओं में कम से कम एक महिला सदस्य होनी अनिवार्य है।
  4. इसके अलावा, इसके तहत ‘केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण’ (Central Adoption Resource Authority– CARA) को वैधानिक निकाय का दर्जा दिया गया है, जिससे यह प्राधिकरण अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में सक्षम होगा।
  5. इस अधिनियम में बालकों के खिलाफ होने वाले कई नए अपराधों (जैसे, अवैध रूप से गोद लेना, आतंकवादी समूहों द्वारा बालकों का उपयोग, विकलांग बालकों के खिलाफ अपराध, आदि), जो किसी अन्य कानून के तहत पर्याप्त रूप से आच्छादित नहीं है, को शामिल किया गया है।
  6. राज्य सरकार द्वारा, स्वैच्छिक या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित होने वाले सभी बाल देखभाल संस्थानों के लिए क़ानून के प्रारंभ होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना आवश्यक है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र शांति-सैनिक


(UN peacekeepers)

संदर्भ:

हाल ही में, भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र शांति-सैनिकों के लिए कोविड-19 टीकों की दो लाख खुराकें उपहार स्वरूप देने घोषणा की गई है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर देशों के शत्रुता उन्मूलन पर प्रस्ताव 2532 (2020) के क्रियान्वयन पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खुली बहस के दौरान यह घोषणा की थी।

‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ का ‘प्रस्ताव 2532 क्या है?

प्रस्ताव के तहत:

  1. अपने एजेंडे में, सभी परिस्थितियों में सभी शत्रुताओं को सामान्य और तत्काल समाप्त किए जाने की मांग की गयी है “(जिनके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा पहले से ही चिह्नित किया जा चुका है)।
  2. सशस्त्र संघर्षों में शामिल सभी पक्षकारों (जो विशेष रूप से UNSC के एजेंडे में शामिल नहीं हैं, उन्हें भी शामिल करते हुए) से, तत्काल ‘कम से कम 90 दिनों के निरंतर स्थाई मानवीय विराम’ देने की मांग की है।
  3. विशेष रूप से ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद’ द्वारा नामित आतंकवादी समूहों, जैसे इराक में इस्लामिक स्टेट और लेवंत (Levant) को शामिल नहीं किया गया है।

‘शांति अभियान’ एवं इनका महत्व:

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान, डिपार्टमेंट ऑफ़ पीस ऑपरेशन तथा डिपार्टमेंट ऑफ़ ऑपरेशनल सपोर्ट का एक संयुक्त प्रयास है।

  • प्रत्येक शांति रक्षा अभियान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा मंजूरी प्रदान की जाती है।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के लिए वित्तीय आपूर्ति को संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा सामूहिक रूप से वहन किया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, प्रत्येक सदस्य राष्ट्र शांति अभियानों के लिए निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।

संरचना:

  • संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षकों में सैनिक, पुलिस अधिकारी और नागरिक कर्मी सम्मिलित हो सकते हैं।
  • सदस्य देशों द्वारा स्वैच्छिक आधार पर शांति सैनिको का योगदान दिया जाता है।
  • शांति अभियानों के नागरिक कर्मचारी, अंतर्राष्ट्रीय सिविल सेवक होते हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सचिवालय द्वारा भर्ती और तैनात किया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान तीन बुनियादी सिद्धांतों द्वारा निर्देशित होते है:

  1. पक्षकारों की सहमति
  2. निष्पक्षता
  3. अधिदेश की सुरक्षा और आत्मरक्षा के अलावा बल प्रयोग नहीं किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शांति अभियानों का वित्त पोषण किसके द्वारा किया जाता है?
  2. UNSC की भूमिका
  3. शांतिरक्षकों की संरचना?
  4. शांति सैनिकों को ब्लू हेल्मेट क्यों कहा जाता है?
  5. संयुक्त राष्ट्र शांति सेना के मार्गदर्शक सिद्धांत
  6. वर्तमान में जारी शांति अभियान

मेंस लिंक:

संयुक्त राष्ट्र शांति अभियान और उसके महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय एवं इसके पड़ोस। महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

FATF की ग्रे लिस्टमें पाकिस्तान ‘जून’ तक के लिए शामिल


संदर्भ:

पेरिस में, 21 से 26 फरवरी के मध्य, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ (Financial Action Task Force- FATF) की पूर्ण सभा तथा कार्यकारी समूह की बैठकें आयोजित होंगी, जिनमे पाकिस्तान की ‘ग्रे लिस्ट’  संबंधी स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, जून माह तक, पाकिस्तान के वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की ‘ग्रे लिस्ट’  से बाहर निकलने की संभावना नहीं है।

पृष्ठभूमि:

वित्तीय कार्रवाई कार्यदल (FATF) द्वारा जून 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में रखा गया था और उसे 27 एक्शन पॉइंट लागू करने हेतु एक समयसीमा दी गई थी।

वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) के बारे में:

FATF का गठन 1989 में जी-7 देशों की पेरिस में आयोजित बैठक में हुआ था। यह एक अंतर-सरकारी निकाय है।

  • यह एक ‘नीति-निर्माणक निकाय’ है जो विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर विधायी एवं नियामक सुधार करने हेतु आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति उत्पन्न करने के लिए कार्य करता है।
  • इसका सचिवालय पेरिस में ‘आर्थिक सहयोग और विकास संगठन’ (Economic Cooperation and Development- OECD) मुख्यालय में स्थित है।

भूमिका एवं कार्य:

  • शुरुआत में FATF को मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने संबंधी उपायों की जांच करने तथा इनका विकास करने के लिए स्थापित किया गया था।
  • अक्टूबर 2001 में, FATF द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा आतंकवादी वित्तपोषण से निपटने संबंधी प्रयासों को शामिल करने हेतु अपने अधिदेश का विस्तार किया गया।
  • अप्रैल 2012 में, इसके द्वारा सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार हेतु वित्तपोषण पर रोक लगाने को अपने प्रयासों में सम्मिलित किया गया।

संरचना:

‘वित्तीय कार्रवाई कार्य बल’ / फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) वर्त्तमान में 39 सदस्य सम्मिलित हैं। इसके सदस्य विश्व के अधिकांश वित्तीय केंद्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें 2 क्षेत्रीय संगठन – गल्फ ऑफ कोऑपरेशन कौंसिल (GCC) तथा यूरोपियन कमीशन (EC)– भी सम्मिलित हैं।

ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट:

ब्लैक लिस्ट: आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों का समर्थन करने वाले तथा इन गतिविधियों पर रोक लगाने संबंधी वैश्विक प्रावधानों के साथ सहयोग नहीं करने वाले देशों (Non-Cooperative Countries or Territories- NCCTs) को ‘ब्लैक लिस्ट’ में रखा जाता है।

FATF द्वारा नियमित रूप से ब्लैकलिस्ट में संशोधन किया जाता है, जिसमे नयी प्रविष्टियों को शामिल किया जाता है अथवा हटाया जाता है।

ग्रे लिस्ट: जिन देशों को आतंकी वितपोषण तथा मनी लॉन्ड्रिंग संबंधित गतिविधियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, उन्हें FATF द्वारा ‘ग्रे लिस्ट’ में डाल दिया जाता है।

‘ग्रे लिस्ट’ में शामिल देशों को निम्नलिखित स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है:

  1. आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी से आर्थिक प्रतिबंध।
  2. आईएमएफ, विश्व बैंक, एडीबी और अन्य देशों से ऋण प्राप्त करने में समस्या।
  3. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कमी।
  4. अंतर्राष्ट्रीय बहिष्कार।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जी-7, जी-8 तथा जी- 20 में अंतर
  2. ब्लैक लिस्ट तथा ग्रे लिस्ट
  3. क्या FATF के निर्णय सदस्य देशों पर बाध्यकारी हैं?
  4. FATF का प्रमुख कौन है?
  5. इसका सचिवालय कहाँ है?

मेंस लिंक:

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) का अधिदेश तथा उद्देश्य क्या हैं? भारत – पाकिस्तान संबंधों के लिए FATF के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ का वित्तपोषण


संदर्भ:

अमेरिकी विदेश मंत्री ‘एंटनी ब्लिंकन’ द्वारा, इस महीने के अंत तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को  200 मिलियन डॉलर का भुगतान करने की घोषणा गई है।

यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अमेरिका को WHO से अलग करने की प्रक्रिया की शुरूआत की गयी थी, जिस पर, उनके उत्तराधिकारी, राष्ट्रपति जो बिडेन ने रोक लगा दी है।

इस कदम की आवश्यकता और महत्व:

अमेरिका ने कहा है, कि उसका मानना है कि बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र, विश्व स्वास्थ्य संगठन, न केवल, कोविड-19 अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य और मानवीय प्रतिक्रिया के रूप में महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य के लिए, ‘मजबूत वैश्विक स्वास्थ्य क्षमताओं और सुरक्षा’ का निर्माण भी करते हैं।

WHO का वित्त पोषण:

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ को चार प्रकार से वित्त प्राप्त होता है:

  1. निर्धारित योगदान (Assessed contributions): इसके अंतर्गत संगठन के प्रत्येक सदस्य को सदस्यता राशि के रूप में एक निश्चित राशि का भुगतान करना होता है। प्रत्येक सदस्य देश द्वारा किए जाने वाले भुगतान की गणना देश के धन और जनसंख्या के सापेक्ष की जाती है।
  2. स्वैच्छिक योगदान (Voluntary contributions): इसके अंतर्गत सदस्य देशों (उनके निर्धारित योगदान के अतिरिक्त) तथा अन्य भागीदारों से अनुदान दिया जाता है।
  3. कोर स्वैच्छिक योगदान (Core voluntary contributions): इसके तहत कम वित्त पोषित कार्यक्रमों को वित्त की कमी के कारण वाधित होने पर सुचारू ररूप से संचालित करने के लिए फंडिंग की जाती है।
  4. इंफ्लूएंजा महामारी से निपटने हेतु योगदान (Pandemic Influenza Preparedness- PIP): इसे संभावित महामारी के दौरान विकासशील देशों की वैक्सीन तथा अन्य सामग्री की आपूर्ति को सुनिश्चित करने हेतु वर्ष 2011 से आरम्भ किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WHO का प्रशासन
  2. WHO में योगदान के प्रकार
  3. सबसे बड़ा योगदानकर्ता
  4. विश्व स्वास्थ्य दिवस का महत्व

मेंस लिंक:

विश्व में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में WHO की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (PLI) योजना


(Production-Linked Incentive (PLI) scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा पांच वर्षों में  12,195 करोड़ के परिव्यय के साथ दूरसंचार क्षेत्र के लिए उत्‍पादन संबद्ध प्रोत्‍साहन (PLI) योजना (Production-Linked Incentive scheme: PLI scheme) को मंजूरी प्रदान की गयी है।

इस योजना का कार्यान्वयन 1 अप्रैल, 2021 से शुरू किया जाएगा।

महत्व:

  • इस योजना से 2.44 लाख करोड़ रुपये के उपकरणों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और लगभग 40,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की उम्मीद है।
  • इस योजना से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार तथा कर प्राप्त उत्पन्न होने की संभावना है।

PLI योजना’ के बारे में:

  1. इस योजना का उद्देश्य भारत को दूरसंचार उपकरण निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है।
  2. इस योजना के तहत पात्रता मानदंडों में, संचयी वृद्धिशील निवेश और निर्मित वस्तुओं की वृद्धिशील बिक्री का लक्ष्य हासिल करने हेतु न्यूनतम सीमा निर्धारित की गयी है।
  3. विभिन्न श्रेणियों और वर्षों के लिए 4% से 7% के मध्य प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। कुल वस्तुओं की संचयी वृद्धिशील बिक्री पर करों की गणना के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 को आधार वर्ष के रूप में माना जाएगा।
  4. MSME के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 10 करोड़ रुपये और अन्य के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 100 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
  5. एक बार अर्हता प्राप्त करने बाद से, निवेशक को उसकी अप्रयुक्त क्षमता का उपयोग करने में सक्षम बनाने हेतु न्यूनतम निवेश सीमा के 20 गुना तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘उत्‍पादन से संबद्ध प्रोत्‍साहन’ योजना- इसकी घोषणा कब की गई थी?
  2. इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि है?
  3. किस तरह के निवेश पर विचार किया जाएगा?
  4. योजना की अवधि
  5. इसे कौन कार्यान्वित करेगा?

मेंस लिंक:

इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स विनिर्माण के लिए ‘उत्‍पादन से संबद्ध प्रोत्‍साहन’ योजना क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नासा का परसिवरेंस रोवर


(NASA Perseverance)

संदर्भ:

पृथ्वी से सात महीने की यात्रा के बाद, नासा का परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) मंगल ग्रह की ओर अपनी यात्रा के अंतिम दौर में है।

‘परसिवरेंस रोवर’ के बारे में:

  • परसिवरेंस रोवर (Perseverance rover) को, जुलाई 2020 में लॉन्च किया गया था।
  • यह, संभवतः मंगल ग्रह की सतह पर स्थित ‘जेज़ेरो क्रेटर (Jezero Crater) पर उतरेगा।
  • परसिवरेंस का मुख्य कार्य प्राचीन माइक्रोबियल जीवन के खगोलीय साक्षयों की खोज करना, तथा वापसी में पृथ्वी पर लाने के लिए चट्टानों तथा रेगोलिथ (Reglolith) के नमूने एकत्र करना है।
  • इसमें ईधन के रूप में, प्लूटोनियम के रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न ताप द्वारा जनित विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया है।
  • नासा का परसिवरेंस में, मंगल ग्रह की सतह पर स्थिर रहने के लिए, शेप मेमोरी एलाय (shape memory alloys) का प्रयोग किया गया है।
  • ड्रिल, कैमरा और लेजर से लैस परसिवरेंस रोवर, मंगल ग्रह पर अन्वेषण करने के लिए तैयार है।

इस मिशन का महत्व:

  • परसिवरेंस रोवर में MOXIE अथवा मार्स ऑक्सीजन ISRU एक्सपेरिमेंट नामक एक विशेष उपकरण लगा है, जो मंगल ग्रह पर कार्बन-डाइऑक्साइड-समृद्ध वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करके पहली बार आणविक ऑक्सीजन का निर्माण करेगा। (ISRU- In Situ Resource Utilization, अर्थात स्व-स्थानिक संशाधनो का उपयोग)
  • इस मिशन पर एक, इंजेन्युटी (Ingenuity)’ नामक एक हेलीकॉप्टर भी भेजा गया है, यह मंगल ग्रह पर उड़ान भरने वाला पहला हेलीकॉप्टर होगा। यह पहला मौका होगा, जब नासा किसी दूसरे ग्रह या उपग्रह पर कोई हेलीकॉप्टर उतारेगा।

नासा के पिछले मंगल मिशन:

  1. नासा, वर्ष 1997 में मार्स पाथफाइंडर मिशन के आरंभ से मंगल ग्रह पर रोवर्स भेज रहा है।
  2. मिशन के सफलता के बाद, नासा ने साक्ष्य खोजने हेतु मंगल कार्यक्रम जारी रखने का निर्णय लिया।
  3. दूसरी बार, नासा ने वर्ष 2003 में मंगल पर जुड़वां रोवर्स, स्पिरिट तथा अपार्चुनिटी भेजे।
  4. नासा ने तीसरी बार वर्ष 2012 में क्यूरियोसिटी रोवर भेजा था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मंगल मिशन
  2. पर्सविरन्स रोवर – उद्देश्य
  3. पर्सविरन्स रोवर पर उपकरण
  4. UAE के ‘होप’ मिशन तथा चीन के तियानवेन -1 अंतरिक्ष यान के बारे में
  5. पाथफाइंडर मिशन

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


चारमीनार (Charminar)

  • चारमीनार का निर्माण, वर्ष 1591 में मोहम्मद कुली कुतब शाह द्वारा शहर में प्लेग के ख़त्म होने के उपलक्ष्य में कराया गया था।
  • प्रत्येक मीनार कमल-पत्ते नुमा आधार पर निर्मित है, यह कुतुब शाही इमारतों में एक पाया जाने वाला विशेष विशेष लक्षण है।

चर्चा का कारण:

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, चारमीनार से लगे हुए किसी चिल्ला (एक छोटा मंदिर) का कोई अभिलेख नहीं है। ASI के द्वारा सूचना के अधिकार तहत पूछे गए एक प्रश्न के जबाब में ये जानकारी दी गयी।

‘भारतीय सांकेतिक भाषा’ का शब्दकोष

हाल ही में, “भारतीय सांकेतिक भाषा (Indian Sign Language ISL) के डिजिटल शब्दकोश का तीसरा संस्करण” जारी किया गया।

  • इसमें छह श्रेणियों के अंतर्गत 10,000 शब्द शामिल हैं।
  • इस शब्दकोश को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC) द्वारा तैयार किया गया है।
  • ISLRTC सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
  • विकलांग अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सांकेतिक भाषा को संचार के साधन के रूप में मान्यता प्रदान की गयी है।

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