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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 17 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. पुदुचेरी का उपराज्यपाल

2. दिशा रवि की गिरफ्तारी में नियमों का उल्लंघन

3. कोविड का दक्षिण अफ्रीकी ‘रूपांतर’

4. फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ का अधिकार क्षेत्र

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नेट न्यूट्रैलिटी

2. पेयजल सर्वेक्षण

3. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ओडिशा में उद्योगों के लिए भूमि-अधिग्रहण सीमा में वृद्धि

2. फ्रांस में चरमपंथ का मुकबला करने हेतु विधेयक पारित

3. ई-छावनी पोर्टल

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

पुदुचेरी का उपराज्यपाल


(Puducherry L-G)

संदर्भ:

हाल ही में, राष्ट्रपति कोविंद ने किरण बेदी को पुदुचेरी के उपराज्यपाल (Lt. Governor- LG) के पद से हटा दिया है तथा तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सौंदर्यराजन को पुदुचेरी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

पुदुचेरी के उपराज्यपाल की शक्तियां और स्रोत:

पुदुचेरी एक केंद्र शासित प्रदेश है, तथा संविधान के अनुच्छेद 239A द्वारा प्रशासित होता है।

  1. केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम (Government of Union Territories Act), 1963 के तहत पुदुचेरी के लिए, मंत्रिपरिषद सहित एक विधान सभा का प्रावधान किया गया है।
  2. इसके साथ ही, अधिनियम में कहा गया है कि, केंद्र-शासित प्रदेश का प्रशासन भारत के राष्ट्रपति द्वारा उपराज्यपाल के माध्यम से किया जाएगा।
  3. अधिनियम की धारा 44 में उपराज्यपाल (LG) के लिए कानून बनाने के मामले में ‘विवेकानुसार कार्य करने’ की शक्ति प्रदान की गयी है, हालांकि, उपराज्यपाल को सहायता एवं परामर्श देने हेतु एक मंत्रिपरिषद होगी। किसी भी मामले पर, उपराज्यपाल और उनके मंत्रियों के बीच मतभेद होने की स्थिति में, उपराज्यपाल मामले को राष्ट्रपति के पास निर्णय के लिए भेजने, और राष्ट्रपति द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार कार्य करने के लिए बाध्य है। हालांकि, उपराज्यपाल / प्रशासक, मामले को ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ (Urgent) भी घोषित कर सकता है, अपने अनुसार तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।
  4. अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत, कुछ विधायी प्रस्तावों के लिए प्रशासक / उपराज्यपाल की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। इनमें, मंत्रिपरिषद द्वारा विधान सभा में प्रस्तावित करने के उद्देश्य से, ’न्यायिक आयुक्त की अदालत की संरचना एवं गठन’, तथा ‘राज्य सूची या समवर्ती सूची के किसी विषय पर न्यायिक आयुक्त की अदालत के अधिकार क्षेत्र और शक्तियों’ से संबंधित विधेयक या संशोधनों को शामिल किया गया है।

नियुक्ति:

उपराज्यपाल को राष्ट्रपति द्वारा पांच साल की अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दिल्ली तथा पुदुचेरी के उपराज्यपाल की शक्तियों में अंतर
  2. राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों की विधायी शक्तियां
  3. उपराज्यपाल और विधायिका के बीच मतभेद होने पर क्या होता है?
  4. संघ शासित प्रदेशों के संदर्भ में उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार।
  5. अदालत की खुद के आदेशों की समीक्षा करने संबंधी शक्ति।

मेंस लिंक:

केंद्रशासित प्रदेश पुदुचेरी की संवैधानिक मशीनरी के संचालन में उपराज्यपाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

दिशा रवि की गिरफ्तारी में नियमों का उल्लंघन


संदर्भ:

हाल ही में दिल्ली पुलिस द्वारा बैंगलोर की एक जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि की गिरफ्तारी को शीर्ष वकीलों ने ‘अब-इनिशियो-इल्लीगल’ (ab-initio-illegal) करार दिया है, जिसका अर्थ है, ‘शुरू से ही गैर-कानूनी’।

पृष्ठभूमि:

दिशा रवि को, किसानों के विरोध प्रदर्शन को आयोजित करने के लिए एक ‘टूलकिट’ को ‘संपादित’ करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। एक वैश्विक जलवायु नेता ग्रेटा थुनबर्ग, एक किशोर युवती, ने इस टूलकिट को ऑनलाइन अग्रेषित किया था।

संबंधित प्रकरण:

दिशा रवि की गिरफ्तारी में, दिशा के प्रत्येक कानूनी और संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है। सबसे पहले, जहाँ से वह गिरफ्तार की गयी, उसे वहां (बेंगलुरु) की अदालत में ट्रांजिट रिमांड के लिए पेश नहीं किया गया; दिल्ली में, उसे पुलिस हिरासत में भेजने से पहले वकील उपलब्ध नहीं कराया गया।

इस संदर्भ में नियम एवं अन्य प्रावधान:

वकीलों के अनुसार,  इस मामले में कानून की लगभग हर प्रक्रिया को अनदेखा किया गया है।

  • ऐसा कहा जा रहा है कि, दिल्ली पुलिस ने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किसी भी दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया।
  • दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 80 में कहा गया है कि, गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को, जिस स्थान से गिरफ्तार किया गया है, उस जगह के क्षेत्राधिकार से संबंधित मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना अनिवार्य है और इस प्रक्रिया का हर मामले में पालन किया जाना चाहिए।
  • दिशा रवि के लिए कानूनी सलाह लेने का अवसर नहीं मिला और न ही उसे कोई कानूनी सलाहकार उपलब्ध कराया गया, यह अनुच्छेद 22 का उल्लंघन है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

कोविड का दक्षिण अफ्रीकी ‘रूपांतर’


(What is the South African Covid variant?)

संदर्भ:

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा यूनाइटेड किंगडम,  ब्राजील और हाल ही में, दक्षिण अफ्रीका से उत्पन्न होने वाले कोरोनावायरस के तीन नए रूपों की पहचान की गई है।

संबंधित चिंताएं:

  • कोरोनावायरस के तीनों नए रूपों में से, सबसे नए दक्षिण अफ्रीकी ‘प्रकार’ को 20H/501Y.V2 or B.1.351 के रूप में जाना जाता है। यह ब्रिटेन में पाए गए ‘कोविड के प्रकार’ से भिन्न है और मूल वायरस की तुलना में अधिक संक्रामक प्रतीत हो रहा है।
  • ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण अफ्रीकी ‘प्रकार’ में N501Y नामक एक उत्परिवर्तन (mutation) होता है जो इसे अधिक संक्रामक और फैलने में आसान बनाता है।
  • इसके अलावा, WHO ने कहा है कि कोविड के पिछले ‘प्रकारों’ / वेरिएंटस की तुलना में यह ‘प्रकार’ ‘रोग-प्रतिकारक निष्प्रभावीकरण के प्रति लिए कम संवेदनशील है।

विषाणु- उत्परिवर्तन के कारण

उत्परिवर्तन / म्यूटेशन (Mutation) का तात्पर्य यहाँ पर ‘अंतर’ से होता है: जीनोम की बनावट में परिवर्तन।

  • वायरस में होने वाला उत्परिवर्तन (Mutation), इसके का एक स्वाभाविक भाग होता है।
  • लाखों लोगों के संक्रमित हो जाने के पश्चात वायरस पर विकसित होने का दबाव बढ़ जाता है।

SARS-CoV-2 के मामले में: यह एक राइबोन्यूक्लिक एसिड (RNA) वायरस है, तथा इसमें उत्परिवर्तन का तात्पर्य इसके अणुओं की व्यवस्था क्रम में बदलाव होना है।

आरएनए वायरस में कोई उत्परिवर्तन आमतौर पर तब होता है जब वायरस अपनी प्रतिकृतियाँ बनाते समय गलती करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कोविड-19 क्या है?
  2. उत्परिवर्तन क्या है?
  3. mRNA क्या है?
  4. RTPCR टेस्ट क्या है?

मेंस लिंक:

कोविड-19 वायरस के उत्परिवर्तन से संबंधित चिंताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ का अधिकार क्षेत्र


संदर्भ:

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) एक हालिया निर्णय में कहा है, कि फिलिस्तीनी क्षेत्र में होने वाले अत्याचार और युद्ध अपराध, इसके आधिकार-क्षेत्र में आते हैं। इस फैसले से, इस क्षेत्र में इजरायल की कार्रवाइयों पर एक आपराधिक जांच का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

न्यायाधीशों ने कहा कि उनका निर्णय अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के संस्थापक दस्तावेजों में निर्धारित न्यायिक नियमों पर आधारित है, और फैसले में किसी राज्य की स्थिति (statehood) अथवा वैधानिक सीमाओं को निर्धारित करने का प्रयास नहीं किया गया है।

‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ (ICC) की टिप्पणी:

  • आईसीसी ने फैसला सुनाया है कि, फिलिस्तीन, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की स्थापना करने वाले ‘रोम संविधि’ (Rome Statute) का पक्षकार राज्य है।
  • आईसीसी के कहा है, कि जिस क्षेत्र में ‘प्रश्नगत कार्यवाहियां’ की गयी है, उस क्षेत्र पर फिलिस्तीन को एक राज्य के रूप में अहर्ता प्राप्त है तथा अदालत का अधिकार क्षेत्र पूर्वी यरुशलम, वेस्ट बैंक और गाजा तक विस्तारित है।

इज़राइल की प्रतिक्रिया:

इजराइल ‘अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय’ (ICC) का सदस्य नहीं है। गैर-सदस्य होने नाते, यह आईसीसी के हालिया के फैसले के खिलाफ अपील नहीं कर सकता है, लेकिन इसके अटॉर्नी जनरल का तर्क है, कि केवल एक संप्रभु राज्य ही आईसीसी को प्रतिनिधिक अधिकार सौंप सकता है और विचाराधीन क्षेत्र पर फिलिस्तीनी संप्रभुता नहीं है।

आईसीसी के बारे में:

  • अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court -ICC) हेग, नीदरलैंड में स्थित है। यह नरसंहार, युद्ध अपराधों तथा मानवता के खिलाफ अपराधों के अभियोजन के लिए अंतिम न्यायालय है।
  • आईसीसी, विश्व का प्रथम स्थायी अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय है, जिसकी स्थापना अंतरराष्ट्रीय समुदायों के प्रति गंभीर अपराधों के दोषी अपराधियों पर मुकदमा चलाने तथा उन्हें सजा देने के लिए की गयी है।
  • इसकी स्थापना ‘रोम संविधि’ (Rome Statute) के अंतर्गत की गयी, और यह कानून, 1 जुलाई 2002 को लागू हुआ।
  • वित्तीयन (Funding): न्यायालय का खर्च मुख्य रूप से सदस्य देशों द्वारा उठाया जाता है, परन्तु इसे सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, निजी व्यक्तियों, निगमों तथा अन्य संस्थाओं से स्वैच्छिक योगदान भी प्राप्त होता है।

संरचना और मतदान शक्ति:

  • अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) के प्रबंधन, विधायी निकाय तथा सदस्य सभा में प्रत्येक सदस्य राज्य का एक प्रतिनिधि शामिल होता है।
  • प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता है तथा सर्वसम्मति से निर्णय लेने के लिए “हर संभव प्रयास” किया जाता है। किसी विषय पर सर्वसम्मति नहीं होने पर वोटिंग द्वारा निर्णय किया जाता है।
  • आईसीसी में एक अध्यक्ष तथा दो उपाध्यक्ष होते है, इनका चुनाव सदस्यों द्वारा तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए किया जाता है।

Icj_vs_ICC

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ICJ और ICC के मध्य अंतर
  2. इन संगठनों की भौगोलिक अवस्थिति
  3. रोम संविधि क्या है?
  4. आईसीसी के आदेश।
  5. जब इसके आदेश लागू नहीं किए जाते हैं तो क्या होता है?

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

नेट न्यूट्रैलिटी


(Net Neutrality)

संदर्भ:

हाल ही में, एक आद्योगिक संस्था, ‘सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (COAI) द्वारा व्हाट्सएप, गूगल डुओ आदि जैसे ओवर-द-टॉप (OTT) सर्विस प्रोवाइडर्स को लाइसेंसिंग व्यवस्था के अधीन लाने तथा ‘एप्स पर ‘समान सेवाओं के लिए समान नियम’ लागू होने तक टेलीकॉम ऑपरेटर्स पर नेट न्यूट्रैलिटी नियमों को आस्थगित करने के लिए सरकार से आग्रह किया गया है।

संबंधित प्रकरण:

  • टेलिकॉम ऑपरेटर्स, सरकार से इस क्षेत्र में बराबर का अवसर प्रदान करने के लिए समान सेवा, समान नियम’ लागू करने के लिए मांग कर रहे हैं।
  • लेकिन, हाल ही में ‘भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण’ (Telecom Regulatory Authority of India-TRAI) ने सिफारिश की थी, कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में स्पष्टता होने तक कॉलिंग और मैसेजिंग ऐप पर कोई नियम नहीं लगाए जाने चाहिए।

COAI का पक्ष:

  • जब तक ओटीटी संचार प्रदाताओं के लाइसेंस के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है, तब तक दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (telecom service providers- TSP) और OTT सर्विस प्रोवाइडर्स के बीच असमताओं में किसी भी तरीके से वृद्धि नहीं की जानी चाहिए।
  • अतः तब तक, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSP) पर नेट न्यूट्रैलिटी के लिए ट्रैफिक मैनेजमेंट प्रैक्टिस सहित कोई भी नई लाइसेंसिंग शर्तें लागू नहीं की जानी चाहिए।

‘नेट न्यूट्रैलिटी’ क्या है?

  • नेट न्यूट्रिलिटी (Net Neutrality) का अर्थ है, कि इसमें सरकारें और इंटरनेट सेवा प्रदाता, इंटरनेट पर सभी डेटा के लिए एक समान व्यवहार करते हैं तथा उपभोक्ताओं से उच्च-गुणवत्ता युक्त सेवा के लिए अथवा कुछ वेबसाइटों को प्राथमिकता देने के लिए भिन्न शुल्क नहीं देना पड़ता है।
  • नेटवर्क न्यूट्रैलिटी के तहत, सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) को पूरे ट्रैफ़िक के लिए समान स्तर की डेटा पहुँच तथा गति प्रदान करना आवश्यक होता है, तथा इसके अलावा, किसी सेवा अथवा वेबसाइट के लिए ट्रैफ़िक को ब्लॉक या कम नहीं किया जा सकता है।

भारत में नेट न्यूट्रैलिटी का विनियमन:

दूरसंचार विभाग द्वारा वर्ष 2018 में अनुमोदित नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के तहत, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच प्रदान करने के लिए उपभोक्ताओं से अलग-अलग शुल्क लेने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नेट न्यूट्रैलिटी क्या है?
  2. उदाहरण
  3. नेट न्यूट्रैलिटी पर ट्राई के दिशानिर्देश।

मेंस लिंक:

नेट न्यूट्रैलिटी से आप क्या समझते हैं? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पेयजल सर्वेक्षण


संदर्भ:

जल जीवन मिशन (शहरी) के अंतर्गत ‘पेयजल सर्वेक्षण’ को 10 शहरों में शुरू किया गया है।

  • इसे आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया है।
  • सर्वेक्षण के भाग के रूप में, अपशिष्ट जल प्रबंधन, तथा शहरों में जल निकायों की स्थिति पर डेटा एकत्र किया जाएगा।
  • मिशन की निगरानी टेक्नोलॉजी आधारित प्लेटफार्म के माध्यम से की जाएगी। इस प्लेटफॉर्म से प्रगति तथा परिणाम के आधार पर लाभार्थी की निगरानी की जाएगी।
  • पहले कदम के रूप में, दस शहरों-आगरा, बदलापुर, भुवनेश्वर, चूरू, कोच्चि, मदुरै, पटियाला, रोहतक, सूरत और तुमकुर- में पायलट आधार पर पेयजल सर्वेक्षण शुरू किया जा रहा है।

जल जीवन मिशन (शहरी):

  • जल जीवन मिशन (शहरी) का उद्देश्य 4,378 वैधानिक शहरों में सभी परिवारों को नल के पानी की सप्लाई करना तथा 500 अमृत शहरों में सीवर प्रबंधन करना है।
  • पहले इस योजना को केंद्र, राज्यों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने के माध्यम से लागू किया जाएगा।
  • इसके बाद, शहरों द्वारा नगर जल संतुलन योजना, पुनर्चक्रण / पुन: उपयोग योजना और जलभर (aquifer) प्रबंधन योजना तैयार की जाएंगी।
  • राज्य, आधारभूत मूल्यांकन के साथ परियोजना की जांच और इसके विकास के लिए मंजूरी प्रदान करेगे।

अनुदान:

पूर्वोत्तर तथा पर्वतीय राज्यों के परियोजनाओं के लिए केंद्रीय वित्त पोषण 90 प्रतिशत होगा। संघ शासित क्षेत्रों के लिए वित्त पोषण 100 प्रतिशत, एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय वित्त पोषण 50 प्रतिशत, एक से दस लाख की आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय वित्त पोषण एक-तिहाई तथा दस लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों के लिए केंद्रीय वित्त पोषण 25 प्रतिशत होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सर्वेक्षण एवं जल जीवन मिशन की प्रमुख विशेषताएं
  2. उद्देश्य
  3. सर्वेक्षण के लिए चुने गए पायलट शहर
  4. अनुदान रूपरेखा

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण


संदर्भ:

देश भर में, ऑटोमोबाइल ईंधनों की खुदरा कीमतें ऊंचाई के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

खुदरा कीमतें, कच्चे तेल की कीमतों से किस प्रकार जुड़ी होती हैं?

पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें सैधांतिक रूप से नियंत्रण मुक्त है या कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों से जुड़ी हैं। जिसका अर्थ है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, जैसा कि फरवरी से हो रहा है, तो खुदरा कीमतों में भी कमी आनी चाहिए, और इसके विपरीत यदि कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होती है, तो खुदरा कीमतों में भी वृद्धि होनी चाहिए।

किंतु, ऐसा क्यों नहीं हो रहा है?

वैश्विक तेल की कीमतों में गिरावट होने पर, उत्पाद शुल्क में तेजी से वृद्धि करके, सरकार द्वारा वास्तव में ऑटो ईंधन की कीमत पर नियंत्रण कर लिया गया है। जिससे, वैश्विक कीमतों में कमी होने से उपभोक्ताओं को होने वाली बचत समाप्त हो गयी है।

सरकार, राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसा करती है।

OMCs और उपभोक्ताओं के लिए निहितार्थ:

तेल विपणन कंपनियां (Oil Marketing Companies OMCs), अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें निर्धारित करने के लिए ‘कागजों पर’ स्वतंत्र हैं।

  • केंद्रीय करों में वृद्धि का मतलब है कि उपभोक्ता को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट से कोई लाभ नहीं होगा और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की लागत में होने वाली वृद्धि को सहन करेगा।
  • ईंधन की बढ़ती कीमतों से, शहरी आबादी, ग्रामीण आबादी की तुलना में अधिक प्रभावित होगी, परंतु, कमजोर मानसून से ग्रामीण भारत प्रभावित हो सकता है क्योंकि, पर्याप्त वर्षा नहीं होने पर किसान अधिकांशतः डीजल-संचालित सिंचाई पर निर्भर होने के लिए विवश होते हैं।

अब कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि क्यों हो रही हैं?

  • पूरे विशव में महामारी फैलने के बाद, मांग में कमी होने से, अप्रैल 2020 में कच्चे तेल की कीमतें गिर गईं। किंतु, अब अर्थव्यवस्थाओं द्वारा यात्रा प्रतिबंधों को शिथिल कर दिया गया है और कारखानों के उत्पादन में वृद्धि होने लगी है, जिससे वैश्विक मांग में सुधार हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में भी सुधार हो रहा है।
  • बढ़ती मांग तथा कच्चे तेल का नियंत्रित उत्पादन भी तेल की कीमतों में वृद्धि का एक अन्य महत्वपूर्ण कारक रहा है। सऊदी अरब ने फरवरी और मार्च के दौरान स्वेच्छा से कच्चे तेल के उत्पादन में प्रतिदिन 1 मिलियन बैरल कटौती करके 125 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन किया था।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ओडिशा में उद्योगों के लिए भूमि-अधिग्रहण सीमा में वृद्धि

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन हेतु उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम, 2013 (Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013) तथा ओडिशा के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन हेतु उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिकार नियमों के तहत प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग करते हुए भूमि-अधिग्रहण सीमा में वृद्धि की गयी है।

  • ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में, प्रत्यक्ष मोलभाव के माध्यम से अधिग्रहित की जाने वाली भूमि की सीमा को दोगुना कर दिया गया है।
  • सरकार द्वारा प्रकाशित एक प्रस्ताव के अनुसार, निजी कंपनियां अब ग्रामीण क्षेत्रों में 500 एकड़ और शहरी केंद्रों में 100 एकड़ जमीन खरीद सकती हैं।

फ्रांस में चरमपंथ का मुकबला करने हेतु विधेयक पारित

हाल ही में, फ्रांस की संसद ने एक विधेयक पारित किया है, जिसके तहत फ्रांस को कट्टरपंथी इस्लामवादियों से बचाने और फ्रांसीसी मूल्यों के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मस्जिदों, स्कूलों और खेल क्लबों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा।

ई-छावनी पोर्टल

(E-Chhawani portal)

  • देश भर में 62 छावनी बोर्डों के 20 लाख से अधिक निवासियों को ऑनलाइन नागरिक सेवाएं प्रदान करने के लिए पोर्टल (https://echhawani.gov.in/) बनाया गया है।
  • पोर्टल के माध्यम से छावनी क्षेत्रों के निवासी, पट्टों के नवीकरण, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन, पानी और सीवरेज कनेक्शन, ट्रेड लाइसेंस, मोबाइल टॉयलेट लोकेटर और विभिन्न प्रकार के करों और शुल्कों के भुगतान जैसी बुनियादी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे ।


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