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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 16 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. भू-स्थानिक डेटा नीति का उदारीकरण

2. भारत में बुजुर्गों से दुर्व्यवहार चिंता का विषय: LASI  

3. रोहिंग्या संकट

4. नाइजीरिया की ‘नगोजी ओकोंजो-इवेला’, ‘विश्व व्यापार संगठन’ की नई प्रमुख

 

सामान्य अध्ययन-III

1. दिशा रवि मामला: कार्यकर्ताओं को जांच के घेरे में लेन वाला ‘टूलकिट’ क्या होता है?

 

प्रारम्भिक परिक्षा हेतु तथ्य

1. विशालकाय चर्मपृष्ठ कछुआ

2. माँ कैंटीन

3. ‘संदेश’ क्या है?

4. महाराजा सुहेलदेव

5. कार्लपट अभयारण्य, ओडिशा

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

भू-स्थानिक डेटा नीति का उदारीकरण


(Geospatial data policy liberalised)

संदर्भ:

हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा, भारत में भू-स्थानिक (Geo-spatial) क्षेत्र हेतु नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से मौजूदा प्रोटोकॉल को रद्द करके इस क्षेत्र को उदार बनाते हुए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया गया है।

नए दिशानिर्देशों के अंतर्गत:

  • भू-स्थानिक आंकड़ा (डेटा) क्षेत्र को नियंत्रण-मुक्त किया जाएगा और सर्वेक्षण, मानचित्रण तथा इस क्षेत्र पर आधारित अनुप्रयोगों के निर्माण हेतु पूर्व अनुमोदन जैसे पहलुओं को समाप्त किया जाएगा।
  • भारतीय संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को पूरी तरह से नियंत्रण मुक्त किया जायेगा तथा मानचित्रण सहित, भू-स्थानिक आंकड़ों और भू-स्थानिक डेटा सेवाओं को हासिल करने और इनका उत्पादन करने हेतु किसी पूर्व अनुमोदन, सुरक्षा मंजूरी और लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी।

लाभ:

  • सरकार का यह कदम, इस क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने तथा सार्वजनिक और निजी संस्थाओं को बराबर का अवसर प्रदान करने में सहायक होगा।
  • मानदंडों में ढील देने से, उन क्षेत्रों को काफी लाभ होगा, जो उच्च गुणवत्ता वाले मानचित्रण की अनुपलब्धता के कारण अभी तक पिछड़े हुए थे।
  • यह कदम, नवाचारों को शुरू करने और मापनीय समाधानों का निर्माण करने हेतु देश के स्टार्ट-अप्स, निजी क्षेत्र, सार्वजनिक क्षेत्र और अनुसंधान संस्थानों के लिए जबरदस्त अवसर प्रदान करेगा।
  • इससे रोजगार सृजन भी होगा और आर्थिक विकास को गति भी हासिल होगी।
  • भारत के किसानों को भी भू-स्थानिक और सुदूर संवेदी आंकड़े का फायदा मिलेगा। आंकड़े से नई प्रौद्योगिकियों और मंचों का उदय हो सकेगा जो कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाएंगे।
  • इस निर्णय से भारत की भू-मानचित्रण क्षमता का उपयोग सभी क्षेत्रों में देश के उच्च लक्ष्य के लिए किया जा सकेगा और इसकी भू-मानचित्रण क्षमता केवल सुरक्षा उद्देश्यों तक सीमित नहीं होगी।

‘भू-स्थानिक डेटा’ क्या होता है?

  1. भू-स्थानिक आंकड़े / डेटा (Geospatial data), उन वस्तुओं, घटनाओं या किसी देखी जाने वाली परिघटनाओं के बारे में आंकड़े होते है, जिनकी पृथ्वी की सतह पर एक अवस्थिति होती है।
  2. यह अवस्थिति, अल्पावधि के लिए किसी सड़क की अवस्थिति या भूकंपीय घटना की तरह स्थिर हो सकती है, अथवा किसी पैदल यात्री या गतिशील वाहन, किसी संक्रामक रोग के प्रसार, जैसी गतिशील हो सकती है।
  3. भू-स्थानिक डेटा, अवस्थिति की जानकारी और उससे संबंधित सूचनाओं (वस्तु, घटना या घटना से संबंधित विशेषताओं) को संयोजित करते हैं। इसके अलावा, अक्सर सामयिक जानकारी अथवा घटना के स्थान और उससे संबद्ध विशेषताओं को भी जोड़ते हैं।

अनुप्रयोग:

भू-स्थानिक आंकड़ों में आमतौर पर सार्वजनिक हितों, जैसे सड़क, इलाका, रेलवे लाइन, जल निकाय और सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी शामिल होती है।

पिछले एक दशक के दौरान, दैनिक जीवन में भू-स्थानिक डेटा के उपयोग में वृद्धि देखी गई है, जैसे कि स्वाइगी या ज़ोमैटो जैसे खाद्य वितरण ऐप, अमेज़ॅन जैसे ई-कॉमर्स तथा मौसम संबंधी ऐप्स में भू-स्थानिक डेटा का उपयोग।

‘भू-स्थानिक डेटा’ संबंधी वर्तमान नीति:

  • वर्तमान नियमन के तहत, भू-स्थानिक डेटा के संग्रहण, भंडारण, उपयोग, बिक्री, प्रसार और मानचित्रण पर सख्त प्रतिबंध हैं।
  • यह नीति, कई दशकों से नवीनीकृत नहीं की गयी है तथा इसे आंतरिक और बाह्य सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर तैयार किया गया था।

अभी तक इस क्षेत्र में भारत सरकार और सर्वे ऑफ इंडिया जैसी सरकार द्वारा संचालित एजेंसियों का प्रभुत्व है और निजी कंपनियों को भू-स्थानिक डेटा एकत्र करने, तैयार करने या प्रसारित करने की अनुमति हासिल करने हेतु सरकार के विभिन्न विभागों (जिस तरह के आंकड़ों की जरूरत होती है, उस आधार पर) तथा साथ ही रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय में अनुमति-प्रक्रिया से गुजरना होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भू-स्थानिक डेटा क्या है?
  2. अनुप्रयोग
  3. भू-स्थानिक डेटा पर नीति।
  4. हाल ही में किये गए परिवर्तन।

मेंस लिंक:

भू-स्थानिक डेटा के अनुप्रयोगों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

भारत में बुजुर्गों से दुर्व्यवहार चिंता का विषय: LASI   


संदर्भ:

लांगिट्यूडनल एजिंग स्टडीज ऑफ इंडिया (Longitudinal Ageing Study in India- LASI), भारत में बुजुर्ग आबादी के स्वास्थ्य, आर्थिक तथा सामाजिक निर्धारकों और परिणामों की वैज्ञानिक जाँच हेतु एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण है।

हाल ही में, LASI ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. भारत में कम से कम पांच प्रतिशत बुजुर्ग आबादी (60 वर्ष और उससे अधिक आयु) ने, वर्ष 2020 में अपने साथ दुर्व्यवहार होने की बात कही है।
  2. भारत के बिहार राज्य में बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार होने के सर्वाधिक मामले पाए गए।
  3. जिन बुजुर्गों के साथ बुरा-बर्ताव किया गया, उनमें से 3 प्रतिशत बुजर्गों ने उनके आत्म-सम्मान या भावनाओं को चोट पहुचाने वाले मौखिक / भावनात्मक से बुरे-बर्ताव की शिकायत की।
  4. मौखिक / भावनात्मक से किए जाने वाले दुर्व्यवहार में, यातना, दुःख, भय, विकृत रूप से भावनात्मक पीड़ा, आत्म-सम्मान या उनकी प्रधानता पर चोट आदि को शामिल किया गया है।
  5. दुर्व्यवहार की शिकायत करने वाले बुजुर्गों में से, शारीरिक रूप से बुरे-बर्ताव से पीडितो की संख्या अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक थे।
  6. उत्तराखंड में, दुर्व्यवहार की शिकायत करने वाले बुजुर्गों ने सर्वाधिक संख्या में सर्वेक्षण में भाग लिया।

‘बुजुर्गों से दुर्व्यवहार’ क्या है? इसके कारण:

बुजुर्गों से दुर्व्यवहार, एक बढ़ती हुई अंतर्राष्ट्रीय समस्या है और इसके कई उदहारण विभिन्न देशों और संस्कृतियों में देखे जा रहे है। यह मानव अधिकारों का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण उल्लंघन है और इसकी बजह से कई स्वास्थ्य और भावनात्मक समस्यायें पैदा होती है।

‘दुर्व्यवहार’ को शारीरिक, यौन-सबंधी, मनोवैज्ञानिक अथवा वित्तीय दुर्व्यवहार के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।

  • रिपोर्ट के अनुसार, बुजुर्ग महिलाओं और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों के प्रति ‘बुरा-बर्ताव’ काफी अधिक होता है।
  • बुढ़ापे में अपने साथी को खोने वाली बहुत सी महिलाओं का सहारा छिन जाता है। आम तौर पर, इस प्रकार के लोगों के पास आय का स्रोत अथवा कोई आर्थिक गतिविधि नहीं होती है।

आवश्यकता:

जब तक वृद्ध लोगों के लिए भोजन, आश्रय, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच संबंधी आवश्यक जरूरतें पूरी नहीं की जाती हैं, तब तक ‘बुजुर्गों से दुर्व्यवहार’ रूपी समस्या को ठीक तरह से हल नहीं किया जा सकता है।

  • बुजुर्गों के लिए, उम्र के प्रति संवेदनशील तरीके से, अच्छी गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य देखभाल, सुलभ तथा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
  • बुजुर्गों के गिरते स्वास्थ्य संबंधी विषयों को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए पुनर्वास, समुदाय या परिवार-आधारित निर्बलता सहयोग और जहाँ भी जरूरत हो वहां जीवन-समाप्ति देखभाल भी प्रदान की जानी चाहिए।
  • जो लोग पर्याप्त रूप से आमदनी करने करने में असमर्थ हों, उनके लिए सहयोग सुविधा दी जानी चाहिए।
  • बुजुर्गों की उपेक्षा संबंधी मामलों को हल करने का सबसे अच्छा तरीका, परिवारों को समझाना, समुदाय के नेताओं को संवेदनशील बनाना और प्रिंट और ऑडियो-विजुअल मीडिया सहित विभिन्न मंचों पर, सभी स्तरों पर इस मुद्दे का समाधान करना है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

रोहिंग्या संकट


संदर्भ:

हाल ही में, मानवाधिकार समूहों द्वारा किए जा रहे विरोध के बावजूद, बांग्लादेश प्राधिकारियों द्वारा म्यांमार से पलायन करने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों के चौथे समूह को बंगाल की खाड़ी में स्थित भासन चार द्वीप (Bhashan Char island) पर रवाना कर दिया गया है।

पृष्ठभूमि:

भासन चार, बंगाल की खाड़ी में स्थित एक विवादित बाढ़-प्रवण द्वीप है, जिसे म्यांमार से पलायन करने वाले 1 मिलियन रोहिंग्या शरणार्थियों में से 1 लाख शरणार्थियों को बसाने के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है।

मानवाधिकार समूहों ने बांग्लादेश इस कदम की आलोचना की है और इनका कहना है कि, रोहिंग्या शरणार्थियों को उनकी इच्छा के खिलाफ भासन चार द्वीप पर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जबकि, सरकार का कहना है कि शरणार्थि द्वीप पर स्वेच्छा से जा रहे हैं।

रोहिंग्या समुदाय के बारे में:

  • रोहिंग्या, म्यांमार के कई जातीय अल्पसंख्यकों में से एक समुदाय हैं।
  • वर्ष 2017 की शुरुआत में म्यांमार में ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या लगभग एक मिलियन थी।
  • उनकी अपनी भाषा और संस्कृति है और कहा जाता है, वे अरब व्यापारियों और अन्य समूहों के वंशज हैं, जो इस क्षेत्र में कई पीढ़ियों से बसे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों को, विश्व में सर्वाधिक नहीं, तो सबसे अधिक भेदभाव किये जाने वाले लोगों में से एक, के रूप में वर्णित किया गया है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. रोहिंग्या कौन हैं?
  2. रखाइन राज्य की अवस्थिति
  3. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के बारे में
  4. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) बनाम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय

मेंस लिंक:

रोहिंग्या संकट पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

नाइजीरिया की ‘नगोजी ओकोंजो-इवेला’, ‘विश्व व्यापार संगठन’ की नई प्रमुख


संदर्भ:

नाइजीरिया की डॉ. नगोज़ी ओकोंजो इविएला (Ngozi Okonjo-Iweala ) को विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization – WTO) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। वह ‘विश्व व्यापार संगठन’ प्रमुख के रूप में की जाने वाली पहली महिला और पहली अफ्रीकी नागरिक हैं।

महानिदेशक, विश्व व्यापार संगठन के कार्य एवं भूमिकाएं:

विश्व व्यापार संगठन का महानिदेशक (Director General of WTO), संगठन के प्रशासनिक कार्यों की देखरेख और निर्देशन के लिए उत्तरदायी अधिकारी होता है।

  • महानिदेशक, के लिए नीतिगत-मामलों में काफी कम शक्ति प्राप्त होती है, और इसकी भूमिका मुख्य रूप से सलाहकार और प्रबंधकीय होती है।
  • महानिदेशक, लगभग 700 कर्मियों वाले डब्ल्यूटीओ सचिवालय की देख-रेख करता है और डब्ल्यूटीओ के सदस्यों द्वारा चार वर्षों के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाता है।

‘विश्व व्यापार संगठन’- प्रमुख तथ्य:

  • एक संस्था के रूप में, ‘विश्व व्यापार संगठन’ की स्थापना वर्ष 1995 में की गई थी। WTO ने वर्ष 1946 से लागू ‘प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते’ (General Agreement on Tariffs and Trade (General Agreement on Tariffs and Trade-GATT) को प्रतिस्थापित किया था।
  • WTO, आधिकारिक रूप से, मारकेश समझौते (Marrakesh Agreement) के तहत, 1 जनवरी 1995 को असितत्व में आया। इस समझौते पर, 15 अप्रैल 1994 को 123 देशों द्वारा हस्ताक्षरित किये गए थे।
  • भारत, वर्ष 1948 से ही गैट (GATT) का सदस्य रहा है; अतः यह उरुग्वे दौर की वार्ता में एक पक्षकार और WTO के संस्थापक सदस्यों में शामिल था।
  • हालांकि, वर्ष 1995 में, WTO के अस्तित्व में आने के बाद भी GATT का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ है। वर्तमान में, GATT, माल-व्यापार के संबंध में डब्ल्यूटीओ की अम्ब्रेला संधि के रूप में लागू है।

‘विश्व व्यापार संगठन’ की संरचना:

विश्व व्यापार संगठन (WTO) का नेतृत्व एक मंत्रिस्तरीय सभा करती है, जबकि संगठन का दैनिक संचालन तीन प्रशासनिक निकायों द्वारा किया जाता है:

  1. महापरिषद (General Council): इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और संगठन के दैनिक कार्यक्रमों के संदर्भ में, ‘मंत्रिस्तरीय सभा’ के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हैं। इसका कार्य विश्व व्यापार संगठन के कार्यों का कार्यान्वयन और निगरानी करना होता है।
  2. विवाद समाधान निकाय’ (Dispute Settlement Body): यह महापरिषद का एक भाग होता है, और सदस्य देशों के मध्य व्यापार विवादों को निपटाने के लिए जिम्मेदार होता है। यह एक अपीलीय निकाय भी है, जहां सदस्य देश, विवाद समाधान के दौरान उनके प्रतिकूल दिए गए किसी भी निर्णय पर अपील कर सकते हैं।
  3. व्यापार नीति समीक्षा निकाय (Trade Policy Review Body- TPRB): यह भी महापरिषद का एक भाग होता है, तथा इसका कार्य यह सुनिश्चित करना होता है, कि. सदस्य देशों की व्यापार नीतियां, डब्ल्यूटीओ के लक्ष्यों के अनुरूप हों। सदस्य देशों के लिए अपने कानूनों और व्यापार नीतियों में बदलाव के बारे में डब्ल्यूटीओ को सूचित करना आवश्यक होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. WTO के बारे में
  2. संरचना और कार्य
  3. महानिदेशक की भूमिका
  4. सदस्य
  5. मारकेश समझौते के बारे में

मेंस लिंक:

पिछले दो दशकों के दौरान, कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्व व्यापार संगठन ने काफी सीमित प्रगति की है। क्या आपको लगता है कि एक संस्था के रूप में विश्व व्यापार संगठन का पतन हो रहा है? आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

दिशा रवि मामला: कार्यकर्ताओं को जांच के घेरे में लेन वाला ‘टूलकिट’ क्या होता है?


संदर्भ:

कायकर्ता दिशा रवि, एक टूलकिट (toolkit) को संपादित करने और वैश्विक स्तर पर चर्चित जलवायु परिवर्तन-विरोधी एक किशोर प्रचारक ग्रेटा थनबर्ग (Greta Thunberg) के साथ साझा करने के आरोप में दिल्ली पुलिस की हिरासत में हैं।

इसके अलावा, कुछ अन्य लोगों को भी, नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में खालिस्तान समर्थक एक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन (पीएफजे) के साथ समन्वय करने के लिए आरोपित किया गया है।

‘टूलकिट’ क्या होती है?

टूलकिट (toolkit), सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के समय में किसी आंदोलन या अभियान को जारी रखने के लिए एक उपयोगी उपकरण बन गया है।

  • यह किसी मुद्दे के बारे में समझाने वाला एक दस्तावेज होता है, और यह, अभियान से जुड़े हुए व्यक्तियों अथवा अभियान को तेज करने के लिए अन्य लोगों को जोड़ने हेतु एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करता है।
  • इसमें, अभियान या आंदोलन को आगे बढ़ाने हेतु, “क्या कब और कैसे किया जाना चाहिए”, इस बारे में रोडमैप उपलब्ध रहता है।

वर्तमान प्रकरण:

वर्तमान मामले में, 5 फरवरी को ग्रेटा थनबर्ग ने अनजाने में एक गूगल दस्तावेज़ ‘टूलकिट’ को साझा कर दिया था, जिससे इस ‘टूलकिट’ का आकस्मिक खुलासा हो गया। हालांकि, ग्रेटा ने बाद में इस ट्वीट को डिलीट कर दिया था, लेकिन तब तक यह सुर्ख़ियों में आ चुका था।

  • इस ‘टूलकिट’ में संसद द्वारा वर्ष 2020 में पारित कृषि कानूनों पर, मोदी सरकार के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर जारी “किसानों के विरोध को समझाने” का प्रयास किया गया था।
  • जांच के उपरांत, दिल्ली पुलिस ने पाया कि कुछ खालिस्तानी-समर्थक तत्व देश के खिलाफ असहमति का माहौल पैदा करने में शामिल थे।
  • दिशा रवि को दस्तावेज तैयार करने और साझा करने के लिए एक “प्रमुख साजिशकर्ता” होने का आरोप लगाया गया है।

‘खालिस्तान-आंदोलन’ क्या है?

खालिस्तान आंदोलन, 1980 के दशक के दौरान मुख्य रूप से पंजाब में आतंकवाद को बढ़ावा देने हेतु  पाकिस्तान द्वारा समर्थित एक अलगाववादी अभियान था। हाल के दिनों में, भारत में बगैर किसी व्यावहारिक मांग अथवा आकर्षण के, पाकिस्तान और कनाडा स्थित समूहों द्वारा इस अभियान को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए हैं।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


विशालकाय चर्मपृष्ठ कछुआ

(Giant Leatherback turtle)

संदर्भ: अंडमान और निकोबार (A & N) द्वीप समूह में पर्यटन और बंदरगाह विकास संबंधी प्रस्तावों से हिंद महासागर के इस भाग में विशालकाय चर्मपृष्ठ कछुए (Giant Leatherback turtle) की कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रजनन स्थलों के भविष्य पर संरक्षण-वादियों ने चिंताएं व्यक्त की हैं।

प्रमुख तथ्य:

  • लेदरबैक/ चर्मपृष्ठ कछुआ प्रजाति, पृथ्वी पर पायी जाने वाले समुद्री कछुओं की सात प्रजातियों में से सबसे बड़ी है और आर्कटिक और अंटार्कटिक को छोड़कर सभी महासागरों में लम्बी दूरी तक पाई जाती है।
  • हिंद महासागर क्षेत्र में ये प्रजाति, केवल इंडोनेशिया, श्रीलंका और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में घोंसला बनाते हैं।
  • ये प्रजाति भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I में भी सूचीबद्ध हैं।

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माँ कैंटीन

(Maa Centeens)

‘माँ कैंटीन’ की शुरुआत, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा की गयी है। इसमें मात्र 5 रुपए में गरीबों और निराश्रितों के लिए रियायती पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।

‘संदेश’ क्या है?

व्हाट्सएप की तर्ज पर, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (National Informatics Centre- NIC)ने ‘संदेश’ (Sandes) नामक एक त्वरित मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है।

  • व्हाट्सएप की तरह, मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी से, नए NIC प्लेटफॉर्म का उपयोग किसी भी प्रकार के संचार के लिए किया जा सकता है।
  • हालांकि इसकी एक सीमा है कि, यह ऐप उपयोगकर्ता को अपनी ईमेल आईडी या पंजीकृत फोन नंबर बदलने की अनुमति नहीं देता है। उपयोगकर्ता के लिए ऐप पर अपने पंजीकृत ईमेल आईडी या फोन नंबर बदलने पर, नए उपयोगकर्ता के रूप में फिर से पंजीकरण करना होगा।

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महाराजा सुहेलदेव

प्रधानमंत्री, द्वारा उत्तर प्रदेश में चितौरा झील के विकास कार्यों तथा महाराजा सुहेलदेव स्मारक का शिलान्यास किया जाएगा।

प्रमुख तथ्य:

  • सुहेलदेव, श्रावस्ती (वर्तमान उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश में) के एक प्रसिद्ध राजा थे। इनके लिए 11 वीं शताब्दी की शुरुआत में बहराइच में गजनवी के सिपाहसालार गाजी सैय्यद सालार मसूद को मार गिराने के लिए जाना जाता है।
  • 17 वीं शताब्दी के फ़ारसी-भाषा के ऐतिहासिक विवरण ‘मिरात-ए-मसौदी’ (Mirat-i-Masudi) में राजा सुहेलदेव का उल्लेख किया गया है।
  • ‘मिरात-ए-मसौदी’, मुगल सम्राट जहांगीर (1605-1627) के शासनकाल के दौरान अब्द-उर-रहमान चिश्ती द्वारा लिखी गई सालार मसूद की जीवनी है। किंवदंती के अनुसार, सुहलदेव, श्रावस्ती के राजा मोरध्वज के सबसे बड़े पुत्र थे।

कार्लपट अभयारण्य, ओडिशा

(Odisha’s Karlapat Sanctuary)

  • ओडिशा के कार्लपेट अभयारण्य में एक पखवाड़े के दौरान छह हाथियों की रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया से मृत्यु हो गई।
  • रक्तस्रावी सेप्टीसीमिया (Haemorrhagic septicaemia), एक संक्रामक जीवाणु रोग होता है, जो संदूषित जल या मिट्टी के संपर्क में आने वाले जानवरों को संक्रमित करता है।
  • इसके संक्रमण से जानवरों के श्वसन तंत्र और फेफड़े प्रभावित होते हैं, जिसके कारण गंभीर निमोनिया होता है।
  • यह बीमारी, आम तौर पर मानसून के ठीक पहले और बाद की अवधि में फैलती है। इससे गाय-बैल, भैंस और अन्य जानवरों को प्रभावित हो सकते है।

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