HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
मनुस्मृति प्रारंभिक भारत के सबसे प्रसिद्ध कानूनी ग्रंथों में से एक है, जो संस्कृत में रचित है और इसे दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व और दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच संकलित किया गया था। मनुस्मृति के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह पैतृक संपत्ति और संसाधनों पर महिलाओं को समान अधिकार देता है
- यह वर्ण व्यवस्था का विरोध करता है
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: d)
मनुस्मृति के अनुसार, माता-पिता की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति को बेटों में समान रूप से विभाजित किया जायेगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सबसे बड़े बेटे को दिया जायेगा। ज्ञातव्य है कि महिलाएं इन संसाधनों में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकती थीं।
मनुस्मृति ने चंडालों के “कर्तव्यों” को निर्धारित किया। उन्हें गाँव के बाहर रहना पड़ता था, त्यज्य बर्तनों का उपयोग करना पड़ता था, और उन्हें मृतकों के कपड़े और लोहे के गहने पहनने होते थे।
वे रात्रि में गाँवों और शहरों में घूम नहीं सकते थे। उन्हें उन लोगों के शवों का निपटान करना होता था जिनके कोई सगे-सम्बन्धी नहीं होते थे और जल्लाद के रूप में सेवा करते थे।
Incorrect
उत्तर: d)
मनुस्मृति के अनुसार, माता-पिता की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति को बेटों में समान रूप से विभाजित किया जायेगा, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सबसे बड़े बेटे को दिया जायेगा। ज्ञातव्य है कि महिलाएं इन संसाधनों में हिस्सेदारी का दावा नहीं कर सकती थीं।
मनुस्मृति ने चंडालों के “कर्तव्यों” को निर्धारित किया। उन्हें गाँव के बाहर रहना पड़ता था, त्यज्य बर्तनों का उपयोग करना पड़ता था, और उन्हें मृतकों के कपड़े और लोहे के गहने पहनने होते थे।
वे रात्रि में गाँवों और शहरों में घूम नहीं सकते थे। उन्हें उन लोगों के शवों का निपटान करना होता था जिनके कोई सगे-सम्बन्धी नहीं होते थे और जल्लाद के रूप में सेवा करते थे।
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Question 2 of 5
2. Question
जैन धर्म के अनुसार निम्न में से किसे त्रिरत्न माना जाता है।
- सम्यक् ज्ञान
- सम्यक् संस्कृति
- सम्यक् विश्वास
- सम्यक् आचरण
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: b)
जैन धर्म के तीन सिद्धांत, जिन्हें त्रिरत्न (तीन रत्न) भी कहा जाता है:
– सम्यक् विश्वास
– सम्यक् ज्ञान
– सम्यक् आचरण
सम्यक् विश्वास महावीर की शिक्षाओं और ज्ञान में विश्वास करना है।
सम्यक् ज्ञान इस सिद्धांत की स्वीकृति है कि कोई ईश्वर नहीं है और यह कि जगत सृष्टिकर्ता के बिना विद्यमान रही है और सभी वस्तुओं में आत्मा होती है।
सम्यक् आचरण पाँच महावृत्त के पालन को संदर्भित करता है:
– जीवन को नष्ट न करना
– झूठ नहीं बोलना
– चोरी नहीं करना
– संपत्ति का अधिग्रहण नहीं करना
– अनैतिक जीवन न जीना।
Incorrect
उत्तर: b)
जैन धर्म के तीन सिद्धांत, जिन्हें त्रिरत्न (तीन रत्न) भी कहा जाता है:
– सम्यक् विश्वास
– सम्यक् ज्ञान
– सम्यक् आचरण
सम्यक् विश्वास महावीर की शिक्षाओं और ज्ञान में विश्वास करना है।
सम्यक् ज्ञान इस सिद्धांत की स्वीकृति है कि कोई ईश्वर नहीं है और यह कि जगत सृष्टिकर्ता के बिना विद्यमान रही है और सभी वस्तुओं में आत्मा होती है।
सम्यक् आचरण पाँच महावृत्त के पालन को संदर्भित करता है:
– जीवन को नष्ट न करना
– झूठ नहीं बोलना
– चोरी नहीं करना
– संपत्ति का अधिग्रहण नहीं करना
– अनैतिक जीवन न जीना।
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Question 3 of 5
3. Question
भीमबेटका की शैल-कला निम्नलिखित में से किस काल से संबंधित है?
- उत्तरवर्ती पुरापाषाण काल
- मध्यपाषाण
- ताम्र पाषाण
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: d)
भीमबेटका की शैल-कला को शैली, तकनीक और ऐतिहासिकता के आधार पर विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया गया है। पेंटिंग और चित्रों को सात ऐतिहासिक अवधियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। अवधि I – उत्तरवर्ती पुरापाषाण काल; अवधि II – मध्यपाषाण; और अवधि III – ताम्र पाषाण; अवधि-III के बाद लगातार चार अवधियाँ।
Incorrect
उत्तर: d)
भीमबेटका की शैल-कला को शैली, तकनीक और ऐतिहासिकता के आधार पर विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया गया है। पेंटिंग और चित्रों को सात ऐतिहासिक अवधियों में वर्गीकृत किया जा सकता है। अवधि I – उत्तरवर्ती पुरापाषाण काल; अवधि II – मध्यपाषाण; और अवधि III – ताम्र पाषाण; अवधि-III के बाद लगातार चार अवधियाँ।
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Question 4 of 5
4. Question
मोहिनीअट्टम शास्त्रीय नृत्य रूप कथकली से कैसे भिन्न है?
- मोहिनीअट्टम में कथकली के विपरीत शरीर की गति अचानक रुक जाती है और अचानक झटके से घूम जाता है।
- कथकली प्रदर्शन के पात्र मोहिनीअट्टम के विपरीत सात्विक, राजसिक और तामसिक प्रकारों में विभाजित होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: b)
‘मोहिनीअट्टम’ की विशेषता, बिना किसी अचानक झटके अथवा उछाल के लालित्यपूर्ण, ढलावदार शारीरिक अभिनय है।
Incorrect
उत्तर: b)
‘मोहिनीअट्टम’ की विशेषता, बिना किसी अचानक झटके अथवा उछाल के लालित्यपूर्ण, ढलावदार शारीरिक अभिनय है।
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Question 5 of 5
5. Question
नागरा कला शैली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- मंदिरों निर्आमाण में आम तौर पर पंचायतन शैली को अपनाया जाता है।
- आम तौर पर मंदिर परिसर में पानी के टैंक या जलाशय मौजूद होते हैं।
- मंदिर आम तौर पर उत्कीर्ण प्लेटफार्मों पर बनाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: b)
नागरा शैली की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मंदिरों निर्आमाण में आम तौर पर पंचायतन शैली को अपनाया जाता है।
मंदिर परिसर में कोई पानी की टंकी या जलाशय मौजूद नहीं थे।
मंदिरों को आम तौर पर उत्कीर्ण प्लेटफार्मों पर बनाया गया था।
Incorrect
उत्तर: b)
नागरा शैली की कुछ विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मंदिरों निर्आमाण में आम तौर पर पंचायतन शैली को अपनाया जाता है।
मंदिर परिसर में कोई पानी की टंकी या जलाशय मौजूद नहीं थे।
मंदिरों को आम तौर पर उत्कीर्ण प्लेटफार्मों पर बनाया गया था।








