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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 12 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. शहरी स्थानीय निकाय सुधार (ULB reforms)

2. पैंगोंग त्सो क्षेत्र में सेनाओं की समन्वित वापसी

3. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बैंकों का निजीकरण करने संबधी निर्णय: प्रस्ताव का कारण एवं चिंताएँ

2. भारत में 5G तकनीक पर संसदीय समिति की रिपोर्ट

3. 17 प्रमुख ओटीटी संचालकों द्वारा स्व-नियामक टूलकिट लागू

4. चीन का तियानवेन-1 प्रोब

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. बाबर क्रूज मिसाइल

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

शहरी स्थानीय निकाय सुधार (ULB reforms)


(Urban Local Bodies (ULB) reforms)

संदर्भ:

हाल ही में, गोवा, शहरी स्थानीय निकाय सुधार (Urban Local Bodies (ULB) reforms) पूरे करने वाला छठा राज्य बन गया है। इसके साथ ही, गोवा, खुली बाजार उधारी के माध्यम से 223 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने का हकदार हो गया है।

गोवा, शहरी स्थानीय निकाय सुधार (ULB reforms) पूरा करने वाले पांच अन्य राज्यों – आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर, राजस्थान और तेलंगाना के साथ शामिल हो गया है।

पृष्ठभूमि:

शहरी स्थानीय निकाय (ULB) और शहरी उपयोगिता सुधारों का उद्देश्य राज्यों में ‘शहरी स्थानीय निकायों’ को वित्तीय रूप से मजबूत बनाना और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य और साफ-सफाई सेवाएं उपलब्ध कराने में समर्थ बनाना है।

आर्थिक रूप से मजबूत ‘शहरी स्थानीय निकाय’ बेहतर नागरिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करने में भी सक्षम होंगे।

इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए व्यय विभाग द्वारा निम्नलिखित सुधार निर्धारित किए गए हैं-

राज्य अधिसूचित करेंगे-

  • शहरी स्थानीय निकायों में संपत्ति कर की आधार दरें जो कि मौजूदा सर्कल रेट (संपत्ति के लेनदेन के लिए मार्गदर्शी) के सुसंगत हो, और
  • जलापूर्ति, निकासी, सीवरेज के प्रावधान से संबंधित उपयोगिता शुल्कों की आधार दरें जो वर्तमान लागत/पिछली मुद्रा स्फीति को परिलक्षित करती हों

राज्य संपत्ति कर/उपयोगिता शुल्कों की आधार दरों में मूल्य वृद्धि के अनुरूप समय-समय पर वृद्धि के लिए एक प्रणाली स्थापित करेंगे।

सुधारों के लिए निर्धारित ‘चार नागरिक केंद्रित क्षेत्र’ निम्नलिखित हैं

  1. इसके तहत एक राष्ट्र एक राशन कार्ड व्यवस्था लागू करना
  2. कारोबार में आसानी से जुड़े सुधार
  3. शहरी स्थानीय निकाय/उपयोगिता सुविधाओं में सुधार
  4. ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

पैंगोंग त्सो क्षेत्र में सेनाओं की समन्वित वापसी


संदर्भ:

भारत और चीन, दोनों पक्ष, पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से अग्रिम मोर्चे पर तैनात सेनाओं की वापसी हेतु एक समझौते पर पहुंच चुके हैं।

समझौते के अनुसार:

  • चीनी पक्ष, फिंगर 8 के पूर्व में झील के उत्तरी किनारे पर, अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा।
  • बदले में, भारतीय सेना, फिंगर 3 के निकट अपने स्थायी बेस ‘धन सिंह थापा पोस्ट’ पर तैनात रहेगी।
  • दोनों पक्षों द्वारा, इसी प्रकार की कार्रवाई, झील के दक्षिणी किनारे पर भी की जाएगी।
  • दोनों पक्षों द्वारा, अप्रैल 2020 के बाद से, इस क्षेत्र में निर्मित किये गए सभी ढांचे को हटा दिया जाएगा और जमीन को पहले जैसा कर दिया जाएगा।
  • दोनों पक्ष, अपने पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त करने सहित, उत्तरी किनारे पर सैन्य गतिविधियों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित करने पर सहमत हो गए हैं।

इस स्थान पर विवाद का कारण:

वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control- LAC) – सामान्यतः यह रेखा पैंगोंग त्सो झील की चौड़ाई को छोड़कर स्थल से होकर गुजरती है तथा वर्ष 1962 के बाद से भारतीय और चीनी सैनिकों को विभाजित करती है। पैंगोंग त्सो क्षेत्र में यह रेखा पानी से होकर गुजरती है।

  • दोनों पक्षों ने अपने क्षेत्रों को चिह्नित करते हुए अपने-अपने क्षेत्र घोषित किए हुए हैं।
  • भारत का पैंगोंग त्सो क्षेत्र में 45 किमी की दूरी तक नियंत्रण है, तथा झील के शेष भाग को चीन के द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

पैंगोंग त्सो झील का ‘फिंगर्स’ में विभाजन:

पैंगोंग त्सो झील को फिंगर्स (Fingers) के रूप में विभाजित किया गया है। इस क्षेत्र में भारत और चीन के बीच LAC को लेकर मतभेद है, तथा यहाँ पर 8 फिंगर्स विवादित है।

  • भारत का दावा है, कि LAC फिंगर 8 से होकर गुजरती है, और इसी स्थान पर चीन की अंतिम सेना चौकी है।
  • भारत इस क्षेत्र में, फिंगर 8 तक, इस क्षेत्र की संरचना के कारण पैदल गश्त करता है। लेकिन भारतीय सेना का नियंत्रण फिंगर 4 तक ही है।
  • दूसरी ओर, चीन का कहना है कि LAC फिंगर 2 से होकर गुजरती है। चीनी सेना हल्के वाहनों से फिंगर 4 तक तथा कई बार फिंगर 2 तक गश्त करती रहती है।

पैंगोंग त्सो क्षेत्र में चीनी अतिक्रमण का कारण

  • पैंगोंग त्सो झील रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चुशूल घाटी (Chushul Valley) के नजदीक है। वर्ष 1962 के युद्ध के दौरान चीन द्वारा मुख्य हमला चुशूल घाटी से शुरू किया गया था।
  • चुशूल घाटी का रास्ता पैंगोंग त्सो झील से होकर जाता है, यह एक मुख्य मार्ग है, चीन, इसका उपयोग, भारतीय-अधिकृत क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए कर सकता है।
  • चीन यह भी नहीं चाहता है, कि भारत LAC के आस पास कहीं भी अपने बुनियादी ढांचे को विस्तारित करे। चीन को डर है, कि इससे अक्साई चिन और ल्हासा-काशगर (Lhasa-Kashgar) राजमार्ग पर उसके अधिकार के लिए संकट पैदा हो सकता है।
  • इस राजमार्ग के लिए कोई खतरा, लद्दाख और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चीनी साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं के लिए बाधा पहुचा सकता है।

पैंगोंग त्सो के बारे में

  • लद्दाखी भाषा में पैंगोंग का अर्थ है, समीपता और तिब्बती भाषा में त्सो का अर्थ झील होता है।
  • पैंगोंग त्सो, लद्दाख में 14,000 फुट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित एक लंबी संकरी, गहरी, स्थलरुद्ध झील है, इसकी लंबाई लगभग 135 किमी है।
  • इसका निर्माण टेथीज भू-सन्नति से हुआ है।
  • यह एक खारे पानी की झील है।
  • काराकोरम पर्वत श्रेणी, जिसमे K2 विश्व दूसरी सबसे ऊंची चोटी सहित 6,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली अनेक पहाड़ियां है तथा यह ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और भारत से होती हुई पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर समाप्त होती है।
  • इसके दक्षिणी तट पर भी स्पंगुर झील (Spangur Lake) की ओर ढलान युक्त ऊंचे विखंडित पर्वत हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LoC क्या है और इसकी स्थापना, भौगोलिक सीमा और महत्व
  2. LAC क्या है?
  3. नाथू ला कहाँ है?
  4. पैंगोंग त्सो कहाँ है?
  5. अक्साई चिन का प्रशासन कौन करता है?
  6. नाकु ला कहाँ है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में में नियंत्रण

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA)


(International Energy Agency)

संदर्भ:

हाल ही में, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency- IEA)  द्वारा ‘इंडिया एनर्जी आउटलुक’-2021 (India Energy Outlook 2021) रिपोर्ट जारी की गयी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  1. आगामी दो दशकों में, भारत की ऊर्जा मांग में 25% की वृद्धि होगी, और यह ऊर्जा मांग का सबसे बड़ा हिस्सा होगा, तथा यह वर्ष 2030 यूरोपीय संघ को पीछे छोड़ते हुए विश्व में तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता बन जाएगा।
  2. भारत के वर्तमान राष्ट्रीय नीति परिदृश्य को देखते हुए, वर्ष 2040 तक देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 6 ट्रिलियन डॉलर तक होने का अनुमान है, इस कारणवश, भारत की ऊर्जा खपत लगभग दोगुनी होने की उम्मीद है।
  3. भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरते, देश को जीवाश्म ईंधन के आयात पर अधिक निर्भर बना सकती हैं, पेट्रोलियम अन्वेषण और उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने संबंधी सरकार की नीतियों के बावजूद इसके घरेलू तेल और गैस के उत्पादन में वर्षों से कोई प्रगति नहीं हुई है।
  4. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, भारत की तेल मांग में, वर्ष 2019 में 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) से बढ़कर वर्ष 2040 में 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन, तक की वृद्धि होने की उम्मीद है। तथा, इसकी शोधन क्षमता, वर्ष 2019 में 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से बढ़कर वर्ष 2030 तक 6.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन तथा वर्ष 2040 तक 7.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुँच सकती है।
  5. चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा शुद्ध तेल आयातक देश भारत, वर्तमान में अपने कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 76% आयात करता है तथा इसकी विदेशी तेल पर निर्भरता वर्ष 2030 तक 90% और वर्ष 2040 तक 92% होने की उम्मीद है।
  6. बढ़ती तेल मांग के कारण, भारत की तेल आयात लागत, वर्ष 2019 की तुलना में, वर्ष 2030 तक दोगुनी होकर लगभग 181 बिलियन डॉलर, तथा वर्ष 2040 तक 255 बिलियन डॉलर हो सकती है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA), एक अंतर-सरकारी स्वायत्त संगठन है। इसकी स्थापना आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (Organisation of Economic Cooperation and Development- OECD) फ्रेमवर्क के अनुसार वर्ष 1974 में की गई थी।

  • इसके कार्यों का फोकस मुख्यतः चार मुख्य क्षेत्रों पर होता है: ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, पर्यावरण जागरूकता और वैश्विक सहभागिता।
  • इसका मुख्यालय (सचिवालय) पेरिस, फ्रांस में है।

भूमिकाएँ और कार्य:

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की स्थापना वर्ष 1973-1974 के तेल संकट के दौरान सदस्य देशों के लिए तेल आपूर्ति व्यवधानों का सामना करने में मदद करने के लिए की गयी थी। IEA द्वारा यह भूमिका वर्तमान में भी निभाई जा रही है।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अधिदेश में समय के साथ विस्तार किया गया है। इसके कार्यों में वैश्विक रूप से प्रमुख ऊर्जा रुझानों पर निगाह रखना और उनका विश्लेषण करना, मजबूत ऊर्जा नीतियों को बढ़ावा देना और बहुराष्ट्रीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ावा देना शामिल किया गया है।

IEA की संरचना एवं सदस्यता हेतु पात्रता:

वर्तमान में ‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ में 30 सदस्य देश तथा में आठ सहयोगी देश शामिल हैं। इसकी सदस्यता होने के लिए किसी देश को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) का सदस्य होना अनिवार्य है। हालांकि OECD के सभी सदस्य आईईए के सदस्य नहीं हैं।

किसी देश को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का सदस्यता के लिए निम्नलिखित शर्ते पूरा करना आवश्यक है:

  • देश की सरकार के पास पिछले वर्ष के 90 दिनों में किए गए निवल आयात के बराबर कच्चे तेल और / अथवा उत्पाद भण्डार मौजूद होना चाहिए। भले ही यह भण्डार सरकार के प्रत्यक्ष स्वामित्व में न हो किंतु वैश्विक तेल आपूर्ति में व्यवधान को दूर करने के इसका उपयोग किया जा सकता हो।
  • देश में राष्ट्रीय तेल खपत को 10% तक कम करने के लिए एक ‘मांग नियंत्रण कार्यक्रम’ लागू होना चाहिए।
  • राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया उपाय (CERM) लागू करने के लिए क़ानून और संस्था होनी चाहिए।
  • मांग किये जाने पर देश की सीमा में कार्यरत सभी तेल कंपनियों द्वारा जानकारी दिए जाने को सुनिश्चित करने हेतु क़ानून और उपाय होने चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सामूहिक कार्रवाई में अपने योगदान को सुनिश्चित करने के लिए देश में क़ानून अथवा उपाय होने चाहिए।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा प्रकाशित की जाने वाली रिपोर्ट्स:

  1. वैश्विक ऊर्जा और CO2 स्थिति रिपोर्ट
  2. विश्व ऊर्जा आउटलुक
  3. विश्व ऊर्जा सांख्यिकी
  4. विश्व ऊर्जा संतुलन
  5. ऊर्जा प्रौद्योगिकी परिप्रेक्ष्य

प्रीलिम्स लिंक:

  1. IEA द्वारा जारी की जाने वाली विभिन्न रिपोर्ट्स
  2. ओईसीडी और ओपेक की संरचना? सदस्यता हेतु पात्रता?
  3. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के शीर्ष उत्पादक और आयातक?
  4. IEA के सहयोगी सदस्य
  5. भारत, IEA में किस प्रकार का सदस्य है?

मेंस लिंक:

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के उद्देश्यों और कार्यों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

बैंकों का निजीकरण करने संबधी निर्णय: प्रस्ताव का कारण एवं चिंताएँ


संदर्भ:

हाल ही में प्रस्तुत किये गए केंद्रीय बजट में, इस वित्तीय वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की दो बैंकों के निजीकरण का प्रस्ताव किया गया है।

आवश्यकता:

  1. कई सालों से प्रदान किए जा रहे पूंजीगत प्रवाह और प्रशासनिक सुधारों के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के वित्तीय हालात में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो पाया है।
  2. इनमे से कई बैंकों के पास, निजी बैंकों की तुलना में, बड़ी मात्रा में दबावग्रस्त आस्तियां (stressed assets) हैं, तथा लाभ, बाजार पूंजीकरण, लाभांश भुगतान रिकॉर्ड में भी निजी बैंकों से काफी पीछे हैं।
  3. सरकार द्वारा, सरकार द्वारा संचालित बैंकों में पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड के माध्यम से, सितंबर 2019 में, 70,000 करोड़ रुपये, वित्त वर्ष-18 (FY18) में 80,000 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष-19 (FY19) में 06 लाख करोड़ रुपये, प्रवाहित किए गए। वर्ष 2019 में, सरकार द्वारा दस PSU बैंकों को चार बैंकों में समाहित कर दिया गया।

सरकार के इस निर्णय का महत्व एवं निहितार्थ:

  • सार्वजनिक क्षेत्र की दो बैंकों का निजीकरण, एक दीर्घकालिक परियोजना की शुरुआत करेगा, जिसके तहत राज्य के स्वामित्व में केवल कुछ ही बैंकें रहेंगी और शेष बैंकों का मजबूत बैंकों में विलय कर दिया जाएगा या उनका निजीकरण कर दिया जाएगा।
  • इससे सरकार को, जिसका बैंकों में अधिकाँश हिस्सा होता था, बैंकों के लिए साल-दर-साल इक्विटी सपोर्ट देने से छुटकारा मिलेगा।

सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के समक्ष समस्याएं:

  • निजी बैंकों की तुलना में, सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के पास उच्च गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (Non-Performing Assets- NPAs) और दबावग्रस्त आस्तियां अधिक है, हालांकि इनमें कमी आनी शुरू हो गई है।
  • कोविड-संबंधित नियामक छूटों की समाप्ति के बाद, सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों में फिर से इक्विटी प्रवाह करने की आवश्यकता होगी।

बैंकों का राष्ट्रीयकरण:

(Nationalisation of Banks)

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, जो उस समय वित्त मंत्री भी थीं, ने 19 जुलाई, 1969 को 14  सबसे बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया था। इस निर्णय का उद्देश्य, बैंकिंग क्षेत्र को तत्कालीन सरकार के समाजवादी दृष्टिकोण के अनुरूप करने हेतु था। भारतीय स्टेट बैंक का वर्ष 1955 में, तथा बीमा क्षेत्र का वर्ष 1965 में राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।

कई समितियों द्वारा सार्वजनिक बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी को 51% से कम करने का प्रस्ताव दिया जा चुका है:

नरसिम्हम समिति ने सरकारी हिस्सेदारी को 33% तक सीमित करने तथा पी जे नायक समिति ने सरकारी हिस्सेदारी को 50% से कम करने का सुझाव दिया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘भुगतान बैंक’ क्या होते हैं?
  2. NBFC क्या हैं?
  3. SFB क्या हैं?
  4. निजी बैंक बनाम सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक।

मेंस लिंक:

सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के निजीकरण के लाभ तथा हानियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

भारत में 5G तकनीक पर संसदीय समिति की रिपोर्ट


रिपोर्ट / प्रतिवेदन के प्रमुख निष्कर्ष:

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications- DoT) द्वारा अगस्त 2018 की शुरुआत तक   भारत को 5G तकनीक के लिए तैयार करने हेतु उठाए जाने वाले क़दमों पर एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया था, इसके बावजूद, हकीकत में बहुत कम प्रगति हुई है।

चुनौतियां: स्पेक्ट्रम से संबंधित विभिन्न स्वीकृतियों का अभाव, नीलामी संबंधी अनिश्चितता, स्पेक्ट्रम का उच्च आरक्षित मूल्य, परीक्षण मामलों का अपर्याप्त और मंद विकास, संपूर्ण भारत में ऑप्टिकल फाइबर का निम्न विस्तार और अपूर्ण बैकहॉल क्षमता (backhaul capacity)।

आवश्यकता:

  1. भारत के लिए, 5G नेटवर्क विकसित करने में आगे निकल चुके देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए अपनी अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए और स्पेक्ट्रम नीलामी, बैकहॉल क्षमता, कीमतों और उपयोगकर्ता-परीक्षण मामलों जैसे मुद्दों का समाधान करना चाहिए।
  2. स्पेक्ट्रम तरंगों के आवंटन निर्धारण हेतु दूरसंचार विभाग (DoT) के लिए अंतरिक्ष विभाग और रक्षा मंत्रालय के साथ अतिशीघ्र तालमेल स्थापित करना चाहिए।

5G क्या है?

  • 5G तकनीक, मोबाइल ब्रॉडबैंड की अगली पीढ़ी है। यह तकनीक अंततः 4G LTE कनेक्शन को प्रतिस्थापित करेगी या इसमें महत्वपूर्ण वृद्धि करेगी।
  • 5G तकनीक से डाउनलोड और अपलोड गति में चरघातांकी तरीके से (exponentially) तेजी आएगी।
  • 5G, मल्टी-जीबीपीएस ट्रान्सफर रेट, अत्याधिक कण विलंबता (ultra-low latency), भारी क्षमता, और उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक समान अनुभव प्रदान करेगा।

5G तकनीक की दौड़ में भारत की अवस्थिति:

दूरसंचार क्षेत्र की सभी तीनों खिलाड़ी, रिलायंस जिओ इंफोकॉम, भारती एयरटेल, और वोडाफ़ोन-आईडिया, दूरसंचार विभाग (DoT) से स्पेक्ट्रम आवंटन और 5G फ़्रीक्वेंसी बैंड के लिए एक स्पष्ट रूपरेखा बनाने का आग्रह कर रहे हैं, ताकि वे अपनी सेवाओं के अनुसार अपनी कार्य-योजना बना सकें।

  • हालांकि, एक सबसे बड़ी बाधा, इन तीनों में से दो कंपनियों, भारती एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के पास पूंजी की कमी है।
  • दूसरी ओर, रिलायंस जियो की योजना इस साल की शुरुआत में देश के लिए स्वदेश निर्मित 5G नेटवर्क शुरू करने की है।

5G तकनीक के संदर्भ में वैश्विक प्रगति:

सरकारों से ज्यादा, वैश्विक दूरसंचार कंपनियों द्वारा 5G  नेटवर्क का निर्माण शुरू किया जा रहा है और अपने ग्राहकों के लिए परीक्षण के आधार पर चालू कर दिया गया है। अमेरिका जैसे देशों में, AT&T, टी-मोबाइल और वेरिज़ोन जैसी कंपनियों ने अपने उपयोगकर्ताओं के लिए वाणिज्यिक 5G को शुरू करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. 5G क्या है?
  2. 3G, 4G और 5G के बीच अंतर।
  3. अनुप्रयोग
  4. ‘स्पेक्ट्रम’ क्या होता है?

मेंस लिंक:

5G तकनीक के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

17 प्रमुख ओटीटी संचालकों द्वारा स्व-नियामक टूलकिट लागू


(17 major OTT players adopt self-regulatory toolkit)

संदर्भ:

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) द्वारा, हाल ही में, एक व्यापक परिपालन टूलकिट (comprehensive implementation toolkitCIT) को लागू करने की घोषणा की गई है। यह CIT, ऑनलाइन क्यूरेट सामग्री प्रदाताओं (OCCP) के लिए 4 सितंबर, 2020 लागू यूनिवर्सल सेल-रेगुलेशन कोड के अनुरूप है।

इस टूलकिट का उद्देश्य मार्गदर्शक सिद्धांतों और आचार संहिता को निर्धारित करना है, इसके साथ ही, यह, हितों के टकराव और निषिद्ध सामग्री संबंधी मुद्दों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा दी जाने वाली फीडबैक का भी समाधान करेगी।

स्व-नियामक कोड:

  • पिछले वर्ष, लगभग पंद्रह वीडियो स्ट्रीमिंग सेवा प्रदाताओं द्वारा एक स्व-नियामक कोड पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इसका उद्देश्य इन प्लेटफार्मों पर दिखाई जाने वाली सामग्री के लिए निर्देशक सिद्धांतों का एक सेट तैयार करना है।
  • इसमें पांच प्रकार की सामग्री को प्रतिबंधित किया गया है, जिसमें, किसी भी प्रकार से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्वक राष्ट्रीय प्रतीक या ध्वज का अपमान करने वाली सामग्री तथा बाल पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने वाली स्टोरी-लाइन्स को शामिल किया गया है।

ओवर-द-टॉप (OTT) स्ट्रीमिंग क्या है?

  1. ओवर-द-टॉप’ मीडिया सेवा, एक ऑनलाइन सामग्री प्रदाता होती है, जो एकल उत्पाद के रूप में स्ट्रीमिंग मीडिया उपलब्ध कराती है।
  2. ओवर-द-टॉप (OTT) का प्रयोग प्रायः वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म के संबंध में किया जाता है, लेकिन इसका ऑडियो स्ट्रीमिंग, मैसेज सर्विस या इंटरनेट-आधारित वॉयस कॉलिंग सोल्यूशन के संदर्भ में भी प्रयोग होता है।
  3. ओवर-द-टॉप’ सेवाएं पारंपरिक मीडिया वितरण चैनलों जैसे दूरसंचार नेटवर्क या केबल टेलीविजन प्रदाताओं को दरकिनार करती हैं।
  4. यदि आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है तो आप अपनी सुविधानुसार ओवर-द-टॉप’ सेवा का उपयोग कर सकते हैं।

ओवर-द-टॉप (OTT) की लोकप्रियता का कारण:

  • कम कीमत पर उच्च मूल्य की सामग्री।
  • नेटफ्लिक्स और अमेज़ॅन प्राइम जैसे ओरिजिनल सामग्री प्रदाता।
  • कई उपकरणों के साथ संगतता (Compatibility)।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

चीन का तियानवेन-1 प्रोब


(China’s Tianwen-1 probe)

संदर्भ:

हाल ही में, चीन के तियानवेन-1 प्रोब (Tianwen-1 probe) ने पृथ्वी से साढ़े छह महीने की यात्रा के बाद मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है।

इसके आगे:

लगभग तीन महीनों में, तियानवेन-1, 240 किलोग्राम के रोवर सहित एक लैंडिंग कैप्सूल को सात मिनट की तीव्र उड़ान में, उटोपिया प्लैनीटिया (Utopia Planitia) के रूप में ज्ञात मंगल के उत्तरी गोलार्ध में स्थित एक विशाल मैदान में उतारने का प्रयास करेगा।

तियानवेन-1 के बारे में:

  • चीन का यह पहला मंगल प्रोब है, जिसे पहले हुक्सिंग-1 (Huoxing 1) नाम से जाना जाता था ।
  • इस अंतरिक्ष यान में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर को भेजा गया है।
  • इस यान को चीन के जिचांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र (Xichang Satellite Launch Center) से 5 मार्च को लॉन्च किया गया।
  • लैंडिंग साइट: यह अन्तरिक्ष यान मंगल में उत्तरी अक्षांशों में स्थित ‘यूटोपिया प्लैनिटिया’(Utopia Planitia) नामक विशाल मैदान में उतरेगा, इसी स्थान पर वर्ष 1970 में नासा द्वारा भेजा गया वाइकिंग 2 मिशन उतरा था।
  • तियानवेन-1, फरवरी 2021 में मगल ग्रह की कक्षा में पहुंच जाएगा तथा मई में रोवर मंगल ग्रह की सतह पर उतरेगा।
  • इस अभियान के सफल होने पर, चीन, USSR तथा संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चात् मंगल ग्रह पर सफलतापूर्वक यान—लैंडिंग करने वाला तीसरा देश बन जाएगा।

अभियान के प्रमुख उद्देश्य:

  1. मंगल का भूवैज्ञानिक मानचित्र का निर्माण करना।
  2. मंगल की मृदा विशेषताओं का परीक्षण करना तथा पानी-बर्फ के संभावित भंडारों की खोज करना।
  3. मगल ग्रह के सतही पदार्थों की संरचना का विश्लेषण करना।
  4. मंगल ग्रह के वातावरण और जलवायु की जांच करना।
  5. मंगल ग्रह के विद्युत-चुम्बकीय तथा गुरुत्वाकर्षण क्षेत्रों का अध्ययन करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चीन के मंगल मिशन के उद्देश्य।
  2. अन्य मंगल मिशन
  3. भारत का मंगल मिशन

मेंस लिंक:

चीन के मंगल मिशन के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


बाबर क्रूज मिसाइल

  • यह पाकिस्तान की, कम दूरी की सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल है।
  • यह मिसाइल, 490 किलोमीटर की दूरी तक “उच्च परिशुद्धता” के साथ स्थलीय और समुद्री लक्ष्यों को मारने में सक्षम है।

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