[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 11 फरवरी 2021

 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

1. रुक्मिणी देवी अरुंडेल ने न केवल भरतनाट्यम को एक कला के रूप में पुनर्जीवित किया, बल्कि इसे वैश्विक मान्यता भी प्रदान की। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया

निर्देशक शब्द:

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

रुक्मिणी देवी अरुंडेल का एक व्यक्ति एवं भरतनाट्यम के एक कलाकार के रूप में संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

समझाइए कि कैसे मंदिर नर्तक, देवदासियों के मध्य प्रचलित ‘सादिर’ शैली, जो भरतनाट्यम का प्रारंभिक रुप था, को एक अश्लील कला माना जाता था।

भरतनाट्यम को लोकप्रिय बनाने में रुक्मिणी देवी अरुंडेल द्वारा निभाई गयी भूमिका का वर्णन कीजिए।

निष्कर्ष:

वर्तमान समय में भरतनाट्यम की स्थिति एवं इसे संरक्षित करने की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

2. भारत के विभिन्न भागों में प्रचलित लोककथाओं, किंवदंतियों और मिथकों की अनेकता स्थानीय गीत एवं नृत्य परंपराओं के साथ संयुक्त लोक नृत्य का एक समृद्ध मिश्रण है। वर्तमान समय में लोक नृत्यों के महत्व पर टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत भर के प्रचलित विविध लोक नृत्यों के बारे में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि लोक नृत्य सामान्यतः सहज, अपरिष्कृत एवं बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के जनता द्वारा किया जाता है।

भारत के लोक नृत्यों के समकालीन महत्व का वर्णन कीजिए।

निष्कर्ष:

महामारी के समय में कलाकारों की आजीविका को संरक्षित करने की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

3. प्राचीन भारत में रसायनशास्त्र एवं रासायनिक विज्ञान के विभिन्न विकासों पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:   Indian Express

 निर्देशक शब्द:

प्रकाश डालिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्राचीन भारत में रसायन विज्ञान के विकास का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

रसायन विज्ञान के विकास के विभिन्न चरणों: (i) 1500 ईसा पूर्व तक पूर्व-वैदिक चरण, जिसमें हड़प्पा काल भी शामिल है, (ii) 700 CE तक वैदिक एवं आयुर्वेदिक काल,

(iii) 700 CE से 1100 CE तक संक्रमणकालीन अवधि, (iv) 700 CE से 1300 CE तक तांत्रिक काल, तथा (v) 1300 CE से 1600 CE तक उत्तर- रासायनिक काल, का वर्णन कीजिए।

उपरोक्त चरणों में भारतीयों द्वारा विकसित नवीन तकनीकों, विकास एवं उपलब्धियों का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

वर्तमान समय में वैज्ञानिक मनोवृत्ति होने की उपलब्धियों एवं महत्व को बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

 4. “ई-संजीवनी” डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने कोविड के प्रसार को रोकने में सफलता के साथ- साथ गैर-कोविड आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवश्यक प्रावधानों को सक्षम बनाने वाली टेलीमेडिसिन सेवाओं को सक्षम किया है। इसके निष्पादन का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

ई- संजीवनी पहल की शुरूआत एवं इसके अब तक के अनुप्रयोगों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए  उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

ई- संजीवनी के सकारात्मक घटकों का उल्लेख कीजिए।

ई- संजीवनी की सीमाओं का वर्णन कीजिए।

इन सीमाओं के समाधान के लिए सुझाव प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

5. ‘संज्ञानात्मक हैकिंग’ – असत्य सूचना से सम्बंधित एक घटना, विगत कुछ वर्षों में अत्यधिक चर्चाओं में रही है। इससे आपका क्या तात्पर्य है? इसके प्रभाव की व्याख्या कीजिए एवं इसे रोकने के लिए उपाय सुझाइए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

निर्देशक शब्द: 

व्याख्या कीजिए- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिए।

उत्तर की संरचना: 

परिचय:

“संज्ञानात्मक हैकिंग” शब्द को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

विगत कुछ वर्षों में संज्ञानात्मक हैकिंग के चर्चा में रहने के कारणों का विस्तार से वर्णन कीजिए। संदर्भित लेख की सहायता से प्रासंगिक आँकड़े उद्धृत कीजिए।

संज्ञानात्मक हैकिंग एवं असत्य सूचना के प्रभावों का उल्लेख कीजिए।

असत्य सूचनाओं से निपटने के लिए एवं इसे रोकने के लिए आवश्यक कदमों का उल्लेख कीजिए।

 निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा।

 6. नैतिक मार्गदर्शन के एक स्त्रोत के रूप में धर्म का आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता : लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

यह समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए कि विश्व भर के विभिन्न धर्म, धार्मिक नैतिकता के विकास की ओर कैसे अग्रसर होते हैं।

विषय वस्तु:

नैतिकता एक सामान्य विचार या मान्यता है, जो सही अथवा गलत के सन्दर्भ में लोगों के व्यवहार एवं दृष्टिकोण के साथ-साथ उनके विचारों को भी प्रभावित करती है। धर्म विभिन्न विश्वास प्रणालियों द्वारा संचालित होता है एवं यह व्यक्ति विशेष के कार्यों को निर्देशित करता है। विश्व भर के प्रमुख धर्मों के उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

नैतिकता की भावना विकसित करने में धर्म विशेष भूमिका निभाता है, लेकिन इसकी भूमिका सीमित होती है। इसका कारण यह है कि धर्म आलोचनात्मक एवं स्वतंत्र सोच की भूमिका पर जोर नहीं देता है, जो नैतिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण है। विश्व भर के प्रमुख धर्मों के उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

नैतिक मार्गदर्शन के स्रोत के रूप में धर्म के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: लोक निधि का उपयोग।

7. सार्वजनिक निधियों के उपयोग को नियंत्रित करने वाले नैतिक सिद्धांतों का परीक्षण कीजिए। (150 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता : लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

सार्वजनिक धन के उपयोग को नियंत्रित करने वाले प्रमुख सिद्धांतों का उल्लेख कीजिए। प्रासंगिक उदाहरणों के साथ इन सिद्धांतों को विस्तार से समझाइए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि देश की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सार्वजनिक धन के समुचित उपयोग की आवश्यकता पर बल देना आवश्यक है।


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