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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1.राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव

2. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. असम चाह बगीचार धन पुरस्कार मेला योजना

2. आइंस्टीनियम

3. हरित निर्णयों के आर्थिक प्रभाव की जांच करने हेतु नीति आयोग द्वारा एक अध्ययन

4. पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ)

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. आंदोलनजीवी और एक नए प्रकार का ‘एफडीआई’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ब्रूकेशिया नाना

2. विजयनगर: कर्नाटक का 31 वां जिला

3. श्रीलंका द्वारा तमिलनाडु के नजदीक स्थित एक द्वीप पर चीनी ऊर्जा परियोजना को मंजूरी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव


(Motion of thanks to President’s Address)

संदर्भ:

25 राजनीतिक दलों के 50 से अधिक वक्ताओं ने ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ (Motion of thanks) पर राज्यसभा में तीन दिनों तक चलने वाली बहस में भाग लिया।

धन्यवाद प्रस्ताव:

(Motion of thanks)

बजट सत्र की शुरुआत में, राष्ट्रपति, संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण को सरकार द्वारा तैयार किया जाता है, जिसमे सरकार की उपलब्धियों का विवरण होता है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण के पश्चात प्रत्येक सदन में सत्तापक्ष के सांसदों द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है। इस दौरान, राजनीतिक दल धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हैं तथा संशोधन करने हेतु सुझाव भी देते हैं।

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन:

  • राष्ट्रपति द्वारा सदन को संबोधित करने के पश्चात, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन पेश किया जा सकता है।
  • संशोधन में अभिभाषण में निहित मामलों के साथ-साथ उन विषयों को भी संदर्भित किया जा सकता है, जिनका, संशोधन प्रस्ताव पेश करने वाले सदस्य की राय में, अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया था।
  • ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन को, अध्यक्ष अपने विवेकानुसार उचित तरीके से पेश कर सकता है।

सीमाएं:

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ के तहत, सदस्य उन विषयों पर चर्चा नहीं कर सकते हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होती है। इसके अलावा, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान राष्ट्रपति का उल्लेख नहीं किये जा सकता, क्योंकि अभिभाषण की विषयवस्तु के लिए केंद्र सरकार तैयार करती है, न कि राष्ट्रपति।

संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

राष्ट्रपति के अभिभाषण और धन्यवाद प्रस्ताव, संविधान के अनुच्छेद 86 (1) और 87 (1) और लोकसभा में प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली (Rules of Procedure and Conduct of Business) के नियम 16 ​​से 24 तक, के अधीन संचालित होते हैं।

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ किस प्रकार पारित होता है?

  • संसद सदस्यों द्वारा ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर मतदान किया जाता है। यह प्रस्ताव, दोनों सदनों में पारित होना आवश्यक होता है।
  • ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ के पारित न होने को सरकार की हार समझा जाता है, और यह सरकार के पतन का कारण बन सकता है। यही कारण है, कि ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ को ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के समान माना जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ क्या है?
  2. संशोधन
  3. यह किस प्रकार पारित होता है?
  4. इससे संबंधित प्रावधान

मैंस लिंक:

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ क्या है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद


(UN Human Rights Council)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UN Human Rights Council) के साथ फिर से जुड़ने संबंधी योजना की घोषणा की है। लगभग तीन साल पहले, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका कोसंयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ से अलग कर लिया था।

UNHRC के बारे में

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद‘ (UNHRC) का पुनर्गठन वर्ष 2006 में इसकी पूर्ववर्ती संस्था, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग (UN Commission on Human Rights) के प्रति ‘विश्वसनीयता के अभाव’ को दूर करने में सहायता करने हेतु किया गया था।

इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

संरचना

  • वर्तमान में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ (UNHRC) में 47 सदस्य हैं, तथा समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।
  • प्रत्येक सदस्य तीन वर्षों के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होता है।
  • किसी देश को एक सीट पर लगातार अधिकतम दो कार्यकाल की अनुमति होती है।

UNHRC के कार्य

  • परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा‘ (Universal Periodic Review UPR) के माध्यम से मानव अधिकार संबंधी विषयों पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।
  • यह विशेष देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के समक्ष चुनौतियाँ तथा इसमें सुधारों की आवश्यकता:

  • ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य-देशों जैसे सऊदी अरब, चीन और रूस के मानवाधिकार रिकॉर्ड इसके उद्देश्य और मिशन के अनुरूप नहीं हैं, जिसके कारण आलोचकों द्वारा परिषद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाये जाते है।
  • UNHRC में कई पश्चिमी देशों द्वारा निरंतर भागीदारी के बावजूद भी ये मानव अधिकारों संबंधी समझ पर गलतफहमी बनाये रखते हैं।
  • UNHRC की कार्यवाहियों के संदर्भ में गैर-अनुपालन (Non-compliance) एक गंभीर मुद्दा रहा है।
  • अमेरिका जैसे शक्तिशाली राष्ट्रों की गैर-भागीदारी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. UNHRC के बारे में
  2. संरचना
  3. कार्य
  4. ‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा’ (UPR) क्या है?
  5. UNHRC का मुख्यालय
  6. हाल ही में UNHRC की सदस्यता त्यागने वाले देश

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: मुख्य फसलें- देश के विभिन्न भागों में फसलों का पैटर्न- सिंचाई के विभिन्न प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली।

असम चाह बगीचार धन पुरस्कार मेला योजना


(Assam Chah Bagichar Dhan Puraskar Mela Scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, असम के गुवाहाटी में चाह बगीचार धन पुरस्कार मेला (Chah Bagichar Dhan Puraskar Mela Scheme) के तीसरे चरण का आयोजन किया गया।

योजना के बारे में:

  • चाह बगीचार धन पुरस्कार मेला योजना की शुरुआत वर्ष 2017- 18 में असम सरकार द्वारा की गयी थी।
  • इसका उद्देश्य, चाय बागान क्षेत्रों में लोगों को बैंक खाते खोलने के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • इस योजना के तहत, चाय समुदाय के श्रमिकों के लिए उनके बैंक खातों में 2500 रु प्रदान किए जाएंगे।

पात्रता:

  1. असम के निवासी तथा चाय बागानों में काम करने वाले व्यक्ति।
  2. बीपीएल श्रेणी के अंतर्गत आने वाली महिलाएं।

भारत में चाय उत्पादन:

टी बोर्ड इंडिया के अनुसार, भारत की वैश्विक चाय निर्यात में 14% की भागेदारी है, तथा देश में उत्पादित होने वाली कुल चाय का लगभग 20% निर्यात किया जाता है।

चाय उद्योग में भारत:

  1. विश्व में चाय का सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है।
  2. विश्व में चाय का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  3. विश्व में चाय का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

भारत में चाय उत्पादित करने वाले स्थान:

भारत में चाय का रोपण और खेती, असम, दार्जिलिंग, दक्षिण भारत की नीलगिरी पहाड़ियों और हिमालय की तलहटी के तराई क्षेत्रों में की जाती है।

चाय उत्पादन हेतु आवश्यक दशाएं:

  • जलवायु: चाय एक उष्णकटिबंधीय और उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है, तथा ऊष्ण एवं आर्द्र जलवायु में अच्छी तरह से वृद्धि करता है।
  • तापमान: 20 ° -30 ° C
  • वर्षा: 150-300 सेमी वार्षिक वर्षा।
  • मृदा: भुरभुरी उप-मृदा सहित अल्प मात्रा में अम्लीय मृदा, जिसमे पानी का मुक्त रूप से रिसाव होता रहे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चाय के बारे में
  2. इसकी वृद्धि के लिए जलवायु दशाएं
  3. भारत में चाय का वितरण
  4. भारत में चाय का आयात और निर्यात
  5. भारत और विश्व में चाय का सबसे बड़ा उत्पादक

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

आइंस्टीनियम


(Einsteinium)

संदर्भ:

पिछले सप्ताह विज्ञान से संबधित प्रसिद्ध पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में, पहली बार, शोधकर्ताओं ने आइंस्टीनियम (Einsteinium) के कुछ विशेषताओं की पहचान की है।

‘आइंस्टीनियम’ क्या है?

आइंस्टीनियम तत्व, की खोज वर्ष 1952 में पहले हाइड्रोजन बम (प्रशांत महासागर में ‘आइवी माइक’ नामक एक थर्मोन्यूक्लियर उपकरण का विस्फोट) के मलबे में की गयी थी। इसका नाम विश्वविख्यात वैज्ञानिक आइंस्टाइन के नाम पर रखा गया है।

‘आइवी माइक’ (Ivy Mike) का विस्फोटन, 1 नवंबर, 1952 को दक्षिण प्रशांत में एनीवेटोक एटोल (Eniwetok Atoll) पर एलुगैलाब (Elugelab) नामक एक दूरस्थ द्वीप पर किए जा रहे परीक्षणों का एक हिस्सा था।

आइंस्टीनियम के विशिष्ट गुण:

  • इसका निर्माण करना कठिन है और यह अत्यधिक रेडियोधर्मी है।
  • आइंस्टीनियम तत्व का सबसे आम समस्थानिक, आइंस्टीनियम-253 है, जिसकी अर्ध-आयु मात्र 20 दिन होती है।
  • आइंस्टीनियम -254, तत्व के अधिक स्थिर समस्थानिकों में से एक है, जिसकी अर्ध-आयु 276 दिन होती है।
  • यह तत्व, नग्न आंखों से दिखाई नहीं देता है, यहाँ तक कि, इसकी खोज होने के बाद, नग्न आंखों से देखे जा सकने योग्य मात्रा को निर्मित करने में नौ वर्ष का समय लग गया।
  • इसे पर्याप्त निर्माण करने में नौ साल लग गए ताकि इसे नग्न आंखों से देखा जा सके।
  • चूंकि, आइंस्टीनियम, एक उच्च रेडियोधर्मी तत्व है, और सभी आइंस्टीनियम समस्थानिकों की अर्ध-आयु काफी कम होती है। इस कारण, भले ही यह तत्व इसकी उत्पत्ति के शुरुआती समय में पृथ्वी पर मौजूद रहा हो, किंतु वर्तमान काल तक इसका निश्चित रूप से अपक्षय हो चुका है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आइंस्टीनियम क्या है?
  2. गुण
  3. इसकी खोज कब हुई?
  4. ‘आइवी माइक’ क्या है?

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

हरित निर्णयों के आर्थिक प्रभाव की जांच करने हेतु नीति आयोग द्वारा एक अध्ययन


(NITI Aayog study to track economic impact of green verdicts)

संदर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग ने, पर्यावरणीय आधार पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं के लिए बाधा उत्पन्न करने वाले तथा इन पर रोक लगाने वाले न्यायिक निर्णयों के ‘अनपेक्षित आर्थिक परिणामों’ की जांच करने हेतु एक ‘अध्ययन’ करने का फैसला किया है।

इसके लिए, सेंटर फॉर कॉम्पिटिशन, इन्वेस्टमेंट एंड इकोनॉमिक रेगुलेशन, कंज्यूमर यूनिटी एंड ट्रस्ट सोसायटी (CUTS) को दायित्व सौंपा गया है। CUTS इंटरनेशल एक रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन है और इसका हेडक्वार्टर जयपुर में है।

इस प्रकार के फैसलों के सामान्य परिणाम क्या होते हैं?

न्यायिक फैसलों के आर्थिक प्रभाव दूरगामी होते हैं, जिन्हें निर्णय सुनाने के समय अक्सर ध्यान में नहीं रखा जाता है।

प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के लिए नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले निर्णय, नौकरियों तथा राजस्व में होने वाली कमी के संदर्भ में, आर्थिक हानि पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं करते हैं।

इस अध्ययन का फोकस:

  • इसके तहत, पाँच प्रमुख परियोजनाओं की जाँच करने का उद्देश्य निर्धारित किया गया है। ये परियोजनाएं, सर्वोच्च न्यायालय या राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के न्यायिक निर्णयों से ‘प्रभावित’ हुई हैं।
  • इस स्टडी में, परियोजनाओं के बंद होने से प्रभावित व्यक्तियों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों के के साक्षात्कार लेने तथा परियोजनाओं के बंद होने के व्यावसायिक प्रभाव का आकलन करने की योजना तय की गयी है।

अध्ययन के लिए चुनी गयी पाँच परियोजनाएँ निम्नलिखित हैं:

  1. मोपा, गोवा में एक हवाई अड्डे का निर्माण
  2. गोवा में लौह अयस्क खनन पर रोक
  3. तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्टरलाइट कॉपर प्लांट को बंद करना
  4. दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बालू खनन से संबंधित NGT के निर्णय
  5. NGT के दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों संबंधित निर्णय।

समय की मांग:

न्यायपालिका के लिए मामलों का फैसला करते समय पर्यावरण, इक्विटी और आर्थिक पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए, और इसके लिए एक संस्थागत प्रणाली बनाने की आवश्यकता है।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ)


(Eco-Sensitive Zones)

संदर्भ:

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के हालिया मसौदा अधिसूचना पर वायनाड में लोगों की आशंका को दूर करने की मांग की है। पर्यावरण मंत्रालय की मसौदा अधिसूचना में वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (Wayanad Wildlife Sanctuary WWS) के आसपास एक बफर जोन बनाने का प्रस्ताव किया गया है।

संबंधित प्रकरण:

पर्यावरण मंत्रालय (MOEFCC) द्वारा जारी मसौदा अधिसूचना में वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (WWS) के आसपास 118.59 वर्ग किमी क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive ZonesESZ) के रूप में अधिसूचित किया गया है।

  • केरल सरकार द्वारा वायनाड वन्यजीव अभयारण्य (WWS) के आसपास 2 वर्ग किमी को पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) के रूप में निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया गया है।
  • इसका मानना है, कि ESZ को अधिसूचित करते समय घनी आबादी वाले क्षेत्रों को बाहर रखा जाना चाहिए।

संबंधित चिंताएँ:

  • इस प्रकार के निर्णय से मंथावैडी (Mananthavady) और सुल्तान बाथरी तालुकों (Sulthan Bathery taluks) के अंतर्गत आने वाले छह गांवों में विस्तृत अभयारण्य के हजारों किसानों के जीवन पर बुरा असर पड़ेगा।
  • पर्यावरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों में, सड़कों और घरों के निर्माण सहित सभी विकास कार्य प्रभावित होंगे और वन अधिकारियों की अनुमति के बगैर, किसान अपनी जमीन पर लगाए गए पेड़ों को नहीं काट सकेंगे।

इस क्षेत्र को पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) घोषित करने के पीछे तर्क:

इस क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमलों की बढ़ती घटनाओं के कारण जंगल के किनारे रहने वाले  किसानों का जीवन दयनीय हो गया है।

‘वायनाड वन्यजीव अभयारण्य’ (WWS) के बारे में:

  • ‘वायनाड वन्यजीव अभयारण्य’, नीलगिरी बायोस्फीयर रिजर्व (5,520 वर्ग किमी) का एक भाग है और दक्षिण भारत के हाथी रिजर्व नंबर-7 का एक महत्वपूर्ण घटक है।
  • यह केरल का एकमात्र अभयारण्य है जहाँ चार सींग वाले मृगों के देखे जाने की सूचना मिली है।
  • इस अभयारण्य में, सफ़ेद गिद्ध / इजिप्शियन गिद्ध (Egyptian vulture), हिमालयन ग्रिफन और सिनेरियस गिद्धों (Cinereous vultures) भी पाए जाते हैं, और इसके अलावा, लाल सिर वाले और सफेद पीठ वाले गिद्धों की दो प्रजातियाँ, जो कभी केरल में आम तौर पर पायी जाती थी, वर्तमान में केवल वायनाड पठार तक सीमित हो चुकी हैं।
  • नागरहोल-बांदीपुर-मुदुमलाई-वायनाड वन्य क्षेत्र, देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक है। हाल ही में, कैमरा ट्रैप का उपयोग करने पर, अभयारण्य में 79 बाघों की उपस्थिति का संकेत मिले हैं।
  • इस वन्यजीव प्रभाग के जंगल, काबानी नदी प्रणाली की सहायक नदियों के लिए प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र हैं।

‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) क्या होते हैं?

  • इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) अथवा पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (Ecologically Fragile Areas- EFAs), संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित क्षेत्र होते हैं।
  • किसी क्षेत्र को ‘पारिस्थितिक-संवेदनशील क्षेत्र’ (ESZ) घोषित करने का उद्देश्य, इन क्षेत्रों में गतिविधियों को विनियमित और प्रबंधित करके संरक्षित क्षेत्रों में एक प्रकार का ‘आघात-अवशोषक’ (shock absorbers) बनाना होता है।
  • ये क्षेत्र, उच्च-संरक्षित क्षेत्रों तथा निम्न संरक्षित वाले क्षेत्रों के मध्य एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में भी कार्य करते हैं।
  • पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 में “इको-सेंसिटिव जोन” शब्द का उल्लेख नहीं है।
  • वन्यजीव संरक्षण रणनीति, 2002 के अनुसार, किसी संरक्षित क्षेत्र के आसपास 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को एक ESZ घोषित किया जा सकता है।
  • इसके अलावा, जहां संवेदनशील गलियारे, कनेक्टिविटी और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण भाग, परिदृश्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र, 10 किमी के क्षेत्र से आगे स्थित हैं, तो इन क्षेत्रों को भी ESZ में शामिल किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र’ किस प्रकार घोषित किया जाता है?
  2. ESZ की सीमा
  3. वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के बारे में
  4. नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व के बारे में

मेंस लिंक:

संरक्षित क्षेत्रों के आसपास ‘पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र’ की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

आंदोलनजीवी और एक नए प्रकार का ‘एफडीआई’


हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो नए शब्द गढ़े है:

  1. आंदोलन-जीवी (पेशेवर प्रदर्शनकारी)
  1. ‘विदेशी विनाशकारी विचारधारा’ (Foreign Destructive Ideology- FDI)

ये शब्द, विपक्ष और कुछ प्रदर्शनकारियों तथा किसानों के आंदोलन के समर्थन में ट्वीट करने वाले विदेशी व्यक्तियों पर व्यंग करने के लिए गढ़े गए।

प्रधानमंत्री का वक्तव्य:

“देश में एक नए प्रकार का एफडीआई उभरा रहा है, और यह ‘विदेशी विनाशकारी विचारधारा’ (Foreign Destructive Ideology’) है। हमें इस तरह की विचारधारा से देश को बचाने के लिए और अधिक जागरूक होने की आवश्यकता है।”

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय पॉप स्टार रिहाना ने ट्विटर पर चल रहे किसानों के आंदोलन पर एक समाचार-लेख साझा किया था, जिसमें उन्होंने पूछा था कि, इसकी पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं की जा रही है?  सरकार ने इस पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए एक प्रेस बयान जारी करने किया, कि यह “निहित स्वार्थी समूहों द्वारा अपने एजेंडे को इन विरोध प्रदर्शनों पर लागू करने और इन्हें पटरी से उतारने की कोशिश करते हुए देखना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


ब्रूकेशिया नाना

(Brookesia nana)

  • यह हाल ही में, द्वीपीय देश मेडागास्कर पर खोजी गयी एक गिरगिट प्रजाति है।
  • यह संभवतः विश्व का सबसे छोटा वयस्क सरीसृप है।
  • इस प्रजाति के नर गिरगिट की कुल लंबाई 6 मिमी है, तथा मादा गिरगिट की लंबाई 28.9 मिमी होती है।
  • इससे पहले, ब्रुकेशिया माइक्रा (Brookesia micra) गिरगिट प्रजाति को सबसे छोटा माना जाता था।

विजयनगर: कर्नाटक का 31 वां जिला

हाल ही में, कर्नाटक में 31वें जिला का गठन किया गया है। राज्य सरकार ने खदान-समृद्ध बल्लारी जिले के कुछ भागों को अलग करके ‘विजयनगर जिले’ बनाने संबंधी एक आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

श्रीलंका द्वारा तमिलनाडु के नजदीक स्थित एक द्वीप पर चीनी ऊर्जा परियोजना को मंजूरी

  • श्रीलंका ने जाफना प्रायद्वीप के किनारे स्थित तीन द्वीपों में एक चीनी ऊर्जा परियोजना के लिए मंजूरी दे दी है। यह स्थान तमिलनाडु तट से मात्र 50 किमी दूर स्थित है।
  • इस प्रस्ताव के तहत, चीन के सिनोसार-ईटेकविन (Sinosoar-Etechwin) संयुक्त उद्यम द्वारा नैनातिवु, डेल्फ़्ट या नेदुन्थेवु, और पाक़ की खाड़ी में स्थित अनालिटिवु में ‘हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम’ स्थापित की जाएगी।
  • यह द्वीप एक सीमित नौका सेवा द्वारा जाफना प्रायद्वीप से जुड़े हुए हैं, जिसका प्रबंधन ज्यादातर श्रीलंकाई नौसेना द्वारा किया जाता है।

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