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सामान्य अध्ययन – 1
विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
1. प्राचीन एवं मध्य काल की गुफाएं हमें विभिन्न काल एवं धर्मों की विभिन्न कला एवं स्थापत्य शैलियों की झलक प्रदान करती हैं। विस्तार से समझाइए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया
निर्देशक शब्द:
समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
पाषाण युग से प्रारम्भ करते हुए गुफा वास्तुकला के विभिन्न रूपों के बारे में संक्षेप लिखते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में गुफा वास्तुकला के विकास का कालानुक्रमिक वर्णन प्रस्तुत कीजिए।
समझाइए कि गुफाएं विभिन्न धर्मों की कला एवं स्थापत्य शैलियों का वर्णन कैसे करती हैं।
निष्कर्ष:
समझाइए कि कैसे गुफाएँ वर्ष भर हजारों पर्यटकों एवं स्थापत्य उत्साही लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं एवं निष्कर्ष निकालिए।
विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।
2. गांधार, मथुरा एवं अमरावती कला शैलियों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। क्या आपको लगता है कि इन प्राचीन शैलियों के कार्य प्रकृति में केवल धार्मिक हैं? (250 शब्द)
सन्दर्भ: भारतीय कला एवं संस्कृति: नितिन सिंघानिया
निर्देशक शब्द:
वर्णन कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
मूर्तिकला के विकास एवं कला की तीन शैलियों के उद्भव का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।
विषय वस्तु:
गांधार, मथुरा एवं अमरावती कला शैलियों की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन कीजिए।
इन शैलियों के अंतर्गत निर्मित छवियों के प्रकार पर टिप्पणी कीजिए। विस्तार से समझाइए कि इन शैलियों की प्रकृति में धार्मिक कला की प्रधानता थी लेकिन विशेष रूप से प्राकृतिक रूपांकनों, जीवन के विभिन्न पैटर्न आदि में धर्मनिरपेक्ष प्रकृति के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। अपने बिंदुओं को प्रमाणित करने के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।
निष्कर्ष:
निष्कर्ष निकालिए कि हालांकि इन शैलियों में धार्मिक प्रतीकों, विशेष रूप से बौद्ध धर्म की प्रधानता थी लेकिन इनके अंतर्गत धर्मनिरपेक्ष कला का भी विकास हुआ था।
सामान्य अध्ययन – 2
विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।
3. किसी भी अपराध के सिद्धदोष व्यक्ति के दंड के संबंध में राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों की व्याख्या कीजिए। इस संबंध में राज्यपाल की शक्तियाँ राष्ट्रपति की शक्तियों से कैसे भिन्न हैं? दोषियों को क्षमादान देते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए? (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
व्याख्या कीजिए- प्रश्न में पूछी गई जानकारी को सरल भाषा में व्यक्त कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 72 का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
इस संबंध में राष्ट्रपति की न्यायिक शक्तियों का विस्तार से वर्णन कीजिए एवं उन स्थितियों पर प्रकाश डालिए, जिनमें राष्ट्रपति क्षमादान दे सकते हैं। क्षमादान के उपकरणों यथा- क्षमा, लघुकरण, परिहार, प्रविलम्बन एवं विराम का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
अनुच्छेद 161 का वर्णन कीजिए एवं उपर्युक्त सन्दर्भ में राष्ट्रपति की शक्तियों के साथ राज्यपाल की शक्तियों की तुलना कीजिए।
क्षमादान देते समय किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए? समझाइए। अपने बिंदुओं को प्रमाणित करने के लिए उदाहरणों का उपयोग कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
4. सार्वभौमिक बीमा एवं व्यापक प्राथमिक देखभाल, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने की दिशा में पहला कदम है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त करने में भारत की शक्ति एवं कमजोरियों का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
भारतीय संदर्भ में सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल का वर्णन करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सार्वभौमिक बीमा एवं व्यापक प्राथमिक देखभाल के विस्तार का सोदाहरण उल्लेख कीजिए।
इस संबंध में भारत की शक्तियों एवं कमजोरियों का भी उल्लेख कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 3
विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।
5. ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ (Glacial Lake Outburst Flooding) क्या है? हिमालयी पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र में पनबिजली परियोजनाओं की कमजोरियों की जांच कीजिए एवं इसके समाधान के उपाय सुझाइए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
जांच कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ की अवधारणा को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
हिमनद एवं हिमनद झीलों का निर्माण कैसे होता है एवं हिमनद विस्फोट कैसे होता है? समझाइए। इसके कारणों पर भी विस्तार से चर्चा कीजिए।
हिमालयी पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र में स्थित जल विद्युत परियोजनाओं के कारण उत्पन्न विभिन्न पारिस्थितिकीय कमजोरियों का उल्लेख कीजिए।
इसके समाधान के लिए उपाय सुझाइए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 4
विषय: सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।
6. सुशासन तथा सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए सिविल सेवकों को पेशेवर होना चाहिए, नैतिकता तथा अखंडता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना चाहिए तथा निपुणता एवं करुणा के गुणों का प्रदर्शन करना चाहिए। चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
सुशासन एवं उच्चतम नैतिक मानकों को बनाए रखने के मध्य सम्बन्ध स्थापित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
सुशासन में नैतिकता एवं नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के निहितार्थों में सरकार की कार्रवाई की वैधता, नीति और निर्णय लेने में तर्कसंगतता, जिम्मेदारी की भावना विकसित करना, जवाबदेही सुनिश्चित करना, कार्य प्रतिबद्धता को मजबूत करना, उत्कृष्टता पैदा करना, व्यक्तिगत और संगठनात्मक लक्ष्यों की भावना को सुविधाजनक बनाना, जवाबदेही का विकास करना, करुणा दिखाना, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना, न्याय की भावना की रक्षा करना, पारदर्शिता लाना और अखंडता को बढ़ाना आदि शामिल हैं।
निष्कर्ष:
उपरोक्त के समग्र महत्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम।
7. तकनीकी नैतिकता में एक विशिष्ट समस्या उत्पन्न होती है क्योंकि प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए, इस सन्दर्भ में नीति का अभाव है। विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
तकनीकी का तेजी से विकास एवं इसे विनियमित करने में शामिल कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
नीति के अभाव के कारणों का विश्लेषण कीजिए एवं उदाहरणों की सहायता से उपर्युक्त की पुष्टि कीजिए।
उपर्युक्त के प्रभावों पर प्रकाश डालिए। इस संबंध में आवश्यक उपायों पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।








