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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राजनीतिक दलों का पंजीकरण

 

सामान्य अध्ययन-III

1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

2. सरकार प्रतिभूतियाँ

3. डेनमार्क द्वारा उत्तरी सागर में विश्व के पहले ऊर्जा द्वीप का निर्माण

4. काटे जाने वाले 300 वृक्षों की ऑक्सीजन एवं अन्य उत्पादों के लिहाज से 220 करोड़ रुपये कीमत

5. निगरानी हेतु किसी भी संस्था के लिए निर्बाध अनुमति नहीं

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. सरकार के ‘विरोधात्मक रवैये’ की आलोचना

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘परिवार पहचान पत्र’ योजना

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण


संदर्भ:

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (Association for Democratic Reforms- ADR) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार:

  1. वर्ष 2018-19 के लिए, कुल 2,301 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों में से मात्र 78 दलों (3.39%) की अंशदान रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है।
  2. वर्ष 2017-18 के लिए, मात्र 82 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (56%) द्वारा, अंशदान रिपोर्ट संबंधित राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर अपलोड की गयी हैं।
  3. पिछले 10 वर्षों में, इन दलों की संख्या में दो गुना वृद्धि हुई है। इनकी सख्या वर्ष 2010 में 1,112 थी जोकि वर्ष 2019 में 2,301 हो चुकी थी।

‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’:

(Unrecognised Political Parties)

जिन राजनीतिक दलों के लिए विधानसभा चुनावों अथवा आम चुनावों में राज्य पार्टी बनने हेतु आवश्यक मत-प्रतिशत हासिल नहीं हो पाता है, या जो राजनीतिक दल पंजीकृत होने के बाद से कभी भी चुनाव नहीं लड़े हैं, अथवा नए पंजीकृत राजनीतिक दलों को ‘गैर-मान्यता प्राप्त दल’ (Unrecognised Political Parties) माना जाता है।

इन दलों के लिए, ‘मान्यता प्राप्त दलों’ को प्राप्त होने वाली सभी सुविधाओं अथवा लाभ नहीं मिलता है।

भारत में ‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’:

वर्तमान में, भारत के निर्वाचन आयोग में 2,360 राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमे से 2,301 दल अर्थात 97.50% दल ‘गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल’ हैं।

राजनीतिक दलों का पंजीकरण:

राजनीतिक दलों का पंजीकरण ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’ (Representation of the People Act), 1951 की धारा 29A के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है।

किसी राजनीतिक दल को पंजीकरण कराने हेतु अपने गठन के 30  दिनों के भीतर उपरोक्त धारा के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के समक्ष, निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन प्रस्तुत करना होता है। इसके लिए भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 324 और ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’, 1951 की धारा 29A  द्वारा प्रदत्‍त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग दिशा-निर्देश जारी करता है

भारत के ‘राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु किन्ही भी चार अथवा अधिक राज्यों में होने वाले आम चुनावों अथवा विधानसभा चुनावों में होने वाले कुल मतदान के न्यूनतम छह प्रतिशत वैध मतों को हासिल करना अनिवार्य होता है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए किसी भी राज्य अथवा राज्यों से लोकसभा में न्यूनतम चार सीटों पर विजय प्राप्त करना चाहिए।
  3. राजनीतिक दल द्वारा, लोकसभा चुनावों में कुल लोकसभा सीटों की 2 प्रतिशत (543 सदस्य की वर्तमान संख्या में से 11 सदस्य) सीटों पर जीत हासिल की गयी हो तथा ये सदस्य कम-से-कम तीन अलग-अलग राज्यों से चुने गए हों।

 ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के लिए पात्रता:

  1. किसी राजनीतिक दल को ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त करने हेतु, राज्य में हुए लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में होने वाले मतदान के कुल वैध मतों का न्यूनतम छह प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है।
  2. इसके अलावा, इसके लिए संबंधित राज्य की विधान सभा में कम से कम दो सीटों पर जीत हासिल होनी चाहिए।
  3. राजनीतिक दल के लिए, राज्य की विधानसभा के लिये होने वाले चुनावों में कुल सीटों का 3 प्रतिशत अथवा 3 सीटें, जो भी अधिक हो, हासिल होनी चाहिए।

लाभ:

  1. ‘राज्य स्तरीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को, संबंधित राज्‍य में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्त होता है। और, ‘राष्ट्रीय राजनीतिक दल’ के रूप में मान्यता प्राप्त किसी पंजीकृत दल को पूरे भारत में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्‍ह आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्‍त होता है।
  2. मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍यस्‍तरीय राजनीतिक दलों के उम्‍मीदवारों को नामांकन-पत्र दाखिल करते वक्‍त सिर्फ एक ही प्रस्‍तावक की ज़रूरत होती है। साथ ही, उन्‍हें मतदाता सूचियों में संशोधन के समय मतदाता सूचियों के दो सेट नि:शुल्क पाने का अधिकार भी होता है तथा आम चुनाव के दौरान इनके उम्‍मीदवारों के लिए मतदाता सूची का एक सेट नि:शुल्क प्रदान की जाती है।
  3. इनके लिए, आम चुनाव के दौरान उन्‍हें आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारण की सुविधा प्रदान की जाती है।
  4. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए आम चुनाव के दौरान स्‍टार प्रचारकों (Star Campaigner) की यात्रा का खर्च उस उम्‍मीदवार या दल के खर्च में नहीं जोड़ा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राजनीतिक दलों का पंजीकरण
  2. मान्यता प्राप्त बनाम गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल
  3. राज्य बनाम राष्ट्रीय दल
  4. मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के लिए लाभ
  5. स्टार प्रचारक कौन होते है?
  6. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324
  7. ‘लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम’, 1951 की धारा 29A

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)


(Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)

संदर्भ:

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana PMFBY) के तहत दावों का समय से निपटारा करने के लिए देश 100 से अधिक जिलों में ड्रोन उड़ाने की अनुमति मिल गई है। कृषि विभाग के प्रस्ताव को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (Directorate General of Civil AviationDGCA) ने मंजूरी दे दी है।

यह देश में रिमोट सेंसिंग तकनीक आधारित यह पहला सबसे बड़ा प्रायोगिक अध्ययन है, जिसमें फसल की पैदावार का आकलन किया जाएगा।

PMFBY के बारे में:

  • 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत की गयी थी।
  • इस योजना में, पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) का विलय कर दिया गया।
  • इस योजना उद्देश्य किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करना और पूर्ण बीमित राशि के लिए फसल बीमा दावे का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करना है।

योजना के अंतर्गत कवरेज:

इस योजना में, सभी खाद्य और तिलहन फसलों और वार्षिक वाणिज्यिक / बागवानी फसलों को शामिल किया गया है, जिसके लिए पिछले उपज के आंकड़े उपलब्ध है और  जिनके लिए, सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (General Crop Estimation Survey- GCES) के तहत फसल कटाई प्रयोगों (Crop Cutting Experiments- CCEs) का अपेक्षित संख्या संचालन किया जा रहा है।

PMFBY से PMFBY 2.0:

पूर्णतया स्वैच्छिक: वर्ष 2020 के खरीफ सीजन से सभी किसानों हेतु नामांकन के लिए शत प्रतिशत स्वैच्छिक बनाने का निर्णय लिया गया है।

सीमित केंद्रीय सब्सिडी: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना के तहत गैर-सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये बीमा किस्त की दरों पर केंद्र सरकार की हिस्सेदारी को 30% और सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये 25% तक सीमित करने का निर्णय लिया गया है।

राज्यों के लिये अधिक स्वायत्तता: केंद्र सरकार द्वारा राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने के लिये व्यापक छूट प्रदान की गयी है और साथ ही उन्हें बुवाई, स्थानिक आपदा, फसल के दौरान मौसम प्रतिकूलता, और फसल के बाद के नुकसान आदि किसी भी अतिरिक्त जोखिम कवर/ सुविधाओं का चयन करने का विकल्प भी दिया गया है।

निर्णय में देरी होने पर दंड: संशोधित PMFBY में, एक प्रावधान शामिल किया गया है जिसमें राज्यों द्वारा खरीफ सीजन के लिए 31 मार्च से पहले और रबी सीजन के लिए 30 सितंबर से पहले अपना हिस्सा जारी नहीं करने पर, उन्हें बाद के फसल सीजनों में योजना के तहत भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आईसीई गतिविधियों में निवेश: अब इस योजना के तहत बीमा कंपनियों द्वारा एकत्र किये गए कुल प्रीमियम का 0.5% सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. PMFBY की प्रमुख विशेषताएं।
  2. लाभ
  3. पात्रता
  4. PMFBY 0

मैंस लिंक:

PMFBY 2.0 के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

‘सरकारी प्रतिभूतियाँ’ (G-Sec)


(Govt Securities)

संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लघु निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर सीधी पहुँच प्रदान की गयी है।

इसके बाद से, खुदरा निवेशक सीधे आरबीआई के साथ अपना गिल्ट अकाउंट खोल सकते हैं, और सरकारी प्रतिभूतियों में व्यापार कर सकते हैं।

वर्तमान प्रस्ताव की आवश्यकता

‘सरकारी प्रतिभूति’ (G-Sec) बाजार में मुख्यतः संस्थागत निवेशकों, जैसेकि बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों का वर्चस्व है। ये इकाइयाँ 5 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक राशि में व्यापार करती हैं।

  • इसलिए, अल्प राशि के साथ व्यापार करने के इच्छुक छोटे निवेशकों के लिए द्वितीयक बाजार में तरलता उपलब्ध नहीं पाती होती है। दूसरे शब्दों में, इनके निवेश करने का कोई आसान तरीका नहीं मिल पाता है।
  • इस कारण, वर्तमान में, सीधे ‘सरकारी प्रतिभूतियों’ में व्यापार करना, खुदरा निवेशकों के मध्य अधिक लोकप्रिय नहीं है।

‘सरकारी प्रतिभूतियाँ’ क्या होती हैं?

सरकारी प्रति‍भूति‍ (Government Security G-Sec), केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी किये गए ‘व्यापार योग्य उपकरण’ (Tradeable Instrument) होती हैं।

प्रमुख विशेषताऐं:

  • यह सरकार के ऋण दायित्वों को स्वीकार करती है।
  • ऐसी प्रतिभूतियां, अल्पकालिक (ट्रेजरी बिल – एक वर्ष से कम अवधि की मूल परिपक्वता सहित) अथवा दीर्घकालिक (सरकारी बांड या दिनांकित प्रतिभूतियां – एक वर्ष या अधिक अवधि की मूल परिपक्वता सहित) दोनों प्रकार की हो सकती हैं।
  • केंद्र सरकार, ट्रेजरी बिल और सरकारी बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियां, दोनों को जारी करती है।
  • राज्य सरकारें केवल बांड अथवा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण कहा जाता है।
  • चूंकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है, अतः इनके डिफ़ॉल्ट होने का कोई जोखिम नहीं होता है, और इसलिए, उन्हें जोखिम-मुक्त सुरक्षित उपकरण (Gilt-Edged Instruments) कहा जाता है।
  • विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को समय-समय पर निर्धारित सीमा के भीतर G-Secs बाजार में भागीदारी हेतु अनुमति दी गयी है।

 द्वितीयक बाजार में सरकारी प्रति‍भूति‍यों (G-Secs) की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है।

इनकी कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित होते हैं:

  • प्रतिभूतियों की मांग और आपूर्ति।
  • अर्थव्यवस्था के भीतर ब्याज दरों में होने वाले परिवर्तन तथा अन्य वृहत-आर्थिक कारक, जैसे तरलता और मुद्रास्फीति।
  • अन्य बाजारों, जैसे वित्त, विदेशी मुद्रा, ऋण और पूंजी बाजार में होने वाला विकास।
  • अंतर्राष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों, विशेष रूप से यूएस ट्रेजरीज़ में होने वाला विकास।
  • RBI द्वारा किये जाने वाले नीतिगत परिवर्तन, जैसे रेपो दरों में बदलाव, नकदी-आरक्षित अनुपात और खुले बाजार के परिचालन।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) क्या होती हैं?
  2. अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रतिभूतियां
  3. G-Secs जारी करने के लिए केंद्र और राज्यों की शक्तियां
  4. RBI की भूमिका।
  1. इन प्रतिभूतियों की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक

मेंस लिंक:

सरकारी प्रति‍भूति‍यां (G-Secs) क्या होती हैं? इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

डेनमार्क द्वारा उत्तरी सागर में विश्व के पहले ऊर्जा द्वीप का निर्माण


संदर्भ:

हाल ही में, डेनमार्क ने उत्तरी सागर में दुनिया का पहला ऊर्जा द्वीप बनाने संबंधी एक परियोजना के लिए मंजूरी दे दी है।

परियोजना के बारे में:

  • अपने प्रारंभिक चरण में, यह कृत्रिम द्वीप, 18 फुटबॉल मैदानों के आकार के बराबर होगा।
  • इसके लिए सैकड़ों अपतटीय पवन टर्बाइनों (offshore wind turbines) से जोड़ा जाएगा तथा यह घरेलू उपयोग के लिए उर्जा तथा नौ-परिवहन, उड्डयन, उद्योग और भारी परिवहन के लिए हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) की आपूर्ति करेगा।
  • इस द्वीप पर तीन मिलियन यूरोपीय परिवारों की विद्युत् आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त हरित ऊर्जा का उत्पादन और भंडारण किया जाएगा।

महत्व:

हाल ही में यूरोपीय संघ द्वारा अपनी विद्युत् प्रणाली को, एक दशक के भीतर, नवीकरणीय ऊर्जा में बदलने तथा वर्ष 2050 तक अपनी अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता को 25 गुना बढ़ाने संबंधी योजना की घोषणा की गयी थी। इसके बाद डेनमार्क द्वारा उपरोक्त योजना के लिए यह कदम उठाया गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

काटे जाने वाले 300 वृक्षों की ऑक्सीजन एवं अन्य उत्पादों के लिहाज से 220 करोड़ रुपये कीमत


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय द्वारा अपनी विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की न्यायिक अवेक्षा (judicial notice) की गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि, पश्चिम बंगाल में पांच रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए काटे जाने वाले 300 धरोहर वृक्षों की कीमत ऑक्सीजन एवं अन्य उत्पादों के लिहाज से 2.2 बिलियन रुपये है, अर्थात जीवित वृक्ष परियोजना से ज्यादा लाभप्रद हैं।

इस आंकड़ा किस प्रकार निर्धारित किया गया?

यह 10 अंकों का आंकड़ा, समिति द्वारा निम्नलिखित तथ्यों का अध्ययन करने के उपरान्त जारी किया गया:

  • समिति ने, इन वृक्षों द्वारा अपने 100 से अधिक वर्षों के प्राकृतिक जीवनकाल के दौरान उत्पन्न किये जाने वाले उत्पादों की गणना की।
  • इन उत्पादों की गणना में, प्राकृतिक वातावरण के लिए महत्वपूर्ण अंग होने के अलावा ऑक्सीजन, सूक्ष्म पोषक तत्व, खाद और जैव-उर्वरक आदि को शामिल किया गया था।

इस आधार पर, अगर सभी कीमतें जोड़ी जाएं और पेड़ की शेष आयु से उसमें गुना किया जाए तो वर्तमान मामले में कुल कीमत प्रति पेड़ 74,500 रुपये प्रति वर्ष होती है।

अदालत द्वारा दिए गए सुझाव:

  1. अदालत ने सुझाव दिया है, कि एक नया प्रोटोकॉल तैयार किया जाए जिसके तहत, सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं के लिए परिवहन के अन्य साधनों, जैसे कि जलमार्ग और रेलवे की व्यवहार्यता का परीक्षण करने के बाद ही मंजूरी दी जाए।
  2. यदि किसी सड़क परियोजना के अपरिहार्य होने पर, प्रत्येक पेड़ की कीमत, उस परियोजना की लागत में शामिल की जानी चाहिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

निगरानी हेतु किसी भी संस्था के लिए निर्बाध अनुमति नहीं


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया है, कि निगरानी कार्यक्रमों जैसे केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली (CMS), नेटवर्क ट्रैफिक एनालिसिस (NETRA) और नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) के तहत किसी भी संदेश या सूचना के अवरोधन या निगरानी के लिए किसी भी सरकारी एजेंसी को निर्बाध अनुमति नहीं दी गयी है।

पृष्ठभूमि:

कुछ समय पूर्व, अदालत में दायर याचिका में, भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत वैध अवरोधन और निगरानी आदेशों या वारंटों की समीक्षा हेतु एक स्थायी स्वतंत्र निरीक्षण निकाय का गठन करने की मांग की गयी थी। इसके जबाब में, केंद्र सरकार द्वारा यह हलफनामा प्रस्तुत किया गया था।

निगरानी की आवश्यकता:

इसने कहा कि “आतंकवाद, कट्टरता, सीमा पार से आतंकवाद, साइबर अपराध, संगठित अपराध, ड्रग कार्टेल से देश को गंभीर खतरे को हल्के में नहीं लिया जा सकता है और न ही अनदेखा किया जा सकता है, और इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरों से निपटने हेतु कार्रवाई-योग्य जानकारी के त्वरित एकत्रीकरण के लिए एक सशक्त और प्रभावी तंत्र अनिवार्य है।

संबंधित प्रकरण:

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा गया था। याचिका में दावा किया गया था कि निगरानी प्रणालियों के क्रियान्वयन और कार्यवाहियों से नागरिकों की निजता का अधिकार पर ’संकट’ मंडरा रहा है।

यह याचिका, एक गैर-सरकारी संस्था (NGO), सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (CPIL) द्वारा दायरा की गयी थी, जिसमे दलील दी गयी कि, केंद्रीय और राज्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां, इन निगरानी प्रणालियों के माध्यम से सभी दूरसंचारों को विस्तृत रूप से इंटरसेप्ट और मॉनिटर कर सकती है, जिससे व्यक्तियों की निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है।

याचिकाकर्ता की मांगें:

याचिकाकर्ता द्वारा, भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के सक्षम प्रावधानों के तहत वैध अवरोधन और निगरानी आदेशों या वारंटों की समीक्षा के लिए न्यायिक और संसदीय प्रतिनिधियों के एक स्थायी स्वतंत्र निरीक्षण निकाय का गठन करने की मांग की गयी थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NATGRID के बारे में।
  2. NETRA क्या है?
  3. आईटी अधिनियम, 2000 के प्रमुख प्रावधान
  4. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 का अवलोकन

मेंस लिंक:

राज्य द्वारा निगरानी व्यक्तियों के ‘निजता के मौलिक अधिकार’ का उल्लंघन है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

सरकार के ‘विरोधात्मक रवैये’ की आलोचना


सेवानिवृत्त वरिष्ठ सिविल सेवकों के एक समूह द्वारा, एक खुले पत्र में, केंद्र सरकार की आलोचना की गयी है, तथा वर्तमान में जारी किसान प्रदर्शनों के प्रति सरकार के रवैये को ‘विरोधात्मक और टकराव-वादी’ बताया गया है।

  • पत्र जारी करने वाले ‘संवैधानिक आचरण समूह’ का कहना है कि वे भारत के संविधान की निष्पक्षता, तटस्थता और प्रतिबद्धता में विश्वास करते है।
  • इस समूह ने क्षेत्रीयता, सांप्रदायिकता और अन्य आधारों पर आंदोलन का ध्रुवीकरण करने संबंधी प्रयासों के लिए सरकार की आलोचना की है। इनका कहना है, कि इस प्रकार के रवैये से इस समस्या का कभी भी समाधान नहीं हो सकता है।

पत्र में 26 जनवरी को दिल्ली में हुई घटनाओं के बारे में कई सवाल उठाए गए हैं:

  1. दिल्ली पुलिस के द्वारा पहले से निर्धारित मार्गो पर बैरिकेड्स क्यों लगाए गए, और जिससे किसानों को मार्ग परिवर्तन करने पर विवश किया गया।
  2. लाल किले पर झंडा फहराने से रोकने में पुलिस क्यों नाकाम रही और क्या अपने सुरक्षा दायित्वों में विफल रहने पर, दिल्ली पुलिस, और गृह और रक्षा मंत्रालयों के कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
  3. मीडिया ने शांतिपूर्ण परेड करने वाले अधिकांश किसानों को कवर क्यों नहीं किया।
  4. जब ‘कुछ गुंडों’ द्वारा सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारी किसानों पर हमला किया तो पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप क्यों नहीं किया।

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘परिवार पहचान पत्र’ योजना

यह हरियाणा सरकार द्वारा शुरू की गयी एक विशिष्ट पहचान पत्र योजना है।

  • इसके तहत हरियाणा आवासीय पते वाला कोई भी परिवार योजना के अंतर्गत नामांकन कर सकता है।
  • इस योजना के अंतर्गत हरियाणा में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार को एक आठ अक्षरांकीय (eight-digit alpha numeric) ‘परिवार पहचान पत्र’ (PPP) प्रदान किया जाएगा।
  • एक ‘पंजीकरण पहचान पत्र’ उन लोगों को भी प्रदान किया जाएगा, जो हरियाणा में निवास करते है, किंतु निवास हेतु आवश्यकताओं को पूरा नहीं करते हैं।
  • अब तक, सरल प्लेटफॉर्म के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही 110 से अधिक सेवाओं और योजनाओं को पीपीपी योजना से जोड़ा जा चुका है।

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