HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
गांधार शैली और मथुरा शैली के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- गांधार शैली की उत्पत्ति कुषाणों के शासनकाल के दौरान हुई थी।
- गांधार शैली में बुद्ध के जन्म, उनके त्याग और उनके उपदेश को दर्शाया गया है।
- मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
गांधार शैली की उत्पत्ति इंडो-ग्रीक शासकों के शासनकाल के दौरान हुई थी, लेकिन कला की इस शैली के वास्तविक संरक्षक शक और कुषाण, विशेष रूप से कनिष्क थे। इसमें बुद्ध के जन्म, उनके त्याग और उनके उपदेश को दर्शाया गया है।
मथुरा शैली का विकास स्वदेशी रूप से हुआ था। मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
Incorrect
उत्तर: c)
गांधार शैली की उत्पत्ति इंडो-ग्रीक शासकों के शासनकाल के दौरान हुई थी, लेकिन कला की इस शैली के वास्तविक संरक्षक शक और कुषाण, विशेष रूप से कनिष्क थे। इसमें बुद्ध के जन्म, उनके त्याग और उनके उपदेश को दर्शाया गया है।
मथुरा शैली का विकास स्वदेशी रूप से हुआ था। मथुरा शैली में बुद्ध और शिव तथा विष्णु के साथ-साथ पार्वती और लक्ष्मी की छवियों को उकेरा गया है।
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Question 2 of 5
2. Question
सातवाहनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- उन्होंने बौद्ध धर्म और ब्राह्मणवाद का संरक्षण किया।
- उन्होंने अश्वमेध और राजसूय यज्ञ किए।
- उन्होंने प्राकृत भाषा और साहित्य का संरक्षण किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: d)
सातवाहनों को पुराणों में आंध्र के रूप में भी जाना जाता है, यह दक्कन क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन भारतीय राजवंश था। सातवाहन ने पहली शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक दक्कन क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित किया था।
गौतमीपुत्र सातकर्णी और उनके उत्तराधिकारी वासिष्ठिपुत्र पुलमवी के शासन के तहत यह राजवंश अपने चरम पर पहुंच गया था।
उन्होंने भारत-गंगा के मैदान से लेकर भारत के दक्षिणी सिरे तक व्यापार और विचारों और संस्कृति के हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक सांस्कृतिक पुल का निर्माण किया। उन्होंने हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म का भी समर्थन किया और प्राकृत साहित्य का संरक्षण किया।
उन्होंने अश्वमेध और राजसूय यज्ञ किए।
Incorrect
उत्तर: d)
सातवाहनों को पुराणों में आंध्र के रूप में भी जाना जाता है, यह दक्कन क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन भारतीय राजवंश था। सातवाहन ने पहली शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक दक्कन क्षेत्र पर प्रभुत्व स्थापित किया था।
गौतमीपुत्र सातकर्णी और उनके उत्तराधिकारी वासिष्ठिपुत्र पुलमवी के शासन के तहत यह राजवंश अपने चरम पर पहुंच गया था।
उन्होंने भारत-गंगा के मैदान से लेकर भारत के दक्षिणी सिरे तक व्यापार और विचारों और संस्कृति के हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक सांस्कृतिक पुल का निर्माण किया। उन्होंने हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म का भी समर्थन किया और प्राकृत साहित्य का संरक्षण किया।
उन्होंने अश्वमेध और राजसूय यज्ञ किए।
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Question 3 of 5
3. Question
गुप्त कला और वास्तुकला के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- इस काल के दौरान नागरा और द्रविड़ शैली दोनों शैलियाँ विकसित हुईं।
- इस पर गांधार शैली का कोई प्रभाव नहीं था।
- गुप्त काल में धातुकर्म व्यवसाय ने अद्भुत प्रगति की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Correct
उत्तर: d)
इस अवधि के दौरान कला की नागरा और द्रविड़ शैली दोनों विकसित हुईं। लेकिन इस अवधि की अधिकांश वास्तुकला हूणों की तरह विदेशी आक्रमणों के कारण नष्ट हो गयी थी।
झांसी के पास देवगढ़ मंदिर और इलाहाबाद के पास गढ़वा मंदिर में मूर्तियां गुप्त कला का महत्वपूर्ण नमूना हैं। इस पर गांधार शैली का कोई प्रभाव नहीं था। लेकिन मथुरा में खड़ी बुद्ध की सुंदर मूर्ति से ग्रीक शैली का पता चलता है।
गुप्त काल के दौरान धातुकर्म व्यवसाय ने भी शानदार प्रगति की थी। शिल्पकार धातु की मूर्तियों और स्तंभों की ढलाई की कला में कुशल थे। मूल रूप से सुल्तानगंज में बुद्ध की विशालकाय तांबे की मूर्ति, जो अब बर्मिंघम संग्रहालय में रखी गई थी, लगभग साढ़े सात फीट की ऊंचाई और लगभग एक टन वजन की थी। गुप्त काल का दिल्ली लौह स्तंभ शताब्दियों से धूप और वर्ष के संपर्क में रहने के बावजूद अभी भी जंग से मुक्त बना हुआ है।
Incorrect
उत्तर: d)
इस अवधि के दौरान कला की नागरा और द्रविड़ शैली दोनों विकसित हुईं। लेकिन इस अवधि की अधिकांश वास्तुकला हूणों की तरह विदेशी आक्रमणों के कारण नष्ट हो गयी थी।
झांसी के पास देवगढ़ मंदिर और इलाहाबाद के पास गढ़वा मंदिर में मूर्तियां गुप्त कला का महत्वपूर्ण नमूना हैं। इस पर गांधार शैली का कोई प्रभाव नहीं था। लेकिन मथुरा में खड़ी बुद्ध की सुंदर मूर्ति से ग्रीक शैली का पता चलता है।
गुप्त काल के दौरान धातुकर्म व्यवसाय ने भी शानदार प्रगति की थी। शिल्पकार धातु की मूर्तियों और स्तंभों की ढलाई की कला में कुशल थे। मूल रूप से सुल्तानगंज में बुद्ध की विशालकाय तांबे की मूर्ति, जो अब बर्मिंघम संग्रहालय में रखी गई थी, लगभग साढ़े सात फीट की ऊंचाई और लगभग एक टन वजन की थी। गुप्त काल का दिल्ली लौह स्तंभ शताब्दियों से धूप और वर्ष के संपर्क में रहने के बावजूद अभी भी जंग से मुक्त बना हुआ है।
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Question 4 of 5
4. Question
चोल कालीन चित्रों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित में से कौन-सी हैं?
- इन्हें अक्सर मंदिर के पटल पर चित्रित किया जाता था।
- ये भगवान शिव से संबंधित कथाओं और पहलूओं को प्रदर्शित करते हैं।
- इनमें मनुष्यों और पौधों का चित्रण नहीं किया गया है।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: a)
चोल चित्रकला में मनुष्यों और पौधों का चित्रण किया गया है।
Incorrect
उत्तर: a)
चोल चित्रकला में मनुष्यों और पौधों का चित्रण किया गया है।
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Question 5 of 5
5. Question
संगम युग के राजवंशों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1) संगम काल के दौरान शासन का वंशानुगत राजशाही स्वरूप प्रचलित था।
2) प्रत्येक संगम राजवंशों का स्वयं का शाही राजचिह्न था – जैसे कि पाण्ड्यों का राजचिह्न मत्स्य (मछली)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
संगम काल के दौरान शासन का वंशानुगत राजशाही स्वरूप प्रचलित था। राजा द्वारा अपने मंत्री, दरबारी-कवि और शाही दरबार या अवी की सलाह भी ली जाती थी।
प्रत्येक संगम राजवंशों के पास अपना शाही राजचिह्न था – जैसे कि पाण्ड्यों का राजचिह्न मत्स्य (मछली), चोलो का राजचिह्न बाघ और चेरों का राजचिह्न धनुष।
Incorrect
उत्तर: c)
संगम काल के दौरान शासन का वंशानुगत राजशाही स्वरूप प्रचलित था। राजा द्वारा अपने मंत्री, दरबारी-कवि और शाही दरबार या अवी की सलाह भी ली जाती थी।
प्रत्येक संगम राजवंशों के पास अपना शाही राजचिह्न था – जैसे कि पाण्ड्यों का राजचिह्न मत्स्य (मछली), चोलो का राजचिह्न बाघ और चेरों का राजचिह्न धनुष।









