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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 4 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. ‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ योजना (ODOP)

2. अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)

3. म्यांमार-बनाम-बर्मा विवाद

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कर्नाटक के मांड्या जिले में लिथियम निक्षेप

2. राष्ट्रीय रेल योजना (NRP)

3. वैकल्पिक ईंधन के रूप में इथेनॉल

4. दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयताएँ विनियम (TCCCPR)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कृतज्ञ (KRITAGYA)

2. ओरोबेंकी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ योजना (ODOP)


(One District One Product)

संदर्भ:

‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ / ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बागवानी वस्तुओं के उत्पादन में सहायता प्रदान करने तथा स्कूली बच्चों को बेहतर पोषण प्रदान करने के लिए, आंगनवाड़ी योजनाओं और प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत गर्म-पकाए जाने वाले भोजन में ‘सुनहरी कंद’ को शामिल किया जा सकता है, यह नारंगी-मांसल मीठे आलू की भांति एक स्वादिष्ट एवं पोषक कंद होता है।

प्रमुख बिंदु:

  • ODOP कार्यक्रम के प्रारंभिक चरण के तहत, 27 राज्यों के 103 जिलों से 106 उत्पादों को चिह्नित किया गया है।
  • पश्चिम बंगाल को छोड़कर भारत के सभी राज्यों और जिलों में राज्य निर्यात संवर्धन समिति (State Export Promotion Committee- SPEC) और जिला निर्यात संवर्धन समिति (District Export Promotion Committee- DEPC) का गठन किया गया है।

ODOP योजना के बारे में:

‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना की शुरुआत सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गयी थी।

  • इस योजना का उद्देश्य राज्य में, संबंधित जिलों के पर्याय, पारंपरिक उद्योगों को एक प्रोत्साहन प्रदान करना है।
  • ODOP का लक्ष्य, उत्पादन, उत्पादकता एवं आय, स्थानीय शिल्प का संरक्षण एवं विकास, कला को प्रोत्साहन, उत्पाद की गुणवत्ता और कौशल विकास में सुधार में वृद्धि करना है।

पृष्ठभूमि:

‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना, मूल रूप से एक जापानी व्यवसाय विकास अवधारणा है, इसके लिए वर्ष 1979 में काफी प्रसिद्धि हासिल हुई थी।

इसका उद्देश्य, किसी एक विशिष्ट क्षेत्र में स्थानीय आबादी के जीवन स्तर में सुधार करने हेतु उस क्षेत्र के प्रमुख एवं प्रतिस्पर्धी उत्पाद को बढ़ावा देना है। समय के साथ, इस अवधारणा को अन्य एशियाई देशों में भी लागू किया गया है।

उत्तर प्रदेश की ‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ योजना के मुख्य उद्देश्य:

  1. स्थानीय शिल्प / कौशल और कला के संवर्धन का संरक्षण और विकास;
  2. आय और स्थानीय रोजगार में वृद्धि (परिणामस्वरूप रोजगार के लिए प्रवासन में कमी);
  3. उत्पाद की गुणवत्ता और कौशल विकास में सुधार;
  4. उत्पादों को कलात्मक तरीके से रूप-परिवर्तन (पैकेजिंग, ब्रांडिंग के माध्यम से);
  5. उत्पादन को पर्यटन (लाइव डेमो और बिक्री आउटलेट – उपहार और स्मारिका) से जोड़ना;
  6. आर्थिक विषमता और क्षेत्रीय असंतुलन के मुद्दों को हल करना।
  7. राज्य स्तर पर सफल कार्यान्वयन के बाद ODOP की अवधारणा को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ODOP योजना के बारे में।
  2. सबसे पहले किसने शुरू किया?
  3. ‘सुनहरी कंद’ क्या है?
  4. विभिन्न राज्यों के महत्वपूर्ण जीआई टैग उत्पाद।

मेंस लिंक:

‘एक ज़िला-एक उत्पाद’ योजना के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY)


(Atal Beemit Vyakti Kalyan Yojana)

संदर्भ:

हाल ही में, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) द्वारा निर्णय लिया गया है, कि किसी कर्मचारी को नौकरी से बाहर करने से पहले के कुछ महीनों में नियोक्ता द्वारा ‘शून्य’ योगदान दर्शाया जाता है, तो उस कर्माचारी को ‘शून्य’ योगदान की अवधि के लिए भी अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) के तहत राहत प्रदान की जाएगी।

संबंधित प्रकरण:

कुछ समय पूर्व, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के संज्ञान में यह बिंदु लाया गया था, कि कुछ मामलों में नियोक्ताओं द्वारा अपने कर्मचारियों को सेवा से असल में हटाने के कुछ महीने पहले इन्हें सूची से हटा दिया जाता है।

  • इस अवधि के दौरान, नियोक्ताओं द्वारा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) योगदान भी दाखिल नहीं किया जाता है।
  • अटल बीमित व्याक्ति कल्याण योजना के अंतर्गत, केवल बीमित व्यक्तियों की बेरोजगारी के मामले में राहत उपलब्ध होती है। उपरोक्त तरीके से कर्मचारी हालांकि सेवा से बाहर हो जाते हैं, किंतु योजना के तहत राहत के पात्र नहीं हो पाते।

ABVKY योजना के बारे में:

  • इस योजना को कर्मचारी कल्याण राज्य बीमा (Employee’s State Insurance ESI) निगम द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • इसके तहत बीमित व्यक्तियों के लिए बेरोजगार होने पर नकद मुआवजा प्रदान किया जाता है।
  • यह योजना 2018 में शुरू की गई थी।

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वर्ष 2020 में योजना के अंतर्गत किये गए परिवर्तन

राहत का लाभ उठाने के लिए पात्रता मानदंड में निम्नलिखित छूटें प्रदान की गयी है:

  • अधिकतम 90 दिनों की बेरोजगारी होने पर राहत भुगतान को औसत मजदूरी देय के 25 प्रतिशत के स्थान पर अब 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • राहत लाभ, 90 दिनों की बेरोजगारी के बाद देय होने के स्थान पर अब 30 दिनों की बेरोजगारी के बाद भुगतान हेतु देय हो जाएगा।
  • बीमित व्यक्ति सीधे ESIC शाखा कार्यालय में अपना दावा जमा करा सकता है।
  • बीमित व्यक्ति को उसकी बेरोजगारी से पूर्व कम से कम दो वर्ष की अवधि तक बीमा योग्य रोजगार में होना चाहिए तथा बेरोजगारी से ठीक पहले कुल योगदान अवधि में कम से कम 78 दिनों तक योगदान होना आवश्यक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ABVKY योजना के बारे में
  2. उद्देश्य
  3. पात्रता
  4. लाभ
  5. कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के बारे में

मेंस लिंक:

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (ABVKY) के उद्देश्यों और महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

म्यांमार-बनाम-बर्मा विवाद


संदर्भ:

  • हाल ही में, म्यांमार की सेना द्वारा तख्तापलट करके सत्ता हथिया ली गई है- ब्रिटिश शासन से वर्ष 1948 में आजाद होने बाद, म्यामांर के इतिहास में ऐसा तीसरी बार हुआ है।
  • वर्ष 1988 में हुए पिछले सैन्य तख्तापलट के बाद, सेना ने देश का नाम बदलने संबंधी एक निर्णय लिया, जोकि दशकों बीत जाने के बाद भी विवादास्पद बना हुआ है।

‘बर्मा’ किस प्रकार ‘म्यांमार’ में परिवर्तित हुआ?

19 वीं सदी के दौरान ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने, जब वर्तमान म्यांमार पर कब्ज़ा किया था, तो इसे वहां की एक प्रमुख स्थानीय जातीय समूह, बर्मन (बामर- Bamar) के नाम पर ‘बर्मा’ (Burma) नाम दिया और इस पर औपनिवेशिक भारत के एक प्रांत के रूप में शासन किया।

  • यह व्यवस्था वर्ष 1937 तक जारी रही। इसी वर्ष बर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग करके एक अलग उपनिवेश बना का दर्जा दिया गया।
  • वर्ष 1948 में देश को आजादी हासिल के बाद भी पुराने नाम को बरकरार रखा गया, तथा यह यूनियन ऑफ़ बर्मा’ बन गया।
  • वर्ष 1962 में, सेना ने पहली बार तख्तापलट कर सत्ता ग्रहण की और वर्ष 1974 में इसके आधिकारिक नाम को बदलकर ‘सोशलिस्ट रिपब्लिक ऑफ द यूनियन ऑफ़ बर्मा’ कर दिया।
  • फिर वर्ष 1988 में, एक लोकप्रिय विद्रोह को दबाने के बाद सैन्य बलों ने देश में दूसरी बार सत्ता हासिल की, और इसके आधिकारिक नाम को यूनियन ऑफ़ बर्मा’ में परिवर्तित कर दिया।
  • इसके एक साल बाद, जुंटा (junta) ने एक कानून बना कर बर्मा को म्यांमार में परिवर्तित कर दिया, और देश का नाम यूनियन ऑफ़ म्यांमार’ रख दिया गया। ‘

इस नाम परिवर्तन के पीछे तर्क एवं इसके निहितार्थ:

सेना ने, देश का नाम परिवर्तन करने का उद्देश्य, औपनिवेशिक अतीत से विरासत में मिले नाम का त्याग करना, तथा एक नया नाम ग्रहण करना बताया, जोकि आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त 135 जातीय समूहों की एकजुटता का प्रतीक हो, न कि केवल बर्मन जातीय समूह का ।

हालांकि, आलोचकों का कहना है, कि बर्मी भाषा में, ‘म्यांमार’ और ‘बर्मा’ का एक ही अर्थ होता है। केवल ‘बर्मा’ को आम बोलचाल में ‘म्यांमार’ कहा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत- म्यांमार सीमा।
  2. व्यापार
  3. संयुक्त ऑपरेशन और सैन्य अभ्यास
  4. कलादान मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

कर्नाटक के मांड्या जिले में लिथियम निक्षेप


(Lithium deposits in Mandya district of Karnataka)

संदर्भ:

हाल ही में, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (Atomic Minerals Directorate for Exploration and Research- AMD) द्वारा पृथ्वी की सतह एवं इसकी उप-सतह पर, किए गए, प्रारंभिक सर्वेक्षणों से मांड्या ज़िले, कर्नाटक के मार्लगल्ला-अल्लापटना (Marlagalla – Allapatna) क्षेत्र की पेग्माटाइट चट्टानों में 1,600 टन लिथियम संसाधनों की मौजूदगी का पता चला है।

लिथियम के बारे में:

  • यह एक नरम तथा चांदी के समान सफेद धातु होती है तथा मानक परिस्थितियों में, यह सबसे हल्की धातु और सबसे हल्का ठोस तत्व है।
  • यह अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और ज्वलनशील होती है अत: इसे खनिज तेल में संगृहित किया जाना चाहिये।
  • यह एक क्षारीय एवं दुर्लभ धातु है।

प्रमुख विशेषताएं एवं गुण:

  • इसमें किसी भी ठोस तत्व की तुलना में उच्चतम विशिष्ट ऊष्मा क्षमता होती है।
  • लिथियम का सिंगल बैलेंस इलेक्ट्रॉन इसे विद्युत् का अच्छा संवाहक बनाता है।
  • यह ज्वलनशील होता है तथा हवा एवं पानी के संपर्क में आने पर विस्फोटित भी हो सकता है।

उपयोग:

  1. लिथियम, नई प्रौद्योगिकियों के लिए एक महत्वपूर्ण तत्व है और इसका उपयोग सिरेमिक, शीशा, दूरसंचार और अंतरिक्ष संबंधी उद्योगों में किया जाता है।
  2. लिथियम का सर्वाधिक उपयोग मुख्य रूप से, लिथियम आयन बैटरी निर्माण में, लूब्रिकैटिंग ग्रीस, एल्युमिनियम के साथ विमान के पुर्जे बनाने में, रॉकेट प्रणोदकों के लिए उच्च ऊर्जा योजक, मोबाइल फोन के लिए ऑप्टिकल मॉड्यूलेटर तथा थर्मोन्यूक्लियर अभिक्रियाओं में किया जाता है।

नियत पदार्थ (Prescribed substance):

थर्मोन्यूक्लियर अनुप्रयोगों के कारण, लिथियम को परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत “नियत पदार्थ” के रूप में घोषित किया गया है। अधिनियम के अंतर्गत, देश के विभिन्न भूवैज्ञानिक क्षेत्रों में लिथियम की खोज के लिए AMD को अनुमति प्रदान की गई है।

परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 के तहत, “नियत पदार्थ” का तात्पर्य, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित उन पदार्थों से होता है, जो परमाणु ऊर्जा के उत्पादन या उसके उपयोग अथवा इससे संबंधित पदार्थो जैसे कि, यूरेनियम, प्लूटोनियम, थोरियम, बेरिलियम, ड्यूटेरियम या उनके यौगिकों के अनुसंधान में उपयोग किये जा सकते है।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय रेल योजना (NRP)


(National Rail Plan)

संदर्भ:

हाल ही में, सरकार द्वारा राष्ट्रीय रेल योजना (National Rail PlanNRP) के लिए अंतिम मसौदा रिपोर्ट जारी की गयी है।

इसका उद्देश्य रेलवे नेटवर्क का विस्तार करने हेतु एक दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य योजना का निर्माण करना है।

‘राष्ट्रीय रेल योजना’ के उद्देश्य:

  1. इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक मांग से अधिक क्षमता तथा 2050 तक मांग में होने वाली वृद्धि संबंधी जरूरतों को पूरा करने हेतु क्षमता निर्माण करना है।
  2. कार्बन उत्सर्जन को कम करने और इस प्रक्रिया को जारी रखते हुए राष्ट्रीय प्रतिबद्धता के एक अंग के रूप में 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की औसत हिस्सेदारी वर्तमान के 27% से बढ़ाकर 45% करना।
  3. माल ढुलाई और यात्री क्षेत्रों में वास्तविक मांग का आकलन करने हेतु, पूरे देश में सर्वेक्षण टीमों द्वारा पूरे साल के दौरान सौ से अधिक प्रतिनिधि स्थानों पर सर्वेक्षण किया गया।
  4. माल ढुलाई और यात्री, दोनों क्षेत्रों में 2030 तक वार्षिक आधार पर और वर्ष 2050 तक दशकीय आधार पर यातायात में वृद्धि का पूर्वानुमान करना।
  5. 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी को 45% तक बढ़ाने के लिए परिचालन क्षमता और वाणिज्यिक नीति पहलों पर आधारित रणनीति तैयार करना।
  6. मालगाड़ियों की औसत गति को वर्तमान के 22 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 50 किलोमीटर प्रतिघंटा करके माल ढुलाई के समय में कमी लाना।
  7. रेल परिवहन की कुल लागत को लगभग 30% कम करना और उससे अर्जित लाभों को ग्राहकों को हस्तांतरित करना।

विज़न 2024:

राष्ट्रीय रेल योजना के एक अंग के रूप में, वर्ष 2024 तक निम्नलिखित कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन के लिए विज़न 2024 शुरू किया गया है।

  1. 100% विद्युतीकरण,
  2. भीड़भाड़ वाले मार्गों की मल्टी ट्रैकिंग,
  3. दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई मार्गों पर गति को 160 किलोमीटर प्रतिघंटा तक बढ़ाना,
  4. अन्य सभी स्वर्णिम चतुर्भुज-स्वर्णिम विकर्ण (GQ / GD) मार्गों पर गति का 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक उन्नयन,
  5. सभी जीक्यू / जीडी मार्गों पर सभी स्तर के क्रॉसिंग को समाप्त करना आदि।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

वैकल्पिक ईंधन के रूप में इथेनॉल


(Ethanol as an alternate fuel)

संदर्भ:

सरकार द्वारा इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol- EBP) कार्यक्रम के तहत ‘राष्ट्रीय जैव ईधन नीति’ (National Policy on BiofuelsNBP) के अनुरूप पेट्रोल जैसे मुख्य मोटर वाहन ईंधनों के साथ इथेनॉल के मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इस नीति में वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल के मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस संबंध में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास:

  1. सरकार ने गन्ना और खाद्यान्न आधारित कच्चे माल से इथेनॉल के उत्पादन की अनुमति दे दी है।
  2. सरकार द्वारा गन्ना आधारित कच्चे माल से निर्मित इथेनॉल के लिए ‘मिल से बाहर’ की कीमत निर्धारित कर दी गयी है।
  3. विभिन्न फीडस्टॉक से उत्पादित इथेनॉल के लिए पारिश्रमिक मूल्य तय किए गए हैं।
  4. शीरा और अनाज आधारित नई भट्टियों / आसवनी (Distilleries) की स्थापना तथा मौजूदा भट्टियों के विस्तार के लिए ब्याज में छूट संबंधी योजनाओं को अधिसूचित किया गया है।

इथेनॉल (Ethanol)

  • इथेनॉल का उत्पादन स्टार्च की उच्च मात्रा वाली फसलों, जैसे कि गन्ना, मक्का, गेहूँ आदि से किया जा सकता है।
  • भारत में, इथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः गन्ना के शीरे से किण्वन प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।
  • इथेनॉल को विभिन्न सम्मिश्रणों को बनाने के लिए गैसोलीन के साथ मिश्रित किया जा सकता है।
  • चूंकि इथेनॉल के अणुओं में ऑक्सीजन पाया जाता है, जिसकी वजह से इंजन, ईंधन को पूर्णतयः दहन करने में सक्षम होता है, परिणामस्वरूप उत्सर्जन और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है।
  • इथेनॉल का उत्पादन सूर्य की उर्जा प्राप्त करने वाले पादपों से किया जाता है, इसलिए इथेनॉल को नवीकरणीय ईंधन भी माना जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इथेनॉल क्या है? इसका उत्पादन किस प्रकार किया जाता है?
  2. इथेनॉल और शीरे के बीच अंतर?
  3. ’इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम’ क्या है?
  4. ‘इथेनॉल सम्मिश्रण’ के लाभ?

मेंस लिंक:

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयताएँ विनियम (TCCCPR)


(Telecom Commercial Communications Customer Preferences Regulations)

संदर्भ:

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा, हाल ही में, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (Telecom Regulatory Authority of India TRAI) को अवांछनीय वाणिज्यिक संचार (unsolicited commercial communications– UCC) को रोकने के लिए वर्ष 2018 में जारी किए गए नियमन का ‘पूर्ण रूप से और कड़ाई से’ पालन सुनिश्चित कराने हेतु निर्देश दिया गया है।

अदालत ने दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (telecom service providers- TSPs) को भी ट्राई द्वारा 2018 में जारी किए गए दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता विनियमन (Telecom Commercial Communications Customer Preferences Regulations TCCCPR) का कड़ाई से पालन करना सुनिश्चित करने हेतु निर्देश जारी किए हैं।

संबंधित प्रकरण:

डिजिटल भुगतान सेवा पेटीएम को चलाने वाली, वन97 कम्यूनिकेशन लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत द्वारा यह निर्देश जारी किए गए हैं। वन97 कम्यूनिकेशन ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि, दूरसंचार ऑपरेटर विभिन्न मोबाइल नेटवर्क पर ‘फिशिंग’ गतिविधियों को नहीं रोक रहे हैं और इस कारण उसके लाखों ग्राहकों को मोबाइल नेटवर्क पर धोखा दिया गया है, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा को हानि पहुंची है।

दूरसंचार वाणिज्यिक संचार ग्राहक वरीयता नियमन (TCCCPR), 2018 के बारे में:

  • विनियमन के अनुसार, कंपनियों को वाणिज्यिक एसएमएस और कॉल करने के लिए खुद को पंजीकृत कराना होगा। इससे नियामक के लिए धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों को विनियमित करने में मदद मिलेगी।
  • टेलीकॉम कंपनियों के लिए अपने ग्राहक डेटा तक पहुंच प्रदान करने से पहले, उनके साथ पंजीकरण कराने वाली कंपनियों (पंजीकृत टेलीमार्केटर अथवा RTMs) को सत्यापित करना आवश्यक है।
  • विनियमन में, बाजार में नवाचार की अनुमति देते समय नियामक अनुपालनों को सुनिश्चित करने हेतु पंजीकृत तकनीक (RegTech) के रूप में डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी (या ब्लॉकचैन) को अपनाने का सुझाव दिया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. TRAI के बारे में।
  2. TCCCPR 2018 का अवलोकन।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कृतज्ञ (KRITAGYA)

  • यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित एक हैकथॉन है।
  • इसका उद्देश्य देश में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देना है।
  • यह कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में अपने नवीन दृष्टिकोणों और प्रौद्योगिकियों के प्रदर्शन के लिए संकायों, नवप्रवर्तनकर्ताओं तथा छात्रों के लिए एक अवसर भी प्रदान करता है।
  • KRI-TA-GYA का अर्थ, कृषि के लिए KRI (कृषि), तकनीक के लिए TA (प्रौद्योगिकी) और ज्ञान के लिए GYA(ज्ञान) है।

ओरोबेंकी

(Orobanche)

  • यह सरसों के पौधे में छुपी हुई एक परजीवी खरपतवार है, और यह पैदावार में 50% तक के नुकसान का कारण होती है।
  • इसे ब्रूमरैप्स (broomrapes) भी कहा जाता है, ये सरसों के अलावा टमाटर व जीरे की फसल को भी चौपट कर देती है। तथा इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण खाद्य फसलों, जैसे फलियां और सब्जियों पर हमला करती हैं, और कई देशों में आजीविका के लिए खतरा उत्पन्न कर देती है।
  • अब तक इस पर पूर्ण नियंत्रण पाने का कोई उपाय विकसित नहीं किया गया है।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, सरसों में ओरोबेंकी को नियंत्रित करने के लिए ‘तकनीकी-प्रबंधन विकल्पों पर कार्यशाला’ आयोजित की गयी।


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