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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 3 February 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. लिंगराज मंदिर

2. ‘चौरी चौरा’ शताब्दी समारोह

 

सामान्य अध्ययन- III

1. गोबरधन योजना

2. विश्व आर्द्रभूमि दिवस

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हिंद महासागर क्षेत्र के रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

लिंगराज मंदिर


संदर्भ:

हाल ही में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of IndiaASI) ने बारहवीं सदी के लिंगराज मंदिर के आसपास भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण (BDA) द्वारा की गई तोड़फोड़ की जांच कराए जाने की मांग की है।

संबंधित प्रकरण:

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अनुसार, वह लिंगराज मंदिर का संरक्षक है और यह मंदिर प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains ActAMASR Act) के तहत संरक्षित है।

  • मंदिर के आस-पास तोड़-फोड़ करने से पहले स्थानीय नगरपालिका के अधिकारियों द्वारा अनुमति नहीं ली गयी।
  • AMASR अधिनियम के अनुसार, स्मारक के चारो ओर 100 मीटर के क्षेत्र, घोषित निषिद्ध क्षेत्र होता है और इसके आगे 200 मीटर की परिधि, किसी निर्माण, पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए विनियमित क्षेत्र होती है। इस परिधि में किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और एएसआई से अनुमति लेनी आवश्यक होती है।

लिंगराज मंदिर के बारे में

  • लिंगराज मंदिर, भगवान शिव को समर्पित है तथा ओडिशा के सबसे पुराने और सबसे बड़े मंदिरों में से एक है।
  • इसका निर्माण सोम वंशी राजा ययाति केसरी द्वारा कराया गया था।
  • यह लाल पत्थर से निर्मित है तथा वास्तुकला की कलिंग शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • इस मंदिर के उत्तर में बिन्दुसागर झील स्थित है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का प्रारम्भिक निर्माण सोमवंशी राजाओं के द्वारा किया गया था जिसे बाद में गंग वंश के शासकों द्वारा अंतिम रूप दिया गया।
  • इस मंदिर में विष्णु की प्रतिमाएं भी हैं, जिनकी स्थापना संभवत: 12 वीं शताब्दी में पुरी में जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करने वाले गंग शासकों द्वारा की गयी थी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. लिंगराज मंदिर का निर्माण किसने कराया था?
  2. वास्तुकला की कलिंग शैली क्या है?
  3. देउला शैली क्या है?
  4. नागरा और द्रविड़ शैलियों के बीच अंतर।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान।

‘चौरी चौरा’ शताब्दी समारोह


(‘Chauri Chaura’ Centenary Celebration)

संदर्भ:

4 फरवरी 2021 को ‘चौरी चौरा’ कांड के 100 साल पूरे हो रहे हैं। इस घटना के बाद महात्मा गांधी ने ‘असहयोग आंदोलन’ को समाप्त किये जाने की घोषणा की थी।

‘चौरी चौरा’ कांड क्या है?

  • यह घटना ब्रिटिश भारत के अंतर्गत संयुक्त प्रांत (आधुनिक उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में घटित हुई थी।
  • इस घटना के दौरान, असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया, जिस पर पुलिस ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
  • इसकी जवाबी कार्रवाई में, प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन पर हमला किया और उसमे आग लगा दी, जिसमें थाने में उपस्थित सभी कर्मियों की मौत हो गयी।
  • इसकी प्रतिक्रिया में, हिंसा के सख्त खिलाफ महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को असहयोग आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर स्थगित कर दिया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘असहयोग आंदोलन’ के बारे में
  2. कारण और परिणाम
  3. रौलट एक्ट क्या है?
  4. चौरी चौरा कांड

मेंस लिंक:

चौरी चौरा की घटना के परिणामों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

गोबरधन योजना


(Gobardhan scheme)

संदर्भ:

हाल ही में, जल शक्ति मंत्रालय द्वारा केंद्र सरकार की ‘गोबरधन’ योजना हेतु एक गोबरधन एकीकृत पोर्टल लॉन्च किया गया है।

सरकार के अनुसार, जल शक्ति मंत्रालय की गोबरधन योजना के तहत किसान 5 साल में 1 लाख करोड़ रुपये तक अर्जित कर सकते हैं।

योजना के बारे में:

गोबर-धन (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan – GOBAR-DHAN) योजना को जल शक्ति मंत्रालय के अधीन पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा कार्यान्वयित किया जा रहा है।

  • गोबर-धन (गैल्वनाइज़िंग ऑर्गेनिक बायो-एग्रो रिसोर्सेज़-धन) योजना की शुरुआत वर्ष 2018 में की गयी थी।
  • इस योजना का उद्देश्य जैव-अपघटित कचरे को संपीड़ित बायोगैस (compressed biogasCBG) में परिवर्तित करके किसानों की आय में वृद्धि करना है।
  • इस पहल का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक- संपीड़ित बायोगैस संयंत्रों की स्थापना करने हेतु उद्यमियों को आकर्षित करना है।

योजना के लाभ:

  • भारत में मवेशियों की संख्या लगभग 300 मिलियन है, जोकि विश्व में सर्वाधिक है। इन पशुओं से प्रतिदिन लगभग 30 लाख टन गोबर प्राप्त होता है।
  • इस योजना के तहत, किसानों के लिए गोबर तथा अन्य जैव-अपशिष्टों को मात्र कचरे के रूप में न लेकर, बल्कि आय के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने को प्रोत्साहित किया जाता है।
  • इससे ग्रामीण आबादी को कई लाभ प्राप्त होंगे। इससे गाँव के स्वच्छ और साफ-सुथरा रखना आसान होगा, पशुधन के स्वास्थ्य में सुधार होगा और खेतों की पैदावार में वृद्धि होगी।
  • खाना पकाने और रोशनी के लिए उपयोग की जाने वाली ऊर्जा में आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी।
  • इस योजना में, तेल कंपनियों के लिए बाजार में स्थाई ईंधन आपूर्ति और उद्यमियों के लिए सरकारी योजनाओं तथा बैंकों के माध्यम से सुलभ ऋण प्रदान किया जाता है।

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 प्रीलिम्स लिंक:

  1. गोबरधन योजना के बारे में
  2. प्रमुख विशेषताएं
  3. ‘संपीडित बायोगैस’ क्या होती है?
  4. ‘स्वच्छ भारत मिशन’ क्या है?

मेंस लिंक:

गोबरधन योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस


(World Wetlands Day)

संदर्भ:

प्रतिवर्ष 2 फरवरी को विश्व आर्द्रभूमि दिवस (World Wetlands Day) मनाया जाता है। वर्ष 2021 के लिए, 2 फरवरी, 1971 को ईरान के रामसर शहर में आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय (Ramsar Convention on Wetlands) / रामसर समझौते पर हस्ताक्षर की 50 वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है।

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2021 थीम: आर्द्रभूमि जल’ (Wetland Water)।

संरक्षण: आर्द्रभूमियों को वर्तमान में विभिन्न कार्यक्रमों के तहत संरक्षित किया जा रहा हैं, जिनमें ‘आर्द्रभूमियों पर रामसर अभिसमय’ तथा यूनेस्को का ‘मैन और बायोस्फीयर’ प्रोग्राम आदि प्रमुख कार्यक्रम हैं।

आर्द्रभूमियां’ क्या होती हैं?

जिन स्थानों पर जलीय निकाय, स्थल से मिलते है, हम उन स्थानों पर आर्द्रभूमियां देख सकते हैं।

आर्द्र्भूमियों में, मैंग्रोव और कच्छ भूमि, पीटलैंड, नदियाँ, झीलें और अन्य जलीय निकाय, डेल्टा, बाढ़ के मैदान और वन क्षेत्रों में दलदली भूमि, धान के खेत और प्रवाल भित्तियां आदि शामिल होते हैं।

ग्रह के स्वास्थ्य हेतु आर्द्रभूमियों का महत्व:

हमारे ग्रह पर लोगों की सेहत, आर्द्रभूमियों के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।

  • विश्व की 40% प्रजातियाँ आर्द्रभूमियों में निवास करती हैं अथवा इनमे प्रजनन करती हैं।
  • आर्द्रभूमियां ‘जीवन की नर्सरी’ होती हैं – लगभग 40% जीव आर्द्रभूमियों में प्रजनन करते हैं।
  • आर्द्रभूमियां ‘पृथ्वी के फेफड़े’ होती हैं, और यह वातावरण से प्रदूषकों को साफ करते हैं।
  • आर्द्रभूमियां ‘जलवायु परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण’ होती हैं- ये 30% भूमि आधारित कार्बन का भंडारण करती हैं।
  • आर्द्रभूमियां ‘आपदा जोखिम को कम करती हैं’- ये तूफानों के वेग को अवरुद्ध करती हैं।

भारत में आर्द्रभूमियां:

भारत की आर्द्रभूमियां जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। दिसंबर 2020 तक, भारत में 42 स्थान अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों (रामसर साइट्स) के रूप में नामित किए जा चुके हैं।

रामसर अभिसमय’ के बारे में:

‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) आर्द्रभूमियों के संरक्षण को प्रोत्साहित करने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है।

  • इस अभिसमय पर 2 फरवरी 1971 को कैस्पियन सागर के तट पर स्थति ईरान के शहर रामसर में हस्ताक्षर किए गए थे, इसलिए इसे ‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) कहा जाता है।
  • आधिकारिक तौर पर इसे, ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्र्भूमियों, विशेषकर जल-पक्षी वास-स्थल पर अभिसमय’ (Convention on Wetlands of International Importance especially as Waterfowl Habitat) कहा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रामसर अभिसमय’ के बारे में।
  2. मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड के बारे में।
  3. भारत में रामसर अभिसमय’ के अंतर्गत आर्द्र्भूमियां।
  4. इस क्षेत्र में पायी जाने वाली महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियाँ।

स्रोत: यूएन

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हिंद महासागर क्षेत्र के रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन

बेंगलुरु में आयोजित होने वाले ‘एयरो इंडिया’ प्रदर्शन के दौरान, भारत द्वारा हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region- IOR) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन की मेज़बानी की जाएगी।

  • इस सम्मलेन का आयोजन, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती चीनी सैन्य प्रभुत्व में वृद्धि की पृष्ठभूमि में किया जा रहा है।
  • सम्मेलन का व्यापक विषय: ‘हिंद महासागर में शांति, सुरक्षा और सहयोग में वृद्धि’।
  • इसका उद्देश्य, हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने हेतु एक संस्थागत और सहयोगात्मक कारी वातावरण में संवाद को प्रोत्साहित करना है।

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