HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
मुंडा विद्रोह के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- यह व्यापारियों और साहूकारों की घुसपैठ से आम भूमि-जोत की उनकी प्रणाली के विनाश के खिलाफ था।
- जागीरदारों और थिकादारों ने अपने विद्रोह में मुंडाओं का समर्थन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
मुंडा तीन दशकों से, छोटानागपुर के मुंडा सरदार जागीरदारों, थिकादारों (राजस्व किसानों) और व्यापारियों-साहूकारों की घुसपैठ से आम भूमि-जोत की अपनी प्रणाली के विनाश के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक के दौरान, मुंडा लोग एक धार्मिक और राजनीतिक के साथ धार्मिक आंदोलन या विद्रोह (“उलगुलान”) में बिरसा मुंडा के अधीन हो गए। उन्होंने थिकादार, जागीरदारों, राजों को मारकर मुंडा शासन स्थापित करने का लक्ष्य रखा। मुक्ति के लिए, बिरसा ने तलवारों, भाले, युद्धक-कुल्हाड़ियों और धनुषों एवं तीरों से संपन्न 6,000 मुंडाओं का एक बल इकट्ठा किया। हालाँकि, बिरसा को 1900 में पकड़ लिया गया था और उसी वर्ष जेल में उसकी मृत्यु हो गई।
Incorrect
उत्तर: a)
मुंडा तीन दशकों से, छोटानागपुर के मुंडा सरदार जागीरदारों, थिकादारों (राजस्व किसानों) और व्यापारियों-साहूकारों की घुसपैठ से आम भूमि-जोत की अपनी प्रणाली के विनाश के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे। उन्नीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक के दौरान, मुंडा लोग एक धार्मिक और राजनीतिक के साथ धार्मिक आंदोलन या विद्रोह (“उलगुलान”) में बिरसा मुंडा के अधीन हो गए। उन्होंने थिकादार, जागीरदारों, राजों को मारकर मुंडा शासन स्थापित करने का लक्ष्य रखा। मुक्ति के लिए, बिरसा ने तलवारों, भाले, युद्धक-कुल्हाड़ियों और धनुषों एवं तीरों से संपन्न 6,000 मुंडाओं का एक बल इकट्ठा किया। हालाँकि, बिरसा को 1900 में पकड़ लिया गया था और उसी वर्ष जेल में उसकी मृत्यु हो गई।
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Question 2 of 5
2. Question
वुड डिस्पैच के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- इसने यूरोपीय अभिगम पर जोर दिया।
- इसने तर्क दिया कि पुरव के साहित्य में गंभीर त्रुटियां मौजूद हैं।
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
1854 में, लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों के न्यायालय ने भारत में गवर्नर-जनरल को एक शैक्षिक प्रेषण भेजा। कंपनी के बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष, चार्ल्स वुड द्वारा जारी, इसे वुड के डिस्पैच के रूप में जाना जाता है। भारत में प्रचलित शैक्षिक नीति को रेखांकित करते हुए, इसने एक बार फिर ओरिएंटल ज्ञान यूरोपीय शिक्षा की प्रणाली के व्यावहारिक लाभों पर जोर दिया।
व्यावहारिक रूप से वर्णित इसका एक उपयोग आर्थिक भी था। इसमें कहा गया कि यूरोपीय शिक्षा, भारतीयों को व्यापार और वाणिज्य के विस्तार से होने वाले फायदों को पहचानने और उन्हें देश के संसाधनों के विकास के महत्व को देखने में सक्षम बनाएगी। उन्हें यूरोपीय तरीकों से परिचित कराने से, उनके स्वाद और इच्छाओं में और ब्रिटिश सामानों की मांग पैदा करने में, भारतीयों के लिए यूरोप में उत्पादित वस्तुओं की मांग में वृद्धि गो सकेगी।
वुड डिस्पैच ने यह भी तर्क दिया कि यूरोपीय अभिगम से भारतीयों के नैतिक चरित्र में सुधार होगा। यह उन्हें सच्चा और ईमानदार बनाएगा और इस तरह कंपनी को ऐसे सिविल सेवकों की आपूर्ति होगी जिन पर भरोसा किया जा सकता है।
इसमें कहा गया कि पुरव का साहित्य न केवल गंभीर त्रुटियों से भरा हुआ है, बल्कि यह लोगों में कर्तव्य और काम करने की प्रतिबद्धता की भावना भी उत्पन्न नहीं कर सकता था, न ही प्रशासन के लिए आवश्यक कौशल विकसित कर सकता था।
Incorrect
उत्तर: c)
1854 में, लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी के निदेशकों के न्यायालय ने भारत में गवर्नर-जनरल को एक शैक्षिक प्रेषण भेजा। कंपनी के बोर्ड ऑफ कंट्रोल के अध्यक्ष, चार्ल्स वुड द्वारा जारी, इसे वुड के डिस्पैच के रूप में जाना जाता है। भारत में प्रचलित शैक्षिक नीति को रेखांकित करते हुए, इसने एक बार फिर ओरिएंटल ज्ञान यूरोपीय शिक्षा की प्रणाली के व्यावहारिक लाभों पर जोर दिया।
व्यावहारिक रूप से वर्णित इसका एक उपयोग आर्थिक भी था। इसमें कहा गया कि यूरोपीय शिक्षा, भारतीयों को व्यापार और वाणिज्य के विस्तार से होने वाले फायदों को पहचानने और उन्हें देश के संसाधनों के विकास के महत्व को देखने में सक्षम बनाएगी। उन्हें यूरोपीय तरीकों से परिचित कराने से, उनके स्वाद और इच्छाओं में और ब्रिटिश सामानों की मांग पैदा करने में, भारतीयों के लिए यूरोप में उत्पादित वस्तुओं की मांग में वृद्धि गो सकेगी।
वुड डिस्पैच ने यह भी तर्क दिया कि यूरोपीय अभिगम से भारतीयों के नैतिक चरित्र में सुधार होगा। यह उन्हें सच्चा और ईमानदार बनाएगा और इस तरह कंपनी को ऐसे सिविल सेवकों की आपूर्ति होगी जिन पर भरोसा किया जा सकता है।
इसमें कहा गया कि पुरव का साहित्य न केवल गंभीर त्रुटियों से भरा हुआ है, बल्कि यह लोगों में कर्तव्य और काम करने की प्रतिबद्धता की भावना भी उत्पन्न नहीं कर सकता था, न ही प्रशासन के लिए आवश्यक कौशल विकसित कर सकता था।
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Question 3 of 5
3. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- लॉर्ड हार्डिंग 1885 में आईएनसी के गठन के समय भारत के वायसराय थे।
- अगस्त प्रस्ताव युद्ध के लिए भारतीय राजनीतिक नेतृत्व के समर्थन प्राप्त करने का एक प्रयास था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उतर: b)
1885 में INC का गठन के समयर लॉर्ड डफ़रिन भारत के वाइसराय थे।
Incorrect
उतर: b)
1885 में INC का गठन के समयर लॉर्ड डफ़रिन भारत के वाइसराय थे।
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Question 4 of 5
4. Question
स्वदेशी आंदोलन की विशेषताएँ निम्नलिखित में से कौन-सी हैं/हैं?
1) आत्मनिर्भरता पर बल
2) किसानों की व्यापक भागीदारी
3) सांस्कृतिक पुनरुत्थानवाद
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
स्वदेशी आंदोलन की विशेषताएँ –
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार: विदेशी कपड़ों का बहिष्कार और सार्वजनिक रूप से जलाना, विदेशी निर्मित नमक या चीनी का बहिष्कार, धोबी द्वारा विदेशी कपड़ों को धोने से मना करना।
सार्वजनिक बैठकें और जुलूस: ये जनसमूह के प्रमुख तरीकों और साथ ही लोकप्रिय अभिव्यक्ति के रूप में उभरे।
स्वयंसेवकों का समूह या समिति: अश्विनी कुमार दत्ता की स्वदेश बंधब समिति जैसी समितियां, जनसमूह की एक बहुत ही लोकप्रिय और शक्तिशाली पद्धति बनकर उभरी।
पारंपरिक लोकप्रिय त्योहारों और मेलों का उपयोग: इस तरह के अवसरों का उपयोग जनता तक पहुंचने और राजनीतिक संदेशों को फैलाने के साधन के रूप में किया गया। उदाहरण के लिए, तिलक के गणपति और शिवाजी त्यौहार न केवल पश्चिमी भारत में, बल्कि बंगाल में भी स्वदेशी प्रचार का माध्यम बन गए। बंगाल में, पारंपरिक लोक रंगमंच रूपों का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया गया था।
आत्म-निर्भरता या आत्म-शक्ति पर बल: यह राष्ट्रीय गरिमा, सम्मान और आत्मविश्वास और गांवों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का संकेत देता है।
इसमें किसान की सीमित भागीदारी थी।
Incorrect
उत्तर: c)
स्वदेशी आंदोलन की विशेषताएँ –
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार: विदेशी कपड़ों का बहिष्कार और सार्वजनिक रूप से जलाना, विदेशी निर्मित नमक या चीनी का बहिष्कार, धोबी द्वारा विदेशी कपड़ों को धोने से मना करना।
सार्वजनिक बैठकें और जुलूस: ये जनसमूह के प्रमुख तरीकों और साथ ही लोकप्रिय अभिव्यक्ति के रूप में उभरे।
स्वयंसेवकों का समूह या समिति: अश्विनी कुमार दत्ता की स्वदेश बंधब समिति जैसी समितियां, जनसमूह की एक बहुत ही लोकप्रिय और शक्तिशाली पद्धति बनकर उभरी।
पारंपरिक लोकप्रिय त्योहारों और मेलों का उपयोग: इस तरह के अवसरों का उपयोग जनता तक पहुंचने और राजनीतिक संदेशों को फैलाने के साधन के रूप में किया गया। उदाहरण के लिए, तिलक के गणपति और शिवाजी त्यौहार न केवल पश्चिमी भारत में, बल्कि बंगाल में भी स्वदेशी प्रचार का माध्यम बन गए। बंगाल में, पारंपरिक लोक रंगमंच रूपों का उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया गया था।
आत्म-निर्भरता या आत्म-शक्ति पर बल: यह राष्ट्रीय गरिमा, सम्मान और आत्मविश्वास और गांवों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान का संकेत देता है।
इसमें किसान की सीमित भागीदारी थी।
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Question 5 of 5
5. Question
भारत छोड़ो आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत 1942 में महात्मा गांधी ने की थी।
- कांग्रेस को गैरकानूनी संघ घोषित किया गया था।
- डाकघर, सरकारी भवनों और रेलवे स्टेशनों पर छापे और आग लगाने के साथ पूरा आंदोलन हिंसक था।
उपर्युक्त कथन में से कौन-सा/से सहीं नहीं है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
1942 में दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध से त्रस्त थी। भारत भी इसका सामना कर रहा था और क्रिप्स मिशन के विफल होने के बाद, 8 अगस्त 1942 को, महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के माध्यम से करो या मरो का आह्वान किया। 8 अगस्त, 1942 को, महात्मा गांधी ने बॉम्बे में गोवालिया टैंक मैदान में अपने भारत छोड़ो भाषण में करो या मरो का नारा दिया। भले ही भाषण से पार्टी के भीतर कुछ उथल-पुथल मच गई और यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद जैसे नेताओं द्वारा आशंका और आलोचना की गयी, लेकिन इसका समर्थन किया और अंत तक गांधी के नेतृत्व का समर्थन किया।
आंदोलन का पहला आधा भाग प्रदर्शनों और जुलूसों के साथ शांतिपूर्ण था। महात्मा गांधी की रिहाई तक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया था।
आंदोलन का दूसरा भाग डाकघरों, सरकारी भवनों और रेलवे स्टेशनों पर छापे और आगजनी की घटनाओं के साथ हिंसक था। लॉर्ड लिनलिथगो ने हिंसा की नीति को अपनाया।
Incorrect
उत्तर: c)
1942 में दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध से त्रस्त थी। भारत भी इसका सामना कर रहा था और क्रिप्स मिशन के विफल होने के बाद, 8 अगस्त 1942 को, महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के माध्यम से करो या मरो का आह्वान किया। 8 अगस्त, 1942 को, महात्मा गांधी ने बॉम्बे में गोवालिया टैंक मैदान में अपने भारत छोड़ो भाषण में करो या मरो का नारा दिया। भले ही भाषण से पार्टी के भीतर कुछ उथल-पुथल मच गई और यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू और मौलाना आज़ाद जैसे नेताओं द्वारा आशंका और आलोचना की गयी, लेकिन इसका समर्थन किया और अंत तक गांधी के नेतृत्व का समर्थन किया।
आंदोलन का पहला आधा भाग प्रदर्शनों और जुलूसों के साथ शांतिपूर्ण था। महात्मा गांधी की रिहाई तक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया था।
आंदोलन का दूसरा भाग डाकघरों, सरकारी भवनों और रेलवे स्टेशनों पर छापे और आगजनी की घटनाओं के साथ हिंसक था। लॉर्ड लिनलिथगो ने हिंसा की नीति को अपनाया।








