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सामान्य अध्ययन – 1
विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
1. औपनिवेशिक शासन के खिलाफ 19 वीं शताब्दी के भारत में कृषक विप्लव एवं विद्रोह धार्मिक नहीं थे, लेकिन अधिकांश मामलों में धर्म ने इनमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उपर्युक्त संदर्भ में उचित उदाहरणों के साथ 19 वीं शताब्दी के भारत के कृषक विद्रोहों की प्रकृति पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: आधुनिक भारत का इतिहास: बिपिन चंद्र
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
19वीं एवं 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में भारत में अनेक कृषक एवं आदिवासी आंदोलन, विप्लव अथवा विद्रोह प्रारम्भ हुए। इनमें से अधिकांश विद्रोहों का दमन अंग्रेजों द्वारा सत्ता के निर्मम उपयोग के माध्यम से कर दिया गया था। इन आन्दोलनों ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विषय वस्तु:
19वीं शताब्दी में देश में प्रारम्भ कृषक विद्रोहों के लिए उत्तरदायी कारकों पर चर्चा कीजिए।
इनके गैर-धार्मिक कारकों जैसे- सतत अकालों की घटना आदि पर प्रकाश डालिए। समझाइए कि इन आन्दोलनों में धर्म ने किस तरह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निष्कर्ष:
देश के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे किसान विद्रोहों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।
2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में विभिन्न विचारों एवं विचारधाराओं का समावेश था, जो प्रायः एक-दूसरे के विरोधाभासी होते थे। क्या आपको लगता है कि यह बहुलवाद का प्रतीक था? इसने भारत को आकार प्रदान कैसे किया? चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: आधुनिक भारत का इतिहास: बिपिन चंद्र
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
कांग्रेस की विविध संरचना एवं इसके आधारभूत विचारों तथा विचारधाराओं का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
कांग्रेस के भीतर उपस्थित विभिन्न विचारधाराओं एवं समूहों को स्पष्ट रूप से रेखांकित कीजिए।
समझाइए कि ये विचार एवं विचारधाराएं परस्पर विरोधाभासी कैसे थे।
यह बहुलवाद का प्रतीक कैसे था? समझाइए। इस सन्दर्भ में उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।
इन विविध विचारों ने भारत को कैसे प्रभावित किया? स्पष्ट कीजिए। उत्तर को अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए समसामयिक घटनाओं का भी उल्लेख कीजिए।
निष्कर्ष:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बहुलवाद को स्पष्ट करते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 2
विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।
3. दशकों से चली आ रही क्रूर सैन्य तानाशाही के बाद 10 वर्ष पूर्व लोकतंत्र के साथ एक नाजुक संक्रमण प्रारम्भ करने वाला म्यांमार का शासन पुनः जनरल के हाथों में चला गया है। हाल ही में हुए तख्तापलट के प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। भारत की क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए? (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu , The Hindu
निर्देशक शब्द:
विश्लेषण कीजिए– ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संसद का तख्तापलट करने एवं सैन्य तानाशाही स्थापित करने के हालिया घटनाक्रम का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
म्यांमार के ऐतिहासिक घटनाक्रम पर प्रकाश डालिए।
हाल ही में हुए तख्तापलट के प्रभावों पर चर्चा कीजिए।
इस सन्दर्भ में भारत की संभावित प्रतिक्रिया क्या होनी चाहिए, चर्चा कीजिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 3
विषय: सरकारी बजट।
4. व्यापक आर्थिक स्थिरता से आप क्या समझते हैं? क्या आपको लगता है कि बजट 2021 वृहद आर्थिक स्थिरता से विचलन प्रस्तुत करता है? टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: The Hindu
निर्देशक शब्द:
टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
व्यापक आर्थिक स्थिरता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
व्यापक आर्थिक स्थिरता के विभिन्न घटकों पर विस्तार से चर्चा कीजिए। समावेशी विकास, गरीबी में कमी, असमानताओं में कमी आदि में इसकी भूमिका पर प्रकाश डालिए।
वृहद आर्थिक स्थिरता से विचलन से सम्बंधित बजट की विभिन्न विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख कीजिए एवं विचलन के लिए उत्तरदायी कारणों पर प्रकाश डालिए।
इससे सम्बद्ध चिंताओं का उल्लेख कीजिए एवं व्यापक आर्थिक स्थिरता को व्यापक दायरे में लाने की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव।
5. विधि की तुलना में तकनीक अधिक शीघ्रता से विकसित होती है। यह तकनीकी नीति निर्माण की प्राथमिक चुनौती है एवं इस समस्या को सुलझाना सर्वाधिक आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
सन्दर्भ: Live Mint
निर्देशक शब्द:
चर्चा कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।
उत्तर की संरचना:
परिचय:
विधि के विकास को निरर्थक बनाने वाली प्रौद्योगिकी के विकास की त्वरित गति का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकी के विनियमन के प्रभावों का वर्णन कीजिए।
वर्तमान समय में तकनीकी नीतियों को और अधिक समावेशी एवं उत्तरदायी कैसे बनाया जा सकता है? समझाइए।
निष्कर्ष:
आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।
सामान्य अध्ययन – 4
विषय: मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा।
6. निम्नलिखित उद्धरण से आप क्या समझते हैं?
“शिक्षा, जो चरित्र का निर्माण नहीं करती है, बिल्कुल बेकार है” – महात्मा गांधी। (150 शब्द)
उत्तर की संरचना:
परिचय:
उद्धरण की व्याख्या करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषय वस्तु:
समझाइए कि साक्षर होने एवं शिक्षित होने के मध्य क्या अंतर है। स्पष्ट कीजिए कि मूल्यों के बिना शिक्षा आत्मा के बिना शरीर के समान है।
इनके प्रभावों को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
निष्कर्ष:
चरित्र निर्माण के लिए मूल्यों को विकसित करने का सुझाव देते हुए निष्कर्ष निकालिए।
विषय: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।
7. निम्नलिखित नैतिक विचारकों के प्रयोजनवादी नैतिक सिद्धांतों पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए:
-
- जेरेमी बेंथम
- जॉन स्टुअर्ट मिल
(150 शब्द)
सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन
निर्देशक शब्द:
लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।
उत्तरकीसंरचना:
परिचय:
प्रयोजनवादी नैतिकता के बारे में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।
विषयवस्तु:
जेरेमी बेंथम:
प्रयोजनवादी नैतिकता में बेन्थम के योगदानों पर प्रकाश डालिए। वह उपयोगिता पर बल देता है, ब्रिटिश उपयोगितावादी आंदोलन, मानव क्रियाएं, नैतिक क्रियाओं के सात कारक आदि। इसकी कुछ सीमाओं पर भी चर्चा कीजिए।
जॉन स्टुअर्ट मिल:
महान प्रसन्नता सिद्धांत, मानवीय इच्छा, न्याय की धारणा एवं सामाजिक उपयोगितावाद के प्रतिनिधित्व के साथ उपयोगिता सिद्धांत आदि पर चर्चा कीजिए। इसकी कुछ सीमाओं पर प्रकाश डालिए।
निष्कर्ष:
उनके योगदानों के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।
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