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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 1 February 2021

 

विषयसूची 

सामान्य अध्ययन-I

1. मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020

2. जनगणना को वर्ष 2022 तक स्थगित किए जाने की संभावना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना में 14 अन्य नए लघु वन उत्पाद सम्मिलित

2. चाबहार बंदरगाह

3. भ्रष्टाचार बोध सूचकांक- 2020

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. प्रधानमंत्री द्वारा झील की सफाई के लिए एकल प्रयासों की प्रशंसा

2. इंदौर जिला मजिस्ट्रेट ने माफ़ी मांगी

 

प्रारम्भिक परिक्षा हेतु तथ्य

1. त्रि-भाषा नीति केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में लागू नहीं

2. वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB)

3. राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020


संदर्भ:

पिछले वर्ष, मार्च 2020 में ‘मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक’ (Medical Termination of Pregnancy (MTP) Amendment Bill), 2020 लोकसभा में पारित कर दिया गया था, इस विधेयक को वर्तमान में जारी बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

इस विधेयक में, प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश में एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने सहित कई संशोधनों का प्रस्ताव किया गया है।

  • असामान्य भ्रूण होने संबंधी मामलों में, 24 सप्ताह से अधिक के गर्भ पर बोर्ड द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
  • प्रत्येक बोर्ड में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट या सोनोलॉजिस्ट, एक बाल रोग विशेषज्ञ, और राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा नामित अन्य सदस्य होंगे।

वर्तमान में संबंधित विवाद:

नवीनतम अध्ययन के अनुसार, इस प्रकार के बोर्ड का गठन करना ‘अव्यावहारिक’ है, क्योंकि देश में संबंधित चिकित्सकों के 82% पद रिक्त हैं।

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020 की प्रमुख विशेषताएं:

  1. इस विधेयक में, विशेष परिस्थितयों में गर्भपात की अनुमति के लिए निर्धारित 20 सप्ताह की ऊपरी सीमा को बढाकर 24 सप्ताह किये जाने का प्रस्ताव किया गया है।
  2. विधेयक में, दुष्कर्म पीड़ित, सगे-संबंधियों से यौन-पीड़ित, दिव्यांग तथा नाबालिग ‘महिलाओं की एक विशेष श्रेणी’ बनाने का प्रावधान किया गया है।
  3. विधेयक में, गर्भावस्था के 20 सप्ताह तक गर्भपात कराने के लिये एक पंजीकृत चिकित्सक की राय लेने का प्रस्ताव किया गया है।
  4. इसके अलावा, गर्भावस्था के 20 से 24 सप्ताह तक गर्भपात कराने के लिये दो चिकित्सकों की राय लेने के अनिवार्य किया गया है।

संशोधन की आवश्यकता:

  • वर्तमान गर्भपात कानून लगभग पाँच दशक पुराना है, और इसके तहत अधिकतम 20 सप्ताह तक के भ्रूण के गर्भपात की अनुमति दी गई है।
  • हाल के वर्षों में, गर्भपात के लिए गर्भधारण अवधि 20 सप्ताह से अधिक किए जाने हेतु जोरदार मांग की जा रही है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. नए विधेयक तथा 1971 के अधिनियम की तुलना
  2. भारत तथा अन्य देशों में गर्भपात हेतु निर्धारित समय सीमा
  3. गर्भनिरोधक-विफलता अनुच्छेद
  4. मेडिकल बोर्ड का गठन और संरचना

मेंस लिंक:

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (संशोधन) विधेयक, 2020 भारत में महिलाओं को प्रजनन अधिकार प्रदान करने का प्रयास करता है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

जनगणना को वर्ष 2022 तक स्थगित किए जाने की संभावना


संदर्भ:

देश में कोविड-19 महामारी से निपटने में व्यस्त होने के कारण केंद्र सरकार वर्ष 2021 में होने वाली जनगणना को वर्ष 2022 में कराए जाने पर विचार कर रही है।

पृष्ठभूमि:

  • जनगणना की कवायद दो चरणों में आयोजित की जानी थी- अप्रैल से सितंबर 2020 तक परिवारों की गणना तथा सूची, और 9 फरवरी से 28 फरवरी, 2021 तक जनगणना।
  • शुरू में, जनगणना का पहले चरण और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (National Population Register- NPR) की अद्यतन प्रक्रिया को कुछ राज्यों में 1 अप्रैल, 2020 से लागू किया जाना था, लेकिन महामारी के कारण स्थगित इसे कर दिया गया था।

जनगणना:

जनगणना (Census), देश में जनसंख्या के आकार, वितरण और सामाजिक-आर्थिक स्थिति, जनसांख्यिकीय संबंधी जानकारी और अन्य विवरणों के बारे में जानकारी प्रदान करती है।

  • भारत में जनगणना, पहली बार वर्ष 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन शुरू की गई थी। इसने समाज में उत्थान करने हेतु नई नीतियों, सरकारी कार्यक्रमों को तैयार करने में सहायता प्रदान की।
  • भारत में पहली संपूर्ण जनगणना वर्ष 1881 में हुई थी। तब से, प्रति दस वर्ष में एक बार, निर्विघ्न रूप से जनगणना की जाती है।

भारत में जनगणना कौन करता है?

भारत में दशकीय जनगणना के संचालन का दायित्व भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय (Office of the Registrar General and Census Commissioner) सौंपा गया है।

जनगणना, निम्नलिखित विषयों पर जानकारी के सबसे विश्वसनीय स्रोतों में से एक है:

  1. जनसांख्यिकी
  2. आर्थिक गतिविधियां
  3. साक्षरता और शिक्षा
  4. आवास और घरेलू सुविधाएं
  5. शहरीकरण, प्रजनन और मृत्यु दर
  6. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति
  7. भाषा

ऐतिहासिक महत्व:

  • ऋग्वेद’ से पता चलता है कि भारत में 800-600 ईसा पूर्व के दौरान किसी प्रकार की जनसंख्या गणना की गई थी।
  • तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में कौटिल्य’ द्वारा लिखित अर्थशास्त्र में कराधान के लिए राज्य-नीति के एक उपाय के रूप में जनसंख्या के आंकड़ों का संग्रह करने का उल्लेख किया गया था।
  • मुगल बादशाह अकबर के शासन काल में लिखित ‘आईना-ए-अकबरी में जनसंख्या, उद्योग, धन और कई अन्य विशेषताओं से संबंधित विस्तृत आंकड़े शामिल किए गए थे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनगणना और NPR के बीच संबंध।
  2. NPR बनाम NRC
  3. NRC, असम समझौते से किस प्रकार संबंधित है।
  4. नागरिकता प्रदान करने और रद्द करने के लिए संवैधानिक प्रावधान।
  5. जनगणना किसके द्वारा की जाती है?

मेंस लिंक:

एक राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC)  प्रक्रिया क्यों नहीं संभव हो सकती है, चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना में 14 अन्य नए लघु वन उत्पाद सम्मिलित


संदर्भ:

सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के माध्यम से लघु वन उपज के विपणन हेतु तंत्र के तहत 14 नए लघु वन उत्पादों को शामिल करने का निर्णय लिया है।

नई शामिल वस्तुओं में टसर कोकून (Tasar Cocoon), सूखा कैथा (elephant apple dry), बाँस, मालकांगनी के बीज और जंगली सूखे मशरूम शामिल हैं।

योजना के बारे में:

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2011 में “न्यूनतम समर्थन मूल्य तथा लघु वन उपज (MFP) योजना की मूल्य श्रृंखला का विकास” के माध्यम से चुनिंदा लघु वन उत्पादों (MFP) की एक सूची के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी किया गया था।

इसका उद्देश्य वंचित वन वासियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना तथा उनके सशक्तिकरण में सहायता सहायता प्रदान करना था।

कार्यान्वयन:

  1. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लघु वनोपज (MFP) खरीदने की जिम्मेदारी राज्य द्वारा निर्धारित एजेंसियों के पास होगी।
  2. लघु वनोपज से संबंधित उत्पादों का बाजार मूल्य सुनिश्चित करने के लिए, निर्धारित एजेंसियों को बाजार के आढ़तियों की सेवा लेने की सुविधा प्रदान की जाएगी।
  3. यह योजना प्राथमिक मूल्यवर्धन के साथ-साथ कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस आदि जैसे आपूर्ति श्रृंखला बुनियादी ढांचे के लिए भी सहायता प्रदान करती है।
  4. योजना के कार्यान्वयन और निगरानी के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय नोडल मंत्रालय होगा। न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण मंत्रालय द्वारा TRIFED की तकनीकी सहायता से किया जाएगा।

लघु वनोपज (MFP) क्या है?

  • वन अधिकार अधिनियम की धारा 2 (i) लघु वनोपज (MFP) को सभी गैर-इमारती लकड़ियों तथा बांस, ब्रशवुड, स्टंप, कैन, कोकून, शहद, मोम, लाख, तेंदू / केंदू पत्ते, औषधीय पौधे आदि को सम्मिलित करती है।
  • ‘भारतीय वन अधिनियम’ 1927 के अंतर्गत बांस और बेंत को ‘वृक्ष’ के रूप में वर्गीकरण किया गया था, इसे परिवर्तित करके ‘लघु वनोपज’ की परिभाषा में बांस और बेंत शामिल किया गया हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. MFP के अंतर्गत आने वाले उत्पादों के बारे में कौन तय करता है?
  2. वर्तमान में कितने उत्पाद MFP के अंतर्गत आते हैं?
  3. राष्ट्रीय उद्यानों और अन्य संरक्षित क्षेत्रों के अंदर एमएफपी के संग्रह की अनुमति?
  4. केंद्रीय क्षेत्र की योजनायें बनाम केंद्र प्रायोजित योजनायें।
  5. MSP का निर्णय कौन करता है?

मेंस लिंक:

गैर-लकड़ी वन उत्पादों (NTFP) पर आदिवासी अधिकारों की मान्यता से गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में तेजी आएगी। टिप्पणी कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चाबहार बंदरगाह


संदर्भ:

हाल ही में, भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह के लिए दो मोबाइल हार्बर क्रेन सौंपे हैं। भारत और ईरान के बीच मई 2016 में चाबहार बंदरगाह को विकसित करने हेतु एक द्विपक्षीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गए थे, यह उसी अनुबंध का एक हिस्सा है।

ईरानी अधिकारियों के साथ वार्ता जारी करने के दौरान, भारत का यह कदम बंदरगाह परियोजना को आगे बढाने का संकेत देता है।

महत्व:

बिडेन प्रशासन द्वारा ईरान परमाणु समझौते में फिर से शामिल होने के संबंध में अमेरिका की नीति स्पष्ट किये जाने के बाद, भारत सरकार, आगामी महीनों में, ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ ढील की उम्मीद कर रही है।

बंदरगाह परियोजना में दोबारा निवेश करने संबंधी भारत की इस योजना को इसी के संकेतक रूप में देखा जा रहा है।

चाबहार बंदरगाह की अवस्थिति:

चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी पर स्थित है तथा ईरान का एकमात्र समुद्री बंदरगाह है।

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व:

  1. चाबहार बंदरगाह के माध्यम से भारत, अफगानिस्तान तक माल परिवहन करने में पाकिस्तान से होकर गुजरने वाले मार्ग का उपयोग करने की बाध्यता से मुक्त हो सकता है।
  2. इसके माध्यम से भारत की ईरान तक पहुँच में वृद्धि होगी। ईरान, भारत के लिए ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (International North-South Transport Corridor) के लिए प्रवेश मार्ग प्रदान करेगा, जिससे भारत, रूस ईरान, यूरोप तथा मध्य एशिया से समुद्री, रेल और सड़क मार्गों से जुड़ सकेगा।
  3. चाबहार बंदरगाह को भारत द्वारा विकसित और संचालित किए जाने से, ईरान भारत का एक सैन्य सहयोगी भी बन गया है।
  4. इसके माध्यम से भारत को अरब सागर में चीनी मौजूदगी का मुकाबला करने में भी सहायता मिलेगी। चीन, पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अरब सागर में अपनी स्थिति को मजबूत करने के प्रयास कर रहा है। ग्वादर बंदरगाह, चाबहार से सड़क मार्ग से 400 किमी तथा समुद्री मार्ग से 100 किमी से कम दूरी पर स्थित है।
  5. व्यापार लाभ: चाबहार बंदरगाह के कार्यशील होने से भारत में लौह अयस्क, चीनी और चावल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भारत की तेल-आयात लागत में भी काफी कमी आएगी।
  6. राजनयिक दृष्टिकोण से, चाबहार बंदरगाह को मानवीय कार्यों (Humanitarian Operations) के समन्वय करने हेतु इस्तेमाल किया जा सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. चाबहार पोर्ट की अवस्थिति
  2. INSTC क्या है?
  3. ओमान की खाड़ी
  4. ज़ाहेदान (Zahaden)
  5. हिंद महासागर क्षेत्र में देश

मेंस लिंक:

चाबहार बंदरगाह भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

भ्रष्टाचार बोध सूचकांक-2020


(Corruption Perception Index)

संदर्भ:

हाल ही में, भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (Corruption Perception Index CPI), 2020 जारी किया गया है।

इसे एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ (Transparency International) द्वारा तैयार किया गया है।

‘भ्रष्टाचार बोध सूचकांक’ (CPI) क्या है?

यह भ्रष्टाचार के क्षेत्र में विश्व के देशों की रैंकिग करने के लिए 12 सर्वेक्षणों के आधार पर तैयार किया गया एक संयुक्त सूचकांक है।

  • यह सूचकांक भ्रष्टाचार की धारणाओं का एक बेंचमार्क मापक बन चुका है और कई विश्लेषकों एवं निवेशकों द्वारा इसका उपयोग किया जाता है।
  • यह सूचकांक, सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर विशेषज्ञ राय पर भी आधारित होता है और इसमें, सरकारी नेताओं को भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है या नहीं, रिश्वत का प्रचलन तथा नागरिकों की जरूरतों पर सार्वजनिक संस्थानों की प्रतिक्रिया, जैसे कई कारकों को शामिल किया जाता है।

इस सूचकांक में देशों की रैंकिंग किस प्रकार की जाती है?

  • ‘भ्रष्टाचार बोध सूचकांक’ के तहत, सार्वजनिक क्षेत्र के भ्रष्टाचार पर विशेषज्ञों और व्यवसायिक लोगों के अनुभवों के आधार पर विश्व के 180 देशों की रैंकिंग की जाती है।
  • सूचकांक में ‘शून्य’ से ‘सौ’ (zero to 100) पैमाने का उपयोग किया जाता है, जहां शून्य सर्वाधिक भ्रष्ट तथा ‘100’ सर्वाधिक ‘निष्पक्ष’ को व्यक्त करता है।

भ्रष्टाचार बोध सूचकांक-2020 में भारत का प्रदर्शन:

  • वर्ष 2020 के भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (सीपीआई) में 180 देशों में भारत छह पायदान फिसलकर 86वें नंबर पर आ गया है।
  • सूचकांक में भारत का स्कोर, एशिया-प्रशांत क्षेत्र (31 देशों) के औसत स्कोर एवं वैश्विक औसत से कम है।
  • सूचकांक में चीन को 78 वें स्थान पर रखा गया है, जोकि भारत से दो स्थान ऊपर है।
  • पाकिस्तान को सूचकांक में 144 वें स्थान प्रदान किया गया है।

सूचकांक में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन:

  • भ्रष्टाचार बोध सूचकांक में न्यूजीलैंड और डेनमार्क (88) को संयुक्त रूप से शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ है, इसके बाद स्विट्जरलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और सिंगापुर (प्रत्येक के लिए 85 अंक) का स्थान है।
  • दक्षिण सूडान और सोमालिया, दोनों 12 अंकों के साथ वैश्विक रैंकिंग में संयुक्त रूप से सबसे निचले स्तर पर रहे।

भ्रष्टाचार और कोविड-19:

भ्रष्टाचार बोध सूचकांक (CPI) के नवीनतम संस्करण ने कोविड -19 से निपटने के लिए सरकार की प्रतिक्रियाओं पर भ्रष्टाचार के प्रभाव को उजागर किया है। सूचकांक में, देशों के मध्य स्वास्थ्य देखभाल में निवेश तथा महामारी के दौरान लोकतांत्रिक मानदंडों तथा संस्थाओं की मजबूती की तुलना भी की गई है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

विषय: अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि; सामाजिक प्रभाव और धारणा।

प्रधानमंत्री द्वारा झील की सफाई के लिए एकल प्रयासों की प्रशंसा


  • घुटनों के नीचे लकवाग्रस्त 69 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा वेम्बनाड झील की सफाई के अथक प्रयासों को देश के प्रधानमंत्री द्वारा मान्यता प्रदान की गई है।
  • ‘मन की बात’ कार्यक्रम में, प्रधान मंत्री ने केरल के कोट्टयम निवासी एक दिव्यांग व्यक्ति, एन.एस. राजप्पन, की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की।
  • पाँच साल की उम्र से पोलियोग्रस्त श्री राजप्पन, अर्पुककारा पंचायत में एक नदी के किनारे एक लगभग टूटी-फूटी झोपड़ी में अकेले रहते हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ;

इंदौर जिला मजिस्ट्रेट ने मांगी माफी


बेसहारा बुजुर्गों से बेरहमी मामले को लेकर इंदौर जिला मजिस्ट्रेट मनीष सिंह ने भगवान से माफी मांगी है। इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों ने पिछले दिनों असहाय बुजुर्गों को ठंड के मौसम में शहर के बाहर फेंक दिया था। बुजुर्गों को बाहर फेंकते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

कई लोगों ने इस कार्रवाई को “मानवता पर कलंक” करार दिया था।

संबंधित प्रकरण:

बुजुर्गों को शहर के बाहर राज्यमार्ग के किनारे छोड़े जाने पर नजदीक के ग्रामीणों द्वारा आपत्ति जताने और वीडियोज बनाने के बाद यह घटना सामने आई। इसके बाद, बुजुर्ग लोगों को वापस वाहन में डाल कर वापस ले जाया गया। यह कार्रवाई में अतिक्रमण हटाने वाले विभाग का इस्तेमाल किया गया था।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


त्रिभाषा नीति केंद्रीय सरकार के कार्यालयों में लागू नहीं

  • केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है, कि त्रि-भाषा नीति केंद्र सरकार के कार्यालयों पर लागू नहीं है।
  • राजभाषा अधिनियम, 1963 और राजभाषा नियम, 1976 के प्रावधानों के अनुसार, केंद्र सरकार के कार्यालयों में द्विभाषी नीति का प्रावधान लागू है।

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB)

(Wildlife Crime Control Bureau)

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो देश में संगठित वन्यजीव अपराध से निपटने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधीन भारत सरकार द्वारा स्थापित एक सांविधिक बहु-अनुशासनिक इकाई है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38 (Z) के तहत, ब्यूरो के निम्नलिखित कार्य है:

  1. अपराधियो को गिरफ्तार करने हेतु संगठित वन्यजीव अपराध गतिविधियों से सम्बंधित सुचना जानकारी एकत्रित करना;
  2. उसका विश्लेषण करने व उसे राज्यों व अन्य प्रवर्तन एजेंसियों को प्रेषित करना;
  3. एक केंद्रीकृत वन्यजीव अपराध डेटा बैंक स्थापित करना;
  4. अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के संबंध में विभिन्न एजेंसियों द्वारा समन्वित कार्रवाई करवाने; सम्बंधित विदेशी व अंतर्राष्ट्रीय संगठनो को वन्यजीव अपराध नियंत्रण में समन्वय व सामूहिक कार्यवाही हेतु सहायता करना|

राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम

  • भारत में राष्ट्रीय पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम, 31 जनवरी 2021 से शुरू किया गया है।
  • आमतौर पर राष्ट्रीय प्रतिरक्षण दिवस (NID) को पल्स पोलियो प्रतिरक्षण कार्यक्रम के रूप में जाना जाता है।
  • इस कार्यक्रम के तहत, 0 से 5 वर्ष के बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाई जाती हैं।
  • पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम वर्ष में दो बार आयोजित किया जाता है।
  • पल्स पोलियो कार्यक्रम हमेशा रविवार को शुरू होता है, जिसे पोलियो रविवर के रूप में जाना जाता है।

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