HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- ताशकंद घोषणापत्र भारत और चीन के बीच 1962 में हुए चीन-भारतीय युद्ध के बाद हस्ताक्षरित एक शांति समझौता है।
- सिंधु जल संधि एकमात्र उदाहरण है जहां भारत और पाकिस्तान ने तीसरे पक्ष को अपने मुद्दों का समाधान करने की अनुमति दी।
- 1971 में बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब भारत और पाकिस्तान ने तीसरे पक्ष को अपने मुद्दों का समाधान करने की अनुमति दी है।
दोनों राष्ट्र सिंधु जल संधि और कच्छ विवाद पर बातचीत के मामले में तीसरे पक्ष का सहारा लिया थाI
कच्छ का रण समझौते (ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन द्वारा मध्यस्थता) ने विवादों को हल करने के लिए दोनों पक्षों को सहमत किया और विवाद को हल करने के लिए एक न्यायाधिकरण की स्थापना की।
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, तत्कालीन यूएसएसआर के मध्यस्थता के प्रयासों के तहत भारत और पाकिस्तान को भविष्य के सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए सहमत होने के दौरान एक-दूसरे के क्षेत्रों से सेना को पीछे हटाने मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद उजबेकिस्तान में ताशकंद घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
शिमला में 2 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद 1971 में बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम हुआ जिसके बाद बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ, जो पहले पूर्वी पाकिस्तान के रूप में जाना जाता था और पाकिस्तान के क्षेत्र का हिस्सा था।
ताशकंद घोषणापत्र भारत और पाकिस्तान के बीच 10 जनवरी 1966 को हस्ताक्षरित एक शांति समझौता था, जिसने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का समाधान किया।
Incorrect
उत्तर: c)
ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जब भारत और पाकिस्तान ने तीसरे पक्ष को अपने मुद्दों का समाधान करने की अनुमति दी है।
दोनों राष्ट्र सिंधु जल संधि और कच्छ विवाद पर बातचीत के मामले में तीसरे पक्ष का सहारा लिया थाI
कच्छ का रण समझौते (ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन द्वारा मध्यस्थता) ने विवादों को हल करने के लिए दोनों पक्षों को सहमत किया और विवाद को हल करने के लिए एक न्यायाधिकरण की स्थापना की।
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, तत्कालीन यूएसएसआर के मध्यस्थता के प्रयासों के तहत भारत और पाकिस्तान को भविष्य के सभी मामलों पर चर्चा करने के लिए सहमत होने के दौरान एक-दूसरे के क्षेत्रों से सेना को पीछे हटाने मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद उजबेकिस्तान में ताशकंद घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
शिमला में 2 जुलाई 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद 1971 में बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम हुआ जिसके बाद बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ, जो पहले पूर्वी पाकिस्तान के रूप में जाना जाता था और पाकिस्तान के क्षेत्र का हिस्सा था।
ताशकंद घोषणापत्र भारत और पाकिस्तान के बीच 10 जनवरी 1966 को हस्ताक्षरित एक शांति समझौता था, जिसने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का समाधान किया।
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Question 2 of 5
2. Question
भारत में प्रिवी पर्स को किसके शासनकाल के दौरान समाप्त कर दिया गया था
Correct
उत्तर: d)
भारत में प्रिवी पर्स को 1971 में भारत के संविधान में 26वें संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया था। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों और सरकार के राजस्व घाटे को कम करने की आवश्यकता के आधार पर इसे समाप्त करने का तर्क दिया था।
Incorrect
उत्तर: d)
भारत में प्रिवी पर्स को 1971 में भारत के संविधान में 26वें संशोधन द्वारा समाप्त कर दिया गया था। तब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों और सरकार के राजस्व घाटे को कम करने की आवश्यकता के आधार पर इसे समाप्त करने का तर्क दिया था।
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Question 3 of 5
3. Question
‘भारत-रूस शांति, मित्रता और सहयोग संधि‘ के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- शीत युद्ध के दौरान भारत-रूस शांति, मित्रता और सहयोग संधि भारत की गुटनिरपेक्षता की पिछली स्थिति से महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाती है।
- संधि ने 1962 के चीन-भारतीय युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: a)
भारत-रूस शांति, मित्रता और सहयोग संधि अगस्त 1971 में भारत और सोवियत संघ के बीच हस्ताक्षरित एक संधि थी, जिसमें पारस्परिक सहयोग को निर्दिष्ट करती है। यह भारत की गुटनिरपेक्षता की पिछली स्थिति से महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाती है और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एक कारक सिद्ध हई।
यह संधि चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पाकिस्तानी के बढ़ते संबंधों के कारण हुई थी और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Incorrect
उत्तर: a)
भारत-रूस शांति, मित्रता और सहयोग संधि अगस्त 1971 में भारत और सोवियत संघ के बीच हस्ताक्षरित एक संधि थी, जिसमें पारस्परिक सहयोग को निर्दिष्ट करती है। यह भारत की गुटनिरपेक्षता की पिछली स्थिति से महत्वपूर्ण विचलन को दर्शाती है और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एक कारक सिद्ध हई।
यह संधि चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पाकिस्तानी के बढ़ते संबंधों के कारण हुई थी और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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Question 4 of 5
4. Question
ऑपरेशन सर्चलाइट किससे संबंधित है
Correct
उत्तर: b)
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की शुरुआत तब हुई जब पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ी ने पाकिस्तान की ओर से पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ 25 सितंबर 1971 की रात्रि को ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया।
Incorrect
उत्तर: b)
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की शुरुआत तब हुई जब पश्चिमी पाकिस्तान में स्थित पाकिस्तानी सैन्य टुकड़ी ने पाकिस्तान की ओर से पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के खिलाफ 25 सितंबर 1971 की रात्रि को ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया।
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Question 5 of 5
5. Question
भूदान आंदोलन, भारत में एक स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था, जिसने निम्नलिखित की भी वकालत की थी
- ग्रामदान (उपहार में गाँव)
- भूमि का सामान्य स्वामित्व
सही उत्तर कूट का चयन कीजिए:
Correct
उत्तर: c)
भूदान आंदोलन (भूमि उपहार आंदोलन) जिसे रक्तहीन क्रांति के रूप में भी जाना जाता है, भारत में एक स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था। इसकी शुरुआत गांधीवादी आचार्य विनोबा भावे ने 1951 में पोचमपल्ली गांव से की थी, जो अब तेलंगाना में स्थित है।
भूदान आंदोलन ने धनी ज़मींदारों को स्वेच्छा से भूमिहीन लोगों को उनकी भूमि का प्रतिशत देने के लिए मनाने का प्रयास किया गया था। दार्शनिक रूप से, भावे महात्मा गांधी के सर्वोदय आंदोलन और ग्राम स्वराज्य से प्रभावित थे।
आंदोलन का प्रारंभिक उद्देश्य स्वैच्छिक दान करना और भूमिहीनों को वितरित करना था, लेकिन शीघ्र ही सभी निजी भूमि का 1/6 भाग माँगा गया। 1952 में, आंदोलन ने ग्रामदान (“उपहार में गाँव” या पूरे गाँव का दान) की अवधारणा को व्यापक किया गया और भूमि के सामान्य स्वामित्व की वकालत शुरू की गयी।
Incorrect
उत्तर: c)
भूदान आंदोलन (भूमि उपहार आंदोलन) जिसे रक्तहीन क्रांति के रूप में भी जाना जाता है, भारत में एक स्वैच्छिक भूमि सुधार आंदोलन था। इसकी शुरुआत गांधीवादी आचार्य विनोबा भावे ने 1951 में पोचमपल्ली गांव से की थी, जो अब तेलंगाना में स्थित है।
भूदान आंदोलन ने धनी ज़मींदारों को स्वेच्छा से भूमिहीन लोगों को उनकी भूमि का प्रतिशत देने के लिए मनाने का प्रयास किया गया था। दार्शनिक रूप से, भावे महात्मा गांधी के सर्वोदय आंदोलन और ग्राम स्वराज्य से प्रभावित थे।
आंदोलन का प्रारंभिक उद्देश्य स्वैच्छिक दान करना और भूमिहीनों को वितरित करना था, लेकिन शीघ्र ही सभी निजी भूमि का 1/6 भाग माँगा गया। 1952 में, आंदोलन ने ग्रामदान (“उपहार में गाँव” या पूरे गाँव का दान) की अवधारणा को व्यापक किया गया और भूमि के सामान्य स्वामित्व की वकालत शुरू की गयी।








