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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 January 2021

 

विषयसूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रपति का अभिभाषण

2. आंध्रप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा दो आईएएस अधिकारियों की भर्त्सना

3. शहरी स्थानीय निकाय (ULB) सुधारों को पूर्ण करने वाला राजस्थान पांचवा राज्य

4. कोविड-19 प्रदर्शन रैंकिंग

5. चीन के साथ संबंधों को आगे बढाने हेतु विदेश मंत्री के सुझाव

6. विश्व स्वर्ण परिषद

7. संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) / ‘ईरान परमाणु समझौता’

8. वैक्सीन का वैश्विक वितरण एक चुनौती: WHO कार्यकारी बोर्ड

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कला उत्सव

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

राष्ट्रपति का अभिभाषण


संदर्भ:

बजट सत्र की शुरुआत में संसद के संयुक्त अधिवेशन के दौरान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण का 18 विपक्षी दलों ने बहिष्कार करने की घोषणा की है। विपक्षी दलों द्वारा यह निर्णय तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किया गया है।

संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण- संवैधानिक प्रावधान:

अनुच्छेद 87 (1) के अनुसार– राष्ट्रपति, लोकसभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के पश्चात्‌ प्रथम सत्र के आरंभ में और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में एक साथ समवेत संसद‌ के दोनों सदनों में अभिभाषण करेगा और संसद‌ को उसके आह्वान के कारण बताएगा।

पहला संवैधानिक संशोधन: मूल रूप से, संविधान में राष्ट्रपति द्वारा “प्रत्येक सत्र” के प्रारंभ में संसद के दोनों सदनों को संबोधित करने का प्रावधान किया गया था। संविधान के प्रथम संशोधन द्वारा इस शर्त को परिवर्तित कर दिया गया था।

राष्ट्रपति के अभिभाषण में क्या होता है?

राष्ट्रपति के भाषण में मुख्यतः आगामी वर्ष के लिए सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं और योजनाओं पर प्रकाश डाल जाता है। इसे मंत्रिमंडल द्वारा तैयार किया जाता है और यह सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों की एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है।

धन्यवाद प्रस्ताव:

(Motion of thanks)

राष्ट्रपति के अभिभाषण के पश्चात प्रत्येक सदन में सत्तापक्ष के सांसदों द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है। इस दौरान, राजनीतिक दल धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हैं तथा संशोधन करने हेतु सुझाव भी देते हैं।

राष्ट्रपति के अभिभाषण हेतु प्रकिया:

राष्ट्रपति या राज्यपाल के अभिभाषण के पश्चात, न केवल भाषण की  विषयवस्तु पर, बल्कि देश में शासन संबंधी व्यापक मुद्दों पर भी बहस होती है। इसके बाद बजट पर चर्चा का मार्ग प्रशस्त होता है।

यदि राष्ट्रपति अपने भाषण की विषयवस्तु से असहमत होता हैं, तो क्या वह इसे पढ़ने के लिए बाध्य होता हैं?

  • राष्ट्रपति या राज्यपाल, विधायिका को संबोधित करने संबंधी अपने संवैधानिक कर्तव्य को निभाने से इनकार नहीं कर सकते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति में वह सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण के पाठ से भिन्न बातें रख सकते हैं।
  • अब तक, किसी भी राष्ट्रपति द्वारा ऐसा करने का कोई उदाहरण नहीं हैं। किन्तु, इस प्रकार के एक अवसर पर विधानसभा में राज्यपाल ने भाषण के एक हिस्से को छोड़ दिया।
  • वर्ष 1969 में, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल धर्मवीर ने संयुक्त मोर्चा सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण के दो अनुच्छेदों को छोड़ दिया। भाषण के छोड़े गए भाग में, कांग्रेस शासित केंद्र सरकार द्वारा पहली संयुक्त मोर्चा सरकार के लिए बर्खास्त करने को असंवैधानिक बताया गया था।

अन्य देशों में इस प्रकार के प्रावधान:

इसी तरह के प्रावधान अन्य लोकतंत्रों में भी मौजूद हैं।

  1. संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे स्टेट ऑफ द यूनियन अड्रेसके रूप में जाना जाता है। यह वाक्यांश अमेरिकी संविधान के एक अनुच्छेद से लिया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रपति, “समय-समय पर कांग्रेस को संघ की स्थिति के संबंध में जानकारी प्रदान करेंगे तथा कांग्रेस के विचारणार्थ अपने विवेकानुसार आवश्यक और समीचीन उपायों की सिफारिश करेंगे।”
  2. यूनाइटेड किंगडम में, इस प्रक्रिया को ‘रानी के भाषण’ (Queen’s Speech) के रूप में संदर्भित किया जाता है और यह संसदीय वर्ष की औपचारिक शुरुआत करने संबंधी रस्म का एक प्रतीक है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति अभिभाषण के बारे में
  2. संवैधानिक प्रावधान
  3. पहला संवैधानिक संशोधन
  4. राष्ट्रपति के अभिभाषण हेतु प्रकियाएं
  5. यदि राष्ट्रपति अपने भाषण की विषयवस्तु से असहमत होता हैं, तो क्या वह इसे पढ़ने के लिए बाध्य होता हैं?
  6. ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ क्या है?

मैंस लिंक:

संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

आंध्रप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा दो आईएएस अधिकारियों की भर्त्सना


संदर्भ:

आंध्र प्रदेश सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों को लेकर दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को राज्य निर्वाचन आयुक्त एन रमेश कुमार द्वारा जारी किए गए सेंसर नोटिस पर “आपत्ति” जताई है।

संबंधित प्रकरण:

  • हाल ही में, आंध्रप्रदेश राज्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा पंचायती राज मंत्रालय के प्रमुख सचिव गोपाल कृष्ण द्विवेदी तथा पंचायती राज कमिश्नर एम गिरिजा शंकर को वर्ष 2021 की मतदाता सूची प्रकाशित करने में विफल रहने पर ‘भर्त्सना’ (Censure) की गयी थी।
  • निंदा कार्यवाही में, रमेश कुमार ने दोनों आईएएस अधिकारियों के लिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने की सिफारिश की।

राज्य सरकार का पक्ष:

राज्य सरकार का कहना है कि यह शक्ति राज्य निर्वाचन आयुक्त के अधिकार-क्षेत्र से बाहर है।

दिशानिर्देशों के अनुसार, निवार्चन आयोग-

केंद्र सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अथवा पूर्णतयः या आंशिक रूप से वित्त पोषित किसी स्वायत्त निकाय के अधीन कार्यरत किसी भी अधिकारी या पुलिस कर्मी को निर्वाचक नामावली तैयार करने संबंधी आदेशों की अवहेलना करने अथवा अथवा चुनाव ड्यूटी की उपेक्षा करने पर निलंबित कर सकता है, तथा इसके अलावा अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को सिफारिशें कर सकता है।

हालाँकि, ‘भर्त्सना’ (Censure) को मामूली दंड के तहत वर्गीकृत किया गया है और राज्य सरकार को राज्य के अधीन सेवारत सदस्य पर उक्त ‘दंड’ लगाए जाने अधिकार प्राप्त होता है और इसे आईएएस (डी एंड ए) नियम, 1969 के नियम 10 के तहत निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार लागू किया जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 243 बनाम 324, भारतीय निर्वाचन आयोग बनाम राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियों में समानताएं और अंतर
  2. निर्वाचन आयोगों के फैसलों के खिलाफ अपील
  3. संसद और राज्य विधानसभा बनाम स्थानीय निकायों के चुनाव
  4. राज्य निर्वाचन आयुक्त की शक्तियाँ

मेंस लिंक:

क्या राज्य निर्वाचन आयोग, भारतीय निर्वाचन आयोग के भांति स्वतंत्र हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व, संघीय ढाँचे से संबंधित विषय एवं चुनौतियाँ, स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण और उसकी चुनौतियाँ।

शहरी स्थानीय निकाय (ULB) सुधारों को पूर्ण करने वाला राजस्थान पांचवा राज्य


(Rajasthan becomes the 5th State to complete Urban Local Bodies (ULB) reforms)

संदर्भ:

राजस्थान शहरी स्थानीय निकाय (Urban Local Bodies– ULB) सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने वाला देश का पांचवा राज्य बन गया है।

  • राजस्थान के अलावा चार अन्य राज्यों आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, मणिपुर और तेलंगाना में भी इससे पहले शहरी स्थानीय निकाय सुधारों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।
  • यह सुधार वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा निर्धारित किए गए हैं।

निहितार्थ:

  • राजस्थान सुधारों से संबद्ध अतिरिक्त उधारी हासिल करने का पात्र हो गया है।
  • इसके अनुसार व्यय विभाग द्वारा राज्य को खुले बाजार से उधारी द्वारा 2,731 करोड़ रुपए के अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने की अनुमति प्रदान कर दी गई है।

इन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए व्यय विभाग द्वारा निर्धारित सुधार हैं-

राज्य अधिसूचित करेंगे-

  • शहरी स्थानीय निकायों में संपत्ति कर की आधार दरें जो कि मौजूदा सर्कल रेट (संपत्ति के लेनदेन के लिए मार्गदर्शी) के सुसंगत हो, और
  • जलापूर्ति, निकासी, सीवरेज के प्रावधान से संबंधित उपयोगिता शुल्कों की आधार दरें जो वर्तमान लागत/पिछली मुद्रा स्फीति को परिलक्षित करती हों

राज्य संपत्ति कर/उपयोगिता शुल्कों की आधार दरों में मूल्य वृद्धि के अनुरूप समय-समय पर वृद्धि के लिए एक प्रणाली स्थापित करेंगे।

सुधारों के लिए तय चार नागरिक केंद्रित क्षेत्र इस प्रकार हैं

  1. इसके तहत एक राष्ट्र एक राशन कार्ड व्यवस्था लागू करना
  2. कारोबार में आसानी से जुड़े सुधार
  3. शहरी स्थानीय निकाय/उपयोगिता सुविधाओं में सुधार
  4. ऊर्जा क्षेत्र में सुधार

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

कोविड-19 प्रदर्शन रैंकिंग


संदर्भ:

हाल ही में, एक ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक, लोवी इंस्टीट्यूट (Lowy Institute) द्वारा कोविड-19 प्रदर्शन सूचकांक” (COVID-19 “performance index”) जारी किया गया है।

सूचकांक के बारे में:

  • इस सूचकांक में ‘देशों के सापेक्षिक प्रदर्शन को नापने’ का प्रयास किया गया है।
  • यह सूचकांक, प्रमाणित मामलों तथा प्रति मिलियन आबादी पर होने वाली मौतों और परीक्षण स्तर सहित छह भिन्न संकेतकों पर आधारित है।
  • इस सूचकांक में कोविड-19 प्रतिक्रिया पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और तुलनीय डेटा का उपयोग किया गया है।

देशों के लिए रैंकिंग प्रक्रिया:

  • इस सूचकांक में, देशों को क्षेत्रों, राजनीतिक प्रणालियों, जनसंख्या आकार और आर्थिक विकास के आधार पर व्यापक श्रेणियों में क्रमबद्ध किया गया।
  • इसका उद्देश्य, विभिन्न देशों द्वारा महामारी से निपटने के तरीको में विविधताओं को निर्धारित करना था।
  • चीन को, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों के अभाव में सूची से बाहर रखा गया है।

सूचकांक में विभिन्न देशों का प्रदर्शन:

  1. न्यूजीलैंड, वियतनाम और ताइवान को क्रमशः शीर्ष तीन स्थानों पर रखा गया है।
  2. भारत को 86 वां स्थान मिला है।
  3. श्रीलंका का प्रदर्शन दक्षिण एशिया में सबसे अच्छा रहा और इसे 10 वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  4. सूचकांक में मालदीव को 25 वां, पाकिस्तान को 69 वां, नेपाल को 70 वां और बांग्लादेश को 84 वां स्थान प्राप्त हुआ है।
  5. ब्राजील के लिए सबसे कम अंक दिए गए हैं।
  6. प्रदर्शन के मामले में मेक्सिको, कोलंबिया, ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका को निचले पांच देशों में शामिल किया गया है।

कोविड-19 ‘प्रदर्शन सूचकांक’ सामान्य अवलोकन:

  • सूचकांक के अनुसार, हालांकि कुछ देशों द्वारा कोरोनोवायरस संकट को अन्य देशों की तुलना में बेहतर तरीके से प्रबंधित किया गया, किन्तु अधिकांश देशों ने “एक दूसरे को केवल ‘निम्न-प्रदर्शन’ के स्तर में पराजित किया”।
  • कोरोनोवायरस प्रतिक्रिया पर आर्थिक विकास के स्तर और राजनीतिक प्रणालियों में अंतर का अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा है।
  • औसतन, सत्तावादी देशों को वायरस नियंत्रण के लिए कोई ‘दीर्घकालिक लाभ’ हासिल नहीं हुआ है।
  • महामारी से निपटने में लोकतांत्रिक देशों को अन्य सरकारों की तुलना में ‘सामान्यतः’ अधिक सफलता हासिल हुई है।
  • देशों के प्रदर्शन में उनकी जनसंख्या आकार के हिसाब से ‘बहुत ही कम अंतर’ रहा।
  • कोरोनोवायरस प्रतिक्रिया प्रदर्शन मामले में, वर्ष 2020 के दौरान 10 मिलियन से कम आबादी वाले छोटे देशों ने बड़ी जनसंख्या वाले देशो को पीछे छोड़ दिया, हालांकि साल के अंत तक यह बढ़त काफी कम रह गई।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं उसके पड़ोसी- संबंध।

चीन के साथ संबंधों को आगे बढाने हेतु विदेश मंत्री के सुझाव


संदर्भ:

हाल ही में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने, वर्ष 2020 के लिए सीमा संकट के कारण ‘गंभीर रूर से अस्तव्यस्त’ हुए रिश्तों में ‘अत्याधिक तनाव’ का साल बताते हुए कहा है कि, भारत-चीन के आपसी रिश्तों को सुधारने के लिए ‘परस्पर सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों’ को मान्यता प्रदान करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

पृष्ठभूमि:

पिछले साल मई के प्रारंभ में, वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन द्वारा किए गए अतिक्रमण और सैन्य तैनाती के परिणामस्वरूप उत्पन्न तनाव के बाद, गलवान घाटी में 15 जून को हुई एक झड़प में बीस भारतीय सैनिकों और अज्ञात संख्या में चीनी सैनिकों की जान चली गयी थी। भारत ने चीन के इस कदम को पूर्वी लद्दाख में कई क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को फिर से परिभाषित करने के लिए एकतरफा प्रयास बताया गया है।

भारतीय हितों के खिलाफ चीन की कार्रवाईयां:

  1. वर्ष 2010 में जम्मू और कश्मीर के भारतीय नागरिकों को स्टेपल वीजा जारी करना।
  2. भारत की कुछ सैन्य कमानों से वार्ता हेतु चीन की विमुखता (बीजिंग ने इसी वर्ष उत्तरी सेना के कमांडर की मेजबानी करने से इनकार कर दिया था)।
  3. परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की भारत की सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता पर चीन का विरोध।
  4. संयुक्त राष्ट्र के लिए पाकिस्तानी आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने से रोकना।
  5. चीन की ‘बेल्ट एंड रोड’ पहल के तहत एक प्रमुख परियोजना, ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ जम्मू-कश्मीर में भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करती है।

विदेश मंत्री के सुझाव:

इस संकट को हल करने के लिए, विदेश मंत्री ने रिश्तों को आगे बढाने हेतु “तीन पारस्परिक” और “आठ व्यापक” प्रस्तावों को सुझाव दिया है।

द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिये आठ सूत्रीय सिद्धांत का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा है कि:

  1. वास्तविक नियंत्रण रेखा के प्रबंधन पर पहले हुए समझौतों का पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए।
  2. वास्तविक नियंत्रण रेखा का कड़ाई से पालन और सम्मान किया जाना चाहिए। यथास्थिति को बदलने का कोई भी एकतरफा प्रयास पूर्णतया अस्वीकार्य है।
  3. सीमावर्ती इलाकों में शांति स्थापना चीन के साथ संबंधों के संपूर्ण विकास का आधार है और अगर इसमें कोई व्यवधान आएगा तो नि:संदेह बाकी संबंधों पर इसका असर पड़ेगा।
  4. दोनों देश बहुध्रुवीय विश्व को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इस बात को स्वीकार किया जाना चाहिए कि बहुध्रुवीय एशिया इसका एक महत्वपूर्ण परिणाम है।

निष्कर्ष:

स्वाभाविक तौर पर हर देश के अपने-अपने हित, चिंताएं एवं प्राथमिकताएं होंगी लेकिन संवेदनाएं एकतरफा नहीं हो सकतीं। अंतत: बड़े देशों के बीच संबंध की प्रकृति पारस्परिक होती है।

उभरती हुई शक्तियां होने के नाते हर देश की अपनी आकांक्षाएं होती हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. LoC क्या है और इसका निर्धारण, भौगोलिक सीमा और महत्व?
  2. LAC क्या है?
  3. ‘नाथू ला’ कहाँ है?
  4. ’पैंगोंग त्सो’ कहाँ है?
  5. ‘अक्साई चिन’ का प्रशासन कौन करता है?
  6. ‘नाकु ला’ कहाँ अवस्थिति है?
  7. पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र में किसका नियंत्रण है?

मेंस लिंक:

भारत और चीन के लिए पैंगोंग त्सो के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

विश्व स्वर्ण परिषद


(World Gold Council)

संदर्भ:

विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council WGC) के अनुसार, भारत में सोने की मांग कोविड-19 के कारण लगाये गए लॉकडाउन और रिकॉर्ड उच्च कीमतों के कारण वर्ष 2020 में पिछले 25 साल में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। वर्ष 2020 में सोने की कुल मांग 446.4 टन रही जबकि वर्ष 2019 में यह 690.4 टन थी।

Gold & Economy:

सोना और अर्थव्यवस्था:

मुद्रा के रूप में: 20 वीं शताब्दी के दौरान अधिकांश काल तक सोने को वैश्विक आरक्षित मुद्रा के रूप में उपयोग किया जाता रहा। संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वर्ष 1971 तक स्वर्ण-मानक (Gold Standard) का इस्तेमाल किया जाता रहा।

मुद्रास्फीति के खिलाफ एक बचाव के रूप में: अंतर्निहित मूल्य और सीमित आपूर्ति के कारण मुद्रास्फीति के समय में सोने की मांग बढ़ जाती है। चूंकि, इसे पतला अथवा डाईल्यूट नहीं किया जा सकता है, इसलिए सोना, मुद्रा के अन्य स्वरूपों की तुलना में, बेहतर कीमत बनाए रखने में सक्षम होता है।

मौद्रिक ताकत: जब कोई देश निर्यात से अधिक आयात करता है, तो उसकी मुद्रा के मूल्य में ह्रास हो जाता है। दूसरी ओर, यदि कोई देश शुद्ध निर्यातक होता है, तो उसकी मुद्रा के मूल्य में वृद्धि हो जाती है। इस प्रकार, जो देश सोने का निर्यात करते हैं अथवा उनके पास स्वर्ण भण्डार होते हैं, तो सोने की कीमतों में वृद्धि होने पर उनकी मौद्रिक शक्ति में वृद्धि हो जाती है, क्योंकि उनके सकल निर्यात का मूल्य बढ़ जाता है।

 ‘विश्व स्वर्ण परिषद’ के बारे में:

  • यह स्वर्ण उद्योग के लिए एक बाज़ार विकास संगठन है।
  • यह सोने के खनन से लेकर निवेश तक उद्योग के सभी भागों में कार्य करती है, और इसका उद्देश्य सोने की मांग को प्रोत्साहित करना और बनाए रखना है।
  • इसके सदस्यों में विश्व की सभी प्रमुख सोना खनन कंपनियां सम्मिलित हैं।
  • यह अपने सदस्यों को एक जिम्मेदार तरीके से खनन करने तथा संघर्ष मुक्त स्वर्ण मानक विकसित करने में सहयोग करती है।
  • इसका मुख्यालय यूनाइटेड किंगडम में है तथा भारत, चीन, सिंगापुर, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसके कार्यालय स्थित हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सोने का आयात और निर्यात
  2. ‘विश्व स्वर्ण परिषद’ के बारे में
  3. भारत की सोने की खपत
  4. भारत में प्रमुख स्वर्ण उत्पादक स्थल

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) / ‘ईरान परमाणु समझौता’


(Joint Comprehensive Plan of Action- JCPOA)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन (U.S. Secretary of State Antony Blinken) ने पुष्टि की है कि यदि ईरान वर्तमान में निष्क्रिय हो चुके ‘संयुक्त व्यापक कार्य योजना / ‘ईरान परमाणु समझौता’ (Joint Comprehensive Plan of Action- JCPOA) की शर्तों का अनुपालन करने को राजी होता है, तो अमेरिका भी इस समझौते में फिर से शामिल हो जाएगा।

वर्ष 2018 में  ट्रम्प प्रशासन ने इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था।

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के बारे में:

ईरान परमाणु समझौता, 2015 में ईरान तथा विश्व के छह देशों– अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी के बीच सम्पन्न हुआ था।

इस समझौते में ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के बदले इस पर लगाए गए प्रतिबंधों में राहत पर्दान की गयी थी।

समझौते के तहत:

  • संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत तेहरान ने मध्यम संवर्धित यूरेनियम के अपने भंडारण को पूर्ण रूप से समाप्त करने, निम्न-संवर्द्धित यूरेनियम के भण्डारण को 98% तक कम करने तथा आगामी 13 वर्षों में अपने गैस सेंट्रीफ्यूजों की संख्या को दो-तिहाई तक कम करने पर सहमति व्यक्त की।
  • इस समझौते के माध्यम से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाये गए प्रतिबंधों की निगरानी के लिए एक असंयुक्त आयोग की स्थापना की गई थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. JCPOA क्या है? हस्ताक्षरकर्ता
  2. ईरान और उसके पड़ोसी।
  3. IAEA क्या है? संयुक्त राष्ट्र के साथ संबंध
  4. यूरेनियम संवर्धन क्या है?

मेंस लिंक:

संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA)  पर एक टिप्पणी लिखिए।प्रीलिम्स लिंक:

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

वैक्सीन का वैश्विक वितरण एक चुनौती: WHO कार्यकारी बोर्ड


संदर्भ:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी बोर्ड के अध्यक्ष एवं भारत के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने हाल ही में कहा है कि, वर्ष 2020 कोविड-19 के लिए टीकों की खोज का वर्ष था और वर्ष 2021 में भारत के सामने इस वैक्सीन को विश्व के उन लोगों तक पहुंचने की चुनौती होगी, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कार्यकारी बोर्ड

(WHO Executive Board)

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) में दो निर्णायक निकाय हैं; एक विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) तथा दूसरी कार्यकारी बोर्ड (WHO Executive Board)। WHO का मुख्यालय स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित है।

कार्यकारी बोर्ड की संरचना:

  • WHO के कार्यकारी बोर्ड में स्वास्थ्य क्षेत्र के 34 विशेषज्ञ सदस्य होते हैं, जो विश्व स्वास्थ्य सभा के निर्णयों तथा नीतियों को प्रभावी बनाते है।
  • कार्यकारी बोर्ड के चेयरमैन को, WHO के छह क्षेत्रीय समूहों, अफ्रीकी क्षेत्र, अमेरिकी क्षेत्र, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र, यूरोपीय क्षेत्र, पूर्वी भूमध्य क्षेत्र और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र, में से प्रति एक वर्ष के लिए बारी-बारी से चुना जाता है।

कार्यकाल:

कार्यकारी बोर्ड के सदस्य तीन साल के लिए चुने जाते हैं।

बोर्ड के कार्य:

  1. कार्यकारी बोर्ड, विश्व स्वास्थ्य सभा के लिए कार्यक्रमों का निर्धारण तथा सभा से पारित किये जाने वाले प्रस्तावों को तैयार करता है।
  2. यह, विश्व स्वास्थ्य सभा के निर्णयों और नीतियों को प्रभावी बनाता है।
  3. विश्व स्वास्थ्य सभा को परामर्श देता है और इसके काम को सुविधाजनक बनाता है।
  4. कार्यकारी बोर्ड और स्वास्थ्य सभा, स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर सदस्य राज्यों द्वारा उठाई गई चिंताओं पर बहस के लिए एक मंच प्रदान करता हैं।
  5. बोर्ड और स्वास्थ्य सभा, तीन प्रकार के दस्तावेज तैयार करते हैं – दोनों निकायों द्वारा पारित किए गए प्रस्ताव और निर्णय, WHO के आधिकारिक प्रकाशनों द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले आधिकारिक आंकड़े, और दोनों निकायों की बैठकों में प्रस्तुत किये जाने वाले दस्तावेज़।

महत्वपूर्ण तथ्य:

  1. भारत, 12 जनवरी 1948 को ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) के संविधान का एक पक्षकार बना।
  2. दक्षिण पूर्व एशिया के लिए पहले क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय डॉ. चंद्र मणि थे, जिन्होंने 1948-1968 के बीच कार्यभार संभाला।
  3. वर्ष 2019 से, डॉ. सौम्या स्वामीनाथन WHO की मुख्य वैज्ञानिक हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) – संरचना और कार्य
  2. WHO के क्षेत्रीय निकाय
  3. WHA और कार्यकारी बोर्ड द्वारा जारी किए जाने वाले दस्तावेज़
  4. कार्यकारी बोर्ड की अध्यक्षता

मेंस लिंक:

‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के कार्यकारी बोर्ड की संरचना और उद्देश्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कला उत्सव:

कला उत्सव, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय (शिक्षा मंत्रालय) की एक पहल है।

इसका उद्देश्य देश में माध्यमिक स्तर पर स्कूली छात्रों की कलात्मक प्रतिभा का पोषण और प्रदर्शन करके शिक्षा में कला को प्रोत्साहन प्रदान करना है।


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