[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 29 जनवरी 2021

 

How to Follow Secure Initiative?

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. “यदि पंचशील सिद्धांतों को न केवल विभिन्न देशों के मध्य बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी लागू किया जाता है, तो वे शांति एवं सुरक्षा के लिए एक ठोस आधार तैयार करेंगे।” पंचशील सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता के बावजूद चीन-भारत युद्ध क्यों हुआ? विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: स्वतंत्रता के पश्चात् भारत: बिपिन चंद्रा

निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजिएऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

पंचशील के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

पंचशील के पाँच सिद्धांत एवं उन्हें प्रतिपादित किये जाने का सन्दर्भ प्रस्तुत कीजिए।

समझाइए कि शांति के प्रति प्रतिबद्धता के बावजूद भारत एवं चीन के मध्य युद्ध क्यों हुआ।

निष्कर्ष:

1962 के युद्ध से सीखे गए सबकों को संक्षेप में बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 2. गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) का पुनरोद्धार करना समय की मांग है ताकि तृतीय विश्व के देशों की 21 वीं सदी की आवश्यकताओं को अधिक कुशलता से पूरा किया जा सके। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: स्वतंत्रता के पश्चात् भारत: बिपिन चंद्रा

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) एवं इसके संदर्भ के बारे में चर्चा करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि कैसे शीत युद्ध की समाप्ति एवं बहुध्रुवीय विश्व के उद्भव के पश्चात गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने अपनी प्रासंगिकता खो दी। इसके कारणों को स्पष्ट कीजिए।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की वर्तमान प्रासंगिकता का उल्लेख कीजिए।

गुटनिरपेक्ष आंदोलन की कार्यप्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए उपाय सुझाइए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

3. चीन को शांति एवं न्याय के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता में एवं जलवायु परिवर्तन से लड़ने तथा सतत विकास प्राप्त करने में वैश्विक नेतृत्व दर्शाना चाहिए तथा अभिमानी महाशक्तियों के मार्ग पर जाने से बचना चाहिए। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

एक महाशक्ति के रूप में चीन के उदय का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समझाइए कि चीन ने हाल के दिनों में परिवर्तन किया है एवं अपनी शक्ति प्रदर्शन का सहारा लिया है। इस सन्दर्भ में उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।

शांति और न्याय के सिद्धांतों का पालन करके एवं अग्रणी जलवायु परिवर्तन और सतत विकास में चीन वैश्विक नेता के रूप में अपनी भूमिका कैसे निभा सकता है? समझाइए।

निष्कर्ष:

अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के लिए शांतिपूर्ण एवं नैतिक दृष्टिकोण के साथ चीन लंबे समय तक स्थायी परिवर्तन कैसे कर सकता है, आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

4. पूर्वप्रभावी कराधान से भारत को इसके द्वारा अर्जित राजस्व की तुलना में अधिक हानि हो रही है। क्या आप सहमत हैं? हाल के घटनाक्रमों के आलोक में परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 परीक्षण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत में पूर्वप्रभावी कर एवं इसकी उत्पत्ति को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

भारत में पूर्वप्रभावी कराधान की आवश्यकता का उल्लेख कीजिए। वोडाफोन एवं केयर्न मामले पर चर्चा कीजिए।

पूर्वप्रभावी कराधान सहायक होने से अधिक हानिकारक कैसे है? उदाहरणों के साथ स्पष्ट कीजिए। 

पूर्वप्रभावी कराधान की समाप्ति से उत्पन्न होने वाले अवसरों पर प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

न्यायालयों के निर्णय का सम्मान करने सम्बन्धी भारत की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए पूर्वप्रभावी कराधान पर संतुलित विचार प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

5. एंटी-ट्रस्ट कानून क्या है? आज नीति निर्धारकों के समक्ष प्रश्न यह है कि इन इंटरनेट फर्मों द्वारा निर्मित सकारात्मक बाह्य एवं उपभोक्ता अधिशेष को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें अपनी एकाधिकार शक्ति का दुरुपयोग करने से कैसे रोका जाए। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu  , Business – Standard

निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

उत्तर की संरचना:

 परिचय:

एंटी-ट्रस्ट कानून एवं इसकी आवश्यकता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

इंटरनेट फर्मों को विनियमित करते समय नीति निर्माताओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों का उल्लेख कीजिए।

तकनीकी दिग्गजों के विनियमन के लिए एक मामला अध्ययन प्रस्तुत कीजिए।

इन कंपनियों द्वारा निर्मित सकारात्मक बाह्यताओं एवं दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए। इसके संभव समाधानों का सुझाव दीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण।

 6. महात्मा गांधी के लिए सुशासन का अर्थ सर्वोदय- सभी के लिए हितकारी सार्वजनिक भलाई के कार्यों की अवधारणा था। स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिए- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

महात्मा गांधी के सर्वोदय की अवधारणा का वर्णन करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

सर्वोदय के सिद्धांतों का उल्लेख कीजिए एवं उन्हें सुशासन की अवधारणा से सम्बद्ध कीजिए।

सर्वोदय आंदोलन पर सोदाहरण चर्चा कीजिए एवं समझाइए कि यह हमारे राष्ट्र को कैसे प्रभावित करता है। 

निष्कर्ष:

समकालीन समय में सर्वोदय की प्रासंगिकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।

 7. नागरिक अधिकार पत्र का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक उपयोगिताओं, विभिन्न सेवा प्रदाताओं और अन्य सरकारी संगठनों के लिए एक आचार संहिता तैयार करना और उसे प्रस्तुत करना है, जिसका जनता के साथ एक इंटरफ़ेस हो। ताकि जब एक दस्तावेज के रूप में प्रकाशित किया जाए तो यह “अधिकार पत्र” के रूप में काम कर सके। चर्चा कीजिए। (150 शब्द)

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

नागरिक अधिकार पत्र को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

नागरिक अधिकार पत्र के मुख्य उद्देश्यों और घटकों का उल्लेख कीजिए।

यह सरकार का जनता के साथ एक इंटरफ़ेस विकसित करने में कैसे सहायक है? समझाइए।

निष्कर्ष:

नागरिक अधिकार पत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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