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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 27 January 2021

 

सामान्य अध्ययन-I

1. गोविंद बल्लभ पंत

 

सामान्य अध्ययन-II

1. अमेरिका द्वारा फिलिस्तीनियों के साथ संबंध-बहाली की घोषणा

2. अमेरिका-तालिबान शांति समझौता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. ग्रीन टैक्स / हरित कर

2. ‘बजटेतर ऋण / ऑफ-बजट ऋण’

3. कृत्रिम रेत (M-sand)

4. कोविड-19 हेतु भारत बायोटेक की एकल खुराक इंट्रानेजल वैक्सीन, BBV154

5. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. पद्म पुरस्कार

2. आकाश-एनजी मिसाइल

3. भारत पर्व 2021

4. बांग्लादेशी सैन्य-दल द्वारा गणतंत्र दिवस परेड में भागीदारी

5. ‘गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा’ क्या है?

6. जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन 2021

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

गोविंद बल्लभ पंत


संदर्भ:

हाल ही में, स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा संसद परिसर से हटाई गयी है, इसके लिए नई जगह पर फिर से स्थापित किया जाएगा।

‘गोविंद बल्लभ पंत’ के बारे में:

  • पंत का जन्म 10 सितंबर 1887 को अल्मोड़ा, उत्तराखंड में हुआ था।
  • उन्होंने काशीपुर में प्रेम सभा नामक एक संगठन की स्थापना की जिसने कई दिशाओं में सुधार कार्य शुरू किए।
  • उन्होंने ब्रिटिश सरकार के लिए करों का भुगतान नहीं करने के कारण एक स्कूल को बंद होने से बचाया।
  • वे स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे।
  • उन्होंने वर्ष 1955 से 1961 तक भारत के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। यह उनके कार्यकाल के दौरान राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया था।
  • गांधी के नक्शेकदम पर चलते हुए, पंत ने संयुक्त प्रांत में व्यापक स्तर पर नमक आंदोलन का आयोजन किया। इसके लिए मई 1930 में, उन्हें देहरादून जेल में गिरफ्तार किया गया।
  • उन्होंने साइमन कमीशन का विरोध किया था।
  • वर्ष 1957 में, पंत को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वतंत्रता से पहले जीबी पंत द्वारा धारित पद
  2. स्वतंत्रता के बाद पंत द्वारा धारित पद
  3. पुरस्कार और सम्मान
  4. प्रेम सभा संगठन- उद्देश्य
  5. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
  6. पृथक निर्वाचक मंडल पर उनके विचार

मेंस लिंक:

जीबी पंत और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिका द्वारा फिलिस्तीनियों के साथ संबंध-बहाली की घोषणा


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के प्रशासन द्वारा फिलिस्तीनियों के साथ संबंधों को बहाल करने तथा फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए फिर से सहायता प्रदान करने घोषणा की गयी है।

अमेरिका का यह कदम, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा फिलिस्तीनियों से संबंध-विच्छेद किए जाने के विपरीत है, तथा दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करने के लिए इजरायल और फिलिस्तीनियों मध्य सहमति प्राप्त ‘दो-राष्ट्र’ समाधान के लिए इसके नए सहयोग का एक एक प्रमुख तत्व है।

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इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष:

इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष की शुरुआत, उन्नीसवीं सदी के अंत में, मुख्यतः इस भूभाग पर अधिकार के लिए संघर्ष के रूप में हुई थी।

  • वर्ष 1948 के अरबइजरायल युद्ध के बाद, पवित्र भूमि को तीन भागों में विभाजित किया गया था: इजरायल देश, वेस्ट बैंक (जॉर्डन नदी का), और गाजा पट्टी।
  • इस संघर्ष को विराम देने हेतु वर्ष 1993 के ओस्लो समझौते द्वारा मध्यस्थता की गयी और ‘दो-राष्ट्र’ समाधान (Two State Solution) की एक रूपरेखा तैयार की गयी थी। इसके तहत एक फिलिस्तीनी प्राधिकरण को मान्यता प्रदान की गयी तथा इसके लिए वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में सीमित स्वायत्तता दी गयी।

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पश्चिम एशिया शांति योजना:

(West Asia peace plan)

  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पश्चिम एशिया शांति योजना का उदघाटन किया गया।
  • इसके तहत, इजरायल और फिलिस्तीनियों के बीच ‘दो-राष्ट्र’ समाधान पर अवरुद्ध वार्ता को फिर से शुरू करने की योजना बनाई गई थी।
  • ‘पश्चिम एशिया शांति योजना’ में इजरायल के लिए ‘अविभाजित राजधानी’ के रूप में ‘यरुशलम’ सौंपे जाने तथा कड़ी शर्तों के आधार पर फलस्तीन को भविष्य में राष्ट्र का दर्जा देने की बात कही गई है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. प्रस्तावित ‘पश्चिम एशिया शांति योजना’ का अवलोकन
  2. ‘छह दिन का युद्ध’ क्या है?
  3. ‘मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय’ के बारे में।
  4. मध्य पूर्व की चौकड़ी (Middle East quartet)

निम्नलिखित को मानचित्र पर खोजें:

  • गोलन हाइट्स
  • वेस्ट बैंक
  • यरूशलेम

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

अमेरिका-तालिबान शांति समझौता


संदर्भ:

बिडेन प्रशासन द्वारा अमेरिका-तालिबान शांति समझौते (U.S.- Taliban peace deal) की समीक्षा करने की बात कही गयी है, इसके तहत तालिबान की ओर से समझौते का पालन करने की संभावनाओ की जांच की जाएगी।

अमेरिका-तालिबान शांति समझौते के बारे में:

  • अमेरिकी सरकार और तालिबान के बीच, 29 फरवरी, 2020 को एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • इस समझौते में, अमेरिकी और उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) सैनिकों द्वारा अफगानिस्तान से वापस जाने की मांग की गयी थी।

अफगानिस्तान में शांति का भारत के लिए महत्व:

भारत द्वारा अफगानिस्तान में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने हेतु नए सिरे से प्रयास करने तथा बाह्य देशों द्वारा प्रायोजित आतंकवाद और हिंसा को समाप्त करने का आह्वान किया गया है।

  • आर्थिक दृष्टि से, अफगानिस्तान, तेल एवं खनिज संपन्न मध्य एशियाई देशों के लिए भारत का प्रवेश द्वार है।
  • अफगानिस्तान, पिछले पांच वर्षों में भारतीय विदेशी सहायता प्राप्त करने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है।

अमेरिका-तालिबान शांति समझौते के प्रमुख तत्व:

समझौते पर हस्ताक्षर होने के 14 महीने के भीतर NATO या गठबंधन सेना की संख्या में कमी किए जाने के साथ-साथ अमेरिकी सैनिकों की वापसी की जाएगी।

तालिबान द्वारा किया गया प्रमुख आतंकवाद-रोधी वादा:

तालिबान अपने किसी भी सदस्य तथा अल-क़ायदा सहित किसी अन्य व्यक्ति अथवा समूह को संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने के लिए अफ़गानिस्तान की जमीं का उपयोग नहीं करने देगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अमेरिका-तालिबान शांति समझौते के बारे में
  2. NATO क्या है।

मेंस लिंक:

अमेरिका-तालिबान शांति समझौते के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: सरकारी बजट।

ग्रीन टैक्स / हरित कर


(Green tax)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री द्वारा ‘ग्रीन टैक्स’ लगाए जाने हेतु निम्नलिखित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है:

  • पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले पुराने वाहनों पर “ग्रीन टैक्स” लगाने हेतु।
  • सरकारी विभाग और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के स्वामित्व वाले, 15 वर्ष से अधिक समय से इस्तेमाल हो रहे वाहनों का पंजीकरण रद्द करने और उन्हें उपयोग से बाहर करने की नीति के लिए।
  • ‘ग्रीन टैक्स’ से प्राप्त राजस्व को एक अलग खाते में रखा जाएगा और इसका उपयोग प्रदूषण से निपटने व उत्सर्जन निगरानी के लिए राज्यों में अत्याधुनिक सुविधाएं स्थापित करने के लिए किया जाएगा।

किन वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ लगाया जाएगा?

  1. 8 साल से अधिक पुराने परिवहन वाहनों पर फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीकरण के समय रोड टैक्स के 10 से 25 फीसदी की दर से ग्रीन टैक्स लगाया जा सकता है।
  2. निजी वाहनों पर 15 वर्षों के बाद पंजीकरण प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के समय ग्रीन टैक्स लगाया जाए।
  3. सार्वजनिक परिवहन के वाहनों जैसे सिटी बसों पर कम ग्रीन टैक्स लगाया जाए।
  4. अत्यधिक प्रदूषित शहरों में पंजीकृत वाहनों के लिए अधिक टैक्स (रोड टैक्स का 50 फीसदी) वसूला जाएगा।
  5. ईंधन (पेट्रोल/डीजल) और वाहनों के प्रकार के मुताबिक अलग-अलग टैक्स होंगे।

‘ग्रीन टैक्स’ से छूट:

  • हाइब्रिड, इलेक्ट्रिक वाहनों और वैकल्पिक ईंधनों जैसे सीएनजी, एथेनॉल, एलपीजी आदि से चलने वाले वाहनों को इससे बाहर रखा जाएगा।
  • खेती में इस्तेमाल होने वाले वाहनों जैसे ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, टिलर आदि पर ग्रीन टैक्स नहीं लगाया जाएगा।

ग्रीन टैक्स” से होने वाले लाभ:

  1. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले वाहनों का उपयोग करने से लोगों को दूर करना।
  2. लोगों को नए और कम प्रदूषण वाले वाहन खरीदने के लिए प्रेरित करना।
  3. ग्रीन टैक्स प्रदूषण के स्तर को कम करेगा और प्रदूषण के लिए प्रदूषकों को भुगतान करना होगा।

आवश्यकता:

  • यह अनुमान लगाया गया है कि वाणिज्यिक वाहन, जोकि कुल वाहनों का लगभग 5 फीसदी है, कुल प्रदूषण के लगभग 65-70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं।
  • पुराने वाहनों के बेड़े में आमतौर पर वर्ष 2000 से पहले निर्मित वाहन लगभग मात्र 1 फीसदी हैं, किंतु कुल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में इनका लगभग 15 फीसदी हिस्सा होता है। ये पुराने वाहन आधुनिक वाहनों की तुलना में 10-25 गुना अधिक प्रदूषण करते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. हाल ही में स्वीकृत किए गए ‘ग्रीन टैक्स’ के बारे में
  2. किन वाहनों पर ‘ग्रीन टैक्स’ लगाया जाएगा?
  3. ग्रीन टैक्स’ से छूट
  4. ग्रीन टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग किस प्रकार किया जाएगा?

मेंस लिंक:

हाल ही में लागू किए गए ‘ग्रीन टैक्स’ के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: सरकारी बजट।

बजटेतर ऋण / ऑफ-बजट ऋण’


(Off-budget borrowing)

संदर्भ:

किसी भी केंद्रीय बजट में, ‘राजकोषीय घाटे’ का स्तर सर्वाधिक ध्यान दिए जाने वाला विवरण होता है। इस पर, देश के अंदर और बाहर की रेटिंग एजेंसियों द्वारा अति उत्सुकता से निगाह रखी जाती है। इसीलिए अधिकांश सरकारें अपने राजकोषीय घाटे को सम्मानजनक अंकों में सीमित रखने का प्रयास करती हैं।

  • इसके लिए कई तरीकों में से एक ‘बजटेतर ऋण / ऑफ-बजट ऋण’ (Off-budget borrowing) का सहारा लिया जाता है।
  • इस तरह के ऋण, खाते में शामिल किये बगैर केंद्र द्वारा अपने व्ययों को पूरा करने की एक विधि होते है। इन ऋणों को राजकोषीय घाटे की गणना करते समय नहीं गिना जाता है।

‘राजकोषीय घाटा’ क्या होता है?

‘राजकोषीय घाटा’ (fiscal deficit), मुख्यतः केंद्र सरकार की आय तथा व्यय का अंतर होता है। दूसरे शब्दों में, यह केंद्र सरकार द्वारा लिए गए ऋणों का स्तर होता है। ‘राजकोषीय घाटा’ किसी भी सरकार के वित्तीय स्वास्थ्य को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण मात्रक होता है।

‘ऑफ-बजट ऋण’ क्या होता है?

‘बजटेतर ऋण / ऑफ-बजट ऋण’ (Off-budget borrowing), केंद्र सरकार के निर्देश पर किसी अन्य सार्वजनिक संस्थान द्वारा लिए गए ऋण होते हैं। इस प्रकार के ऋण सीधे केंद्र सरकार द्वारा नहीं लिए जाते हैं।

  • इस प्रकार के ऋणों का उपयोग सरकार की व्यय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है।
  • चूंकि, इन ऋणों की देयता जिम्मेवारी औपचारिक रूप से केंद्र पर नहीं होती है, इसलिए इन्हें राष्ट्रीय राजकोषीय घाटे में शामिल नहीं किया जाता है।
  • इससे देश के राजकोषीय घाटे को एक स्वीकार्य सीमा के भीतर सीमित रखने में सहायता मिलती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘राजकोषीय घाटा’ क्या है?
  2. ’राजस्व घाटा’ क्या है?
  3. ’प्रभावी राजस्व घाटा’ क्या है?
  4. ‘ऑफ बजट ऋण’ क्या है?
  5. सरकार के राजस्व-स्रोत

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

कृत्रिम रेत (M-sand)


(Manufactured Sand)

संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान सरकार द्वारा बजरी (नदी तट की रेत) पर निर्भरता कम करने के लिए ‘कृत्रिम रेत’ (Manufactured Sand: M-sand) के उत्पादन हेतु एक ‘नीति’ जारी की गयी है। इसके तहत विनिर्माण कार्यों के लिए ‘कृत्रिम रेत’ का उत्पादन करने वाली इकाईयों को उद्योग का दर्जा प्रदान किया जाएगा।

नई नीति की प्रमुख विशेषताएं:

  • इस नीति के तहत, निवेशकों के लिए ‘कृत्रिम रेत’ / एम- सैंड (M-sand) इकाइयों को स्थापित करने हेतु राज्य सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन (incentives) प्रदान किए जाएंगे।
  • यह नीति, पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक होगी और जनता के बीच विनिर्माण कार्यों के लिए ‘कृत्रिम रेत’ की प्रभावकारिता में यकीन उत्पन्न करेगी।
  • यह नीति, नई इकाइयों के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने तथा खनन क्षेत्रों द्वारा उत्पन्न अवशिष्टों की भारी मात्रा संबंधी मुद्दे को हल करने में सहायक होगी।

पृष्ठभूमि:

उच्चतम न्यायालय द्वारा वर्ष 2017 में नदी-तट पर होने वाले अवैध खनन पर रोक लगा दी गयी थी।

‘एम-सैंड’ क्या है?

  • ‘कृत्रिम रेत’ / एम- सैंड (M-sand), कंक्रीट निर्माण कार्यों में प्रयुक्त होने वाली ‘नदी की रेत’ का एक विकल्प है।
  • कठोर ग्रेनाइट पत्थरों को पीस कर कृत्रिम रेत का निर्माण किया जाता है।
  • पिसी हुई रेत खुरदरे किनारों युक्त घनीय आकार (cubical shape) की होती है, इसे निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग करने के लिए धोया जाता है तथा श्रेणीबद्ध किया जाता है।
  • कृत्रिम रेत (M-Sand), आकार में 4.75 मिमी से कम होती है।

कृत्रिम रेत का महत्व:

  1. कृत्रिम रेत, आमतौर पर धूल मुक्त होती है तथा निर्माण के लिए आवश्यकतानुसार, इसके आकार को छोटा-बड़ा किया जा सकता है।
  2. यह आनुपातिक आवश्यकतानुसार में अच्छी तरह से श्रेणीकृत होती है।
  3. इसमें सीमेंट के गुणों तथा जमने के समय को प्रभावित करने वाले कार्बनिक और घुलनशील यौगिक नहीं होते हैं, इससे कंक्रीट की जरूरी शक्ति को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
  4. इसमें मिट्टी, धूल और गाद जैसी अशुद्धियां नहीं होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कृत्रिम रेत (M-Sand) क्या है?
  2. यह किस प्रकार निर्मित किया जाता है?
  3. इसके लाभ।

मेंस लिंक:

कृत्रिम रेत (M-Sand) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

कोविड-19 हेतु भारत बायोटेक की एकल खुराक इंट्रानेजल वैक्सीन, BBV154


(BV154, Bharat Biotech’s single-dose intranasal vaccine for Covid-19)

संदर्भ:

भारत बायोटेक की ‘BBV154’, इंट्रानेजल कोविड-19 वैक्सीन हासिल करने के लिए पहला प्रचारित प्रयास है।

‘इंट्रानेजल वैक्सीन’ क्या होती है?

  • आमतौर पर, टीकों के लिए मांसपेशियों अथवा त्वचा और तवचा की निचले भाग के बीच स्थित उतकों में सुई/ इंजेक्शन के माध्यम से लगाया जाता है।
  • हालांकि, इंट्रानेजल (Intranasal) टीकों के लिए, इंजेक्शन से लगाने के बजाय, नथुनों में स्प्रे किया जाता है अथवा नाक से भीतर की ओर खींचा जाता है।

महामारी के दौरान ‘इंट्रानेजल वैक्सीन’ के लाभ:

  • इस प्रकार के टीके न केवल वैक्सीन के वितरण और इसके लगाए जाने में आने वाली बाधाओं, जैसे कि, टीका लगाने वाली सुइओं का उत्पादन तथा इनका वितरण, को दूर करते है बल्कि नाक, मुंह तथा फेफड़ों के उतकों में पाए जाने वाली प्रतिरक्षा कोशिकाओं के समूहों को सक्रिय करने में सक्षम होते हैं।
  • इंट्रानेजल वैक्सीन, सिरिंज, सुइयों और अल्कोहल स्वाब्स जैसे अन्य उपकरणों जरूरत को कम करते हैं।
  • यह सुई लगने से होने वाले जख्मों और संक्रमण की आशंका दूर करते है और इन टीकों को रोगी के लिए दिया जाना भी आसान होता है, क्योंकि इसके लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की भी आवश्यकता नहीं होती है।
  • इन टीकों की केवल ‘एक-खुराक’ (single-dose) दी जाती है, जिससे टीका लगवाने वालों के लिए सुगमता हो जाती और उन्हें कोविड-19 के लिए इंजेक्शन से दिए जाने वाले मौजूदा टीकों की दूसरी खुराक, बूस्टर शॉट्स के लिए दोबारा चिकित्सा अथवा सुविधा केंद्र पर नहीं जाना पड़ता है।

‘इंट्रानेजल वैक्सीन’ के लिए संभावित रुकावटें:

  • खसरा फ्लू सहित अन्य बीमारीयों के लिए ‘इंट्रानेजल वैक्सीन’ अर्थात नाक से दिए जाने वाले टीका विकसित करने के पिछले प्रयास बहुत सफल नहीं रहे हैं।
  • अधिकांशतः ये टीके जीवित एवं कमजोर विषाणुओं का उपयोग करके बनाए गए हैं, लेकिन कभी भी नैदानिक परीक्षण को पास नहीं कर सके।
  • टीकाकरण की इस विधि के तहत अब तक केवल एक जीवित क्षीणीकृत इन्फ्लूएंजा फ्लू (attenuated influenza flu) वैक्सीन को लाइसेंस दिया गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885


(Indian Telegraph Act, 1885)

संदर्भ:

हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद  केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन (पब्लिक सेफ्टी रूल्स 2017) [Temporary Suspension of Telecom Services (Public Safety Rules 2017) of the Indian Telegraph Act, 1885] के तहत दिल्ली के कुछ भागों में इंटरनेट निलंबित करने के आदेश जारी किए गए।

इस अधिनियम के तहत इस प्रकार के आदेश, दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान, 19 दिसंबर और 20 दिसंबर, 2019 को दो बार पहले भी जारी किया जा चुका है।

निहितार्थ:

वर्ष 2017 में बनाए गए इस नियम के तहत केंद्रीय गृह सचिव और किसी राज्य के गृह सचिव को “सार्वजनिक आपातकाल या सार्वजनिक सुरक्षा के कारण” इंटरनेट सहित दूरसंचार सेवाओं को निलंबित करने के निर्देश पारित करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

‘भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम’, 1885 के बारे में:

इस अधिनियम के तहत, ‘तार एवं बेतार तारसंचार’ (wired and wireless telegraphy), टेलीफोन, टेलीटाइप, रेडियो संचार और डिजिटल डेटा संचार के उपयोग को नियंत्रित किया जाता है।

  • इसके तहत भारत सरकार को भारतीय क्षेत्र में सभी प्रकार के ‘तार एवं बेतार’ संचार स्थापित करने, रखरखाव, संचालन, लाइसेंसिंग और निगरानी के लिए विशेष अधिकार क्षेत्र और विशेषाधिकार प्रदान किए गए है।
  • भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम’, 1885, भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को भारतीय संविधान में परिभाषित शर्तों के अधीन संचार और फोन लाइनों की निगरानी / अवरोधन करने के लिए अधिकृत किया गया है।

भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2)  में केंद्र और राज्य सरकारों के लिए “भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित” में संदेशो के अवरोधन (Interception) करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के बारे में
  2. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2)
  3. अधिनियम के तहत केंद्र और राज्यों को प्राप्त शक्तियां।
  4. इंटरनेट निलंबन करने संबंधी नियम और कानून

मेंस लिंक:

1885 के भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5 (2) से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


पद्म पुरस्कार

(Padma Awards)

संदर्भ:

इस वर्ष सात हस्तियों के लिए पद्म विभूषण,  दस के लिए पद्म भूषण और 102 हस्तियों को पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किए गए हैं।

‘पद्म पुरस्कारों’ के बारे में:

  • प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किये जाने वाले पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक है।
  • यह पुरस्कार, सार्वजनिक सेवा से संबंधित सभी कार्यो या विषयों में उत्कृष्ट उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करते है।
  • ये पुरस्कार, पद्म पुरस्कार समिति द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर प्रदान किए जाते है। इस समिति का गठन प्रधान मंत्री द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है।

पद्म पुरस्कार तीन श्रेणियों में प्रदान किए जाते हैं:

  1. पद्म विभूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए)
  2. पद्म भूषण (उच्च श्रेणी की विशिष्ट सेवा)
  3. पद्म श्री (विशिष्ट सेवा)

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आकाश-एनजी मिसाइल

(Akash-NG Missile)

  • हाल ही में, DRDO ने ओडिशा तट पर स्थित से एकीकृत परीक्षण रेंज से आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल का सफल पहला प्रक्षेपण किया है।
  • आकाश-एनजी एक नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना द्वारा उपयोग के लिए ऊंचाई से हमला करने वाले कम आरसीएस हवाई खतरों को रोकना है ।

भारत पर्व 2021

(Bharat Parv)

  • यह, प्रतिवर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के साथ आयोजित किया जाने वाला एक बड़ा कार्यक्रम है।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016 में की गयी थी।
  • इस कार्यक्रम में देशभक्ति की भावना पैदा करने की परिकल्पना की गई है और इसमें देश की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया जाता है।
  • भारत पर्व 2021 का आयोजन पर्यटन मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।

बांग्लादेशी सैन्य-दल द्वारा गणतंत्र दिवस परेड में भागीदारी

  • पहली बार, गणतंत्र दिवस समारोह में बांग्लादेश सशस्त्र बलों के एक 122 सदस्यीय सैन्य दल ने भाग लिया है।
  • इस साल बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम (1971) की 50 वीं वर्षगांठ भी है।

वर्ष 1971 की लड़ाई के दौरान महत्वपूर्ण घटनाएँ:

  • बांग्लादेश की नौसेना ने युद्ध के दौरान समुद्री बंदरगाहों और नदीय बंदरगाहों में दुश्मन के 26 जहाजों को नष्ट करते हुए “ऑपरेशन जैकपॉट” को सफलतापूर्वक पूरा किया था।
  • बांग्लादेश एयर फोर्स ने ‘केलो फ्लाइट’ (Kilo Flight) के रूप में, भारत के दीमापुर में बेस से, दुश्मन के ठिकानों पर 50 सफल हमले किए थे।

‘गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा’ क्या है?

(What is non-price competition?)

  • गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा, उन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा को संदर्भित करती है जो कीमतों को प्रभावित नहीं करने वाले सभी सुविधाएँ और उपाय के साथ-साथ लाभ, अतिरिक्त सेवाओं, अच्छी कारीगरी, उत्पाद की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
  • यह कीमत प्रतिस्पर्धा के विपरीत होती है, जिसमें प्रतिद्वंद्वी अपने उत्पादों की कीमतें कम करके बाजार में हिस्सेदारी बढाने की कोशिश करते हैं।
  • गैर-कीमत प्रतिस्पर्धा, अक्सर किसी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी खिलाड़ियों द्वारा ‘कीमत युद्ध’ को रोकने के लिए अपनाया जाती है।

संदर्भ:

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, डेटा गोपनीयता, गैर-मूल्य प्रतिस्पर्धा का रूप ले सकती है तथा प्रभुत्व का दुरुपयोग, गोपनीयता संरक्षण को कम कर सकता है।

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जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन 2021

25 जनवरी 2021 को नीदरलैंड सरकार द्वारा जलवायु अनुकूलन शिखर सम्मेलन (climate adaptation summit) की मेजबानी की गई।

  • यह शिखर सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित किया गया था और इसे “सीएएस ऑनलाइन” (CAS Online) का नाम दिया गया।
  • यह शिखर सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन के विकास के आधार पर आयोजित किया गया था।
  • शिखर सम्मेलन में UNFCCC के COP26 के माध्यम से सतत गति तथा जलवायु आपातकाल के मार्गदर्शक समाधानो का प्रदर्शन किया गया।
  • इस शिखर सम्मेलन को जलवायु-प्रत्यास्थ विश्व के लिए आवश्यक बदलावों को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

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