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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 22 जनवरी 2021

 

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. जनजातीय एवं किसान आंदोलनों तथा विद्रोहों को इतिहास में अक्सर ऐसे स्वतःस्फूर्त आंदोलनों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिनमें अशिक्षित लोगों के गैर-राजनीतिक समूहों का गुस्सा फूट पड़ता है न कि जागरूक निर्णय निर्माताओं के रूप में। लेकिन, राजमहल पहाड़ियों के संथालों ने इस भावना से विद्रोह नहीं किया था। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष: बिपिन चंद्र

निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

उत्तर की संरचना:

परिचय:

संथाल एवं उनके विद्रोह के सन्दर्भ में एक संक्षिप्त संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

विषय वस्तु:

समझाइए कि कितने किसान एवं जनजातीय विद्रोह स्वतः स्फूर्त, अव्यवस्थित एवं प्रतिक्रियावादी थे। उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

संथाल विद्रोह के बारे में चर्चा कीजिए। विद्रोह के प्रारम्भ होने के कारणों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

संथाल विद्रोह अन्य विद्रोहों से कैसे भिन्न था? विस्तार से समझाइए। 

निष्कर्ष:

संथाल हूल की विरासत के सन्दर्भ में चर्चा करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

2. अंग्रेजों द्वारा भारत की विजय, भारतीय सामाजिक संस्थाओं की कुछ गंभीर कमजोरियों एवं कमियों को उजागर करती है। एक परिणाम के रूप में, कई व्यक्तियों तथा आंदोलनों ने समाज में सुधार एवं पुनरोद्धार की दृष्टि से सामाजिक एवं धार्मिक प्रथाओं में बदलाव लाने की मांग की। स्पष्ट कीजिए। भारतीय समाज में सुधार करने के लिए कौन-कौन से उपाय अपनाए गए थे? (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष: बिपिन चंद्र

 निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

उन्नीसवीं सदी में भारत के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारतीय समाज में प्रचलित विभिन्न बुराइयों जैसे- सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, विधवा पुनर्विवाह का विरोध, जाति व्यवस्था, महिला शिक्षा की कमी एवं सांप्रदायिकता का विस्तार से उल्लेख कीजिए।

समझाइए कि भारत की ब्रिटिश विजय ने इन कमियों को कैसे उजागर किया।

भारत में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों का कारण बनने वाले विभिन्न व्यक्तियों एवं संगठनों का उल्लेख कीजिए।

भारतीय समाज में सुधार के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

इन व्यक्तियों एवं संस्थाओं ने भारतीय समाज को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ जनता के बीच राष्ट्रवाद को कैसे बढ़ावा दिया, समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

3. प्राचीन भारतीय मूर्तिकला अपनी परंपराओं में अत्यधिक समृद्ध है। सिंधु घाटी सभ्यता से प्रारम्भ करते हुए प्राचीन भारतीय मूर्तिकला के विकास पर प्रकाश डालिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Indian Express 

निर्देशक शब्द:

प्रकाश डालिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर लेखन में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह प्रश्न से सम्बंधित प्रासंगिक जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारतीय मूर्तिकला की शानदार एवं समृद्ध विरासत के बारे में एक संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए।

 विषय वस्तु:   

भारतीय मूर्तिकला के विकास पर चर्चा करने के लिए आप अपने उत्तर को सिंधु घाटी सभ्यता से प्रारम्भ करते हुए विभिन्न समयावधि जैसे: मौर्य काल, उत्तर मौर्य काल, गुप्त काल एवं उत्तर गुप्त काल में विभाजित कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, दक्षिण भारत में चोल साम्राज्य के अधीन मूर्तिकला के विकास पर भी चर्चा कीजिए। इसके साथ ही धार्मिक मूर्तिकला जैसे- बौद्ध, जैन तथा हिंदू के विकास का भी उल्लेख कीजिए।

विभिन्न युगों की मूर्तिकला की प्रमुख एवं सुपरिभाषित विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

भारत के समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास में मूर्तिकला के महत्व पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

4. प्रभावी ढंग से और सार्थक रूप से राज्य के साथ जुड़ने के तीन वैध उपायों में से विरोध ही एकमात्र उपाय है, जिसमें भारत में एक शक्तिशाली शासक के अधीन राज्य पर प्रभाव डाला जा सकता है। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Business Standard 

आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

उत्तर की संरचना:

परिचय:

राज्य के साथ जुड़ने के तीन वैध उपायों: मतदान, मुकदमा एवं विरोध का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

समझाइए कि विरोध को सरकार को प्रभावित करने के एकमात्र उपाय के रूप में क्यों देखा जाता है एवं पिछले दशकों में विरोध प्रदर्शनों के बढ़ते रुझानों के कारण स्पष्ट कीजिए।

हालांकि विरोध एक संवैधानिक अधिकार है, लेकिन विरोध की सीमाओं का उल्लेख कीजिए एवं लोकतंत्र में उपलब्ध सभी तीन उपायों का उपयोग करते हुए सरकार की जवाबदेहिता को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

मतदाताओं के प्रति जवाबदेहिता एवं मुकदमेबाजी को सशक्त करने के लिए सुझाव दीजिए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय।

5. कृषि के लिए बाजार मूल्य समर्थन की पद्धति का वर्णन कीजिए। अंतर्राष्ट्रीय एवं घरेलू कीमतों के मध्य अंतर को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं? कृषि के लिए बाजार मूल्य समर्थन की गणना करने के लिए ओईसीडी पद्धति की क्या सीमाएं हैं? (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 वर्णन कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

स्पष्ट एवं सरल शब्दों में कृषि के लिए बाजार मूल्य समर्थन का वर्णन करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

कृषि के लिए बाजार मूल्य समर्थन की कार्यप्रणाली का उल्लेख कीजिए। इसके विभिन्न घटकों के बारे में लिखिए। संदर्भित लेख की सहायता से उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के मध्य सकारात्मक अथवा नकारात्मक अंतर को प्रभावित करने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए।

बाजार मूल्य समर्थन की गणना करने के लिए ओईसीडी पद्धति की सीमाओं का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

भारतीय कृषि के लिए बाजार मूल्य समर्थन एवं इसकी आवश्यकता का संतुलित विचार प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र।

 6. भारतीय परंपरा में नैतिकता के स्रोत एवं उनके आदर्श क्या हैं? (150 शब्द)

सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

यह उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए कि भारत की परंपरा अनेक नैतिक एवं सदाचार से सम्बंधित लेखों का भंडार है।

विषय वस्तु:

विभिन्न स्रोतों जैसे – वेद, उपनिषद, धर्मशास्त्र, स्मृतियाँ, बौद्ध धर्मग्रंथ, जैन नैतिकता, भगवद् गीता, लोकगाथा, सूफ़ी एवं भक्ति संतों की शिक्षाएँ, आधुनिक दार्शनिक जैसे स्वामी विवेकानंद एवं महत्मा गाँधी आदि की शिक्षाएँ आदि का विस्तार से उल्लेख कीजिए।

उपर्युक्त स्रोतों या व्यक्तित्वों की शिक्षाओं के प्रमुख नैतिक एवं दार्शनिक सिद्धांतों का वर्णन कीजिए।

निष्कर्ष:

उपरोक्त के समकालीन महत्व को दर्शाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

 7. थॉमस हॉब्स के नैतिक दर्शन पर एक संक्षिप्त लेख लिखिए। (150 शब्द)

 सन्दर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 लेख लिखिए- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ के आधार पर उसके सभी पहलुओं को शामिल करते हुए उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

थॉमस हॉब्स का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत कीजिए।

विषय वस्तु:

हॉब्स की शिक्षाओं के प्रमुख पहलुओं को संक्षेप में समझाइए।

राज्य एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हॉब्स के अन्य सिद्धांतों के बारे में बताइये। इसके अलावा, एक अथवा दो वाक्यों में होब्स की आलोचना के बिंदु भी शामिल कीजिए।

निष्कर्ष:

हॉब्स के नैतिक सिद्धांत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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