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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 21 January 2021

 

विषय – सूची

  

सामान्य अध्ययन-I

1. वीर सावरकर

 

सामान्य अध्ययन-II

1. उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘आधार’ मामले पर समीक्षा याचिकाएं खारिज

2. ‘कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण अध्यादेश’ 2020

 

सामान्य अध्ययन-III

1. उच्चतम न्यायालय द्वारा IBC की धारा 32 A को बरक़रार रखा गया है: महत्व एवं निहितार्थ

2. नीति आयोग का ‘भारत नवाचार सूचकांक’

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. कमलम (Kamalam)

2. हूती (Houthi)

3. ‘सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट’ (SOFR) क्या है?

4. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री द्वारा ‘रीसा’ को प्रोत्साहन

5. नए अमेरिकी राष्ट्रपति

6. वाहिकाजनन / एंजियोजेनेसिस

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

वीर सावरकर


संदर्भ:

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के एक विधान परिषद् सदस्य द्वारा हिंदू महासभा के नेता विनायक दामोदर सावरकर के चित्र को राज्य विधान परिषद की तस्वीर गैलरी से हटाने की मांग की गयी है। विधान परिषद् सदस्य ने कहा है, कि सावरकर के चित्र को स्वतंत्रता सेनानियों के बगल में लगाया जाना इनका अपमान है। इससे राज्य में विवाद छिड़ गया है।

कौन हैं वीर सावरकर?

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में भागुर शहर में हुआ था।

राष्ट्रवाद और सामाजिक सुधार:

  • इन्होने, ‘मित्र मेला’ नामक एक युवाओं के संगठन का गठन किया था। इस संगठन की स्थापना राष्ट्रीय और क्रांतिकारी विचार उत्पन्न करने के लिए की गयी थी।
  • वह विदेशी वस्तुओं के विरोधी थे और ‘स्वदेशी’ के विचार का समर्थन करते थे।
  • उन्होंने नास्तिकता और तार्किकता का समर्थन किया और रूढ़िवादी हिंदू विचारों का खंडन किया। वास्तव में, उन्होंने गाय की पूजा को भी अंधविश्वास कह कर खारिज कर दिया।
  • विनायक सावरकर , वर्ष 1937 से 1943 के दौरान हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे।
  • 22 अक्टूबर 1939 को कांग्रेस मंत्रालयों द्वारा त्यागपत्र दिए जाने के बाद, इनके नेतृत्व में हिंदू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ मिलकर सिंध, बंगाल और पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत (NWFP) प्रांतों में सरकार बनाने के लिए सहयोग किया।
  • सावरकर ने, पुणे में, “अभिनव भारत समाज” नामक संगठन की स्थापना की।
  • इन्होने, लोकमान्य तिलक की स्वराज पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण की।
  • इन्होंने ‘फ्री इंडिया सोसाइटी’ की स्थापना की। इस सोसायटी के द्वारा त्योहारों, स्वतंत्रता आंदोलन संबंधी प्रमुख घटनाओं सहित भारतीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण तिथियों को मनाया जाता था और यह भारतीय स्वतंत्रता के संदर्भ में विमर्श को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित थी।
  • वह भारत को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए हथियारों का इस्तेमाल करने पर यकीन और समर्थन करते थे और इन्होने इंग्लैंड में, हथियारों से लैस भारतीयों का एक नेटवर्क भी तैयार किया।

महत्वपूर्ण कार्य:

  1. पुस्तक- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास।
  2. मॉर्ले-मिंटो सुधार के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह।
  3. अपनी ‘हिंदुत्व’ नामक पुस्तक में दो-राष्ट्र सिद्धांत।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. मित्रा मेला, अभिनव भारत सोसाइटी और फ्री इंडिया सोसाइटी की स्थापना किसने की थी? इनके उद्देश्य क्या थे?
  2. सावरकर द्वारा लिखित पुस्तकें?
  3. सावरकर की पुस्तक, जो मैडम भीकाजी कामा द्वारा प्रकाशित की गई थी?
  4. मॉर्ले-मिंटो सुधार: प्रमुख प्रावधान
  5. भारत को आज़ाद करने के लिए हथियारों के इस्तेमाल पर सावरकर के विचार
  6. हिंदू महासभा- प्रमुख उपलब्धियां

मेंस लिंक:

देश में होने वाले सामाजिक सुधारों में वीर सावरकर के योगदान पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

उच्चतम न्यायालय द्वारा ‘आधार’ मामले पर समीक्षा याचिकाएं खारिज


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय ने, बहुमत से, वर्ष 2018  में दिए गए अपने निर्णय की समीक्षा करने के संबंध में दायर की गयी याचिकाओं को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदलत ने अपने फैसले में, लोकसभा अध्यक्ष द्वारा ‘आधार’ कानून को ‘धन-विधेयक’ के रूप में प्रमाणित करने तथा संसद में इस क़ानून को पारित करने को बरकरार रखा था।

पृष्ठभूमि:

सरकार द्वारा ‘आधार विधेयक’ को ‘धन विधेयक’ के रूप में सदन में प्रस्तुत किया गया था, जिससे इसे पारित करने के लिए राज्यसभा में बहुमत हासिल करने की आवश्यकता नहीं रही। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पांच-न्यायाधीशों की एक पीठ ने 26 सितंबर, 2018 को 4:1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए ‘आधार क़ानून’ को बरकरार रखा था।

‘धन विधेयक’ के रूप में ‘आधार विधेयक’:

आधार अधिनियम की धारा 7  में प्रावधान है कि कल्याणकारी योजनाओं के तहत प्रदान की जाने वाली सब्सिडी, सेवाएँ अथवा सुविधाओं से संबंधित व्यय भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से पूरा किया जाएगा। इस प्रावधान की वजह से, ‘आधार विधेयक’ को धन विधेयक की श्रेणी में वर्गीकृत किए जाने हेतु ‘अर्हता’ प्राप्त करार दिया गया।

संबंधित प्रकरण:

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, अदालत में दो मुद्दों पर याचिकाएँ दायर की गईं। इसमें शामिल है:

  1. क्या ‘लोक सभा के अध्यक्ष का निर्णय किसी विधेयक को धन विधेयकके रूप में प्रमाणित करना अंतिम है और अदालत में इसे चुनौती नही दी जा सकती है’?
  2. क्या आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवा के लक्षित वितरण) अधिनियम, 2016 को संविधान के अनुच्छेद 110 (1) के तहत ‘धन विधेयक’ के रूप में सही ढंग से प्रमाणित किया गया था।

अदालत की टिप्पणियाँ:

  1. लोक सभा अध्यक्ष के फैसले को “कुछ परिस्थितियों” के तहत ही अदालत में चुनौती दी जा सकती है।
  2. ‘आधार अधिनियम’ को ‘धन विधेयक’ कहना सही है।

‘धन विधेयक’ क्या होता है?

  • ‘धन विधेयक’ (Money Bil), वह विधेयक होता है, जिसमे करों, धन के विनियोग आदि से संबंधित प्रावधान सम्मिलित होते हैं।
  • धन विधेयक को केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है, और लोकसभा द्वारा पारित इस प्रकार के विधेयकों में राज्य सभा द्वारा संशोधन नहीं किया जा सकता है।
  • धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा केवल संशोधन करने का सुझाव दे सकती है, लेकिन उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करना लोकसभा के ऊपर निर्भर करता है।
  • अनुच्छेद 110(1) के तहत, किसी विधेयक को एक धन विधेयक माना जाता है, यदि यह अनुच्छेद 110(1)(क) से (छ) में निर्दिष्ट मामलों- कर, सरकार द्वारा ऋण लेने तथा भारत की संचित निधि ने धन का विनियोग आदि- से संबंधित है।
  • संविधान के अनुच्छेद 110 (3) के अनुसार, “यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं तो उस पर लोकसभा के अध्यक्ष का विनिश्चय अंतिम होगा”।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘धन विधेयक’ क्या है?
  2. ‘वित्त विधेयक’ क्या है?
  3. इस संबंध में अध्यक्ष की शक्ति।
  4. अनुच्छेद 110(1) (क) से (छ)।
  5. ‘धन विधेयक’ के संबंध में राज्यसभा की शक्तियाँ।

मेंस लिंक:

सुप्रीम कोर्ट ने आधार योजना के अतिक्रमण और हाशिए पर स्थित लोगों के लिए इसके लाभों के बीच एक व्यावहारिक मध्यम मार्ग की तलाश की है। विश्लेषण कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

कर्नाटक मवेशी वध रोकथाम एवं संरक्षण अध्यादेश’ 2020


 (Karnataka Prevention of Slaughter and Preservation of Cattle Ordinance, 2020)

संदर्भ:

कर्नाटक सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के लिए एक वचन / अंडरटेकिंग दिया गया है, जिसमे कहा गया है, कि जब तक, हाल ही में अधिसूचित मसौदा नियमों के आधार पर संबंधित नियमों को लागू नहीं किया जाता है, तब तक मवेशियों को ढोने पर ‘मवेशी अध्यादेश, 2020’ के उल्लंघन में कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी।

संबंधित प्रकरण:

उच्च न्यायालय द्वारा, हाल ही में लागू किए गए अध्यादेश की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई की जा रही है।

  • सरकार द्वारा अभी तक मवेशियों के ढोने संबंधी नियमों को निर्धारित नहीं किया गया है।
  • राज्य की सीमा में किसानों द्वारा मवेशियों का परिवहन करने पर, प्रमाणिक रूप से पशुपालन और कृषि-कार्यों के लिए छूट दिए जाने के बावजूद, संभावित रूप से अभियोग चलाए जाने की आशंकाएं हैं।

अध्यादेश के विवादास्पद प्रावधान

जांच करने की शक्ति:

  • क़ानून का उल्लंघन करने संबंधी मामलों को जांच करने की शक्ति पुलिस सब-इंस्पेक्टर या उसके ऊपर के सक्षम अधिकारी को दी गयी है। जांच अधिकारी के पास किसी परिसर की तलाशी लेने और मवेशियों तथा अपराध में उपयोग किये गए या उपयोग करने के इरादे से रखे गए उपकरणों को जब्त करने की शक्ति होगी।
  • इस तरह की कोई बरामदगी होने पर, बिना किसी देरी के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट के सामने रिपोर्ट की जाएगी।

दंड-विधान

  • गौ-हत्या एक संज्ञेय अपराध है और इसका उल्लंघन करने पर तीन से सात साल के कारावास दंड दिया जा सकता है।
  • पहली बार किये गए अपराध के लिए 50,000 रुपये से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, दूसरी बार या इसके आगे पुनः अपराध करने पर 1 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. विधेयक की प्रमुख विशेषताएं
  2. अन्य राज्यों में इस प्रकार के कानून
  3. भारत में दूध उत्पादन और खपत।
  4. श्वेत क्रांति- विशेषताएं और प्रभाव।

मेंस लिंक:

गौ-हत्या रोधी कानूनों के पीछे तर्क और निहितार्थ पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

उच्चतम न्यायालय द्वारा IBC की धारा 32 A को बरक़रार रखा गया है: महत्व एवं निहितार्थ


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय में ‘दिवाला एवं दिवालियापन संहिता’ (Insolvency and Bankruptcy Code- IBC) की धारा 32A को बरकरार रखा है।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय में की गयी टिप्पणियाँ:

शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में, ‘दिवाला एवं दिवालियापन संहिता’ (IBC) की धारा 32 A की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा:

  1. ‘दिवाला एवं दिवालियापन संहिता’ (IBC) के लिए, कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (corporate insolvency resolution process- CIRP) के यथासमय पूरी करने को सुनिश्चित करने हेतु, कॉर्पोरेट देनदारों के लिए उपयुक्त एवं उचित कीमत की पेशकश करने वाले बोली-प्रदाताओं को आकर्षित करना महत्वपूर्ण है।
  2. हालांकि, इन बोली-प्रदाताओं को अतीत में किए गए किसी भी दुष्कृत्य से सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए क्योंकि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं था।
  3. अदालत ने कहा है, कि किसी कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति के लिए भी इस तरह की सुरक्षा का विस्तार किया जाना चाहिए। यह संभावित बोली-प्रदाताओं के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण होगा और कंपनी का मूल्यांकन करने और निष्पक्ष बोली लगाने में उनकी मदद करेगा, जिससे बैंकों के लिए ख़राब ऋणों को अपने खातों से हटाने में सहायता मिलेगी।

‘धारा 32A क्या है?

  • धारा 32A में प्रावधान है, कि एक बार न्यायायिक प्राधिकरण (Adjudicating Authority- AA) द्वारा समाधान योजना को मंजूरी दिए जाने के बाद, कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) की शुरुआत से पहले किए गए अपराध के लिए कॉरपोरेट देनदार पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।
  • इस धारा में प्रावधान किया गया है, इस तरह की समाधान योजना के तहत शामिल कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

विवाद का कारण:

धारा 32A में, इस प्रकार के ऐसे अपराध के लिए हर उस व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराया जाता है जो कॉर्पोरेट देनदार के व्यवसाय के संचालन में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, किसी भी तरीके से संबद्ध रहा हो अथवा उसका कोई ‘नामित साझेदार’ या व्यवसाय में कोई निर्दिष्ट अधिकारी अथवा प्रभारी के रूप में सम्मिलित रहा हो।

उच्चतम न्यायालय द्वारा IBC की धारा 32 A को बरक़रार क्यों महत्वपूर्ण है?

  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा धारा 32A की वैधता को बरकरार रखने से, भूषण पावर जैसे मामलों के शीघ्र निपटान होने की संभावना है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार, इससे अन्य बोली लगाने वालों के लिए इस प्रकार की विवादित कंपनियों और उनकी परिसंपत्तियों पर बोली लगाते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

नीति आयोग का ‘भारत नवाचार सूचकांक’  


संदर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग द्वारा ‘भारत नवाचार सूचकांक’ (India Innovation Index) का दूसरा संस्करण जारी किया गया है।

सूचकांक में विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन:

  1. कर्नाटक ने सूचकांक में लगातार दूसरे वर्ष शीर्ष नवप्रवर्तनशील राज्य का स्थान हासिल किया है।
  2. तमिलनाडु को पीछे छोड़ते हुए महाराष्ट्र ने दूसरा स्थान हासिल किया है।
  3. तेलंगाना और केरल को क्रमशः चौथा एवं पांचवा स्थान प्रदान किया गया है। मिला
  4. सूचकांक में बिहार को सबसे निचला स्थान हासिल हुआ है।
  5. पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की रैंकिंग में हिमाचल प्रदेश शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद उत्तराखंड, मणिपुर और सिक्किम का स्थान है।
  6. छोटे अथवा शहर-राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली शीर्ष स्थान पर रही है, इसके बाद चंडीगढ़, दमन और दीव और पुदुचेरी का स्थान है।

‘भारत नवाचार सूचकांक’ के बारे में:

यह सूचकांक, नी‍ति आयोग द्वारा प्रतिस्पर्धात्मकता संस्‍थान (Institute for Competitiveness) के साथ मिलकर तैयार किया जाता है।

यह सूचकांक, भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नवाचार माहौल के निरंतर मूल्यांकन हेतु एक व्यापक रूपरेखा बनाने का प्रयास करता है और इसका तीन निम्नलिखित उद्देश्य हैं:

  1. सूचकांक स्कोर के आधार पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रैंकिंग करना।
  2. अवसरों और चुनौतियों की पहचान करना।
  3. नवाचार को बढ़ावा देने के लिये सरकारी नीतियों को मज़बूत करने में सहायता करना।

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भारत नवाचार सूचकांक के औसत स्कोर की गणना दो आयामों- सक्षम-कर्ता (Enablers) और प्रदर्शन (Performance) के आधार पर की जाती है।

  1. सक्षम-कर्ता वे कारक होते हैं जो अभिनव क्षमताओं को रेखांकित करते हैं। इनको पाँच स्तंभों में वर्गीकृत किया गया है: (1) मानव पूंजी, (2) निवेश, (3) ज्ञान कार्यकर्त्ता, (4) व्यावसायिक वातावरण, और (5) सुरक्षा और कानूनी वातावरण।
  2. प्रदर्शन आयाम में उन लाभों की गणना की जाती है जिनके लिए देश में प्रयुक्त लागत के बाद हासिल किया जाता है। इसको दो भागों में वर्गीकृत किया गया है: (6) ज्ञान उत्पादन (Knowledge Output) और (7) ज्ञान प्रसार (Knowledge Diffusion)।

इस सूचकांक का महत्व:

भारत के पास दुनिया में इनोवेशन लीडर बनने का एक अनूठा अवसर है। भारत में क्लस्टर आधारित नवाचार को प्रतिस्पर्धा के केंद्र बिंदु के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

  • यह सूचकांक देश में नवाचार-वातावरण में सुधार करने हेतु एक महत्वपूर्ण शुरुआत है क्योंकि यह विचारों के इनपुट और आउटपुट दोनों घटकों पर केंद्रित है।
  • यह सूचकांक, राज्यों के मध्य प्रदर्शन बेंचमार्क स्थापित करने और प्रतिस्पर्धी संघवाद को बढ़ावा देने के लिए एक अच्छा प्रयास है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ के बारे में।
  2. ‘नीति आयोग नवाचार सूचकांक’ के बारे में।
  3. विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन।
  4. रैंकिंग के लिए मानदंड।

मेंस लिंक:

ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


कमलम (Kamalam)

  • हाल ही में, गुजरात सरकार द्वारा ‘ड्रैगन फ्रूट’ का नाम परिवर्तित करके ‘कमलम’ किए जाने का फैसला किया गया है।
  • ‘कमलम’ शब्द एक संस्कृत शब्द है।
  • ‘ड्रैगन फ्रूट’ का आकार कमल के फूल से मिलता जुलता है।

हूती (Houthi)

अमेरिका द्वारा हूती (Houthi) को ‘आतंकी संगठन’ का दर्जा दिए जाने की समीक्षा की जाएगी।

  • ‘हूती’ की स्थापना शिया संप्रदाय के जैदी विद्वानों द्वारा की गयी थी, जो हजार वर्षों से अधिक समय से यमन के निवासी हैं और उन्होंने कई शताब्दियों तक देश पर शासन भी किया था।
  • लगभग एक दशक पहले सऊदी समर्थित सरकार के खिलाफ इनका विद्रोह शुरू हुआ था।

‘सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट’ (SOFR) क्या है?

भारतीय स्टेट बैंक द्वारा  ‘सिक्योर्ड ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट’ (SOFR) का उपयोग बेंचमार्क के रूप में किया जाता है।

  • SOFR, एक अंतर-बैंक सुरक्षित रातभर के लिए ब्याज दर और संदर्भ दर होती है।
  • यह राजकोषीय पुनर्खरीद बाजार (रेपो), रातभर के लिए ऋण के रूप में प्रदान की गयी अथवा ली गई राशि पर आधारित होती है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री द्वारा ‘रीसा’ को प्रोत्साहन

‘रीसा’ (Risa), त्रिपुरा के स्वदेशी जनजातीय समुदायों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला हाथ से बुना हुआ एक पारंपरिक वस्त्र है।

  • यह त्रिपुरा में महिलाओं की पारंपरिक पोशाक के तीन भागों में से एक है, अन्य दो वस्त्र रिग्नाई और रिकुटु हैं।
  • रीसा का उपयोग एक सिर की पगड़ी, दुपट्टा और महिलाओं के ऊपरी वस्त्र के रूप में किया जाता है तथा इसे किसी व्यक्ति को सम्मानित करने के लिए भेंट किया जाता है।

नए अमेरिकी राष्ट्रपति

  • हाल ही में, जो बिडेन ने 46 वें अमेरिकी राष्ट्रपति और कमला हैरिस ने 49 वें उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है।
  • बिडेन अमेरिकी इतिहास में सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे।
  • कमला हैरिस संयुक्त राज्य अमेरिका की पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली भारतीय अमेरिकी उपराष्ट्रपति होंगी।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका में नवनिर्वाचित या पुनः निर्वाचित राष्ट्रपति चुनाव के बाद 20 जनवरी को अपने चार साल के कार्यकाल की शुरुआत करता है।
  • अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाने के लिए किसी विशिष्ट अधिकारी का उल्लेख नहीं किया गया है, किन्तु यहाँ मुख्य न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई जाती है।

वाहिकाजनन / एंजियोजेनेसिस

(Angiogenesis)

  • ट्यूमर की सूक्ष्म-परिवेश में प्रतिपूरक वाहिकाजनन / एंजियोजेनेसिस तंत्र का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ता CRISPR / Cas9 जीन-एडिटिंग पद्धति के उपयोग से ट्रांसजेनिक ज़ेब्राफिश मॉडल विकसित करने के लिए कार्य कर रहे हैं।
  • एंजियोजेनेसिस एक शारीरिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से वाहिकाजनन (vasculogenesis) के पहले चरण में, पहले से मौजूद वाहिकाओं से नई रक्त वाहिकाएं बनती हैं।
  • यह वृद्धि और विकास के साथ-साथ घाव भरने और दानेदार ऊतकों के निर्माण में एक सामान्य और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है।

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