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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. विवाह के लिए आयु-निर्धारण करने हेतु गठित कार्यबल की रिपोर्ट

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ‘पदोन्नति में आरक्षण’ पर उच्चतम न्यायलय के दिशा-निर्देश

2. भारत के सबसे महंगे मशरूम के लिए जीआई टैग की मांग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. बैड बैंक की बैलेंस शीट

2. सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. डेजर्ट नाइट-21 युद्धाभ्यास

2. मोटर बाइक एम्बुलेंस ‘रक्षिता’

3. सारी चू / त्सारी चू नदी

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

विवाह के लिए आयु-निर्धारण करने हेतु गठित कार्यबल की रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में, महिलाओं के लिए विवाह की उपयुक्त उम्र पर एक बार पुनः विचार करने के लिए गठित कार्यबल (Task Force) ने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और महिला और बाल विकास मंत्रालय को सौंप दी है।

इस कार्यबल की अध्यक्षता जया जेटली द्वारा की गयी थी।

कार्यबल का गठन कब किया गया था?

पिछले वर्ष, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा अपने बजट भाषण में मातृ मृत्यु दर कम करने और पोषण स्तर में सुधार के लिए ‘मातृत्व में प्रवेश करने वाली लड़की की आयु’ निर्धारण हेतु एक समिति गठित किए जाने का प्रस्ताव किया गया था।

लेकिन, जब टास्क फोर्स नियुक्त करने के निर्णय की घोषणा की गई, तो इसके विचारणार्थ विषयों (Terms of referenceToR) में माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्थिति, तथा ‘विवाह एवं मातृत्व की उम्र के परस्पर संबंध’ की जांच करना भी शामिल कर दिया गया था।

आलोचना:

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा महिलाओं के लिए विवाह की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 करने संबंधी सुझाव का विरोध किया जा रहा है। इनके द्वारा इस प्रकार की घटनाओं का हवाला दिया जा रहा है, कि इस निर्णय का उपयोग, माता-पिता की सहमति के बिना शादी करने वाले युवा वयस्कों को कैद करने के लिए किया जा सकता है।

इस संदर्भ में वैधानिक प्रावधान

वर्तमान में, कानून के अनुसार, पुरुष तथा महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु क्रमशः 21 और 18 वर्ष निर्धारित है।

विवाह हेतु निर्धारित न्यूनतम आयु, व्यस्क होने की आयु से भिन्न होती है। वयस्कता, लैंगिक रूप से तटस्थ होती है।

  1. भारतीय वयस्कता अधिनियम, 1875 के अनुसार, कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर ‘व्यस्क’ हो जाता है।
  2. हिंदुओं के लिए, हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5 (iii), में वधू न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा वर के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित की गई है। बाल विवाह गैरकानूनी नहीं है किंतु विवाह में किसी नाबालिग (वर अथवा वधू) के अनुरोध पर विवाह को शून्य घोषित किया जा सकता है।
  3. इस्लाम में, नाबालिग के यौवन प्राप्त कर लेने के पश्चात विवाह को मुस्लिम पर्सनल लॉ, के तहत वैध माना जाता है।
  4. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 और बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के अंतर्गत क्रमशः महिलाओं और पुरुषों के लिए विवाह के लिए सहमति की न्यूनतम आयु के रूप में 18 और 21 वर्ष निर्धारित की गयी है।

इस कानून पर पुनर्विचार की आवश्यकता:

महिलाओं में प्रारंभिक गर्भावस्था के जोखिमों को कम करने तथा लैंगिक-तटस्थता लाने हेतु महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु बढ़ाने के पक्ष में कई तर्क दिए जाते रहे हैं।

  • प्रारंभिक गर्भावस्था का संबंध बाल मृत्यु दर में वृद्धि से होता है तथा यह माँ के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है।
  • विवाह के लिए न्यूनतम आयु की अनिवार्यता तथा नाबालिग के साथ यौन संबंध बनाने को अपराध घोषित किये जाने के बाद भी, देश में बाल विवाह का काफी प्रचलन है।
  • इसके अलावा, एक अध्ययन के अनुसार, किशोर माताओं (10-19 वर्ष) से जन्म लेने वाले बच्चों में युवा-वयस्क माताओं (20-24 वर्ष) से पैदा होने वाले बच्चों की तुलना में 5 प्रतिशत तक कद में बौने रह जाने की संभावना होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जया जेटली समिति का गठन किस उद्देश्य के लिए किया गया था?
  2. भारत में पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु से संबंधित कानूनी प्रावधान
  3. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के प्रमुख प्रावधान
  4. बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 का अवलोकन

मेंस लिंक:

क्या आपको लगता है कि पुरुषों और महिलाओं के लिए विवाह की न्यूनतम आयु सीमा में वृद्धि की जानी चाहिए? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

‘पदोन्नति में आरक्षण’ पर उच्चतम न्यायलय के दिशा-निर्देश


संदर्भ:

उच्चतम न्यायलय ने अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से, वर्ष 2006 में संविधान पीठ द्वारा एम. नागराज मामले में दिए गए निर्णय को लागू करने के संबंध में राज्यों द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न मुद्दों को संकलित करने के लिए कहा है।

एम. नागराज मामले में अदालत ने, पदोन्नति के संबंध में अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदायों के सदस्यों हेतु क्रीमी लेयर सिद्धांत को लागू किया जाना बरकरार रखा था।

एम. नागराज मामला:

17 जून, 1995 को, संसद द्वारा अपनी विधायी क्षमता के तहत सतहत्तरवां संशोधन पारित किया गया। इस संशोधन के माध्यम से अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करने हेतु संविधान के अनुच्छेद 16 में एक उपबंध (4A) जोड़ा गया।

  • संविधान के सतहत्तरवें और पचासीवें (Eighty-Fifth) संशोधन तथा इनके अनुपालन में बनाए गए कानूनों की वैधता को एम. नागराज मामले में उच्चतम न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी।
  • अनुच्छेद 16 (4A) की वैधता को बरकरार रखते हुए, अदालत ने कहा कि यह एक समर्थककारी प्रावधान है। “अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए पदोन्नति में आरक्षण प्रदान करना राज्यों के लिए बाध्य नहीं है। लेकिन, यदि राज्य ऐसा करना चाहते हैं, तो इनके लिए तीन फलकों– समुदाय का पिछड़ापन; सार्वजनिक रोजगार में उस वर्ग का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व; और अनुच्छेद 335 के अधीन अधिदेशों के अनुरूप सेवा में सामान्य दक्षता प्रभावित नहीं होगी”- पर मात्रात्मक डेटा एकत्र करना होगा।
  • न्यायालय ने फैसला दिया कि ये संविधान संशोधन ‘समता के मूल सिद्धांतों’ को रद्द नहीं करते हैं।

संवैधानिक आधार- अनुच्छेद 335:

अनुच्छेद 335 के तहत कहा गया है, कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के दावों पर विचार करने के लिए विशेष उपायों को अपनाने की आवश्यकता है, ताकि इन्हें समान अवसर प्रदान किया जा सके।

आवश्यकता:

  • सदियों से भेदभाव और पूर्वाग्रहों का कष्ट सहते हुए अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजातियों को अवसरों तक पहुँच में सामंती, जाति-उन्मुख सामाजिक संरचना के वास्तविक अवरोधों को सामना करना पड़ता है।
  • इन प्रावधानों में इस यथार्थवादी मान्यता को स्वीकार किया गया है, कि जब तक अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष उपाय नहीं अपनाए जाते हैं, तब तक उनकी नियुक्ति के दावे पर विचार के लिए संविधान का अधिदेश मात्र एक भ्रम रहेगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 335
  2. अनुच्छेद 16 (4)
  3. समता का अधिकार
  4. एम. नागराज मामला

मेंस लिंक:

पदोन्नति में आरक्षण की आवश्यकता के संबंध चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

भारत के सबसे महंगे मशरूम के लिए जीआई टैग की मांग


संदर्भ:

विश्व के सबसे महंगे मशरूमों में से एक, जम्मू और कश्मीर के डोडा जिले में उगने वाले मशरूम के लिए भौगोलिक संकेत (Geographical Indication– GI) टैग की मांग की जा रही है।

प्रमुख बिंदु:

  • इस मशरूम को स्थानीय रूप से गुच्छी (Gucchi) अथवा मोरेल (Morel) कहा जाता है, और इसकी कीमत बीस हजार रुपए प्रति किलो से अधिक होती है।
  • यह स्थानीय किसानों और आदिवासियों द्वारा एकत्र की जाने वाली वन उपज है।
  • ऐसा कहा जाता है कि इस मशरूम में औषधीय और प्रदाहनाशी (Anti-Inflammatory) गुण होते हैं।
  • यह समशीतोष्ण वनों में पाया जाता है।

‘जीआई टैग’ के बारे में:

भौगोलिक संकेत (Geographical Indication- GI), मुख्यतः, किसी एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित, कृषि, प्राकृतिक अथवा निर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक वस्तुएं) होते हैं।

  • आमतौर पर, इन उत्पादों का नाम गुणवत्ता और विशिष्टता का आश्वासन देता है, जोकि वास्तव में इनकी उत्पत्ति-स्थान विशेषता को अभिव्यक्त करता है।

सुरक्षा:

एक बार जीआई सुरक्षा प्रदान किये जाने के बाद, किसी अन्य निर्माता द्वारा इससे मिलते-जुलते उत्पादों को बाजार में लाने के लिए इनके नाम का दुरुपयोग नहीं किया जा सकता है। यह संकेत, ग्राहकों के लिए उत्पाद की गुणवत्ता और प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है।

भौगोलिक संकेत (GI) का पंजीकृत मालिक कौन होता है?

  • किन्ही व्यक्तियों या उत्पादकों का संघ, कानून के अंतर्गत अथवा इसके द्वारा निर्धारित संस्था अथवा प्राधिकरण, कोई भी भौगोलिक संकेत (GI) का पंजीकृत मालिक हो सकता है।
  • इनका नाम भौगोलिक संकेत रजिस्टर में, भौगोलिक संकेत के लिए आवेदन किए जाने वाले उत्पाद के वास्तविक स्वामी के रूप में दर्ज किया जाना चाहिए।

भौगोलिक संकेत पंजीकरण की वैधता अवधि:

  • एक भौगोलिक संकेत का पंजीकरण 10 साल की अवधि तक के लिए वैध होता है।
  • इसे समय-समय पर आगामी 10 वर्षों की अवधि के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है।

भारत में, भौगोलिक संकेतक पंजीकरण को वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999) द्वारा प्रशासित किया जाता है। यह अधिनियम सितंबर 2003 को लागू किया गया था। भारत में सबसे पहला जीआई टैग, वर्ष 2004-05 में, ‘दार्जिलिंग चाय’ को दिया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भौगोलिक संकेत (GI) टैग क्या होता है?
  2. जीआई टैग किसके द्वारा प्रदान किया जाता है?
  3. भारत में जीआई उत्पाद और उनके भौगोलिक स्थान।
  4. अन्य बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR)।

मेंस लिंक:

भौगोलिक संकेत (GI) टैग क्या होता है? इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू बिजनेस लाइन

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

बैड बैंक की बैलेंस शीट


(Balance sheet of a bad bank)

संदर्भ:

गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) अथवा कर्जदारों द्वारा गैर-चुकाए गए ऋणों की बढ़ती समस्या के समाधान हेतु ‘बैड बैंक’ (Bad Bank) की स्थापना के विचार पर फिर से चर्चा की जा रही है।

बैड बैंक की अवधारणा:

  • बैड बैंक, दूसरे वित्तीय संस्थानों के खराब ऋण और अन्य अवैध परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए स्थापित किया जाने वाला बैंक होता है।
  • बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां रखने वाली संस्थाओं द्वारा इन परिसंपत्तियों को बाजार मूल्य पर बैड बैंक को बेंचा जाएगा।
  • इस तरह की परिसंपत्तियों को बैड बैंक में स्थानांतरित करने से, मूल संस्थाओं द्वारा अपनी बैलेंस शीट को सही किया जा सकता है – हालांकि इन्हें परिसंपत्तियों के अनुमानित मूल्य में कटौती करना होगा।

ख़राब ऋणों के बारे में चिंता का विषय:

  1. भारतीय बैंकों के ख़राब ऋणों का ढेर अर्थव्यवस्था पर एक बहुत बड़ा दबाव है।
  2. यह बैंकों के मुनाफे को हानि पहुंचाता है। क्योंकि मुनाफा खत्म हो जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB), जिनमे ख़राब ऋणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, विकास दर में वृद्धि हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा पाते हैं।
  3. क्रेडिट वृद्धि का अभाव में, अर्थव्यवस्था के 8% विकास दर प्राप्त करने के मार्ग में बाधक बनता है। अतः, ख़राब ऋणों की समस्या का प्रभावी समाधान शीघ्र किए जाने की आवश्यकता है।

बैड बैंक से लाभ:

  1. इससे बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को बैड लोन ट्रांसफर करके अपनी बैलेंस शीट सही करने में मदद मिलती है और ये मूल व्यवसायिक ऋण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  2. बड़े देनदारों के पास कई लेनदार होते हैं। चूंकि, इस उपाय से ऋण एक ही संस्था में केंद्रीकृत हो जाएंगे जिससे बैड बैंक समन्वय की समस्या को हल कर सकते हैं।
  3. विभिन्न बैंकों को अलग करके, बैड बैंक कर्जदारों के साथ तेजी से समझौता कर सकता है।
  4. यह ऋणकर्ताओं के साथ बेहतर सौदेबाजी कर सकता है और उनके खिलाफ अधिक कठोर प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।
  5. केवल सरकार ओर देखने के बजाय बैड बैंक खुद ही संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटा सकते हैं।

बैड बैंक से संबधित चिंताएं:

उदाहरण के लिए मान लीजिए, कोई बैंक अपने ख़राब ऋणों की बिक्री करता है। तब इसे कुछ केश कर्तन करना पड़ता है, क्योंकि जब 100 रुपये खराब होते हैं, तब वास्तविक राशि में 100 रुपये से कम होने का अनुमान होता है। ऐसी स्थिति में बैंक की लाभ और हानि (P&L) प्रभावित होती है।

इसलिए, जब तक कि इस विशेष पहलू का समाधान नहीं किया जाता है, तब तक एक नई संरचना का निर्माण, समस्या को हल करने में पूर्णतयः सक्षम नहीं होगा।

आगे की राह:

के वी कामथ समिति के अनुसार, खुदरा व्यापार, थोक व्यापार, सड़क और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में कंपनियों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है।

कोविड महामारी से पहले तनाव का सामना कर रहे क्षेत्रों में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs), विद्युत्, इस्पात, रियल एस्टेट और विनिर्माण सम्मिलित हैं। इस पृष्ठभूमि में बैड बैंक की स्थापना काफी महत्वपूर्ण है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ’परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी’ क्या है?
  2. ‘बैड बैंक’ क्या है?
  3. भारत में एक बैड बैंक की स्थापना कौन कर सकता है?
  4. ‘तनावग्रस्त परिसंपत्तियां’ कौन सी होती हैं?
  5. गैर निष्पादित परिसंपत्तियां क्या होती हैं?

मेंस लिंक:

बैड बैंकों की स्थापना के लाभ और हानियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

सीमित देयता भागीदारी (LLP)


(Limited Liability Partnership)

संदर्भ:

सरकार द्वारा व्यापार में सुगमता को प्रोत्साहित करने के लिए आसानी के लिए सीमित देयता भागीदारी अधिनियम (LLP Act) में संशोधन किया जाएगा।

सीमित देयता भागीदारी (Limited Liability Partnership- LLP) अधिनियम में किये जाने वाले प्रस्तावित परिवर्तनों में,  विभिन्न अपराधों को गैर-अपराध करना तथा सीमित देयता भागीदारियों (LLPs) के लिए गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर जारी करने की अनुमति दिया जाना, शामिल किया गया है

LLP क्या है?

सीमित देयता भागीदारी (Limited Liability Partnerships- LLPs) व्यापार संगठन का एक स्वरूप होती है, जिसमें प्रत्येक भागीदार की देयता कानूनी रूप से सीमित होती है। अतएव, यह भागीदारी और निगमों के तत्वों को प्रदर्शित करता है।

सीमित देयता भागीदारी (LLP) में  एक भागीदार, किसी दूसरे भागीदार के कदाचार अथवा लापरवाही के लिए जिम्मेदार या उत्तरदायी नहीं होता है।

‘सीमित देयता भागीदारी’ की प्रमुख विशेषताएं:

  • एलएलपी, एक नैगम निकाय (Body Corporate) और एक कानूनी इकाई होती है, जो इसके भागीदार से यह अलग होगी। इसमें एक सतत अनुक्रमण होता है।
  • एक पृथक कानून (अर्थात एलएलपी अधिनियम, 2008) होने के नाते, भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के प्रावधान एलएलपी पर लागू नहीं होते हैं और यह भागीदारों के मध्य अनुबंध संबंधी समझौते द्वारा विनियमित होता है।
  • प्रत्येक सीमित देयता भागीदारी द्वारा “सीमित देयता भागीदारी” शब्द अथवा इसका संक्षिप्त नाम ‘एलएलपी’ (LLP) का उपयोग अपने नाम के अंत में किया जाएगा।

संरचना:

प्रत्‍येक एलएलपी में कम से कम दो भागीदार होंगे और इसमें कम से कम दो व्‍यक्ति नामनिर्दिष्‍ट भागीदार के रूप में होंगे, जिसमें से कम से कम एक भारत का निवासी होगा और सभी भागीदार, ‘सीमित देयता भागीदारी’ के प्रतिनिधि होंगे।

एलएलपी की आवश्यकता और महत्व:

  • एलएलपी प्रारूप एक वैकल्पिक कॉर्पोरेट व्यावसायिक संस्करण है, जिसमे किसी कंपनी के सीमित दायित्व का लाभ प्रदान किया जाता है, किन्तु साझेदारी फर्म की भांति इसके सदस्यों के लिए पारस्परिक सहमति के आधार पर आंतरिक प्रबंधन को व्यवस्थित करने की अनुमति होती है।
  • सामान्यतः यह प्रारूप लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए और विशेष रूप से सेवा क्षेत्र उद्यमों के लिए काफी उपयोगी होगा।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेष रूप से सेवा उद्योग के लिए अथवा पेशेवरों से संबंधित गतिविधियों वाले व्यवसायों के लिए सीमित देयता भागीदारी (LLP) एक लोकप्रिय प्रारूप है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. एलएलपी और कंपनियों के मध्य अंतर।
  2. देयता भागीदारी (Liability Partnerships- LP) और एलएलपी के मध्य अंतर।
  3. नैगम निकाय (Body Corporate) क्या होता है?
  4. एलएलपी भागीदारों के कार्य और भूमिकाएं।

मेंस लिंक:

सीमित देयता भागीदारी (LLP) पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


डेजर्ट नाइट-21 युद्धाभ्यास

(Desert Knight-21)

  • यह भारतीय वायु सेना और फ्रांसीसी वायु एवं अंतरिक्ष सेना (Armée de l’Air et de l’Espace) के मध्य आयोजित किया जाने वाला द्विपक्षीय वायु युद्धाभ्यास है ।
  • इस युद्धाभ्यास नवीनतम संस्करण वायु सेना स्टेशन, जोधपुर में आयोजित किया जाएगा।

मोटर बाइक एम्बुलेंस रक्षिता

  • यह एक बाइक आधारित आकस्मिक दुर्घटना परिवहन आपातकालीन वाहन है।
  • भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ​के दिल्ली स्थित नाभिकीय औषिध तथा संबद्ध विज्ञान संस्थान (INMAS) द्वारा ने बाइक आधारित आकस्मिक दुर्घटना परिवहन आपातकालीन वाहन, ‘रक्षिता’, को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) को सौंप दिया गया है।
  • यह बाइक एम्बुलेंस भारतीय सुरक्षा बलों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के सामने आने वाली समस्याओं में तत्काल मदद करेगी।

सारी चू / त्सारी चू नदी

(Tsari Chu river)

  • सैटेलाइट चित्रण से पता चलता है कि चीन द्वारा अरुणाचल में एक नया गाँव बनाया गया है।
  • ये बस्ती, अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में सारी चू / त्सारी चू नदी के तट पर स्थित है।
  • ये गाँव मैकमोहन रेखा के दक्षिण में स्थित है। मैकमोहन रेखा, तिब्बत और पूर्वोत्तर भारत के बीच सीमांकन करती है, इस पर चीन द्वारा विवाद किया जाता है।

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