विषय – सूची
सामान्य अध्ययन-II
1. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना I
2. कृषि-कानूनों पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से एक ख़राब संवैधानिक उदाहरण की प्रस्तुति
3. नए ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा नियम’, 2021
सामान्य अध्ययन-III
1. राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान- भारत
2. हिमाचल प्रदेश के जंगलों में आग लगने की घटनाओं का कारण
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
1. प्रारंभ : स्टार्टअप इंडिया अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’
2. भारत का पहला स्वदेश में विकसित 9 एमएम मशीन पिस्तौल
सामान्य अध्ययन- II
विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 3.0
(PMKVY 3.0)
संदर्भ:
शीघ्र ही ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY 3.0)’ का तीसरा चरण जाएगा। योजना के यह चरण भारत के सभी राज्यों के 600 जिलों में आरंभ होगा।
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की अगुआई वाले इस चरण में नए-युग और कोविड से संबंधित कौशल पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
PMKVY 3.0 के बारे में:
स्किल इंडिया मिशन प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 3.0 में योजना अवधि 2020-2021 के दौरान आठ लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देने की परिकल्पना की गई है।
- स्किल इंडिया के तहत सूची में शामिल गैर- प्रधानमंत्री कौशल केंद्र (non-PMKK) प्रशिक्षण केंद्र और 200 से अधिक आईटीआई संस्थान, और 729 प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों (PMKKs) द्वारा कुशल पेशेवरों का एक सक्षम समूह बनाने के लिए PMKVY 0 प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा।
- PMKVY 1.0 और PMKVY 2.0 से प्राप्त अनुभव एवं ज्ञान के आधार पर मंत्रालय द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण प्रभावित हुए कौशल इकोसिस्टम को ऊर्जा प्रदान करने के लिए और मौजूदा नीति सिद्धांत के अनुरूप, प्रशिक्षण कार्यक्रम के इस नए संस्करण में सुधार किया गया है।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के बारे में:
वर्ष 2015 में शुरू की गई प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की प्रमुख योजना है। इस योजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (National Skill Development Corporation) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इस कौशल प्रमाणन योजना का उद्देश्य: बड़ी संख्या में भारतीय युवाओं को उद्योग-संबंधित कौशल प्रशिक्षण लेने में सक्षम बनाना है, इससे उन्हें बेहतर आजीविका हासिल करने में सहायता प्राप्त होगी।
- पूर्व शिक्षण अनुभव अथवा कौशल प्राप्त व्यक्तियों का पूर्व शिक्षण मान्यता (Recognition of Prior Learning– RPL) कार्यक्रम के तहत आकलन एवं प्रमाणन किया जाएगा।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0 (PMKVY 2.0) 2016-20:
PMKVY (2015-16) के सफल कार्यान्वयन के बाद, कार्य-क्षेत्र और भौगोलिक, दोनों के संदर्भ में स्तरीय वृद्धि करके तथा मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत आदि जैसे भारत सरकार के अन्य मिशनों के साथ समन्वय करते हुए PMKVY (2016-20) की शुरुआत की गयी थी।
PMKVY (2016-20) के उद्देश्य:
- बड़ी संख्या में युवाओं को उद्योग के अनुकूल गुणवत्ता कौशल प्रशिक्षण लेने के लिए सक्षम बनाना और जुटाना ताकि वे रोजगारपरक बनें और अपनी आजीविका कमा सकें।
- मौजूदा कार्यबल की उत्पादकता में वृद्धि करना और देश की वास्तविक जरूरतों के साथ कौशल प्रशिक्षण को जोड़ना।
- प्रमाणन प्रक्रिया के मानकीकरण को बढ़ावा देना और कौशल की रजिस्ट्री बनाने के लिए आधार रखना।
- चार साल (2016- 2020) की अवधि में 10 मिलियन युवाओं को लाभ।
कौशल भारत मिशन (Skill India Mission)
“स्किल इंडिया मिशन” का लक्ष्य भारत को दुनिया की ‘स्किल कैपिटल’ बनाना है। इसकी प्राप्ति के लिए अभियान ने एक प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) की शुरुआत के माध्यम से जबरदस्त गति प्राप्त की है।
प्रीलिम्स लिंक:
- ‘स्किल इंडिया मिशन’ क्या है?
- PMKVY 1.0 बनाम PMKVY 2.0 बनाम PMKVY 3.0
- PMKVY में भागीदार संस्थाएं
- कार्यान्वयन करने वाली संस्थाएं
- योजना की मुख्य विशेषताएं
मेंस लिंक:
कोरोना महामारी की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की आवश्यकता और महत्व पर एक टिप्पणी लिखिए।
स्रोत: द हिंदू
विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।
कृषि-कानूनों पर उच्चतम न्यायालय के फैसले से एक ख़राब संवैधानिक उदाहरण की प्रस्तुति
संदर्भ:
हाल ही में, शीर्ष अदालत द्वारा कृषि कानूनों के कार्यान्वयन को निलंबित कर दिया गया है और इन कानूनों से संबंधित विविध शिकायतों की जांच करने हेतु एक समिति का गठन किया गया है।
वर्तमान प्रकरण:
अटार्नी जनरल ने कृषि-कानूनों पर न्यायाधीशों के हस्तक्षेप को तीन आधारों पर प्रश्नगत किया है। इनके अनुसार, किसी क़ानून को इन तीन आधारों पर निलंबित अथवा रद्द किया जा सकता है:
- पहला, क़ानून बिना विधायी क्षमता के पारित किया गया है।
- दूसरा, यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
- तीसरा, यह संविधान के अन्य प्रावधानों का उल्लंघन करता है।
इसलिए, संघवाद की अवधारणा के लिए संभावित चुनौती संबंधी मामले पर सुनवाई करने के बजाय, अदालत ने राजनीतिक क्षेत्र में दखल देते हुए केवल किसानों की शिकायतों को सुनने के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है।
यह एक ख़राब संवैधानिक उदाहरण क्यों साबित हो सकता है?
- अदालत ने प्रावधानों पर पर्याप्त सुनवाई किये बगैर संसद द्वारा पारित किए गए कानूनों को निलंबित करके एक नई मिसाल कायम की है।
- अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया संबंधी सभी संभावित रेखाओं को बदल दिया है, जिसमे यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरे वकील की अधिस्थिति (locus standi) क्या हैं, वे विशिष्ट निवेदन क्या हैं जिनका समाधान करने की आवश्यकता है और अदालत उन्हें किन उपायों से हल करती है।
- अदालत ने, वास्तव में किसानों को भी नहीं सुना है, जिनके वकील अदालत द्वारा आदेशों के पारित होने से पहले पूरी तरह से अपनी बात भी नहीं रख पाए थे।
- यह एक स्मरणीय बिडंबना है, क्योंकि, जो अदालत, एक उत्तरदायी सरकार मध्यस्थ के रूप में स्वयं को स्थापित करती है, उसकी अपनी प्रक्रियाएं अपारदर्शी प्रतीत होती हैं।
निष्कर्ष:
अदालत, अनजाने में किंतु हानिकारक तरीके से, एक सामाजिक आंदोलन के आवेग को विछिन्न करने का प्रयास कर रही है।
प्रीलिम्स लिंक:
- सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 142 लागू किये जाने संबंधी उदाहरण।
- इस संदर्भ में उच्च न्यायालयों की शक्तियाँ।
- मूल न्यायिक अधिकार बनाम अपीलीय न्यायिक अधिकार।
- लोकसभा अध्यक्ष के निर्णयों की न्यायिक समीक्षा।
- न्यायिक सक्रियता क्या है?
- न्यायिक अतिक्रमण क्या है?
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।
नए ‘झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा नियम’, 2021
संदर्भ:
झारखंड राज्य में पहली बार झारखंड सिविल सेवा से संबंधित नियम बनाए गए हैं।
यह नए नियम, बिहार सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) और बिहार जूनियर सिविल सेवा भर्ती नियम, 1951 को प्रस्थापित करेंगे।
झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा नियम, 2021 की आवश्यकता:
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के खिलाफ हाईकोर्ट में चयन प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, भ्रम और अन्य मामलों से संबंधित लगभग 204 याचिकाएं दायर की गई है और इनसे संबंधित 30 प्रतिशत से अधिक मामले अदालतों में लंबित है।
पिछली परीक्षा में, विभिन्न कारणों से प्राम्भिक परीक्षा के परिणाम को तीन बार घोषित किया गया था।
नए नियमों के अनुसार:
- संवर्ग-नियन्त्रण विभाग द्वारा प्रति वर्ष 1 जनवरी को, उस वर्ष के दौरान सीधी भर्ती के माध्यम से सेवाओं के लिए रिक्त पदों की संख्या की गणना की जाएगी तथा कार्मिक, प्रशासनिक सुधार और राजभाषा विभाग के माध्यम से रोस्टर क्लीयरेंस के बाद, नियुक्तियों के लिए आयोग को अधियाचन प्रदान करेगा।
- मुख्य (लिखित परीक्षा) के भाषा पत्र में प्राप्त अंक, मात्र अर्हता प्राप्त करने के लिए आवश्यक होंगे, इन अंको को मुख्य (साक्षात्कार परीक्षा) के लिए मेरिट सूची तैयार करने के लिए अथवा अंतिम योग्यता सूची तैयारी के लिए कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, संभावित विवाद उत्पन्न करने योग्य नियम:
- नए नियमों में, तकनीकी तौर पर प्रारम्भिक परीक्षा में कोई आरक्षण नहीं है।
- स्नातक अंतिम वर्ष के दौरान आवेदन करने वाले आवेदकों के लिए नए नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, इस संबंध में संघ लोक सेवा आयोग में एक प्रावधान किया गया है।
- आवेदन जमा करने के बाद कोई आवेदक, आयोग से अपनी उम्मीदवारी को वापस लेने का अनुरोध नहीं कर सकता है।
- उम्मीदवारों के प्रयासों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।
प्रीलिम्स लिंक:
- नई अखिल भारतीय सेवा गठित करने की शक्ति।
- राज्य लोक सेवा आयोगों की शक्तियाँ और कार्य।
- अखिल भारतीय सेवाओं के लिए नियम बनाने संबंधी शक्ति।
- ‘संयुक्त लोक सेवा आयोग’ के बारे में।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
सामान्य अध्ययन- III
विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान- भारत
(National Innovation Foundation (NIF) – India)
संदर्भ:
हाल ही में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान – भारत (National Innovation Foundation (NIF) – India) द्वारा विकसित एक नवाचार पोर्टल को राष्ट्र के लिए समर्पित किया गया है।
प्रमुख बिंदु:
- नवाचार पोर्टल, राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान– भारत (NIF– India) द्वारा विकसित किया गया है। NIF– India, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
- राष्ट्रीय नवाचार पोर्टल (National Innovation Portal- NIP) वर्तमान में इंजीनियरिंग, कृषि, पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य आदि क्षेत्रों से देश के आम लोगों द्वारा लगभग 15 लाख नवाचारों को आधार प्रदान करता है।
- कार्य-क्षेत्रों के संदर्भ में, वर्तमान में, ऊर्जा, यांत्रिक, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू, न्यूट्रास्यूटिकल (nutraceuticals) आदि क्षेत्रों में नवाचारों को शामिल किया जा रहा है।
राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान– भारत के बारे में:
यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार का एक स्वायत्त निकाय है।
- NIF– India, संस्थान दस्तावेजीकरण, मूल्य संवर्धन, गैर-सहायता प्राप्त तकनीकी नवप्रवर्तनों एवं उत्कृष्ट ज्ञान के बौद्धिक संपदा अधिकार की सुरक्षा के साथ व्यवसायिक एवं सामाजिक प्रसार करते हुए भारत को नवप्रवर्तनशील राष्ट्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- इसकी स्थापना, फरवरी 2000 में अहमदाबाद, गुजरात में की गयी थी।
- यह भारत की राष्ट्रीय पहल है जो, समाज के अनौपचारिक क्षेत्र के जमीनी-स्तर के नवचारकों एवं परंपरागत ज्ञान धारकों को संस्थागत सहयोग प्रदान करता है।
स्रोत: पीआईबी
विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।
हिमाचल प्रदेश के जंगलों में आग लगने की घटनाओं का कारण
संदर्भ:
हिमाचल प्रदेश को शुष्क मौसम के दौरान अक्सर जंगलो में आग लगने की घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
हाल ही में, कुल्लू के पास जंगल में लगी आग पर नियंत्रण पाने से पहले कई दिनों तक प्राकृतिक संपदा का विनाश होता रहा। शिमला और राज्य के अन्य हिस्सों के जंगलो में आग लगने की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं।
हिमाचल प्रदेश का वन आवरण क्षेत्र:
यद्यपि हिमाचल प्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का दो-तिहाई भाग कानूनी रूप से वन क्षेत्र के रूप में वर्गीकृत है, किंतु इस क्षेत्र का अधिकांश भाग स्थायी रूप से बर्फ, ग्लेशियर, शीत-मरुस्थल अथवा अल्पाइन घास के मैदानों के अंर्तगत आता है और वृक्ष-रेखा से ऊपर अवस्थित है।
- भारतीय वन सर्वेक्षण के अनुसार, हिमाचल प्रदेश का प्रभावी वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल का लगभग 28 प्रतिशत है और इसका क्षेत्रफल 15,434 वर्ग किलोमीटर है।
- आमतौर पर, इस क्षेत्र में चीड़ पाइन, देवदार, ओक, कैल, देवदार और स्प्रूस आदि वृक्ष पाए जाते हैं।
इन जंगलों में आग के प्रति संवेदनशीलता
मानसून और सर्दियों में वर्षा की अवधि को छोड़कर, ये जंगल बहुधा जगंली-आग की चपेट में रहते हैं।
- गर्मियों के मौसम में, राज्य की निचली और मध्यम ऊंचाई वाली पहाड़ियों के जंगलों में अक्सर आग लगती रहती है, इस क्षेत्र में सामन्यतः चीड़ के जंगल पाए जाते हैं।
- मानसून के बाद के मौसम और सर्दियों में, शिमला, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के कुछ हिस्सों सहित, उच्च क्षेत्रों के जंगलों में आग लगने की घटनाएं होती रहती है। इन क्षेत्रों में प्रायः घास के मैदानों का विस्तार पाया जाता है।
आग लगने संबंधी कारण
आकाशीय बिजली गिरने अथवा बांस के वृक्षों की परस्पर रगड़ जैसे प्राकृतिक कारणों से जंगलों में कभी-कभार आग लग जाती है, लेकिन वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल में लगने वाली आग के लिए अधिकाँश रूप से मानवीय कारकों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
- चरवाहों और लघु वनोपज संग्राहकों द्वारा भोजन पकाने के लिए अस्थायी चूल्हा स्थापित किये जाते हैं, इन चूल्हों में सुलगती हुई आग पीछे छूट जाने की संभावना होती है, इससे जंगल की आग में भड़क सकती है।
- इसके अलावा, जब लोग पराली अथवा सूखी घास जलाने के लिए अपने खेतों में आग लगाते है, तो इससे कभी-कभी बगल के जंगल में आग फैल जाती है।
- सूखी हुई चीड़ की पत्तियों के बिजली के खंभों पर गिरने से भी चिंगारी भड़क उठती है।
जंगल में लगने वाली आग को रोकने और नियंत्रित करने हेतु उपाय:
इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
- मौसम संबंधी आंकड़ों का उपयोग करते हुए आग-प्रवण दिनों का पूर्वानुमान,
- शुष्क जैव-भार एकत्रित होने वाली जगहों की सफाई,
- जंगल की सतह पर गिये हर शुष्क अपशिष्ट का शीघ्र निपटान,
- जंगल के भीतर, मुश्किल से आग पकड़ने वाले वृक्ष-प्रजातियों की पट्टियों में वृद्धि,
- जंगलों में अग्नि-रेखाओं का निर्माण, आदि आग को रोकने के कुछ उपाय हैं।
सरकार द्वारा किये गए प्रयास:
वर्ष 1999 में, राज्य सरकार ने जंगल में लगने वाली आग के संबंध नियमों को अधिसूचित किया था, इनके तहत वन क्षेत्रों में और आसपास के क्षेत्रों में कुछ गतिविधियों, जैसे कि, आग जलाना, पराली जलाना और सूखी पत्तियों और जलाऊ लकड़ी के रूप में ज्वलनशील वन उपज का ढेर लगाना, आदि को प्रतिबंधित तथा विनियमित किया गया है।
इस तरह की गतिविधियों के लिए, राज्य के वन विभाग के तहत अग्नि सुरक्षा और अग्नि नियंत्रण इकाई स्थापित की गयी है।
प्रीलिम्स लिंक:
- हिमाचल प्रदेश में वनावरण
- जंगल में आग लगने के कारण
- जंगल की आग को रोकने और नियंत्रित करने के उपाय
- जंगल की आग से होने वाला नुकसान
- हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाली वृक्ष-प्रजातियाँ
मेंस लिंक:
राज्य में, वनों में आग लगना प्रतिवर्ष बारंबार होने वाली घटनाएँ हैं, चर्चा कीजिए।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस
प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य
प्रारंभ : स्टार्टअप इंडिया अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’
वाणिज्य तथा उद्योग मंत्रालय के उद्योग तथा आतंरिक व्यापार विभाग द्वारा ‘प्रारंभ: स्टार्टअप इंडिया अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ का आयोजन किया जा रहा है।
- यह सम्मेलन 16 जनवरी, 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई स्टार्टअप इंडिया पहल की पांचवीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
- स्टार्टअप इंडिया पहल लॉन्च किये जाने के बाद से भारत सरकार द्वारा आयोजित यह सबसे बड़ा स्टार्टअप सम्मेलन होगा।
भारत का पहला स्वदेश में विकसित 9 एमएम मशीन पिस्तौल
भारत का पहला स्वदेशी 9 एमएम मशीन पिस्तौल संयुक्त रूप से डीआरडीओ तथा भारतीय सेना द्वारा विकसित किया गया है।
- इसका ऊपरी रिसीवर एयरक्राफ्ट ग्रेड एलुमिनियम से तथा निचला रिसीवर कार्बन फाइबर से बना है।
- ट्रिगर घटक सहित इसके विभिन्न भागों की डिजाइनिंग और प्रोटोटाइपिंग में 3 डी प्रिंटिंग प्रक्रिया का इस्तेमाल किया गया है।
- पिस्तौल का नाम ‘अस्मी’ रखा गया है जिसका अर्थ गर्व, आत्मसम्मान तथा कठिन परिश्रम है।
- सशस्त्र बलों में हेवी वेपन डिटेंचमेंट, कमांडरों, टैंक तथा विमानकर्मियों चरमपंथ विरोधी तथा आतंकवाद रोधी कार्यवाइयों में व्यक्तिगत हथियार के रूप में इसकी क्षमता काफी अधिक है।











