Print Friendly, PDF & Email

INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 14 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. पाठ्यपुस्तकों में मुगल-इतिहास को साफ़-सुथरा किया जा रहा है: शिक्षाविद

2. ध्रुवीय भंवर के कारण अमेरिका एवं यूरोप में अत्याधिक शीत की आशंका

 

सामान्य अध्ययन-II

1. सशस्त्र बलों में ‘व्यभिचार’ को अपराध घोषित करने संबंधी दलील की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई

2. सशक्त भारत, चीन के ‘प्रति-संतुलन’ के रूप में कार्य करेगा: अमेरिका

 

सामान्य अध्ययन-III

1. रिज़र्व बैंक द्वारा डिजिटल ऋण पर एक कार्य दल का गठन

2. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. खादी प्राकृतिक पेंट

2. मकरविलाक्कू त्योहार

3. तेजस (Tejas)

4. स्पिनट्रॉनिक्स

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

पाठ्यपुस्तकों में मुगलइतिहास को साफ़-सुथरा किया जा रहा है: शिक्षाविद


संदर्भ:

हाल ही में, शिक्षा संबधी मामलों पर संसदीय स्थायी समिति द्वारा पाठ्य-पुस्तकों के पुनर्निर्माण विषय पर अपनी बैठक में दक्षिणपंथी संगठनों और शिक्षाविदों की प्रस्तुतियों को सुना गया।

बैठक में कुछ विशेषज्ञों ने कहा है, कि भारतीय पाठ्यपुस्तकों में मुगल इतिहास का साफ़-सुथरा किया जा रहा है और इतिहास में वैदिक-काल के लिए जगह बनाई जा रही है।

बैठक बुलाने का उद्देश्य:

  1. ‘राष्ट्रीय नायकों के बारे में गैर-ऐतिहासिक तथ्यों और विकृतियों के सन्दर्भों’ को हटाना,
  2. ‘भारतीय इतिहास के सभी कालखंडों के लिए समान अथवा समानुपातिक संदर्भ’ सुनिश्चित करना,
  3. भारतीय इतिहास में महान महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालना।

बैठक में पेश किये गए तर्क:

  1. मुगल-काल बनाम हिंदू राजाओं के शासनकालों के लिए इतिहास में दिए गए स्थान की मात्रा को संतुलित करने की आवश्यकता है।
  2. भारत में विदेशी ब्रिटिश राज मात्र 200 वर्ष तक रहा, किंतु, इससे पूर्व के 1,000 वर्षों को ध्यान में रखे बिना, भारतीय इतिहास को गलत तरीके से लिखा गया है।
  3. मुगल-काल की साफ़-सुथरी छवि प्रस्तुत की गयी है और आक्रमणकारियों के रूप में उनकी भूमिका का वर्णन नहीं किया गया है।
  4. बच्चों को वैदिक युग से ही “भारतीय संस्कृति” सिखाने की आवश्यकता है।

NCERT संशोधन:

वर्तमान में, NCERT द्वारा पाठ्यपुस्तकों को संशोधित करने की प्रक्रिया जारी है और वर्ष 2024 तक यह प्रक्रिया को पूरी होने की संभावना है। स्कूली पाठ्यपुस्तकों में होने वाले बदलाव के साथ समायोजन सुनिश्चित करने हेतु उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम को बदलने के लिए भी सिफारिशें दी गई हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारत में मुगल शासन के बारे में।
  2. महत्वपूर्ण मुगलकालीन शासक।
  3. मुगलकालीन प्रशासन।
  4. मुगलकाल का कला एवं वास्तुकला में योगदान।

मैंस लिंक:

भारतीय कला और वास्तुकला में मुगलों के महत्वपूर्ण योगदान पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखीय हलचल, चक्रवात आदि जैसी महत्त्वपूर्ण भू-भौतिकीय घटनाएँ, भौगोलिक विशेषताएँ।

ध्रुवीय भंवर के कारण अमेरिका एवं यूरोप में अत्याधिक शीत की आशंका


संदर्भ:

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) दो भागों में विभाजित होकर दक्षिण की ओर चक्कर काटते हुए बढ़ रहा है, इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों में अत्याधिक शीत की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

इससे पहले, वर्ष 2014 में इस प्रकार के धुर्वीय भंवर विकसित हुए थे।

निहितार्थ:

ध्रुवीय भंवर की अस्थिरता और इसके विभाजन से पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका और यूरोप में नाटकीय रूप से चरम मौसम की स्थितियां उत्पन्न हो सकती है। 2021 में विदरित ध्रुवीय भंवर सहित ठंडी हवाओं के आर्कटिक क्षेत्रों से बाहर की ओर प्रसरित होने की संभावना है, इसके परिणामस्वरूप बेहद कड़ी सर्दियों की शुरुआत हो सकती है।

‘ध्रुवीय भंवर’ क्या होते है?

ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex), ध्रुवों पर निम्न वायुदाब का एक चक्कर काटता हुआ शंक्वाकार वायुक्रम होता है, जोकि सर्दियों के महीनों में, ध्रुवीय क्षेत्रों और मध्य-अक्षांशों, जैसे अमेरिका और यूरोप, के मध्य तापान्तर में वृद्धि होने के कारण काफी सशक्त हो जाता है।

‘ध्रुवीय भंवर’ की विशेषताएं:

  • ध्रुवीय भंवर, समताप मंडल में चक्कराकार गति करते हैं।
  • आमतौर पर, भंवर की मजबूत स्थिति में, ठंडी हवाओं के उत्तरी अमेरिका या यूरोप के भीतरी क्षेत्रों में प्रवेश करने की संभावना कम होती है। दूसरे शब्दों में, यह ठंडी आर्कटिक हवाओं से मध्य-अक्षांशीय क्षेत्रों को बचाने वाली एक दीवार का निर्माण करते है।
  • लेकिन कभी-कभी, वातावरण की निचली सतह से ऊपर की ओर उठने वाली उर्जा तरंगों के कारण ध्रुवीय भंवर अस्थिर होकर कमजोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में समताप मंडल तेजी से गर्म होने लगता है, इस घटना को आकस्मिक समतापमंडलीय उष्मन कहा जाता है।
  • इस उष्मन से ध्रुवीय भंवर की स्थिति कमजोर हो जाती है, और इसकी स्थिति उत्तरी ध्रुव के दक्षिण में स्थानांतरित हो जाती है, अथवा, कुछ उदाहरणों में, ‘भंवर’ कई शाखाओं में विभाजित हो जाता है।

ध्रुवीय भंवर के प्रभाव:

  • वायुमंडल के कुछ उपरी भागों में धुर्वीय भंवर के विभाजन से आकस्मिक और विलंबित, दोनों प्रकार के प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप, अधिकांशतः, पूर्वी अमेरिका तथा उत्तरी और पश्चिमी यूरोप में तापमान- गिरावट और सर्दियों की चरम स्थिति होती है।
  • आकस्मिक समतापमंडलीय उष्मन से आर्कटिक के ऊपर समतापमंडल के साथ-साथ क्षोभ-मंडल में भी तापमान वृद्धि होती है।
  • आर्कटिक के गर्म होने की बजह से उत्तरी गोलार्ध में पूर्वी अमेरिका सहित मध्य अक्षांशों तक अत्याधिक गंभीर सर्दियों के मौसम की स्थितियां बन जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘ध्रुवीय भंवर’ क्या है?
  2. यह कहाँ निर्मित होता है?
  3. ध्रुवीय भंवर में हवाओं की गति
  4. प्रभाव

मेंस लिंक:

ध्रुवीय भंवर क्या होते है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

सशस्त्र बलों में ‘व्यभिचार’ को अपराध घोषित करने संबंधी दलील की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई


संदर्भ:

उच्चतम न्यायालय द्वारा सशस्त्र बलों में ‘व्यभिचार या परस्त्रीगमन (Adultery) को अपराध घोषित करने संबंधी केंद्र सरकार के अनुरोध की जांच करने पर सहमति व्यक्त की गई है।

इस मामले को, स्थिति स्पष्ट करने हेतु पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ का गठन करने के लिए मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे के पास भेजा गया है।

संबंधित प्रकरण:

केन्द्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया कि व्यभिचार या परस्त्रीगमन को भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध के दायरे से बाहर करने संबंधी शीर्ष अदालत का 2018 का फैसला सशस्त्र बल पर लागू नहीं किया जाये। जिसके तहत, कर्मियों को सहकर्मी की पत्नी के साथ व्यभिचार करने पर अनुचित आचरण के आधार पर सेवाच्युत किया जा सकता है।

आवश्यकता:

सेना, नौसेना और वायु सेना के कार्मिक एक ‘विशिष्ट वर्ग’ से संबंधित होते है। इन कार्मिकों पर विशेष कानूनों जैसे, सेना अधिनियम, नौसेना अधिनियम और वायु सेना अधिनियम लागू होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट का सितंबर 2018 फैसला:

सितंबर 2018 में, सुप्रीम कोर्ट द्वारा सर्वसम्मति से भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को रद्द कर दिया गया। इस धारा के तहत, पुरुषों के लिए व्यभिचार एक दंडनीय अपराध निर्धारित किया गया था।

उच्चतम न्यायालय की पांच न्यायाधीशों की पीठ के अनुसार-

  1. 158-वर्ष पुराना यह कानून असंवैधानिक है और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का नियमाल्लंघन करता है।
  2. भारतीय दंड संहिता की धारा 198(1) और 198(2) के तहत पति को, अपनी पत्नी के साथ व्यभिचार करने वाले व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगाने की अनुमति दी गयी है, जो कि असंवैधानिक हैं।
  3. हालांकि, ‘व्यभिचार’ विवाह-विच्छेद सहित अन्य सिविल मामलों के लिए एक आधार हो सकता है, किन्तु यह कोई दंडनीय अपराध नहीं हो सकता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. समीक्षा याचिका तथा क्यूरेटिव याचिका में अंतर
  2. समीक्षा याचिका प्रक्रिया
  3. कौन दाखिल कर सकता है?
  4. समीक्षा याचिका दायर करने की समय-अवधि
  5. IPC की धारा 497 क्या है?
  6. अनुच्छेद 137 क्या है?

मेंस लिंक:

समीक्षा याचिका क्या है? समीक्षा याचिका हेतु अपनाई जाने वाली प्रक्रिया क्या है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

सशक्त भारत, चीन के ‘प्रति-संतुलनके रूप में कार्य करेगा: अमेरिका


संदर्भ:

हाल ही में, ट्रम्प प्रशासन द्वारा वर्ष 2018 के बाद से अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीतिक रूपरेखा (U.S. strategic framework for the Indo-Pacific) पर एक संवेदनशील दस्तावेज का खुलासा किया गया है।

इस दस्तावेज में, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन, उत्तर कोरिया, भारत और अन्य देशों के संबंध में उद्देश्यों और रणनीतियों की रूपरेखा निर्धारित की गयी है।

प्रकाशित दस्तावेज़ में चीन के लिए निर्धारित उद्देश्य:  

दस्तावेज़ के अनुसार, अमेरिका की प्राथमिक राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियाँ निम्नलिखित है:

  1. इस क्षेत्र में ‘अमेरिकी रणनीतिक प्रधानता’ को बरकरार रखना और एक ‘उदार आर्थिक व्यवस्था’ को बढ़ावा देना।
  2. चीन को ‘अनुदार प्रभाव क्षेत्रों’ (illiberal spheres of influence) की स्थापना करने से रोकना।
  3. यह सुनिश्चित करना कि उत्तर कोरिया, अमेरिका के लिए धमकी नहीं दे सके।
  4. वैश्विक स्तर पर अमेरिकी आर्थिक नेतृत्व को आगे बढ़ाना।

दस्तावेज़ में भारत के प्रति उद्देश्य:

  • अमेरिका का लक्ष्य, भारत को इस क्षेत्र में एक सकल सुरक्षा प्रदाता बनने में सहायता करना तथा भारत के साथ स्थायी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है।
  • इसके लिए रक्षा सहयोग और पारस्परिकता (interoperability) में वृद्धि जाने की योजना है;
  • घरेलू आर्थिक सुधारों की दिशा में भारत के साथ काम करना, और
  • पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ASEAN Defence Ministers’ Meeting Plus) में भारत को प्रमुख नेतृत्व भूमिकाएँ अदा करने में सहयोग करना।

दस्तावेज़ में ‘एक्ट ईस्ट पालिसी’:

अमेरिका का उद्देश्य, भारत की ‘पूरब की ओर काम करो नीति’ (Act-East policy) और प्रमुख वैश्विक शक्ति बनने की आकांक्षा में सहायता करना, तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी, जापानी और ऑस्ट्रेलियाई दृष्टिकोण के साथ भारत की अनुकूलता को स्पष्ट करना है।

  • अम्रेरिकी रणनीति की धारणाओं में यह तथ्य अंतर्निहित है कि, एक सशक्त भारत, समान विचारधारा वाले देशों के सहयोग से, चीन के ‘प्रति-संतुलन’ (counterbalance) के रूप में कार्य करेगा।
  • चीन का लक्ष्य, पूरे क्षेत्र में अमेरिकी गठबंधन और साझेदारी को भंग करना है। चीन द्वारा इन ह्रासोन्मुख संबंधों के परिणामस्वरूप निर्मित रिक्तियों और अवसरों का दोहन किया जाएगा।
  • दस्तावेज में रूस के संदर्भ में कहा गया है कि यह देश, इस क्षेत्र में अमेरिका, चीन और भारत की तुलना में ‘एक मामूली भूमिका’ में बना रहेगा।
  • दस्तावेज में उत्तर कोरिया के संदर्भ में कहा गया है कि, अमेरिका का उद्देश्य, किम प्रशासन को यह समझाना है कि, उसके असितत्व को बचाए रखने का एकमात्र तरीका अपने परमाणु हथियारों का त्याग करना है।

दस्तावेज़ के समय-पूर्व खुलासे का कारण:

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को मुक्त रखने और भविष्य में लंबे समय तक खुला रखने संबंधी अमेरिका की स्थायी प्रतिबद्धताओं के बारे में अमेरिकी नागरिकों, सहयोगियों और साझेदारों को सूचित करना।

दस्तावेज़ खुलासे का महत्व:

  • यह निवर्तमान प्रशासन में से कुछ लोगों द्वारा नीति को स्पष्ट और सार्वजनिक करके इस पर अपनी छाप छोड़ने का एक प्रयास है, किंतु यह जबरदस्त रणनीतिक दूरदर्शिता प्रदर्शित करने वाला दस्तावेज नहीं है।
  • इस दस्तावेज़ में असहमति के लिए काफी गुंजाइश है, और इसमें अमेरिकी और उदार मूल्यों को फैलाने के अपने लक्ष्य और मानव अधिकारों पर उचित प्रकार की भाषा का पूर्ण अभाव है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इंडो- पैसिफिक बनाम एशिया-पैसिफिक
  2. ब्रिक्स समूह के बारे में
  3. सार्क समूह के बारे में
  4. दक्षिण चीन सागर के बारे में

मेंस लिंक:

एशिया-प्रशांत में “अमेरिकी रणनीतिक प्रधानता” को बनाए रखना एक चुनौती है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

रिज़र्व बैंक द्वारा डिजिटल ऋण पर एक कार्य दल का गठन


संदर्भ:

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऋण देने सहित डिजिटल उधार पर एक कार्य दल का गठन किया गया है। यह वित्तीय क्षेत्र के साथ-साथ सभी गैर-विनियमित खिलाड़ियों द्वारा डिजिटल ऋण गतिविधियों के पहलुओं का अध्ययन करेगा।

यह कार्य दल, एक उचित नियामक दृष्टिकोण अपनाए जाने को सुनिश्चित करेगा।

कार्य दल के कार्यक्षेत्र की शर्तें:

  1. रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित संस्थाओं में डिजिटल उधार गतिविधियों का मूल्यांकन करना और आउटसोर्स डिजिटल ऋण गतिविधियों की पैठ और मानकों का आकलन करना;
  2. वित्तीय स्थिरता, विनियमित संस्थाओं और उपभोक्ताओं को अनियमित डिजिटल ऋण द्वारा उत्पन्न जोखिमों की पहचान करना;
  3. डिजिटल ऋण देने की क्रमिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए विनियामक परिवर्तनों का सुझाव देना;
  4. विशिष्ट विनियामक या सांविधिक परिधि के विस्तार के लिए उपाय सुझाना, और विभिन्न नियामक और सरकारी एजेंसियों की भूमिका का सुझाव देना;
  5. डिजिटल उधार सेवाओं के नियोजन के लिए मजबूत डाटा प्रशासन, डाटा गोपनीयता और डाटा सुरक्षा मानकों के लिए उपायों की सिफारिश करना।

डिजिटल ऋण देने के लाभ:

  • डिजिटल उधार में, वित्तीय उत्पादों और सेवाओं तक अधिक निष्पक्ष, कुशल और समावेशी पहुँच बनाने की क्षमता है।
  • फिनटेक के नेतृत्व में यह नवाचार, कुछ साल पहले गौण सहायक भूमिका से आगे बढ़कर, अब वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के डिजाइन, मूल्य निर्धारण और वितरण के लिए मूल भूमिका निभा रहा है।

समय की मांग:

नियामक संस्थाओं द्वारा, डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, गोपनीयता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए, इस नवाचार का समर्थन करने के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण का पालन करने की आवश्यकता है।

डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स से संबंधित मुद्दे

  1. ये ऋणकर्ताओं को शीघ्र और परेशानी मुक्त तरीके से ऋण देने का वादा करते हैं।
  2. लेकिन, बाद में ऋणकर्ताओं से ब्याज की अत्याधिक दरों और छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क की मांग की जाती है।
  3. इस तरह के प्लेटफॉर्म ऋणों की बसूली के लिए अमान्य और कठोर विधियाँ अपनाते हैं।
  4. ये ऋणकर्ताओं के मोबाइल फोन डेटा का उपयोग करने संबंधी समझौतों का दुरुपयोग करते हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य से संबंधित विषय; जन वितरण प्रणाली- उद्देश्य, कार्य, सीमाएँ, सुधार; बफर स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा संबंधी विषय; प्रौद्योगिकी मिशन; पशु पालन संबंधी अर्थशास्त्र।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)


(Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima YojanaPMFBY) के लिए पांच साल पूरे हो गए।

PMFBY के बारे में:

  • 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत की गयी थी।
  • इस योजना में, पूर्ववर्ती राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (NAIS) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (MNAIS) का विलय कर दिया गया।
  • इस योजना उद्देश्य किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करना और पूर्ण बीमित राशि के लिए फसल बीमा दावे का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करना है।

योजना का विस्तार-क्षेत्र :

इस योजना में, सभी खाद्य और तिलहन फसलों और वार्षिक वाणिज्यिक / बागवानी फसलों को शामिल किया गया है, जिसके लिए पिछले उपज के आंकड़े उपलब्ध है और  जिनके लिए, सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (General Crop Estimation Survey- GCES) के तहत फसल कटाई प्रयोगों (Crop Cutting Experiments- CCEs) का अपेक्षित संख्या संचालन किया जा रहा है।

PMFBY से PMFBY 2.0:

पूर्णतया स्वैच्छिक: वर्ष 2020 के खरीफ सीजन से सभी किसानों हेतु नामांकन के लिए शत प्रतिशत स्वैच्छिक बनाने का निर्णय लिया गया है।

सीमित केंद्रीय सब्सिडी: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस योजना के तहत गैर-सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये बीमा किस्त की दरों पर केंद्र सरकार की हिस्सेदारी को 30% और सिंचित क्षेत्रों/फसलों के लिये 25% तक सीमित करने का निर्णय लिया गया है।

राज्यों के लिये अधिक स्वायत्तता: केंद्र सरकार द्वारा राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने के लिये व्यापक छूट प्रदान की गयी है और साथ ही उन्हें बुवाई, स्थानिक आपदा, फसल के दौरान मौसम प्रतिकूलता, और फसल के बाद के नुकसान आदि किसी भी अतिरिक्त जोखिम कवर/ सुविधाओं का चयन करने का विकल्प भी दिया गया है।

निर्णय में देरी होने पर दंड: संशोधित PMFBY में, एक प्रावधान शामिल किया गया है जिसमें राज्यों द्वारा खरीफ सीजन के लिए 31 मार्च से पहले और रबी सीजन के लिए 30 सितंबर से पहले अपना हिस्सा जारी नहीं करने पर, उन्हें बाद के फसल सीजनों में योजना के तहत भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

आईसीई गतिविधियों में निवेश: अब इस योजना के तहत बीमा कंपनियों द्वारा एकत्र किये गए कुल प्रीमियम का 0.5% सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य किया गया है।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


खादी प्राकृतिक पेंट

(Khadi Prakritik paint)

यह खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा विकसित यह गाय के गोबर से निर्मित भारत का पहला पेंट है।

  • यह एक पर्यावरण के अनुकूल, गैर विषाक्त पेंट है,
  • यह अपनी तरह का पहला उत्पाद है, जिसमें एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण समाहित हैं।
  • इस पेंट में मुख्य घटक के रूप में गाय के गोबर का उपयोग किया गया है, यह लागत प्रभावी और गंधहीन है। भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा इस पेंट को प्रमाणित किया गया है।
  • इस पेंट में शीशा, पारा, क्रोमियम, आर्सेनिक, कैडमियम जैसी अन्य कोई भी भारी धातु नहीं है।

मकरविलाक्कू त्योहार

(Makaravilakku festival)

मकरविलाक्कू, केरल में मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाना वाला पर एक वार्षिक उत्सव है,  इसे सबरीमाला मंदिर में आयोजित किया जाता है। इस उत्सव में थिरुवभरणम (अय्यप्पन के पवित्र आभूषण) जुलूस और सबरीमाला के पहाड़ी मंदिर में एक धार्मिक सभा आयोजित की जाती है।

तेजस (Tejas)

  • तेजस, सिंगल-सीट, सिंगल-जेट इंजन, मल्टीरोल लाइट फाइटर है।
  • यह भारतीय वायु सेना में सबसे छोटा और सबसे हल्का बहु-भूमिका वाला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान है।
  • इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
  • इसे हवा से हवा, हवा से सतह मार करने वाले, सुनिश्चितता-निर्देशित और मुठभेड़ में प्रयुक्त होने वाले हथियारों को जाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

स्पिनट्रॉनिक्स

(Spintronic)

  • स्पिनट्रॉनिक्स, जिसे स्पिन इलेक्ट्रॉनिक्स के रूप में भी जाना जाता है, ठोस अवस्था वाले उपकरणों में इलेक्ट्रान के आंतरिक स्पिन और इसके संबद्ध चुंबकीय क्षण के अलावा इसके मूलभूत इलेक्ट्रॉनिक आवेश का अध्ययन है।
  • एक घटना जिसे ‘रश्बा प्रभाव’ (Rashba effect) कहा जाता है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली में स्पिन-बैंड का विखंडन होता है, स्पिनट्रॉनिक उपकरणों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

रश्बा प्रभाव, या रश्बा-ड्रेसेलहॉस प्रभाव (Rashba-Dresselhaus effect), द्वि-आयामी संघनित पदार्थ प्रणालियों में स्पिन बैंड का आवेग-निर्भर विभाजन होता है।


  • Join our Official Telegram Channel HERE for Motivation and Fast Updates
  • Subscribe to our YouTube Channel HERE to watch Motivational and New analysis videos