HINDI INSIGHTS STATIC QUIZ 2020-2021
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Question 1 of 5
1. Question
विधानसभाओं में स्वराजवादियों की गतिविधियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
- स्वराजवादियों के पास व्यापक राजनीतिक कार्य करने के बावजूद विधानसभाओं में अपने उग्रवादी कार्यों के समन्वय के लिए कोई नीति नहीं थी।
- विधायिकाओं के अंदर इसकी गतिविधियों ने कांग्रेस को 1923-1924 के दौरान कई नगरपालिका चुनाव जीतने में मदद की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
विधानसभाओं में स्वराजवादियों ने महत्वपूर्ण कार्य किये। उन्होंने राजनीतिक व्यक्तियों को प्रेरित किया और राजनीतिक हितों को जीवित रखा।
1923-24 में, कांग्रेसियों ने बड़ी संख्या में नगर पालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों पर विजयी प्राप्त कर थी। अपरिवर्तनवादी सक्रिय रूप से इन कार्यों में शामिल हो गए क्योंकि उनका मानना था कि स्थानीय निकायों का उपयोग रचनात्मक कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
लेकिन स्वराजवादियों के पास विधानसभाओं में अपने उग्रवादी कार्यों के समन्वय की कोई नीति नहीं थी। वास्तव में, वे अपने विचारों को प्रसारित करने हेतु पूर्णतः अखबार पर ही निर्भर थे।
Incorrect
उत्तर: c)
विधानसभाओं में स्वराजवादियों ने महत्वपूर्ण कार्य किये। उन्होंने राजनीतिक व्यक्तियों को प्रेरित किया और राजनीतिक हितों को जीवित रखा।
1923-24 में, कांग्रेसियों ने बड़ी संख्या में नगर पालिकाओं और अन्य स्थानीय निकायों पर विजयी प्राप्त कर थी। अपरिवर्तनवादी सक्रिय रूप से इन कार्यों में शामिल हो गए क्योंकि उनका मानना था कि स्थानीय निकायों का उपयोग रचनात्मक कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।
लेकिन स्वराजवादियों के पास विधानसभाओं में अपने उग्रवादी कार्यों के समन्वय की कोई नीति नहीं थी। वास्तव में, वे अपने विचारों को प्रसारित करने हेतु पूर्णतः अखबार पर ही निर्भर थे।
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Question 2 of 5
2. Question
स्वराजवादियों की एक बड़ी उपलब्धि यह थी कि उन्होंने 1928 में ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ को निष्फल किया था। यह बिल किससे संबंधित था?
Correct
उत्तर: a)
1928 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि पब्लिक सेफ्टी बिल को निष्फल किया था, जिसका उद्देश्य अवांछनीय और विध्वंसक विदेशियों को निर्वासित करने के लिए सरकार को सशक्त बनाना था।
Incorrect
उत्तर: a)
1928 में एक उल्लेखनीय उपलब्धि पब्लिक सेफ्टी बिल को निष्फल किया था, जिसका उद्देश्य अवांछनीय और विध्वंसक विदेशियों को निर्वासित करने के लिए सरकार को सशक्त बनाना था।
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Question 3 of 5
3. Question
भारत के लिए ‘संवैधानिक सुधारों पर प्रथम श्वेत पत्र‘ तैयार किया गया था और इसे निम्नलिखित किसकी सिफारिशों के आधार पर ब्रिटिश संसद की संयुक्त प्रवर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।
Correct
उत्तर: d)
साइमन कमीशन: नवंबर 1927 में (निर्धारित समय से 2 वर्ष पूर्व), ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय वैधानिक आयोग की नियुक्ति की घोषणा की, जिसे भारत के नए संविधान के तहत भारत की स्थिति के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। आयोग के सभी सदस्य ब्रिटिश थे और इसलिए, सभी दलों ने इस आयोग का बहिष्कार किया। आयोग ने 1930 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और
द्वैध शासन की समाप्ति, प्रांतों में जिम्मेदार सरकार के विस्तार, ब्रिटिश सरकार और रियासतों के एक महासंघ की स्थापना करना, सांप्रदायिक मत प्रणाली को जारी रखना आदि की सिफारिश की। आयोग के प्रस्तावों पर विचार करने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत और भारतीय रियासतों के प्रतिनिधियों के तीन गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन किया।
इन सम्मेलनों के आधार पर, ‘संवैधानिक सुधारों पर श्वेत पत्र’ ब्रिटिश संसद की संयुक्त प्रवर समिति के विचार के लिए तैयार और प्रस्तुत किया गया था। इस समिति की सिफारिशों को 1935 भारत सरकार अधिनियम में शामिल किया गया था।
Incorrect
उत्तर: d)
साइमन कमीशन: नवंबर 1927 में (निर्धारित समय से 2 वर्ष पूर्व), ब्रिटिश सरकार ने सर जॉन साइमन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय वैधानिक आयोग की नियुक्ति की घोषणा की, जिसे भारत के नए संविधान के तहत भारत की स्थिति के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी। आयोग के सभी सदस्य ब्रिटिश थे और इसलिए, सभी दलों ने इस आयोग का बहिष्कार किया। आयोग ने 1930 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और
द्वैध शासन की समाप्ति, प्रांतों में जिम्मेदार सरकार के विस्तार, ब्रिटिश सरकार और रियासतों के एक महासंघ की स्थापना करना, सांप्रदायिक मत प्रणाली को जारी रखना आदि की सिफारिश की। आयोग के प्रस्तावों पर विचार करने के लिए, ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश सरकार, ब्रिटिश भारत और भारतीय रियासतों के प्रतिनिधियों के तीन गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन किया।
इन सम्मेलनों के आधार पर, ‘संवैधानिक सुधारों पर श्वेत पत्र’ ब्रिटिश संसद की संयुक्त प्रवर समिति के विचार के लिए तैयार और प्रस्तुत किया गया था। इस समिति की सिफारिशों को 1935 भारत सरकार अधिनियम में शामिल किया गया था।
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Question 4 of 5
4. Question
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने 1923 में स्वराज पार्टी का गठन किया।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बेलगाम अधिवेशन (1924) की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Correct
उत्तर: c)
असहयोग आंदोलन के आह्वान के बाद, सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में नेताओं के एक वर्ग ने परिषद में प्रवेश करने और सरकार की कमजोरी को उजागर करने की वकालत की। जनवरी 1923 में, सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने दास की अध्यक्षता में ‘कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी’ (या स्वराज पार्टी) का गठन किया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1924) के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी। यह एकमात्र अधिवेशन है जिसमें महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता की।
Incorrect
उत्तर: c)
असहयोग आंदोलन के आह्वान के बाद, सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व में नेताओं के एक वर्ग ने परिषद में प्रवेश करने और सरकार की कमजोरी को उजागर करने की वकालत की। जनवरी 1923 में, सी.आर. दास और मोतीलाल नेहरू ने दास की अध्यक्षता में ‘कांग्रेस खिलाफत स्वराज पार्टी’ (या स्वराज पार्टी) का गठन किया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1924) के बेलगाम अधिवेशन की अध्यक्षता महात्मा गांधी ने की थी। यह एकमात्र अधिवेशन है जिसमें महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता की।
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Question 5 of 5
5. Question
1927 में गठित साइमन कमीशन द्वारा निम्नलिखित में से कौनसी सिफारिशें की गयी थीं?
- भारतीय संविधान की प्रकृति एकात्मक होनी चाहिए।
- प्रांतीय सरकारों को स्थानीय निकायों को वित्तीय शक्तियां प्रदान करनी चाहिए।
- पृथक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
- विधान सभाओं के चुनाव सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर आधारित होने चाहिए।
सही उत्तर कूट का चयन कीजए:
Correct
उत्तर: d)
आयोग के अनुसार, संघीय संविधान के रूप में एक संवैधानिक पुनर्निर्माण होना चाहिए। प्रांतों को कानून सहित पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिए।
अन्य प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:
प्रांतीय विधान परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। गवर्नर- जनरल के पास कैबिनेट के सदस्यों को नियुक्त करने की पूरी शक्ति होनी चाहिए।
राज्यपाल के पास विभिन्न समुदायों की सुरक्षा के लिए आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक शक्तियों से संबंधित विवेकाधीन शक्ति होनी चाहिए।
भारत सरकार को उच्च न्यायालय पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए।
आयोग में कोई भारतीय सदस्य नहीं थे। इसके द्वारा सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार की सिफारिश नहीं की गयी थी और गवर्नर-जनरल की स्थिति को यथावत रखी गयी थी।
पृथक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया था, बल्कि इसे अन्य समुदायों के लिए भी बढ़ाया गया था। वित्तीय हस्तांतरण की सिफारिश भी नहीं की गयी थी।
Incorrect
उत्तर: d)
आयोग के अनुसार, संघीय संविधान के रूप में एक संवैधानिक पुनर्निर्माण होना चाहिए। प्रांतों को कानून सहित पूर्ण स्वायत्तता प्रदान की जानी चाहिए।
अन्य प्रमुख सिफारिशों में शामिल हैं:
प्रांतीय विधान परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। गवर्नर- जनरल के पास कैबिनेट के सदस्यों को नियुक्त करने की पूरी शक्ति होनी चाहिए।
राज्यपाल के पास विभिन्न समुदायों की सुरक्षा के लिए आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक शक्तियों से संबंधित विवेकाधीन शक्ति होनी चाहिए।
भारत सरकार को उच्च न्यायालय पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए।
आयोग में कोई भारतीय सदस्य नहीं थे। इसके द्वारा सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार की सिफारिश नहीं की गयी थी और गवर्नर-जनरल की स्थिति को यथावत रखी गयी थी।
पृथक निर्वाचन प्रणाली को समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया था, बल्कि इसे अन्य समुदायों के लिए भी बढ़ाया गया था। वित्तीय हस्तांतरण की सिफारिश भी नहीं की गयी थी।








