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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 13 जनवरी 2021

 

How to Follow Secure Initiative?

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. स्वराजवादियों की राजनीति की एक विलक्षण विशेषता परिषदों के अंदर एवं बाहर किये गए सुधारों को समाप्त करने का उनका प्रयोजन था। स्पष्ट कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष:बिपिन चंद्र

निर्देशक शब्द:

 स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

स्वराज दल के निर्माण का कारण, इसके लक्ष्य एवं उद्देश्यों का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

स्वराजवादियों द्वारा किये गए संघर्ष एवं प्रतिरोध की प्रकृति के बारे में चर्चा कीजिए।

परिषदों के भीतर उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट करने के लिए उनके द्वारा अपनायी गयी नीति की प्रकृति पर प्रकाश डालिए।

विधान परिषदों के बाहर स्वराजवादियों द्वारा किए गए राष्ट्रवादी कार्यों के बारे में लिखिए।

निष्कर्ष:

स्वराजवादियों के महत्व और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 2. साइमन कमीशन की नियुक्ति ने एक ‘मृतप्राय भारतीय राष्ट्रवाद’ को पुनर्जीवित किया। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष:बिपिन चंद्र

 निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

साइमन कमीशन को नियुक्त किये जाने की आवश्यकता एवं भारतीयों द्वारा इसका विरोध किये जाने के कारणों के बारे में बताते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

भारत के भविष्य को निर्धारित करने के उद्देश्य से गठित समिति में किसी भी भारतीय को शामिल न करने सम्बन्धी अपमान के सन्दर्भ में राष्ट्रवादियों की तत्काल और सर्वसम्मत प्रतिक्रिया का उल्लेख कीजिए।

साथ ही, दमनकारी सरकार की प्रतिक्रिया जैसे- लाठीचार्ज एवं गिरफ्तारी आदि के बारे में बताइये।

विश्लेषण कीजिए कि साइमन बहिष्कार आंदोलन ने युवाओं की एक नई पीढ़ी को राजनीतिक कार्रवाई का पहला अनुभव प्रदान किया और नेताओं को पुनः सक्रिय करके एक निष्क्रिय राष्ट्रीय आंदोलन को गति प्रदान की।

विश्लेषण कीजिए कि राष्ट्रवाद “मृतप्राय” ’नहीं था, बल्कि असहयोग आंदोलन की समाप्ति के बाद केवल निष्क्रिय हो गया था। स्वराजवादियों के संघर्ष, कांग्रेस के रचनात्मक कार्यों आदि के बारे में अपने विचारों को प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

साइमन आयोग का विरोध प्रदर्शन के समग्र प्रभाव को संक्षेप में बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

3. महामारी द्वारा उत्पन्न की गयीं सार्वजानिक चुनौतियों का सामना करने के लिए दक्षेस (SAARC) को पुनर्जीवित करना महत्वपूर्ण है तथा भारत इसे अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के लिए एक मंच के रूप में उपयोग कर सकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu

 निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

दक्षेस के गठन के बारे में लिखते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए एवं समझाइये कि क्यों भारत-पाक द्विपक्षीय तनाव के कारण संगठन विगत कुछ वर्षों में अप्रभावी रहा है।

 विषय वस्तु:   

विगत कुछ वर्षों में दक्षेस व्यावहारिक रूप से निश्चेष्ट क्यों रहा है? इसके कारणों के बारे में लिखिए।

कोविड-19 द्वारा उत्पन्न सार्वजानिक चुनौतियों और इसके कारण दक्षिण एशिया में उत्पन्न होने वाले व्यवधानों का सामना करने में दक्षेस कैसे सहायक सिद्ध हो सकता है? समझाइए।

समझाइए कि भारत अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के लिए दक्षेस का लाभ कैसे उठा सकता है।

निष्कर्ष:

दक्षेस के महत्व और इसे पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

 4. जैसे ही नव वर्ष नवीन समाचार लेकर आया, पश्चिम एशिया में पुराने संबंधों को पुनर्सशक्त किया जा रहा है। टिप्पणी कीजिए। इसका भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (250 शब्द)

सन्दर्भ:  Indian Express , The Hindu

निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

कतर एवं गल्फ सहयोग परिषद के नेताओं के मध्य की कलह के समाप्त होने का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

सम्पूर्ण घटना की पृष्ठभूमि को संक्षेप में प्रस्तुत कीजिए, जैसे: अरब स्प्रिंग के पश्चात कतर और अन्य गल्फ सहयोग परिषद की शक्तियों के संबंधों में खटास कैसे उत्पन्न हुई, जिसके कारण कतर का पूर्ण रूप से बहिष्कार किया गया। बहिष्कार के कारणों पर भी प्रकाश डालिए।

इसके अतिरिक्त, उल्लेख कीजिए कि कैसे कतर इस बहिष्कार का प्रबंधन करने एवं नवीन मित्र देशों की खोज करने में सक्षम था।

समझाइए कि कैसे यू.एस. प्रशासन में बदलाव के साथ देशों ने कलह को अपने मध्य की समाप्त किया और संबंधों को पुनः शुरू किया है।

निष्कर्ष:

नई सामंजस्य प्रक्रिया के समग्र प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

5. विकास वित्त संस्थान (DFI) क्या हैं? भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए धन के प्रवाह के लिए विकास वित्त संस्थान की आवश्यकता पर टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

विकास वित्त संस्थानों (DFI) को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

विकास वित्त संस्थानों (DFI) के सन्दर्भ में भारत के अब तक के अनुभवों का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।

विकास वित्त संस्थानों (DFI) के लक्ष्यों एवं उद्देश्यों का उल्लेख कीजिए।

विकास वित्त संस्थानों (DFI) की खामियों का वर्णन कीजिए एवं समझाइए कि उन्हें सार्वभौमिक बैंक में परिवर्तित क्यों किया गया था।

बुनियादी ढांचे के निर्माण सम्बन्धी परियोजनाओं के लिए एक अच्छे विकल्प के रूप में विकास वित्त संस्थानों (DFI) की कमियों को दूर करने के सुझाव दीजिए।

निष्कर्ष:

भारत में बुनियादी ढांचे के निर्माण सम्बन्धी परियोजनाओं के लिए विकास वित्त संस्थानों (DFI) द्वारा निधि देने के सन्दर्भ में एक संतुलित निर्णय प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।

 6. केवल ईमानदारी पर्याप्त नहीं है। एक सिविल सेवक के रूप में आपको नैतिक रूप से ईमानदार रहते हुए कुशल एवं प्रभावी होने की भी आवश्यकता होती है। विश्लेषण कीजिए। (150 शब्द)

 संदर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सिविल सेवकों के एक गुण के रूप में ईमानदारी का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

विश्लेषण कीजिए कि हालांकि ईमानदारी बहुत अच्छा गुण है, लेकिन यह अकेले काम पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

समझाइए कि कैसे भावनात्मक बुद्धिमत्ता के बिना अत्यधिक ईमानदारी सिविल सेवक के साथ-साथ समग्र प्रशासन के लिए भी एक प्रतिघात का कारण बन सकती है।

ईमानदारी के पूरक के रूप में कार्यकुशलता एवं प्रभावशीलता की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।

उपर्युक्त के सन्दर्भ में उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि ईमानदार और कुशल नौकरशाह उस कार्य के लिए प्रतिबद्ध होते हैं जिसके लिए उन्हें सरकारी खजाने से भुगतान किया जाता है। वे पेशेवरों के रूप में अपना कार्य करते हैं।

 

विषय: नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।

 7. भारत को नागरिक सेवा के अनुभवों को बढ़ाने के लिए अपनी सार्वजनिक सेवाओं के वितरण को पुनः परिभाषित करना होगा, जो राजस्व सृजन में भी सहायक होगा। टिप्पणी कीजिए। भारत में सार्वजनिक सेवाओं के वितरण को पुनर्परिभाषित करने के लिए किन प्रमुख कारकों पर विचार किया जाना चाहिए? (150 शब्द)

 संदर्भ: नैतिकता: लेक्सिकन प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सार्वजनिक सेवा वितरण की एक सरल परिभाषा प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

भारत की सार्वजनिक सेवा वितरण को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

सार्वजनिक सेवा वितरण को पुनर्परिभाषित करने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण कारकों पर प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

एक कुशल और सशक्त सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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