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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 11 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. H-1B वीजा एवं वेतन-आधारित नए नियम

2. चीन- ताइवान संबंध

 

सामान्य अध्ययन-III

1. K-आकार की आर्थिक बहाली एवं इसके निहितार्थ

2. CGST एक्ट के तहत कर-चोरी करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान बरकरार

3. बिजली-बकाया पर केंद्र और आरबीआई के साथ समझौते से झारखंड बाहर

 

सामान्य अध्ययन-IV

1. आपातकालीन प्रतिरक्षण हेतु ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ जारी

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘CoWIN’ क्या है?

2. वैनेडियम

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

H-1B वीजा एवं वेतन-आधारित नए नियम


संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिकी प्रशासन द्वारा H-1B वीजा मानदंडों में एक बार फिर संशोधन किया गया है।

परिवर्तन:

  • योग्य उम्मीदवारों के चयन हेतु उच्च वेतन और कौशल को प्राथमिकता दिए जाने संबंधी नियम।
  • कार्य-वीजा (work visa) हेतु चयन संबंधी पुरानी लॉटरी पद्धति का प्रचलन समाप्त किया गया।

H-1B कार्य-वीजा’ के बारे में:

(What are H-1B wok visas?)

वर्ष 1952 में, अमेरिका ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी में विस्तार करना शुरू किया, जिसके बाद इन क्षेत्रों में उचित लागत पर नवोन्मेष करने में सहायता के लिए देश में उच्च गुणवत्ता-युक्त श्रमिकों को नियुक्त करने की आवश्यकता महसूस की गयी। श्रमिकों की इस मांग ने अमेरिका में H-1 कार्य-वीजा शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया

  • संबंधित क्षेत्रों में श्रमिकों की मांग और आवश्यक योग्यताओं के आधार पर इस कार्य-वीज़ा प्रणाली को H-1B, H-2B, L1, O1, और E1 वीजा में उप-विभाजित किया गया।
  • इनमें से, H-1B वीजा के तहत अपेक्षाकृत बेहतर वेतन के अवसर प्राप्त होते है, इसी कारण, यह वीजा सर्वाधिक लोकप्रिय है।

‘वेतन-आधारित H-1B कार्य-वीजा हेतु नये नियम’ क्या है?

  • नए नियमों के अनुसार, वीजा-चयन में उन नियोक्ताओं के आवेदनों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो संबंधित रोजगार के क्षेत्र में प्रचलित स्तर के ‘बराबर अथवा उससे अधिक’ पूर्व-प्रस्तावित वेतन देने का करते हैं। ‘पूर्व-प्रस्तावित वेतन’ (Proffered Wage), नियोक्ता द्वारा लाभार्थी को दिए जाना वाला प्रस्तावित वेतन होता है।
  • नई प्रणाली में, श्रमिक की विशेषज्ञता अथवा कौशल-समूह को भी ध्यान में रखा जाएगा, और समान वेतन पर इन विशेषज्ञताओं अथवा कौशल-समूहों के लिए अमेरिकी श्रमिकों की उपलब्धता की जांच भी की जाएगी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. H1B, F1 तथा M1 वीजा में अंतर।
  2. एक NRI और एक OCI कार्डधारक के मध्य अंतर।
  3. OCI और PIO का विलय कब किया गया था?
  4. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के तहत किसे नागरिकता प्रदान की जाती है?
  5. भारत में नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान।

मेंस लिंक:

अमेरिकी वीजा नियमों में हाल के बदलावों से भारतीय छात्रों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-ताइवान संबंध


(China- Taiwan relations)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिका द्वारा ताइवान के साथ राजनयिक संपर्को पे लगे प्रतिबंधों को हटा लिया गया है। अमेरिका के इस कदम से चीन के परेशान होने की आशंका है।

हालिया घटनाक्रम:

ट्रम्प प्रशासन द्वारा ताइवान के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए पहल की गयी है।

  • अमेरिका ने, हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र के राजदूत केली क्राफ्ट की ताइवान-यात्रा की घोषणा की है। अमेरिका को इस कदम के लिए भारी कीमत चुकाने की चेतावनी देते हुए बीजिंग ने कड़ी आलोचना की है।
  • पिछले वर्ष अगस्त में, अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा सचिव, वर्ष 2014 के बाद ताइवान का दौरा करने वाले कैबिनेट के पहले सदस्य बने।

चीन और ताइवान

चीनी सरकार का कहना है कि चीन का मुख्य-भूभाग और ताइवान ‘एक चीन’ के भाग हैं।

  • चीन लगातार सैन्य बलों द्वारा अक्सर हमलों और हवाई गश्तों के माध्यम से इस स्व-शासित द्वीप को अपने नियंत्रण में लाने के लिए लगातार धमकी देता रहता है।
  • इसके अलावा, चीन अपने राजनयिक दबदबे का इस्तेमाल करके ताइवान को ऐसे किसी संगठन में, जिसकी सदस्यता के लिए पूर्ण राज्य होना आवश्यक होता है, शामिल होने से रोक देता है

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ताइवान की अवस्थिति और इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि।
  2. वन चाइना नीति के तहत चीन द्वारा प्रशासित क्षेत्र।
  3. क्या ताइवान का WHO और संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनिधित्व किया गया है?
  4. दक्षिण चीन सागर में स्थित देश।
  5. कुइंग राजवंश (Qing dynasty)।

मेंस लिंक:

भारत- ताइवान द्विपक्षीय संबंधों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

K-आकार की आर्थिक बहाली एवं इसके निहितार्थ


संदर्भ:

कोविड महामारी के बाद से, भारत और समूचे विश्व में K-आकार की आर्थिक बहाली की संभावनाओं में वृद्धि हो रही है।

K-आकार की आर्थिक बहाली’ क्या होती है?

जब अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से भिन्न दरों पर बहाली करते है, तो इसे K-आकार की बहाली’ (K-shaped recovery) कहा जाता है।

  • इसके तहत, पिरामिड के शीर्ष पर स्थित पारिवारों के काफी काफी हद तक सुरक्षित होने और लॉकडाउन के दौरान बचत दरों में वृद्धि होने की संभावना होती है, जिससे भविष्य में उपभोग हेतु इनके ‘ससाधनों’ में बढ़त होती है।
  • जबकि, ’K-आकार की आर्थिक बहाली’ में, इस दौरान पिरामिड के निचले स्तर पर स्थित परिवारों को स्थाई रूप से नौकरी और आय के संकट की संभावना होती है।

K-आकार की बहाली’ के वृहत् निहितार्थ:

  1. दो तिमाहियों तक, उच्च आय वाले परिवारों के लिए उच्च बचतों से लाभ प्राप्त हुआ है।
  2. निचले स्तर के परिवारों को नौकरियों और वेतन कटौती के रूप में आय-संबंधी स्थायी नुकसान हुए है; यदि श्रम बाजार में तेजी से सुधार नहीं होता है, तो इससे मांग पर आवर्ती प्रभाव पड़ेगा।
  3. कोविड के कारण प्रभावी आय का गरीब आबादी से समृद्ध आबादी की ओर हस्तांतरण होने की सीमा तक, ’K-आकार की बहाली’ मांग-बाधित रहेगी, क्योंकि गरीब आबादी में सीमांत उपभोग की उच्च प्रवृत्ति होती है। अर्थात, इनमें अपनी आय का उच्च अनुपात (बचत करने की बजाय) व्यय करने की प्रवृत्ति होती है।
  4. यदि कोविड-19 के कारण प्रतिस्पर्धा में कमी होती है अथवा आय और अवसरों की असमानता में वृद्धि होती है, तो इससे उत्पादकता-हानि और राजनीतिक आर्थिक-सीमाओं के कारण विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक-वृद्धि के रुझानों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

आगे की राह:

आर्थिक नीतियों का निर्धारण करने से पहले अगली कुछ तिमाहियों से आगे का अवलोकन करने और इस आभासी उत्तेजना के पश्चात् बृहत अर्थव्यवस्था की स्थिति का अंदाजा लगाने की आवश्यकता है।

economic_recovery

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सरकारी बजट।

CGST एक्ट के तहत कर-चोरी करने पर गिरफ्तारी का प्रावधान बरकरार


संदर्भ:

केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (Central Goods and Service TaxCGST) अधिनियम की धारा 69 के तहत ‘कर-चोरी’ करने का संदेह होने पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की शक्ति प्रदान की गयी है।

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा इस प्रावधान को बरकरार रखा गया है।

संबंधित प्रकरण:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में दावा किया गया था कि:

  • चूंकि, केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 आपराधिक प्रवृत्ति की है, इस बजह से इसे संविधान के अनुच्छेद 246A के तहत लागू नहीं किया जा सकता था।
  • केंद्रीय जीएसटी अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को केवल 2 करोड़ रुपए से अधिक की कर-चोरी करने पर ही गिरफ्तार किया जा सकता है।
  • 5 करोड़ रुपए से कम राशि की कर-चोरी से संबधित सभी अपराध जमानत-योग्य है, और 5 करोड़ रुपए से अधिक राशि के कर-चोरी संबंधी अपराध गैर-जमानती और संज्ञेय हैं।

अदालत की टिप्पणी

  • केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) अधिनियम का मूल आधार, संबंधित विषय पर संसद को कानून बनाने की प्राप्त शक्ति है, जिसके तहत वस्तु एवं सेवा कर आरोपित करने और वसूल करने का प्रावधान और इनके आनुषंगिक गिरफ्तार करने और मुकद्दमा चलाने की शक्ति निर्धारित की गयी है।
  • CGST अधिनियम की धारा 69 और 132 दोनों ’संवैधानिक और संसद की विधायी शक्तियों के अधीन हैं’।
  • अनुच्छेद 246A का दायरा “काफी व्यापक” है क्योंकि यह संसद और राज्य विधायिकाओं को GST अधिनियम को लागू करने या वसूलने में सक्षम बनाता है और साथ ही वस्तु एवं सेवा कर (GST) से संबंधित सभी क़ानून बनाने की शक्ति भी प्रदान करता है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

बिजली-बकाया पर केंद्र और आरबीआई के साथ समझौते से झारखंड बाहर


संदर्भ:

हाल ही में, झारखंड सरकार ने केन्द्र सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक के साथ हुए त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite AgreementTPA) से बाहर आने का फैसला किया है।

‘त्रिपक्षीय समझौता’ क्या है?

वर्ष 2017 में भारत सरकार, झारखंड राज्य और भारतीय रिज़र्व बैंक के मध्य एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसमें कहा गया था कि राज्य सरकार, राज्य बिजली जनोपयोगी सेवाओं द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों, इस मामले में दामोदर वैली कॉरपोरेशन (DVC) को आपूर्ति समझौते के तहत निर्धारित सीमा के भीतर आपूर्ति भुगतान सुनिश्चित करेगी।

  • राज्य बिजली जनोपयोगी सेवाओं द्वारा समझौते की शर्तों का उल्लंघन करने की स्थिति में, राज्य सरकार स्वतंत्र रूप से और प्रमुख देनदार के रूप में भुगतान के लिए उत्तरदायी होगी।
  • त्रिपक्षीय समझौते के तहत, भारत सरकार के लिए रिज़र्व बैंक को अपने निर्देशों पर तुरंत कार्रवाई करने अर्थात ‘ऋण-राशि निकालने’ हेतु निर्देश जारी करने की शक्ति प्रदान की गयी है।
  • समझौते के अनुसार, केंद्र के लिए राज्य के आरबीआई खाते से केंद्रीय बिजली डिस्कॉम के लिए राज्य पर बकाया राशि ऑटो-डेबिट करने की शक्ति प्राप्त है।

झारखंड सरकार का पक्ष:

  • झारखंड मंत्रिमंडल ने त्रि-पक्षीय समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया है क्योंकि यह राज्य के हित में उचित नहीं है।
  • झारखंड सरकार का कहना है, कि केंद्र के इस प्रकार निर्णय देश के संघीय ढांचे को प्रभावित करने वाले हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- IV


 

आपातकालीन प्रतिरक्षण हेतु ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ जारी


संदर्भ:

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (प्रतिरक्षण प्रभाग) द्वारा टीकाकरण के पश्चात प्रतिकूल घटनाओं (Adverse Events Following ImmunisationAEFI) की स्थिति से निपटने हेतु गृह मंत्रालय के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating ProcedureSOP) जारी की गयी है।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय नियामक द्वारा ‘कोविशिल्ड’ और ‘कोवाक्सिन’ दो टीकों के लिए आपातकालीन उपयोग अधिकार अथवा त्वरित स्वीकृति प्रदान की गई है। इन टीकों को कोविड-19 के खिलाफ सुरक्षित एवं प्रतिरक्षात्मकता पाया गया है।

मानक संचालन प्रक्रिया (SOP):

  • इस ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ का उद्देश्य टीकों की उचित देखभाल हेतु जाँचकर्ताओं को सहायता करने के साथ-साथ पीड़ितों के लिए समय सहायता और कानून का प्रभावी रूप से प्रवर्तन करना है।
  • टीकाकरण के पश्चात प्रतिकूल घटनाओं (AEFI) के स्थिति में अधिकारी के लिए साक्ष्य के रूप में वैक्सीन और मंदक की उचित हैंडलिंग सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा नमूनों की शीत-श्रंखला को समुचित रूप से संरक्षित किए जाने को सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • पुलिस अधिकारी, AEFI पीड़ितों और गवाहों के लिए उचित सहायता, सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करेंगे।
  • ‘मानक संचालन प्रक्रिया’ में जरूरत पड़ने पर टीका लगाने वाला की जांच / पूछताछ का भी प्रावधान किया गया है।
  • इससे टीकाकरण सुरक्षा की निगरानी, ​​असुरक्षित टीकाकरण प्रणालियों को सही करने, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को कम करने और टीकाकरण गुणवत्ता में सहायता प्राप्त होगी।
  • AEFI नमूनों की प्रयोगशाला में ले जाने के लिए आधिकारिक मुहर सहित सभी आवश्यक फॉर्म और दस्तावेज़ पूरे होने चाहिए।
  • नमूनों और दस्तावेजों की सीलबंधी प्रयोगशाला में भेजे जाने के दौरान छेड़छाड़ से सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।
  • AEFI के परिणामस्वरूप मौत होने संबंधी गंभीर स्थिति की जांच करते समय पुलिस को “हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि संबंधित दुर्घटना का कारण संयोग और / या वैक्सीन की प्रतिक्रिया हो सकती है और यह हमेशा टीका लगाने वाले और / या अन्य कार्मिकों की आपराधिक लापरवाही नहीं हो सकती है।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


CoWIN क्या है?

कोविन (CoWIN) मुख्य रूप से eVIN का विस्तार है।

यह भारत में कोविड -19 टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक क्लाउड-आधारित आईटी समाधान है।

वैनेडियम

(Vanadium)

संदर्भ:

अरुणाचल प्रदेश में पापुम पारे जिले के डेपो और तमांग क्षेत्रों में पैलियो-प्रोटरोज़ोइक कार्बोसाइट फ़ाइलाइट चट्टानों में वैनेडियम की उच्च मात्रा पायी गयी है। यह भारत में वैनेडियम के प्राथमिक निक्षेप संबंधी पहली रिपोर्ट है।

प्रमुख बिंदु:

  1. वैनेडियम एक काफी महंगी धातु है जिसका उपयोग स्टील और टाइटेनियम को मजबूत करने में किया जाता है।
  2. वर्ष 2017 के दौरान समूचे विश्व में उत्पादित लगभग 84,000 टन वैनेडियम का उत्पादन किया गया, जिसमे कुल 4% का भारत में उपयोग किया गया।
  3. चीन, विश्व के 57% वैनेडियम का उत्पादन करता है। इसके द्वारा 44% धातु का उपभोग किया गया।
  4. वैनेडियम के सर्वाधिक निक्षेप चीन में हैं, उसके बाद रूस और दक्षिण अफ्रीका का स्थान है।

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