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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 9 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. समलैंगिक विवाह पर स्थिति स्पष्ट करने हेतु केंद्र सरकार के लिए अंतिम मौका: दिल्ली उच्च न्यायालय

2. पादरियों के समक्ष कन्फेशन करने के खिलाफ याचिका पर उच्चतम न्यायलय में सुनवाई

 

सामान्य अध्ययन-II

1. बर्ड फ्लू की वापसी

2. ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoEs) द्वारा विदेशों में कैंपस की स्थापना

3. NCAVES इंडिया फोरम- 2021

4. चीन द्वारा तीसरी दक्षिण-एशियाई वार्ता का आयोजन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI)

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

समलैंगिक विवाह पर स्थिति स्पष्ट करने हेतु केंद्र सरकार के लिए अंतिम मौका: दिल्ली उच्च न्यायालय


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं दिल्ली सरकार को हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम और विदेशी विवाह अधिनियम के तहत समलैंगिक-विवाह को मान्यता दिए जाने और पंजीकरण किए जाने की मांग से संबंधित याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने हेतु एक और  मौका दिया गया है।

अक्टूबर और नवंबर में नोटिस जारी करने के बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा इस मामले में कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया है।

पृष्ठभूमि:

दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा सहमति-जन्य समलैंगिक कृत्यों (consensual homosexual acts) को गैर-अपराध घोषित किये जाने के बाद भी समलैंगिक जोड़ों के मध्य विवाह संभव नहीं है।

याचिकाकर्ताओं ने हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act- HMA) और विशेष विवाह अधिनियम (Special Marriage Act- SMA) के तहत समलैंगिक विवाह को मान्यता देने संबंधी घोषणा किए जाने की मांग की है।

  • इसके अलावा अदालत में दो अन्य याचिकाएं दाखिल की गयी है, जिनमे से एक याचिका में दो महिलाओं द्वारा विशेष विवाह अधिनियम (SMA) के तहत समलैंगिक विवाह करने की मांग की गयी है और समलैंगिक विवाह के लिए व्यवस्था नहीं करने वाले क़ानून के प्रावधानों को चुनौती दी गयी है।
  • दूसरी याचिका, दो पुरुषों द्वारा दायर की गयी है, ये जोड़ा अमेरिका में परस्पर विवाह कर चुका है, किंतु भारत में इनके विवाह को विदेशी विवाह अधिनियम (FMA) के तहत पंजीकृत करने से इनकार कर दिया गया।

भारत में समलैंगिक विवाहों की वैधता

भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के तहत समलैंगिक व्यक्तियों के साथ यौन-संबंध या विवाह करना एक दंडनीय अपराध है।

  • हालांकि, 6 सितंबर, 2018 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा धारा 377 को गैर-आपराधिक घोषित करते हुए समलैंगिक यौन-संबंधो को वैध कर दिया गया।
  • इससे पहले, 2 जुलाई 2009 को, नाज़ फाउंडेशन बनाम दिल्ली सरकार’ मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सहमति-शुदा वयस्कों के मध्य समलैंगिक यौन-संबंधों से संबंधित प्रावधानों को असंवैधानिक घोषित किया था, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने 11 दिसंबर 2013 को इस फैसले को पलट दिया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. धारा 377
  2. समलैंगिक-विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधान
  3. धारा 377 का गैर-अपराधीकरण
  4. विशेष विवाह अधिनियम (SMA)
  5. विदेशी विवाह अधिनियम (FMA)

मेंस लिंक:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सहमति-जन्य समलैंगिक कृत्यों को गैर-अपराध बनाए जाने के बावजूद समलैंगिक लोगों के लिए अपने लैंगिक-रुझान को प्रकट करना आसान नहीं है। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: महिलाओं की भूमिका और महिला संगठन, जनसंख्या एवं संबद्ध मुद्दे, गरीबी और विकासात्मक विषय, शहरीकरण, उनकी समस्याएँ और उनके रक्षोपाय।

पादरियों के समक्ष कन्फेशन करने के खिलाफ याचिका पर उच्चतम न्यायलय में सुनवाई


संदर्भ:

ईसाई धर्म के पादरियों के समक्ष धार्मिक कन्फेशन (Sacred Confessions) की अनिवार्यता के खिलाफ महिलाओं के एक समूह द्वारा दायर की गयी याचिका पर तीन सप्ताह के बाद उच्चतम न्यायलय ने सुनवाई करने के लिए सहमति व्यक्त की है।

चूंकि, यह विषय आस्था, महिलाओं के अधिकारों और समानता के दायरे में आता है, अतः अदालत याचिका से संबंधित मुद्दों की जांच करेगी।

पृष्ठभूमि:

कुछ चर्चों में प्रचलित धार्मिक कन्फेशन की अनिवार्य प्रथा के खिलाफ केरल में पांच महिलाओं ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है।

  • याचिकाकर्ताओं का कहना है कि, यह प्रथा इनके लिए संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है।
  • चर्च की सदस्य याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है, कि इस प्रथा के कारण महिलाओं के यौन शोषण तथा पुरुष और महिला अनुयायियों की ब्लैकमेलिंग सहित कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

प्रचलित प्रथाएँ:

मलंकारा आर्थोडाक्स सीरियन चर्च (Malankara Orthodox Syrian Church) के अनुसरण में धार्मिक प्रथाओं के तहत इसके सदस्यों को पाप-मुक्त होने के लिए एक पादरी के समक्ष ‘पवित्र कन्फेशन’ से गुजरना पड़ता है।

  • परंपरा के अनुसार, प्रत्येक ईसाई की लौकिक और आध्यात्मिक जरूरतों की पूर्ति के लिए यह एक आवश्यक शर्त है।
  • जो व्यक्ति इस प्रथा का पालन नहीं करता है उसे चर्च द्वारा प्रद्दत इस प्रकार की सेवाओं के लाभ से वंचित कर दिया जाता है।

इस प्रकार के मामले में उच्चतम न्यायलय के पूर्व निर्णय:

इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मलंकारा आर्थोडाक्स सीरियन चर्च के वर्ष 1934 के संविधान की वैधता को बरकरार रखा था। इसमें चर्च के तहत आने वाले क्षेत्रों के नियंत्रण संबंधी नियमों का निर्धारण किया गया था।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘पवित्र कन्फेशन’ क्या होता है?
  2. धर्म की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार
  3. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

बर्ड फ्लू की वापसी


 संदर्भ:

हाल ही में, गुजरात राज्य में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लूएंजा / Avian Influenza) के नए मामलों की पुष्टि हुई है, इससे पहले केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा में इस बीमारी की पुष्टि हो चुकी है।

कई राज्यों में कौवे और प्रवासी प्रजातियों के पक्षियों की मौत होने की रिपोर्ट सामने आ रही है, जिससे इन राज्यों में  वायरस की पहचान करने हेतु नमूनों की जांच कराने के  अफरा-तफरी मच रही है।

बर्ड फ्लू संक्रमण:

बर्ड फ्लू या एवियन इन्फ्लूएंजा एक वायरल संक्रमण है जो अधिकांशतः पक्षियों में होता है, हालांकि यह मनुष्यों और अन्य जानवरों को प्रभावित करने में भी सक्षम होता है।

अब तक बर्ड फ्लू के एक दर्जन से अधिक प्रकारों की पहचान की गई है,  इनमे मनुष्यों को हाल ही में संक्रमित करने वाले दो उप-प्रकार H5N1 और H7N9 भी सम्मिलित हैं। जब इंसानों में बर्ड फ्लू का संक्रमण होने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।

  • इस वायरस को सबसे पहले वर्ष 1996 में चीन में देखा गया था।
  • बर्ड फ्लू का प्रकोप एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में पूर्व में फ़ैल चुका है।
  • भारत में, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल के नमूनों ने वायरस का ‘टाइप ए’ (H5N8) उप-प्रकार पाया गया है, हिमाचल प्रदेश के नमूनों में वायरस के ‘टाइप ए’ (H5N1) उप-प्रकार की उपस्थिति पायी गयी है।

बर्ड फ्लू के कारण

बर्ड फ्लू, प्राकृतिक रूप से जंगली जल-पक्षियों में फैलता है और यह मुर्गी, टर्की, बतख और गीज़ (Geese) जैसे घरेलू पक्षियों को संक्रमित कर सकता है।

  • यह बीमारी संक्रमित पक्षी की विष्ठा के संपर्क में आने अथवा पक्षी की नाक, मुंह या आंखों से स्रावित होने वाले द्रव्यों के माध्यम से फैलती है।
  • संक्रमित पक्षियों के अधपके पोल्ट्री मांस या अंडे भी बर्ड फ्लू को प्रसरण कर सकते हैं।

मानवों में संक्रमण:

H5N1 वायरस एक प्रजाति से दूसरी में फ़ैल सकता है और संक्रमित पक्षी से मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है।

  • मनुष्यों में H5N1 संक्रमण का पहला मामला वर्ष 1997 में हांगकांग में दर्ज किया गया था।
  • अपने वर्तमान रूप में बर्ड फ्लू का मानव-से-मानव संक्रमण अभी तक ज्ञात नहीं है – केवल संक्रमित पक्षियों के सम्पर्क में आने वाले मनुष्यों में संक्रमण की जानकारी मिली है।

बर्ड फ्लू का पोल्ट्री मांस एवं अंडे से संबंध

दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की तुलना में, H5N1 वायरस द्वारा मनुष्यों के संक्रमित होने संभावना भारत में काफी कम है। इसका मुख्य कारण रसोई पकाने के तरीकों में भिन्नता है।

  • H5N1 वायरस, 70 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के संपर्क में आने पर तुरंत नष्ट हो जाता है।
  • दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के विपरीत, भारत में मांस और अंडे दोनों को अच्छी तरह से पकाया जाता है, इस प्रक्रिया में ये खाद्य पदार्थ लगभग 100 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के संपर्क में आते है।
  • इस प्रकार मनुष्यों के चिकन और अंडे खाने से वायरस संक्रमण की संभावना अत्यंत कम होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. किसी देश के ’एवियन इन्फ्लुएंजा से मुक्त’ होने की घोषणा किसके द्वारा की जाती है?
  2. H5N1 बनाम H5N6 बनाम H9N2 बनाम H5N8।

मेंस लिंक:

बर्ड फ्लू पर एक टिप्पणी लिखिए। इसे किस प्रकार रोका जा सकता है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoEs) द्वारा विदेशों में कैंपस की स्थापना


संदर्भ:

हाल ही में, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा अपने नियमों में संशोधन करके इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (Institutions of Eminence- IoEs) को विदेशों में कैंपस स्थापित करने की अनुमति प्रदान की गयी है, किंतु इन संस्थानों के लिए विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

UGC द्वारा किए गए संशोधनों में IOE को नए ऑफ कैंपस सेंटर (Off Campus Centers) शुरू करने की अनुमति भी प्रदान की गयी है, जिसके तहत पांच सालों में अधिकतम तीन और एक शैक्षणिक वर्ष में अधिकतम एक ऑफ कैंपस सेंटर की स्थापना की जा सकती है।

‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoE) क्या होते हैं?

उच्च शैक्षणिक संस्थानों को अधिक सक्षम और वैश्विक स्तर के शिक्षण और अनुसंधान संस्थान बनाने में मदद करने हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ योजना का शुभारंभ किया गया है।

  • वित्त मंत्री द्वारा वर्ष 2016 के अपने बजट भाषण में इस योजना की घोषणा की गई थी।
  • इस योजना से आम भारतीयों को उच्च गुणवत्ता युक्त शिक्षा तक आसान पहुंच प्राप्त होगी।

इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ योजना के उद्देश्य:

उत्कृष्टता और नवाचार: स्नातक, स्नातकोत्तर  और अनुसंधान डिग्री स्तरों के उपयुक्त ज्ञान की ऐसी शाखाओं में उत्कृष्टता और नवाचारों के लिए उच्च शिक्षा प्रदान करना।

विशेषज्ञता: विश्वविद्यालय शिक्षा प्रणाली के उद्देश्यों में विशिष्ट योगदान देने हेतु विशेषज्ञता क्षेत्रों में संबद्ध होना।

वैश्विक रेटिंग: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शिक्षण और अनुसंधानों के लिए विश्व के शीर्ष सौ संस्थानों में रेटिंग हासिल करना।

गुणवत्ता शिक्षण और अनुसंधान: ज्ञान की उन्नति और इसके प्रसार के लिए उच्च गुणवत्ता-युक्त शिक्षण और अनुसंधान सुविधाएँ प्रदान करना।

योजना के तहत प्रोत्साहन राशि:

  • ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoE) का दर्जा प्राप्त संस्थानों को फीस, पाठ्यक्रम अवधि और प्रशासन का निर्धारण करने हेतु लिए अधिक स्वायत्तता और स्वतंत्रता प्रदान की जाएगी।
  • IoE दर्जे के तहत सार्वजनिक संस्थानों को ₹ 1,000 करोड़ का सरकारी अनुदान प्रदान किया जाएगा, जबकि इस योजना के तहत निजी संस्थानों को कोई धन प्राप्त नहीं होगा।

इस योजना का महत्व

जो शैक्षणिक संस्थान, उच्चतम गुणवत्ता-युक्त शिक्षा, अत्याधुनिक अनुसंधान उपलब्ध कराने और विश्व के श्रेष्ठ प्रतिभाशाली व्यक्तियों आकर्षित करने में सक्षम होते है, वे देश के विकास में गुणक प्रभाव डाल सकते हैं। अतः स्वायत्तता प्रदान करके क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ को सर्वोच्च स्तर तक पहुंचाने की यह योजना काफी महत्वपूर्ण है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ योजना की मुख्य विशेषताएं
  2. ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoE) के लिए यूजीसी के दिशानिर्देश

मेंस लिंक:

‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस’ (IoE) क्या हैं? भारत के लिए इस प्रकार के संस्थानों से क्या लाभ हो सकते है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

NCAVES इंडिया फोरम- 2021


संदर्भ:

प्राकृतिक पूंजी लेखा एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन (Natural Capital Accounting and Valuation of the Ecosystem Services NCAVES) इंडिया फोरम– 2021 का आयोजन सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किया जा रहा है।

भारत इस परियोजना में भाग लेने वाले पांच देशों में से एक है। इसमें शामिल अन्य देश हैं – ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको।

NCAVES परियोजना

‘प्राकृतिक पूंजी लेखा एवं पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन’ परियोजना अर्थात NCAVES परियोजना का उद्देश्य ब्राजील, चीन, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका में पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन के सिद्धांतों एवं प्रणालियों को उन्नत करना है।

इस परियोजना को संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग (UNSD), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और जैव विविधता सम्मेलन (CBD) सचिवालय द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जा रहा है।

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य पांचों भागीदार देशों के लिए ‘विशेष रूप से पारिस्थितिक तंत्र लेखांकन’ में पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन पर उपलब्ध जानकारी एवं प्रचलित कार्यप्रणालियों को उन्नत करने में सहायता प्रदान करना है।
  • इस परियोजना का कार्यकाल वर्ष 2021 के अंत में समाप्त होगा।

वित्तीयन: इस परियोजना के लिए यूरोपीय संघ द्वारा अपने पार्टनरशिप इंस्ट्रूमेंट (Partnership Instrument- PI) के माध्यम से वित्त पोषित किया गया है।

NCAVES इंडिया फोरम के उद्देश्य:

  • प्राकृतिक पूंजी लेखा (Natural Capital Accounting- NCA) के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को प्रस्तुत करना;
  • भारत में प्राकृतिक पूंजी लेखा (NCA) क्षेत्र में उभरते अवसरों को प्राथमिकता देना;
  • प्राकृतिक पूंजी लेखा क्षेत्र में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा किए गए काम से हितधारकों का परिचय कराना; तथा
  • पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन में चयनित अनुसंधान संस्थानों द्वारा किये गए शोध कार्यों के प्रदर्शन हेतु एक मंच प्रदान करना।

NCAVES इंडिया फोरम 2021 के बारे में:

भारत में, NCAVES परियोजना को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF & CC) और नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के सहयोग से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

NCAVES इंडिया फोरम 2021, का आयोजन आभासी प्रारूप में किया जा रहा है।

फोरम का मुख्य फोकस:

  1. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा प्राकृतिक पूंजी लेखांकन और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन के क्षेत्र में किए गए प्रयास
  2. भारत में प्राकृतिक पूंजी लेखांकन हेतु नीति-निर्धारण की मांग
  3. प्राकृतिक पूंजी लेखांकन में उपलब्धियाँ और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन और भारत में प्राकृतिक पूंजी लेखांकन की संभावनाएँ

महत्व:

इस परियोजना में भागीदारी से सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) को UN-SEEA फ्रेमवर्क के अनुरूप पर्यावरणीय खातों का संकलन शुरू करने में सहायता प्राप्त होगी।

  • वर्ष 2018 से वार्षिक आधार पर अपने प्रकाशन “एनवीस्टैट्स इंडिया” में पर्यावरणीय खातों को जारी करने में मदद मिली है।
  • इस फोरम में, MOSPI द्वारा वर्ष 2018 से वार्षिक आधार पर अपने प्रकाशन “EnviStats India” में पर्यावरण खातों का विवरण जारी किया गया है।
  • इनमें से कई खाते सामाजिक और आर्थिक विशेषताओं से निकटता से संबंधित हैं, जोकि इस नीति के लिए उपयोगी साबित होंगे।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCAVES प्रोजेक्ट के बारे में?
  2. भागीदार देश।
  3. भारत में इस परियोजना को लागू करने वाली संस्थाएं
  4. अनुदान
  5. भारत के लिए महत्व

मेंस लिंक:

NCAVES परियोजना में भागीदारी से भारत को पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन के सिद्धांत और प्रणालियों को उन्नत करने में मदद मिलेगी। चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।

चीन द्वारा तीसरी दक्षिण-एशियाई वार्ता का आयोजन


संदर्भ:

हाल ही में, चीन ने कोविड-19 का मुकाबला करने हेतु करीबी सहयोग में वृद्धि करने हेतु दक्षिण-एशियाई देशों के साथ तीसरा बहुपक्षीय वार्ता सम्मलेन का आयोजन किया है।

चीन के इस कदम को आर्थिक कार्यक्रमों का समन्वय करने संबंधी प्रयासों में बीजिंग की नीतियों में दृष्टिकोण परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • 6 जनवरी को आयोजित तीसरी वार्ता में, भारत, भूटान और मालदीव के अलावा दक्षिण एशिया के सभी देशों ने भाग लिया है।
  • इस सम्मलेन का उद्देश्य ‘महामारी-रोधी सहयोग एवं निर्धनता-उन्मूलन सहयोग” था।

दक्षिण-एशियाई बहुपक्षीय वार्ताओं के बारे में:

पाकिस्तान और नेपाल द्वारा तीनों दक्षिण-एशियाई बहुपक्षीय वार्ताओं में भाग लिया गया है। ये दोनों देश चीन की क्षेत्रीय रणनीति में दो महत्वपूर्ण सहयोगियों के रूप में उभर रहे हैं।

  1. चीन द्वारा पहली दक्षिण-एशियाई बहुपक्षीय वार्ता जुलाई, 2020 में आयोजित की गई थी और इसमें पाकिस्तान, नेपाल और अफगानिस्तान ने भाग लिया था।
  2. दूसरी वार्ता का आयोजन नवंबर, 2020 में पांच सदस्यीय समूह, चीन, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश द्वारा किया गया था।
  3. तीसरी और हाल ही में संपन्न होने वाली वार्ता में समूह के सभी पांच देशों, पाकिस्तान, नेपाल, अफगानिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश ने भाग लिया है।

CPEC का विस्तार

अफगानिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान के साथ जुलाई में हुई चतुष्पक्षीय वार्ता में, चीन के विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (China-Pakistan Economic CorridorCPEC) का विस्तार करने का प्रस्ताव दिया।

  • चीन द्वारा नेपाल के साथ एक आर्थिक गलियारे की योजना को आगे बढ़ाने पर चर्चा जारी है, इस गलियारे को ‘पार-हिमालय बहु-आयामी संपर्क नेटवर्क’ (Trans-Himalayan Multi-dimensional Connectivity Network) कहा जा रहा है।
  • दक्षिण एशिया के ये चारो देश आपस में ‘पहाड़ों और नदियों’ द्वारा संबद्ध है।
  • चीन ने इन देशों के लिए कोविड-19 टीकों पर विशेषज्ञता और क्षमता को साझा करने का प्रस्ताव भी किया है।

इन वार्ताओं का महत्व एवं निहितार्थ:

  • इन वर्चुअल वार्ताओं को महामारी प्रतिक्रिया और आर्थिक सुधारों में चार देशों के मध्य सहयोग को सशक्त करने संबंधी प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है।
  • पिछली दो वर्चुअल वार्ताएं वैश्विक महामारी की पृष्ठभूमि में दक्षिण एशिया क्षेत्र में चीन के बढ़ते संबंधो के रूप में प्रतीत होती हैं।

स्रोत: द हिंदू

 

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI)

हाल ही में, नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NIXI) द्वारा प्रत्येक आवेदक को अपनी पसंदीदा 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में से किसी एक में निःशुल्क आईडीएन (Internationalized Domain NameIDN) का विकल्प देने की घोषणा की गयी है।

  • निःशुल्क IDN, आवेदक द्वारा बुक किए गए प्रत्येक IN डोमेन के साथ उपलब्ध होगा।
  • यह प्रस्ताव भारत (IDN) डोमेन नाम और स्थानीय भाषा सामग्री के प्रसार को अपनाने को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है।

NIXI के बारे में:

नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (NIXI) भारत के नागरिकों को इंटरनेट तकनीक के प्रसार हेतु वर्ष 2003 से कार्यरत एक गैर-लाभकारी संगठन है।


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