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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 7 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. नए ‘अनुभव मंटपा’ का शिलान्यास

 

सामान्य अध्ययन-II

2. क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर आरक्षण कार्यप्रणाली

 

सामान्य अध्ययन-III

1. विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति

2. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. स्टॉक एक्सचेंजों की स्थापना हेतु प्रवेश मानदंडों पर विचार

2. मैग्नेटोटेल्यूरिक-एमटी सर्वेक्षण

3. कामधेनु गौ-विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा

4. टॉयकाथॉन-2021

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

नए ‘अनुभव मंटपा’ का शिलान्यास


(Foundation stone laid for ‘New Anubhava Mantapa’)

संदर्भ:

हाल ही में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा द्वारा बसवकल्याण (Basavakalyan) में नए ‘अनुभव मंटपा’ का शिलान्यास किया गया। इस स्थान पर बारहवीं सदी के कवि और दार्शनिक बसवन्ना (Basavanna) ने अपने जीवन का अधिकाँश समय व्यतीत किया था।

  • इस परियोजना के अंतर्गत बारहवीं सदी के ‘अनुभव मंटपा’ (Anubhava Mantapa) को प्रदर्शित किया जाएगा। बसवन्ना ने बसवकल्याण में ‘अनुभव मंटपा’ की स्थापना की थी और इसमें दार्शनिकों और समाज सुधारकों द्वारा विभिन्न विषयों पर बहस की जाती थी।
  • अनुभव मंटपा को प्रायः विश्व की प्रथम संसद भी कहा जाता है।
  • इस भवन को कल्याण-चालुक्य वास्तु शैली के आधार पर निर्मित किया जाएगा।

बसवन्ना: विचार एवं योगदान

  1. बसवन्ना, कर्नाटक में कलचुरी-वंश के राजा बिज्जल प्रथम के शासनकाल के दौरान बारहवीं सदी के दार्शनिक, राजनीतिज्ञ, कन्नड़ कवि और समाज सुधारक थे।
  2. बसवन्ना ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में जागरूकता का प्रसार किया, इन कविताओं को ‘वचन’ (Vachanaas) कहा जाता है।
  3. बासवन्ना ने लैंगिक अथवा सामाजिक भेदभाव, अंधविश्वास और रीति-रिवाजों का खंडन किया था।
  4. उन्होंने, अनुभव मंटपा (अथवा, आध्यात्मिक अनुभव भवन) जैसे नए सार्वजनिक संस्थानों की शुरुआत की। यहाँ पर, सभी सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमियों के पुरुषों और महिलाओं का स्वागत किया जाता था और जीवन के आध्यात्मिक और सांसारिक सवालों पर खुलकर चर्चा की जाती थी।
  5. उन्होंने एक नेता के रूप में ‘वीरशैव’ (भगवान शिव के कट्टर उपासक) नामक एक नए भक्ति आंदोलन का नेतृत्व किया। इस आंदोलन की जड़ें सातवीं से ग्यारहवीं सदी के दौरान में प्रचलित तमिल भक्ति आंदोलन, विशेषकर शैव नयनार परंपराओं में मिलती है।
  6. बसवा ने भक्तिमय आराधना पर जोर देते हुए ब्राह्मणों के नेतृत्व में मंदिरों में पूजा और अनुष्ठानों का खंडन किया और इसके स्थान पर प्रतीक रूप में व्यक्तिगत रूप से छोटे शिवलिंग धारण करके शिव की प्रत्यक्ष आराधना करने का संदेश दिया।
  7. बसवेश्वरा पहले कन्नड़ है जिनके सम्मान में, उनके सामाजिक सुधारों के लिए एक स्मारक सिक्का जारी किया गया है।
  8. नवंबर 2015 में, भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लंदन में लम्बेथ (Lambeth) में टेम्स नदी के किनारे बसवेश्वरा की मूर्ति का उद्घाटन किया गया।

बसवन्ना और शरण आंदोलन:

बसवन्ना की अध्यक्षता में ‘शरण आंदोलन’ (Sharan Movement) ने  सभी जातियों के लोगों को आकर्षित किया और भक्ति आंदोलन की अधिकाँश शाखाओं की भांति, ‘वचन’ के रूप में साहित्य रचना की, जिसमे वीरशैव संप्रदाय के संतों की आध्यात्मिक दुनिया का वर्णन मिलता है।

  • बसवन्ना का ‘शरण आंदोलन’ तत्कालीन समय के हिसाब से काफी उग्र सुधारवादी आंदोलन था।
  • उन्होंने अनुभव मंटपा की स्थापना की, जहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों से आये हुए ‘शरण’ समर्थक एकत्रित होते तथा चर्चा करते थे।
  • ‘शरण आंदोलन’ ने जाति व्यवस्था के अंतिम गढ़ को चुनौती दी: उन्होंने एक विवाह समारोह का आयोजन किया जिसमें दूल्हा एक नीची जाति से और दुल्हन एक ब्राह्मण जाति से थी।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. श्रमण परंपरा क्या है?
  2. वचन क्या हैं?
  3. अनुभव मंटपा क्या है?
  4. कलचुरि कौन हैं?
  5. नयनार कौन हैं?
  6. भक्ति आंदोलन क्या है?

मेंस लिंक:

बारहवीं शताब्दी के सुधारक बासवन्ना द्वारा समाज के प्रति किये गए महत्वपूर्ण योगदानों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर आरक्षण कार्यप्रणाली


संदर्भ:

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश मामले में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज आरक्षण लागू किए जाने हेतु वैधानिक स्थिति को स्पष्ट किया गया है।

उपरोक्त मामला, राज्य में कांस्टेबलों के पदों को भरने हेतु चयन प्रक्रिया में विभिन्न वर्गों को दिए जाने वाले आरक्षण के तरीके से उत्पन्न विवाद से संबंधित था।

‘ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज आरक्षण’ क्या हैं?

  • ऊर्ध्वाधर आरक्षण (Vertical Reservation): अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए दिए जाने वाले आरक्षण को ऊर्ध्वाधर आरक्षण कहा जाता है। यह विधि के अंतर्गत निर्दिष्ट प्रत्येक समूह के लिए अलग से प्रदान किया जाता है।
  • क्षैतिज आरक्षण (Horizontal reservation): क्षैतिज आरक्षण का तात्पर्य महिलाओं, सेवानिवृत्त सैनिकों, ट्रांसजेंडर समुदाय और विकलांग व्यक्तियों आदि लाभार्थियों को सभी ऊर्ध्वाधर आरक्षण श्रेणियों में समान अवसर प्रदान करना है।

आरक्षण की दोनो श्रेणियां को एक साथ किस प्रकार लागू किया जाता है?

क्षैतिज आरक्षण को प्रत्येक ऊर्ध्वाधर श्रेणी में अलग से लागू किया जाता है।

उदाहरणार्थ, यदि महिलाओं को 50% क्षैतिज आरक्षण प्राप्त होता है, तो प्रत्येक ऊर्ध्वाधर आरक्षण श्रेणी के चयनित उम्मीदवारों में आधी संख्या महिलाओं की होगी, अर्थात, अनुसूचित जाति के सभी चयनित उम्मीदवारों में आधी संख्या महिलाओं की होगी, इसी प्रकार अनारक्षित या सामान्य श्रेणी में भी सभी चयनित उम्मीदवारों में आधी संख्या महिलाओं की होगी। यही प्रक्रिया सभी प्रकार की आरक्षण श्रेणियों में लागू होगी।

संदर्भित मामले का अवलोकन:

उत्तरप्रदेश की एक प्रतियोगी परीक्षा में सोनम तोमर और रीता रानी ने क्रमशः 276.5949 और 233.1908 अंक हासिल किए थे। उन्होंने क्रमशः ओबीसी-महिला और एससी-महिला की श्रेणियों के तहत आवेदन किया था।

  • अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अनुसूचित जाति (एससी) ऊर्ध्वाधर आरक्षण श्रेणियां हैं, तथा ‘महिला’ आरक्षण एक क्षैतिज आरक्षण श्रेणी के अंतर्गत आता है।
  • दोनों उम्मीदवार, अपनी-अपनी श्रेणियों में अर्हता प्राप्त नहीं कर सके। हालांकि, सामान्य-महिला (अनारक्षित-महिला) श्रेणी में, अंतिम अर्हता प्राप्त उम्मीदवार को 8298 अंक हासिल हुए थे, जो कि ओबीसी-महिला वर्ग के अंतर्गत आवेदन करने वाली उम्मीदवार की तुलना में कम थे।

इस मामले में अदालत का निर्णय:

इस मामले में शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि यदि ऊर्ध्वाधर-क्षैतिज आरक्षित श्रेणी से संबंधित व्यक्ति द्वारा, बगैर ऊर्ध्वाधर आरक्षण के, अर्हता प्राप्त करने योग्य पर्याप्त अंक हासिल किये गए हैं, तो उस व्यक्ति को बिना ऊर्ध्वाधर आरक्षण के अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवार के रूप में माना जाएगा और उसे सामान्य श्रेणी में क्षैतिज आरक्षण से बाहर नहीं किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आरक्षण के संबंध में संवैधानिक प्रावधान
  2. अनुच्छेद 32, 226, 14, 15 और 16 का अवलोकन
  3. रिट (writ) क्या हैं?
  4. SC तथा HC की रिट जारी करने की शक्तियों में अंतर।
  5. इंद्र साहनी केस का निर्णय
  6. अनुच्छेद 32 को कब निलंबित किया जा सकता है?
  7. रिट (writ) को जारी करने के लिए किसी अन्य न्यायालय को कौन प्राधिकृत कर सकता है।

मेंस लिंक:

आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के सन्दर्भ में चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीति


(Science, Technology and Innovation (STI) policy)

संदर्भ:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 1 जनवरी को राष्‍ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (Science, Technology and Innovation- STI) नीति का मसौदा जारी किया गया।

यह नीति वैज्ञानिक अनुसंधान समुदाय के अलावा विज्ञान के संपर्क में रहने वाले आम भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इस नीति का मूल दर्शन

व्यापक रूप सूत्रीकरण पे आधारित पिछली विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) नीतियों के विपरीत, 5वीं राष्‍ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति (national STI policy- STIP) विकेन्‍द्रीकरण, प्रामाणिक साक्ष्‍य, विशेषज्ञों द्वारा संचालन और समग्रता के मूल सिद्धांतों पर आधारित हैं।

प्रमुख उद्देश्य:

  1. इस नीति का उद्देश्य आगामी दशको में भारत को शीर्ष तीन वैज्ञानिक महाशक्तियों में स्थान दिलाना है।
  2. ‘लोक केंद्रित’ विज्ञान, प्रौद्योगिकी के माध्यम से महत्वपूर्ण मानव पूंजी को आकर्षित करना, पोषित करना, मजबूत करना और बनाए रखना।
  3. प्रति 5 साल में, पूर्णकालिक शोधकर्ताओं की संख्या, अनुसंधान एवं विकास पर सकल घरेलू व्यय (gross domestic expenditure on R&D- GERD) और निजी क्षेत्र में योगदान को दोगुना करना।
  4. आने वाले दशक में वैश्विक पहचान और उच्चतम स्तर के पुरस्कार प्राप्त करने के उद्देश्य से STI में व्यक्तिगत और संस्थागत उत्कृष्टता का निर्माण करना।

प्रमुख घटक:

  1. इस नीति में, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित अनुसंधानों के निष्कर्षों तक सभी जो स्वतंत्र पहुंच प्रदान करने हेतु एक ‘ओपन साइंस फ्रेमवर्क’ का प्रस्ताव किया गया है।
  2. ‘एक राष्ट्र, एक शुल्क’ (One Nation, One Subscription): विज्ञान को लोकतांत्रिक बानाने हेतु देश में प्रत्येक व्यक्ति के लिए ‘विद्वत्तापूर्ण ज्ञान’ तक पहुंच प्रदान करने हेतु इस विचार का प्रस्ताव किया गया है।
  3. इसमें राष्ट्रीय महत्व के बड़े मिशन मोड कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए सामान्य वित्तीय नियमों (General Financial RulesGFR) के संशोधन अथवा छूट का सुझाव दिया गया है।

इस नीति में की गयी अनुशंसाएं:

  • शैक्षणिक संस्थानों में वंचित समूहों के लिए अनिवार्य पद तथा चयन / मूल्यांकन समितियों और निर्णय लेने वाले समूहों में महिलाओं का 30% प्रतिनिधित्व।
  • करके महिलाओं के लिए करियर से संबंधित मुद्दों का समाधान करते समय जीवन-आयु के बजाय शैक्षणिक उम्र पर विचार करना।
  • दंपतियों के लिए दोहरी भर्ती नीति; और समता और समावेशन का संस्थानीकरण करने हेतु समता एवं समावेशन कार्यालय की स्थापना करना, आदि।

कोविड-19 महामारी से भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र को क्या सीख मिली हैं?

  • भारत में, महामारी ने अनुसंधान एवं विकास संस्थानों, शिक्षा और उद्योग के लिए बेहतर तालमेल और सहयोग के साथ काम करने का एक शानदार अवसर प्रदान किया है। इसने रिकॉर्ड समय में महामारी से बचाव में प्रयुक्त होने वाली किटों की उत्पादन-क्षमता विकसित करने में देश की मदद की है।
  • STIP ड्राफ्ट में, भविष्य में अधिक दक्षता और तालमेल के लिए इस प्रकार की शिक्षा को अपनाने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP)


(National Infrastructure Pipeline)

संदर्भ:

हाल ही में, वित्त मंत्री द्वारा राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (National Infrastructure Pipeline- NIP) परियोजनाओं की प्रगति, अभी तक हुए खर्च और परियोजना के कार्यान्वयन की समीक्षा की गयी।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) का शुभारम्भ 6,835 परियोजनाओं के साथ किया गया था, जिसका अब 7,300 से ज्यादा परियोजनाओं तक विस्तार कर दिया गया है।

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के बारे में:

  1. वित्त मंत्री द्वारा 2019-2020 के बजट भाषण में अगले 5 साल में अवसंरचना परियोजनाओं पर 100 लाख करोड़ रुपये के व्यय की घोषणा की गयी थी।
  2. NIP देश भर में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने और सभी नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में अपनी तरह की एक अनूठी पहल है।
  3. इससे परियोजना की तैयारी में सुधार होगा, तथा अवसंरचना में निवेश (घरेलू और विदेशी दोनों) आकर्षित होगा। साथ ही यह वित्त वर्ष 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अहम होगा।
  4. NIP में आर्थिक और सामाजिक अवसंरचना परियोजना दोनों को सम्मिलित किया गया है।

अतनु चक्रवर्ती टास्कफोर्स द्वारा की गई महत्वपूर्ण सिफारिशें:

  1. निवेश की आवश्यकता: अवसंरचना परियोजनाओं के निर्माण तथा आर्थिक विकास में वृद्धि हेतु अगले पांच वर्षों (2020-2025) में 111 लाख करोड़ ₹ का निवेश।
  2. कुल परियोजनाओं में ऊर्जा, सड़क, रेलवे और शहरी क्षेत्रों की परियोजनाएं सबसे अधिक है, जिन पर कुल राशि का लगभग 70% व्यय अनुमानित है।
  3. इन परियोजनाओं में केंद्र (39 प्रतिशत) और राज्य (40 प्रतिशत) की साझेदारी होगी, जबकि निजी क्षेत्र की 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
  4. परिसंपत्तियों की बिक्री हेतु आक्रामक रवैया।
  5. अवसंरचना परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण।
  6. विकास वित्त संस्थानों की स्थापना।
  7. नगरपालिका बांड बाजार को मजबूत करना।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NIP क्या है? इसे कब लॉन्च किया गया था?
  2. NIP के तहत शामिल परियोजनाएं
  3. NIP पर अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में कार्य बल द्वारा की गई प्रमुख सिफारिशें
  4. कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों के अनुसार प्रस्तावित तीन समितियां
  5. भारत निवेश ग्रिड क्या है?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) के महत्व और विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


स्टॉक एक्सचेंजों की स्थापना हेतु प्रवेश मानदंडों पर विचार

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India- SEBI) ने स्टॉक एक्सचेंज एंड डिपॉजिटरी, जिन्हें ‘बाजार अवसंरचना संस्थान (market infrastructure institutions-MII) भी कहा जाता है, स्थापित करने के लिए नए सदस्यों की सुविधा हेतु स्वामित्व और शासन मानदंडों की समीक्षा पर एक विमर्श-पत्र जारी किया है।

प्रमुख प्रस्तावों के अनुसार:

  • MII की स्थापना करने वाला एक स्थानिक प्रवर्तक (Resident Promoter) अपने पास 100% तक शेयर रख सकता है, जिन्हें 10 वर्षों में (51% अथवा 26%) तक कम करना होगा।
  • वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) के सदस्य क्षेत्राधिकार के तहत ‘बाजार अवसंरचना संस्थान’ (MII) की स्थापना करने वाला एक विदेशी प्रमोटर अपने पास 49% तक शेयर रख सकता है, जिसे 10 वर्षों में (26% या 15%) तक कम करना होगा।
  • FATF के सदस्य क्षेत्राधिकार के अलावा अन्य विदेशी व्यक्ति या संस्थाएं भी MII में 10% तक शेयर खरीद सकती हैं।
  • प्रमोटर के अलावा कोई भी व्यक्ति 25% से कम शेयर खरीद सकता है।

मैग्नेटोटेल्यूरिक-एमटी सर्वेक्षण

(Magnetotelluric MT survey)

राष्‍ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology- NCS) द्वारा दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी  क्षेत्र में संभावित भूकंपीय खतरों का सही आकलन करने हेतु एक विशिष्ट भूभौतिकीय (Magnetotelluric- MT survey) सर्वेक्षण किया जा रहा है।

इसके निष्कर्षों से विभिन्न एजेंसियों को भूकंप प्रतिरोधी इमारतों जैसे कि अस्पताल और स्कूल, औद्योगिक इकाइयों और संरचनाओं को डिजाइन करने में मदद प्राप्त होगी।

MT विधि क्या है?

मैग्नेटोटेल्यूरिक (Magnetotelluric- MT) एक भूभौतिकीय विधि है, जिसमे भूगर्भीय (भूमिगत) संरचना और प्रक्रियाओं को समझने हेतु पृथ्वी के चुंबकीय और विद्युत क्षेत्रों की प्राकृतिक समय भिन्नता का उपयोग किया जाता है। यह काफी विश्वसनीय तकनीक मानी जाती है।

कामधेनु गौ-विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा

(Kamdhenu Gau-Vigyan Prachar-Prasar Exam)

हाल ही में, राष्‍ट्रीय कामधेनु आयोग ने कामधेनु गौ-विज्ञान प्रचार-प्रसार परीक्षा की घोषणा की है।

  • इस परीक्षा का उद्देश्य युवा छात्रों और सभी नागरिकों के मध्य देशी गायों के बारे में व्यापक जागरूकता बढ़ाना है।
  • राष्‍ट्रीय कामधेनु आयोग, गाय विज्ञान के बारे में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने में सहायता उपलब्ध कराएगा।
  • यह परीक्षा चार श्रेणियों, प्राथमिक, माध्यमिक, कॉलेज और सामान्य सार्वजनिक स्तर पर आयोजित की जाएगी।
  • परीक्षा हिंदी, अंग्रेजी और 12 क्षेत्रीय भाषाओं में होगी।
  • इस परीक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

टॉयकाथॉन-2021

(Toycathon-2021)

यह एक विशेष प्रकार का हैकाथॉन है, जिसमें स्कूल और कॉलेजों के छात्रों तथा शिक्षकों, डिज़ाइन विशेषज्ञों, खिलौना विशेषज्ञों और स्टार्टअप्स एक साथ मिलकर नये विचारों को साझा करने का काम करेंगे।

  • इसके ज़रिये भारतीय संस्कृति और लोकाचार, स्थानीय लोककथाओं तथा नायकों एवं भारतीय मूल्य प्रणालियों पर आधारित खिलौनों और खेलों को विकसित किया जायेगा।
  • यह एक अंतर-मंत्रालयी पहल है।
  • इसे शिक्षा मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने मिलकर संयुक्त रूप से शुरू किया गया है।

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