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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 7 जनवरी 2021

 

How to Follow Secure Initiative?

How to Self-evaluate your answer? 

INSIGHTS NEW SECURE – 2020: YEARLONG TIMETABLE

 


सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. “हमारा राष्ट्र एक वृक्ष की तरह है, जिसका मूल तना स्वराज्य है एवं शाखाएं स्वदेशी एवं बहिष्कार हैं।” स्वदेशी आंदोलन के संबंध में टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

 सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष:बिपिन चंद्र

निर्देशक शब्द:

टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

स्वदेशी आन्दोलन पर बाल गंगाधर तिलक के उद्धरण- इसके प्रारम्भ होने के कारण एवं इसके लक्ष्य और उद्देश्यों को संक्षेप में समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

अंतिम लक्ष्य के रूप में स्वराज्य एवं साधन के रूप में स्वदेशी एवं बहिष्कार के मध्य संबंधों पर प्रकाश डालिए।

समझाइए कि स्वदेशी आंदोलन ने विभिन्न वस्तुओं और रूपों में स्वदेशी का सन्देश एवं बहिष्कार पर कैसे जोर दिया।

इसके प्रभावों पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

हमारे देश द्वारा स्वराज की ओर एक बड़ा कदम उठाने में स्वदेशी आंदोलन के महत्व को रेखांकित करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 2. नरमपंथी ढाल एवं चरमपंथी तलवार की तरह थे। एक साथ न होने पर नरमपंथी बिना दांत के एवं चरमपंथी दमन के प्रति अत्यधिक असुरक्षित प्रतीत होते थे। सूरत में कांग्रेस का विभाजन औपनिवेशिक शासकों के लिए एक बड़ी जीत थी। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: भारत का स्वतंत्रता संघर्ष:बिपिन चंद्र

 निर्देशक शब्द:

चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

राष्ट्रवादी समूहों को विभाजित करने वाले सूरत विभाजन का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

चरमपंथियों और नरमपंथियों के लिए प्रयुक्त क्रमशः ‘तलवार एवं ढाल’ के रूपकों का वर्णन कीजिए।

सूरत विभाजन ने नरमपंथी, चरमपंथी एवं राष्ट्रीय आंदोलन को समग्र रूप से कैसे प्रभावित किया? समझाइए। अपने बिंदुओं को प्रमाणित करने के लिए उदाहरणों का उपयोग कीजिए।

औपनिवेशिक सरकार के लिए यह प्रमुख जीत कैसे थी? चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

भविष्य के विभाजनों से बचने के लिए सूरत विभाजन से सीखे गए कड़वे सबक का उल्लेख करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) की सफलता न केवल बजटीय आवंटन पर बल्कि नीति के प्रमुख पहलुओं के उचित नियोजन और क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। जांच कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint

 निर्देशक शब्द:

 जांच कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के लक्ष्य एवं उद्देश्यों को संक्षेप में व्यक्त करते हुए उत्तर प्रारम्भ  कीजिए।

 विषय वस्तु:   

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के प्रमुख घटकों पर विस्तृत चर्चा कीजिए।

उपरोक्त लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को प्राप्त करने में बाधाओं का उल्लेख कीजिए।

उन कारकों का उल्लेख कीजिए, जिन पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की सफलता निर्भर है। जैसे: बजट आवंटन, निजीकरण के माध्यम से संसाधनों को जुटाना, नई नियामक संरचना, सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श, राज्य और केंद्र सरकारों के बीच अभिसरण एवं राजनीतिक इच्छाशक्ति आदि।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय।

 4. पारदर्शिता में वृद्धि करने एवं सरकार को जवाबदेह बनाने में खोजी पत्रकारिता की भूमिका वास्तव में बहुत बड़ी है, लेकिन खोजी पत्रकारिता सामान्य आपराधिक कानूनों को तोड़ने का बहाना नहीं है। आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 आलोचनात्मक विश्लेषण कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों में ही तथ्यों को बताते हुए अंत में एक सारगर्भित निष्कर्ष निकालना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने में खोजी पत्रकारिता की भूमिका का उल्लेख करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। उदाहरण भी प्रस्तुत कीजिए।

 विषय वस्तु:  

लोकतंत्र में खोजी पत्रकारिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा कीजिए।

खोजी पत्रकारिता की राह में विभिन्न बाधाओं का उल्लेख कीजिए।

कुछ मामलों में खोजी पत्रकारिता के अतिरेक का उल्लेख कीजिए। लेकिन अधिकतम सुख हासिल करने के लिए कानून के पत्र के अनुसार कार्य करने से बचने की आवश्यकता का भी उल्लेख कीजिए। जूलियन असांजे के मामले के बारे में भी चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

नैतिक सीमाओं से बाहर निकले बिना खोजी पत्रकारिता के हितों को संतुलित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन- संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच संबंध।

5. समुद्री डोमेन जागरूकता क्या है? भारत के समुद्री हितों की रक्षा के साथ-साथ पड़ोसी तथा सहयोगियों के साथ सहकारी तालमेल स्थापित करने में इसके महत्व का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu 

निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

समुद्री डोमेन जागरूकता को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

समुद्री डोमेन जागरूकता की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।

समुद्री हितों की रक्षा के बारे में उल्लेख कीजिए, जैसे- समुद्री खतरे की विभिन्न प्रकृति, चीनी गतिविधि की निगरानी, पूर्वी तटों पर दुश्मन की उपस्थिति, सुरक्षा एवं भारतीय वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा, मोतियों का हार नीति का विरोध, पारकालीन अपराध और फारस की खाड़ी एवं होरमुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री गतिविधि की निगरानी आदि।

सहकारी सहयोग को विकसित करने में समुद्री डोमेन जागरूकता द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका का वर्णन कीजिए।

निष्कर्ष:

समुद्र-संबंधी गतिविधियां, बुनियादी ढाँचा, लोग, मालवाहक एवं जहाजों और अन्य संप्रत्ययों सहित नौगम्य जलमार्गों में समुद्री डोमेन जागरूकता के समग्र महत्व को संक्षेप में बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

 6. सामाजिक मूल्यों के विकास एवं संवर्धन में धर्म एवं आध्यात्मिकता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समझाइए। (150 शब्द)

सन्दर्भ:   नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन पब्लिकेशन्स

 निर्देशक शब्द:

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सामाजिक मूल्यों का संवर्धन एवं धर्म और आध्यात्मिकता के मध्य सम्बन्ध बताते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

विषय वस्तु:

विश्व भर के धर्मों और संस्कृतियों के उदाहरणों का उपयोग करते हुए समझाइए कि वे सामाजिक मूल्यों के विकास में कैसे भूमिका निभाते हैं।

कथा, इतिहास और प्रथाओं के संदर्भ में धर्म और सामाजिक मूल्यों के बीच संबंध स्पष्ट कीजिए।

कुछ मूल्यों जैसे ईमानदारी, करुणा, शांति, क्षमा और कर्तव्य आदि के बारे में उल्लेख कीजिए।

धर्म और सामाजिक मूल्यों के मध्य के नकारात्मक सम्बन्ध जैसे- जाति एवं रंग के आधार पर पूर्वाग्रह, लिंग के आधार पर भेदभाव आदि पर भी प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

सामाजिक मूल्यों और धर्म के बीच संबंधों पर एक संतुलित निर्णय प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 

विषय: सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ।

 7. जटिल नैतिक दुविधाओं को हल करने के क्या उपाय हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (150 शब्द)

सन्दर्भ:   नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन पब्लिकेशन्स

निर्देशक शब्द:

स्पष्ट कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

नैतिक दुविधा को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए। शास्त्रीय नैतिक दुविधा का एक उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

 विषय वस्तु:   

समझाइए कि नैतिक दुविधाओं का समाधान इतना कठिन क्यों है।

नैतिक दुविधा को हल करने के लिए विभिन्न तरीकों का उल्लेख कीजिए एवं एक जटिल नैतिक समस्या के समाधान के लिए नैतिक रूप से उचित समाधान प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

नैतिक दुविधाओं के प्रभावी समाधान की आवश्यकता को संक्षेप में समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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