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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 6 January 2021

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. औरंगाबाद के नाम-परिवर्तन की मांग

 

सामान्य अध्ययन-II

1. न्यायिक समीक्षा

2. वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने हेतु खाड़ी देशों के नेताओं द्वारा समझौता

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कोच्चि–मंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन

2. एशियाई जलीय पक्षी गणना

3. इंटरनेट बंद होने के कारण पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. सागरमाला सीप्‍लेन सेवा

2. ट्राइफ़ूड (जनजातीय खाद्य) पार्क

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

औरंगाबाद के नाम-परिवर्तन की मांग


संदर्भ:

महाराष्ट्र में औरंगाबाद शहर का नाम-परिवर्तित कर संभाजी नगर किए जाने के लिए शिवसेना लंबे समय से मांग कर रही है।

शहर और उसका नाम:

  • औरंगाबाद का निर्माण वर्ष 1610 में निजामशाही वंश के मलिक अंबर द्वारा करवाया गया था।
  • मुगल बादशाह औरंगजेब ने इस शहर को अपनी राजधानी बनाया था और इसे औरंगाबाद नाम दिया।

नाम परिवर्तन करने की मांग

  • औरंगजेब, अपनी मृत्यु के समय औरंगाबाद में निवास कर रहा था। औरंगजेब ने मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र छत्रपति संभाजी महाराज को प्रताणित करके हत्या की थी।
  • इसीलिए, औरंगाबाद शहर का नाम संभाजी नगर किए जाने की मांग की जा रही है।

पृष्ठभूमि:

वर्ष 1995 में औरंगाबाद नगर निगम (एएमसी) द्वारा औरंगाबाद का नाम संभाजी नगर किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

न्यायिक समीक्षा


(Judicial review)

संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने सेंट्रल विस्टा परियोजना को एक ‘अद्वितीय’ परियोजना मानने से इंकार करते हुए कहा कि इसके लिए महत्तम अथवा अत्युक्ति पूर्ण न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता नहीं हैं।

उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी:

  1. सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के बहुमत सदस्यों ने कहा है कि, जब तक सरकार संवैधानिक सिद्धांतों का पालन करती है, तब तक वह अदालत के हस्तक्षेप के बगैर नीतिगत मामलों में ‘गलतियाँ करने अथवा सफलता हासिल करने की हकदार’ है।
  2. निर्वाचित सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में पूछताछ करना अदालत की चिंता का विषय नहीं है। न्यायिक समीक्षा का तात्पर्य सरकार के मस्तिष्क में उद्यम करना और इस प्रकार किसी निर्णय की वैधता की जांच करना नहीं है।

न्यायिक समीक्षा’ क्या है?

न्यायिक समीक्षा, न्यायपालिका को प्राप्त एक शक्ति है, जिसके अंतर्गत वह सरकार के विधायी तथा कार्यकारी अंगों द्वारा पारित किसी अधिनियम या आदेश से किसी प्रभावित व्यक्ति के चुनौती दिए जाने पर इन कानूनों/ आदेश की समीक्षा तथा इनकी संवैधानिकता पर निर्णय करती है।

भारत में ‘न्यायिक समीक्षा’ की स्थिति:

भारत में न्यायिक समीक्षा की शक्ति का स्रोत भारतीय संविधान है (संविधान के अनुच्छेद 13, 32, 136, 142 और 147)।

  1. न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग संविधान के भाग-तीन में प्रदत्त मूल अधिकारों की रक्षा करने और इन्हें प्रवर्तित करने के लिए किया जाता है।
  2. संविधान के अनुच्छेद 13 में संसद और राज्य विधानसभाओं को देश के नागरिकों को प्राप्त मूल-अधिकारों को समाप्त करने अथवा इनका हनन करने वाले क़ानून बनाना निषेध किया गया है ।
  3. अनुच्छेद 13 के तहत मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करने के प्रावधान किए गए हैं तथा इसके तहत किसी भी कानून को ‘मूल-अधिकारों के असंगत अथवा अल्पीकरण’ करने की सीमा तक अमान्य माना गया है।

judicial

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘न्यायिक समीक्षा’ क्या है?
  2. न्यायिक समीक्षा का विकास
  3. अनुच्छेद 13, 21 और 32

मेंस लिंक:

भारतीय संदर्भ में न्यायिक समीक्षा के बारे चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

वर्षों पुराने विवाद को खत्म करने हेतु खाड़ी देशों के नेताओं द्वारा समझौता


संदर्भ:

हाल ही में, सऊदी अरब और कतर के नेताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से गले मिलने के बाद खाड़ी देशों के नेताओं द्वारा ‘एकजुटता एवं स्थायित्व’ (Solidarity and Stability) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही तीन साल की लंबी अनबन के बाद ‘दोहा’ को वापस क्षेत्रीय समूह में शामिल कर लिया गया है।

विवाद क्या था?

सऊदी अरब के नेतृत्व में खाड़ी देशों के समूह ने जून 2017 में ‘कतर’ से राजनयिक, कारोबारी एवं परिवहन संबंधों पर रोक लगा दी थी। इन देशों ने कतर पर ईरान के नजदीक होने तथा कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के समर्थन का आरोप लगाया था। कतर ने आरोपों को खारिज करते हुए इन प्रतिबंधों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था।

इस क्षेत्र में शांति महत्वपूर्ण क्यों है?

  1. मध्य-पूर्व (Middle East) में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से तेल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना रहती है, और दीर्घकालीन अस्थिरता की स्थिति में तेल की उच्च कीमतें बरकरार रहती हैं।
  2. कतर, विश्व में तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है तथा मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख प्राप्तकर्ता हैं।
  3. भारत, अपनी 90% प्राकृतिक गैस आवश्यकताओं के लिए कतर पर निर्भर है।
  4. कतर का सॉवरिन वेल्थ फंड और राज्य के स्वामित्व वाली अन्य संस्थाएं, साथ ही कतर के निजी निवेशक, भारत में अवसरंचना क्षेत्र में निवेश करने का विकल्प देख रहे हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. कतर की अवस्थिति
  2. दुनिया के शीर्ष तेल निर्यातक और आयातक
  3. भारत का तेल आयात
  4. LNG क्या है?

मेंस लिंक:

मध्य-पूर्व में शांति भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

कोच्चि–मंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन


संदर्भ:

हाल ही में, प्रधानमंत्री द्वारा कोच्चि-मंगलुरू प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का उद्घाटन किया गया।

  • कुल 450 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन का निर्माण GAIL (इंडिया) लिमिटेड द्वारा किया गया है।
  • इसके द्वारा 21 लाख नए पाइप्ड प्राकृतिक गैस (PNG) कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।

प्रमुख बातें:

  • भारत को प्राकृतिक गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के प्रयासों के तहत, 10,000 नए सीएनजी (compressed natural gas- CNG) स्टेशन खोले जाएंगे और आने वाले दिनों में कई लाख परिवारों को पाइप्ड प्राकृतिक गैस (piped natural gasPNG) कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे।
  • सरकार द्वारा गैस-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के लिए सस्ती, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल ठोस योजना तैयार की गयी है।
  • सरकार द्वारा कोयला और गैस क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2030 तक ऊर्जा क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 15% करने की योजना है।

एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड’ अवधारणा

(One nation, One Gas Grid concept)

‘एक राष्ट्र, एक गैस ग्रिड’ के तहत भारत के मुख्य भू-भाग में, पावर स्टेशनों और प्रमुख सबस्टेशनों को जोड़ने वाला एक हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिक पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क स्थापित किया जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि, देश में कहीं भी उत्पादित विद्युत् का अन्यत्र स्थानों पर मांग को पूरा करने के लिए उपयोग किया किया जा सकता है।

राष्ट्रीय ग्रिड का विकास:

  • भारत में क्षेत्रीय आधार पर ग्रिड प्रबंधन का कार्य साठ के दशक में आरंभ हुआ था।
  • शुरुआत में, क्षेत्रीय ग्रिड बनाने के लिए राज्य ग्रिड परस्पर जुड़े हुए थे और भारत को 5 क्षेत्रों, उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी, उत्तर पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्र में बांटा गया था।
  • अक्टूबर 1991 में उत्तर पूर्वी और पूर्वी ग्रिड को जोड़ा गया।
  • मार्च 2003 में पश्चिमी क्षेत्र और पूर्वी- उत्तर पूर्वी क्षेत्र को परस्पर जोड़ा गया।
  • अगस्त 2006 में उत्तर और पूर्वी ग्रिड को आपस में जोड़ा गया, और इस प्रकार चार क्षेत्रीय ग्रिड उत्तरी, पूर्वी, पश्चिमी और उत्तर पूर्वी ग्रिड को समसमायिक रूप से जोड़कर एक आवृति पर कार्य करने के लिए केंद्रीय ग्रिड का निर्माण किया गया।
  • 31 दिसंबर 2013 को, 765 किलोवाट क्षमता की रायचूर-सोलापुर ट्रांसमिशन लाइन की शुरुआत के साथ दक्षिणी क्षेत्र को समकालिक प्रणाली (Synchronous mode) में सेंट्रल ग्रिड से जोड़ा गया। इस प्रकार, ‘एक राष्ट्र’- ‘एक ग्रिड’- एक फ्रीक्वेंसी’ को हासिल किया गया।

एक राष्ट्रीय ग्रिड के लाभ:

  1. कम बिजली कटौती तथा बेहतर उपलब्धता
  2. अधिक विद्युत् स्थिरता
  3. बेहतर संकालन (सिंक्रनाइज़ेशन)

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘वन नेशन वन ग्रिड’ के बारे में
  2. ‘राष्ट्रीय ग्रिड’ क्या है?
  3. UDAY योजना के बारे में
  4. ‘प्राकृतिक गैस’ क्या होती है?

मेंस लिंक:

राष्ट्रीय ग्रिड के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

एशियाई जलीय पक्षी गणना


(Asian Waterbird Census)

संदर्भ:

आंध्र प्रदेश में दो दिवसीय एशियाई जलीय पक्षी गणना (Asian Waterbird Census)- 2020 शुरू की गयी है।

एशियाई जलीय पक्षी गणना (AWC) के बारे में:

एशियाई जलपक्षी गणना (Asian WaterBirds Census-AWC) एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसके तहत एशिया और ऑस्ट्रेलिया में हज़ारों स्वयंसेवी अपने देश की आर्द्रभूमियों में जलपक्षियों / वाटरबर्ड्स की गणना करते हैं।

  • इस कार्यक्रम का आयोजन प्रतिवर्ष जनवरी में किया जाता है।
  • इसका आयोजन का संचालन ‘वेटलैंड्स इंटरनेशनल’ द्वारा किया जाता है और वैश्विक जलीय पक्षी निगरानी कार्यक्रम ‘द इंटरनेशनल वॉटर बर्ड सेंसस’ (International Waterbird Census IWC) का एक अभिन्न अंग है।
  • इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1987 में की गयी थी।
  • यह मुख्यतः जल पक्षियों और आर्द्रभूमियों की स्थिति की निगरानी पर केंद्रित है।
  • भारत में, एशियाई जलीय पक्षी गणना (AWC), वार्षिक रूप से, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) और वेटलैंड्स इंटरनेशनल द्वारा आयोजित की जाती है।

जलपक्षी / वाटरबर्ड्स’ क्या हैं?

वेटलैंड्स इंटरनेशनल (Wetlands International- WI) के अनुसार, वॉटरबर्ड / जल पक्षियों को पारिस्थितिक रूप से आर्द्रभूमियों पर निर्भर पक्षियों की प्रजातियों के रूप में परिभाषित किया गया है। इन पक्षियों को किसी क्षेत्र की आर्द्र भूमियों का एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतक माना जाता है।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

इंटरनेट बंद होने के कारण पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव


संदर्भ:

हाल ही में, ब्रिटेन की एक निजता एवं सुरक्षा अनुसंधान फर्म ‘Top10VPN’ द्वारा इंटरनेट बंद होने के कारण पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव पर एक रिपोर्ट जारी की गयी है।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • वर्ष 2020 के दौरान भारत में इंटरनेट बंद होने के कारण विश्व में सर्वाधिक आर्थिक प्रभाव पड़ा है।
  • भारत में इंटरनेट बंद होने से 8,927 घंटे और 8 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।

इंटरनेट बंद / इंटरनेट शटडाउन:

(Internet Shutdown)

इंटरनेट शटडाउन का तात्पर्य इंटरनेट सेवाओं अथवा इलेक्ट्रॉनिक संचार को जानबूझकर बाधित करना है। इसके द्वारा प्रायः सूचनाओं के प्रवाह पर नियंत्रण करने हेतु किसी विशिष्ट आबादी के लिए अथवा किसी स्थान-विशेष पर इंटरनेट सेवाओं को पहुँच से बाहर अथवा प्रभावी रूप से अनुपयोगी बना दिया जाता है।

इंटरनेट शटडाउन से प्रभावित होने वाले क्षेत्र:

  • पिछले वर्षों की भांति, भारत द्वारा किसी अन्य देश की तुलना में वर्ष 2020 के दौरान 75 से अधिक बार इंटरनेट का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है।
  • चूंकि, Top10VPN की रिपोर्ट बड़े क्षेत्र-व्यापी शटडाउन पर केंद्रित है, अतः इनमें से अधिकाँश, ग्राम-समूहों अथवा जिला-शहरों को प्रभावित करने वाले संक्षिप्त एवं लक्षित इंटरनेट बंद/ ब्लैकआउट्स को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया है।

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध:

  1. रिपोर्ट में, कश्मीर में इंटरनेट उपयोग पर विस्तारित प्रतिबंधों के बारे में अलग से उल्लेख किया गया है। अगस्त 2019 में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त किये जाने के बाद से क्षेत्र में मार्च 2020 तक इंटरनेट सेवाओं का निलंबन कर दिया गया था, जो कि अभी तक बहाल नहीं की गयी हैं। वर्तमान में, जम्मू और कश्मीर में केवल इंटरनेट की 2G सेवाएं उपलब्ध हैं।
  2. रिपोर्ट में इसे किसी लोकतंत्र में सर्वाधिक लंबे समय तक इंटरनेट बंद बताते हुए कहा गया है कि, ‘इंटरनेट प्रतिबंधों ने दवाओं के वितरण, व्यवसायों और स्कूलों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।‘

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144
  2. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के बारे में।
  3. आईटी अधिनियम 2000 के प्रमुख प्रावधान
  4. अनुराधा भसीन केस (2020) किससे संबंधित है?
  5. संविधान का अनुच्छेद 370

मेंस लिंक:

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट निलंबन से पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


सागरमाला सीप्‍लेन सेवा

(Sagarmala Seaplane Services)

इस सेवा को ‘पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय’ द्वारा शुरू किया जा रहा है।

  • सागरमाला सीप्‍लेन सेवा को कुछ चुनिंदा मार्गों पर विशेष उद्देश्‍य वाले वाहन (Special Purpose Vehicle – SPV) संरचना के तहत संभावित एअर लाइन परिचालकों के जरिए सीप्‍लेन सेवा शुरू किया जाएगा।
  • इस परियोजना को, मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण वाली सागरमाला विकास कंपनी लिमिटेड (SDCL) के माध्‍यम से लागू किया जाएगा। यह कंपनी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है।

ट्राइफ़ूड (जनजातीय खाद्य) पार्क

(TRIFOOD Parks)

मध्य प्रदेश में ट्राइफ़ूड (जनजातीय खाद्य) पार्कों की स्थापना की जा रही है।

  • यह जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत ट्राइफेड (TRIFED) और खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है।
  • ट्राइफ़ूड पार्क, खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में कार्य करेंगे और इनका लक्ष्य लघु वनोपज को बढ़ावा देना है।
  • इस कार्यक्रम को वर्ष 2020 में वन धन योजना के तहत शुरू किया गया था।
  • ट्राइफ़ूड पार्क में वन धन केंद्रों से कच्चे माल की खरीद की जाती है और प्रसंस्करण के बाद उत्पादों को ट्राइब्स इंडिया आउटलेट्स के माध्यम से देश भर में बेच दिया जाता है।

लघु वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य आदिवासी मामलों के मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया जाता है और इसे मंत्रालय के अधीन एक मूल्य निर्धारण समिति द्वारा प्रति तीन वर्ष में संशोधित किया जाता है।


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