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[इनसाइट्स सिक्योर STHIR – 2021] दैनिक सिविल सेवा मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन अभ्यास: 6 जनवरी 2021

 

How to Follow Secure Initiative?

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सामान्य अध्ययन – 1


 

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

1. उदारवादियों का सबसे बड़ा योगदान उपनिवेशवाद की आर्थिक आलोचना को राष्ट्रवादियों के मध्य एक शक्तिशाली हथियार बनाने में नहीं था, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का निर्माण एवं विकास कर सकने योग्य एक ठोस नींव का निर्माण करने में था। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: आधुनिक भारत का संक्षिप्त इतिहास: स्पेक्ट्रम प्रकाशन

निर्देशक शब्द:

टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

नरमपंथियों के प्रमुख योगदानों में से एक, राष्ट्रवाद की आर्थिक आलोचना को समझाते हुए  उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

राष्ट्रवाद की आर्थिक आलोचना को विस्तार से समझाइए- यह क्या था, इसे किसने प्रतिपादित किया और कैसे यह उदारवादियों के साथ-साथ चरमपंथियों और बाद में गांधीवादी दौर में भी अंग्रेजों पर हमला करने के लिए एक शक्तिशाली हथियार बन गया।

भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की नींव रखने में उदारवादियों की भूमिका के बारे में विस्तार से बताइए।

निष्कर्ष:

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में उदारवादियों एवं उनकी विरासत के समग्र योगदान को संक्षेप में समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: 18वीं सदी के लगभग मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, व्यक्तित्व, विषय।

 2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी एवं चरमपंथी चरणों की तुलना कीजिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में चरमपंथियों के उदय के कारणों का वर्णन कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: आधुनिक भारत का संक्षिप्त इतिहास: स्पेक्ट्रम प्रकाशन

 निर्देशक शब्द:

तुलना कीजिए- दोनों प्रकारों का एक विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत कीजिए, उनकी  समान और असमान दोनों प्रकार की विशेषताओं को दर्शाइए। अभ्यर्थी को चाहिए कि वह दोनों का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करे।

वर्णन कीजिये- ऐसे प्रश्नों में अभ्यर्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह पूछे गए प्रश्न से संबंधित जानकारियों को सरल भाषा में व्यक्त कर दे।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी और चरमपंथी चरणों का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:

विभिन्न मापदंडों यथा- समय सीमा, आंदोलन की प्रकृति, महत्वपूर्ण नेता और अंग्रेजों के साथ उनके संबंध, लक्ष्य एवं उद्देश्यों की संरचना आदि पर उदारवादियों और चरमपंथियों के मध्य विस्तारपूर्वक अंतर स्पष्ट कीजिए।

दोनों के बीच कुछ समानताओं का उल्लेख कीजिए जैसे: आर्थिक शोषण के प्रति उनकी नीति, उनकी देशभक्ति आदि।

कांग्रेस में अतिवादियों के उदय के कारणों का उल्लेख कीजिए, जैसे: नरमपंथियों की असफलता, नया मध्यमवर्ग, राष्ट्रवाद का प्रसार और नरमपंथियों के प्रति अंग्रेजों का रवैया आदि।

निष्कर्ष:

यह समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए कि कैसे उग्रवादियों के उदय ने एक नए चरण को चिह्नित किया और राष्ट्रीय आंदोलन में नया जोश और आयाम जोड़ा।

 


सामान्य अध्ययन – 2


 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

3. साझा इतिहास, राष्ट्रमंडल एवं हाल ही में ब्रेक्सिट के पूरा होने के साथ ही यह भारत-यू.के. सम्बन्धों को आगे बढ़ाने का एक नया अवसर है लेकिन इसकी स्थिति संदिग्ध है। विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:  The Hindu 

 निर्देशक शब्द:

 विश्लेषण कीजियेऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के बहुआयामी सन्दर्भों जैसे क्या, क्यों, कैसे आदि पर ध्यान देते हुए उत्तर लेखन कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

भारत-यू.के. संबंध, ऐतिहासिक दृष्टिकोण, ब्रेक्सिट एवं इस उग्र महामारी के बाद की स्थिति का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 विषय वस्तु:   

ब्रिटेन के साथ भारत के मौजूदा संबंधों के बारे में चर्चा कीजिए। भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में ब्रेक्सिट जो बदलाव लाएगा, उसका उल्लेख कीजिए। इसके प्रभावों का भी वर्णन कीजिए।

ब्रेक्सिट के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के अवसरों का विश्लेषण कीजिए।

दोनों के मध्य उपस्थित बाधाओं का उल्लेख कीजिए।

निष्कर्ष:

यह समझाते हुए निष्कर्ष निकालिए कि दोनों देश इतिहास साझा करते हैं एवं नवीन अवसर दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

 


सामान्य अध्ययन – 3


 

विषय: सरकारी बजटिंग।

 4. कोविड-प्रेरित राजस्व की कमी और चीनी आक्रामकता रक्षा बजट की कवायद को और अधिक जटिल बनाते हैं, क्योंकि सरकार परिचालन तत्परता और क्षमता निर्माण की दोहरी अनिवार्यता का सामना करती है। टिप्पणी कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ: Live Mint

निर्देशक शब्द:

 टिप्पणी कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय पर अपने ज्ञान और समझ को बताते हुए एक समग्र राय विकसित करनी चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

चीन के खतरे के सामना करने के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता और सरकार के समक्ष राजस्व की कमी आदि भारतीय संदर्भ को प्रस्तुत करते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए।

 विषय वस्तु:  

रक्षा के लिए बजटीय आवंटन की एक तस्वीर प्रस्तुत कीजिए एवं इसे संक्षेप में समझाइए।

भारत के बलों, विशेष रूप से पूर्वी मोर्चे पर सेना और वायु सेना को फास्ट-ट्रैक खरीद के माध्यम से लैस करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।

निष्कर्ष:

रक्षा की आवश्यकताओं को सुरक्षित करने और हमारी राजकोषीय स्थिति को संतुलित करने के लिए एक संतुलित राय प्रस्तुत करते हुए निष्कर्ष निकालिए।

  

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा का बुनियादी ज्ञान।

5. हमारे डेटा को कानून के साथ-साथ उन्नत सुरक्षा सॉफ्टवेयर प्रणाली के माध्यम से तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। चर्चा कीजिए। (250 शब्द)

सन्दर्भ:   Live Mint

निर्देशक शब्द:

 चर्चा कीजिये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय सम्बंधित विषय / मामले के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों के साथ उत्तर लिखें।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

प्रमुख तथ्यों जैसे – हालाँकि भारत 2013 में साइबर सुरक्षा नीति प्रारम्भ करने वाले कुछ देशों में से एक था, लेकिन भारत का व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019, जो लोकसभा में प्रस्तुत किया गया था, में एक समन्वित साइबर दृष्टिकोण के संदर्भ में बहुत अधिक प्रयास नहीं किये गए हैं। 

 विषय वस्तु:

सशक्त साइबर सुरक्षा प्रणालियों की आवश्यकता के बारे में उल्लेख कीजिए। हाल के साइबर हमलों के उदाहरणों पर चर्चा कीजिए।

वर्तमान में CERT-In द्वारा निभाई जा रही भूमिका के बारे में बताइए।

विवेकपूर्ण एवं प्रभावी डेटा संरक्षण कानून के पूरक के रूप में भारत की साइबर सुरक्षा रणनीति की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

शिक्षा में साइबर सुरक्षा लाकर जागरूकता पैदा करने, मौजूदा साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत बनाने, मॉक ड्रिल, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण जैसे समाधान सुझाइए।

निष्कर्ष:

आगे की राह बताते हुए निष्कर्ष निकालिए।

 


सामान्य अध्ययन – 4


 

विषय: भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

 6. भावनात्मक समझ व्यक्ति को अंतर-पारस्परिक संबंधों को संतुलित करने में सहायता करता है। समझाइए। (150 शब्द)

सन्दर्भ:   नैतिकता, सत्यनिष्ठा एवं अभिवृत्ति: लेक्सिकन पब्लिकेशन्स

 निर्देशक शब्द:

 समझाइये- ऐसे प्रश्नों के उत्तर देते समय प्रश्न से संबंधित सूचना अथवा जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत कीजिये।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

सर्वप्रथम भावनात्मक बुद्धिमत्ता को अपने शब्दों में परिभाषित कीजिए।

विषय वस्तु:

इसकी अवधारणा पर चर्चा कीजिए। स्पष्टता लाने के लिए उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

पारस्परिक संबंधों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता को लागू करने के व्यावहारिक पहलुओं के बारे में चर्चा कीजिए।

निष्कर्ष:

निष्कर्ष निकालिए कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता को लागू करके न केवल समानुभूतिपूर्ण सम्बन्ध बल्कि प्रशासन में प्रभावशीलता और दक्षता भी लाई जा सकती है।

 

विषय: अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं वित्त पोषण से संबंधित नैतिक मुद्दे।

 7. अंतरराष्ट्रीय नैतिकता एवं सदाचार महामारी के कारण उत्पन्न घावों को ठीक करने में सहायता कर सकता है। जांच कीजिए। (150 शब्द)

निर्देशक शब्द:

जांच कीजिये- ऐसे प्रश्नों का उत्तर देते समय उस कथन अथवा विषय के पक्ष और विपक्ष दोनों का परीक्षण करते हुए सारगर्भित उत्तर लिखना चाहिए।

 उत्तर की संरचना:

 परिचय:

यह समझाते हुए उत्तर प्रारम्भ कीजिए कि अंतर्राष्ट्रीय नैतिकता, अंतर्राष्ट्रीय संबंध सिद्धांत का एक क्षेत्र है, जो राज्यों के बीच नैतिक दायित्वों की सीमा और दायरे का निर्धारण करती है, खासकर एक महामारी जैसी वैश्विक घटना के दौरान।

 विषय वस्तु:   

अंतर्राष्ट्रीय नैतिकता क्या है?  विस्तारपूर्वक व्याख्या कीजिए।

इसके उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

निष्कर्ष:

वैश्विक महामारी से उत्पन्न घावों के उपचार में इसके महत्व और आवश्यकता के बारे में सुझाव देते हुए निष्कर्ष निकालिए।


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