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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 29 December

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-I

1. ‘एक विरासत अपनाएं’ परियोजना

 

सामान्य अध्ययन-II

1. ढाका द्वारा शरणार्थियों को भासन चार द्वीप पर स्थानांतरण

2. चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)

 

सामान्य अध्ययन-III

1. नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC)

2. देश के 8 समुद्र तटों पर इंटरनेशनल ब्लू फ्लैग

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. 100वीं किसान रेल

2. भारत की पहली चालक रहित ट्रेन

3. ‘पाड़ा-पाड़ा समाधान’

4. ‘मेरा डाक टिकट’ योजना

5. मदरसों को नियमित स्कूल बनाने के लिए असम में विधेयक

6. पेदलंदरिकी इलू

 


सामान्य अध्ययन- I


 

विषय: भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

एक विरासत अपनाएं परियोजना


(Adopt a Heritage’ project)

संदर्भ:

अब तक, इस परियोजना के तहत पूरे भारत में में 25 स्थलों और दो तकनीकी मध्यवर्तनों (Technological interventions) के लिए 12 स्मारक मित्रों के साथ 27 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

परियोजना के बारे में:

इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2017 में विश्व पर्यटन दिवस अर्थात 27 सितंबर को की गई थी।

  • भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय ‘एक विरासत अपनाएं: अपनी धरोहर, अपनी पहचान’ (Adopt a Heritage: Apni Dharohar, Apni Pehchaan) परियोजना का संचालन कर रहा है।
  • यह परियोजना पूरे देश में विरासत / प्राकृतिक / पर्यटन स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं को योजनाबद्ध और चरणबद्ध तरीके से विकसित करने और इन्हें पर्यटकों के अनुकूल बनाने के लिए पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और राज्य / केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों द्वारा किया जा रहा एक सहयोगात्मक प्रयास है।

क्रियाविधि:

इस परियोजना के तहत पर्यटन सुविधाओं के विकास हेतु विरासत स्थलों / स्मारकों और अन्य पर्यटक स्थलों को निजी क्षेत्र की कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और निजी व्यक्तियों को  सौंपने की योजना है।

परियोजना का लक्ष्य सभी भागीदारों के बीच तालमेल विकसित करना है।

स्मारक मित्र’ (Monument Mitras)

  • निगरानी और परिकल्पना समिति द्वारा विरासत स्थलों / स्मारकों को गोद लेने/ अपनाने के लिए चुने गए सफल बोली लगाने वाले को स्मारक मित्र (Monument Mitras) कहा जाएगा। इनके द्वारा पर्यटन स्थलों पर बुनियादी और उन्नत सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
  • स्मारक मित्र, इन सुविधाओं के परिचालन और रखरखाव संबंधी कार्यों की देखभाल भी करेंगे। ये अपनी कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) गतिविधियों के माध्यम से विरासत स्थलों के गौरव में वृद्धि भी करेंगे।

इस परियोजना का महत्व:

  • ‘एक विरासत अपनाएं’ परियोजना (Adopt a Heritage project) का उद्देश्य, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अन्य सरकारी निकायों को विरासत स्थलों पर पर्यटन अवसंरचनाओं के परिचालन में होने वाली चुनौतियों का समाधान करना है।
  • निजी क्षेत्र द्वारा इन स्थलों पर ‘पर्यटक-अनुकूल’ और ‘विश्व स्तरीय सुविधाएं’ बनाने, संचालित करने और रखरखाव करने की अनुमति देने से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन में वृद्धि होने की अपेक्षा की गयी है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. परियोजना के बारे में
  2. इसकी शुरुआत कब की गयी थी?
  3. कार्यान्वयन करने वाली संस्थाएं?
  4. महत्वपूर्ण धरोहर स्थल।
  5. ‘स्मारक मित्र’ कौन हैं?

मेंस लिंक:

‘एक विरासत अपनाएं’ परियोजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

ढाका द्वारा शरणार्थियों को भासन चार द्वीप पर स्थानांतरण


संदर्भ:

बांग्लादेश ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद रोहिंग्या शरणार्थियों को बंगाल की खाड़ी में स्थित एक विवादित बाढ़-प्रवण भासन चार द्वीप (Bhashan Char island) पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।

संबंधित चिंताएं

भासन चार द्वीप का निर्माण मात्र 20 वर्ष पूर्व बंगाल की खाड़ी में हिमालयन गाद से हुआ था। वर्ष 2015 में, बांग्लादेश द्वारा इस विचार को पेश किये जाने के समय से ही भासन चार द्वीप पर मौसमी चरम स्थितियों और आपात स्थिति में मुख्य भूमि से दूरी को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

रोहिंग्या समुदाय के बारे में:

  • रोहिंग्या, म्यांमार के कई जातीय अल्पसंख्यकों में से एक समुदाय हैं।
  • वर्ष 2017 की शुरुआत में म्यांमार में ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों की संख्या लगभग एक मिलियन थी।
  • उनकी अपनी भाषा और संस्कृति है और कहा जाता है, वे अरब व्यापारियों और अन्य समूहों के वंशज हैं, जो इस क्षेत्र में कई पीढ़ियों से बसे हुए हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस द्वारा ‘रोहिंग्या समुदाय के लोगों को, विश्व में सर्वाधिक नहीं, तो सबसे अधिक भेदभाव किये जाने वाले लोगों में से एक, के रूप में वर्णित किया गया है।

रोहिंग्या की वर्तमान स्थिति

दक्षिणी बांग्लादेश में दुनिया के सबसे बड़े और सबसे घनी आबादी वाले शरणार्थी शिविर में लगभग 860,000 रोहिंग्या रहते हैं।

  • म्यांमार और बांग्लादेश की सरकारों के मध्य रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार में प्रत्यावर्तन हेतु शर्तों पर वार्ता जारी हैं।
  • गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत में लगभग 40,000 रोहिंग्या निवासित हैं।

bhasan

प्रीलिम्स लिंक:

  1. रोहिंग्या कौन हैं?
  2. रखाइन राज्य की अवस्थिति
  3. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के बारे में
  4. अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) बनाम अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय

मेंस लिंक:

रोहिंग्या संकट पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)


(China–Pakistan Economic Corridor)

संदर्भ:

चीन द्वारा पकिस्तान कॉरिडोर की प्रगति का बचाव करते हुए CPEC के लिए ऋण स्वीकृत करने से पहले इस्लामाबाद से अतिरिक्त गारंटी की मांग करने संबंधी रिपोर्टों का खंडन किया गया है।

CPEC के बारे में:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), कई करोड़ डॉलर के बेल्ट और रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत एक प्रमुख परियोजना हैl यह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य चीन द्वारा वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से दुनिया विश्व में बीजिंग के प्रभाव को बढ़ाना है।

  • इस 3,000 किलोमीटर लंबे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में राजमार्ग, रेलवे और पाइपलाइन का निर्माण सम्मिलित है।
  • CPEC का लक्ष्य पश्चिमी पाकिस्तान के ग्वादर शहर को चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित शिनजियांग प्रांत से रेलवे और सड़क-मार्गों के विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना हैl
  • प्रस्तावित परियोजना को भारी-सब्सिडी वाले ऋणों द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा। यह ऋण चीनी बैंकिंग दिग्गजों, जैसे एक्जिम बैंक ऑफ चाइना, चीन डेवलपमेंट बैंक तथा चीन के औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक द्वारा पाकिस्तान की सरकार को प्रदान किया जाएगा।

 भारत की चिंताएं:

  • यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान से होते हुए गुजरेगा।
  • CPEC ग्वादर बंदरगाह के माध्यम से अपनी आपूर्ति लाइनों को सुरक्षित और संक्षिप्त करने के साथ-साथ हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की चीनी योजना पर आधारित है। अतः यह माना जाता है कि CPEC के परिणामस्वरूप हिंद महासागर में चीनी मौजूदगी भारत के प्रभाव पर नकारात्मक प्रभाव डालेगी।
  • ग्वादर, बलूचिस्तान के अरब सागर तट पर स्थित है। पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम का यह हिस्सा दशकों से अलगाववादी विद्रोह का शिकार है।  इस परियोजना के कारण भारत के आस पास के क्षेत्र में अशांति फैलने का डर बना रहेगा।
  • इसके अलावा, भारत के चीन और पाकिस्तान, दोनों के साथ रिश्तों में विश्वास में कमी (Trust Deficit) है, और दोनों के साथ संघर्ष का पुराना इतिहास है। नतीजतन, भले ही परियोजना के लिए व्यावहारिक रूप से दोबारा वार्ता शुरू करने के सुझाव दिए गए हों, लेकिन किसी ने चीन और पाकिस्तान के साथ भारत के समीकरणों में बाधक प्रमुख कारकों को खारिज नहीं किया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. CPEC क्या है?
  2. BRI पहल क्या है?
  3. मोतियों की लड़ी (string of pearls) पहल।
  4. गिलगित- बाल्टिस्तान कहां है?
  5. पाकिस्तान और ईरान में महत्वपूर्ण बंदरगाह।

मेंस लिंक:

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) ढांचे पर भारत की चिंताओं पर चर्चा करें। सुझाव दें कि भारत को इस गठबंधन से उत्पन्न चुनौतियों से कैसे निपटना चाहिए?

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC)


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (National Common Mobility CardNCMC) का विस्तार किया गया है। इस कार्ड की शुरुआत पिछले वर्ष अहमदाबाद में की गयी थी।

प्रमुख विशेषताऐं:

  1. ‘वन नेशन वन कार्ड’ की तर्ज पर इस अंतःप्रचालनीय परिवहन कार्ड (Inter-Operable Transport Card IOTC) के द्वारा कार्ड-धारक अपनी बस यात्रा, टोल टैक्स, पार्किंग शुल्क का भगतान, खुदरा खरीदारी और यहां तक ​​कि पैसे भी निकाल सकते हैं।
  2. इस विचार को सबसे पहले भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गठित नंदन नीलेकणी समिति द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

कार्यविधि:

नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) एक स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली है। यह सिस्टम स्मार्टफ़ोन को अंतःप्रचालनीय परिवहन कार्ड/ इंटर ऑपरेटिव ट्रांसपोर्ट कार्ड (IOTC) में परिवर्तित कर देगा जिसे यात्री, मेट्रो, बस और उपनगरीय रेलवे सेवाओं के के लिए भुगतान करने में उपयोग कर सकते हैं।

  • यह कार्ड रुपे (RuPay) कार्ड पर कार्य करता है।
  • कार्ड में संग्रहीत राशि से यात्रा की सभी जरूरतों के लिए ऑफ़लाइन लेनदेन किया जा सकता है, और इसमें सभी हितधारकों के लिए वित्तीय जोखिम न्यूनतम होता है।
  • नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) को आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा देश भर में खुदरा खरीदारी के अलावा विभिन्न महानगरों में अन्य परिवहन प्रणालियों द्वारा निर्बाध यात्रा करने के लिए लागू किया गया है।

NCMC की आवश्यकता और महत्व:

  • पूरे भारत में समाज के सभी वर्गों द्वारा व्यापक रूप से ‘सार्वजनिक परिवहन’ किफायती और सुविधाजनक तरीके के रूप में उपयोग किया जाता है। सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में किराया भुगतान के लिए अभी तक नगदी का प्रयोग प्रचलित है।
  • हालाँकि, नगद-भुगतान से, नगदी को सँभालने, राजस्व के कम होने, नगदी का मिलान करने जैसी कई चुनौतियाँ जुड़ी होती हैं।
  • परिवहन-परिचालकों द्वारा स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली (Automatic Fare Collection SystemAFC) में माध्यम से किराया संग्रह को आटोमेटिक और डिजिटल करने के लिए कई पहल शुरू की गई हैं।
  • इन ऑपरेटरों द्वारा जारी किए गए क्लोज्ड लूप कार्ड की शुरूआत ने किराया संग्रह को काफी हद तक डिजिटल करने में मदद की है। हालांकि, इन भुगतान उपकरणों की सीमित प्रयोज्यता ग्राहकों के लिए डिजिटल तरीके अपनाने के लिए भी सीमित करती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NCMC क्या है?
  2. किसके द्वारा अनुशंसित किया गया था?
  3. RuPay प्लेटफॉर्म क्या है?
  4. NCMC के अंतर्गत उपलब्ध सेवाएं।

मेंस लिंक:

नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

  

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

देश के 8 समुद्र तटों पर इंटरनेशनल ब्लू फ्लैग


संदर्भ:

केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा, हाल ही में, देश के 8 समुद्री तटों पर अंतर्राष्ट्रीय ब्लू फ्लैग फहराया गया।

  • जिन स्थानों पर इंटरनेशनल ब्लू फ्लैग फहराए गए उनमें कप्पड (केरल), शिवराजपुर (गुजरात), घोघला (दीव), कसरकोड तथा पदुबिदरी (कर्नाटक), रूशिकोन्डा (आंध प्रदेश), गोल्डेन (ओडिशा) तथा राधानगर (अंडमान और निकोबार दीव समूह) हैं।
  • 6 अक्टूबर, 2020 को UNEP, UNWTO, UNESCO, IUCN, ILS, FEE आदि सदस्य संगठनों वाले अंतर्राष्ट्रीय निर्णायक मंडल द्वारा कोपेनहेगेन, डेनमार्क में पुरस्कारों की घोषणा के दौरान भारत को इन समुद्री तटों के लिए अंतर्राष्ट्रीय ब्लू फ्लैग प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया।

ब्लू फ्लैग कार्यक्रम के बारे में:

  • समुद्र तटों तथा मरीना (marinas) के लिए ब्लू फ्लैग कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय, गैर-सरकारी, गैर-लाभकारी संगठन, फाउंडेशन फॉर एनवायरमेंटल एजुकेशन (The Foundation for Environmental EducationFEE) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • इस कार्यक्रम का आरम्भ फ्रांस में वर्ष 1985 में किया गया था तथा वर्ष 1987 से यूरोप में लागू किया गया।
  • वर्ष 2001 से इस कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका सम्मिलित हुआ, यह इसमें भाग लेने वाला यूरोप के अलावा पहला देश है।

ब्लू फ्लैग’ समुद्र तट क्या होते हैं?

‘ब्लू फ्लैग’ समुद्र तट, एक ईको-टूरिज़्म मॉडल है जो पर्यटकों को नहाने के लिये स्वच्छ जल, सुविधाओं, सुरक्षित एवं स्वस्थ वातावरण प्रदान करने के साथ क्षेत्र के सतत् विकास को बढ़ावा देने वाले समुद्र तटों को चिह्नित करता है।

ब्लू फ्लैग’ हेतु मानदंड

ब्लू फ्लैग प्रमाणीकरण हेतु लगभग 33 मानदंडो को पूरा करना आवश्यक होता है, जिनमे पानी की गुणवत्ता के कुछ मानक मानकों को पूरा करना, अपशिष्ट निपटान की सुविधा होना, विकलांग अनुकूलित होना, प्राथमिक चिकित्सा उपकरण और मुख्य क्षेत्रों में पालतू जानवरों का प्रवेश नहीं होना आदि सम्मिलित हैं।

प्रासंगिक तथ्य:

  • दक्षिण और दक्षिणपूर्वी एशिया में जापान और दक्षिण कोरिया एकमात्र देश हैं जिनके समुद्र तटों को ‘ब्लू फ्लैग’ प्रमाणन दिया गया है।
  • ‘ब्लू फ्लैग’ प्राप्त सर्वाधिक समुद्र तटों (566) के साथ स्पेन शीर्ष स्थान पर है; इसके पश्चात क्रमशः ग्रीस (515) और फ्रांस (395) का स्थान है।

क्या ब्लू फ्लैग प्रमाण-पत्र केवल समुद्र तटों के लिए दिया जाता है?

  • नहीं, यह प्रमाण-पत्र समुद्र तट, मरीना, या स्थायी नौका विहार पर्यटन ऑपरेटर को भी दिया जा सकता है।
  • मूल रूप से, ब्लू फ्लैग एक ट्रेडमार्क है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ब्लू फ्लैग प्रमाणीकरण के बारे में
  1. कार्यक्रम किसके द्वारा शुरू किया गया है?
  2. भारत और एशिया का ब्लू फ्लैग टैग पाने वाला का पहला सागर तट
  3. सर्वाधिक ब्लू फ्लैग सागर तटों वाला देश

मेंस लिंक:

ब्लू फ्लैग कार्यक्रम पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


100वीं किसान रेल

  • हाल ही में, महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार के बीच 100वीं किसान रेल की शुरुआत की गयी।
  • ‘किसान रेल’ सेवा पहल, छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज को दूर के बाजारों में आपूर्ति करने में मदद करेगी। देश के कुल किसानो में 80 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसान हैं। इस पहल से किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  • पिछले 4 महीनों में 100 किसान रेलों की शुरुआत की गयी है।

भारत की पहली चालक रहित ट्रेन

  • प्रधानमंत्री द्वारा, हाल ही में, दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन पर भारत की पहली चालक रहित ट्रेन परिचालन का उद्घाटन किया गया है।
  • इन ट्रेनों को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (DMRC) के ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (OCC) द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर में इंजीनियरों की टीमों द्वारा DMRC नेटवर्क में रियल टाइम ट्रेन मूवमेंट पर निगरानी की जाती है।

‘पाड़ा-पाड़ा समाधान’

(Paray Samadhan)

  • यह पश्चिम बंगाल द्वारा हाल ही में शुरू किया गया एक नया शिकायत निवारण तंत्र है।
  • ‘पाड़ा-पाड़ा समाधान’ का अर्थ है पड़ोस में शिकायतों का निवारण।
  • यह कार्यक्रम 2 जनवरी को शुरू किया जाएगा और 15 फरवरी तक चलेगा।
  • इसके तहत प्रमुख अवसंरचनात्मक समस्याओं का समाधान नहीं किया जायेगा, बल्कि, पड़ोस तक पहुंच बनाने के लिए विशिष्ट मिशन मोड में नगरपालिका, स्थानीय या सेवा समस्याओं को हल किया जायेगा।
  • यह पश्चिम बंगाल के ‘द्वारे सरकार’ कार्यक्रम का पूरक होगा।

द्वारे सरकार (Duare Sarkar) राज्य सरकार की एक पहल है, जो ग्राम पंचायत और नगरपालिका वार्ड स्तर पर आयोजित आउटरीच शिविरों के माध्यम से राज्य सरकार की विशिष्ट योजनाओं को लोगों के घर-घर तक पहुँचाती है।

‘मेरा डाक टिकट’ योजना

  • इस योजना की शुरुआत भारतीय डाक द्वारा डाक टिकटों के निजी पत्रकों को जारी करने के लिए की गयी है।
  • इस योजना के तहत, कोई भी व्यक्ति अपनी तस्वीरों या अपने रिश्तेदारों, मित्रों, या किसी अन्य छवि सहित लोगो, प्रतीकों, विरासत स्थानों या वन्यजीवों की सॉफ्ट या हार्ड कॉपी जमा करके उन्हें प्रिंट करवा सकता है।
  • प्रत्येक निजी डाक पत्रक के लिए पर आवेदक को 300 रूपये चुकाने होंगे।

चर्चा का कारण

हाल ही में, ‘मेरा डाक टिकट’ योजना के तहत कई असामाजिक तत्वों के फोटो वाले टिकट जारी कर दिए गए थे। डाक विभाग का कहना है कि यह भूलवश हुआ था और इसकी जांच की जा रही है।

मदरसों को नियमित स्कूल बनाने के लिए असम में विधेयक

  • विधेयक में राज्य द्वारा संचालित मदरसों को अगले वित्तीय वर्ष से सामान्य शिक्षण संस्थानों में परिवर्तित करने का प्रस्ताव किया गया है।
  • इस विधेयक में शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और शिक्षण की सेवा शर्तों और स्थिति में परिवर्तन किये बगैर मदरसों को उच्च प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों और परिवर्तित करने का प्रस्ताव किया गया है।

पेदलंदरिकी इलू

(Pedalandariki Illu)

  • हाल ही में, आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पेदलंदरिकी इलू अर्थात ‘सभी गरीबों के लिए घर’ Pedalandariki Illu) योजना के तहत आवास-स्थलों के वितरण का कार्य शुरू किया गया है।
  • इस योजना के तहत राज्य में लगभग 6 लाख लोगों के लिए किफायती आवास प्रदान किए जाने की उम्मीद है।

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