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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 26 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राष्ट्रपति की सहमति के लिए राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर रोक

2. जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध की अवधि में वृद्धि

3. आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना सेहत

4. ओपेक प्लस

 

सामान्य अध्ययन-III

1. त्सो कार आर्द्रभूमि क्षेत्र

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. त्रिपुरा सरकार द्वारा राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी

2. ‘BBX11’ जीन

3. महाराष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति और विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियाँ, कार्य और उत्तरदायित्व।

राष्ट्रपति की सहमति के लिए राज्यपाल द्वारा विधेयकों पर रोक


संदर्भ:

हाल ही में, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि पिछले महीने राज्य विधानसभा में केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में पारित किए गए संशोधन विधेयकों को राजभवन में रोक कर रखा गया है और राज्यपाल द्वारा इन विधेयकों को राष्ट्रपति की सहमति के लिए नहीं भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि, केंद्र सरकार यह स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि राज्य द्वारा पारित विधेयक ‘लोक-हित’ में हैं।

विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने की राज्यपाल की शक्ति से संबंधित संवैधानिक प्रावधान

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 200, राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर सहमति देने एवं विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित करने तथा राज्यपाल की अन्य शक्तियों से संबंधित है।

अनुच्छेद 200 के अनुसार, जब राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित एक विधेयक को राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो उसके पास चार विकल्प होते हैं:

  1. विधेयक को अनुमति प्रदान कर सकता है।
  2. अनुमति को रोक सकता है।
  3. राष्ट्रपति के विचारार्थ विधेयक प्रस्तुत कर सकता है।
  4. विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानमंडल को लौटा सकता है।

राष्ट्रपति के समक्ष विकल्प:

जब राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित किया जाता है, तो राष्ट्रपति उस विधेयक पर अपनी सहमति की घोषणा कर सकते हैं अथवा उस पर अपनी सहमति को रोक सकते हैं। बशर्ते:

  1. यदि संदर्भित विधेयक धन विधेयक नहीं होता है तो राष्ट्रपति, राज्यपाल के लिए, अथवा राज्य के विधानमंडल को, जैसा भी मामला हो, अनुच्छेद 200 में उल्लखित प्रावधान के मुताबिक संदेश के साथ विधेयक को वापस करने का निर्देश देता है।
  2. जब इस प्रकार कोई विधेयक लौटाया जाता है, तो संदेश की प्राप्ति की तारीख से छह महीने की अवधि के भीतर सदन द्वारा इस पर पुनर्विचार किया जाएगा और, यदि इस विधेयक को दोबारा संशोधन के सहित अथवा बिना संशोधन के विधानमंडल द्वारा पारित किया जाता है, तो इसे पुनः राष्ट्रपति के विचारार्थ भेजा जाएगा।
  3. यदि राज्य-विधायिका विधेयक को राष्ट्रपति की सहमति के लिए दोबारा भेजती है, तो राष्ट्रपति उस पर सहमती देने के लिए बाध्य नहीं होता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 200
  2. राज्य विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ कब आरक्षित किया जा सकता है?
  3. राज्य विधेयक के संदर्भ में राष्ट्रपति के समक्ष विकल्प
  4. अनुच्छेद 200 के तहत अपवाद
  5. राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध की अवधि में वृद्धि


संदर्भ:

जम्मू और कश्मीर प्रशासन द्वारा केंद्र शासित प्रदेश में 4G मोबाइल इंटरनेट पर लगे प्रतिबंध को 8 जनवरी तक बढ़ा गिया गया है। प्रशासन ने कहा है, कि हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर लगे प्रतिबंध ने, जिला विकास परिषद (District Development CouncilDDC) के हालिया चुनावों में, उग्रवादियों द्वारा गड़बड़ी करने के प्रयासों में बाधा के रूप में कार्य किया है।

आवश्यकता:

जम्मू-कश्मीर गृह विभाग द्वारा जारी एक आदेश में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश में सीमा पार से घुसपैठ करने की कोशिश करने वाले आतंकवादियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी की विश्वसनीय जानकारी मिली है।

उच्चतम न्यायालय द्वारा मई 2020 में दिया गया निर्णय:

उच्चतम न्यायालय द्वारा 11 मई को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में 4G इंटरनेट सेवाएं बहाल करने से इनकार कर दिया गया था।

  • हालांकि, अदालत ने केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को, जमीनी सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करने तथा इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के संबंध में फैसला करने के लिए ‘गृह-मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर प्रशासन के सचिवों की एक समिति गठित करने का आदेश दिया।
  • गृह-मंत्रालय सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति द्वारा विभिन्न याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए दावों पर भी विचार किया जाएगा।

इस फैसले से संबंधित तर्काधार एवं महत्वपूर्ण टिप्पणियां

  • राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव अधिकारों के संतुलन को सुनिश्चित किये जाने की आवश्यकता है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, संकटों से घिरा हुआ है, और साथ ही साथ महामारी और इससे उत्पन्न कठिनाइयों से संबंधित चिंताएँ भी हैं।
  • न्यायालय की पीठ ने अनुराधा भसीन मामले (2020) में अपने पहले दिए गए फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के मद्देनजर जम्मू-कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों की समीक्षा का आदेश दिया था।

पृष्ठभूमि- संबंधित प्रकरण

अगस्त 2019 में, केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अंतर्गत प्रदत्त जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने के मद्देनजर संचार के सभी तरीकों को निलंबित कर दिया था। बाद में, संचार सेवाओं को आंशिक रूप से बहाल कर दिया गया, किंतु इंटरनेट की गति 2G तक ही सीमित रखी गयी।

  • कोविड-19 महामारी को देखते हुए ‘फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स’ द्वारा जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड इंटरनेट की बहाली के लिए एक याचिका दायर की गई।
  • परंतु, प्रशासन द्वारा केंद्र शासित प्रदेश में 4G सेवाओं की बहाली का विरोध किया गया। और प्रशासन ने देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा के मद्देनजर अपने निर्णय को उचित ठहराया।

इंटरनेट प्रतिबंध के खिलाफ आलोचना:

  • इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबंधों ने मूल अधिकारों को लगभग समाप्त कर दिया है और इस क्षेत्र के सात मिलियन लोगों के जीवन को पंगु बना दिया है।
  • इंटरनेट सेवाओं के बंद होने से व्यवसाय और व्यापार पर गंभीर रूप से असर पड़ता है और क्षेत्र के आम लोगों का जीवन बुरी तरह से प्रभावित होता है।

इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने हेतु प्रक्रिया

इंटरनेट सेवाओं के निलंबन से संबंधित तीन कानून, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम  2000, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 और टेलीग्राफ अधिनियम, 1885  हैं।

2017 से पहले, इंटरनेट निलंबन आदेश दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 14 के तहत जारी किए जाते थे।

  • वर्ष 2017 में, केंद्र सरकार द्वारा इंटरनेट निलंबन को नियंत्रित करने के लिए टेलीग्राफ अधिनियम के तहत दूरसंचार सेवाओं के अस्थायी निलंबन (पब्लिक इमरजेंसी या पब्लिक सर्विस) नियमों को अधिसूचित किया गया।
  • 2017 के नियमों के बावजूद, सरकार द्वारा प्रायः धारा 144 के तहत व्यापक शक्तियों का उपयोग किया जाता है।
  • इन नियमों की शक्तियों का स्रोत भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा 5(2) है, जिसमे “भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित” में संदेशो के अवरोधन (Interception) का प्रावधान किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144
  2. भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के बारे में
  3. आईटी अधिनियम 2000 के प्रमुख प्रावधान
  4. अनुराधा भसीन केस (2020) किससे संबंधित है?
  5. संविधान का अनुच्छेद 370

मेंस लिंक:

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट प्रतिबंध लागू होने से पड़ने वाले विभिन्न प्रभावों के बारे में चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री-जन आरोग्य योजना सेहत


(PM-JAY SEHAT)

संदर्भ:

प्रधानमंत्री द्वारा केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई सेहत (PM-JAY SEHAT) की शुरुआत की जाएगी, योजना में जम्मू एवं कश्मीर के सभी निवासियों को शामिल किया जाएगा।

योजना के बारे में:

सेहत (SEHAT) योजना का पूरा नाम (Social Endeavour for Health and Telemedicine- SEHAT) ‘स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन के लिए सामूहिक प्रयास’ है। यह केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक स्वास्थ्य बीमा योजना है।

  • यह योजना जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश में रहने वाले सभी लोगों को मुफ्त बीमा कवर प्रदान करती है।
  • इसके अंतर्गत जम्मू-कश्मीर के सभी निवासियों को फ्लोटर बेसिस पर 5 लाख रुपये प्रति परिवार वित्तीय कवर उपलब्ध कराया जाएगा।
  • PM-JAY के परिचालन विस्तार से 15 लाख (लगभग) अतिरिक्त परिवारों को लाभ होगा। इस योजना का लाभ पूरे देश में कहीं भी उठाया जा सकता है।

PM-JAY के बारे में:

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY), सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्तपोषित विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा / बीमा योजना है। यह योजना भारत में सार्वजनिक व निजी सूचीबद्ध अस्पतालों में माध्यमिक और तृतीयक स्वास्थ्य उपचार के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की धन राशि लाभार्थियों को मुहया कराती है।

  • 5 लाख रुपये का लाभ प्रति परिवार फ्लोटर बेसिस पर प्रदान किया जाएगा अर्थात इस राशि का उपयोग परिवार के किसी एक सदस्य अथवा परिवार के सभी सदस्यों द्वारा किया जा सकता है।
  • इसके तहत कैंसर, ह्रदयरोग, नेफ्रोलॉजी (nephrology) आदि बीमारियों को शामिल किया गया है तथा इस योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने से 3 दिन पहले और 15 दिन बाद तक का नैदानिक उपचार, स्वास्थ्य इलाज व दवाइयाँ मुफ्त उपलब्ध होतीं हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. आयुष्मान भारत के घटक
  2. PM JAY- मुख्य विशेषताएं
  3. पात्रता
  4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के बारे में
  5. सेहत (SEHAT) योजना

मेंस लिंक:

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के महत्व और संभावानाओं पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: महत्त्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, संस्थाएँ और मंच- उनकी संरचना, अधिदेश।

ओपेक प्लस


(OPEC+)

संदर्भ:

रूस द्वारा अगले महीने होने जा रहे शीर्ष वैश्विक तेल उत्पादकों के शिखर सम्मेलन में, ओपेक प्लस (OPEC+) देशों द्वारा फरवरी माह से अतिरिक्त पांच लाख बैरल प्रति दिन (bpd) तेल उत्पादन की वृद्धि के लिए सहयोग की उम्मीद की जा रही है।

 पृष्ठभूमि:

रूस तथा अन्य प्रमुख तेल उत्पादक और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन, ओपेक प्लस (OPEC+), कोविड-19 महामारी के कारण ईंधन की मांग में कमी होने पर वैश्विक तेल बाजार की सहायता करने हेतु उत्पादन कम करने पर सहमत हुए थे।

चूंकि, अप्रैल में रिकॉर्ड वैश्विक आपूर्ति कटौती पर सहमति के बाद से, ओपेक प्लस द्वारा उत्तरोत्तर कटौती को कम किया गया है और जनवरी माह में अतिरिक्त 5,00,000 बैरल प्रति दिन (bpd) तेल उत्पादन करने की उम्मीद है।

‘ओपेक प्लस’ क्या है?

ओपेक प्लस (OPEC+) कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों का एक गठबंधन है। यह गठबंधन वर्ष 2017 से तेल बाजारों में की जाने वाली आपूर्ति में सुधार कर रहा है।

ओपेक प्लस देशों में अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं।

OPEC_1

प्रीलिम्स लिंक:

  1. OPEC के संस्थापक सदस्य
  2. शीर्ष तेल उत्पादक
  3. भारत द्वारा कच्चे तेल का आयात
  4. कच्चे तेल के घटक और शोधन
  5. भारत में कच्चे तेल के भंडारण की सुविधा
  6. ओपेक सदस्यों का भौगोलिक अवस्थति
  7. ओपेक और गैर-ओपेक सदस्यों द्वारा उत्पादित कच्चे तेल का प्रकार
  8. ‘ओपेक+’ क्या है?

मेंस लिंक:

ओपेक जैसे समूह विश्व भर में तेल की कीमतों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

त्सो कार आर्द्रभूमि क्षेत्र


(Tso Kar Wetland Complex)

संदर्भ:

भारत ने लद्दाख के त्सो कार (Tso Kar) आर्द्रभूमि क्षेत्र को अपने 42वें रामसर स्‍थल के रूप में शामिल किया है।

‘त्सो कार’ के बारे में:

त्सो कार घाटी, लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र में स्थित एक अत्‍यधिक ऊंचाई वाला आर्द्रभूमि क्षेत्र है। यह दो प्रमुख जल-निकायों, चांगथांग क्षेत्र के दक्षिण में मीठे पानी की झील स्‍टारत्‍सपुक त्सो (Startsapuk Tso) तथा उत्तर में खारे पानी की झील त्सो कार (Tso Kar) से मिलकर बना है।

  • अत्यधिक खारे पानी के वाष्पीकरण के कारण इसके किनारों पर सफेद नमक के उत्फुल्लन (efflorescence) के कारण इसे त्सो कार कहा जाता है, जिसका अर्थ है सफेद झील।
  • बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के अनुसार त्सो कार घाटी एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (IBA) और यह मध्य एशियाई उड़ान मार्ग में पड़ने वाला एक महत्वपूर्ण स्थल है।

इस क्षेत्र में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियाँ:

काले गर्दन वाली सारस पक्षी (Grus nigricollis), ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीबे (Podicepscristatus), बार-हेडेड गीज यानी कलहंस (Anserindicus), रूडी शेल डक यानी बतख (Tadornaferruginea), ब्राउन-हेडेड गल (Larusbrunnicephalus), लेसर सैंड-प्लोवर (Charadriusmongolus) और अन्य।

‘रामसर अभिसमय’ के बारे में:

‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) आर्द्रभूमियों के संरक्षण और विवेकपूर्वक उपयोग हेतु एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है।

  • इस अभिसमय पर 2 फरवरी 1971 को कैस्पियन सागर के तट पर स्थति ईरान के शहर रामसर में हस्ताक्षर किए गए थे, इसलिए इसे ‘रामसर अभिसमय’ (Ramsar Convention) कहा जाता है।
  • आधिकारिक तौर पर इसे, ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्र्भूमियों, विशेषकर जल-पक्षी वास-स्थल पर अभिसमय’ (Convention on Wetlands of International Importance especially as Waterfowl Habitat) कहा जाता है।

मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड’ (Montreux Record)

‘रामसर अभिसमय’ के तहत ‘मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड’ (Montreux Record) अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्र्भूमियों की सूची में आर्द्र्भूमि स्थलों का एक रजिस्टर है। इसमें मानवीय हस्तक्षेप व प्रदूषण के कारण पारिस्थितिकी रूप से संकटापन्न आर्द्र्भूमियों को शामिल किया जाता है ।

इसे रामसर सूची के भाग के रूप में बरकरार रखा जाता है।

  • मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड की स्थापना ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ कॉन्ट्रैक्टिंग पार्टीज़’ (Conference of the Contracting Parties), 1990 की सिफारशों के तहत की गयी थी।
  • मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में किसी भी स्थल को केवल संबंधित अनुबंधित पक्षकारों (Contracting Parties) की सहमति से जोड़ा और हटाया जा सकता है।
  • वर्तमान में, मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड में दो भारतीय स्थल लोकटक झील, मणिपुर और केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, राजस्थान हैं।
  • एक बार चिल्का झील (ओडिशा) को इस सूची में स्थान दिया गया था, परन्तु आगे चलकर इसे वहाँ से हटा दिया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘रामसर अभिसमय’ के बारे में।
  2. मॉन्ट्रेक्स रिकॉर्ड के बारे में।
  3. भारत में रामसर अभिसमय’ के अंतर्गत आर्द्र्भूमियां।
  4. त्सो कार बेसिन के बारे में।
  5. इस क्षेत्र में पायी जाने वाली महत्वपूर्ण पक्षी प्रजातियाँ।
  6. मध्य एशियाई उड़ान-मार्ग के बारे में।

स्रोत: पीआईबी

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


त्रिपुरा सरकार द्वारा राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी

त्रिपुरा सरकार की नई योजना के तहत, राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मार्च 2018 तक राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वालों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया गया है।

इस योजना के तहत, अपेक्षित मानदंडों को पूरा करने वाले ऐसे परिवारों के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।

‘BBX11’ जीन

(‘BBX11’ gene)

  • यह प्रोटोक्लोरोफिलाइड (Protochlorophyllide) के स्तर को विनियमित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए पादपों में हरियाली (Greening) के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला जीन (Gene) है। प्रोटोक्लोरोफिलाइड, हरे वर्णक क्लोरोफिल के जैवसंश्लेषण में एक मध्यवर्ती अवयव होता है।
  • हाल ही में भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (IISER) के शोधकर्ताओं द्वारा इसकी खोज की गई है।

महाराष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना

हाल ही में, मंत्रिमंडल द्वारा राज्य में एक अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु एक मसौदा विधेयक को मंजूरी प्रदान की गयी है।

  • यह विश्वविद्यालय पुणे में स्थापित किया जाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में शारीरिक और खेल शिक्षा, खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा, खेल प्रौद्योगिकी, खेल प्रशासन, खेल प्रबंधन, खेल मीडिया और संचार, और खेल कोचिंग और प्रशिक्षण सहित विभिन्न पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे।

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