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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 25 December

 

विषय – सूची

सामान्य अध्ययन-II

1. विधान-मण्डल का सत्र आहूत, सत्रावसान और विघटन करने संबंधी राज्यपाल की शक्ति

2. कब्बन पार्क में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने हेतु लिए पाँच महीने के शिशु द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका

3. ब्रेक्सिट समझौते के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ

 

सामान्य अध्ययन-III

1. भारत द्वारा सिंगापुर में वोडाफोन मध्यस्थता के फैसले को चुनौती

2. राष्ट्रीय गणित दिवस

3. इफको गैस रिसाव

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. ‘पासेक्स’ (PASSEX) क्या है?

2. ‘विश्वभारती’ विश्वविद्यालय

3. सुशासन दिवस

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

विधान-मण्डल का सत्र आहूत, सत्रावसान और विघटन करने संबंधी राज्यपाल की शक्ति


संदर्भ:

केरल सरकार द्वारा किसान आंदोलन पर चर्चा करने हेतु विशेष विधानसभा सत्र बुलाने के लिए राज्यपाल से दोबारा अनुमति मांगी गई है।

राज्यपाल की शक्तियों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:

संविधान में, विधान-मण्डल का सत्र आहूत, सत्रावसान और विघटन करने की राज्यपाल की शक्ति से संबंधित दो उपबंध हैं।

अनुच्छेद 174 के अनुसार, राज्यपाल, विधान मंडल के सदन या प्रत्येक सदन को ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे, अधिवेशन के लिए आहूत करेगा।

अनुच्छेद 174 (2) राज्यपाल, समय-समय पर-

अनुच्छेद 174 (2) (a) के तहत सदन का या किसी सदन का सत्रावसान कर सकेगा तथा अनुच्छेद 174 (2) (b) के तहत विधान सभा का विघटन कर सकेगा।

अनुच्छेद 163 के अनुसार- राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रि-परिषद् होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा। साथ ही इसमें यह भी कहा गया है, जिन परिस्थितियों में संविधान के तहत राज्यपाल को अपने विवेकानुसार कार्य करने की ज़रूरत होती है, उस स्थिति में उसे मंत्रिमंडल की सलाह की आवश्यकता नहीं होगी

इस संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्णय

अरुणाचल प्रदेश में हुए संवैधानिक संकट के संबंधित नबाम रेबिया (Nabam Rebia) मामले में उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2016 के फैसले में स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘राज्यपाल केवल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर ही विधान-मण्डल का सत्र आहूत, सत्रावसान और विघटन कर सकते हैं।

लेकिन अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्यपाल के पास यह यकीन करने के कारण होते हैं, कि मुख्यमंत्री तथा उनकी मंत्रिपरिषद ने सदन का विश्वास खो दिया है, तो वह सदन में शक्ति परीक्षण कराने का आदेश दे सकते हैं।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 163 और 174 का अवलोकन
  2. क्या राज्यपाल, विधानसभा सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सलाह के लिए बाध्य होता है?
  3. मुख्यमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
  4. राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ
  5. राज्यपाल का कार्यकाल

मेंस लिंक:

राज्य के राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियों पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

कब्बन पार्क में वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने हेतु लिए पाँच महीने के शिशु द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका


संदर्भ:

कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को पांच महीने के शिशु द्वारा दायर जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया गया है। याचिका में बेंगलुरु स्थित कब्बन पार्क के भीतर और उससे होकर गुजरने वाले यातायात पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है।

संबंधित प्रकरण

  1. याचिका में कहा गया है उत्तरदाताओं के कार्यों का याचिकाकर्ता के स्वास्थ्य, भलाई और गुणवत्ता पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जो एक शिशु के रूप में पर्यावरण की दृष्टि से गैर-जिम्मेदार उत्तरदाताओं का कृत्यों का भार वहन करने के लिए मजबूर है।
  2. इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया है कि उत्तरदाताओं की कार्रवाई याचिकाकर्ता के प्रदूषण मुक्त हवा और पानी का आनंद लेने के अध‌िकारों को प्रभावित करती है और उसके जीवन की गुणवत्ता को बाधित करती है। यह उसके संवैधानिक अधिकारों का स्पष्ट अवमानना है।

आवश्यकता:

याचिका भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन पर पर आधारित करती है। शोधकर्ताओं ने पार्क से होकर गुजरने वाले वाहनों की आवाजाही को बंद करने पर यातायात से पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया था।

  1. शोधकर्ताओं ने पाया है कि पार्क के अंदर यातायात न होने पर CO2 और PM5 उत्सर्जन में कमी आई है।
  2. रिपोर्ट में यातायात रोकने पर पर्यावरण में सुधार की जांच करने के बाद पार्क को बंद करने की सिफारिश की गई है, और यह निष्कर्ष भी दिया है कि पार्क को वाहनों की आवाजाही के लिए खोलने पर भी यातायात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

जनहित याचिका (PIL) क्या होती है?

जनहित याचिका (Public Interest litigation- PIL), जैसा कि नाम से ज्ञात होता है, कि यह किसी भी सार्वजनिक हित के लिए मुकदमेबाजी (litigation) होती है। यहाँ पर ‘मुकदमेबाजी’ शब्द का अर्थ है ‘कानूनी कार्रवाई’; अर्थात जनहित याचिका, सार्वजनिक हित की रक्षा के लिए किसी सामजिक रूप से जागरूक व्यक्ति के द्वारा की जाने वाली कानूनी कार्रवाई होती है।

  • जनहित याचिका, किसी राज्य या केंद्रीय सरकार, नगर प्राधिकरण और किसी भी निजी पार्टी के खिलाफ दायर की जा सकती है।
  • भारतीय संविधान के अनुसार, याचिका को अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय के अथवा अनुच्छेद 32 के तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर किया जा सकता है।

पृष्ठभूमि:

देश में जनहित याचिकाओं पर सबसे पहले सुनवाई न्यायमूर्ति भगवती और न्यायमूर्ति वी आर कृष्णा अय्यर द्वारा की गयी थी।

जनहित याचिका (पीआईएल) दायर किए जा सकने वाले विभिन्न क्षेत्र:

  1. धार्मिक अधिकारों या मूल अधिकारों का उल्लंघन।
  2. गरीबों के मूल मानवाधिकारों का उल्लंघन।
  3. सार्वजनिक कार्यो को पूरा करने के लिए नगरपालिका अधिकारियों को विवश करने हेतु।
  4. सरकारी नीतियों के प्रावधान अथवा इनके कार्यान्वयन के संबंध में।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनहित याचिका क्या होती है?
  2. इसे कौन दाखिल कर सकता है?
  3. किन क्षेत्रों में जनहित याचिका दायर की जा सकती है?
  4. जनहित याचिका दायर करने संबंधी प्रक्रिया।
  5. उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालय का मूल क्षेत्राधिकार।

मेंस लिंक:

जनहित याचिका के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों तथा राजनीति का प्रभाव; प्रवासी भारतीय।

ब्रेक्सिट समझौते के बाद ब्रिटेन और यूरोपीय संघ


(Post- Brexit deal)

संदर्भ:

आखिरकार ब्रिटेन और यूरोपीय संघ द्वारा, भविष्य के संबंधों को परिभाषित करने वाले एक समझौते पर सहमति व्यक्त की गयी है।

पृष्ठभूमि:

31 जनवरी को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो गया था, उस समय से, दोनों पक्षों में नए नियमों के बारे में वार्ता जारी थी।

समझौते के बारे में प्रमुख तथ्य:

इस समझौते में ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के मध्य एक साथ रहने, कार्यों और व्यापार के संबंध में नए नियम तय किये गए हैं।

  • सीमा पार करने पर एक-दूसरे की वस्तुओं पर कोई कर / सीमा-शुल्क (Tariffs) नहीं लगाया जाएगा।
  • कारोबार की जाने वाली चीजों की मात्रा पर कोई सीमा / कोटा (Quota) नहीं लगाई जाएगी।
  • सीमा-शुल्क: विश्व की सबसे बड़ी बाजारों में से एक (ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की बाजार) तक टैरिफ-मुक्त और कोटा-मुक्त पहुंच, ब्रेक्सिट समझौते का प्रमुख आधार है और यह यूरोपीय संघ और कनाडा या जापान के मध्य समझौतों से बढ़कर है।
  • व्यापार: विश्वसनीय व्यापारी कार्यक्रम, पारस्परिक रूप से मान्य होंगे। इसका अर्थ है कि ब्रिटेन के उत्पादकों को ब्रिटेन और यूरोपीय संघ, दोनों के मानकों का पालन करना होगा।
  • व्यावसायिक शर्तें: डॉक्टर, नर्स, आर्किटेक्ट, दंत चिकित्सक, फार्मासिस्ट, डॉक्टर, इंजीनियर के लिए स्वचालित रूप से मान्यता प्राप्त नहीं होगी। इनके लिए, प्रैक्टिस करने हेतु इच्छित सदस्य देश से मान्यता प्राप्त करनी होगी।
  • आवागमन– आवाजाही की स्वतंत्रता: ब्रिटेन के नागरिकों को यूरोपीय संघ में काम करने, अध्ययन, व्यवसाय शुरू करने अथवा निवास की स्वतंत्रता नहीं होगी। 90 दिनों से अधिक अवधि तक ठहरने के लिए वीजा की आवश्यकता होगी।
  • मत्स्यन: ब्रिटेन, सामूहिक मत्स्यन नीति से अलग हो जाएगा।

समझौता होने में देरी का कारण:

क्योंकि इस समझौते में काफी कुछ दांव पर लगा था।

यूरोपीय संघ, ब्रिटेन का सबसे करीबी और सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, वर्ष 2019 में ब्रिटेन सरकार के अनुसार- यह समझौता 668 बिलियन  पौंड के व्यापार को कवर करता है।

जब ब्रिटेन, यूरोपीय संघ में शामिल था, तो कंपनियां, यूरोपीय संघ की सीमाओं के पार, बिना किसी टैरिफ के माल खरीद और बेच सकती थीं।

  • बिना इस समझौते के, व्यवसायों को सीमा-शुल्कों का भुगतान करना पड़ता, जिससे उनकी लागत में काफी वृद्धि होती।
  • कोई समझौते नहीं होने का मतलब होता, ज्यादा सीमा-जांच। जिससे उत्पादों के परिवहन में देरी होने का भय रहता।

आगामी स्थिति:

  • हालांकि, दोनों पक्षों द्वारा समझौते पर सहमति हो गई है, फिर भी इसे कानून के रूप में लागू किए जाने की आवश्यकता है।
  • इसके लिए इस समझौते को ब्रिटेन और यूरोपीय संसदों, दोनों के द्वारा पारित किया जाना चाहिए।

यूरोपीय संघ और ब्रेक्सिट

यूरोपीय संघ में 27 यूरोपीय देश सम्मिलित हैं।

यूरोपीय संघ के नागरिक अन्य यूरोपीय संघ के देशों में रहने और काम करने के लिए स्वतंत्र हैं, और इन देशों की फर्में, बिना किसी रूकावट या अतिरिक्त करों के, एक-दूसरे का सामान खरीद और बेच सकती हैं।

  • ब्रिटेन, यूरोपीय संघ से अलग होने वाला पहला देश है, अतः इसे ब्रेक्सिट (Brexit) के रूप में जाना जाता है।
  • ‘ब्रिटेन को यूरोपीय संघ में रहना चाहिए अथवा नहीं’, इसका निश्चय करने के लिए ब्रिटेन में जून 2016 में एक जनमत संग्रह कराया गया था, जिसमे यूरोपीय संघ से अलग होने के पक्ष में 52% मत पड़े जबकि शामिल रहने के पक्ष में 48% लोगों ने मत दिया था। जनमत संग्रह में बहुमत प्राप्त होने के पश्चात ब्रेक्सिट की प्रक्रिया शुरू हुई।

प्रीलिम्स लिंक और मेंस लिंक:

  • ब्रेक्सिट- अर्थ, प्रमुख विशेषताएं और भारत पर प्रभाव।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

भारत द्वारा सिंगापुर में वोडाफोन मध्यस्थता के फैसले को चुनौती


संदर्भ:

भारत ने भारतीय आयकर अधिकारियों द्वारा 20,000 करोड़ रुपये की मांग के मामले में ब्रिटिश दूरसंचार क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वोडाफोन समूह के पक्ष में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (Permanent Court of ArbitrationPCA) के फैसले को सिंगापुर अदालत में चुनौती दी है।

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण (PCA) का निर्णय:

  • ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी द्वारा वर्ष 2007 में किये गए सौदे पर, पूर्व-व्यापी कानून के तहत भारत द्वारा पूंजीगत लाभ और कर-चुकाने में देरी के रूप में 22,100 करोड़ रुपये की मांग ‘उचित और न्यायसंगत व्यवहार की गारंटी’ का उल्लंघन करती है।
  • भारत के लिए वोडाफोन ग्रुप के खिलाफ करों की मांग को जारी नहीं रखना चाहिए।

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भारत द्वारा पूर्वव्यापी कराधान कानून पारित करने के बाद की घटनाएँ:

यह अधिनियम 2012 में संसद द्वारा पारित किया गया था और इसके तहत वोडाफोन, करों का भुगतान करने के दायरे में आ गया।

  • बाद में, वोडाफोन समूह ने 1995 में हुए भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty BIT) के अनुच्छेद-9 का उपयोग किया।
  • BIT के अनुच्छेद 9 में कहा गया है कि ‘अनुबंध के तहत एक पक्ष के निवेशक तथा दूसरे पक्ष के क्षेत्र/ देश में किए जाने वाले निवेश के संबंध में दूसरे पक्ष के साथ किसी विवाद की स्थिति में’ जहां तक ​​संभव हो, मामले को वार्ता के माध्यम से सौहार्दपूर्वक निपटारा किया जाएगा।

‘द्विपक्षीय निवेश संधि’ क्या है?

द्विपक्षीय निवेश संधि (Bilateral Investment Treaty BIT) को प्रत्येक देश की कंपनियों द्वारा दूसरे देश के क्षेत्राधिकार में निवेश को बढ़ावा देने और संरक्षण के लिए हस्ताक्षरित किया जाता है।

BIT के तहत, दोनों देश यह सुनिश्चित करते हैं, कि एक-दूसरे के क्षेत्राधिकार में मौजूद कंपनियों के साथ ‘हर समय निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवहार किया जाएगा और दूसरे के क्षेत्राधिकार में पूर्ण संरक्षण और सुरक्षा प्रदान की जाएगी’।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA)- संरचना, कार्य और सदस्य
  2. क्या PCA का फैसला संबंधित पक्षों पर बाध्यकारी होता है?
  3. भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) का अनुच्छेद-9
  4. पूर्वव्यापी कराधान क्या है?
  5. UNCITRAL का अवलोकन

मेंस लिंक:

स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के कार्यों एवं महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ

राष्ट्रीय गणित दिवस


(National Mathematics Day)

संदर्भ:

भारत में प्रतिवर्ष 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस (National Mathematics Day) मनाया जाता है।

इस दिवस का आयोजन महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती और गणित के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखने किया जाता है, इन्होने गणितीय विश्लेषण, संख्या सिद्धांत, अपरिमित श्रृंखला (Infinite Series), क्रमागत भिन्नों (Continued Fractions) के बारे में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

श्रीनिवास रामानुजन के जीवन की प्रमुख बातें:

  • वर्ष 1911 में, रामानुजन ने इंडियन मैथमेटिकल सोसाइटी के जर्नल में अपना पहला लेख प्रकाशित किया।
  • वर्ष 1914 में रामानुजन इंग्लैंड पहुंचे, वहां प्रसिद्ध विद्वान हार्डी ने उन्हें पढ़ाया और रामानुजन के साथ कुछ शोधों में सहयोग किया।
  • उन्होंने रीमैन श्रृंखला (Riemann series), दीर्घवृत्‍तीय समाकलन (elliptic integrals), हाइपरज्यामितीय श्रेणी (hypergeometric series), जीटा फ़ंक्शन के कार्यात्मक समीकरण और विचलन श्रेणी (divergent series) के अपने सिद्धांत पर काम किया।
  • हार्डी ने देखा कि रामानुजन के कार्यों में मुख्यतः अब तक अन्य विशुद्ध गणितज्ञों के लिए भी अज्ञात क्षेत्र शामिल थे।
  • हार्डी द्वारा अस्पताल में भर्ती रामानुजन से मिलने के लिए प्रसिद्ध यात्रा के बाद 1729 संख्या को हार्डी-रामानुजन संख्या के रूप में जाना जाता है।
  • रामानुजन के गृह राज्य, तमिलनाडु में 22 दिसंबर को ‘राज्य आईटी दिवस’ रूप में मनाया जाता है।

2015 में गणितज्ञ रामानुजन पर देव पटेल-अभिनीत ‘द मैन हू नो इन्फिनिटी’ (The Man Who Knew Infinity) बायोपिक बनाई गयी थी।

प्रीलिम्स लिंक और मेंस लिंक:

  • श्री रामानुजन की प्रमुख उपलब्धियां और योगदान।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: आपदा और आपदा प्रबंधन।

इफको गैस रिसाव


संदर्भ:

हाल ही में, प्रयागराज में भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO) की एक इकाई में अमोनिया गैस का रिसाव होने लगा था।

अमोनिया क्या है?

  • कृषि में उच्च-नाइट्रोजन उर्वरक के रूप में उपयोग किये जाने वाला ट्राई- हाइड्रॉइड नाइट्रोजन (NH3) अर्थात अमोनिया, अमोनियम नाइट्रेट (NH4NO3) का मूल योगिक होता है।
  • यह मनुष्य की त्वचा, आंखों, मुख क्षिद्र, और श्वसन नालिकाओं में मौजूद नमी के संपर्क में आने से अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती है, जोकि अत्याधिक संक्षारक होता है और कोशिका झिल्ली वसा को क्षति पहुंचाता है, जिसके परिणामस्वरूप कोशिकाएं नष्ट होने लगती है।

अमोनिया के प्रमुख उपयोग

  • अमोनिया का उपयोग उर्वरकों के निर्माण में किया जाता है, इसके अलावा यह बड़ी मात्रा में विश्व में उत्पादित होने वाले सिंथेटिक रसायनों में से एक है।
  • 80 प्रतिशत से अधिक अमोनिया का उपयोग उर्वरक निर्माण में किया जाता है, और बची हुई अमोनिया की अधिकाँश मात्रा फार्मलाडेहाइड के उत्पादन में प्रयुक्त की जाती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पीने के पानी में अमोनिया की अधिकतम स्वीकार्य सीमा?
  2. सल्फेट का स्वीकार्य स्तर
  3. पानी की कठोरता की वांछनीय सीमा
  4. मल कोलिफॉर्म का वांछनीय स्तर
  5. अमोनिया का उपयोग

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


‘पासेक्स’ (PASSEX) क्या है?

पैसेज अभ्यास (पासेक्स), दो देशों की नौसेनाओं के बीच किया जाने वाला एक युद्धाभ्यास होता है, जिसमे युद्ध या मानवीय आपदा के समय परस्पर संचार और सहयोग करने में सक्षमता को सुनिश्चित किया जाता है। इस अभ्यास में पनडुब्बी-रोधी और सतह के उन्नत युद्ध अभ्यास, हथियारों से फायरिंग, नाविक कला का अभ्यास और हेलिकॉप्टर संचालन शामिल है।

‘विश्वभारती’ विश्वविद्यालय

  • पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित राष्ट्रीय महत्ता प्राप्त विश्व-भारती विश्वविद्यालय एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय है।
  • इसकी स्थापना, शान्तिनिकेतन में, रबिन्द्रनाथ टैगोर द्वारा की गयी थी।
  • 1951 में संसद के एक अधिनियम द्वारा विश्व-भारती विश्वविद्यालय को एक केंद्रीय विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय महत्व का संस्थान घोषित किया गया था।

चर्चा का कारण

शताब्दी समारोह।

सुशासन दिवस

(Good governance day)

  • देश में प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को सुशासन दिवस मनाया जाता है।
  • इस दिवस का आयोजन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के रूप में भी किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य देश के नागरिकों और छात्रों को सरकार द्वारा निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी देना है।

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