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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 24 December

 

विषय – सूची

 

सामान्य अध्ययन-III

1. केयर्न एनर्जी के साथ टैक्स विवाद में मध्यस्थता फैसला भारत के खिलाफ

2. वनस्पति आधारित प्रोटीन की नई खोज: आईआईटी दिल्ली के ‘कृत्रिम अंडे’

3. विद्युत् (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020

4. गैर-कानूनी डिजिटल ऋण देने वाली ऐप्स से सावधान: आरबीआई

5. ‘टूर ऑफ़ ड्यूटी’ भर्ती मॉडल

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. डीटीएच सेवाओं में 100% FDI

2. चार फिल्म मीडिया इकाइयों का विलय

3. परिसर का भौतिक सत्यापन अनिवार्य: जीएसटी

4. मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM)

5. किलाऊआ ज्वालामुखी

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन तथा औद्योगिक विकास पर इनका प्रभाव।

केयर्न एनर्जी के साथ टैक्स विवाद में मध्यस्थता फैसला भारत के खिलाफ


संबंधित प्रकरण

भारत सरकार द्वारा ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश समझौते का हवाला देते हुए वर्ष 2012 में लागू पूर्वव्यापी कर कानून (retrospective tax law) के तहत आंतरिक व्यापार पुनर्गठन पर करों (taxes) की मांग की गयी थी, जिसे केयर्न एनर्जी ने चुनौती दी थी।

  • वर्ष 2011 में, केयर्न एनर्जी ने केयर्न इंडिया में अपनी अधिकांश हिस्सेदारी वेदांता लिमिटेड को बेच दी थी, इसके बाद भारतीय कंपनी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत की बची है।
  • वर्ष 2014 में, भारतीय कर विभाग द्वारा करों के रूप में 10,247 करोड़ रुपए ($ 1.4 बिलियन) की मांग की गयी थी।

नवीनतम फैसला

तीन सदस्यीय न्यायाधिकरण में भारत सरकार द्वारा नियुक्त एक न्यायाधीश भी सम्मिलित है। इसके फैसले के अनुसार-

  1. 2006-07 में केयर्न द्वारा अपने भारत के व्यापार के आंतरिक पुनर्गठन करने पर भारत सरकार का 10,247 करोड़ रुपये का कर दावा वैध नहीं है।
  2. भारत सरकार के लिए स्कॉटिश तेल अन्वेषणकर्ता कंपनी को लाभांश तथा कर वापसी पर रोक, और आंशिक रूप से बकाया वसूली के लिए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि को ब्याज सहित भुगतान करना चाहिए।
  3. भारत ने ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत केयर्न के प्रति अपने दायित्वों का उल्लंघन किया है

मध्यस्थता न्यायाधिकरण में किस प्रकार मामला दायर किया गया?

मध्यस्थता न्यायाधिकरण में केयर्न द्वारा अपना दावा ब्रिटेन-भारत द्विपक्षीय निवेश संधि के तहत दायर किया गया। न्यायाधिकरण की वैधानिक पीठ नीदरलैंड में हैं और मामले की सुनवाई स्थायी मध्यस्थता न्यायालय की रजिस्ट्री के तहत की गयी थी।

निहितार्थ:

  • विवादास्पद पूर्वव्यापी करारोपण के संदर्भ में यह सरकार के लिए तीन महीनों में दूसरा झटका है।
  • इससे पहले सितंबर में एक अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने वोडाफोन समूह पर भारत द्वारा पूर्व प्रभाव से लगाए गए कर के खिलाफ फैसला सुनाया था।

भारत सरकार के लिए अगला कदम

इस आदेश में फैसले के खिलाफ चुनौती या अपील करने का प्रावधान नहीं है, हालांकि भारत सरकार इसे चुनौती दे सकती है और प्रधान मंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा इस फैसले को चुनौती देने के संबंध अंतिम निर्णय किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ‘मध्यस्थता’ क्या है?
  2. हालिया संशोधन।
  3. अन्तर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय के बारे में।
  4. भारतीय मध्यस्थता परिषद के बारे में।
  5. 1996 अधिनियम के तहत मध्यस्थों की नियुक्ति।
  6. स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA)- संरचना, कार्य और सदस्य।

मेंस लिंक:

मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग और रोज़मर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी का विकास।

वनस्पति आधारित प्रोटीन की नई खोज: आईआईटी दिल्ली के ‘कृत्रिम अंडे


संदर्भ:

आईआईटी दिल्ली की प्रोफेसर काव्या दशोरा द्वारा वनस्पति आधारित ‘कृत्रिम अंडों’ की नई खोज को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) एक्सलेरेटर लैब इंडिया द्वारा आयोजित ‘इन्नोवेट फॉर इंडिया एसडीजी (Innovate4SDG) प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

इस पुरस्कार के तहत $ 5000 की राशि प्रदान की जाएगी।

महत्व:

  • आईआईटी दिल्ली के अनुसार- कृत्रिम अंडों के विकास से आहार-विशिष्ट, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक, शाकाहारी और निरामिष लोगों की प्रोटीन आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकता है।
  • इस नई खोज से ‘सतत विकास लक्ष्य’ (SDG) संख्या 2 और 3 (भुखमरी की समाप्ति तथा अच्छे स्वास्थ्य और जीवनस्तर) को हासिल करने में मदद मिलेगी।

‘कृत्रिम अंडा’ क्या है?

‘कृत्रिम अंडा’ (Mock Egg) को बहुत ही सरल कृषि-आधारित फसलों की प्रोटीन से विकसित किया गया है।  ‘कृत्रिम अंडा’ स्वाद और बनावट में वास्तविक अंडे की तरह दिखता है, और पोषक तत्वों में पोल्ट्री अंडे के लगभग समान होता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. कृत्रिम अंडा’ क्या है?
  2. इसके तत्व।
  3. प्रयोगशाला उत्पादित मांस के बारे में।
  4. पादप-रेशे (plant fibres) क्या होते हैं?

मेंस लिंक:

पादप-निर्मित मांस के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

विद्युत् (उपभोक्ता अधिकार) नियम, 2020


(Electricity (Rights of Consumers) Rules, 2020)

संदर्भ:

हाल ही में, केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा देश में विद्युत उपभोक्‍ता अधिकारों को निर्धारित करते हुए नियम लागू किए गए हैं।

ये नियम उपभोक्ताओं के गुणवत्तापूर्ण, विश्वसनीय और विद्युत् की निरंतर आपूर्ति के अधिकार को सशक्त बनाएँगे।

विद्युत (उपभोक्ता अधिकार) नियमों में निम्‍नलिखित प्रमुख क्षेत्रों को कवर किया गया हैं:

  1. उपभोक्‍ताओं के अधिकारों तथा वितरण लाइसेंसियों के दायित्‍व
  2. नया कनेक्‍शन जारी करना तथा वर्तमान कनेक्‍शन में संशोधन
  3. मीटर प्रबंधन
  4. बिलिंग और भुगतान
  5. डिस्‍कनेक्‍शन और रिकनेक्‍शन
  6. सप्‍लाई की विश्‍वसनीयता
  7. प्रोज्‍यूमर के रूप में कन्‍ज्‍यूमर
  8. लाइसेंसी के कार्य प्रदर्शन मानक
  9. मुआवजा व्‍यवस्‍था
  10. उपभोक्‍ता सेवाओं के लिए कॉल सेन्‍टर
  11. शिकायत समाधान व्‍यवस्‍था

प्रमुख प्रावधान:

  1. सभी राज्यों के लिए इन नियमों को लागू करना अनिवार्य होगा और बिजली के कनेक्शन प्रदान करने और नवीनीकरण में देरी जैसे मुद्दों के लिए डिस्कॉम को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
  2. विद्युत मंत्रालय के अनुसार, सभी राज्य उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे बिजली देने के लिए भी बाध्य होंगे।
  3. नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु सरकार उत्तरदायी इकाईयों पर दंड लगायेगी जिसे उपभोक्ता के खाते में जमा किया जाएगा।
  4. इन नियमों के तहत कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग के संबंध में कुछ अपवाद भी शामिल किये गए हैं।

पृष्ठभूमि:

विद्युत्, समवर्ती सूची (सातवीं अनुसूची) का एक विषय है और केंद्र सरकार को इस विषय पर कानून बनाने की शक्ति और अधिकार प्राप्त है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. 7 वीं अनुसूची के तहत विद्युत्
  2. सातवीं अनुसूची के तहत विषय।
  3. राज्य कानून के केंद्रीय कानून के विरोध में होने की स्थिति में क्या होता है?

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना।

गैर-कानूनी डिजिटल ऋण देने वाली ऐप्स से सावधान: आरबीआई


संदर्भ:

हाल ही में, आरबीआई द्वारा अनधिकृत डिजिटल ऋण देने वाले प्लेटफ़ॉर्म / मोबाइल ऐप्स के संबंध में एक एडवाइजरी जारी की गयी है।

पृष्ठभूमि:

हाल ही में, इस प्रकार से ऋण प्रदान करने वालों के द्वारा तेलंगाना में कथित उत्पीड़न किये जाने से कम से कम तीन कर्जदारों ने आत्महत्या कर ली, और कई अन्य व्यक्तियों द्वारा भुगतान किश्त न चुका पाने पर बल-प्रयोग किये जाने की शिकायते दर्ज की गयी हैं। इन घटनाओं में मद्देनजर भारतीय रिज़र्व बैंक ने एडवाइजरी जारी की है।

प्रमुख बिंदु:

  1. आम जनता को अनधिकृत डिजिटल लेंडिंग ऋण देने वाले प्लेटफ़ॉर्म / मोबाइल ऐप्स से सावधान रहना चाहिए।
  2. आम जनता को ऑनलाइन या मोबाइल ऐप्स के माध्यम से ऋण देने वाली कंपनी / फर्म के पिछली गतिविधियों को सत्यापित करना चाहिए।
  3. उपभोक्ताओं को अज्ञात व्यक्तियों, असत्यापित / अनधिकृत ऐप्स के साथ केवाईसी दस्तावेजों की प्रतियों को कभी भी साझा नहीं करना चाहिए।
  4. ऐसे ऐप्स से संबंधित ऐप्स/ बैंक खाते की जानकारी को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों या सचेत पोर्टल (https://sachet.rbi.org.in) का उपयोग कर ऑन लाइन शिकायत दर्ज करना चाहिए ।

डिजिटल ऋण देने वाले ऐप्स से संबंधित मुद्दे

  1. ये ऋणकर्ताओं को शीघ्र और परेशानी मुक्त तरीके से ऋण देने का वादा करते हैं।
  2. लेकिन, बाद में ऋणकर्ताओं से ब्याज की अत्याधिक दरों और छिपे हुए अतिरिक्त शुल्क की मांग की जाती है।
  3. इस तरह के प्लेटफॉर्म ऋणों की बसूली के लिए अमान्य और कठोर विधियाँ अपनाते हैं।
  4. ये ऋणकर्ताओं के मोबाइल फोन डेटा का उपयोग करने संबंधी समझौतों का दुरुपयोग करते हैं।

आगे की राह

आरबीआई ने कहा है कि इस तरह की बेईमान गतिविधियों का शिकार होने से बचे तथा रिज़र्व बैंक के द्वारा पंजीकृत बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और सांविधिक प्रावधानों के अंतर्गत राज्य सरकारों द्वारा विनियमित अन्य संस्थाओं के माध्यम से वैध सार्वजनिक ऋण देने की गतिविधियां की जा सकती हैं।

रिज़र्व बैंक ने बैंकों और NBFC की ओर से उपयोग किए जाने वाले डिजिटल लेंडिंग प्लेटफ़ॉर्म को बैंक अथवा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के नाम का खुलासा ग्राहकों के सामने करना अनिवार्य किया है।

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स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

टूर ऑफ़ ड्यूटी’ भर्ती मॉडल


(‘Tour of Duty’ recruitment model)

संदर्भ:

सेना की तरफ से पहली बार ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ मॉडल (Tour of Duty’ model of recruitment) प्रस्तावित किए जाने के कुछ महीने बाद ही भारत के रक्षा प्रतिष्ठान वायु सेना और नौसेना में भी भर्ती के लिए यही मॉडल अपनाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

  • अगले कुछ वर्षों में सभी सैन्य बलों की लगभग 40 प्रतिशत भर्तियाँ इस माध्यम से सुनिश्चित करने हेतु इस योजना का विस्तार किये जाने पर विचार किया जा रहा है।
  • भारत का राजनीतिक नेतृत्व बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होने की क्षमता को देखते हुए इस योजना को लेकर खासा उत्सुक है, अतः इसकी रूपरेखा तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

प्रस्तावित मॉडल

वर्तमान में, सशस्त्र बलों का हिस्सा बनने के लिए नियमित स्थायी कमीशन के अलावा एकमात्र विकल्प ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ (Short Service Commission-SSC) है, जिसमें 14 साल की अवधि के लिए अधिकारियों की भर्ती की जाती है। पात्रता के आधार पर, बड़ी संख्या में SSC अधिकारियों द्वारा अंततः स्थायी कमीशन (permanent commission) का विकल्प चुना जाता है।

  1. सेना ने मई में भर्ती के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ मॉडल का प्रस्ताव रखा था, जिसमे युवाओं को तीन वर्ष के लिए स्वेच्छा से अस्थायी तौर पर सेना में शामिल होने का मौका दिए जाने की बात कही गयी।
  2. यह प्रस्ताव उन युवाओं के लिए है जो “रक्षा सेवाओं को अपना स्थायी व्यवसाय नहीं बनाना चाहते हैं, किंतु सैन्य सेवाओं के रोमांच का अनुभव करना चाहते हैं“।
  3. यह प्रस्ताव सशस्त्र बलों में स्थायी सेवा / नौकरी की अवधारणा से तीन साल के लिए ‘इंटर्नशिप / अस्थायी अनुभव की ओर एक बदलाव है।

सरकार के लिए लाभ:

  • इससे संगठन को वेतन और ग्रेच्युटी भुगतान में कमी होने से भारी वित्तीय लाभ होंगे।
  • प्रति अधिकारी तीन साल की सेवा की लागत शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के अधिकारियों पर होने वाले व्यय की तुलना में काफी कम होगी।
  • 10 या 14 साल के बाद सेवानिवृत होने वाले आधिकारी पर 5 – 6.8 करोड़ रुपये का व्यय होता है, जिसमे कमीशन-पूर्व प्रशिक्षण, वेतन, भत्ते, ग्रेच्युटी, वैतनिक छुट्टियाँ आदि सम्मिलित्त होते हैं। जबकि, तीन साल की सेवा के लिए प्रति अधिकारी मात्र 80-85 लाख रुपये का व्यय होगा।
  • SSC अधिकारियों के पास स्थायी रूप से सेवा में शामिल होने का विकल्प होता है, जिससे पेंशन आदि अन्य वयय में वृद्धि होती है।
  • सेना में सैनिकों द्वारा आमतौर पर 17 साल तक सेवा प्रदान की जाती है, प्रति सैनिक पर आजीवन होने वाले व्यय की तुलना में तीन वर्षीय सेवा में प्रति व्यक्ति 11.5 करोड़ रुपये की बचत होगी।

नागरिकों और देश के लिए लाभ:

  • यह कार्यक्रम ‘युवाओं की ऊर्जा को उनकी क्षमता के सकारात्मक उपयोग में मदद करेगा।
  • कठोर सैन्य प्रशिक्षण से विकसित होने वाली आदतों से स्वस्थ नागरिक वर्ग विकसित होगा।
  • तीन साल तक सैन्य सेवा में रहने वाले “प्रशिक्षित, अनुशासित, आत्मविश्वास, मेहनती और प्रतिबद्ध” युवा पुरुषों या महिलाओं से पूरे राष्ट्र को लाभ होगा।
  • एक ‘प्रारंभिक सर्वेक्षण’ ने संकेत दिया है कि कॉर्पोरेट सेक्टर नए स्नातकों के बजाय इन युवाओं को नौकरी देने में वरीयता प्रदान करेगा।

आवश्यकता:

  • सेना के वेतन और पेंशन व्यय में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से वृद्धि हुई है, और सेना के कुल बजट आवंटन का 60% हिस्सा इस पर व्यय होता है।
  • रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति द्वारा वर्ष 2019 में पेश की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना के अधिकारी संवर्ग में लगभग 14 प्रतिशत स्थान रिक्त थे।
  • इस योजना के समर्थक ;राष्ट्रवाद और देशभक्ति के पुनरुत्थान” का भी हवाला देते हैं, और हकीकत यह है कि ‘हमारे देश में बेरोजगारी एक वास्तविकता है’।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सशस्त्र बलों में ‘शॉर्ट सर्विस कमीशन’ बनाम स्थायी कमीशन
  2. नागरिकों को सशस्त्र बलों में किस प्रकार भर्ती किया जा सकता है?

मेंस लिंक:

‘टूर ऑफ़ ड्यूटी’ ToD) योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द प्रिंट

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


डीटीएच सेवाओं में 100% FDI

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने डायरेक्ट-टू-होम (डीटीएच) प्रसारण सेवाओं में निम्नलिखित बदलावों के लिए अपनी अनुमति दी है:

  1. 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI)
  2. डीटीएच के लिए लाइसेंस वर्तमान 10 वर्ष की अपेक्षा अब 20 वर्ष की अवधि के लिए जारी किया जाएगा।
  3. लाइसेंस शुल्‍क को सकल राजस्व (GR) के 10 प्रतिशत से संशोधित सकल राजस्व (AGR ) के 8 प्रतिशत तक संशोधित किया गया है। AGR की गणना GR से जीएसटी को घटाकर की जाएगी।
  4. ब्रॉडकास्टिंग फर्मों से लाइसेंस शुल्‍क वर्तमान में वार्षिक के स्‍थान पर अब त्रिमासिक आधार पर इकट्ठा किया जाएगा।
  5. डीटीएच ऑपरेटर बुनियादी ढांचे को परस्पर साझा भी कर सकते हैं।

चार फिल्म मीडिया इकाइयों का विलय

केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) का विस्‍तार करके अपनी चार मीडिया इकाइयों के विलय को मंजूरी दे दी है।

इसमें शामिल है:

  1. फिल्‍म डिवीजन,
  2. फिल्‍म समारोह निदेशालय,
  3. भारतीय राष्‍ट्रीय फिल्‍म अभिलेखागार, और
  4. बाल फिल्‍म सोसायटी

आवश्यकता: एक निगम के अंतर्गत फिल्‍म मीडिया इकाइयों के विलय से विभिन्‍न कार्यों के बीच  एकरूपता आएगी, साथ ही बुनियादी ढांचे और मानव शक्ति का बेहतर और प्रभावी उपयोग हो सकेगा। इससे कार्यों का दोहराव कम करने में मदद मिलेगी और खजाने की प्रत्‍यक्ष बचत होगी।

परिसर का भौतिक सत्यापन अनिवार्य: जीएसटी

  • सरकार द्वारा जीएसटी पंजीकरण हासिल करने के लिए व्यावसायिक परिसरों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है।
  • सरकार के इस कदम का उद्देश्य जीएसटी नकली चालान बनाने संबंधी धोखाधड़ी के खतरे को नियंत्रित करना है।
  • अब, आवेदक को पंजीकरण की अनुमति देने से पहले व्यक्तिगत रूप से परिसर का सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई आवेदक आधार प्रमाणीकरण का विकल्प चुनता है, तो उसे आयुक्त द्वारा अधिसूचित सुविधा केंद्रों में से किसी एक पर बायोमेट्रिक आधारित आधार प्रमाणीकरण कराना होगा।

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मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (MRSAM)

संदर्भ: सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर संयुक्त रूप से यह मिसाइल विकसित की है।
  • भारत डायनेमिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित की गयी है।
  • MRSAM प्रणाली के सेना संस्करण में एक कमांड पोस्ट, एक मल्टी-फंक्शन रडार और मोबाइल लॉन्चर सिस्टम सम्मिलित है।

किलाऊआ ज्वालामुखी

(Kilauea Volcano)

  • हाल ही में, हवाई द्वीप के बिग आईलैंड पर स्थित किलाऊआ ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ है।
  • किलाऊआ ज्वालामुखी को माउंट किलाऊआ भी कहा जाता है, यह संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई द्वीप के दक्षिण-पूर्वी भाग पर हवाई ज्वालामुखी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है।

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