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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 22 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. कोविड-19 प्रबंधन पर संसदीय समिति की रिपोर्ट

2. कर्नाटक में लोक अदालतों द्वारा 61 लाख मामलों का निपटारा

3. शिगेला संक्रमण

 

सामान्य अध्ययन-III

1. पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL)

2. राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF)

3. सीबीआई द्वारा 15 सालों के बाद अद्यतन अपराध नियमावली का प्रकाशन

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. शाहीन- IX

2. ‘जल शक्ति अभियान II: कैच द रेन’ जागरूकता अभियान

3. देश में तेंदुओं की संख्या में 60 फीसदी की बढ़ोतरी

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

कोविड-19 प्रबंधन पर संसदीय समिति की रिपोर्ट


संदर्भ:

हाल ही में, गृह मामलों पर गठित स्थायी संसदीय समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी है।

प्रमुख अनुशंसाएं:

  • महामारी के दौरान निजी अस्पतालों की निगरानी और नियंत्रण रखने हेतु उपयुक्त कानूनी प्रावधानों सहित एक व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिनियम लागू किया जाना चाहिए।
  • दवाओं की काला बाजारी पर अंकुश लगाया जाए और उत्त्पादों का मानकीकरण सुनिश्चित किया जाए।
  • सरकार द्वारा सक्रिय रूप से, लोगों में घबराहट और महंगी दवाओं पर भारी मात्रा में पैसा खर्च करने से रोकने हेतु सस्ती और प्रभावी पुनःप्रयोजनीय दवाओं संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
  • बीमा दावों को स्वीकार नहीं इनकार करने से रोकने हेतु देश में कार्यरत सभी अस्पतालों पर निगरानी के लिए विनियामक प्रणाली की आवश्यकता है।
  • भविष्य में कोविड-19 जैसी महामारी से निपटने / प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority NDMA) में एक विशेषज्ञ विंग का गठन किया जाना चाहिए।
  • सामाजिक कलंक तथा पृथक्करण और संगरोध/ क्वारंटाइन (Quarantine) के डर से बचने हेतु लोगों को जागरूक करने के लिए उपाय तथा इनके साथ सम्मान और सहानुभूति के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए।
  • किसानों, गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि लघु / सूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण प्राप्त करने में होने वाली समस्याओं पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

सर्वसमावेशी उपायों की आवश्यकता:

  • निजी अस्पतालों में कोविड-19 रोगियों के लिए आरक्षित बिस्तरों को अत्याधिक महंगे दामों में बेचे जाने के कई उदाहरण देखे गए हैं।
  • इसके अलावा, कोविड-19 संक्रमण को रोकने में ‘सहायक’ दवाईयां ऊँची कीमतों पर बेची गईं।
  • महामारी के प्रारंभिक चरण में, कोविड-19 संक्रमण वाले रोगियों को चिकित्सा बीमा नहीं प्रदान किए गए।
  • नौ महीने से अधिक समय तक स्कूल बंद रहने से कई बच्चों को मध्यान्ह भोजन से वंचित होना पड़ा है। कई राज्यों द्वारा छात्रों को उनके घरों पर शुष्क राशन पहुंचाने अथवा या उन्हें भत्ता प्रदान किये जाने की योजना जारी रखी गई। किन्तु, इस व्यवस्था से सबको एकसमान लाभ नहीं मिल सका।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. संसदीय तथा मंत्रिमंडल समितियों के बीच अंतर।
  2. तदर्थ बनाम प्रवर बनाम वित्त समितियां।
  3. इन समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कौन करता है?
  4. केवल लोकसभा के लिए विशिष्ट समितियां
  5. लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता वाली समितियाँ

मेंस लिंक:

संसदीय स्थायी समितियाँ क्या हैं? वे क्यों आवश्यक हैं? उनकी भूमिका और कार्यों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्य- सरकार के मंत्रालय एवं विभाग, प्रभावक समूह और औपचारिक/अनौपचारिक संघ तथा शासन प्रणाली में उनकी भूमिका।

कर्नाटक में लोक अदालतों द्वारा 2.61 लाख मामलों का निपटारा


संदर्भ:

कर्नाटक उच्च न्यायालय और कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण (Karnataka State Legal Services Authority- KSLSA) द्वारा मामलों के निपटारा करने में इतिहास रचा गया है।

प्रमुख बिंदु:

  • 19 दिसंबर को आयोजित मेगा लोक अदालत द्वारा एक ही दिन में 2, 61,882 मामलों के निपटारा करने का रिकॉर्ड बनाया गया।
  • इसके परिणामस्वरूप उच्च न्यायालय के अलावा राज्य के विभिन्न ताल्लुकों और जिला अदालतों के समक्ष लंबित मामलों की संख्या में 12.17% की कमी हुई है।
  • मोटर वाहन दुर्घटना के दावों, भूमि अधिग्रहण, और अन्य नागरिक मामलों से संबंधित मामलों में परस्पर सम्मति से निराकरण करके कुल 669.95 करोड़ रुपए मुआवजे या निपटान राशि के रूप में प्रदान किये गए।
  • इसके अलावा, लगभग दो लाख लंबित आपराधिक मामलों के निपटारों में जुर्माने के माध्यम से राज्य के खजाने के लिए 41.45 करोड़ रुपए के राजस्व का संग्रह हुआ।

लोक अदालत क्या है?

  • लोक अदालत वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणालियों में से एक है, यह एक ऐसा मंच है जहाँ न्यायालय में लंबित विवादों/मामलों अथवा मुकदमे के रूप में दाखिल किए जाने से पूर्व-चरण में ही मामलों का सौहार्द्रपूर्ण तरीके से निपटारा किया जाता है।
  • लोक अदालतों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिए गए- भारत के प्रत्येक नागरिक को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय सुरक्षा प्रदान करने के- वचन को पूरा करने के लिए गठित किया जाता है।

संवैधानिक आधार:

  • संविधान का अनुच्छेद 39A समाज के वंचित और कमजोर वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने तथा समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देने हेतु प्रावधान करता है।
  • संविधान के अनुच्छेद 14 और 22 (1) में राज्य के लिए विधि के समक्ष समानता की गारंटी प्रदान करना अनिवार्य किया गया है।

वैधानिक प्रावधान:

  • विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत लोक अदालतों को वैधानिक दर्जा दिया गया है।

अंतिम निर्णय

  • लोक अदालतों द्वारा दिए गए निर्णय को दीवानी न्यायालय का फैसला माना जाता है और सभी पक्षों पर अंतिम और बाध्यकारी होता है।

निर्णय के विरुद्ध अपील

  • लोक अदालत द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ अपील का कोई प्रावधान नहीं है।
  • परंतु, असंतुष्ट पक्ष अपने ‘मुकद्दमा दायर करने के अधिकार’ के तहत, आवश्यक प्रक्रियाओं की पूर्ती के पश्चात उपयुक्त न्यायालय में मुकदमा कार्यवाही शुरू करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।

न्यायालय शुल्क:

लोक अदालत में मामला दायर करने पर कोई अदालत-शुल्क देय नहीं होता है। यदि न्यायालय में लंबित कोई मामला लोक अदालत में भेजा जाता है तथा इसे बाद में सुलझा लिया जाता है, तो न्यायालय में शिकायतों / याचिका पर मूल रूप से भुगतान किया गया शुल्क भी संबंधित पक्षों को वापस कर दिया जाता है।

लोक अदालत को संदर्भित किए जाने वाले मामलों की प्रकृति:

  1. लोक अदालत के क्षेत्र के न्यायालय का कोई भी मामला जो किसी भी न्यायालय के समक्ष लंबित है।
  2. ऐसे विवाद जो लोक अदालत के क्षेत्रीय न्यायालय में आते हो, लेकिन जिसे किसी भी न्यायालय में उसके वाद के लिए दायर न किया गया हो और न्यायालय के समक्ष दायर किये जाने की संभावना है।
  3. लोक अदालत में गंभीर प्रकृति के अपराध संबंधित किसी भी मामले को समझौते के लिए नहीं भेजा जाता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन कौन करता है?
  2. स्थायी लोक अदालतें क्या हैं?
  3. लोक अदालतों की संरचना।
  4. लोक अदालत में भेजे जाने वाले मामलों की प्रकृति।
  5. संविधान का अनुच्छेद 39 ए
  6. लोक अदालतों द्वारा किए गए निर्णय- क्या वे बाध्यकारी हैं?

मेंस लिंक:

वर्तमान परिदृश्य में एक प्रभावी विवाद समाधान संस्था के रूप में लोक अदालतों के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

शिगेला संक्रमण


(Shigella infection)

संदर्भ:

हाल ही में केरल के कोझिकोड जिले में शिगेला संक्रमण (Shigella infection) के छह मामले पाए जाने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा आपातकालीन बैठकें बुलाई गयीं और निवारक उपायों की शुरुआत की गयी है।

‘शिगेला संक्रमण’ क्या है?

शिगेलोसिस (Shigellosis) अथवा शिगेला संक्रमण, एक आंतों की एक संक्रामक बीमारी है, जो शिगेला नामक बैक्टीरिया प्रजाति के कारण होती है।

यह बैक्टीरिया, विशेष रूप से अफ्रीकी और दक्षिण एशियाई क्षेत्रों के बच्चों में मध्यम से गंभीर प्रकृति के लक्षणों सहित ‘अतिसार’/ दस्त (Diarrhea) रोग के लिए जिम्मेदार मुख्य रोगाणुओं में से एक है।

इसका प्रसरण किस प्रकार होता है?

  • यह बैक्टीरिया, भोज्य पदार्थों के अंतर्ग्रहण के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, इसके बाद ये बृहदान्त्र की वाहिकाओं अस्तर पर हमला करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कोशिकाओं में सूजन आ जाती है और बाद में गंभीर मामलों की स्थिति में कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।
  • किसी व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने और उसे बीमार करने के लिए केवल थोड़ी संख्या में शिगेला बैक्टीरिया काफी होते है।
  • बैक्टीरिया जनित यह संक्रमण व्यक्ति-से-व्यक्ति में फैलता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. शिगेला संक्रमण के बारे में।
  2. प्रसरण।
  3. लक्षण।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से संबंधित विषय।

पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL)


(Recognition of Prior Learning)

संदर्भ:

कौशल भारत (Skill India) द्वारा चंदौली और वाराणसी में पंचायती राज विभाग के अंतर्गत श्रमिकों के लिए पूर्व शिक्षण मान्यता (Recognition of Prior Learning- RPL) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

  • यह कार्यक्रम कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (Ministry of Skill Development and EntrepreneurshipMSDE) द्वारा संकल्प (SANKALP) कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) इस कार्यक्रम के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है।

महत्व:

  • हमारे देश की लगभग 70% आबादी ग्रामीण भारत में निवास करती है और इसलिए जिला पंचायतों का समावेशन जिला कौशल विकास योजनाओं की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है और यह कौशल भारत अभियान के मामले में एक व्यापक स्तर की सुविधा प्रदान करेगा।
  • इस योजना का लक्ष्य पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) के माध्यम से, देश के पूर्व-मौजूदा कार्यबल के कौशल को मानकीकृत ढांचे में संरेखित करना है।
  • इसके तहत, पूर्व शिक्षण प्रमाणन आत्मविश्वास का सृजन करता है, सम्मान दिलाता है और उम्मीदवारों को मान्यता प्रदान करता है, इसके अलावा यह कौशल को आकांक्षात्मक बनाने में सक्षम है।
  • युवाओं के अनौपचारिक शिक्षण को समर्थन, स्थायी आजीविका के अवसर खोजने के प्रयासों में पूरक साबित होगा और ज्ञान आधारित विशेष योग्यताओं से उत्पन्न असमानताओं को कम किया जा सकेगा।

पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL)  क्या है?

  • पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) कार्यक्रम औपचारिक माध्यम से इतर अधिग्रहीत शिक्षण की कीमत को मान्यता देता है और किसी व्यक्ति के कौशल को एक सरकारी प्रमाणपत्र प्रदान करता है।
  • इस कार्यक्रम में उम्मीदवारों को डिजिटल और वित्तीय साक्षरता की अवधारणाओं से परिचय कराया जाता है और तीन वर्ष तक निःशुल्क आकस्मिक बीमा कवरेज भी प्रदान किया जाता है।
  • पूर्व शिक्षण मान्यता कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी उम्मीदवार से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है और प्रत्येक सफलतापूर्वक प्रमाणित उम्मीदवार को 500 रूपये प्रदान किये जाएंगे।
  • यह पहल देश भर के विभिन्न जिलों की ग्राम पंचायतों में संगठित तरीके से पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) कार्यक्रम के शुभारंभ पर केंद्रित ‘ग्राम पंचायत स्तर पर कौशल विकास योजना’ का हिस्सा है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) क्या है
  2. SANKALP क्या है?
  3. PMKVY के बारे में।
  4. राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के बारे में।

मेंस लिंक:

पूर्व शिक्षण मान्यता (RPL) योजना के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: पीआईबी

 

विषय: बुनियादी ढाँचाः ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष‘ (NIIF)


(National Investment and Infrastructure Fund)

संदर्भ:

हाल ही में, कनाडा के PSP इन्वेस्टमेंट, अमेरिका इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कारपोरेशन (US International DFC) तथा घरेलू निजी क्षेत्र की ऋण-प्रदाता एक्सिस बैंक द्वारा राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष‘ (National Investment and Infrastructure Fund- NIIF) के मास्टर फंड में 107 मिलियन डॉलर का निवेश किया गया है।

इन तीनों निवेशकों द्वारा नई प्रतिबद्धताओं के बाद, ‘मास्टर फंड’ की कुल राशि 2.34 बिलियन अमरीकी डॉलर हो गई है।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) के बारे में:

सरकार द्वारा वर्ष 2015  में व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य ग्रीनफ़ील्ड, ब्राउनफ़ील्ड और रुकी हुई अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु निवेश साधन के रूप में 40,000 करोड़ रूपये के राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) की स्थापना की गयी थी।

  • राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के अधिदेश में, भारत में ऊर्जा, परिवहन, आवास, जल, अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य बुनियादी ढाँचे से संबंधित क्षेत्रों में निवेश किया जाना शामिल है।
  • वर्तमान में, NIIF द्वारा तीन निधियों का, अपने विशिष्ट निवेश अधिदेश के तहत प्रबंधन किया जाता है। ये निधियां, वैकल्पिक निवेश कोष (Alternate Investment Fund) के रूप में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के तहत पंजीकृत हैं।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) निवेशक:

  • अक्टूबर 2017 में, NIIF द्वारा अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) के साथ 1 बिलियन अमरीकी डालर के पहले निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ADIA, राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष के मास्टर फंड में निवेश करने वाला पहला अंतर्राष्ट्रीय निवेशक था।
  • NIIF में भारत सरकार का हिस्सा 49% है। घरेलू निवेशक जैसे ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा लाइफ, राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष में निवेशक करने वाले अन्य उल्लेखनीय निवेशक हैं।
  • एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक द्वारा जून 2018 में 200 मिलियन अमरीकी डालर का निवेश करने की घोषणा की गयी।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष की ‘तीन निधियां’ निम्नलिखित हैं:

  1. मास्टर फंड (Master Fund): यह मुख्य रूप से प्रमुख अवसंरचना क्षेत्रों जैसे सड़क, बंदरगाह, वायुयान, बिजली आदि की परिचालन परिसंपत्तियों में निवेश करने के उद्देश्य से एक अवसंरचना निधि है।
  2. निधियों की निधि (Fund of Funds): इसका भारत में अवसंरचना एवं संबंधित क्षेत्रों में अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले निधि प्रबंधकों द्वारा प्रबंधन किया जाता है। इसके तहत मुख्यतः ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर, मिड-इनकम और अफोर्डेबल हाउसिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर सेवाएं और संबद्ध क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है।
  3. सामरिक निवेश कोष (Strategic Investment Fund): यह भारत में SEBI के तहत एक वैकल्पिक निवेश कोष-II के रूप में पंजीकृत है। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर इक्विटी और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना है। इसके तहत मुख्य अवसंरचना क्षेत्र में ग्रीन फील्ड और ब्राउन फील्ड निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. NIIF के बारे में।
  2. NIIF के तहत विभिन्न निधियां।
  3. NIIF का प्रबंधन कौन करता है।
  4. निवेशक
  5. वैकल्पिक निवेश कोष क्या हैं?

मेंस लिंक:

भारत में अवसंरचना विकास के संदर्भ में राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) के महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न सुरक्षा बल और संस्थाएँ तथा उनके अधिदेश।

सीबीआई द्वारा 15 सालों के बाद अद्यतन अपराध नियमावली का प्रकाशन


(CBI Brings Out Updated Crime Manual After 15 Years)

संदर्भ:

सीबीआई द्वारा, कुछ समय पूर्व, अपराध नियमावली (Crime Manual) में आवश्यक बदलाव करने हेतु अतिरिक्त निदेशक प्रवीण सिन्हा के नेतृत्व में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था। अपराध नियमावली में, जांच अधिकारी के लिए जांच करने के दौरान पालन पालन किए जाने वाले दिशानिर्देश होते हैं, इसमें अंतिम बार वर्ष 2005 में परिवर्तन किया गया था।

अपराध नियमावली में बदलाव का प्रस्ताव, बदलते अपराध परिदृश्य, साक्ष्य संग्रह, अंतर्राष्ट्रीय संधियों, अपराधियों पर नज़र रखने के नए तरीकों की खोज आदि के मद्देनजर किया गया था।

सीबीआई की अपराध नियमावली

(CBI’s crime manual)

सीबीआई की अपराध नियमावली में विशेष जांचों, आर्थिक अपराधों और साइबर अपराधों से संबंधित मामलों में एजेंसी के लिए लागू होने वाली मानक संचालन प्रक्रियाओं को निर्धारित किया जाता है। क्राइम मैनुअल, जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली को निर्धारित करता है और जांच के दौरान एजेंसी द्वारा किए जाने वाले अपेक्षित कार्यों के लिए प्रक्रिया का निर्धारण करता है।

नए अध्याय और लागू किए जाने वाले परिवर्तन

  1. मानक संचालन प्रक्रियाओं (Standard Operating Procedures) में परिवर्तन – राष्ट्रीय सीमाओं के पार तथा विशेष रूप से साइबर दुनिया के डिजिटल अपराधों की जांच करने के लिए।
  2. जांच की गति में तेजी: शाखा-प्रमुख के स्तर पर जाँच संबंधी मामलों को छह महीने के भीतर पूरा करना होगा। जबकि मंडल-प्रमुख के वरिष्ठ स्तर पर जाँच संबंधी मामलों को नौ महीने के भीतर पूरा करना होगा, इसके लिए पूर्व में लगभग एक वर्ष की समय-सीमा निर्धारित थी।
  3. विदेश में जांच और इंटरपोल के साथ समन्वय और संचालन के दौरान प्रक्रियाओं पर एक नया अध्याय जोड़ा गया है।
  4. डिजिटल दुनिया और साइबर अपराधों की जांच पर एक अध्याय शामिल किया गया है।
  5. डिजिटल साक्ष्यों को संभालने के लिए एक नई मानक संचालन प्रक्रिया को शामिल किया गया है।

नई नियमावली का महत्व और निहितार्थ:

  • नए नियमावली का उद्देश्य, बड़े और जटिल मामलों को संभालने के दौरान बेहतर परिणामों के लिए एजेंसी में टीम दृष्टिकोण पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हुए कोष्ठों को तोड़ना है।
  • संशोधित मैनुअल में नवीनतम कानूनों, सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों और उनकी व्याख्याओं को ध्यान में रखा गया है, जिससे जांच अधिकारी के लिए इन दिशा-निर्देशों को देखने और पालन करने में आसानी होगी।

‘केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो’ (CBI) के बारे में:

  1. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation- CBI) भारत की प्रमुख जांच एजेंसी है।
  2. यह, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन, सीबीआई निदेशक के नेतृत्व में कार्य करती है।
  3. केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो का उद्गम विशेष पुलिस स्थापना (SPE) से हुआ जिसकी स्थापना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1941 में की गई थी। तत्कालीन SPE का मुख्य कार्य दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत के युद्ध तथा आपूर्ति विभाग के साथ लेन-देनों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच-पड़ताल करना था ।
  4. वर्ष 1946 में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम को लागू किया गया । इस अधिनियम द्वारा SPE का अधीक्षण गृह विभाग को हस्तांतरित किया गया और भारत सरकार के सभी विभागों को इसके दायरे में लाया गया ।
  5. वर्ष 1963 में गृह मंत्रालय के प्रस्ताव के जरिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) को वर्तमान लोकप्रिय नाम केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) प्रदान किया गया।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. सीबीआई और इसकी स्थापना के बारे में।
  2. DSPE अधिनियम के प्रावधान।
  3. ‘आम सहमति’ क्या होती है?
  4. राज्यों द्वारा ‘आम सहमति’ वापस लेने की स्थिति में क्या होता है?

मेंस लिंक:

क्या आम सहमति वापस लेने तात्पर्य यह हो सकता है कि सीबीआई अब किसी मामले की जांच नहीं कर सकती? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


शाहीन- IX

(Shaheen-IX)

यह पाकिस्तान वायु सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी वायु सेना के मध्य प्रतिवर्ष होने वाला संयुक्त युद्धाभ्यास है। इसकी शुरुआत वर्ष 2011 में हुई थी।

‘जल शक्ति अभियान II: कैच द रेन’ जागरूकता अभियान

(Jal Shakti Abhiyan II: Catch the Rain‘ awareness campaign)

 

  • इस कार्यक्रम को वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए नेहरू युवा केंद्र संगठन (NYKS) के सहयोग से राष्ट्रीय जल मिशन द्वारा शुरू किया गया है।
  • इसकी टैग लाइन है– “बारिश के पानी का संरक्षण, जहां भी संभव हो, जैसे भी संभव हो”।

 देश में तेंदुओं की संख्या में 60 फीसदी की बढ़ोतरी

हाल ही में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा, भारत में तेंदुओं की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की गयी।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेंदुओं की संख्या 12,852 तक पहुंच गई है। जबकि इसके पहले 2014 में हुई गणना के अनुसार देश में 7,910 तेंदुए थे।
  • गणना के अनुसार मध्य प्रदेश में 3,421 तेंदुए, कर्नाटक में 1,783 तेंदुए और महाराष्ट्र में 1,690 तेंदुए, दूसरे राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा पाए गए हैं।

तेंदुआ (Leopard)

  • वैज्ञानिक नाम- पैन्थेरा पार्डस (Panthera pardus)
  • भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध
  • CITES के परिशिष्ट-I में सम्मिलित
  • IUCN रेड लिस्ट में असुरक्षित (Vulnerable) के रूप में सूचीबद्ध
  • विश्व में तेंदुए की नौ उप-प्रजातियां पाई जाती है, तथा ये अफ्रीका और एशिया में वितरित है।

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