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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 19 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. राज्य में ‘संवैधानिक विफलता’ का अध्ययन करने संबंधी आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक

2. उच्चतम न्यायालय द्वारा कोविड उपचार की बढ़ती लागत पर सरकार को फटकार

3. संसदीय समिति द्वारा प्रवासी श्रमिकों से संबधित आंकड़ा-कोष की मांग

 

सामान्य अध्ययन-III

1. सरकार द्वारा ‘बैड बैंक’ की स्थापना सहित अन्य विकल्पों की तलाश

2. भारत द्वारा वाहन-उत्सर्जन में कटौती हेतु के लिए E20 ईंधन पर विचार

3. इच्छानुरूप जीनोमिक परिवर्तन (IGA) और गालसेफ पिग्स

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. आईटी अनुबंध कर्मचारियों के शीर्ष 5 नियोक्ताओं में अमेरिका और इंग्लैंड

2. बोको हरम

3. धर्म का पालन करने का सभी को समान अधिकार

4. सोलरविंड्स हैक

5. वरिष्ठ पदों पर ‘अधिक संख्याओं में महिलाओं’ की नियुक्ति करने के लिए पेरिस शहर पर जुर्माना

6. भारत-इंडोनेशिया कॉरपैट

7. अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अवसंरचना गठबंधन (CDRI)

8. शनि और बृहस्पति का ‘क्रिसमस स्टार’ संयोजन

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: भारतीय संविधान- ऐतिहासिक आधार, विकास, विशेषताएँ, संशोधन, महत्त्वपूर्ण प्रावधान और बुनियादी संरचना।

राज्य में ‘संवैधानिक विफलता’ का अध्ययन करने संबंधी आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक


संदर्भ:

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमे उच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति शासन की घोषणा करने के लिए आवश्यक, जगन मोहन रेड्डी सरकार के तहत राज्य प्रशासन में ‘संवैधानिक विफलता’ होने की न्यायिक जांच शुरू करने का आदेश दिया था।

संबंधित विवाद

न्यायिक हिरासत में या जमानत पर रिहा किए गए व्यक्तियों के रिश्तेदारों द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं का फैसला करते हुए आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय ने 1 अक्टूबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के वकील को इस निर्णय लेने में सहायता के लिए बुलाया, कि क्या आंध्र प्रदेश राज्य में ऐसी स्थितियां उत्पन्न हो गयी हैं जिनके लिए अदालत, राज्य में ‘संवैधानिक विफलता’ होने अथवा न होने के बारे में निष्कर्ष को दर्ज कर सकती है?

उच्चतम न्यायालय का मत

  • किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन के लिए जाँच और सिफारिश करने का कार्य उच्च न्यायालय का नहीं है।
  • संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत किसी राज्य में संवैधानिक प्रणाली की विफलता से संबंधित प्रावधान किये गए है। यह शक्ति [राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए] विशेष रूप से कार्यकारी में निहित है।

राज्य सरकार द्वारा की गयी टिप्पणियाँ

  1. उच्च न्यायालय की यह विचार, संविधान की मूल संरचना सिद्धांत का उल्लंघन करता है।
  2. संवैधानिक न्यायालयों के पास राज्य में ‘संवैधानिक प्रणाली की विफलता’ निर्धारित करने के लिए न्यायिक रूप से जांच करने अथवा प्रबन्ध करने वाले मानदंड नहीं हैं।
  3. यह, कार्यपालिका की संविधान द्वारा प्रद्दत शक्तियों का गंभीर अतिक्रमण है और यह शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का उल्लंघन है।

भारतीय संदर्भ में राष्ट्रपति शासन

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, भारत के राष्ट्रपति को, यह समाधान होने पर कि राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें उस राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, राज्य सरकार को निलंबित करने और देश के किसी भी राज्य के राष्ट्रपति शासन लगाने की शक्ति प्रदान की गयी है।

  • राष्ट्रपति शासन लागू होने पर कोई मंत्रिपरिषद नहीं होती है। इस दौरान विधान सभा या तो स्थगित या भंग हो जाती है।
  • राज्य की सरकार केंद्र सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण में आ जाती है और राज्यपाल भारत के राष्ट्रपति का प्रतिनिधित्व करते हुए कार्यवाही जारी रखते हैं।
  • राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी की आवश्यकता होती है।
  • अनुमोदित होने के बाद किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन छह महीने की अवधि तक लागू रह सकता है। राष्ट्रपति शासन को अधिकतम तीन साल तक के लिए लगाया जा सकता है और इसके लिए प्रति छह महीने के बाद संसद के दोनों सदनों से अनुमोदन लेना आवश्यक होता है।

निरसन (Revocation)

राष्ट्रपति शासन को राष्ट्रपति द्वारा एक घोषणा के बाद किसी भी समय निरसित किया जा सकता है। इस तरह की उद्घोषणा को संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. राष्ट्रपति शासन क्या होता है?
  2. अनुच्छेद 356 किससे संबंधित है?
  3. राष्ट्रपति शासन कब और किस प्रकार लागू किया जाता है?
  4. राष्ट्रपति शासन का निरसन।
  5. भारतीय संविधान के तहत ‘शक्तियों का पृथक्करण सिद्धांत’

मैंस लिंक:

राष्ट्रपति शासन से संबंधित मुद्दों और इसकी सिफारिश करने में राज्य के राज्यपाल की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: विभिन्न घटकों के बीच शक्तियों का पृथक्करण, विवाद निवारण तंत्र तथा संस्थान।

उच्चतम न्यायालय द्वारा कोविड उपचार की बढ़ती लागत पर सरकार को फटकार


संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा प्रदान किये जाने वाले कोविड-19 उपचार संबंधी एक आदेश पारित किया है। अदालत द्वारा डॉक्टरों की थकान, नर्सों और चिकित्साकर्मियों के बिगड़ते स्वास्थ्य के मुद्दे पर ध्यान दिया गया।

सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता:

महामारी के दौरान चिकित्सा सुविधाएँ इतनी महंगी हो गई है कि आम लोग इसका खर्च उठा सकने में समर्थ नहीं हैं।

  • स्वास्थ्य का अधिकार (अनुच्छेद 21) में सस्ते उपचार का प्रावधान भी शामिल है। जो भी कारणों हो, उपचार सुविधाएँ महंगी से मंहगी होती जा रही हैं और ये आम लोगों की सामर्थ्य से बाहर हैं।
  • कोई व्यक्ति भले ही कोविड-19 से बच जाए, लेकिन कई बार वित्तीय और आर्थिक रूप से वह समाप्त हो जाता है।

सरकार के लिए उचित निर्णय

सरकार का कर्तव्य है कि वह कोविड-19 रोगियों के लिए सस्ती चिकित्सा सुनिश्चित करे। वायरस के खिलाफ ‘विश्व युद्ध’ की सफलता सरकार-सार्वजनिक भागीदारी पर निर्भर करती है।

इसके लिए:

  1. सरकार को कोविड-19 संक्रमण फैलने के संबंध में तथ्यों और आंकड़ों के बारे में पारदर्शी होना चाहिए। अन्यथा, लोगों को गुमराह किया जा सकता है, इससे लोगों में यह धारणा फैलेगी कि सब कुछ ठीक है और वे लापरवाह हो जाएंगे।
  2. सरकार के लिए अग्रिम पंक्ति के कार्मिकों को काम के बीच में आराम प्रदान करने के लिए एक तंत्र बनाने की आवश्यकता है।
  3. राज्यों को सप्ताहांत / रात में कर्फ्यू जारी करने पर विचार करना चाहिए।
  4. संक्रमण-श्रंखला तोड़ने के लिए, छोटे संक्रमित क्षेत्रों अथवा संक्रमण-मामलों की अधिक संख्या वाले क्षेत्रों को, पृथक कर सील कर दिया जाना चाहिए।
  5. ​​ऐसे क्षेत्रों में पूर्ण लॉकडाउन लागू कर देना चाहिए। आवश्यक सेवाओं को छोड़कर ऐसे संक्रमित क्षेत्रों को कुछ दिनों के लिए पूर्णतयः सील करने की आवश्यकता होती है।
  6. राज्य और स्थानीय अधिकारियों को अपने अस्पतालों में किफायती इलाज हेतु अधिक प्रावधान करना चाहिए या फिर आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए निजी अस्पतालों द्वारा के लिए ली जाने वाले शुल्क हेतु सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. स्वास्थ्य का अधिकार और अनुच्छेद 21
  2. आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधान
  3. आपदा प्रबंधन अधिनियम क्या है?
  4. इस अधिनियम के तहत स्थापित निकाय
  5. NDMA की संरचना
  6. आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्यों और केंद्र की शक्तियां
  7. ‘अधिसूचित आपदा’ क्या है?

मेंस लिंक:

मौलिक अधिकार के रूप में स्वास्थ्य के अधिकार को देश में किस प्रकार सुनिश्चित किया जा रहा है? चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: केन्द्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिये कल्याणकारी योजनाएँ और इन योजनाओं का कार्य-निष्पादन; इन अति संवेदनशील वर्गों की रक्षा एवं बेहतरी के लिये गठित तंत्र, विधि, संस्थान एवं निकाय।

संसदीय समिति द्वारा प्रवासी श्रमिकों से संबधित आंकड़ा-कोष की मांग


संदर्भ:

हाल ही में, गृह मामलों पर स्थायी समिति द्वारा ‘कोविड-19 महामारी और संबंधित मुद्दों का प्रबंधन’ नामक अपनी रिपोर्ट जारी की गयी है।

प्रमुख अनुशंसाएं:

  • प्रवासी श्रमिकों से संबंधित एक राष्ट्रीय डेटाबेस को यथाशीघ्र तैयार किया जाना चाहिए, ताकि कोविड-19 जैसी महामारी की पुनरावृत्ति होने की स्थिति में राहत उपायों का अपेक्षित लाभार्थीयों तक पहुँचाना सुनिश्चित किया जा सके।
  • इस डेटाबेस में प्रवासियों के मूल राज्य, गंतव्य राज्य, श्रमिकों का कौशल समूह और अन्य संपर्को का विवरण होना चाहिए।
  • महामारी के दौरान, दिशा-निर्देशों के लिए, आपदा प्रबंधन अधिनियम (Disaster Management Act), 2005, और महामारी रोग अधिनियम (Epidemic Diseases Act), 1897 – मात्र दो कानून अपर्याप्त हैं।
  • महामारी रोग अधिनियम, 1897 की समीक्षा की जानी चाहिए। यह अधिनियम काफी पुराना है, इसे वर्ष 1918 में फैले स्पेनिश फ्लू से भी पहले औपनिवेशिक काल में तैयार किया गया था।

आंकड़ा-कोष (Database) की आवश्यकता:

  • विस्तारित लॉकडाउन के दौरान, केंद्र सरकार के पास प्रवासी श्रमिकों से संबंधित कोई आंकड़े उपलब्ध डेटा नहीं होने के कारण, प्रवासी श्रमिकों की अवस्थिति पता करने और उनके लिए राहत उपायों का वितरण करने का कार्य मुश्किल हो गया था।
  • विस्तृत राष्ट्रीय डेटाबेस के अभाव में, सरकार द्वारा अपेक्षित लाभार्थियों तक राहत उपायों को पहुंचाना मुश्किल है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अध्यादेश क्या होता है? इसे कैसे और कब लागू किया जाता है?
  2. अध्यादेश में हिंसा की परिभाषा।
  3. महामारी रोग अधिनियम लागू किये जाने संबंधी पिछले उदाहरण।
  4. अधिसूचनीय बीमारी (notifiable disease)
  5. अधिनियम के तहत, कार्यान्वयन करने वाली संस्था, जुर्माना, लोगों की सुरक्षा और निरीक्षण।
  6. अंग्रेजों ने प्लेग महामारी का किस प्रकार मुकाबला किया और लोकमान्य तिलक द्वारा अपने लेखों के माध्यम से इसकी आलोचना?

मेंस लिंक:

महामारी रोग अधिनियम, 1897 के प्रमुख प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय।

सरकार द्वारा ‘बैड बैंक’ की स्थापना सहित अन्य विकल्पों की तलाश


संदर्भ:

आर्थिक मामलों के सचिव के अनुसार, देश में बैंकिंग क्षेत्र के स्वास्थ्य में सुधार करने हेतु सरकार ‘बैड बैंक’ (Bad Bank) की स्थापना सहित अन्य सभी विकल्पों की तलाश कर रही है।

आवश्यकता:

वर्तमान परिस्थितियों में, जब गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) में अत्यधिक वृद्धि होने की सम्भावना है और इनके अधिकाँश समाधान दिवाला एवं दिवालियापन संहिता’ (IBC) तंत्र से बाहर ही करने होंगे। ऐसे में सरकार का यह कदम न केवल आवश्यक है, बल्कि अपरिहार्य भी है।

बैड बैंक की अवधारणा:

  • बैड बैंक, दूसरे वित्तीय संस्थानों के खराब ऋण और अन्य अवैध परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए स्थापित किया जाने वाला बैंक होता है।
  • बड़ी मात्रा में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां रखने वाली संस्थाओं द्वारा इन परिसंपत्तियों को बाजार मूल्य पर बैड बैंक को बेंचा जाएगा।
  • इस तरह की परिसंपत्तियों को बैड बैंक में स्थानांतरित करने से, मूल संस्थाओं द्वारा अपनी बैलेंस शीट को सही किया जा सकता है – हालांकि इन्हें परिसंपत्तियों के अनुमानित मूल्य में कटौती करना होगा।

ख़राब ऋणों के बारे में चिंता का विषय:

  1. भारतीय बैंकों के ख़राब ऋणों का ढेर अर्थव्यवस्था पर एक बहुत बड़ा दबाव है।
  2. यह बैंकों के मुनाफे को हानि पहुंचाता है। क्योंकि मुनाफा खत्म हो जाने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSB), जिनमे ख़राब ऋणों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, विकास दर में वृद्धि हेतु पर्याप्त पूंजी नहीं जुटा पाते हैं।
  3. क्रेडिट वृद्धि का अभाव में, अर्थव्यवस्था के 8% विकास दर प्राप्त करने के मार्ग में बाधक बनता है। अतः, ख़राब ऋणों की समस्या का प्रभावी समाधान शीघ्र किए जाने की आवश्यकता है।

बैड बैंक से लाभ:

  1. इससे बैंकों या वित्तीय संस्थाओं को बैड लोन ट्रांसफर करके अपनी बैलेंस शीट सही करने में मदद मिलती है और ये मूल व्यवसायिक ऋण गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
  2. बड़े देनदारों के पास कई लेनदार होते हैं। चूंकि, इस उपाय से ऋण एक ही संस्था में केंद्रीकृत हो जाएंगे जिससे बैड बैंक समन्वय की समस्या को हल कर सकते हैं।
  3. विभिन्न बैंकों को अलग करके, बैड बैंक कर्जदारों के साथ तेजी से समझौता कर सकता है।
  4. यह ऋणकर्ताओं के साथ बेहतर सौदेबाजी कर सकता है और उनके खिलाफ अधिक कठोर प्रवर्तन कार्रवाई कर सकते हैं।
  5. केवल सरकार ओर देखने के बजाय बैड बैंक खुद ही संस्थागत निवेशकों से पैसा जुटा सकते हैं।

बैड बैंक से संबधित चिंताएं:

उदाहरण के लिए मान लीजिए, कोई बैंक अपने ख़राब ऋणों की बिक्री करता है। तब इसे कुछ केश कर्तन करना पड़ता है, क्योंकि जब 100 रुपये खराब होते हैं, तब वास्तविक राशि में 100 रुपये से कम होने का अनुमान होता है। ऐसी स्थिति में बैंक की लाभ और हानि (P&L) प्रभावित होती है।

इसलिए, जब तक कि इस विशेष पहलू का समाधान नहीं किया जाता है, तब तक एक नई संरचना का निर्माण, समस्या को हल करने में पूर्णतयः सक्षम नहीं होगा।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. ’परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी’ क्या है?
  2. ‘बैड बैंक’ क्या है?
  3. भारत में एक बैड बैंक की स्थापना कौन कर सकता है?
  4. ‘तनावग्रस्त परिसंपत्तियां’ कौन सी होती हैं?
  5. गैर निष्पादित परिसंपत्तियां क्या होती हैं?

मेंस लिंक:

बैड बैंकों की स्थापना के लाभ और हानियों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन।

भारत द्वारा वाहन-उत्सर्जन में कटौती हेतु के लिए E20 ईंधन पर विचार


संदर्भ:

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एक मसौदा अधिसूचना प्रकाशित की गयी है जिसमें E20 ईंधन को ऑटोमोबाइल ईंधन के रूप में अपनाने के विषय में सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किये गए हैं।

E20 ईंधन में गैसोलीन और 20 प्रतिशत इथेनॉल का सम्मिश्रण होता है।

वर्तमान स्थिति:

वतर्मान में, ऑटोमोबाइल ईंधन में 10 प्रतिशत इथेनॉल का सम्मिश्रण करने की अनुमति है। हालांकि, भारत में वर्ष 2019 तक मात्र 5.6 प्रतिशत तक इथेनॉल का सम्मिश्रण किया गया।

E20 ईंधन तथा इथेनॉल सम्मिश्रण के लाभ

  1. वाहन-उत्सर्जन को कम करना।
  2. कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन आदि का उत्सर्जन कम करना।
  3. तेल आयात व्यय को कम करना, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि होगी।

चुनौतियां:

मिलाए जाने वाले इथेनॉल की प्रतिशत मात्रा सहित वाहनों की अनुकूलता को वाहन निर्माताओं द्वारा परिभाषित करना होगा।

‘इथेनॉल’ क्या होता है?

इथेनॉल एक जैव ईधन है और मकई, गन्ना, जूट, आलू जैसे कृषि उत्पादों के जैवभार से निर्मित उप-उत्पाद (by-product) होता है।

सरकार द्वारा इस सबंध में किये जा रहे प्रयास

  1. ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति’ (National Biofuel Coordination Committee- NBCC) द्वारा भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास उपलब्ध अधिशेष चावल को अल्कोहल-युक्त हैंड-सैनिटाइज़र के निर्माण में उपयोग करने और पेट्रोल में मिलाने हेतु इथेनॉल में परिवर्तित करने की अनुमति दी गई है।
  2. भारत सरकार द्वारा जीवाश्म ईंधन दहन के कारण होने वाली पर्यावरण संबंधी चिंताओं को दूर करने, किसानों को अतिरिक्त पारिश्रमिक प्रदान करने, कच्चे तेल के आयात को सब्सिडी देने और विदेशी मुद्रा की बचत करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल के सम्मिश्रण हेतु वर्ष 2003 में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  3. राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 के तहत ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति’ (NBCC) के अनुमोदन के पश्चात अधिशेष खाद्यान्नों को इथेनॉल में परिवर्तित करने की अनुमति दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. इथेनॉल क्या है? इसका उत्पादन किस प्रकार किया जाता है?
  2. इथेनॉल और सीरे के बीच अंतर?
  3. इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम क्या है?
  4. इथेनॉल सम्मिश्रण के लाभ?

मैंस लिंक:

इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम, 2003 पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्रोत: द हिंदू

 

इच्छानुरूप जीनोमिक परिवर्तन (IGA) और गालसेफ पिग्स


(Intentional genomic alteration (IGA) and GalSafe pigs)

संदर्भ:

हाल ही में, अमेरिका के खाद्य और औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration- FDA) द्वारा गालसेफ पिग्स (GalSafe pigs) कहे जाने वाले पालतू सूअरों में अपनी तरह के पहले इच्छानुरूप जीनोमिक परिवर्तन (Intentional genomic alterationIGA) करने की अनुमति दी गयी है।

  • इन सूअरों का उपयोग खाद्य पदार्थो के रूप में और मानव चिकित्सा के लिए किया जा सकता है।
  • नियामक द्वारा, पहली बार खाद्य और जैव चिकित्सा दोनों उद्देश्यों के लिए किसी पशु जैव-प्रौद्योगिकी उत्पाद को मंजूरी दी गयी है।

इच्छानुरूप जीनोमिक परिवर्तन (IGA) क्या है?

  • किसी जीव में इच्छानुरूप जीनोमिक परिवर्तन (Intentional genomic alteration IGA) किये जाने का अर्थ ‘जीनोम एडिटिंग’ या आनुवंशिक इंजीनियरिंग (Genetic Engineering) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके जीव के जीनोम (Genome) में विशिष्ट परिवर्तन करना है।
  • किसी जीव के डीएनए अनुक्रम में इस तरह के परिवर्तनों का उद्देश्य, अनुसंधान करना, मानव उपभोग के लिए स्वस्थ मांस का उत्पादन करना और अन्य कारणों के अलावा जीव में रोग प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन करना हो सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


आईटी अनुबंध कर्मचारियों के शीर्ष 5 नियोक्ताओं में अमेरिका और इंग्लैंड

  • हाल ही में, ‘ग्लोबल डिमांड फॉर इंडियन आईटी कॉन्ट्रैक्टर्स’ नामक एक सर्वेक्षण के निष्कर्ष जारी किए गए हैं।
  • यह सर्वेक्षण, ‘टेकफाइंडर’ (Techfynder) नामक एक कांट्रेक्टर नियोक्ता प्लेटफार्म द्वारा किया गया था।
  • सर्वेक्षण के निष्कर्ष जनवरी और दिसंबर के मध्य 52,000 कॉन्ट्रैक्टर्स की प्रतिक्रियाओं पर आधारित हैं।

प्रमुख निष्कर्ष:

  • यू.के., आयरलैंड, नीदरलैंड, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका अत्यधिक कुशल भारतीय श्रमिकों को आकर्षित करने और काम देने वाले शीर्ष देशों में से हैं।
  • महामारी के कारण, कई व्यवसाय अपने उत्पाद और सेवायें ऑनलाइन उपलब्ध कराने लगे हैं, जिससे सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, जावा डेवलपर्स, साइबर सुरक्षा इंजीनियरों, डेटा वैज्ञानिकों, वेब डेवलपर्स और UI/UX डिजाइनरों की मांग में वृद्धि हुई है।

बोको हरम

(Boko Haram)

बोको हरम, एक हिंसक इस्लामी चरमपंथी समूह है जोकि पूर्वोत्तर नाइजीरिया से लेकर पड़ोसी पश्चिम अफ्रीकी देशों नाइजर, चाड और कैमरून के चाड बेसिन तक विस्तारित है।

चर्चा का कारण:

हाल ही में, अगवा किए गए 344 नाइजीरियाई युवाओं को बोको हरम ने मुक्त कर दिया है।

धर्म का पालन करने का सभी को समान अधिकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश के तहत अभियुक्त व्यक्ति को संरक्षण प्रदान किया गया है।

संबंधित मूल अधिकार:

  • संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बुनियादी मूल अधिकार के रूप में निजता का अधिकार।
  • अनुच्छेद 25 के अनुसार, सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान के भाग- तीन के अन्य प्रावधानों के अधीन सभी व्यक्तियों को धर्म के स्वतंत्र रूप से प्रचार, अभ्यास और प्रचार करने का समान अधिकार है।

सोलरविंड्स हैक

(SolarWinds hack)

  • यह, हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका में खोजा गया एक साइबर हमला है।
  • यह अमेरिकी सरकार, इसकी एजेंसियों और कई अन्य निजी कंपनियों के खिलाफ सबसे बड़े साइबर हमले के रूप में उभरा है।

वरिष्ठ पदों पर ‘अधिक संख्याओं में महिलाओं’ की नियुक्ति करने के लिए पेरिस शहर पर जुर्माना

पेरिस शहर के अधिकारियों को वर्ष 2018 में शीर्ष स्तर के पदों पर अधिक संख्याओं में महिलाओं’ की नियुक्ति करने और रोजगार में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने संबंधी राष्ट्रीय नियम का उल्लंघन करने के लिए € 90,000 (80 लाख रुपये से अधिक) का जुर्माना लगाया गया है।

पेरिस के मेयर ऐनी हिडाल्गो (Anne Hidalgo) – जिन्होंने शहर की सरकार में अधिक महिलाओं को लाने का अभियान चलाया था- ने सिटी कोंसिल में जुर्माने को ‘अनुचित’, ‘गैर-जिम्मेदार’ और ‘बेतुका’ बताया है।

संबंधित प्रकरण

वर्ष 2018 में, 11 महिलाओं और पांच पुरुषों को पेरिस के सिटी हॉल में शीर्ष पदों पर नियुक्त किया गया था। चूंकि इन नियुक्तियों में 69 प्रतिशत महिलायें थीं, जोकि वर्ष 2013 में लागू किये गए सॉवडेट कानून (Sauvadet law) का तकनीकी रूप से उल्लंघन था। इस क़ानून के तहत प्रत्येक लिंग के न्यूनतम 40 प्रतिशत व्यक्तियों को नियुक्त करना अनिवार्य है।

भारत-इंडोनेशिया कॉरपैट

(IND-INDO ​​CORPAT)

  • हाल ही में, भारत-इंडोनेशिया समन्वित गश्त (IND-INDO ​​CORPAT) के 35 वें संस्करण का आयोजन किया गया।
  • इंड-इंडो कॉरपैट का आयोजन प्रतिवर्ष भारत और इंडोनेशिया की नौसेनाओं के बीच किया जाता है।
  • इसका उद्देश्य क्षेत्र में शिपिंग और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अवसंरचना गठबंधन (CDRI)

(Coalition for Disaster Resilient Infrastructure)

  • CDRI की शुरुआत भारतीय प्रधान मंत्री द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन 2019 में की गई थी।
  • यह एक स्वैच्छिक अंतर्राष्ट्रीय समूह है।
  • इसका उद्देश्य सरकारों, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, बैंकों, निजी क्षेत्र के समूहों और शिक्षाविदों के साथ मिलकर जलवायु और आपदा जोखिमों के लिए अवसंरचना प्रणालियों में लचीलापन विकसित करना है।
  • इसके तहत सदस्य देशों के लिए उनकी जोखिम संदर्भ और आर्थिक जरूरतों के मुताबिक बुनियादी ढांचे के विकास के संबंध में उनकी क्षमताओं और प्रणालियों को उन्नत करने हेतु सहायता करने के लिए एक तंत्र का निर्माण किया जायेगा।

शनि और बृहस्पति का ‘क्रिसमस स्टार’ संयोजन

Christmas Star’ conjunction of Saturn and Jupiter

लगभग 400 वर्षों के बाद, शनि और बृहस्पति हमारे सौर मंडल के दो सबसे बड़े ग्रह सबसे नजदीक स्थिति में एक सीधी रेखा में आ जाएंगे। इस दौरान आकाश में एक अद्भुत खगोलीय घटना घटित होगी। जिसे शनि और बृहस्पति का ‘क्रिसमस स्टार’ संयोजन या युति (Conjunction) कहा जाता है और इसे लोकप्रिय रूप से “क्रिसमस स्टार” के रूप में जाता है।

असाधारण संयोजन’ क्या है?

  • हालांकि, शनि और बृहस्पति के लिए यह ‘युति’ अद्वितीय नहीं है, फिर भी जब कभी पृथ्वी से दिखाई देने वाली, आकाश में ग्रहों अथवा क्षुद्रग्रहों के एक साथ बहुत करीब होने की घटना को ‘असाधारण संयोजन’ (Great Conjunction) कहा जाता है।
  • खगोलविदों द्वारा ग्रहों के आकार के कारण बृहस्पति और शनि के संयोजन के लिए “असाधारण” शब्द का उपयोग किया जाता है।

‘असाधारण संयोजन’ की घटना लगभग 20 वर्षों में एक बार होती है क्योंकि ये ग्रह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करने में इतना समय लगाते है।


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