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INSIGHTS करेंट अफेयर्स+ पीआईबी नोट्स [ DAILY CURRENT AFFAIRS + PIB Summary in HINDI ] 18 December

 

विषय – सूची

 सामान्य अध्ययन-II

1. आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों संबंधी विवाद

2. राज्यों द्वारा केंद्रीय कानूनों को लागू करने से इनकार करने की शक्ति

3. ममता मुखर्जी द्वारा तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्र की सेवा में भेजने से इंकार

4. मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020

 

सामान्य अध्ययन-III

1. कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम में संशोधन

2. भू-तुल्‍यकालिक अंतरण कक्षा (GTO)

3. बिटकॉइन में निवेश

 

प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य

1. हल्दीबाड़ी-चिल्हाटी रेल लिंक:

2. योगासन को एक ‘खेल’ के रूप में औपचारिक मान्यता

3. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC)

4. एशिया-प्रशांत प्रसारण संघ (ABU)

 


सामान्य अध्ययन- II


 

विषय: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय।

आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों संबंधी विवाद


संदर्भ:

हाल ही में, तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी को प्रदेश की तीनों राजधानियों के विचार पर जनमत संग्रह कराने की चुनौती दी है।

तीन राजधानियाँ:

31 जुलाई को राज्य सरकार द्वारा आंध्र प्रदेश विकेंद्रीकरण एवं सभी क्षेत्रों का समावेशी विकास अधिनियम, 2020 तथा आंध्र प्रदेश राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (निरसन) अधिनियम, 2020 को अधिसूचित किए गए थे।

यह अधिनियम आंध्रप्रदेश राज्य के लिए तीन राजधानियों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

  1. अमरावती- विधायी राजधानी।
  2. विशाखापत्तनम- कार्यकारी राजधानी।
  3. कुर्नूल – न्यायिक राजधानी।

तीन राजधानियों की आवश्यकता:

  • राज्य सरकार का कहना है कि वह राज्य के अन्य हिस्सों की उपेक्षा करते हुए एक विशाल राजधानी शहर बनाने के विरुद्ध है। प्रदेश की तीन राजधानियाँ होने से राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का समान रूप से विकास सुनिश्चित होगा।
  • आंध्र प्रदेश की राजधानी के लिए उपयुक्त स्थान का सुझाव देने के लिए गठित सभी प्रमुख समितियों की सिफारिशों में ‘विकेंद्रीकरण’ केंद्रीय विषय रहा है। इन समितियों में जस्टिस बी एन श्रीकृष्ण समिति, के शिवरामकृष्णन समिति, तथा जी एन राव समिति आदि सम्मिलित हैं।

इस विचार को लागू करने में समस्या

  • समन्वय और क्रियान्वयन संबधी आशंका: अलग-अलग शहरों में स्थित विधायिका तथा कार्यपालिका का मध्य समन्वय स्थापित करना, कहने के लिए आसान परन्तु करने के लिए काफी मुश्किल साबित होगा, तथा, इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा इस संदर्भ में किसी योजना का विवरण नहीं दिया गया है, इससे अधिकारी तथा आम नागरिक सभी, इसके कार्यान्वयन को लेकर आशंकित हैं।
  • परिवहन लागत और समय: कार्यकारी राजधानी विशाखापत्तनम, न्यायिक राजधानी कुर्नूल से 700 किमी तथा विधायी राजधानी अमरावती से 400 किमी की दूरी पर स्थित है। अमरावती तथा कुर्नूल के मध्य 370 किमी की दूरी है। तीन राजधानियां होने से यात्रा में लगने वाला समय तथा लागत काफी महंगी साबित होगी।

एक से अधिक राजधानी वाले भारतीय राज्य

  1. महाराष्ट्र: की दो राजधानियाँ हैं- मुंबई तथा नागपुर (राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र)।
  2. हिमाचल प्रदेश: की शिमला और धर्मशाला (शीतकालीन) दो राजधानियाँ हैं।
  3. पूर्व राज्य जम्मू और कश्मीर की श्रीनगर तथा जम्मू (शीतकालीन) दो राजधानियाँ थी।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. जनहित याचिका याचिका क्या है?
  2. किन भारतीय राज्यों में एक से अधिक राजधानियाँ हैं?
  3. आंध्र प्रदेश की प्रस्तावित राजधानियाँ
  4. भारतीय संविधान के तहत विभिन्न याचिकाएं

मेंस लिंक:

राज्य में कई राजधानियों की उपयुक्तता पर चर्चा कीजिए। यह किस प्रकार राज्य के शासन को प्रभावित कर सकती है? उपयुक्त उदाहरण सहित बताइए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय।

राज्यों द्वारा केंद्रीय कानूनों को लागू करने से इनकार करने की शक्ति


संदर्भ:

हाल ही में, दिल्ली विधानसभा द्वारा कृषि कानूनों को खारिज करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया है।

इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि जब तक विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन अहिंसक रहता है, उन्हें अपने ‘पूर्णतया उचित’ विरोध को जारी रखने का संवैधानिक अधिकार है

विवाद का कारण

केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून, राज्यों के संबंधित विषयों पर कानून बनाने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन हैं।

  • केंद्र सरकार के तीनों कृषि अधिनियमों का मुख्य विषय कृषि और बाजार हैं। संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार ‘कृषि और बाजार’ वास्तव में राज्य सूची के विषय हैं।
  • हालाँकि, केंद्र सरकार ने खाद्य पदार्थों पर क़ानून बनाने के अपने अधिकार को गलत तरीके से कृषि संबधित विषयों पर क़ानून बनाने का अधिकार मानते हुए तीनों कृषि अधिनियमों को पारित कर दिया है। खाद्य पदार्थ संविधान में समवर्ती सूची का विषय है।
  • खाद्य पदार्थ और कृषि उत्पाद अलग-अलग श्रेणियों में आते हैं क्योंकि कई कृषि उत्पाद अपने मूल स्वरूप में खाद्य पदार्थ नहीं होते हैं, तथा कई खाद्य पदार्थ अपने मूल स्वरूप में कृषि उत्पाद नहीं होते हैं।

इस संदर्भ में संवैधानिक प्रावधान

संविधान के तहत ‘कृषि’ राज्य सूची का विषय है।

परंतु, समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 के तहत, केंद्र और राज्य, दोनों को, कृषि सहित किसी भी उद्योग से संबंधित उत्पादों के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण को नियंत्रित करने की शक्तियां प्रदान की गयी हैं।

  • आमतौर पर, जब कोई राज्य, समवर्ती सूची के किसी विषय पर बने केंद्रीय कानून में संशोधन करना चाहता है, तो उसे केंद्र से स्वीकृति लेने की आवश्यकता होती है।
  • जब केंद्र तथा राज्य द्वारा एक ही विषय पर क़ानून बनाया जाता है, तो संसद द्वारा पारित कानून प्रभावी होता है।

संविधान में इस प्रकार के प्रावधान का कारण

इस व्यवस्था की परिकल्पना का कारण है, कि संसद द्वारा बनाये गए अधिकांश कानून पूरे भारत में लागू होते हैं और राज्य द्वारा स्वैच्छिक तरीके से केंद्रीय कानूनों में संशोधन करने से देश के विभिन्न भागों में क़ानून लागू किये जाने में असंगतता हो सकती है।

व्यापार और वाणिज्य के संदर्भ में, इस प्रकार के मामले विशेष रूप से गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते है।

राज्यों के पास उपलब्ध अन्य विकल्प

इन कानूनों की वैधता को लेकर राज्य, केंद्र के खिलाफ उच्चत्तम न्यायालय में मामले को ले जा सकते हैं।

  • संविधान का अनुच्छेद 131 में सर्वोच्च न्यायालय को राज्यों और केंद्र के बीच होने वाले विवादों का निपटान करने संबंधी अनन्य अधिकार क्षेत्र प्रदान किया गया है।
  • संविधान का अनुच्छेद 254 (2) में राज्य सरकारों को समवर्ती सूची के विषयों पर केंद्र द्वारा बनाए गए कानूनों को निष्प्रभावी करने हेतु अधिनियम पारित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।
  • अनुच्छेद 254 (2) के तहत राज्य द्वारा पारित कानून को लागू होने के लिए भारत के राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक होती है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अनुच्छेद 131 और अनुच्छेद 254 (2) के बारे में
  2. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची का अवलोकन
  3. राज्य के कानून द्वारा केंद्र के कानून का उल्लंघन करने पर क्या होता है?

मेंस लिंक:

केंद्र द्वारा हाल ही में पारित तीनों कृषि कानून, राज्यों के संबंधित विषयों पर कानून बनाने के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन हैं। चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: लोकतंत्र में सिविल सेवाओं की भूमिका।

ममता मुखर्जी द्वारा तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्र की सेवा में भेजने से इंकार


संदर्भ:

हाल ही में, केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति हेतु तीन सेवारत आईपीएस अधिकारियों को कार्य-मुक्त करने की मांग की है। मगर, राज्य सरकार ने केंद्र के इस कदम के खिलाफ अपना कड़ा प्रतिरोध व्यक्त किया है।

राज्य सरकार ने केंद्र के इस आदेश को ‘शक्तियों का संभाव्य प्रयोग और आईपीएस कैडर नियम, 1954 के आपातकालीन प्रावधानों का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग’ बताया है।

पृष्ठभूमि:

राज्य सरकार की आपत्तियों के बावजूद, केंद्र सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बुलाया है। ये तीनो अधिकारी, 10 दिसंबर को भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा के काफिले पर हमला होने के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए तैनात थे।

इस संदर्भ में नियम:

  • प्रमुख नागरिक सेवाओं- आईएएस, आईपीएस और भारतीय वन सेवा- के लिए केंद्र द्वारा अधिकारियों के एक समूह से राज्य कैडर के अधिकारियों का आवंटन किया जाता है।
  • समय-समय पर, एक निश्चित संख्या में अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाता है।
  • आईपीएस कैडर के लिए गृह मंत्रालय, आईएएस कैडर के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग और भारतीय वन सेवा (IFS) कैडर के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नियंत्रण प्राधिकरण होते हैं।

कार्रवाई करने की शक्ति

अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन और अपील) नियम, 1969 के नियम 7 के अनुसार राज्य सरकार के अधीन तैनात सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ केंद्र कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।

  • अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) के किसी अधिकारी पर कार्रवाई करने के लिए राज्य और केंद्र दोनों की सहमति आवश्यक होती है।
  • भारतीय पुलिस सेवा (संवर्ग) नियम, 1954 के नियम 6 (1) में प्रतिनियुक्ति के बारे में कहा गया है, कि: ‘असहमति की स्थिति, केंद्र सरकार द्वारा निर्णय लिया जाएगा और केंद्र सरकार के निर्णय को संबंधित राज्य सरकार या राज्य सरकारों द्वारा लागू किया जाएगा।

निहितार्थ:

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के लिए गृह मंत्रालय की प्रतिनियुक्ति नीति के तहत, यदि प्रस्ताव पर किसी अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए चुना जाता है और वह स्वयं या राज्य सरकार के हवाले से रिपोर्ट नहीं करता है, तो उस अधिकारी को पांच साल तक भारत सरकार के अधीन किसी पद पर नियुक्ति करने के संबंध में विचार नहीं किया जाएगा।

  • जो अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए पहले से ही प्रतिबंधित किये जा चुके है, प्रतिबंध-अवधि के पूरे होने से पहले उन्हें प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्ताव नहीं किए जाने चाहिए।
  • जो अधिकारी अपने राज्य में काम करना पसंद करते हैं, उनके लिए केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रतिबंधित होना, ज्यादा परेशान नहीं करता है।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित नियम
  2. IAS, IPS और IFS के संवर्गों के प्रबंधन की जिम्मेदारी
  3. सिविल सेवा बोर्ड
  4. राज्य सरकार के अधीन तैनात सिविल सेवा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की शक्तियां किसके पास हैं?
  5. भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के लिए गृह मंत्रालय की प्रतिनियुक्ति नीति क्या है?

मेंस लिंक:

आईपीएस कैडर नियम, 1954 के आपातकालीन प्रावधानों पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय।

मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020


(Human Freedom Index)

संदर्भ:

हाल ही में, ‘मानव स्वतंत्रता सूचकांक’ (Human Freedom Index) 2020, नागरिक, आर्थिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संबंधी वैश्विक रैंकिंग को जारी किया गया है।

  • इस सूचकांक को अमेरिकी थिंक टैंक कैटो इंस्टीट्यूट (Cato Institute) और कनाडा के फ्रेजर इंस्टीट्यूट (Fraser Institute) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किया गया है।
  • सूचकांक में, 2008 से 2018 तक की अवधि के लिए 162 देशों की व्यक्तिगत, नागरिक और आर्थिक स्वतंत्रता संबंधी 76 संकेतकों के आधार पर रैंकिंग की गयी है।

भारत का प्रदर्शन:

  • सूचकांक में, 162 देशों की सूची में भारत को 111 वां स्थान पर रखा गया है।
  • वर्ष 2019 के सूचकांक में भारत 94 वें स्थान पर था।
  • मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में भारत, अपने पड़ोसी देशों चीन और बांग्लादेश से आगे है, जो सूची में क्रमशः 129 और 139 वें स्थान पर है।
  • भारत को ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ संकेतक में 10 में से 30 और आर्थिक स्वतंत्रता में 6.56 अंक प्राप्त हुए हैं।
  • भारत का समग्र मानव स्वतंत्रता स्कोर 43 है।
  • कई वैश्विक स्वतंत्रता सूचकांकों में भारत की स्थिति में गिरावट हुई है।

वैश्विक प्रदर्शन:

  • मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड और हांगकांग क्रमशः पहले तीन स्थानों पर हैं।
  • हालांकि, वर्ष 2019-2020 के दौरान चीन के ‘आक्रामक हस्तक्षेप’ के कारण हांगकांग की रैंकिंग में गिरावट होने की उम्मीद है।
  • सूचकांक में, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम संयुक्त रूप से 17 वें स्थान पर हैं।
  • युद्ध से ध्वस्त सीरिया को सूची में अंतिम स्थान मिला है।
  • वर्ष 2008 के बाद से विश्व में व्यक्तिगत स्वतंत्रता में उल्लेखनीय गिरावट देखी गयी है।
  • इसी अवधि में ‘समग्र स्वतंत्रता’ में भी गिरावट आई है, हालांकि इसमें में कुछ हद तक कमी देखी गयी है।
  • रिपोर्ट से स्वतंत्रता और समृद्धि के बीच एक सशक्त, सकारात्मक संबंध का पता चलता है, लेकिन, साथ ही रिपोर्ट, विश्व में स्वतंत्रता के असमान वितरण के बारे में भी बताती है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2008 के बाद से सर्वाधिक स्वतंत्रता और सबसे कम स्वतंत्रता वाले देशों के बीच के अंतर में भी वृद्धि हुई है।

विभिन्न सूचकांकों में भारत का प्रदर्शन:

कई वैश्विक स्वतंत्रता सूचकांकों में भारत के प्रदर्शन ख़राब रहा है।

  1. अक्टूबर में जारी डेमोक्रेसी वाचडॉग फ्रीडम हाउस (Democracy watchdog Freedom House) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट की स्वतंत्रता में लगातार तीसरे वर्ष (2019-20) भी कमी आयी है।
  2. सितंबर में जारी वैश्विक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में, भारत 26 स्थान नीचे गिर कर 105 वें स्थान से 79 वें स्थान पर पहुँच गया।
  3. अप्रैल में जारी वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स ने भारत को दो स्थान नीचे खिसक गया। 180 देशों की सूची में भारत को 142 वां स्थान प्राप्त हुआ।

प्रीलिम्स लिंक:

निम्नलिखित सूचकांकों और इनमे भारत का प्रदर्शन का अवलोकन:

  1. मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020
  2. वैश्विक आर्थिक स्वतंत्रता सूचकांक 2020
  3. द वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स
  4. मानव विकास सूचकांक

मेंस लिंक:

नवीनतम मानव स्वतंत्रता सूचकांक 2020 में भारत के प्रदर्शन का विश्लेषण कीजिए।

https://epaper.thehindu.com/Home/MShareArticle?OrgId=G6T8318IP.1&imageview=0.

स्रोत: द हिंदू

 


सामान्य अध्ययन- III


 

विषय: भारत में भूमि सुधार।

कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम में संशोधन


संदर्भ:

कर्नाटक सरकार द्वारा कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम 1961 में किए गए संशोधन को विपक्ष ने किसानों के लिए “मौत का वारंट” बताया है।

नवीनतम संशोधन:

कर्नाटक सरकार द्वारा पारित कर्नाटक भूमि सुधार (संशोधन) विधेयक, 2020 के द्वारा कृषि-भूमि के स्वामित्व पर कुछ प्रतिबंध लगाने वाले कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम 1961 की तीन प्रमुख धाराओं को निरस्त करने का प्रस्ताव किया गया है।

  1. नए संसोधन में कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम 1961 की धारा 79A को निरस्त करने का प्रस्ताव है, इस अनुच्छेद के तहत 25 लाख रुपये सालाना से अधिक आय वाले व्यक्तियों को कृषि भूमि खरीदने से प्रतिबंधित किया गया था।
  2. अधिनियम की धारा 79B के अनुसार, केवल कृषि के माध्यम से जीविकोपार्जन करने वाले लोग ही कृषि भूमि खरीद सकते हैं। इसे भी संसोधन विधेयक में रद्द किया जाएगा।
  3. नए संसोधन में अधिनियम की धारा 79C को भी निरस्त करने का प्रस्ताव है, इसके तहत राजस्व विभागों को भूमि खरीद के दौरान धारा 79B  और धारा 79A के कथित उल्लंघन की जांच करने की अनुमति दी गयी थी।

संशोधन के पीछे तर्क:

  1. कर्नाटक भूमि सुधार अधिनियम 1961 के निरस्त किये जाने वाले प्रावधान, भूमि बेचने के इच्छुक किसानो को लाभान्वित करने के बजाय भूमि पंजीकरण और तहसीलदार के कार्यालयों में भ्रष्टाचार में बढ़ावा देते हैं।
  2. संशोधनों के बावजूद सिंचित कृषि भूमि और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति समुदायों के स्वामित्व वाली भूमि, कृषि-भूमि के रूप में संरक्षित रहेगी।

संशोधनों का विरोध

अब चिंता इस बात की है कि इन संशोधनों से खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने वाली कृषि योग्य भूमि को नुकसान होगा और इनका उद्देश्य बेंगलुरु में रियल एस्टेट माफिया को लाभ पहुंचाना है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

भू-तुल्‍यकालिक अंतरण कक्षा (GTO)


(Geosynchronous Transfer Orbit)

संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने PSLV-C50 के द्वारा भारत के 42 वें संचार उपग्रह, CMS-01 को भू-तुल्‍यकालिक अंतरण कक्षा (Geosynchronous Transfer Orbit- GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है।

PSLV-C50 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया गया था। यह PSLV का 52 वां मिशन था।

CMS-01 के बारे में:

  • CMS-01 भारत का 42 वां संचार उपग्रह है। यह उपग्रह फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम के एक्सटेंडेड-सी बैंड में सेवाएं प्रदान करता है। एक्सटेंडेड-सी बैंड कवरेज में भारतीय मुख्य भूमि, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।
  • यह उपग्रह से सात वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं प्रदान करेगा।

विभिन्न कक्षाएँ:

  • भू-तुल्‍यकालिक कक्षा (Geosynchonous OrbitGEO) में उपग्रह, पृथ्वी के उपर लगभग एक ही स्थान पर स्थिर रहते हुए प्रतिदिन एक बार पृथ्वी के चारों और परिभ्रमण करता है
  • पृथ्वी के चारों ओर प्रति दिन एक बार की दर से एक उपग्रह लेता है, इसे जमीन पर लगभग उसी क्षेत्र में रखता है।
  • भू-स्थिर कक्षा (Geostationary Orbit-GEO) भी एक भू-तुल्‍यकालिक कक्षा होती है, किंतु इसमें कक्षा की आनति (inclination) कोण ‘शून्य’ होता है, अर्थात भू-स्थिर कक्षा, भूमध्य रेखा के ऊपर स्थित होती है।

सभी भू-स्थिर उपग्रह, भू-तुल्‍यकालिक होते हैं, किंतु सभी भू-तुल्‍यकालिक उपग्रह भू-स्थिर नहीं होते हैं।

अंतरण कक्षा (transfer orbit)

  • भू-तुल्‍यकालिक और भू-स्थिर कक्षाओं में स्थापित करने हेतु पेलोड ले जाने वाले रॉकेट्स, पेलोड (payload) को, उपग्रह की अंतिम स्थिति से पहले, अंतरण कक्षा (transfer orbit) में छोड़ देते हैं।
  • अंतरण कक्षा से, उपग्रह एक इंजन के द्वारा अपने कक्षा में परिक्रमण करता है और अपने आनति कोण में परिवर्तन करते हुए अंतिम स्थिति में पहुँचता है।

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प्रीलिम्स लिंक:

  1. भू-स्थैतिक कक्षा क्या है?
  2. भू-तुल्‍यकालिक कक्षा क्या है?
  3. ध्रुवीय कक्षा क्या है?
  4. अंतरण कक्षा क्या है?
  5. पीएसएलवी के बारे में

मेंस लिंक:

‘संचार उपग्रह’ क्या होते हैं? भारत के लिए इनके महत्व पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: द हिंदू

 

विषय: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता।

बिटकॉइन में निवेश


संदर्भ:

हाल ही में, बिटकॉइन (Bitcoin), एक क्रिप्टोकरेंसी की कीमत पहली बार 20,000 डॉलर को पार कर गई है।

‘बिटकॉइन’ क्या है?

बिटकॉइन (Bitcoin), एक तरह की क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) होती है। अंग्रेजी शब्द ‘क्रिप्टो’ का अर्थ गुप्त होता है। यह एक प्रक्रार की डिजिटल करेंसी है, जो क्रिप्टोग्राफी के नियमों के आधार पर संचालित और बनाई जाती है। क्रिप्टोग्राफी का अर्थ को कोडिंग की भाषा को सुलझाने की कला है।

यह एक इलेक्ट्रॉनिक कैश सिस्टम होता है, जिसमे ‘किसी वित्तीय संस्था के बगैर एक पार्टी द्वारा दूसरी पार्टी को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है ।

बिटकॉइन किस प्रकार कार्य करते हैं?

वर्ष 2008 के वित्तीय संकट के बाद सतोषी नाकामोटो (Satoshi Nakamoto) नाम के एक व्यक्ति अथवा समूह के द्वारा एक एकाउंटिंग सिस्टम की अवधारणा विकसित की गयी थी।

  • किसी उपयोगकर्ता के दृष्टिकोण से बिटकॉइन ‘एक मोबाइल ऐप या कंप्यूटर प्रोग्राम से ज्यादा कुछ नहीं होता है, जिसमे उपयोगकर्ता को एक निजी बिटकॉइन वॉलेट प्रदान किया जाता है और इसके माध्यम से उसे बिटकॉइन भेजने और प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध होती है।
  • बिटकॉइनस को आम तौर पर बिटकॉइन पते से पहचाना जाता है, जिसकी शुरुआत ‘1’ या ‘3’ से शुरू होने वाले अक्षरांकीय वर्णों से होती है।
  • यह पता गुप्त होता है और बिटकॉइन के गंतव्य या उसकी मात्रा को दर्शाता है।

बिटकॉइन का लेन-देन

  • नाकामोतो ने एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध, खुले बहीखाते की परिकल्पना की, जिसमे अब तक होने वाले सभी लेन-देनों का विवरण रखा जाता है, यद्यपि यह विवरण अनाम और कूटबद्ध (encrypted) होता है। इस बहीखाते को ब्लॉकचेन (Blockchain) कहा जाता है।
  • चूंकि यह बहीखाते सार्वजनिक और खुला होता है, इस कारण इस मुद्रा प्रणाली के उपयोगकर्ताओं का मानना है कि यह सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार और अक्षमताओं को दूर करने सहायक हो सकता है।

बिटकॉइन की कीमतों में वृद्धि के कारण

बिटकॉइन की कीमतों में वृद्धि कई के कारक हैं। महामारी के दौरान बिटकॉइन की बढ़ती हुई स्वीकृति भी इसका एक कारण है।

  1. वैश्विक स्तर पर, पेपाल (PayPal) जैसे बड़े भुगतान फर्म और भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक जैसे भारतीय ऋणदाताओं ने अपने कुछ फैसलों में क्रिप्टोकरेंसी को वैधता प्रदान की है।
  2. भारत में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) संबंधित लेनदेन के लिए बैंकों को अपनी प्रणाली का उपयोग करने से मना करने का आदेश दिया गया था जिसके बाद वर्ष 2018 में कई एक्सचेंजों के खातों को वित्तीय संस्थानों द्वारा फ्रीज कर दिया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मार्च में रिज़र्व बैंक के इस आदेश के खिलाफ फैसला सुनाया।
  3. बिटकॉइन की कीमतों में हालिया वृद्धि सबसे बड़ा कारक, कुछ पेंशन फंड और बीमा फंडों को अपने पोर्टफोलियो का एक छोटा अंश बिटकॉइन में निवेश करने की अनुमति दिया जाना रहा है।

बिटकॉइन का विश्व में विनियमन

विश्व के कई नियामकों द्वारा बिटकॉइन में ट्रेडिंग के खिलाफ चेतावनी दी जा रही है, और कुछ नियामक इसका समर्थन भी कर रहे हैं। वर्ष 2017 में, जापान ने बिटकॉइन को कानूनी मुद्रा के रूप में स्वीकार किया और यहां तक ​​कि क्रिप्टोकरेंसी में काम करने वाले एक्सचेंजों को आधिकारिक तौर पर मान्यता प्रदान की।

प्रीलिम्स लिंक:

  1. विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी
  2. विभिन्न देशों द्वारा शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी
  3. ब्लॉकचेन तकनीक क्या है?

मेंस लिंक:

क्रिप्टोकरेंसी क्या हैं? इनके विनियमन की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

 


प्रारम्भिक परीक्षा हेतु तथ्य


हल्दीबाड़ी-चिल्हाटी रेल लिंक:

(Haldibari-Chilahati Rail Link)

  • हल्दीबाड़ी-चिल्हाटी रेल लिंक को 17 दिसंबर से शुरु कर दिया गया है।
  • यह भारत और बांग्लादेश के बीच पांचवी रेल संपर्क सेवा बन गई है।
  • हल्दीबाड़ी – चिल्हाटी रेल संपर्क सेवा 1965 तक चालू थी। यह विभाजन के दौरान कोलकाता से सिलीगुड़ी तक ब्रॉड गेज मुख्य मार्ग का हिस्सा थी। हालाँकि, 1965 के युद्ध ने भारत और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के बीच सभी रेलवे संपर्क सेवाओं को बुरी तरह से काट दिया।
  • 1947 में विभाजन के बाद भी असम और उत्तरी बंगाल जाने वाली ट्रेनें तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान क्षेत्र से होकर गुजरती रहीं।
  • वर्तमान में, भारत और बांग्लादेश के बीच4 परिचालन रेल संपर्क लाइने हैं जिनमें पेट्रापोल (भारत) – बेनापोल (बांग्लादेश), गेदे (भारत) – दर्शन (बांग्लादेश), सिंघाबाद (भारत) -रोहनापुर (बांग्लादेश), राधिकापुर (भारत) –बिरोल (बांग्लादेश) है।

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योगासन को एक ‘खेल’ के रूप में औपचारिक मान्यता

केंद्र सरकार ने योगासन को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में बढ़ावा देने का फैसला किया है।

  • वर्ष 2019 में राष्ट्रीय योग और प्राकृतिक चिकित्सा संवर्धन एवं विकास बोर्ड द्वारा योगासन को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में मान्यता दिए जाने की सिफारिश की गयी थी।
  • योगासन प्रतियोगिताओं के लिए नियमों, विनियमों और सिलेबस युक्त एक संपूर्ण दस्तावेज तैयार किया गया है और तकनीकी समिति ने विस्तृत शोध के बाद आसनों की एक सूची तैयार की है।
  • निहितार्थ: योगासन खेल में राज्य और राष्ट्रीय और विश्व चैंपियनशिप 2021 में प्रस्तावित हैं। फरवरी 2021 में एक पायलट स्तर पर राष्ट्रीय व्यक्तिगत योगासन खेल चैम्पियनशिप (वर्चुअल मोड) प्रस्तावित किया गया है।

केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC)

(Central Electricity Regulatory Commission)

  • CERC, विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 76 के तहत एक सांविधिक निकाय है।
  • CERC को वर्ष 1998 में विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 के तहत गठित किया गया था।
  • केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग का उद्देश्य थोक बिजली बाजारों में प्रतिस्पर्धा, दक्षता और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
  • CERC के प्रमुख कार्य आपूर्ति गुणवत्ता में सुधार करना, निवेश को बढ़ावा देना और मांग आपूर्ति की खाई को पाटने के लिए संस्थागत बाधाओं को हटाने हेतु सरकार को सलाह देना और इस प्रकार उपभोक्ताओं के हितों को बढ़ावा देना है।

एशिया-प्रशांत प्रसारण संघ (ABU)

(Asia-Pacific Broadcasting Union)

  • यह एक गैर-लाभकारी, गैर-सरकारी, गैर-राजनीतिक, प्रसारण संगठनों का एक पेशेवर संघ है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रसारण-विकास में सहायता करता है।
  • इसकी स्थापना 1964 में की गयी थी और इसका सचिवालय कुआलालंपुर, मलेशिया में है। इसके चार महाद्वीपों के 76 देशों में 272 से अधिक सदस्य है और यह विश्व में सबसे बड़ा प्रसारण संघ है।
  • ABU वर्ल्ड ब्रॉडकास्टर्स यूनियन का सदस्य भी है।

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